Category Archive : देहरादून

Uttarakhand: भूमि खरीदने के 7 दिन में पूरी होगी गैर कृषि कराने की प्रक्रिया, ऑनलाइन होगा आवेदन.

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प्रदेश में उद्योग स्थापना के लिए भूमि क्रय की प्रक्रिया पूरी होने के बाद निवेशकों को भूमि को गैर कृषि कराने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। वह वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे, एक सप्ताह के भीतर यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।

Uttarakhand: राज्य खाद्य व अंत्योदय राशन कार्ड की अधिकतम आय सीमा में होगा बदलाव, राशन वितरण प्रणाली होगी ऑनलाइन

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प्रदेश में एपीएल (राज्य खाद्य योजना) और अंत्योदय राशन कार्ड की अधिकतम आय सीमा जल्द संशोधित की जाएगी। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री रेखा आर्या ने अधिकारियों को इसके निर्देश दिए। उन्होंने कहा, राशन विक्रेताओं का 39 करोड़ रुपये का बकाया लाभांश एक सप्ताह में जारी कर दिया जाएगा।

Uttarakhand: राज्य कर विभाग के 72 उपनलकर्मियों को बड़ा झटका, SC जाएगी सरकार, हुई उच्च स्तरीय बैठक

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राज्य कर विभाग में तैनात उपनलकर्मियों के नियमितीकरण और सेवा संबंधी लाभों के मामले में राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट जाएगी। सरकार हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुज्ञा याचिका (एसएलपी) दायर करेगी। इसके लिए शासन ने तत्काल राज्य कर विभाग को प्रस्ताव उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए हैं।

सरकार के लिए प्रशासनिक और वित्तीय संकट-
शासन स्तर पर की गई समीक्षा में विभाग में कार्यरत 96 कर्मियों को चार श्रेणियों में बांटा गया। इसमें सबसे बड़ा पेंच श्रेणी-3 के उन 72 कर्मियों को लेकर फंसा है, जिनकी सेवा में समय-समय पर कृत्रिम व्यवधान रहा है। बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि सैनिक कल्याण विभाग के शासनादेश के अनुसार, केवल उन्हीं उपनल कर्मियों को चरणबद्ध रूप से लाभ दिया जा सकता है जो कट-ऑफ डेट 12 नवंबर 2018 तक निरंतर (बिना किसी ब्रेक) नियोजित रहे हों। 

बैठक में यह बात उठी कि जिन राज्य कर विभाग के 72 कर्मियों की सेवा में कृत्रिम व्यवधान रहा है, उनके प्रत्यावेदनों पर सकारात्मक विचार करना सैनिक कल्याण विभाग की नीति और नियमों का उल्लंघन होगा। अगर ऐसा किया गया तो अन्य विभागों से भी ऐसी मांगें उठेंगी। इससे सरकार के लिए प्रशासनिक और वित्तीय संकट पैदा हो सकता है। लिहाजा तय किया गया कि राज्य कर के इन कर्मचारियों पर आए हाईकोर्ट के आदेशों पर सरकार सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर करेगी। इसके लिए राज्य कर विभाग से प्रस्ताव मांगा गया है।

Uttarakhand: कैबिनेट का बड़ा फैसला; मदरसों को मान्यता व पंजीकरण के लिए देना होगा शुल्क, नियमावली को मंजूरी.

