Category Archive : मौसम

हाई अलर्ट: उत्तराखंड में 85 मार्ग बंद, मलबे में दबी कार, खतरे के निशान से ऊपर बह रहीं अलकनंदा-मंदाकिनी.

25 Minutes Read -

प्रदेश में लगातार हो रही वर्षा और आगामी मौसम चेतावनियों के कारण मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन से बात की। उन्होंने विभिन्न जिलों की स्थिति की जानकारी प्राप्त की। सीएम ने सभी आपदा प्रबंधन व राहत एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने संभावित आपदा से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एजेंसियों को पूरी सतर्कता से कार्य करने को कहा। संवेदनशील क्षेत्रों की निरंतर निगरानी का निर्देश दिया। नदी-नालों के जलस्तर पर सतत दृष्टि रखने को भी कहा गया। आवश्यकता पड़ने पर लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए। सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने बताया कि भारत मौसम विज्ञान विभाग ने अलर्ट जारी किया है।

गुरुवार के लिए देहरादून, चमोली और बागेश्वर जिलों में ऑरेंज अलर्ट है। राज्य के शेष जनपदों में येलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने कुछ स्थानों पर तेज वर्षा, आकाशीय बिजली और तेज हवाओं की संभावना जताई है। सभी संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र प्रदेशभर की स्थिति पर लगातार निगरानी रख रहा है।

 

राज्य में 85 मार्ग बंद-

प्रदेश में भूस्खलन के चलते 85 मार्ग बंद है। इसमें अल्मोड़ा दो, बागेश्वर 10, चमोली 20, देहरादून सात, नैनीताल में आठ मार्ग बंद है। पौड़ी पांच, पिथौरागढ़ 13, रुद्रप्रयाग छह, टिहरी आठ और उत्तरकाशी में छह मार्ग बंद है।

अगस्त्यमुनि: भूस्खलन से फिर बंद हुआ विजयनगर-तैला मार्ग-

लगातार बारिश के बीच बृहस्पतिवार सुबह विजयनगर-तैला मोटर मार्ग एक बार फिर भूस्खलन की चपेट में आ गया। पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और बोल्डर आने से मार्ग पर यातायात बाधित हो गया है।
विजयनगर-तैला मोटर मार्ग 80 से अधिक गांवों का मुख्य संपर्क मार्ग है। मानसून के दौरान इस मार्ग का शुरुआती हिस्सा लगातार भूस्खलन और भूधंसाव से प्रभावित हो रहा है, जिससे सड़क बार-बार बंद हो रही है।

खतरे के निशान से ऊपर बह रहीं अलकनंदा और मंदाकिनी-

रुद्रप्रयाग जिले में बुधवार रात से जारी बारिश के बाद अलकनंदा और मंदाकिनी नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार बृहस्पतिवार सुबह अलकनंदा का जलस्तर 627.80 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 627.00 मीटर है। वहीं मंदाकिनी का जलस्तर 626.60 मीटर रहा, जबकि इसका खतरे का निशान 626.00 मीटर है। पिछले 24 घंटे में ऊखीमठ में 53.30 मिमी, जखोली में 59.00 मिमी और रुद्रप्रयाग में 16.00 मिमी वर्षा दर्ज की गई। नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद नगर पालिका और नगर पंचायतों की ओर से लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों को नदी तटों से दूर रहने और अनावश्यक रूप से नदी के समीप नहीं जाने की अपील की जा रही है।

बड़कोट:पत्थरों की चपेट में आने से बाल-बाल बचे दो कांवड़ यात्री- 

यमुनोत्री हाईवे पर सिलाई बैंड के समीप बुधवार को बड़ा हादसा होने से बच गया। यमुनोत्री धाम से लौट रहे उत्तर प्रदेश के दो कांवड़ यात्री अचानक पहाड़ी से गिरे चट्टानी मलबे और पत्थरों की चपेट में आने से बाल-बाल बचे। जान बचाने के लिए दोनों यात्रियों को अपनी बाइक मौके पर छोड़कर भागना पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ देर तक भूस्खलन जारी रहने के बाद स्थिति सामान्य हुई जिसके बाद सिलाई बैंड से यमुनोत्री की ओर फंसे लोग सावधानी के साथ बड़कोट की ओर रवाना हुए। सामाजिक कार्यकर्ता महावीर पंवार ने बताया कि सिलाई बैंड सहित अन्य संवेदनशील स्थानों पर लाइट की व्यवस्था करनी चाहिए। इधर एनएच के ईई मनोज रावत ने बताया कि संभवत: जिला प्रशासन और विद्युत विभाग के बीच संवेदनशील प्वाइंटों पर लाइटों को लेकर बातचीत चल रही है।

