Month: April 2024

UK Board Result 2024: कल सुबह होगा उत्तराखंड बोर्ड का 10वीं और 12वीं का परीक्षा परिणाम घोषित, जानिए कितने बजे होगा घोषित।

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उत्तराखंड बोर्ड की 10वीं और 12वीं का परीक्षा परिणाम 30 अप्रैल यानी कल जारी होगा। माध्यमिक शिक्षा निदेशक के मुताबिक, रिजल्ट घोषित किए जाने को लेकर विभाग की ओर से सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

उत्तराखंड बोर्ड की कक्षा 10वीं और 12वीं के दो लाख से अधिक छात्रों का कल परिणाम घोषित हो जाएगा। 30 अप्रैल को उत्तराखंड बोर्ड की कक्षा 10वीं और 12वीं का परिणाम जारी किया जाएगा। इस दिन अंक सुधार द्वितीय का रिजल्ट भी जारी किया जाएगा। सुबह 11:30 रिजल्ट घोषित होगा।

उत्तराखंड बोर्ड 12वीं बोर्ड परीक्षाएं 27 फरवरी से 16 मार्च 2024 तक आयोजित की गयी थी। इस साल UK बोर्ड की 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं में कुल दो लाख 10 हजार 354 छात्र शामिल हुए थे।

   जानिए कैसे करें परिणाम डाउनलोड?

  • सबसे पहले उम्मीदवारों को आधिकारिक वेबसाइट यानी ubse.uk.gov.in पर जाएं।
  • इसके बाद होम पेज पर उपलब्ध यूके बोर्ड 12वीं रिजल्ट 2024 लिंक पर क्लिक करें।
  • अपना रोल नंबर डालें और सबमिट बटन पर क्लिक करें।
  • अब रिजल्ट स्क्रीन पर दिखाई देगा।
  • छात्र अपना परिणाम डाउनलोड कर सकते हैं और आगे की आवश्यकता के लिए प्रिंटआउट ले लें।

 

 

दक्षिण भारत कई इलाकों में गहराया जल संकट, जलाशयों का स्तर घटकर सिर्फ 17 प्रतिशत बचा. जानिए कौन हैं वो राज्य।

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गर्मियां शुरू होने के साथ ही देश में जल संकट गहराना शुरू हो गया है। दक्षिण भारत में स्थिति ज्यादा खराब है। दक्षिण भारत के राज्य गंभीर जल संकट का सामना कर रहे हैं और स्थिति ये है कि जल भंडारण जलाशयों की क्षमता घटकर केवल 17 प्रतिशत रह गई है। केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) ने यह जानकारी मिली।

दक्षिणी राज्यों में जलसंकट की स्थिति गंभीर
दक्षिण भारत के राज्यों में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु आते हैं। सीडब्ल्यूसी द्वारा भारत के विभिन्न क्षेत्रों के जलाशयों के भंडारण स्तर के संबंध में बृहस्पतिवार को जारी बुलेटिन में बताया गया कि दक्षिणी क्षेत्र में आयोग की निगरानी के तहत 42 जलाशय हैं जिनकी कुल भंडारण क्षमता 53.334 बीसीएम (अरब घन मीटर) है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इन जलाशयों में मौजूदा कुल भंडारण 8.865 बीसीएम है, जो उनकी कुल क्षमता का केवल 17 प्रतिशत ही है।

यह आंकड़ा पिछले वर्ष की समान अवधि के दौरान भंडारण स्तर (29 प्रतिशत) और इसी अवधि के दस साल के औसत (23 प्रतिशत) की तुलना में काफी कम है। दक्षिणी क्षेत्र के जलाशयों में भंडारण का कम स्तर इन राज्यों में पानी की बढ़ती कमी और सिंचाई, पेयजल और पनबिजली के लिए संभावित चुनौतियों का संकेत है।

