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Uttarakhand: रेलवे में होगी पेट्रोलियम बिजली सप्लाई, सोनप्रयाग से धाम तक 33 केवी लाइन को मिली मंजूरी

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उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (यूईआरसी) ने केदारनाथ धाम में विद्युत व्यवस्था को सुदृढ़ और निर्बाध बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। आयोग ने सोनप्रयाग से केदारनाथ धाम तक मौजूदा क्षतिग्रस्त 11 केवी भूमिगत लाइन को 33 केवी डबल सर्किट ओवरहेड लाइन में बदलने के प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है।

इस पूरी परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 11.12 करोड़ रुपये है, जिसे यूपीसीएल के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने पहले ही मंजूरी दे दी है। प्रोजेक्ट के लिए 70 प्रतिशत राशि ऋण (आरईसी लिमिटेड से) और 30 प्रतिशत राशि राज्य सरकार की इक्विटी के माध्यम से जुटाई जाएगी। सोनप्रयाग से केदारनाथ धाम तक लगभग 10.40 किलोमीटर लंबी भूमिगत लाइन को ओवरहेड लाटिस टॉवर लाइन में बदला जाएगा।
यह अपग्रेडेशन केवल अस्थायी नहीं बल्कि स्थायी प्रकृति का है, जो केदारनाथ धाम में प्रस्तावित 33/11 केवी सब-स्टेशन और आगामी रोपवे प्रोजेक्ट की बिजली जरूरतों को पूरा करेगा। यूईआरसी ने बिना पूर्व अनुमति के टेंडर प्रक्रिया और कार्य शुरू करने पर यूपीसीएल को कड़ी चेतावनी दी है लेकिन केदारनाथ यात्रा की महत्ता को देखते हुए इस प्रोजेक्ट को पोस्ट-फैक्टो (कार्योत्तर) मंजूरी प्रदान की है। इसके साथ ही आयोग ने सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के नियमों (जैसे 250 मीटर की स्पैन सीमा) का कड़ाई से पालन करने और सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

Uttarakhand: नया रिकॉर्ड बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही चारधाम यात्रा, अब तक 12.60 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन.

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चारधाम यात्रा नया रिकॉर्ड बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। यात्रा में अब तक 12.60 लाख श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। बुधवार को चारों धामों में एक दिन में 80 हजार श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। चारधाम यात्रा शुरू हुए 25 दिन हो चुके हैं। केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री धाम में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं का आंकड़ा 12.60 लाख पार कर चुका है। केदारनाथ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है।

22 दिनों में ही 5.23 लाख से अधिक तीर्थयात्री दर्शन कर चुके हैं। उच्च हिमालयी क्षेत्र की यात्रा होने से प्रदेश सरकार यहां मौसम के मिजाज पर भी पूरी नजर रखे हुए है। मुख्यमंत्री धामी ने शीर्ष अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मौसम प्रतिकूल होने पर हर एक श्रद्धालु की सुरक्षा और सुविधा का पूरा ध्यान रखा जाए। मुख्यमंत्री धामी ने कहा, चारधाम यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

भीड़ नियंत्रण प्रणाली को प्रभावी बनाया गया
श्रद्धालु सुगमता से दर्शन कर सकें, इसके लिए स्लॉट प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण प्रणाली को प्रभावी बनाया गया है। रियल टाइम डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम का उपयोग किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत केदारनाथ में पुनर्निर्माण कार्य होने के बाद धाम दिव्य और भव्य रूप में नजर आ रहा है।

पैदल यात्रा मार्ग को बेहतर बनाए जाने से श्रद्धालुओं की राह आसान हुई है। सुरक्षित और व्यवस्थित यात्रा के लिए सरकार ने हरसंभव कदम उठाए हैं। मौसम पर नजर रखने के लिए विशेष निगरानी तंत्र बनाया गया है। हर परिस्थिति से निपटने के लिए सरकार तैयार है।

Chardham Yatra: चरम पर श्रद्धालुओं का उत्साह; 23 दिन में 11 लाख के पार पहुंचा दर्शन करने वालों का आंकड़ा

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चारधाम यात्रा में 23 दिन के भीतर दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं का आंकड़ा 11 लाख पार हो गया है। केदारनाथ व बदरीनाथ धाम में प्रतिदिन औसतन 15 से 20 हजार श्रद्धालु दर्शन कर रहे हैं। धामों में मौसम की चुनौतियों के बाद भी श्रद्धालुओं के कदम नहीं थम रहे हैं।