Uttarakhand Weather: मौसम का मिजाज बदला, नैनीताल समेत विभिन्न जिलों में अगले 6 दिन तक बारिश की चेतावनी.

81 Minutes Read -

सुबह हल्के बादल रहने के बाद रविवार को दोपहर में अचानक मौसम बदला। घने काले बादलों के कारण दिन में ही अंधेरा नजर आने लगा। कुछ ही पल बाद अंधड़ के साथ तेज बारिश हुई। करीब आधे घंटे बाद आसमान साफ हुआ और धूप निकल आई।

सुबह हल्के बादल रहने के बाद रविवार को दोपहर में अचानक मौसम बदला। घने काले बादलों के कारण दिन में ही अंधेरा नजर आने लगा। कुछ ही पल बाद अंधड़ के साथ तेज बारिश हुई। करीब आधे घंटे बाद आसमान साफ हुआ और धूप निकल आई।

26 अप्रैल से एक मई तक पारे में रही गिरावट 

नौ दिन में सिर्फ दो दिन तापमान 39 डिग्री के पार गया है। 25 अप्रैल को तापमान 40 डिग्री जबकि इसके अगले दिन 39.8 डिग्री रहा। इसके बाद एक मई तक तापमान में गिरावट दर्ज की गई। दो मई को अधिकतम तापमान 34 तो तीन मई को 36.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

मौसम की यह सामान्य प्रक्रिया है और हर साल होता रहा है। सोमवार को मैदानी इलाकों में और मंगलवार को पर्वतीय जिलों में तेज बारिश रहेगी जिसके लिए चेतावनी दी गई है। आगे छह और सात मई को तेज हवाओं का दौर रहेगा और बिजली गिरने की आशंका ज्यादा हैं। – डॉ. चंद्र सिंह तोमर, निदेशक मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून

Uttarakhand: एक बार फिर बदलेगा मौसम, प्रदेश के नौ जिलों में बारिश के साथ अंधड़ की चेतावनी

90 Minutes Read -

बीते कई दिनों से गर्मी की मार झेल रहे उत्तराखंड में मौसम एक बार फिर बदलेगा। नौ जिलों में आज शनिवार को इसका असर देखने को मिलेगा। कई जिलों में बारिश के साथ अंधड़ की चेतावनी जारी की गई है।मौसम विभाग ने उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश और 4400 मीटर व उससे अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की संभावना जताई है।

मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक सीएस तोमर ने बताया कि मैदानी जनपदों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है। वहीं, चमोली, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, पिथौरागढ़, देहरादून, टिहरी, अल्मोड़ा और नैनीताल जिले में कहीं-कहीं गर्जन के साथ आकाशीय बिजली चमकने और 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने की संभावना है। मा.सि.रि.

Uttarakhand Weather: कल से फिर बदलेगा मौसम, कई जिलों में बारिश-बर्फबारी के आसार.

104 Minutes Read -

उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में मंगलवार से फिर मौसम बदलने के आसार हैं। मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से जारी पूर्वानुमान के अनुसार 17 फरवरी को उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिले में हल्की बारिश व बर्फबारी की संभावना है।

खासकर प्रदेश के 3000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी हो सकती है। इसके अलावा प्रदेश के अन्य हिस्सों में मौसम शुष्क रहेगा। मौसम का मिजाज 18 फरवरी को भी ऐसा ही रहेगा। इसके बाद 19 से 21 फरवरी तक प्रदेशभर में मौसम शुष्क रहेगा। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पर्वतीय इलाकों में बदलने वाले मौसम का बहुत अधिक असर तापमान में देखने को नहीं मिलेगा।

