कुंभ मेला 2027 के लिए हरकी पैड़ी पर तीन अस्थायी रैंप का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना पर अनुमानित 139.60 लाख रुपये की लागत आएगी और इसे दो महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। रैंप ब्रह्म कुंड में स्नान करने वाले श्रद्धालुओं, अखाड़ों और स्नानार्थियों की सुविधा के लिए बनाए जाएंगे।
चारधाम यात्रा में इस बार श्रद्धालुओं की संख्या ने नया रिकॉर्ड बना लिया है। इस बार 12 अक्तूबर को बीते वर्ष पूरे यात्रा काल में दर्शन करने वाले 48.04 लाख श्रद्धालुओं का आंकड़ा पार हो गया है। जबकि यात्रा अभी जारी है। 25 नवंबर को बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के साथ ही यात्रा अगले साल तक के लिए बंद हो जाएगी।
चारधाम यात्रा फिर रफ्तार पकड़ गई है। बारिश और बर्फबारी के बावजूद यात्रियों में भारी उत्साह बना हुआ है। केदारनाथ यात्रा ने नया रिकॉर्ड बनाया है। यहां श्रद्धालुओं की संख्या 16 लाख 52 हजार के पार पहुंच गई, जबकि अभी धाम कपाट बंद होने में 14 दिन का समय बचा है। वर्ष 2024 में पूरे यात्राकाल में 16 लाख 52 हजार 76 यात्री केदार दर्शन के लिए पहुंचे थे।

बुधवार को केदारनाथ धाम में 5614 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। केदार धाम के कपाट आगामी 23 अक्टूबर को भैयादूज के अवसर पर बंद होंगे। अभी यात्रा 15 दिन और चलेगी। इस प्रकार यहां यात्रियों की संख्या ने नया रिकॉर्ड बनाया है। बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में भी अब यात्रियों की संख्या बढ़ी है। प्रदेश सरकार की ओर से श्रद्धालुओं के उत्साह को देखते हुए सुरक्षित यात्रा के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। यात्रा मार्ग में सुरक्षा जवानों की तैनाती की गई है। यात्रा मार्ग पर यातायात सुचारू बना रहे, इसके लिए भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील स्थानों पर मलबे की सफाई के लिए जेसीबी की व्यवस्था की गई है।
बता दें कि इस वर्ष 30 अप्रैल को गंगोत्री एवं यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा का आगाज हो गया था। इसके बाद दो मई को केदारनाथ और चार मई को बदरीनाथ धाम के कपाट आम श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए थे। मानसून सीजन में अतिवृष्टि, बादल फटने और भूस्खलन की घटनाओं के चलते चारधाम यात्रा बुरी तरह प्रभावित हुई है। प्रकृति की विनाशलीला में गंगोत्री धाम का महत्वपूर्ण पड़ाव धराली बुरी तरह तबाह हो गया। मार्ग बुरी तरह तहस-नहस हो जाने से गंगोत्री और यमुनोत्री धाम की यात्रा को रोकना पड़ा था।

बारिश थमने पर भी यहां यात्रा को बहाल करना बड़ी चुनौती था, लेकिन शासन-प्रशासन की टीमों ने युद्धस्तर पर कार्य कर आम जनजीवन की बहाली के साथ ही यात्रा मार्गों को सुचारू किया। दोनों धामों की यात्रा भी सुरक्षा इंतजामों के साथ शुरू हो गई। प्रशासन की ओर से यात्रियों को अभी भी एहतियात बरतने की सलाह दी गई है। यात्रियों को बार-बार आगाह किया गया है कि मौसम खराब होने पर यात्रा करने से बचें। यदि यात्रा मार्ग में हैं, तो सुरक्षित स्थान पर शरण लें।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चारधाम यात्रा से जुड़े सभी जिलाधिकारियों से कहा है कि श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सभी यात्रा मार्गों पर आवश्यक यात्री सुविधाओं और सुरक्षा से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं का पूरा ध्यान रखा जाए। सभी जिम्मेदार अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रखा जाए। आपातकालीन स्थिति में बिना किसी देरी के राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया जाए।
केदारनाथ धाम में गर्भगृह को स्वर्ण मंडित करने के मामले में फिर से कांग्रेस व भाजपा के बीच आरोप प्रत्यारोप शुरू हो गया है। पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सोना गायब होने के मामले की गढ़वाल आयुक्त की रिपोर्ट को सिरे से खारिज किया।
