Category Archive : ब्रेकिंग न्यूज

हर साल दो लाख से अधिक भारतीय छोड़ रहे हैं नागरिकता

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18 लाख से अधिक भारतीय नागरिकों ने वर्ष 2011 से 2023 तक 13 वर्षों में अपनी भारतीय नागरिकता छोड़कर अन्य देशों की नागरिकता प्राप्त की हैं। वर्ष 2022 तथा 2023 में तो यह दर प्रतिवर्ष दो लाख नागरिकों से भी अधिक हैं। यह खुलासा सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन (एडवोकेट) को विदेश मंत्रालय के जन सूचना अधिकारी द्वारा उपलब्ध करायी गयी सूचना से हुआ हैं।

काशीपुर निवासी सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन (एडवोकेट) ने विदेश मंत्रालय के जन सूचना अधिकारी से भारत की नागरिकता छोड़कर विदेशों की नागरिकता प्राप्त करने वालांे की संख्या की सूचना चाही थी। इसके उत्तर में विदेश मंत्रालय के जन सूचना अधिकारी/अवर सचिव तरूण कुमार ने अपने पत्रांक 551 से उत्तर उपलब्ध कराया है। जन सूचना अधिकारी ने राज्यसभा में कपिल सिब्बल तथा डा0 जोहन बिट्स के प्रश्नों के उत्तर में जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होने को लिखित करते हुये उसका इंटरनेट लिंक उपलब्ध कराया है।

नदीम द्वारा उक्त लिंक से सांसदों के प्रश्नों के उत्तर डाउनलोड करने पर वर्ष 2011 से 2023 तक भारत की नागरिकता छोड़ने वाले भारतीयों की संख्या प्रकाश में आयी है।

नदीम को उपलब्ध सूचना के अनुसार वर्ष 2022 में पिछले 13 वर्षों में सर्वाधिक 2,25,620 भारतीय नागरिकों ने अपनी भारतीय नागरिकता स्वेच्छा से छोड़ी है। दूसरे स्थान पर वर्ष 2023 में 2,16,219 भारतीय नागरिकों ने अपनी नागरिकता छोड़ी हैं। पिछले 13 वर्षों में सबसे कम नागरिकता छोड़ने वाले भारतीय नागरिकों की संख्या 85256 वर्ष 2020 में रही हैं।
वर्ष 2011 में 1,22,819, वर्ष 2012 में 120,923, वर्ष 2013 में 1,31,405, वर्ष 2014 में 1,29,328, वर्ष 2015 में 1,31,489, वर्ष 2016 में 1,41,603, वर्ष 2017 में 1,33049, वर्ष 2018 में 134561, वर्ष 2019 में 1,44017, वर्ष 2020 में 85256, वर्ष 2021 में 163370, वर्ष 2022 में 225620, वर्ष 2023 में 2,16,219 भारतीय नागरिकों ने स्वेच्छा से अपनी भारतीय नागरिकता त्याग दी है।

विदेश मंत्रालय द्वारा उपलब्ध करायी गयी सूचना के अनुसार भारतीय नागरिकता छोड़कर विश्व के 135 देशों की नागरिकता इन व्यक्तियों द्वारा प्राप्त की गयी है। जिन देशों की नागरिकता भारतीय नागरिकता छोड़कर भारतीयों द्वारा प्राप्त की गयी है उनमें जहां पड़ोसी देश, बांग्लादेश, म्यांमार, नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका शामिल है, वहीं विकसित माने जाने वाले देश यू के, यू.एस.एस. रूस, चीन, इटली, फ्रांस, जर्मनी व जापान तथा आर्थिक सम्पन्न वाले देशों में इराक, इरान, इटली, तुर्की, यमन, जम्बिया, कज़ाकश्तान, केनिया, मलेशिया, मालद्वीव, ओमान, कतर, सऊदी अरब, साउथ अफ्रीका, सुडान देश भी शामिल है।

 