उधर रविवार को मैदान से लेकर पहाड़ तक खिली चटक धूप ने गर्मी का अहसास कराया। आंकड़ों पर नजर डाले तो दिन में दून का अधिकतम तापमान सामान्य से चार डिग्री इजाफे के साथ 26.3 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। जबकि रात का न्यूनतम तापमान भी सामान्य से दो डिग्री बढ़ोतरी के साथ 11.2 डिग्री दर्ज किया गया। प्रदेश के अन्य इलाकों भी हाल कुछ ऐसा ही रहा।

Uttarakhand Weather: आज बदलेगा मौसम, पहाड़ से मैदान तक खिली धूप; कोहरे के साथ बारिश-बर्फबारी के भी आसार।

109 Minutes Read -

उत्तराखंड में पहाड़ से मैदान तक रविवार को माैसम साफ रहा और दिन में धूप खिली रही लेकिन मैदानी इलाकों में सोमवार को कोहरा छाने के साथ पर्वतीय इलाकों में बारिश-बर्फबारी की संभावना बनी हुई है। इसके चलते ठंड बढ़ सकती है।

मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से जारी पूर्वानुमान के अनुसार, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जिले के कुछ हिस्सों में कोहरा छाने का यलो अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिले के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश के साथ बर्फबारी के आसार हैं। खासकर प्रदेश के 3000 मीटर से अधिक से ऊंचाई वाले हिस्सों में बर्फबारी की संभावना अधिक है। आने वाले दिनों की बात करें तो 11 फरवरी तक प्रदेश में मौसम का मिजाज कुछ ऐसा ही रहेगा।

12 फरवरी से मौसम शुष्क होगा और मैदानी हिस्सों में तेज धूप खिलने से गर्मी का अहसास होगा और तापमान में बढ़ोत्तरी होगी। रविवार को दून में चटख धूप खिलने से यहां का अधिकतम तापमान सामान्य से चार डिग्री इजाफे के साथ 25.4 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। रात का न्यूनतम तापमान भी सामान्य से एक डिग्री बढ़ाेतरी के साथ 9.2 डिग्री दर्ज किया गया। ऐसा ही हाल प्रदेश के सभी हिस्सों में रहा।

चार से बदलेगा मौसम, बारिश-बर्फबारी के आसार, प्रदेश भर में सूखी ठंड कर रही परेशान

120 Minutes Read -

दो महीने से शुष्क मौसम का सीधा असर तापमान में देखने को मिल रहा है। सुबह-शाम के तापमान में बड़ा अंतर है लेकिन सामान्य तापमान में गिरावट नहीं हो रही है। इस कारण प्रदेश भर में सूखी ठंड परेशान कर रही है।आंकड़ों में नजर डाले तो सोमवार को दून का अधिकतम तापमान सामान्य से एक डिग्री इजाफे के साथ 25 डिग्री और न्यूनतम तापमान सामान्य से एक डिग्री गिरावट के साथ 7.8 दर्ज किया गया। इसके उलट पर्वतीय जिले नई टिहरी में दिन का अधिकतम तापमान सामान्य से दो डिग्री इजाफे के साथ 20.6 और रात का न्यूनतम तापमान भी सामान्य से पांच डिग्री बढ़ोतरी के साथ 9.3 डिग्री रिकॉर्ड किया गया।

 

उधर मुक्तेश्वर का भी हाल कुछ ऐसा ही रहा। यहां दिन का अधिकतम तापमान सामान्य से पांच डिग्री ज्यादा 21.3 और न्यूनतम तापमान भी सामान्य से पांच डिग्री अधिकतम के साथ 9.3 रहा। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अक्तूबर से ही प्रदेश भर में अच्छी धूप खिल रही है। यही वजह है कि दिन के साथ अब रात के न्यूनतम तापमान भी इजाफा देखने को मिल रहा है। आने वाले दिनों की बात करें तो तीन दिसंबर तक प्रदेश भर में मौसम शुष्क रहेगा।

 

उत्तराखंड में लंबे समय से बारिश-बर्फबारी का इंतजार है। ऐसे में मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से जारी पूर्वानुमान के अनुसार चार दिसंबर से मौसम बदल सकता है। उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ जिले के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश होने के आसार हैं। जबकि 3500 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी भी होने की संभावना है। ऐसा ही मौसम प्रदेश भर में सात दिसंबर तक रहने के आसार हैं।