चारधाम यात्रा का आगाज 19 अप्रैल से गंगोत्री व यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने से हुआ था। 22 अप्रैल को केदारनाथ व 23 अप्रैल को बदरीनाथ धाम के कपाट खुले। यात्रा शुरू होते ही इस बार धामों में श्रद्धालुओं को खराब मौसम की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। बारिश से धामों में काफी ठंड है। इसके बावजूद बदरीनाथ व केदारनाथ धाम में आस्था का सैलाब उमड़ रहा है।

पर्यटन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार चारधाम यात्रा में अब तक 11 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। इसमें केदारनाथ धाम में 4.50 लाख से अधिक, बदरीनाथ धाम में 2.70 लाख, गंगोत्री में 1.65 लाख, यमुनोत्री में 1.69 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। इसके अलावा यात्रा पंजीकरण की संख्या 32.75 लाख पहुंच चुकी है।

हरिद्वार कुंभ 2027: हर की पैड़ी पर 39.60 लाख की लागत से बनेंगे तीन अस्थायी रैंप, भीड़ नियंत्रण के लिए बनी है योजना.

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कुंभ मेला 2027 के लिए हरकी पैड़ी पर तीन अस्थायी रैंप का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना पर अनुमानित 139.60 लाख रुपये की लागत आएगी और इसे दो महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। रैंप ब्रह्म कुंड में स्नान करने वाले श्रद्धालुओं, अखाड़ों और स्नानार्थियों की सुविधा के लिए बनाए जाएंगे।

यह निर्माण कार्य कुंभ मेला 2027 के तहत किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य हर की पैड़ी स्थित ब्रह्म कुंड में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को सुगम पहुंच प्रदान करना है। इन अस्थायी रैंप का निर्माण तीन अस्थायी स्टील सेतु पुलों के लिए किया जाएगा।

यह परियोजना कुंभ मेले के दौरान भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहायक होगी। यह कार्य कुंभ मेले के शुरुआत होने से दो महीने पूर्व पूरा किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। इस बार कुंभ मेला 2027 में आने वाले श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए यह परियोजना महत्वपूर्ण साबित होगी।

200 मीटर लंबा और तीन मीटर चौड़ा होगा रैंप-

तीन अस्थायी रैंप का निर्माण तीन अस्थायी स्टील सेतु पुलों के लिए किया जाएगा। प्रत्येक रैंप की अनुमानित लंबाई 200 मीटर और चौड़ाई तीन मीटर निर्धारित की गई है। इससे तीन अलग-अलग सेतू से होकर लोग ब्रह्म कुंड से दूसरी तरफ मेला आरक्षित क्षेत्र के खुले स्थान पर जा सकेंगे। कुंभ मेले की तैयारियों को समय पर अंतिम रूप दिया जा सके इसकी तैयारियों के बीच रैंप के निर्माण को स्वीकृति मिली है।

 

Uttarakhand: चारधाम यात्रा को लेकर श्रद्धालुों में भारी उत्साह; 48.30 लाख से अधिक यात्री कर चुके है दर्शन.

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चारधाम यात्रा में इस बार श्रद्धालुओं की संख्या ने नया रिकॉर्ड बना लिया है। इस बार 12 अक्तूबर को बीते वर्ष पूरे यात्रा काल में दर्शन करने वाले 48.04 लाख श्रद्धालुओं का आंकड़ा पार हो गया है। जबकि यात्रा अभी जारी है। 25 नवंबर को बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के साथ ही यात्रा अगले साल तक के लिए बंद हो जाएगी।

पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार 2024 में चारधाम व हेमकुंड साहिब में कुल 48.04,216 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए थे। इस बार अक्तूबर माह में ही यह आंकड़ा पार होने से नया रिकॉर्ड बन गया है। जबकि 2023 में चारधाम यात्रा में 56 लाख से अधिक श्रद्धालु आए थे। इस साल खराब मौसम के साथ आपदा की घटनाओं का चारधाम यात्रा पर बड़ा असर पड़ा। उत्तरकाशी जिले के धराली व हर्षिल में आए भयानक आपदा से यमुनोत्री व गंगोत्री धाम की यात्रा कई दिनों तक पूरी तरह से बंद रही।

क्षतिग्रस्त गंगोत्री नेशनल हाईवे यातायात के लिए बहाल होने पर गंगोत्री व यमुनोत्री धाम की यात्रा शुरू हो पाई। अब चारधाम यात्रा ने श्रद्धालुओं की संख्या में नया रिकॉर्ड बनाया है। चारधाम यात्रा प्रबंधन एवं नियंत्रण संगठन की रिपोर्ट के अनुसार 30 अप्रैल से 12 अक्तूबर 2025 तक हेमकुंड साहेब समेत चारधाम यात्रा में 48,30,393 श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं।