कांग्रेस नेताओं की दरक चुके कुनबे को बढ़ाओ मिशन में जुटी उत्तराखण्ड कांग्रेस

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भाजपा व कांग्रेस ने 2027 के विधानसभा चुनाव की बिसात बिछानी शुरू कर दी है। मेल मुलाकातों का दौर जारी है।
इधऱ, हाशिए पर खड़े क्षेत्रीय दल उत्तराखण्ड क्रांति दल ने फील्ड मार्शल दिवाकर भट्ट के निधन के बाद श्रद्धांजलि यात्रा निकाल दी है।
इसके साथ ही पेपर लीक कांड में सीबीआई की बेरोजगार संघ के पूर्व अध्यक्ष बॉबी पंवार से नौ घण्टे की पूछताछ की कहानी भी आम जनता और सत्ता के गलियारों में सरगर्म है। कुल मिलाकर उत्तराखण्ड के विपक्षी दलों ने चुनावी कदम बढ़ाने शुरू कर दिए हैं।

हाल ही में कांग्रेस के दो बड़े नेता हरक सिंह व प्रीतम सिंह की पूर्व भाजपा विधायक राजकुमार ठुकराल व निर्दलीय विधायक संजय डोभाल से मुलाकात विशेष चर्चा में है।  ठुकराल उधमसिंहनगर और डोभाल सीमांत उत्तरकाशी जिले से ताल्लुक रखते हैं।

 राजकुमार ठुकराल और हरक सिंह

2022 में अपने कुछ चर्चित बयानों की वजह से राजकुमार ठुकराल भाजपा से निकाले भी गए। नगर निकाय चुनाव के समय ठुकराल की भाजपा में वापसी तो हुई लेकिन मुफीद स्थान नहीं मिला।

इस पीड़ा के साथ राजकुमार ठुकराल और हरक सिंह की मेल मुलाकात भविष्य में उलटफेर कर सकती है। दून में हरक सिंह के आवास पर हुई इस भेंट के बाद ठुकराल उत्साहित भी बताए जा रहे हैं। इस मुलाकात में हरक सिंह ने ठुकराल की हाथ की लकीरें भी बाँची। और कुछ व्यवहारिक हिदायतें भी दी।

इस बीच, कांग्रेस नेता प्रीतम सिंह ने निर्दलीय विधायक संजय डोभाल के साथ मुलाकात का एक चित्र सोशल मीडिया में वॉयरल किया है। डोभाल 2017 में कांग्रेस के टिकट पर  विधानसभा का चुनाव हार गए थे।लेकिन 2022 में टिकट नहीं मिलने पर यमुनोत्री विधानसभा से निर्दलीय लड़कर चुनाव जीत गए।

प्रीतम सिंह पुराने कांग्रेसी संजय डोभाल को वापस कांग्रेस में लाने की जुगत में है। इस मुलाकात को कांग्रेस का कुनबा बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। उम्मीद है कि डोभाल 2027 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस के टिकट पर लड़ें। कुछ समय पूर्व हुए आंदोलनों में डोभाल विशेष तौर पर सक्रिय नजर आए थे। और पुलिस-प्रशासन से उनकी रस्साकसी का वीडियो भी वॉयरल हुआ था।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल समेत अन्य रणनीतिकार कुछ पुराने नेताओं से लगातार सम्पर्क साध रहे हैं। चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत की पूर्व नौकरशाह एस एस पांगती व पीसी थपलियाल से हुई मुलाकात भी सरगर्म है।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस के रणनीतिकार भाजपा  व कुछ अन्य नेताओं को जोड़ने की मुहिम चलाए हुए है। भाजपा में कौन-कौन नेता व अहम कार्यकर्ता कोपभवन में बैठे हैं, इसकी सूची बनाई जा रही है।

आने वाले दिनों में विभिन्न दलों में तोड़फोड़ की फिल्में भी सामने आने लगेंगी। तेजी से बदल रहे राजनीतिक घटनाक्रम के तहत भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने एक बार फिर धामी कैबिनेट विस्तार का भोंपू बजा दिया है। भाजपा के कई विधायक सम्भावित कैबिनेट विस्तार पर पैनी नजर रखे हुए है।

