Day: January 16, 2025

Uttarakahnd: दिल्ली चुनाव प्रचार के लिए बीजेपी ने CM धामी को दी बड़ी जिम्मेदारी.. निभाएंगे ये बड़ी भूमिका, पढ़ें पूरी खबर.

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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा का स्टार प्रचारक नियुक्त किया गया है। धामी ने उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू करने भर्ती परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए सख्त कानून बनाने और लव जिहाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने जैसे महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। इन निर्णयों से उनका कद बढ़ा है और उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है।

 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लोकसभा चुनाव और फिर विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा के स्टार प्रचारक के रूप में जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने लोकसभा चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों के लिए तय किए गए स्टार प्रचारकों की सूची में मुख्यमंत्री धामी को प्रमुखता से शामिल किया था।

उत्तराखंड में लागू हुआ यूसीसी-

भाजपा ने मुख्यमंत्री धामी को स्टार प्रचारक बनाया है तो इसके पीछे उनकी सरकार के महत्वपूर्ण निर्णय को माना जाता है। उत्तराखंड देश का ऐसा पहला राज्य है, जिसने समान नागरिक संहिता विधेयक विधानसभा से पारित कराया और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद उसे यह अधिनियम मिल गया है, जो इसी माह क्रियान्वित किया जाएगा।

 

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इस पहल के लिए मुख्यमंत्री धामी देशभर में चर्चा के केंद्र में रहे हैं। इसके साथ ही भर्ती परीक्षाओं में नकल रोकने को सख्त कानून, लव जिहाद के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई, दंगारोधी कानून को लेकर भी उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर सराहना बटोरी।
इन निर्णयों से मुख्यमंत्री धामी का कद बढ़ा है। उनकी सरकार के बड़े निणयों को देश में व्यापक फलक पर देखा जा रहा है। माना जा रहा कि इस सबके दृष्टिगत ही पार्टी ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में उन्हें स्टार प्रचारकों की सूची में स्थान दिया है।

 

सीएम योगी, फडणवीस और एमपी सीएम के नाम भी प्रचारक की लिस्ट में-

धामी को इस सूची में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, नितिन गडकरी, पीयूष गोयल, शिवराज सिंह चौहान, मनोहरलाल खट्टर, धर्मेंद्र प्रधान, सरदार हरदीप पुरी, गिरिराज सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ स्थान मिला है। इस सूची में कुल 40 स्टार प्रचारक हैं।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Uttarakhand-प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा, फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट किए गए जारी.

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दून अस्पताल में फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट जारी करने का मामला सामने आया है। एंटीरेट्रोवाइरल उपचार इकाई (एआरटी) में तैनात एक चिकित्सक ने फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट जारी किए हैं। इसमें एक वार्ड बॉय के संलिप्त होने की बात भी सामने आ रही है। अस्पताल प्रबंधन ने तत्काल प्रभाव से दोनों को हटा दिया है। मामले की जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

इस मामले का खुलासा तब हुआ जब एक मरीज का प्रमाण पत्र अस्पताल वापस आया और उसने प्रमाण पत्र को स्वीकार न किए जाने की बात कही। जब प्रमाण पत्र की जांच की गई तो पता चला कि अस्पताल के एआरटी इकाई में तैनात चिकित्सक ने यह प्रमाण पत्र जारी किया है। जानकारी के मुताबिक एक व्यक्ति ने पूर्व में पैसे देकर चिकित्सक से फिटनेस मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाया था। जहां पर उसको वह मेडिकल जमा करवाना था, वहां के अधिकारियों ने स्वीकार करने से इन्कार कर दिया और मेडिकल सही न होने की बात कही।

इसके बाद जब वह मेडिकल लेकर अस्पताल आया तो मेडिकल के फर्जी होने की बात सामने आई। चिकित्सक के साथ अस्पताल का ही एक वार्ड बॉय भी शामिल था। यह पूरा मामला प्रकाश में आने के बाद दोनों को एआरटी सेंटर से हटा दिया गया है। अस्पताल प्रबंधन मामले की उच्च स्तरीय जांच कराएगा।

दो महीने पहले ही चिकित्सक की एआरटी में की गई थी तैनाती-

अस्पताल प्रबंधन की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक चिकित्सक को नवंबर में ही दून मेडिकल कॉलेज के कम्यूनिटी मेडिसन से एआरटी सेंटर में तैनात किया गया था। पूर्व में एआरटी सेंटर में चिकित्सक न होने की वजह से संबंधित चिकित्सकों को यहां पर तैनात किया गया था। वे एचआईवी रोगियों की जांच कर रहे थे।

 

सिर्फ फैकल्टी को ही मेडिकल सर्टिफिकेट बनाने का अधिकार-

राजकीय दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय में सिर्फ फैकल्टी ही किसी भी प्रकार का मेडिकल सर्टिफिकेट जारी करने के लिए अधिकृत है। ऐसे में इस तरह के सर्टिफिकेट सामने आने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

ऐसे बनता है सही मेडिकल सर्टिफिकेट-

दून अस्पताल में लोग मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाने के लिए आते हैं। इसके लिए उन्हें सबसे पहले ओपीडी का पर्चा बनवाना पड़ता है। इसके बाद संबंधित व्यक्ति को अनिवार्य रूप से फिजिशियन और नेत्र रोग विशेषज्ञ को दिखाना पड़ता है। वहां आवश्यक जांच पूरी होने के बाद चिकित्सक ओपीडी पर्चे पर ही अपनी रिपोर्ट लिख देते हैं। यह प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही कोई भी व्यक्ति मेडिकल सर्टिफिकेट प्राप्त कर सकता है।

फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट बनाने का मामला सामने आने के बाद संबंधित चिकित्सकों और वार्ड बॉय को एआरटी सेंटर से हटा दिया गया है। इस पूरे मामले की जांच की जा रही है। एआरटी सेंटर में जल्द ही नए चिकित्सक की तैनाती की जाएगी।

-डॉ. गीता जैन, प्राचार्य, दून मेडिकल काॅलेज

Uttarakhand: निजी बसों की सवारियों को भी मिले दुर्घटना बीमा/आर्थिक सुरक्षा, CM ने कहा- 10 दिन के भीतर प्रस्ताव प्रस्तुत करें.

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में निजी बसों में सफर करने वाले यात्रियों को भी दुर्घटना बीमा/आर्थिक सुरक्षा का लाभ प्रदान करने के निर्देश दिए है।

मुख्यमंत्री ने सचिव परिवहन को आदेश दिए हैं कि सरकारी और निजी बसों के मुआवजे में एकरूपता लाने के लिए 10 दिन के भीतर प्रस्ताव प्रस्तुत करें। वर्तमान में, उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों में सफर के दौरान दुर्घटना में मृत्यु पर मृतक के परिजनों को मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष और सड़क सुरक्षा कोष से कुल पांच लाख रुपए की सहायता राशि प्रदान की जाती है। इसके अतिरिक्त, निगम की ओर से भी पांच लाख रुपए की दुर्घटना प्रतिकर राशि दी जाती है।

वाहन दुर्घटना के उपरांत मिले एकसमान राहत राशि- CM धामी 

अब निजी बस ऑपरेटर की सवारियों को भी इस योजना का लाभ मिलेगा। इससे दुर्घटनाओं के दौरान निजी बसों के यात्रियों के परिजनों को कुल दस लाख रुपए की राहत राशि मिल सकेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में जनहानि का कष्ट सभी परिवारों के लिए असहनीय होता है। ऐसे में राहत राशि में किसी प्रकार की असमानता नहीं होनी चाहिए।

 

 

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि सड़क सुरक्षा नियमावली को शीघ्र अगली कैबिनेट में प्रस्तुत किया जाए। इसके साथ ही, सड़कों पर इन्फोर्समेंट बढ़ाने, बसों की फिटनेस सुनिश्चित करने, ड्राइवरों का ड्राइविंग टेस्ट और स्वास्थ्य परीक्षण करने तथा शेष क्रैश बैरियर लगाने की प्रक्रिया तेज की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सड़क सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध है और यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। सभी विभागों को इस दिशा में समन्वित प्रयास करने के निर्देश दिए गए हैं।