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धामी कैबिनेट ने अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों की मान्यता नियमावली 2026 को मंजूरी दे दी। नियमावली में राज्य में मदरसों की मान्यता, नवीनीकरण के लिए शुल्क निर्धारित किया जाएगा।

यह नियमावली उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक 2025 की धारा 19 में राज्य सरकार को नियम बनाने की शक्ति के तहत बनाई गई है। इसमें मान्यता और नवीनीकरण की प्रक्रिया, आवश्यक पात्रता, दस्तावेजों और अनुपालन संबंधी प्रावधानों को परिभाषित किया गया है। मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन और पारसी समुदायों को अल्पसंख्यक समुदाय के रूप में मान्यता दी गई है। नियमावली के अनुसार अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों को मान्यता के लिए निर्धारित पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना होगा।

इसके लिए आवश्यक दस्तावेज और शुल्क जमा करना अनिवार्य होगा। मान्यता या नवीनीकरण की वैधता तीन शैक्षणिक वर्षों के लिए होगी। नवीनीकरण के लिए आवेदन अवधि समाप्त होने से कम से कम तीन महीने पहले करना होगा।
मान्यता के लिए आवेदन और पात्रता मानदंड-
अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों को मान्यता दिए जाने के लिए आवेदन प्रक्रिया के दौरान संस्थानों की पात्रता, अल्पसंख्यक हितों की पूर्ति, भूमि स्वामित्व, वित्तीय स्थिति और स्टाफ की योग्यता का परीक्षण किया जाएगा। मान्यता के लिए पंजीकरण प्रमाणपत्र, प्रबंधन समिति की सूची, भूमि स्वामित्व प्रमाण, बैंक विवरण और स्टाफ की शैक्षणिक योग्यता जैसे दस्तावेज चाहिए। संस्थान के अल्पसंख्यक स्वरूप और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने संबंधी घोषणा भी देनी होगी। वहीं, इसके नवीनीकरण के लिए वित्तीय विवरण, बैंक स्टेटमेंट, आयकर रिटर्न और स्टाफ व छात्र नामांकन की जानकारी प्रस्तुत करनी होगी। अल्पसंख्यक छात्रों के नामांकन संबंधी घोषणा भी अनिवार्य है।अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण कर सकेगा मान्यता रद्द-

उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण (यूएसएएमई) मान्यता के आवेदन की समीक्षा करेगा और आवश्यकता पड़ने पर निरीक्षण भी कर सकेगा। सभी मापदंड पूरे होने पर मान्यता प्रदान की जाएगी, मापदंड पूरे न होने पर कारण सहित आवेदन रद्द किया जा सकेगा। नियमों के उल्लंघन या निधियों के दुरुपयोग की स्थिति में, संबंधित संस्थान को सुनवाई का अवसर प्रदान किया जाएगा। सुनवाई के बाद उसकी मान्यता रद्द की जा सकेगी।

Uttarakhand: 1.34 लाख बुजुर्ग महिलाओं को चाहिए सरकार का सहारा; सर्वे में चौंकाने वाले आंकड़े आए सामने.

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प्रदेश में बुजुर्ग महिलाओं की स्थिति को लेकर महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग की ओर से कराए गए सर्वे में चौंकाने वाले तस्वीर सामने आई है। सर्वे रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश की एक लाख 34 हजार से अधिक बुजुर्ग महिलाओं को सरकार की विभिन्न प्रकार की सहायता की जरूरत है।

ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में बुजुर्ग महिलाओं की प्रमुख आवश्यकताओं को लेकर कराए गए सर्वे में बताया गया है कि 4330 महिलाओं को उम्र के इस पड़ाव में सुरक्षा की आवश्यकता है। जबकि सबसे अधिक 61258 महिलाओं को आर्थिक सहायता चाहिए।

इसके अलावा 27125 को पोषाहार, 11960 को खाद्य, 23643 को स्वास्थ्य एवं 6474 को आवास की जरूरत है। महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग का कहना है कि सर्वे के आधार पर जरूरतमंद बुजुर्ग महिलाओं को योजनाओं से जोड़कर उन्हें सुरक्षा, स्वास्थ्य के लिए जरूरी दवा, आर्थिक सहायता, पोषाहार और आवास उपलब्ध कराए जाने की दिशा में काम किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस सर्वे के जरिए बुजुर्ग महिलाओं की वास्तविक जरूरतों की पहचान कर उन्हें बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी। जिससे उनका जीवन स्तर सुधरेगा।

 

33722 बुजुर्ग महिलाएं नहीं ले रहीं कोई पेंशन
प्रदेश की 33722 बुजुर्ग महिलाएं किसी भी पेंशन का लाभ नहीं ले रही हैं। रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि 456 बुजुर्ग महिलाओं को परित्यक्ता, 71397 को वृद्धा, 1339 को दिव्यांग और 27896 को विधवा पेंशन मिल रही है।

प्रदेश में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से यह सर्वे कराया गया था, इसके आधार पर बुजुर्ग महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार के लिए सरकार की ओर से आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
– रेखा आर्या, मंत्री महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग

उत्तराखंड: सौगात व स्वागत के बीच सफलता का मंत्र देकर जाएंगे पीएम मोदी, भाजपा के लिए हैट्रिक आसान बनाना मकसद.

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उत्तराखंड में लगातार तीसरी सरकार का रिकॉर्ड कायम बनाने के लिए भाजपा की तैयारियां नए मुकाम की ओर बढ़ रही हैं। गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चुनावी माहौल को यहां जो ऊंचाईयां दी हैं, उन्हें बुलंदी तक पहुंचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सफलता का मंत्र देकर जाएंगे। भाजपा ने उनके स्वागत की भव्य तैयारी की है।

पीएम मोदी की 14 अप्रैल को हेलिकॉप्टर से गणेशपुर स्थित हेलीपैड़ पर पहुंचेंगे। वहां से एशिया के सबसे लंबे एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर से होते हुए उनका काफिला डाटकाली मंदिर तक पहुंचेगा। वह उत्तराखंड को यहां इस एक्सप्रेस वे समेत करोड़ों की सौगात की सौगात देंगे तो भाजपा संगठन ने भी उनके स्वागत की बड़ी तैयारी की है।

डाटकाली मंदिर से लेकर कैंट स्थित मंहिद्रा ग्राउंड तक भाजपा के 30,000 कार्यकर्ता सड़क के दोनों ओर पीएम मोदी पर पुष्पवर्षा कर स्वागत करेंगे। इसके लिए देहरादून, सहारनपुर, हरिद्वार व अन्य क्षेत्रों से कई टन गुलाब की पंखुड़ियों का इंतजाम किया गया है।

भाजपा के लिए हैट्रिक बनाना आसान हो-

दावा है कि पीएम मोदी की रैली में भी 30,000 से अधिक कार्यकर्ता शामिल होंगे। भाजपा ने पांच संगठनात्मक जिलों देहरादून ग्रामीण, देहरादून, ऋषिकेश, हरिद्वार और रुड़की के अलावा टिहरी के नरेंद्रनगर व उत्तरकाशी से भी कार्यकर्ताओं की टीमें रैली के लिए लगाए हैं। पीएम मोदी रैली के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से बातचीत भी करेंगे। मकसद होगा कि चुनावी माहौल को नई बुलंदियों तक पहुंचाएं, जिससे भाजपा के लिए हैट्रिक बनाना आसान हो। इधर, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बृहस्पतिवार को पीएम मोदी की रैली की तैयारियों की समीक्षा बैठक लेंगे। इसमें संगठन के प्रदेश अध्यक्ष समेत सभी पदाधिकारी शामिल होंगे।

 

भव्य होगा कार्यक्रम-

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि पीएम मोदी की रैली का कार्यक्रम भव्य होगा। उन्होंने बताया कि सीएम धामी की अध्यक्षता में बैठक होगी। वहीं, पीएम पर पुष्पवर्षा की जाएगी। वह शहर में डाटकाली मंदिर से गढ़ी कैंट स्थित महिंद्रा ग्राउंड तक कार से पहुंचेंगे। बताया कि इस दौरान वह दून-दिल्ली एक्सप्रेसवे का लोकार्पण करेंगे।

Uttarakhand: धामी सरकार का 4 साल का कार्यकाल, ऐतिहासिक फैसलों से प्रदेश को मिली पहचान, विकास को नई दिशा.