प्रीतम सिंह व निर्दलीय विधायक संजय डोभाल

गौरतलब है कि 2014, 2016,2017,2022 व 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा कई कांग्रेसियों को अपने पाले में खींचकर कांग्रेस को भारी राजनीतिक नुकसान पहुंचा चुकी है।फिलहाल, कांग्रेस के नेता छिन्न भिन्न व बचे खुचे कुनबे को बचाने और बढ़ाने की कवायद में जुटे हुए हैं। प्रदेश की राजनीति रोमांचकारी फिसलन भरी पहाड़ी ढलान में फिसलती दिख रही है।

पीसीएस…उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने प्री परीक्षा परिणाम की गलती मुख्य परीक्षा में भी दोहराई

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उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने पीसीएस प्री परीक्षा के परिणाम में जो गलतियां की थीं, उन्हें भी मुख्य परीक्षा परिणाम में दोहरा दिया। इस कारण पूरी गड़बड़ी हुई। आखिरकार आयोग ने इस तकनीकी त्रुटि को दूर करते हुए अर्हता के हिसाब से चयनित अभ्यर्थियों का संशोधित परिणाम जारी किया है। इसमें सभी गड़बड़ियां दुरुस्त कर ली गई हैं।

 

आयोग ने पीसीएस प्री परीक्षा का परिणाम 23 दिसंबर 2024 को जारी किया था। इसमें परिवीक्षा अधिकारी (महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग) के पद के लिए 12 अभ्यर्थियों को क्वालिफाई घोषित किया गया था। इनके रोल नंबर 107132, 119742, 120925, 144302, 146609, 162271, 176078, 186453, 219236, 219819, 238736, 245207 हैं। जब मुख्य परीक्षा परिणाम आया तो आयोग ने इनमें से 162439, 182463 और 197739 को सफल घोषित किया।

 

अभ्यर्थियों ने आयोग के सामने सवाल उठाया
परिवीक्षा अधिकारी प्री परीक्षा की संशोधित कटऑफ 95.9854 अंक थी। जो तीन अभ्यर्थी इस पद के लिए प्री परीक्षा में आयोग ने सफल घोषित किए थे, उनमें से एक के अंक 81.2988, दूसरे के 82.3486 और तीसरे के अंक 91.7894 थे। आयोग ने प्री परीक्षा परिणाम में कटऑफ और अर्हता से कम वाले अभ्यर्थियों को परिवीक्षा अधिकारी के पदों के लिए सफल घोषित किया।

इस गलती को आगे बढ़ाते हुए आयोग ने इस साल 29 नवंबर को मुख्य परीक्षा परिणाम में इन कम कटऑफ वाले तीन अभ्यर्थियों को ही परिवीक्षा अधिकारी पद के लिए सफल घोषित किया। जब इस पर कुछ अभ्यर्थियों ने आयोग के सामने सवाल उठाया तो आयोग ने इसकी जांच पड़ताल की। तब खुलकर यह गलती समझ आई।

 

सोमवार को मुख्य परीक्षा का जो संशोधित परिणाम जारी हुआ, उसमें पूर्व के तीनों अभ्यर्थियों(162439, 182463 और 197739) को आयोग ने परिवीक्षा अधिकारी से हटाकर समेकित पदों के परिणाम में शामिल कर दिया। जबकि इनकी जगह तीन नए अभ्यर्थियों 162271(प्री में 100.1814 अंक), 219236(प्री में 95.9854 अंक), 245207(प्री में 99.6560) को मुख्य परीक्षा में सफल घोषित किया गया है। इन सभी के अंक प्री परीक्षा की कटऑफ 95.9854 से अधिक हैं और पद के हिसाब से पात्रता भी रखते हैं।

चार से बदलेगा मौसम, बारिश-बर्फबारी के आसार, प्रदेश भर में सूखी ठंड कर रही परेशान

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दो महीने से शुष्क मौसम का सीधा असर तापमान में देखने को मिल रहा है। सुबह-शाम के तापमान में बड़ा अंतर है लेकिन सामान्य तापमान में गिरावट नहीं हो रही है। इस कारण प्रदेश भर में सूखी ठंड परेशान कर रही है।आंकड़ों में नजर डाले तो सोमवार को दून का अधिकतम तापमान सामान्य से एक डिग्री इजाफे के साथ 25 डिग्री और न्यूनतम तापमान सामान्य से एक डिग्री गिरावट के साथ 7.8 दर्ज किया गया। इसके उलट पर्वतीय जिले नई टिहरी में दिन का अधिकतम तापमान सामान्य से दो डिग्री इजाफे के साथ 20.6 और रात का न्यूनतम तापमान भी सामान्य से पांच डिग्री बढ़ोतरी के साथ 9.3 डिग्री रिकॉर्ड किया गया।

 

उधर मुक्तेश्वर का भी हाल कुछ ऐसा ही रहा। यहां दिन का अधिकतम तापमान सामान्य से पांच डिग्री ज्यादा 21.3 और न्यूनतम तापमान भी सामान्य से पांच डिग्री अधिकतम के साथ 9.3 रहा। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अक्तूबर से ही प्रदेश भर में अच्छी धूप खिल रही है। यही वजह है कि दिन के साथ अब रात के न्यूनतम तापमान भी इजाफा देखने को मिल रहा है। आने वाले दिनों की बात करें तो तीन दिसंबर तक प्रदेश भर में मौसम शुष्क रहेगा।

 

उत्तराखंड में लंबे समय से बारिश-बर्फबारी का इंतजार है। ऐसे में मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से जारी पूर्वानुमान के अनुसार चार दिसंबर से मौसम बदल सकता है। उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ जिले के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश होने के आसार हैं। जबकि 3500 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी भी होने की संभावना है। ऐसा ही मौसम प्रदेश भर में सात दिसंबर तक रहने के आसार हैं।

संसद में उठाया टिहरी झील क्षेत्र परियोजना से संबंधित विकास कार्यों का सवाल

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हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत के साथ ही टिहरी सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह समेत दो अन्य सांसदों ने आज संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन टिहरी झील क्षेत्र परियोजना से संबंधित विकास कार्यों को लेकर केंद्र सरकार से सवाल उठाए।

सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रश्नकाल के दौरान सरकार से सवाल किया कि उत्तराखंड के टिहरी झील क्षेत्र परियोजना में 126. मिलियन डालर की सतत, समावेशी और जलवायु अनुकूल पर्यटन विकास के तहत किए जा रहे बुनियादी ढांचे और विकास कार्यों का ब्यौरा क्या है। यह भी सवाल किया कि इस परियोजना से कितने निवासियों और पर्यटकों को लाभ मिलने का संभावना है। भूस्खलन और बाढ़ जोखिमों को कम करने के लिए संस्थागत सुद्ढीकरण, आपदा की तैयारी और प्रकृति आधारित समाधानों को अपनाने के लिए लागू की गई प्रमुख पहले क्या हैं। सरकार द्वारा परियोजना के तहत समावेशिता और सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित करने और महिलाओं के नेतृत्व वाली आपदा प्रबंधने पहलों का सहयोग करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

इस सवाल के लिखित जवाब में वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि एडीबी और भारत सरकार ने टिहरी झील परियोजना में सतत, समावेशी और जलवायु अनुकूल पर्यटन विकास के लिए 10 सितंबर, 2025 को 126.4 मिलियन अमेरिकी डालर के ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस परियोजना का उद्देश्य उत्तराखंड राज्य के टिहरी गढवाल जिले के टिहरी झील क्षेत्र में आजिविका, पर्यावरण संरक्षण और जलवायु प्रतिरोधी पर्यटन के विकास में सहायता करना है। यह उत्तराखंड सरकार की राज्य क्षेत्र की परियोजना है। राज्य सरकार के अनुरोध पर ही भारत सरकार द्वारा एडीबी के साथ ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। परियोजना का पूरी तरह से रखऱखाव राज्य सरकार कर रही है।

एसआईआर…2003 की मतदाता सूची जारी, 18 विधानसभा सीटें आज अस्तित्व में नहीं, नाम खोजना चुनौती