बीकेटीसी के पूर्व अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने कहा, विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोपों में मैंने सरकार से स्वयं मामले की जांच कराने का आग्रह किया था। इस पर सरकार ने गढ़व़ाल आयुक्त को जांच सौंपी। केदारनाथ मंदिर के गर्भ गृह को स्वर्ण मंडित करने में बीकेटीसी कोई भूमिका नहीं है। एक दानदाता ने शासन को पत्र लिख कर गर्भग्रह को स्वर्ण मंडित करने का आग्रह किया था। एएसआई की रिपोर्ट के बाद सरकार ने इसकी अनुमति दी।कांग्रेस नेता गोदियाल आरोप लगा कर भाग गए। यदि उनके पास कोई तथ्य है तो सक्षम अथाॅरिटी के सामने शिकायत करते या न्यायालय में जाते। कहा, गोदियाल सिर्फ सनसनी फैलाने के लिए केदारनाथ धाम की छवि को धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, उत्तराखंड में रोपवे कनेक्टिविटी नए आयाम स्थापित करने के साथ ही राज्य की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। जल्द ही सोनप्रयाग से केदारनाथ और गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब रोपवे का निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
समझौते के अनुसार रोपवे के निर्माण में एनएचएलएमएल की 51 प्रतिशत व राज्य सरकार की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी। राजस्व साझेदारी में 90 प्रतिशत धनराशि पर्यटन, परिवहन व गतिशीलता के क्षेत्र में व्यय की जाएगी।मुख्यमंत्री ने कहा, यह समझौता प्रदेश की धार्मिक व सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक पटल पर नई पहचान दिलाने के साथ ही पर्यटन, रोजगार, पर्यावरण संरक्षण और बुनियादी ढांचे में नई संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पर्वतमाला परियोजना के तहत सोनप्रयाग से केदारनाथ के बीच लगभग 4100 करोड की लागत से 12.9 किलोमीटर लंबाई का रोपवे व गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब के बीच 2700 करोड़ की लागत की 12.4 किलोमीटर लंबे रोपवे का निर्माण किया जाएगा।
चारधाम ऑलवेदर रोड, दिल्ली-देहरादून एलिवेटेड रोड, सितारगंज से टनकपुर मोटर मार्ग, पौंटा साहिब-देहरादून, बनबसा से कंचनपुर, भानियावाला से ऋषिकेश, काठगोदाम से लालकुंआ, हल्द्वानी बाईपास और सीमांत क्षेत्रों में रोड कनेक्टिविटी विस्तार किया जा रहा है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य में हर क्षेत्र में तेजी से विकास कार्य हो रहे हैं। इन रोपवे के निर्माण के बाद श्रद्धालुओं को केदारनाथ व हेमकुंड साहिब के दर्शन करने में काफी सुगमता होगी। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा, यह समझौता राज्य में पर्यटन के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। रोपवे के निर्माण के बाद स्थानीय स्तर पर लोगों की आर्थिकी व रोजगार में वृद्धि होगी।
आपदा के कारण चारधाम यात्रा केदारनाथ व बदरीनाथ धाम पर टिकी है लेकिन दोनों की यात्रा की राह में भूस्खलन बड़ी चुनौती है। उत्तरकाशी जिले में आई आपदा से गंगोत्री व यमुनोत्री धाम की यात्रा पूरी तरह से बंद है। इस बार भारी बारिश से चारधाम यात्रा के संचालन पर ज्यादा असर पड़ा है।आमतौर पर मानसून सीजन चारधाम यात्रा में आने वाले तीर्थ यात्रियों की संख्या में कमी आती है। सितंबर माह में फिर से यात्रा की रफ्तार बढ़ जाती है लेकिन इस बार उत्तरकाशी जिले में आई आपदा से गंगोत्री व यमुनोत्री धाम की यात्रा बंद पड़ी है। श्रद्धालुओं के जयकारों से गूंजने वाले दोनों धामों में इन दिनों सन्नाटा पसरा है।
पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार 30 अप्रैल से चारधाम यात्रा शुरू हुई थी। अब तक चारधाम में 42.54 लाख से अधिक तीर्थयात्री दर्शन कर चुके हैं। गंगोत्री व यमुनोत्री धाम की यात्रा बंद है। जबकि केदारनाथ व बदरीनाथ धाम में प्रतिदिन तीन से पांच हजार श्रद्धालु दर्शन कर रहे हैं। बदरीनाथ धाम मार्ग पर कमेड़ा, लामबगड़ भूस्खलन के कारण भूस्खलन से यात्रा बाधित हो रही है। जबकि केदारनाथ धाम जाने के लिए सोनप्रयाग व गौरीकुंड के बीच भूस्खलन एक बड़ी चुनौती है।
पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज का कहना है कि आपदा के कारण चारधाम यात्रा में रफ्तार थमी है। मौसम बदलने के बाद फिर से यात्रा गति पकड़ेगी। इस बार बारिश के कारण जगह-जगह भूस्खलन की संभावना अधिक रहती है। इसे देखते हुए तीर्थयात्रियों को मौसम की जानकारी प्राप्त करने के बाद यात्रा करनी चाहिए।
चारधाम यात्रा व हेमकुंड साहिब में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या
धाम दर्शन कर चुके तीर्थयात्री
- केदारनाथ 14.80 लाख
- बदरीनाथ 12.78 लाख
- गंगोत्री 6.69 लाख
- यमुनोत्री 5.86 लाख
- हेमकुंड साहिब 2.49 लाख
हरिद्वार स्थित मनसा देवी मंदिर में 27 जुलाई को हुई दुखद घटना के बाद, मुख्यमंत्री ने तीर्थ यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को लेकर राज्य के सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों के लिए मास्टर प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में मंगलवार को प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु ने सचिव पर्यटन को आदेश जारी कर धार्मिक स्थलों पर भीड़ नियंत्रण, प्रवेश-निकास व्यवस्था और जनसुविधाओं के लिए शीघ्र मास्टर प्लान तैयार करने को कहा है।
प्रमुख सचिव ने निर्देश दिए कि जिन धार्मिक स्थलों पर तीर्थयात्रियों की अधिक संख्या रहती है, उन्हें प्राथमिकता दी जाए और मास्टर प्लान के निर्माण एवं क्रियान्वयन में दोनों मंडलों के मंडलायुक्तों का सहयोग लिया जाए। साथ ही तीर्थ स्थलों के मार्गों पर यदि कोई अवैध अतिक्रमण है, तो उन्हें प्राथमिकता के आधार पर हटाया जाए।
मास्टर प्लान में शामिल प्रमुख बिंदु:
भीड़ नियंत्रण और मार्गदर्शन व्यवस्था
स्थल की धारण क्षमता का वैज्ञानिक आकलन व विकास
पृथक प्रवेश व निकास मार्ग
प्रतीक्षा स्थलों का निर्माण
आपातकालीन निकासी के विकल्प
स्वच्छ पेयजल, शौचालय, प्राथमिक उपचार केंद्र
सुव्यवस्थित सूचना प्रणाली
पार्किंग की समुचित व्यवस्था
पर्याप्त सुरक्षा बलों की तैनाती

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि:
> “उत्तराखंड में हर वर्ष करोड़ों तीर्थ यात्री आते हैं। उनकी सुरक्षा और सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता है। सभी प्रमुख तीर्थ स्थलों के आसपास जनसुविधाएं विकसित कर यात्रा को अधिक सुव्यवस्थित बनाया जाएगा।”
मनसा देवी मंदिर में हुए हादसे के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में श्रद्धालुओं को धारण क्षमता के अनुसार ही प्रवेश देने के निर्देश दिए। हरिद्वार में हुए हादसे को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो इसके लिए अधिकारियों को दिशा निर्देश दे दिए गए हैं। धार्मिक स्थल जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु और तीर्थयात्री दर्शन के लिए आते हैं, वहां व्यवस्थाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है। स्थलों का संभावित विस्तार कराने, पार्किंग एवं ट्रैफिक प्रबंधन और सुरक्षा मानकों के पालन को प्राथमिकता दी जा रही है।
सीएम धामी सोमवार को एफटीआई में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि मनसा देवी मंदिर सहित प्रदेश के सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों पर यह व्यवस्थाएं सख्ती से लागू की जाएंगी। पंचायत चुनाव पर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि त्रि-स्तरीय पंचायत चुनावों के लिए प्रदेशभर की जनता में अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला है। गांवों की सरकार चुनने के लिए मतदाताओं ने विशेष जागरूकता दिखाई है। इसके चलते पहले चरण में मतदान प्रतिशत में वृद्धि हुई है। कहा कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के प्रतिनिधियों का पंचायतों के विकास में बड़ा योगदान रहता है।
यह हैं कुमाऊं में अत्यधिक भीड़भाड़ वाले धार्मिक स्थल
1-कैंची धाम-
नैनीताल जिले के कैंची नामक स्थान पर बाबा नीब करौरी महाराज का आश्रम है। पिछले कुछ साल से यहां बाबा के दर्शन करने आने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यहां रोजाना औसतन 10-12 हजार लोग बाबा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। शनिवार और मंगलवार को यह संख्या बढ़कर 15-18 हजार तक पहुंच जाती है। 15 जून को आश्रम का स्थापना दिवस होता है तब यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या एक से डेढ़ लाख तक रहती है। श्रद्धालुओं की इस संख्या के हिसाब से यहां व्यवस्थाएं ऊंट के मुंह में जीरा है।