 

चारधाम यात्रा में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या-

धाम                2024             2025(12 अक्तूबर तक)
केदारनाथ       16,51,980      16,90,298
बदरीनाथ        14,35,401      14,84,441
गंगोत्री             8,18,273        7,43,733
यमुनोत्री           7,14,779       6,37,480
हेमकुंड साहिब  1,83,592       2,74,441

इस बार प्रदेश में आपदा की चुनौतियों के बावजूद चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या का रिकॉर्ड बनना प्रदेश सरकार की ओर से से किए प्रबंधन व व्यवस्था का परिणाम है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा व सुलभ यात्रा सरकार की प्राथमिकता है। आने वाले समय में चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ेगी।
– सतपाल महाराज, पर्यटन एवं धर्मस्व मंत्री

केदारनाथ में टूटा 2024 का रिकॉर्ड, श्रद्धालुओं की संख्या 16.56 लाख के पार

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चारधाम यात्रा फिर रफ्तार पकड़ गई है। बारिश और बर्फबारी के बावजूद यात्रियों में भारी उत्साह बना हुआ है। केदारनाथ यात्रा ने नया रिकॉर्ड बनाया है।  यहां श्रद्धालुओं की संख्या 16 लाख 52 हजार के पार पहुंच गई, जबकि अभी धाम कपाट बंद होने में 14 दिन का समय बचा है। वर्ष 2024 में पूरे यात्राकाल में 16 लाख 52 हजार 76 यात्री केदार दर्शन के लिए पहुंचे थे।

बुधवार को केदारनाथ धाम में 5614 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। केदार धाम के कपाट आगामी 23 अक्टूबर को भैयादूज के अवसर पर बंद होंगे। अभी यात्रा 15 दिन और चलेगी। इस प्रकार यहां यात्रियों की संख्या ने नया रिकॉर्ड बनाया है। बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में भी अब यात्रियों की संख्या बढ़ी है। प्रदेश सरकार की ओर से श्रद्धालुओं के उत्साह को देखते हुए सुरक्षित यात्रा के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। यात्रा मार्ग में सुरक्षा जवानों की तैनाती की गई है। यात्रा मार्ग पर यातायात सुचारू बना रहे, इसके लिए भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील स्थानों पर मलबे की सफाई के लिए जेसीबी की व्यवस्था की गई है।

बता दें कि इस वर्ष 30 अप्रैल को गंगोत्री एवं यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा का आगाज हो गया था। इसके बाद दो मई को केदारनाथ और चार मई को बदरीनाथ धाम के कपाट आम श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए थे। मानसून सीजन में अतिवृष्टि, बादल फटने और भूस्खलन की घटनाओं के चलते चारधाम यात्रा बुरी तरह प्रभावित हुई है। प्रकृति की विनाशलीला में गंगोत्री धाम का महत्वपूर्ण पड़ाव धराली बुरी तरह तबाह हो गया। मार्ग बुरी तरह तहस-नहस हो जाने से गंगोत्री और यमुनोत्री धाम की यात्रा को रोकना पड़ा था।

बारिश थमने पर भी यहां यात्रा को बहाल करना बड़ी चुनौती था, लेकिन शासन-प्रशासन की टीमों ने युद्धस्तर पर कार्य कर आम जनजीवन की बहाली के साथ ही यात्रा मार्गों को सुचारू किया। दोनों धामों की यात्रा भी सुरक्षा इंतजामों के साथ शुरू हो गई। प्रशासन की ओर से यात्रियों को अभी भी एहतियात बरतने की सलाह दी गई है। यात्रियों को बार-बार आगाह किया गया है कि मौसम खराब होने पर यात्रा करने से बचें। यदि यात्रा मार्ग में हैं, तो सुरक्षित स्थान पर शरण लें।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चारधाम यात्रा से जुड़े सभी जिलाधिकारियों से कहा है कि श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सभी यात्रा मार्गों पर आवश्यक यात्री सुविधाओं और सुरक्षा से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं का पूरा ध्यान रखा जाए। सभी जिम्मेदार अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रखा जाए। आपातकालीन स्थिति में बिना किसी देरी के राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया जाए।

केदारनाथ मंदिर के सोने पर फिर कांग्रेस-भाजपा में आरोप प्रत्यारोप, गोदियाल ने जांच रिपोर्ट को नकारा