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चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के लिए उत्तराखंड की वर्ष 2003 की मतदाता सूची तो जारी हो गई लेकिन इसमें नाम खोजना आसान नहीं है। प्रदेशभर में उस वक्त 18 विधानसभा सीटें ऐसी थीं, जो आज अस्तित्व में ही नहीं हैं। परिसीमन के बाद इनके नाम और क्षेत्र बदल गए थे।

एसआईआर के लिए वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मिलान किया जाना है। आपका वोट 2003 में था या नहीं, इसके लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी देहरादून कार्यालय ने वेबसाइट ceo.uk.gov.in पर वर्ष 2003 की मतदाता सूची जारी कर दी है। नई पीढ़ी के मतदाता जब यहां देहरादून की धर्मपुर व रायपुर, चमोली की थराली, पौड़ी की चौबट्टाखाल, नैनीताल की लालकुआं व भीमताल, ऊधमसिंह नगर की कालाढूंगी सीट की तलाश करेंगे तो उन्हें नहीं मिलेगी। वर्ष 2003 में ये विधानसभा सीटें थी ही नहीं।

राज्य गठन के बाद पहला परिसीमन वर्ष 2002 में हुआ था, जिसमें राज्य में विधानसभा की 70 और लोकसभा की पांच सीटें तय हुई थीं। 2003 की मतदाता सूची में भी इन्हीं सीटों का जिक्र है। इसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर जब वर्ष 2008 में परिसीमन हुआ तो उत्तराखंड की विधानसभा, लोकसभा सीटों की संख्या तो नहीं बदली लेकिन 18 सीटों का वजूद खत्म हो गया था। इसके बजाय नए नाम से सीटें आ गई थीं। वर्तमान मतदाता जब नए नाम को सर्च करेंगे तो उन्हें 2003 की मतदाता सूची में इन 18 सीटों के नाम नहीं मिलेंगे।

2003 और 2025 में ये हुआ बदलाव

चमोली जिले में नंद्रप्रयाग व पिंडर के नाम से विस सीट थीं, जिनकी जगह अब थराली नाम से सीट है। देहरादून जिले में लक्ष्मणचौक व देहरादून के नाम से सीट थी, अब धर्मपुर, रायपुर व देहरादून कैंट के नाम से है। हरिद्वार जिले में इकबालपुर, लंढौरा, बहादराबाद, लालढांग के नाम से सीट थीं, अब इनकी जगह भेल रानीपुर, ज्वालापुर, झबरेड़ा, पिरान कलियर, खानपुर व हरिद्वार ग्रामीण के नाम से है। पौड़ी जिले में धूमाकोट, बीरोंखाल, थलीसैंण के नाम से सीट थीं, अब इनकी जगह चौबट्टाखाल नाम से है। पिथौरागढ़ में कनालीछीना और अल्मोड़ा में भिकियासैंण के नाम से सीट थीं, जो अब नहीं हैं। नैनीताल में मुकतेश्वर व धारी के नाम से सीट थीं, अब लालकुआं, भीमताल व कालाढूंगी के नाम से हैं। यूएसनगर में पंतनगर-गदरपुर, रुद्रपुर-किच्छा के नाम से सीट थीं, जो खत्म हो गईं और इनकी जगह गदरपुर, रुद्रपुर, किच्छा व नानकमत्ता के नाम से सीट है।

वेबसाइट पर पुराने वोटर आईडी या एडवांस सर्च करें

निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर आप 2003 की वोटर लिस्ट में अपना नाम पुराने वोटर आईडी कार्ड के इपिक नंबर से सर्च कर सकते हैं। अगर वो नहीं है तो आप एडवांस सर्च में जाकर अपना नाम, पिता का नाम, पोलिंग स्टेशन का नाम, उम्र आदि की जानकारी देकर निकाल सकते हैं।

समान काम के लिए समान वेतन देने का आदेश, पहले चरण में करीब 5500 उपनल कर्मचारियों को मिलेगा लाभ

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सरकार के उपनल कर्मचारियों को समान काम के लिए समान वेतन दिए जाने के फैसले से पहले चरण में 5500 कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा। प्रदेश के उपनल कर्मचारी नियमित करने एवं समान काम के लिए समान वेतन दिए जाने की मांग कर रहे थे।

लंबित मांगों के लिए कर्मचारी पिछले 16 दिन से हड़ताल पर थे, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर कर्मचारियों को समान काम के लिए समान वेतन दिए जाने का आदेश जारी हुआ। सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी के मुताबिक पहले चरण में प्रदेश के करीब 5500 उपनल कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा। हालांकि इसके बाद सभी कर्मचारियों को चरणबद्ध तरीके से समान काम के लिए समान वेतन का लाभ दिया जाना है।

उत्तराखंड में 3.30 लाख स्मार्ट मीटर लगने के बाद लगी रोक

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भारी प्रचार प्रसार के बावजूद खराब स्मार्ट मीटर विभाग के गले की हड्डी बनते जा रहे हैं। स्मार्ट मीटर में तमाम प्रकार की गड़बड़ी पकड़ में आने के बाद सम्बंधित विभाग यूपीसीएल कठघरे में खड़ा है।

विभाग से जुड़े कई उच्च पदस्थ अधिकारी उपभोक्ताओं की शिकायतों को लगातार अनसुनी करते हुए अपने मन की कर रहे थे। इस शर्मनाक गड़बड़ एपिसोड के ‘अलंबरदारों’ ने भाजपा सरकार की भी फजीहत करवा दी। समय रहते कारगर कदम उठा लिए जाते तो आज किरकिरी का सामना नहीं करना पड़ता।
ऊर्जा विभाग में पदस्थ अधिकारियों की ताजपोशी को लेकर शुरू से ही सवाल उठते रहे हैं।

उत्तराखंड में बिजली उपभोक्ताओं की लगातार बढ़ती नाराजगी और सोशल मीडिया से सड़क तक उठते विरोध के बाद आखिरकार प्रदेश सरकार और यूपीसीएल हरकत में आ गए हैं। ऊर्जा निगम ने राज्यभर में स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।

हैरानी की बात यह है कि यह निर्णय तब लिया, जब प्रदेश में 3.30 लाख से अधिक स्मार्ट मीटर पहले ही इंस्टॉल किए जा चुके हैं। निगम के नए आदेश ने साफ कर दिया है कि उपभोक्ताओं की शिकायतें झूठी या बढ़ा-चढ़ाकर पेश की गई नहीं थीं, बल्कि स्मार्ट मीटरों की गुणवत्ता, रीडिंग और बिलिंग को लेकर गंभीर खामियां मौजूद थीं।

स्मार्ट मीटरों को लेकर महीनों से उठ रहे सवाल आखिरकार सही साबित हुए हैं। यूपीसीएल ने आधिकारिक आदेश जारी करते हुए राज्य में स्मार्ट मीटर इंस्टॉलेशन पर रोक लगा दी है। प्रबंध निदेशक अनिल यादव के निर्देश के अनुसार जहां भी गलत रीडिंग, तकनीकी त्रुटि या उपभोक्ता की आपत्ति मिलेगी, वहां मौजूदा स्मार्ट मीटर हटाकर नया तकनीकी रूप से उपयुक्त मीटर लगाया जाएगा।

मुख्य अभियंता बीएमएस परमार ने स्पष्ट किया है कि सभी शिकायतों की गंभीर समीक्षा की जाएगी और फील्ड अधिकारी खुद मौके पर जाकर निस्तारण करेंगे। अब उपभोक्ताओं को बिल सही है, मीटर ठीक है जैसे औपचारिक जवाब नहीं मिलेंगे।
आदेश में पहली बार यह स्वीकार किया है कि दोष उपभोक्ता का नहीं, बल्कि मीटर और सिस्टम का भी हो सकता है। इससे लाखों उपभोक्ताओं के उन सवालों को मजबूती मिली है, जो लंबे समय से नजरअंदाज किए जा रहे थे।

आखिर इतनी देर क्यों जागा निगम?