पूर्वी क्षेत्र में हालात थोड़े सुधरे
पूर्वी क्षेत्र, जिसमें असम, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य आते हैं, में पिछले साल और दस साल के औसत की तुलना में जल भंडारण स्तर में सकारात्मक सुधार दर्ज किया गया है। आयोग ने कहा कि इस क्षेत्र में, 20.430 बीसीएम की कुल भंडारण क्षमता वाले 23 निगरानी जलाशयों में अभी 7.889 बीसीएम पानी है, जो उनकी कुल क्षमता का 39 प्रतिशत है। यह पिछले वर्ष की समान अवधि (34 प्रतिशत) और दस साल के औसत (34 प्रतिशत) की तुलना में सुधार का संकेत है।
पश्चिमी क्षेत्र में गुजरात और महाराष्ट्र शामिल हैं और वहां भंडारण स्तर 11.771 बीसीएम है जो 49 निगरानी जलाशयों की कुल क्षमता का 31.7 प्रतिशत है। यह पिछले वर्ष के भंडारण स्तर (38 प्रतिशत) और दस साल के औसत (32.1 प्रतिशत) की तुलना में कम है। इसी तरह, उत्तरी और मध्य क्षेत्रों में भी जल भंडारण स्तर में गिरावट देखी गई है।

Forest Fire: उत्तराखंड में जलते जंगल, कुमाऊं के जंगलों में 26 जगह पर लगी आग; बेबस है विभाग।

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Electricity: उत्तराखंड के 27 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को लगा बड़ा झटका, महंगी होगी बिजली।

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उत्तराखंड में बिजली इस सप्ताह से महंगी हो सकती है। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग नई विद्युत दरें जारी करने जा रहा, जो एक अप्रैल से लागू मानी जाएंगी। आचार संहिता के बीच चुनाव आयोग ने नियामक आयोग को इसकी अनुमति दे दी है।

27 लाख से अधिक उपभोक्ताओं के लिए ये दरें जारी होंगी। दरअसल, यूपीसीएल को राज्य की मांग पूरी करने के लिए बिजली खरीद पर 1281 करोड़ ज्यादा देने पड़ रहे हैं। इसकी भरपाई के लिए एक अप्रैल से शुरू हुए वित्तीय वर्ष में यूपीसीएल ने बिजली दरों में 23 से 27 प्रतिशत बढ़ोतरी की सिफारिश की थी।

इस बढ़ोतरी को लेकर उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग में याचिका दायर की थी। इस याचिका पर नियामक आयोग ने प्रदेशभर में जनसुनवाई की। इसके अलावा सभी हितधारकों से भी बातचीत करके सुझाव लिए। यह दरें एक अप्रैल से लागू की जानी थीं, लेकिन इससे पहले ही लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू हो गई।

19 अप्रैल को राज्य में लोस चुनाव संपन्न होने के बाद नियामक आयोग ने चुनाव आयोग से नई विद्युत दरें जारी करने को लेकर निर्देश मांगे थे। नियामक आयोग के सचिव नीरज सती ने बताया, चुनाव आयोग ने अनुमति दे दी है। अब वह तैयारी कर रहे हैं। इस सप्ताह के अंत तक नई दरों की घोषणा की जा सकती है, जो एक अप्रैल से लागू मानी जाएंगी।

Election 2024: उत्तराखंड में हुआ कम मतदान, बहिष्कार के मामलों का सरकार ने लिया संज्ञान।

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भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा, कम मतदान और इसके बहिष्कार के मामलों का सरकार ने संज्ञान लिया है। उन्होंने यह बात भाजपा प्रदेश कार्यालय में मीडिया से वार्ता के दौरान कही। दावा किया कि कुल मतदान का 75 प्रतिशत मत भाजपा के पक्ष में हुआ। कम मतदान की एक वजह उन्होंने कांग्रेस की निराशा को बताया।

कहा, प्रतिस्पर्धा के अभाव में विपक्ष के समर्थक मतदान से दूर रहे। चुनाव के बाद पहली बार पार्टी मुख्यालय में मीडिया से मुखातिब भट्ट ने कहा, देवभूमि ने दिल खोलकर मोदी के लिए मतदान किया है। हमेशा सक्रिय रहने वाले भाजपा के बूथ अध्यक्ष, पन्ना प्रमुख एवं शक्ति केंद्रों ने बेहतर कार्य करते हुए मतदाताओं को बूथ तक पहुंचाने के लिए कार्य किया है। सभी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं ने दिए गए दायित्व को जिम्मेदारी के साथ निभाया।

भट्ट ने कहा, वोट न देना किसी समस्या का समाधान नहीं है, क्योंकि इनमें अधिकतर जगह पर्यावरण, कानूनी, जियोग्राफिक एवं तकनीकी कारणों से सड़क एवं विकास कार्यों में गतिरोध आया है। सीएम ने इसका संज्ञान लिया है, जल्द ही समस्याओं का समाधान किया जाएगा। कम मतदान को उन्होंने प्रतिस्पर्धा का अभाव बताया। कहा, विपक्ष विशेषकर कांग्रेस ने चुनाव से पहले ही हार मान ली। कहा, इससे राज्य में प्रतिस्पर्धा का अभाव दिखाई दिया। यही वजह है कि लोग मतदान के लिए थोड़ा कम निकले।