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केदारनाथ धाम में गर्भगृह को स्वर्ण मंडित करने के मामले में फिर से कांग्रेस व भाजपा के बीच आरोप प्रत्यारोप शुरू हो गया है। पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सोना गायब होने के मामले की गढ़वाल आयुक्त की रिपोर्ट को सिरे से खारिज किया।

गोदियाल ने कहा, केदारनाथ मंदिर के सोने को लेकर उन्होंने सवाल खड़े किए थे, लेकिन गढ़वाल आयुक्त की जांच में उन्हें शामिल नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह जांच सिर्फ सरकार की बचाने के लिए की गई। समय आने पर कांग्रेस इस मामले का खुलासा करेगी और इसमें संलिप्त लोगों को बेनकाब किया जाएगा।
विपक्ष के आरोप
बीकेटीसी के पूर्व अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने कहा, विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोपों में मैंने सरकार से स्वयं मामले की जांच कराने का आग्रह किया था। इस पर सरकार ने गढ़व़ाल आयुक्त को जांच सौंपी। केदारनाथ मंदिर के गर्भ गृह को स्वर्ण मंडित करने में बीकेटीसी कोई भूमिका नहीं है। एक दानदाता ने शासन को पत्र लिख कर गर्भग्रह को स्वर्ण मंडित करने का आग्रह किया था। एएसआई की रिपोर्ट के बाद सरकार ने इसकी अनुमति दी।कांग्रेस नेता गोदियाल आरोप लगा कर भाग गए। यदि उनके पास कोई तथ्य है तो सक्षम अथाॅरिटी के सामने शिकायत करते या न्यायालय में जाते। कहा, गोदियाल सिर्फ सनसनी फैलाने के लिए केदारनाथ धाम की छवि को धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं।

जल्द शुरू होगा केदारनाथ व हेमकुंड साहिब रोपवे का निर्माण, NHLML व पर्यटन विभाग के बीच एमओयू हुआ

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, उत्तराखंड में रोपवे कनेक्टिविटी नए आयाम स्थापित करने के साथ ही राज्य की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। जल्द ही सोनप्रयाग से केदारनाथ और गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब रोपवे का निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।

समझौते के अनुसार रोपवे के निर्माण में एनएचएलएमएल की 51 प्रतिशत व राज्य सरकार की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी। राजस्व साझेदारी में 90 प्रतिशत धनराशि पर्यटन, परिवहन व गतिशीलता के क्षेत्र में व्यय की जाएगी।मुख्यमंत्री ने कहा, यह समझौता प्रदेश की धार्मिक व सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक पटल पर नई पहचान दिलाने के साथ ही पर्यटन, रोजगार, पर्यावरण संरक्षण और बुनियादी ढांचे में नई संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पर्वतमाला परियोजना के तहत सोनप्रयाग से केदारनाथ के बीच लगभग 4100 करोड की लागत से 12.9 किलोमीटर लंबाई का रोपवे व गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब के बीच 2700 करोड़ की लागत की 12.4 किलोमीटर लंबे रोपवे का निर्माण किया जाएगा।

चारधाम ऑलवेदर रोड, दिल्ली-देहरादून एलिवेटेड रोड, सितारगंज से टनकपुर मोटर मार्ग, पौंटा साहिब-देहरादून, बनबसा से कंचनपुर, भानियावाला से ऋषिकेश, काठगोदाम से लालकुंआ, हल्द्वानी बाईपास और सीमांत क्षेत्रों में रोड कनेक्टिविटी विस्तार किया जा रहा है।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य में हर क्षेत्र में तेजी से विकास कार्य हो रहे हैं। इन रोपवे के निर्माण के बाद श्रद्धालुओं को केदारनाथ व हेमकुंड साहिब के दर्शन करने में काफी सुगमता होगी। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा, यह समझौता राज्य में पर्यटन के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। रोपवे के निर्माण के बाद स्थानीय स्तर पर लोगों की आर्थिकी व रोजगार में वृद्धि होगी।

आपदा का असर…अब केवल केदारनाथ-बदरीनाथ पर टिकी चारधाम यात्रा, लेकिन भूस्खलन बड़ी चुनौती