2-जागेश्वर धाम-
अल्मोड़ा जिले में स्थित जागेश्वर धाम 124 मंदिरों का एक समूह है। इसे हिमालय का काशी के रूप में भी जाना जाता है। यहां महाशिवरात्रि और श्रावण मास में विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं। देश भर के विभिन्न हिस्सों से लेकर श्रावण मास में यहां शिवार्चन कराने पहुंचते हैं। राजनीति के अलावा फिल्म इंडस्ट्री के बड़े चेहरे भी यहां अक्सर दर्शनों के लिए आते हैं।
3-चितई गोलू मंदिर-
अल्मोड़ा जिले के चितई क्षेत्र में स्थित गोलू देवता मंदिर को घंटियों वाले मंदिर के रूप में भी पहचान मिली है। मान्यता है कि जो कोई व्यक्ति श्रद्धाभाव से यहां गोलू देवता से फरियाद करता है। भगवान उसकी फरियाद को पूरा करते हैं। मनोकामना पूरी होने के बाद भक्त यहां घंटी चढ़ाते हैं। इस मंदिर में प्रतिदिन औसतन चार से पांच हजार श्रद्धालु पहुंचते हैं जबकि विशेष अवसरों पर यह संख्या दस हजार से अधिक रहती है।
4-हाट कालिका मंदिर-
गंगोलीहाट के समीप स्थित हाट कालिका मंदिर, देवी कालिका को समर्पित है। यहां श्रद्धालुओं के साथ ही बड़ी संख्या में सैलानी भी पहुंचते हैं। इसे सैनिकों और पूर्व सैनिकों की आस्था वाले मंदिर के रूप में भी पहचान मिली है। नवरात्रि और विशेष पर्वों पर यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।
5- पूर्णागिरी धाम-
चंपावत जिले में टनकपुर के समीप स्थित है पूर्णागिरी धाम। इसे पूर्णागिरि मंदिर भी कहा जाता है। यह एक प्रसिद्ध शक्तिपीठ है। यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। चैत्र नवरात्र में यहां मेला लगता है जिसमें प्रति दिन हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।
6- गर्जिया मंदिर-
रामनगर के समीप स्थित है गर्जिया माता का मंदिर। यह कोसी नदी में एक टीले पर स्थित है। कार्तिक पूर्णिमा के अलावा गंगा दशहरा, नवरात्र, शिवरात्रि, उत्तरायणी, बसंत पंचमी में भी यहां सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचते हैं।
अवैध निर्माण व अतिक्रमण स्वयं हटा लें, अन्यथा अभियान चल ही रहा है
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकारी जमीनों पर हुए अतिक्रमण को हटाने के लिए सरकार पहले ही जिलाधिकारियों को निर्देश दे चुकी है। अधिकारियों से कहा गया है कि वह अतिक्रमणकारियों को अतिक्रमण हटाने के लिए विधिक सूचना देकर नोटिस जारी करें कि वह स्वयं ही अतिक्रमण अथवा अवैध निर्माण हटा लें। अन्यथा अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान चल ही रहा है। सीएम ने कहा कि अभी तक सरकार राज्य में सात हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कर चुकी है। उन्होंने कहा कि राज्य में विकास को प्राथमिकता से आगे बढ़ाना सरकार का लक्ष्य है। कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में वर्ष 2023-24 के इंडेक्स में सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने में उत्तराखंड पहले स्थान पर आया है। कहा कि विकास हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
बदरीनाथ धाम में कथित ऑनलाइन पूजा कराए जाने का एक मामला सामने आया है। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने पुलिस में इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है क्योंकि बदरीनाथ मंदिर में ऑनलाइन पूजा का कोई नियम नहीं है।
दरअसल सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें बीकेटीसी का लोगो लगाकर ऑनलाइन पूजा कराने का दावा किया जा रहा है। इस वीडियो में एक व्यक्ति यह कहता सुनाई दे रहा है कि राशि भेजने पर श्रद्धालु के नाम से ऑनलाइन पूजा की जाएगी। जब इस फर्जीवाड़े की जानकारी बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति को मिली तो समिति के प्रशासनिक अधिकारी कुलदीप भट्ट ने तत्काल बदरीनाथ थाने में इसकी शिकायत दर्ज कराई।