विपक्ष के बस्ते तक नहीं दिखे-
मतदान केंद्रों के पास बड़ी संख्या में विपक्ष के बस्ते तक नहीं दिखे। कम मतदान का सबसे बड़ा कारण कांग्रेस समर्थकों की उदासीनता रही है। इस मौके पर प्रदेश महामंत्री आदित्य कोठारी, विधायक विनोद चमोली, प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान, सह प्रभारी राजेंद्र नेगी, प्रदेश प्रवक्ता कमलेश रमन आदि मौजूद रहे।

‘हारी हुई 23 विस सीटों में मत प्रतिशत बढ़ा’-

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, जहां-जहां प्रतिस्पर्धा नजर आई वहां वोट प्रतिशत बढ़ा। विधानसभा चुनाव में हारी हुई 23 सीटों पर प्रतिस्पर्धा नजर आई यही वजह रही यहां मत प्रतिशत अधिक रहा।

चुनाव आयोग को भी नए उपायों पर करना होगा विचार-

भट्ट ने कहा, भविष्य में मत प्रतिशत बढ़ाने के लिए चुनाव आयोग के साथ सभी पार्टियों को प्रयास करना चाहिए। हमें मतदाताओं को जागरूक करना चाहिए। चुनाव आयोग को भी अपनी पद्धति में बदलाव की जरूरत है। बताया, उनके गांव में 334 में से 134 मतदाता थे, लेकिन उन सबके वोट देहरादून के बने हैं। वहीं, मतदान वाले दिन दो सौ से अधिक विवाह थे, इसके अलावा लगातार तीन दिन छुट्टियां थी।

 

Uttarakhand Board Result 2024: इस तारीख को होगा उत्तराखंड बोर्ड का रिजल्ट जारी, जानिए पूरी डिटेल.

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उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद का परीक्षा फल 30 अप्रैल को जारी किया जाएगा। इस दिन अंक सुधार द्वितीय का परीक्षा फल भी जारी किया जाएगा।
 उत्तराखंड बोर्ड के सभागार में परीक्षाफल समिति की सुबह 10 बजे बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता बोर्ड के सभापति महावीर सिंह बिष्ट ने की। सभापति ने बताया 30 अप्रैल को उत्तराखंड बोर्ड की हाईस्कूल व इंटर परीक्षा फल जारी किया जाएगा। इस दिन अंक सुधार द्वितीय का परीक्षा फल भी जारी किया जाएगा। परीक्षाफल सुबह 11:30 बजे घोषित होगा। बैठक में सचिव वीपी सिमल्टी, अपर सचिव बीएम रावत आदि मौजूद रहे।

Uttarakhand: कांग्रेस से बीजेपी में शामिल हुईं पूर्व मंत्री हरक सिंह की बहू अनुकृति गुसाईं।

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उत्तराखंड कांग्रेस के दिग्गज नेता हरक सिंह रावत की पुत्रवधु अनुकृति गुसाईं ने आज भाजपा का दामन थाम लिया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। अनुकृति के साथ उनके कई समर्थकों ने भी भाजपा ज्वाइन की।

बता दें कि उन्होंने लोकसभा चुनाव से पहले ही कांग्रेस से इस्तीफा दिया था। चुनाव प्रचार के दाैरान अनुकृति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों का समर्थन किया था। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा था कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में ही देश विश्व की तीसरी महाशक्ति बन सकता है। मैंने हमेशा उत्तराखंड को विकसित राज्य बनने का सपना देखा। ये सपना मोदीजी के नेतृत्व में साकार हो सकता है। तब से कयास लगाए जा रहे थे कि वह जल्द ही भाजपा में शामि हो सकती हैं। वहीं, आज उन्होंने देहरादून में भाजपा प्रदेश कार्यालय में पार्टी की सदस्यता ली।

अनुकृति गुसाईं मिस इंडिया भी रह चुकी हैं। वह पहाड़ की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लंबे समय से काम कर रही हैं। अनुकृति पिछले विधानसभा चुनाव में लैंसडोन सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ी थीं। उन्हें भाजपा के दिलीप रावत ने हराया था। इसके बाद से अनुकृति कांग्रेस में खास सक्रिय नजर नहीं आ रहीं थीं।

हल्द्वानी में बढ़ेगा पानी का संकट, बूंद-बूंद को तरस सकते हैं लोग, एक वजह ने किया सभी को परेशान.