ऊर्जा निगम के भीतर सूत्र बताते हैं कि बीते कुछ महीनों में स्मार्ट मीटरों को लेकर शिकायतों का अंबार लग गया था। कई उपभोक्ता तीन-चार गुना बढ़े हुए बिल के खिलाफ लगातार विरोध कर रहे थे।

विधायक, पार्षद, जनप्रतिनिधि लगातार मीटरों की खराबी की बात उठा रहे थे, लेकिन निगम ने अब तक मीटर में गलती नहीं का रटा-रटाया जवाब ही दिया। बताया जा रहा है कि विभिन्न जिलों से मिली रिपोर्टों में मीटरों की तकनीकी कमियां उजागर हुईं—कहीं गलत रीडिंग, कहीं बैकएंड डेटा सिंकिंग खराब, तो कई स्थानों पर पूरे सिस्टम की त्रुटियां सामने आईं।

इन बढ़ती शिकायतों ने दबाव बनाया, जिसके बाद निगम को आदेश जारी करने पड़े। विशेषज्ञों का कहना है कि परियोजना को जल्दबाजी में लागू किया गया, फील्ड टेस्टिंग कमजोर थी और ठेकेदारों की मॉनिटरिंग भी सवालों में है। अब 3.30 लाख मीटर लगने के बाद रोक लगाना इस बात का संकेत है कि सिस्टम शुरू से ही मजबूत नहीं था। इससे उन हजारों उपभोक्ताओं को राहत मिलने की संभावना है, जो अब तक बढ़े हुए बिलों के सामने बेबस थे।

गौरतलब है कि रुद्रपुर से कांग्रेस विधायक तिलकराज बेहड़ ने स्मार्ट मीटर को खुलेआम तोड़ कर सम्बंधित कंपनी को भगा दिया था। कांग्रेस का आरोप है कि देश के प्रसिद्ध उद्योगपति को फायदा पहुंचाने के लिए जबरदस्ती स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं।

नए आदेश के बाद उपभोक्ताओं को यह अधिकार मिला है कि—

  • गलत बिल आने पर तकनीकी जांच की मांग कर सकें।
  • स्मार्ट मीटर की खराबी साबित होने पर मीटर बदलवाएं।
  • फील्ड अधिकारी मौके पर जांच करेंगे, केवल कागजी जवाब नहीं दिया जाएगा।
  • उपभोक्ता आदेश की कॉपी दिखाकर अधिकारियों से जवाबदारी तय कर सकेंगे।

बड़े सवाल जो अभी भी अनुत्तरित हैं-

  • गलत मीटर लगाने की जिम्मेदारी किसकी?
  • क्या ठेकेदारों की जांच होगी?
  • क्या पहले से लगे 3.30 लाख मीटरों का ऑडिट होगा?
  • उपभोक्ताओं को गलत बिलों का क्या मुआवजा मिलेगा?
  • मीटरों से हुए अधिक बिल का समायोजन कैसे होगा?

देखें रोक का आदेश

 

मांस वाहन को रोकने और वाहन चालक से मारपीट के मामले में फरार भाजपा नेता स्कूटी से पहुंचे कोतवाली आत्मसमर्पण करने, कोर्ट में पेश कर भेजा जेल

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मीट प्रकरण में फरार चल रहे भाजपा पूर्व नगर अध्यक्ष मदन जोशी स्कूटी से कोतवाली पहुंचे और आत्म समर्पण कर दिया। उधर पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया है। भाजपा नेता की गिरफ्तारी को लेकर विधायक समेत बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता कोतवाली पहुंचे। 23 अक्तूबर को मांस वाहन को रोकने और वाहन चालक से मारपीट के मामले में पुलिस ने वाहन चालक की पत्नी की तहरीर पर भाजपा नेता मदन जोशी समेत पांच नामजद व 30 अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या के प्रयास में मुकदमा दर्ज किया था। जिसके बाद पुलिस लंबे से भाजपा नेता की गिरफ़्तारी के प्रयास कर रहे थी।

वहीं सोमवार को भाजपा नेता की हाई कोर्ट से ज़मानत याचिका ख़ारिज होने के बाद मंगलवार सुबह मदन जोशी ने समर्पण के लिए सोशल मीडिया पर वीडियो अपलोड की। जिसके कुछ देर बाद बड़ी संख्या भाजपा कार्यकर्ता व समर्थक कोतवाली पहुंच गए।

