Author: Manisha Rana

Uttarakhand: रेलवे में होगी पेट्रोलियम बिजली सप्लाई, सोनप्रयाग से धाम तक 33 केवी लाइन को मिली मंजूरी

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उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (यूईआरसी) ने केदारनाथ धाम में विद्युत व्यवस्था को सुदृढ़ और निर्बाध बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। आयोग ने सोनप्रयाग से केदारनाथ धाम तक मौजूदा क्षतिग्रस्त 11 केवी भूमिगत लाइन को 33 केवी डबल सर्किट ओवरहेड लाइन में बदलने के प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है।

इस पूरी परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 11.12 करोड़ रुपये है, जिसे यूपीसीएल के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने पहले ही मंजूरी दे दी है। प्रोजेक्ट के लिए 70 प्रतिशत राशि ऋण (आरईसी लिमिटेड से) और 30 प्रतिशत राशि राज्य सरकार की इक्विटी के माध्यम से जुटाई जाएगी। सोनप्रयाग से केदारनाथ धाम तक लगभग 10.40 किलोमीटर लंबी भूमिगत लाइन को ओवरहेड लाटिस टॉवर लाइन में बदला जाएगा।
यह अपग्रेडेशन केवल अस्थायी नहीं बल्कि स्थायी प्रकृति का है, जो केदारनाथ धाम में प्रस्तावित 33/11 केवी सब-स्टेशन और आगामी रोपवे प्रोजेक्ट की बिजली जरूरतों को पूरा करेगा। यूईआरसी ने बिना पूर्व अनुमति के टेंडर प्रक्रिया और कार्य शुरू करने पर यूपीसीएल को कड़ी चेतावनी दी है लेकिन केदारनाथ यात्रा की महत्ता को देखते हुए इस प्रोजेक्ट को पोस्ट-फैक्टो (कार्योत्तर) मंजूरी प्रदान की है। इसके साथ ही आयोग ने सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के नियमों (जैसे 250 मीटर की स्पैन सीमा) का कड़ाई से पालन करने और सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

Uttarakhand: देहरादून और बागेश्वर में आज भी बारिश का ऑरेंज अलर्ट, 124 सड़क बंद, खतरे के निशान पर नदियां.

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उत्तराखंड के अधिकतर जिलों में बुधवार को भी तेज दौर की बारिश होने की संभावना है। मौसम विज्ञान केंद्र ने देहरादून और बागेश्वर जिले के कुछ इलाकों में तेज गर्जन, बिजली चमकने के साथ मूसलाधार बारिश होने का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा अन्य जिलों में भी तेज दौर की बारिश होने का अनुमान है।

केंद्र की ओर से पौड़ी, चमोली, चंपावत, टिहरी, हरिद्वार, पिथौरागढ़, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर जिले के कुछ इलाकों में तेज दौर की बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। आने वाले दिनों की बात करें तो 24 अगस्त तक प्रदेश भर में मौसम का मिजाज कुछ ऐसा ही रहेगा।

प्रदेश में 124 सड़क बंद-

प्रदेश में बारिश और भूस्खलन के चलते 124 सड़कें बंद हैं। इनमें सबसे अधिक 92 ग्रामीण मार्ग हैं। पिथौरागढ़ में 24, चमोली 20, नैनीताल में 18, बागेश्वर 11, देहरादून में 10, नई टिहरी में 10, पौड़ी में 10, उत्तरकाशी में 09, रुद्रप्रयाग में 08 व अल्मोड़ा में 04 मार्ग बंद हैं।

नदियों का जल स्तर खतरे के निशान के पास-

पहाड़ और मैदान में सोमवार रात से लगातार हुई बारिश से गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया। हरिद्वार में दोपहर 12 बजे भीमगोड़ा बैराज पर गंगा का जलस्तर बढ़कर चेतावनी स्तर को पार कर गया। गंगा 293.50 मीटर पर पहुंच गया, जो चेतावनी निशान 293 से आधा मीटर ऊपर और खतरे के निशान 294 मीटर से आधा मीटर कम रहा। वहीं, ऋषिकेश में भी गंगा नदी के जलस्तर में भी तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उत्तरकाशी में भागीरथी नदी, चमोली में अलकनंदा, नंदाकिनी और पिंडर नदी, पिथौरागढ़ जिले में काली, गोरी और सरयू नदी भी खतरे के स्तर के आसपास बह रही है।

 