अध्ययन में खुलासा…बादल या झील फटने से नहीं, इस वजह से धराली में मची थी तबाही

148 Minutes Read -

धराली आपदा का कारण बादल या कोई कृत्रिम झील फटना नहीं था बल्कि लगातार बारिश और तेज गति से आए मलबे के कारण तबाही मची थी। 4600 मीटर की ऊंचाई से धराली में एक सेकेंड में आठ मीटर की रफ्तार से मलबा पहुंचा था। यहां पर आसपास के क्षेत्र की तुलना में सबसे अधिक तेजी से मलबा आया था।

इसका उल्लेख नेचुरल हेजर्ड रिसर्च जर्नल में द धराली कैटास्ट्रॉफिक डिजास्टर : ए वॉकअप कॉल फ्राम द खीर गंगा शीर्षक से पेपर में प्रकाशित किया गया। जिसको वाडिया हिमालय भू विज्ञानसंस्थान के वैज्ञानिक संदीप कुमार, तारिक अनवर, मो. शाहवेज, हरितभ राणा, देवांशु गोदियाल ने तैयार किया। वैज्ञानिक संदीप कुमार और तारिक अनवर ने बताया कि धराली क्षेत्र सिस्मिक और एमसीटी जोन है। छोटे भूकंप से पहाड़ अस्थिर होते हैं, इसके अलावा पहाड़ों की संरचना भी दरार वाली है। दिन और रात में तापमान के अंतर से भी चट्टानों पर असर पड़ता है। ग्लेशियर के पीछे जाने के कारण मोरेन (मलबा) रहता है, वह लगातार बारिश के कारण पानी के साथ मिलकर नीचे की तरफ तीखे ढलान होने के कारण तेजी से पहुंचा और काफी नुकसान हुआ। वैज्ञानिकों के अनुसार नदी, गदेरों के आसपास निर्माण नहीं होना चाहिए। इसके अलावा यहां पर लगातार निगरानी और अध्ययन किया जाना चाहिए।

चमोली आपदा: मलबे में दफन हुईं सात जिंदगियां, सुबह से जलती रहीं चिताएं, हर आंख में थे आंसू, तस्वीरें

163 Minutes Read -

नंदानगर में नंदाकिनी और चुफला नदी के संगम पर यह प्रक्रिया पूरी की गई जहां सुबह से एक के बाद एक जलती चिताएं देखकर हर किसी की आंखें भर आईं।

नंदानगर में आई भीषण आपदा के बाद राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है। शुक्रवार को फाली लगा कुंतरी क्षेत्र से मलबे से पांच शव और बरामद हुए हैं। अब तक इस आपदा में लापता हुए 10 लोगों में से एक व्यक्ति को सुरक्षित निकाल लिया गया है जबकि सात लोगों के शव बरामद हो चुके हैं। धुर्मा गांव में अभी भी दो लोग लापता हैं जिनकी तलाश जारी है। बरामद किए गए सभी सात शव उनके परिजनों को सौंप दिए गए हैं।

Chamoli disaster Seven Dead Bodies found till now under buried in debris People crying on funeral

आपदा में जान गंवाने वाले लोगों का शुक्रवार को नम आंखों से अंतिम संस्कार किया गया। नंदानगर में नंदाकिनी और चुफला नदी के संगम पर यह प्रक्रिया पूरी की गई जहां सुबह से एक के बाद एक जलती चिताएं देखकर हर किसी की आंखें भर आईं। पूरा क्षेत्र शोक में डूबा हुआ है।

Chamoli disaster Seven Dead Bodies found till now under buried in debris People crying on funeral

बृहस्पतिवार को नरेंद्र सिंह और जगदंबा प्रसाद के शव बरामद हुए थे। सुबह सबसे पहले नरेंद्र सिंह का अंतिम संस्कार किया गया। जगदंबा प्रसाद के रिश्तेदार के न आने के कारण उनके शव को सुरक्षित रखा गया था। बाद में जब उनकी पत्नी भागा देवी का शव भी बरामद हो गया और रिश्तेदार पहुंचे तो दोनों पति-पत्नी का एक साथ अंतिम संस्कार किया गया। इसके बाद आपदा में मारे गए अन्य लोगों के शवों का भी संगम स्थल पर अंतिम संस्कार किया गया।