उधर गिरफ्तारी को लेकर पुलिस भी भारी संख्या में तैनात की गई। इसी बीच भाजपा नेता भीड़ के बीच स्कूटी से कोतवाली पहुंचे और आत्मसमर्पण किया। कोतवाल सुशील कुमार ने बताया कि आरोपी को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया है।

पेयजल निगम में 2,690 करोड़ के कथित घोटाले का खुलासा

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उत्तराखंड पेयजल निगम में भारी वित्तीय अनियमितताओं का मामला अब बड़े घोटाले का रूप ले चुका है। आरटीआई एक्टिविस्ट और अधिवक्ता विकेश नेगी के अनुसार, भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में 2016 से मई 2025 के बीच निगम की विभिन्न परियोजनाओं में लगभग 2,690 करोड़ 27 लाख की वित्तीय अनियमितताएं सामने आई हैं। नेगी ने दावा किया है कि यह रिपोर्ट न केवल गंभीर वित्तीय भ्रष्टाचार का संकेत देती है, बल्कि इसे वर्षों तक जनता और विधानमंडल से छिपाया गया। उन्होंने इस संबंध में शिकायत और दस्तावेज प्रदेश के मुख्यमंत्री को भेजते हुए उच्च स्तरीय जांच और अभियोजन की मांग की है।

सबसे बड़ा सवाल — रिपोर्ट विधानसभा में क्यों नहीं रखी गई?
अधिवक्ता नेगी के अनुसार, कैग की यह रिपोर्ट तीन साल तक सार्वजनिक नहीं की गई और न विधानसभा में प्रस्तुत हुई। उनका आरोप है कि जनता के हक की सबसे महत्वपूर्ण रिपोर्ट को व्यवस्था ने छिपाए रखा, ताकि भ्रष्टाचार उजागर न हो सके।

रिपोर्ट में दर्ज वित्तीय अनियमितताएं

( करोड़ में)

वित्तीय वर्ष अनियमितता
2016-17 92.41
2017-18 ऑडिट नहीं
2018-19 ऑडिट नहीं
2019-20 656.05
2020-21 829.90 (सबसे अधिक)
2021-22 43.48
2022-23 96.99
2023-24 803.00
2024-25 (मई तक) 38.41

कुल कथित अनियमितता : 2,660 करोड़ 27 लाख

कोरोना काल में सबसे ज्यादा अनियमितताएं
सबसे अधिक अनियमितताएं कोरोना काल (2020-21) में दर्ज की गईं— जब पूरा राज्य स्वास्थ्य संसाधनों के लिए जूझ रहा था, उसी समय पेयजल निगम में 829.90 करोड़ का हिसाब संदिग्ध पाया गया।

शिकायत और रिपोर्ट के अनुसार—

  • बिना गारंटी ठेकेदारों को करोड़ों का भुगतान
  • अधूरे कामों पर बिल पास
  • कई ठेकेदारों ने जीएसटी जमा नहीं किया, फिर भी भुगतान
  • निर्माण गुणवत्ता पर सवाल, जगह-जगह अधूरी परियोजनाएं
  • रॉयल्टी और ब्याज वसूली नहीं
  • अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत का स्पष्ट संकेत

अधिवक्ता नेगी का कहना है—
यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि योजनाबद्ध आर्थिक नुकसान है। दोषियों पर आपराधिक मामला दर्ज होना चाहिए।

घोटाले के मुख्य बिंदु

  • कैग रिपोर्ट 3 साल तक छिपाए जाने का आरोप
  • कई वर्षों में ऑडिट नहीं हुआ
  • कोविड अवधि में सबसे अधिक अनियमितता
  • परियोजनाएं अधूरी, भुगतान पूरा
  • भ्रष्टाचार में विभागीय अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध

जनता और विपक्ष में चर्चा तेज
मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों, जनता और सोशल मीडिया में इसे लेकर बहस शुरू हो गई है। कई लोग इसे राज्य का अब तक का सबसे बड़ा जल-संबंधी वित्तीय घोटाला बता रहे हैं। अब निगाहें सरकार और जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर हैं।