विभिन्न शहरों से देहरादून आ रहीं पांच उड़ानें डायवर्ट-

खराब मौसम के कारण देहरादून एयरपोर्ट पर सुबह से लेकर शाम तक हवाई यातायात बुरी तरह प्रभावित रहा। विभिन्न शहरों से देहरादून आ रहीं पांच उड़ानों को चंडीगढ, अमृतसर और दिल्ली डायवर्ट करना पड़ा। वहीं, उड़ानों के देरी से एयरपोर्ट पहुंचने के कारण वापसी में भी देरी हुई। जिससे यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

सुबह 9:50 बजे दिल्ली से देहरादून आने वाली इंडिगो की फ्लाइट को चंडीगढ़ डायवर्ट कर दिया गया। वहीं, 9:55 बजे मुंबई से आने वाली एयर इंडिया की फ्लाइट को अमृतसर डायवर्ट कर दिया गया। जबकि 10:20 बजे दिल्ली से आने वाली एयर इंडिया की उड़ान को वापस दिल्ली के लिए डायवर्ट कर दिया गया।

इसी तरह 11 बजे मुंबई से देहरादून आने वाली इंडिगो की उड़ान को चंडीगढ़ के लिए डायवर्ट करना पड़ा। जबकि 12:50 बजे हैदराबाद से आने वाली फ्लाइट को चंडीगढ़ डायवर्ट कर दिया गया। इनमें से कुछ उड़ानें घंटों विलंब से डायवर्ट किए गए शहरों से वापस देहरादून पहुंचीं। सुबह के वक्त एयरपोर्ट पर विजिबिलिटी मात्र 800 मीटर रह गई थी। जिस कारण अधिकांश उड़ानें एयरपोर्ट से कुछ दूरी पर आसमान में ही चक्कर लगाने लगीं। स्थिति नहीं सुधरने पर इन उड़ानों को डायवर्ट कर दिया गया।

हाई अलर्ट: उत्तराखंड में 85 मार्ग बंद, मलबे में दबी कार, खतरे के निशान से ऊपर बह रहीं अलकनंदा-मंदाकिनी.

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प्रदेश में लगातार हो रही वर्षा और आगामी मौसम चेतावनियों के कारण मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन से बात की। उन्होंने विभिन्न जिलों की स्थिति की जानकारी प्राप्त की। सीएम ने सभी आपदा प्रबंधन व राहत एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने संभावित आपदा से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एजेंसियों को पूरी सतर्कता से कार्य करने को कहा। संवेदनशील क्षेत्रों की निरंतर निगरानी का निर्देश दिया। नदी-नालों के जलस्तर पर सतत दृष्टि रखने को भी कहा गया। आवश्यकता पड़ने पर लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए। सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने बताया कि भारत मौसम विज्ञान विभाग ने अलर्ट जारी किया है।

गुरुवार के लिए देहरादून, चमोली और बागेश्वर जिलों में ऑरेंज अलर्ट है। राज्य के शेष जनपदों में येलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने कुछ स्थानों पर तेज वर्षा, आकाशीय बिजली और तेज हवाओं की संभावना जताई है। सभी संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र प्रदेशभर की स्थिति पर लगातार निगरानी रख रहा है।

 

राज्य में 85 मार्ग बंद-

प्रदेश में भूस्खलन के चलते 85 मार्ग बंद है। इसमें अल्मोड़ा दो, बागेश्वर 10, चमोली 20, देहरादून सात, नैनीताल में आठ मार्ग बंद है। पौड़ी पांच, पिथौरागढ़ 13, रुद्रप्रयाग छह, टिहरी आठ और उत्तरकाशी में छह मार्ग बंद है।

अगस्त्यमुनि: भूस्खलन से फिर बंद हुआ विजयनगर-तैला मार्ग-

लगातार बारिश के बीच बृहस्पतिवार सुबह विजयनगर-तैला मोटर मार्ग एक बार फिर भूस्खलन की चपेट में आ गया। पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और बोल्डर आने से मार्ग पर यातायात बाधित हो गया है।
विजयनगर-तैला मोटर मार्ग 80 से अधिक गांवों का मुख्य संपर्क मार्ग है। मानसून के दौरान इस मार्ग का शुरुआती हिस्सा लगातार भूस्खलन और भूधंसाव से प्रभावित हो रहा है, जिससे सड़क बार-बार बंद हो रही है।