पूजा के लिए सिर्फ ऑनलाइन टिकट बुक होते हैं
प्रशासनिक अधिकारी ने स्पष्ट किया कि धाम में ऑनलाइन पूजा नहीं कराई जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि मंदिर में होने वाली विभिन्न पूजा की ऑनलाइन बुकिंग जरूर की जाती है जिसके तहत श्रद्धालु पूजा के लिए टिकट बुक करते हैं और फिर उन्हें स्वयं मंदिर आकर पूजा में शामिल होना होता है। पूजा का निष्पादन ऑनलाइन नहीं होता है। समिति ने तीन दिन पहले ही इस मामले में पुलिस को शिकायत पत्र देकर जांच की मांग की थी।
आईटी सेल कर रही जांच
बीकेटीसी के उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती ने भी इस बात पर जोर दिया कि बदरीनाथ मंदिर में ऑनलाइन पूजा का कोई नियम नहीं है। उन्होंने कहा कि वायरल वीडियो की पुलिस के आईटी सेल से भी जांच कराई जा रही है। बदरीनाथ थाना प्रभारी नवनीत भंडारी ने पुष्टि की है कि ऑनलाइन पूजा को लेकर मिले शिकायती पत्र पर जांच जारी है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ओम पुल के निकट गंगा घाट पर आयोजित कार्यक्रम में देशभर से आए शिव भक्त कांवड़ियों के पांव धोकर उनका स्वागत और सम्मान किया। उन्होंने भजन संध्या में भी भाग लिया और कहा कि यह उनका सौभाग्य है कि उन्हें शिव भक्तों का चरण प्रक्षालन कर आशीर्वाद लेने का अवसर मिला। इस दौरान हरिद्वार पहुंचे कांवड़ियों और शिव भक्तों पर हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा भी कराई गई।
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि हरिद्वार में गंगा तट पर गंगा सभा और भारतीय नदी परिषद के तत्वावधान में दुनिया का सबसे ऊंचा, 251 फीट का भगवा ध्वज स्थापित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा केवल भक्ति नहीं, बल्कि सेवा, अनुशासन और सनातन संस्कृति का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस बार अब तक एक करोड़ से ज्यादा शिव भक्त अपनी यात्रा पूरी कर चुके हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हो रहे धार्मिक स्थलों के पुनरोद्धार कार्यों — जैसे काशी कॉरिडोर, राम मंदिर, महाकाल लोक, केदारनाथ पुनर्निर्माण — का भी उल्लेख किया और कहा कि हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर का निर्माण भी प्रस्तावित है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यात्रियों के लिए स्वास्थ्य केंद्र, शौचालय, पार्किंग, विश्राम स्थल, वाटर एंबुलेंस, सीसीटीवी और ड्रोन कैमरों के जरिये सुरक्षा व सुविधा सुनिश्चित की गई है। उन्होंने अपील की कि कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालु अनुशासन और मर्यादा बनाए रखें। उन्होंने कहा कि कुछ लोग यात्रा के उद्देश्य को भुलाकर अशांति फैलाने का प्रयास करते हैं, जो अनुचित है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में नकल विरोधी कानून, धर्मांतरण विरोधी कानून, दंगा विरोधी कानून और समान नागरिक संहिता लागू की गई है। ‘ऑपरेशन कालनेमि’ के जरिए सनातन धर्म के नाम पर धोखा देने वालों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने सभी श्रद्धालुओं, संतों, स्वयंसेवी संगठनों और प्रशासन के सहयोग के लिए आभार जताया और अपील की कि यात्रा को सफल बनाने के लिए नियमों का पालन करें।

इस दौरान अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी,राज्यसभा सासंद कल्पना सैनी,राज्यमंत्री ओमप्रकाश जमदग्नि,शोभाराम प्रजापति,देशराज कर्णवाल, हरिद्वार मेयर किरण जैसल,रुड़की मेयर अनीता देवी,जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी ,विधायक प्रदीप बत्रा ,आदेश चौहान, मदन कौशिक,जिलाध्यक्ष हरिद्वार आशुतोष शर्मा, जिलाध्यक्ष रुड़की मधु,श्रीगंगा सभा अध्यक्ष नितिन गौतम,महामंत्री तन्मय वशिष्ठ,सभापति कृष्ण कुमार ठेकेदार,पूर्व विधायक संजय गुप्ता,प्रणव सिंह चैंपियन, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित,आईजी राजीव स्वरूप,वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र सिंह डोभाल, महामंडलेश्वर ललितानंद गिरि आदि सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे |