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हल्द्वानी में गर्मी बढ़ने और गौला का जलस्तर कम होने का असर अब शहर में भी दिखने लगा है। गौला की पेयजल लाइन वाले कई इलाकों में पानी का संकट गहरा गया है। बारिश नहीं होने से गौला का जलस्तर 99 क्यूसेक पहुंच गया है, जबकि मार्च में बारिश होने के बाद जलस्तर 200 क्यूसेक पहुंच गया था। लगातार जलस्तर घटने से अब नहरों और फिल्टर प्लांट को पर्याप्त पानी नहीं मिल सकेगा।

दमुवाढूंगा, हिम्मतपुर भगवानपुर, इंदिरा नगर, नैनीताल रोड, बरेली रोड और लालडांठ के कई इलाकों में गौला की पेयजल लाइन से पानी मिलता है लेकिन गर्मी की शुरुआत होते ही इन लाइनों में प्रेशर कम होने लगा है। गौला से 35 एमएलडी पानी शीशमहल फिल्टर प्लांट को दिया जाता है, जबकि 100 क्यूसेक पानी की आवश्यकता हर रोज सिंचाई के लिए रहती है। जलस्तर कम होने पर रोस्टर के हिसाब से किसानों को पानी दिया जाता है। विभाग की मानें तो शहर को हर दिन 150 से 200 एमएलडी पानी की आवश्यकता होती है लेकिन अब गौला का जलस्तर 99 क्यूसेक रहने से फिल्टर प्लांट को पानी देने के बाद मात्र 84 क्यूसेक पानी गौला में भेजा जा रहा है, जिससे सिंचाई के लिए भी संकट पैदा होने लगा है।

गौला से हर रोज 35 एमएलडी पानी फिल्टर प्लांट को दिया जाता है। जिससे शहर में पेयजल की आपूर्ति होती है। बचे हुए पानी को सिंचाई विभाग आवश्यकता अनुसार नहराें के माध्यम से बांटता है। – नीरज तिवारी, सहायक अभियंता, जल संस्थान
नए कनेक्शन देने पर रोक-
जिले में अब नए भवन निर्माण के लिए जल संयोजन भी निर्माण कार्य को प्रतिबंधित कर दिया गया है। वहीं नए संयोजनों को भी अगले आदेशों तक रोका गया है। जिला प्रशासन ने सर्विस सेंटरों में वाहनों की धुलाई और सर्विस कनेक्शन पर टुल्लू पंप के प्रयोग को प्रतिबंधित कर दिया है। जल संस्थान के एसई विशाल कुमार सक्सेना ने बताया कि जिला प्रशासन के आदेशों के तहत गर्मी के सीजन में नए कनेक्शनों पर रोक लगाई है।

Election 2024: चुनाव में उत्तराखंड में पोलिंग बूथों पर दिव्यांग और वृद्ध वोटरों की सहायता करेंगे 14 हजार से अधिक स्वयंसेवक. 

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प्रदेश में मतदान के दिन दिव्यांग और वृद्ध मतदाताओं की पोलिंग बूथों पर 14,032 स्वयंसेवक सहायता करेंगे। राज्य नोडल अधिकारी दिव्यांगजन गीताराम नौटियाल के मुताबिक, दिव्यांग और वृद्ध मतदाताओं की सहायता के उद्देश्य से राज्य में पहली बार बड़े स्तर पर बूथ वार संसाधनों की मैपिंग की गई है।

बताया, 80,335 दिव्यांग और 85 से अधिक आयु के 65,150 वृद्ध मतदाताओं को चिह्नित किया गया है। राज्य नोडल अधिकारी ने बताया, मतदान के दिन मतदाताओं को अधिक से अधिक सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से 1,344 व्हील चेयर, 1,623 डोलियां, 95 ब्लाइंड स्टिक का बूथवार मैप किया गया है। आवागमन के लिए 208 वाहन राज्यभर में तैनात किए जाएंगे।