खतरे के निशान से ऊपर बह रहीं अलकनंदा और मंदाकिनी-

रुद्रप्रयाग जिले में बुधवार रात से जारी बारिश के बाद अलकनंदा और मंदाकिनी नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार बृहस्पतिवार सुबह अलकनंदा का जलस्तर 627.80 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 627.00 मीटर है। वहीं मंदाकिनी का जलस्तर 626.60 मीटर रहा, जबकि इसका खतरे का निशान 626.00 मीटर है। पिछले 24 घंटे में ऊखीमठ में 53.30 मिमी, जखोली में 59.00 मिमी और रुद्रप्रयाग में 16.00 मिमी वर्षा दर्ज की गई। नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद नगर पालिका और नगर पंचायतों की ओर से लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों को नदी तटों से दूर रहने और अनावश्यक रूप से नदी के समीप नहीं जाने की अपील की जा रही है।

बड़कोट:पत्थरों की चपेट में आने से बाल-बाल बचे दो कांवड़ यात्री- 

यमुनोत्री हाईवे पर सिलाई बैंड के समीप बुधवार को बड़ा हादसा होने से बच गया। यमुनोत्री धाम से लौट रहे उत्तर प्रदेश के दो कांवड़ यात्री अचानक पहाड़ी से गिरे चट्टानी मलबे और पत्थरों की चपेट में आने से बाल-बाल बचे। जान बचाने के लिए दोनों यात्रियों को अपनी बाइक मौके पर छोड़कर भागना पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ देर तक भूस्खलन जारी रहने के बाद स्थिति सामान्य हुई जिसके बाद सिलाई बैंड से यमुनोत्री की ओर फंसे लोग सावधानी के साथ बड़कोट की ओर रवाना हुए। सामाजिक कार्यकर्ता महावीर पंवार ने बताया कि सिलाई बैंड सहित अन्य संवेदनशील स्थानों पर लाइट की व्यवस्था करनी चाहिए। इधर एनएच के ईई मनोज रावत ने बताया कि संभवत: जिला प्रशासन और विद्युत विभाग के बीच संवेदनशील प्वाइंटों पर लाइटों को लेकर बातचीत चल रही है।

Uttarakhand: सिलक्यारा टनल में हुआ हादसा, पत्थर की चपेट में आकर मजदूर की मौत; कंपनी प्रबंधन पर उठे सवाल.

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सिलक्यारा टनल में काम करते समय एक मजदूर की पत्थर की चपेट में आने से मौत हो गई। यह दुखद घटना 15 जुलाई की मध्य रात्रि 12:20 बजे हुई। मजदूर को गंभीर चोटें आई थीं, जिसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया।

चिन्यालीसौड़ स्थित सिलक्यारा टनल में निर्माण कार्य चल रहा था। इसी दौरान एक मजदूर अचानक पत्थर की चपेट में आ गया। उसे सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आईं। कंपनी प्रबंधक ने तुरंत घायल मजदूर को सीएचसी नौगांव अस्पताल पहुंचाया।

अस्पताल में उसकी स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई थी। डॉक्टरों ने उसे बचाने का हर संभव प्रयास किया। हालांकि, उसकी गंभीर चोटों के कारण डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मृतक मजदूर झारखंड का निवासी था।

यह हादसा 15 जुलाई 2026 की देर रात करीब 12:20 बजे हुआ। मजदूर टनल के भीतर अपने काम में लगा हुआ था। अचानक ऊपर से एक बड़ा पत्थर गिरा और वह उसकी चपेट में आ गया। इस अप्रत्याशित घटना से टनल में मौजूद अन्य मजदूर भी सहम गए।

हादसे के तुरंत बाद कंपनी के कर्मचारियों ने घायल मजदूर को अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की। सीएचसी नौगांव में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। कंपनी प्रबंधन ने तत्काल मृत मजदूर के परिजनों को घटना की सूचना दी है। अब आगे की आवश्यक कानूनी और सहायता संबंधी कार्रवाई की जाएगी।

Uttarakhand: भूमि खरीदने के 7 दिन में पूरी होगी गैर कृषि कराने की प्रक्रिया, ऑनलाइन होगा आवेदन.