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकार ने चार साल के कार्यकाल में कई ऐसे ऐतिहासिक व सशक्त फैसले लिए हैं। इससे राष्ट्रीय स्तर पर भी राज्य को पहचान मिली है। इसके अलावा अवस्थापना विकास से राज्य के विकास को नई दिशा दी है।

समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लागू करना धामी सरकार की एक बड़ी उपलब्धि है। इसको लागू करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना है। राज्य में सशक्त भू-कानून, धर्मांतरण विरोधी कानून, दंगारोधी कानून, नकलरोधी कानून के अलावा मदरसा बोर्ड को समाप्त करने का फैसला लिया है। साथ ही सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की गई।

सरकार ने युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया। इसका परिणाम यह रहा कि बीते चार वर्षों में 30 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां मिलीं, जिससे पारदर्शिता और भरोसा दोनों बढ़े हैं। शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव करते हुए मदरसा बोर्ड को समाप्त कर राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया गया। अब यही प्राधिकरण पाठ्यक्रम और शिक्षा व्यवस्था को नियंत्रित करेगा। राज्य में 12 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है।

 

महिलाओं के सशक्तीकरण पर विशेष फोकस-

महिलाओं के सशक्तीकरण को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने कई अहम फैसले लिए हैं। सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण लागू किया गया। सहकारी प्रबंध समितियों में 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया गया है। प्रदेश में अब तक 2.54 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का संकेत है। स्वयं सहायता समूहों को पांच लाख तक का बिना ब्याज ऋण देकर महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना की शुरुआत कर महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक रूप से आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया है।

Uttarakhand: पहली बार प्रवासी पंचायतों की रूपरेखा तैयार, होगा संवाद, 24 अप्रैल को टिहरी से की जाएगी शुरूआत

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राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों व दूसरे राज्यों में रह रहे प्रवासियों को वापस अपने पैतृक गांव लौटने के लिए उत्तराखंड पलायन निवारण आयोग ने प्रवासी पंचायतों की रूपरेखा तैयार कर ली है। पहली बार प्रदेश के हर जिले में प्रवासी पंचायतें होंगी। इसकी शुरूआत 24 अप्रैल को टिहरी जिले से की जाएगी।

 

उत्तराखंड पलायन निवारण आयोग की सर्वे के अनुसार 6282 प्रवासी अपने गांव लौटे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हर जिले में प्रवासी पंचायत कराने के निर्देश दिए थे। पलायन आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. एसएस नेगी की अध्यक्षता में पौड़ी में हुई बैठक में प्रवासी पंचायतों की रूपरेखा तैयार की है। प्रवासी पंचायतों में राज्य के दूसरे जिलों या बाहरी राज्यों में रहने वाले उन प्रवासियों को आमंत्रित किया जाएगा, जो अपने गांव लौटने के इच्छुक हैं।

प्रवासी स्वरोजगार क्षेत्र में अनुभवों को साझा करेंगे-
कोविड काल में अपने गांव लौटे प्रवासियों ने अनुभव के आधार पर स्वरोजगार को अपनाया है। कई प्रवासी कृषि, बागवानी, मसाले की खेती, सगंध फसलें, मधुमक्खी पालन, पुष्प उत्पादन, मशरूम उत्पादन के अलावा होमस्टे, होटल, रेस्टोरेंट, पशुपालन, डेयरी में अच्छा काम कर रहे हैं। ऐसे प्रवासी स्वरोजगार क्षेत्र में अनुभवों को साझा करेंगे।

प्रवासी पंचायतों की रूपरेखा तय हो गई है। नवंबर तक प्रदेश के सभी जिलों में प्रवासी पंचायतों का आयोजन कर लिया जाएगा। जिला स्तर पर विभागीय अधिकारियों की ओर से सरकार की स्वरोजगार योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। -डॉ. एसएस नेगी, उपाध्यक्ष, उत्तराखंड पलायन निवारण आयोग

Uttarakhand: 58 जगह मारे गए छापे, अवैध भंडारण पर 74 सिलिंडर हुए जब्त, विभाग ने अनियमितताओं पर वसूला अर्थदंड.