बताया, राज्य में 51,100 दिव्यांगजनों ने सक्षम एप को अपने मोबाइल पर डाउनलोड किया है। उन्होंने यह भी बताया, राज्य की हर विधानसभा में एक-एक दिव्यांग बूथ तैयार करने के साथ ही हर जिले में एक आदर्श दिव्यांग बूथ तैयार किया जा रहा है। जहां हेल्प डेस्क, रैंप, व्हील चेयर और सुविधा डेस्क बनाई जाएगी। इन बूथों को मतदाताओं के लिए आकर्षक बनाने का काम किया जा रहा है।

बताया, मतदान में अधिक भागीदारी के लिए जिलों में जिला समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारी के मार्गदर्शन में काम कर रहे हैं। इसके अलावा बागेश्वर और चमोली जैसे दूरदराज के जिलों में दिव्यांग रथ के माध्यम से मतदान जागरूकता का काम किया जा रहा है।

 

Uttarakhand: धधकते जंगलों की आग बुझाने इस साल नहीं आएंगे हेलिकॉप्टर, न ही कोई प्रस्ताव और न ही विभाग को जरूरत।

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उत्तराखंड में जंगल इस साल पूरी गर्मी धधकते रहेंगे, लेकिन आग बुझाने के लिए हेलिकॉप्टर नहीं आएंगे। मुख्य वन संरक्षक वनाग्नि एवं आपदा प्रबंधन निशांत वर्मा बताते हैं कि जंगलों की आग पर काबू पाने के लिए हेलिकॉप्टरों से मदद लिए जाने का कोई प्रस्ताव नहीं है, विभाग को इसकी जरूरत नहीं है।

प्रदेश के जंगलों में आग के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। गर्मी तेज होते ही जगह-जगह से आग के प्रकरण सामने आ रहे हैं। बुधवार को गढ़वाल और कुमाऊं में 31 जगह जंगलों में आग लगी। हालांकि बृहस्पतिवार को वनाग्नि के प्रकरणों में राहत है। गढ़वाल, कुमाऊं और वन्यजीव क्षेत्र में पिछले 24 घंटे में वनाग्नि के 9 प्रकरण सामने आए हैं, जिससे 10 हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है।

मुख्य वन संरक्षक निशांत वर्मा बताते हैं कि जंगल में आग लगने की सूचना मिलते ही क्रू टीम मौके पर जाकर आग बुझा रही है। विभाग के पास फायर वाचर हैं, कुछ नए कर्मचारी भी मिले हैं। राज्य वनाग्नि एवं आपदा प्रबंधन कक्ष को जहां कहीं से भी जंगल में आग लगने की सूचना मिलती है, प्रयास किया जाता है कि जल्द से जल्द टीम मौके पर पहुंचे। कुछ जगह जंगलों के नजदीक खेतों में खरपतवार जलाने से जंगलों में आग फैलने की शिकायत मिली है, इसके लिए ग्रामीणों को भी जागरूक किया जा रहा है।

 

2020-21 में वनाग्नि बुझाने के लिए लगाए थे हेलीकॉप्टर-
दुनियाभर में जंगलों में आग लगने पर हेलीकॉप्टरों की मदद ली जाती है। इसमें लचीली बाल्टी या बेली टैंक होता है। हर बार आग पर उड़ान भरने पर ये हेलीकॉप्टर चार हजार लीटर तक पानी गिराते हैं। देश में जंगलों की आग बुझाने में वायुसेना के एमआई 17-वी 5 हेलीकॉप्टर काफी उपयोगी रहे हैं। वन विभाग के अधिकारी बताते हैं कि उत्तराखंड में वर्ष 2020-21 में हेलीकॉप्टर से जंगलों की आग बुझाने के प्रयास किए गए थे, लेकिन पहाड़ में इस तरह के प्रयास सफल नहीं रहे।

उत्तराखंड में तीन दिन में जंगलों में 56 जगह लगी आग-
उत्तराखंड में पिछले तीन दिन में 56 स्थानों पर जंगल में आग लगने के मामले सामने आए हैं। जिससे 73 हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है। इसे मिलाकर अब तक वनाग्नि की 131 घटनाओं में 188 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र प्रभावित हो चुका है। बृहस्पतिवार को नैनीताल वन प्रभाग के आरक्षित क्षेत्र में दो, तराई पूर्वी वन प्रभाग में पांच, लैंसडाउन वन प्रभाग में एक और राजाजी टाइगर रिजर्व आरक्षित क्षेत्र में वनाग्नि का एक मामला सामने आया है।