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आपदा के कारण चारधाम यात्रा केदारनाथ व बदरीनाथ धाम पर टिकी है लेकिन दोनों की यात्रा की राह में भूस्खलन बड़ी चुनौती है। उत्तरकाशी जिले में आई आपदा से गंगोत्री व यमुनोत्री धाम की यात्रा पूरी तरह से बंद है। इस बार भारी बारिश से चारधाम यात्रा के संचालन पर ज्यादा असर पड़ा है।आमतौर पर मानसून सीजन चारधाम यात्रा में आने वाले तीर्थ यात्रियों की संख्या में कमी आती है। सितंबर माह में फिर से यात्रा की रफ्तार बढ़ जाती है लेकिन इस बार उत्तरकाशी जिले में आई आपदा से गंगोत्री व यमुनोत्री धाम की यात्रा बंद पड़ी है। श्रद्धालुओं के जयकारों से गूंजने वाले दोनों धामों में इन दिनों सन्नाटा पसरा है।

 

पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार 30 अप्रैल से चारधाम यात्रा शुरू हुई थी। अब तक चारधाम में 42.54 लाख से अधिक तीर्थयात्री दर्शन कर चुके हैं। गंगोत्री व यमुनोत्री धाम की यात्रा बंद है। जबकि केदारनाथ व बदरीनाथ धाम में प्रतिदिन तीन से पांच हजार श्रद्धालु दर्शन कर रहे हैं। बदरीनाथ धाम मार्ग पर कमेड़ा, लामबगड़ भूस्खलन के कारण भूस्खलन से यात्रा बाधित हो रही है। जबकि केदारनाथ धाम जाने के लिए सोनप्रयाग व गौरीकुंड के बीच भूस्खलन एक बड़ी चुनौती है।

पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज का कहना है कि आपदा के कारण चारधाम यात्रा में रफ्तार थमी है। मौसम बदलने के बाद फिर से यात्रा गति पकड़ेगी। इस बार बारिश के कारण जगह-जगह भूस्खलन की संभावना अधिक रहती है। इसे देखते हुए तीर्थयात्रियों को मौसम की जानकारी प्राप्त करने के बाद यात्रा करनी चाहिए।

 

चारधाम यात्रा व हेमकुंड साहिब में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या
       धाम                                    दर्शन कर चुके तीर्थयात्री

 

  • केदारनाथ                                          14.80 लाख
  • बदरीनाथ                                           12.78 लाख
  • गंगोत्री                                                6.69 लाख
  • यमुनोत्री                                              5.86 लाख
  • हेमकुंड साहिब                                    2.49 लाख

धार्मिक स्थलों के लिए बनेगा मास्टर प्लान,भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा और जनसुविधाओं के लिए तैयार होगा विस्तृत खाका

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हरिद्वार स्थित मनसा देवी मंदिर में 27 जुलाई को हुई दुखद घटना के बाद, मुख्यमंत्री ने तीर्थ यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को लेकर राज्य के सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों के लिए मास्टर प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में मंगलवार को प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु ने सचिव पर्यटन को आदेश जारी कर धार्मिक स्थलों पर भीड़ नियंत्रण, प्रवेश-निकास व्यवस्था और जनसुविधाओं के लिए शीघ्र मास्टर प्लान तैयार करने को कहा है।

प्रमुख सचिव ने निर्देश दिए कि जिन धार्मिक स्थलों पर तीर्थयात्रियों की अधिक संख्या रहती है, उन्हें प्राथमिकता दी जाए और मास्टर प्लान के निर्माण एवं क्रियान्वयन में दोनों मंडलों के मंडलायुक्तों का सहयोग लिया जाए। साथ ही तीर्थ स्थलों के मार्गों पर यदि कोई अवैध अतिक्रमण है, तो उन्हें प्राथमिकता के आधार पर हटाया जाए।

मास्टर प्लान में शामिल प्रमुख बिंदु:

भीड़ नियंत्रण और मार्गदर्शन व्यवस्था

स्थल की धारण क्षमता का वैज्ञानिक आकलन व विकास

पृथक प्रवेश व निकास मार्ग

प्रतीक्षा स्थलों का निर्माण

आपातकालीन निकासी के विकल्प

स्वच्छ पेयजल, शौचालय, प्राथमिक उपचार केंद्र

सुव्यवस्थित सूचना प्रणाली

पार्किंग की समुचित व्यवस्था

पर्याप्त सुरक्षा बलों की तैनाती

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि:

> “उत्तराखंड में हर वर्ष करोड़ों तीर्थ यात्री आते हैं। उनकी सुरक्षा और सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता है। सभी प्रमुख तीर्थ स्थलों के आसपास जनसुविधाएं विकसित कर यात्रा को अधिक सुव्यवस्थित बनाया जाएगा।”