Chamoli disaster Seven Dead Bodies found till now under buried in debris People crying on funeral

जिलाधिकारी संदीप तिवारी और पुलिस अधीक्षक सर्वेश पंवार लगातार प्रभावित परिवारों से मिल रहे हैं और उन्हें सांत्वना दे रहे हैं। उन्होंने पीड़ितों को हर संभव मदद का भरोसा दिलाया है। जिलाधिकारी ने बताया कि सेरा-धुर्मा सड़क कई जगहों से बह गई है जिसे ठीक करने का काम चल रहा है। साथ ही पैदल मार्गों को भी बहाल किया जा रहा है ताकि प्रभावितों तक राहत सामग्री जल्दी पहुंच सके। धुर्मा गांव में हेलिकॉप्टर से फूड पैकेट और राशन किट भेजे जा रहे हैं ताकि किसी भी परिवार को भोजन या जरूरी सामान की कमी न हो।

Chamoli disaster Seven Dead Bodies found till now under buried in debris People crying on funeral

जिलाधिकारी और एसपी ने मरिया आश्रम में बनाए गए राहत शिविर का भी निरीक्षण किया। उन्होंने वहां ठहरे लोगों के लिए भोजन और अन्य सुविधाओं की जानकारी ली और उन्हें भरोसा दिलाया कि हर जरूरी सुविधा मुहैया कराई जाएगी। जिलाधिकारी ने बताया कि सभी विभाग आपसी तालमेल से काम कर रहे हैं और सड़कों को खोलने का काम तेजी से चल रहा है। इस दौरान, एसडीएम आरके पांडे, एसडीएम सोहन सिंह रांगड, पुलिस उपाधीक्षक अमित सैनी, तहसीलदार दीप्ति शिखा और अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।

Chamoli disaster Seven Dead Bodies found till now under buried in debris People crying on funeral

शुक्रवार को इनके मिले शव
– कांता देवी पत्नी कुंवर सिंह (38)।
– विकास और विशाल (10-10 साल)।
– भागा देवी पत्नी जगदंबा प्रसाद (65)
– देवेश्वरी देवी

Chamoli disaster Seven Dead Bodies found till now under buried in debris People crying on funeral

बृहस्पतिवार को बरामद शव
– नरेंद्र सिंह पुत्र कुताल सिंह (40)।
– जगदंबा प्रसाद पुत्र ख्याली राम (70)

धुर्मा में लापता दो लोग
– गुमान सिंह पुत्र चंद्र सिंह (75)
– ममता देवी पत्नी विक्रम सिंह (38)

सीएम धामी चमोली दौरे पर, राहत बचाव कार्यों का किया स्थलीय निरीक्षण, प्रभावितों से मिलेंगे

173 Minutes Read -

मुख्यमंत्री पुष्कर धामी आज चमोली आपदा प्रभावित क्षेत्र नंदानगर पहुंचे। यहां वह आपदा, राहत बचाव कार्यों का स्थलीय निरीक्षण कर रहे हैं। प्रभावित क्षेत्र फाली, कुंतरी, अन्य में सीएम सर्वे करेंगे। इसके अलावा सीएम आपदा प्रभावित सभी लोगों से भी मिलेंगे।

शुक्रवार को फाली लगा कुंतरी क्षेत्र से मलबे से पांच शव और बरामद हुए हैं। अब तक इस आपदा में लापता हुए 10 लोगों में से एक व्यक्ति को सुरक्षित निकाल लिया गया है जबकि सात लोगों के शव बरामद हो चुके हैं। धुर्मा गांव में अभी भी दो लोग लापता हैं जिनकी तलाश जारी है। बरामद किए गए सभी सात शव उनके परिजनों को सौंप दिए गए हैं।आपदा में जान गंवाने वाले लोगों का शुक्रवार को नम आंखों से अंतिम संस्कार किया गया। नंदानगर में नंदाकिनी और चुफला नदी के संगम पर यह प्रक्रिया पूरी की गई जहां सुबह से एक के बाद एक जलती चिताएं देखकर हर किसी की आंखें भर आईं। पूरा क्षेत्र शोक में डूबा हुआ है।
बृहस्पतिवार को नरेंद्र सिंह और जगदंबा प्रसाद के शव बरामद हुए थे। सुबह सबसे पहले नरेंद्र सिंह का अंतिम संस्कार किया गया। जगदंबा प्रसाद के रिश्तेदार के न आने के कारण उनके शव को सुरक्षित रखा गया था। बाद में जब उनकी पत्नी भागा देवी का शव भी बरामद हो गया और रिश्तेदार पहुंचे तो दोनों पति-पत्नी का एक साथ अंतिम संस्कार किया गया। इसके बाद आपदा में मारे गए अन्य लोगों के शवों का भी संगम स्थल पर अंतिम संस्कार किया गया।