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प्रदेश में उद्योग स्थापना के लिए भूमि क्रय की प्रक्रिया पूरी होने के बाद निवेशकों को भूमि को गैर कृषि कराने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। वह वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे, एक सप्ताह के भीतर यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।

Uttarakhand: राज्य खाद्य व अंत्योदय राशन कार्ड की अधिकतम आय सीमा में होगा बदलाव, राशन वितरण प्रणाली होगी ऑनलाइन

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प्रदेश में एपीएल (राज्य खाद्य योजना) और अंत्योदय राशन कार्ड की अधिकतम आय सीमा जल्द संशोधित की जाएगी। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री रेखा आर्या ने अधिकारियों को इसके निर्देश दिए। उन्होंने कहा, राशन विक्रेताओं का 39 करोड़ रुपये का बकाया लाभांश एक सप्ताह में जारी कर दिया जाएगा।

Uttarakhand: राज्य कर विभाग के 72 उपनलकर्मियों को बड़ा झटका, SC जाएगी सरकार, हुई उच्च स्तरीय बैठक

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राज्य कर विभाग में तैनात उपनलकर्मियों के नियमितीकरण और सेवा संबंधी लाभों के मामले में राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट जाएगी। सरकार हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुज्ञा याचिका (एसएलपी) दायर करेगी। इसके लिए शासन ने तत्काल राज्य कर विभाग को प्रस्ताव उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए हैं।

सरकार के लिए प्रशासनिक और वित्तीय संकट-
शासन स्तर पर की गई समीक्षा में विभाग में कार्यरत 96 कर्मियों को चार श्रेणियों में बांटा गया। इसमें सबसे बड़ा पेंच श्रेणी-3 के उन 72 कर्मियों को लेकर फंसा है, जिनकी सेवा में समय-समय पर कृत्रिम व्यवधान रहा है। बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि सैनिक कल्याण विभाग के शासनादेश के अनुसार, केवल उन्हीं उपनल कर्मियों को चरणबद्ध रूप से लाभ दिया जा सकता है जो कट-ऑफ डेट 12 नवंबर 2018 तक निरंतर (बिना किसी ब्रेक) नियोजित रहे हों। 

बैठक में यह बात उठी कि जिन राज्य कर विभाग के 72 कर्मियों की सेवा में कृत्रिम व्यवधान रहा है, उनके प्रत्यावेदनों पर सकारात्मक विचार करना सैनिक कल्याण विभाग की नीति और नियमों का उल्लंघन होगा। अगर ऐसा किया गया तो अन्य विभागों से भी ऐसी मांगें उठेंगी। इससे सरकार के लिए प्रशासनिक और वित्तीय संकट पैदा हो सकता है। लिहाजा तय किया गया कि राज्य कर के इन कर्मचारियों पर आए हाईकोर्ट के आदेशों पर सरकार सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर करेगी। इसके लिए राज्य कर विभाग से प्रस्ताव मांगा गया है।

Uttarakhand: कैबिनेट का बड़ा फैसला; मदरसों को मान्यता व पंजीकरण के लिए देना होगा शुल्क, नियमावली को मंजूरी.

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धामी कैबिनेट ने अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों की मान्यता नियमावली 2026 को मंजूरी दे दी। नियमावली में राज्य में मदरसों की मान्यता, नवीनीकरण के लिए शुल्क निर्धारित किया जाएगा।

यह नियमावली उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक 2025 की धारा 19 में राज्य सरकार को नियम बनाने की शक्ति के तहत बनाई गई है। इसमें मान्यता और नवीनीकरण की प्रक्रिया, आवश्यक पात्रता, दस्तावेजों और अनुपालन संबंधी प्रावधानों को परिभाषित किया गया है। मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन और पारसी समुदायों को अल्पसंख्यक समुदाय के रूप में मान्यता दी गई है। नियमावली के अनुसार अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों को मान्यता के लिए निर्धारित पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना होगा।

इसके लिए आवश्यक दस्तावेज और शुल्क जमा करना अनिवार्य होगा। मान्यता या नवीनीकरण की वैधता तीन शैक्षणिक वर्षों के लिए होगी। नवीनीकरण के लिए आवेदन अवधि समाप्त होने से कम से कम तीन महीने पहले करना होगा।
मान्यता के लिए आवेदन और पात्रता मानदंड-
अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों को मान्यता दिए जाने के लिए आवेदन प्रक्रिया के दौरान संस्थानों की पात्रता, अल्पसंख्यक हितों की पूर्ति, भूमि स्वामित्व, वित्तीय स्थिति और स्टाफ की योग्यता का परीक्षण किया जाएगा। मान्यता के लिए पंजीकरण प्रमाणपत्र, प्रबंधन समिति की सूची, भूमि स्वामित्व प्रमाण, बैंक विवरण और स्टाफ की शैक्षणिक योग्यता जैसे दस्तावेज चाहिए। संस्थान के अल्पसंख्यक स्वरूप और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने संबंधी घोषणा भी देनी होगी। वहीं, इसके नवीनीकरण के लिए वित्तीय विवरण, बैंक स्टेटमेंट, आयकर रिटर्न और स्टाफ व छात्र नामांकन की जानकारी प्रस्तुत करनी होगी। अल्पसंख्यक छात्रों के नामांकन संबंधी घोषणा भी अनिवार्य है।अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण कर सकेगा मान्यता रद्द-

उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण (यूएसएएमई) मान्यता के आवेदन की समीक्षा करेगा और आवश्यकता पड़ने पर निरीक्षण भी कर सकेगा। सभी मापदंड पूरे होने पर मान्यता प्रदान की जाएगी, मापदंड पूरे न होने पर कारण सहित आवेदन रद्द किया जा सकेगा। नियमों के उल्लंघन या निधियों के दुरुपयोग की स्थिति में, संबंधित संस्थान को सुनवाई का अवसर प्रदान किया जाएगा। सुनवाई के बाद उसकी मान्यता रद्द की जा सकेगी।

Uttarakhand: नया रिकॉर्ड बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही चारधाम यात्रा, अब तक 12.60 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन.

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चारधाम यात्रा नया रिकॉर्ड बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। यात्रा में अब तक 12.60 लाख श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। बुधवार को चारों धामों में एक दिन में 80 हजार श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। चारधाम यात्रा शुरू हुए 25 दिन हो चुके हैं। केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री धाम में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं का आंकड़ा 12.60 लाख पार कर चुका है। केदारनाथ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है।

22 दिनों में ही 5.23 लाख से अधिक तीर्थयात्री दर्शन कर चुके हैं। उच्च हिमालयी क्षेत्र की यात्रा होने से प्रदेश सरकार यहां मौसम के मिजाज पर भी पूरी नजर रखे हुए है। मुख्यमंत्री धामी ने शीर्ष अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मौसम प्रतिकूल होने पर हर एक श्रद्धालु की सुरक्षा और सुविधा का पूरा ध्यान रखा जाए। मुख्यमंत्री धामी ने कहा, चारधाम यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

भीड़ नियंत्रण प्रणाली को प्रभावी बनाया गया
श्रद्धालु सुगमता से दर्शन कर सकें, इसके लिए स्लॉट प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण प्रणाली को प्रभावी बनाया गया है। रियल टाइम डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम का उपयोग किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत केदारनाथ में पुनर्निर्माण कार्य होने के बाद धाम दिव्य और भव्य रूप में नजर आ रहा है।

पैदल यात्रा मार्ग को बेहतर बनाए जाने से श्रद्धालुओं की राह आसान हुई है। सुरक्षित और व्यवस्थित यात्रा के लिए सरकार ने हरसंभव कदम उठाए हैं। मौसम पर नजर रखने के लिए विशेष निगरानी तंत्र बनाया गया है। हर परिस्थिति से निपटने के लिए सरकार तैयार है।

Chardham Yatra: चरम पर श्रद्धालुओं का उत्साह; 23 दिन में 11 लाख के पार पहुंचा दर्शन करने वालों का आंकड़ा

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चारधाम यात्रा में 23 दिन के भीतर दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं का आंकड़ा 11 लाख पार हो गया है। केदारनाथ व बदरीनाथ धाम में प्रतिदिन औसतन 15 से 20 हजार श्रद्धालु दर्शन कर रहे हैं। धामों में मौसम की चुनौतियों के बाद भी श्रद्धालुओं के कदम नहीं थम रहे हैं।

चारधाम यात्रा का आगाज 19 अप्रैल से गंगोत्री व यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने से हुआ था। 22 अप्रैल को केदारनाथ व 23 अप्रैल को बदरीनाथ धाम के कपाट खुले। यात्रा शुरू होते ही इस बार धामों में श्रद्धालुओं को खराब मौसम की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। बारिश से धामों में काफी ठंड है। इसके बावजूद बदरीनाथ व केदारनाथ धाम में आस्था का सैलाब उमड़ रहा है।

पर्यटन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार चारधाम यात्रा में अब तक 11 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। इसमें केदारनाथ धाम में 4.50 लाख से अधिक, बदरीनाथ धाम में 2.70 लाख, गंगोत्री में 1.65 लाख, यमुनोत्री में 1.69 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। इसके अलावा यात्रा पंजीकरण की संख्या 32.75 लाख पहुंच चुकी है।