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खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता विभाग ने राज्य में एलपीजी एवं ईंधन की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था के दृष्टिगत राज्य में 280 जगहों का निरीक्षण किया। 58 जगहों पर छापा मारा। इस दौरान 74 सिलिंडर जब्त किए गए और चार प्राथमिकी दर्ज की गई हैं।

आयुक्त खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता रुचि मोहन रयाल ने बताया, प्रदेश में 10 से 12 मार्च तक विभिन्न जिलों में निरीक्षण किया गया। कार्रवाई के दौरान एक कांटा (वजन माप उपकरण) और दो रिफिलिंग किट भी जब्त की गई हैं। विभाग ने अनियमितताओं पर 4600 का अर्थदंड भी वसूला है।

आयुक्त ने कहा कि राज्य सरकार उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर गैस एवं ईंधन उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी प्रकार की कालाबाजारी, जमाखोरी या अवैध रिफिलिंग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

Uttarakhand: अब शिक्षकों के खाली पदों पर भर्ती से पहले वित्त और कार्मिक विभाग की सहमति जरूरी, आदेश हुए जारी.

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सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के खाली पदों पर भर्ती करने से पहले अब वित्त और कार्मिक विभाग की सहमति लेना अनिवार्य होगा। शासन ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। आदेश में कहा गया है कि छात्र-छात्राओं की संख्या में कमी की वजह से यह संभव है कि स्कूलों में शिक्षकों के पद जरूरत से अधिक हों। बजट की समीक्षा बैठक में यह बात सामने आई है।

शासन ने शिक्षा महानिदेशक को जारी आदेश में कहा, पूर्व में राज्य सरकार के विभिन्न शासनादेशों के माध्यम से छात्र संख्या के आधार पर माध्यमिक और प्रांरभिक शिक्षा विभाग के तहत शिक्षकों के पद सृजित किए गए हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट की समीक्षा में संज्ञान में आया कि स्कूलों में छात्र-छात्राओं की संख्या में लगातार कमी की वजह से संभव है कि शिक्षकों के पद जरूरत से ज्यादा हो रहे हैं।

ऐसे में शिक्षकों की भर्ती से पहले वित्त और कार्मिक विभाग को भर्ती के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा। प्रस्ताव में यह बताया जाएगा कि वर्तमान में स्कूलों में शिक्षकों के स्वीकृत पद और छात्रों की संख्या कितनी है। प्रस्तावित भर्ती का औचित्य और वित्तीय व्ययभार का विवरण भी देना होगा। वहीं, इस मामले में अपर निदेशक शिक्षा महानिदेशालय पदमेंद्र सकलानी ने निदेशक माध्यमिक शिक्षा को पत्र लिखा है।

बंदी की कगार पर हैं तीन हजार से ज्यादा स्कूल-

प्रदेश के सरकारी स्कूलों में छात्र-छात्राओं की संख्या तेजी से घट रही है। यही वजह है कि तीन हजार से ज्यादा स्कूल बंदी की कगार पर हैं। इसमें छात्र-छात्राओं की संख्या दस या फिर इससे भी कम रह गई है।

 

शिक्षा विभाग में पहले शिक्षकों के 2600 पद खत्म कर दिए गए थे, अब कुछ अन्य पद समाप्त किए जाने की तैयारी है। यह सार्वजनिक शिक्षा को समाप्त करने की साजिश है। -डॉ सोहन माजिला, पूर्व प्रांतीय महामंत्री राजकीय शिक्षक संघ