दून रिस्पना नदी पर अतिक्रमण का पर्दाफाश, सैटेलाइट तस्वीरों से खुली पोल

207 Minutes Read -

यह बात कोई नई नहीं है कि प्राकृतिक आपदाओं को रोका नहीं जा सकता है, लेकिन उससे जानमाल के नुकसान को कम जरूर किया जा सकता है। यह कैसे करना है, इस बात को भी हमारे विज्ञानी और नियोजन के विशेषज्ञ चीख-चीख कर लंबे समय से कहते आ रहे हैं कि प्रकृति के रास्ते में नहीं आना है। लेकिन, लगता है कि राजधानी दून में ही आपदा से बचे रहने का सबसे बड़ा सबक हम भूल गए हैं।

सोमवार रात को हुई अतिवृष्टि और सहस्त्रधारा क्षेत्र में दो जगह फटे बाद के जो हालात पैदा हुए, उससे साफ हो गया कि नदियों का गला घोंटने का अंजाम कितना खतरनाक हो सकता है। दून में नदी क्षेत्रों में धड़ल्ले से किए गए अतिक्रमण की खतरनाक स्थिति सेटेलाइट चित्रों में भी समाने आई है। जिसमें दिख रहा है कि काठबंगला क्षेत्र में रिस्पना नदी की भूमि वर्ष 2003 से 2018 के बीच में किस कदर जमकर अतिक्रमण किए गए।

वरिष्ठ भूविज्ञानी और एचएनबी गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय में भूविज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रो. एमपीएस बिष्ट ने राज्य गठन के महज तीन साल बाद और इसके 15 साल बाद 2018 के चित्रों का अध्ययन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो काठबंगला क्षेत्र वर्तमान में अतिक्रमण से पूरी तरह भर चुका है, वहां वर्ष 2003 में रिस्पना नदी के दोनों किनारे पूरी तरह खाली थे।

इसके साथ ही दोनों किनारों पर जंगलनुमा एक पूरा क्षेत्र था। वहीं, महज 15 साल बाद 2018 में सेटेलाइट चित्र में रिस्पना नदी बमुश्किल नजर आ रही है। सेटेलाइट चित्र में दोनों छोर पर घनी बस्तियां और भवन नजर आ रहे हैं। इसके अलावा 15 साल पहले का जंगलनुमा भाग 95 प्रतिशत तक गायब हो चुका है।

देहरादून में रिस्पना और बिंदाल नदी क्षेत्रों में अतिक्रमण की बाढ़ पर मनमोहन लखेड़ा बनाम राज्य में नैनीताल हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया था। अतिक्रमण पर कार्रवाई करने के आदेश के बाद सरकारी मशीनरी हरकत में भी आई थी। तब उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (यूसैक) ने इसरो के माध्यम से अमेरिकी कंपनी मैक्सर से शहर के सभी 60 वार्डों (अब बढ़कर संख्या 100) के सेटेलाइट चित्र मंगाए थे।

यह चित्र प्रत्येक छह माह के अंतर में अतिक्रमण की स्थिति को बयां करने वाले थे। उस समय कुल 2100 सेटेलाइट चित्र मंगाए गए थे। हालांकि, अतिक्रमण पर न तो कार्रवाई की गई और न ही चित्रों के आधार पर अतिक्रमण की भयानक स्थिति को बाहर आने दिया गया। यह चित्र वर्तमान में भी यूसैक कार्यालय में डंप पड़े हैं।