Month: December 2023

Cyclone Michaung: तमिलनाडु में मिचौंग चक्रवात से भारी बारिश, घरों में घुसा पानी, सड़कों पर चल रही नाव. 

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Cyclone Michaung: बंगाल की खाड़ी से पैदा हुए चक्रवात मिचौंग (मिगजॉम) के गंभीर चक्रवाती तूफान बनने के बाद आज इसके आंध्र प्रदेश के तट से टकराने का अनुमान है। मौसम विभाग के मुताबिक, मिचौंग आज दोपहर के बाद कभी भी आंध्र प्रदेश के बापटला से टकरा सकता है। इस चक्रवात का असर पहले ही दक्षिण और उत्तर भारत के कई राज्यों में दिखाई दिया है। खासकर तमिलनाडु और पुडुचेरी चक्रवात की वजह से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। यहां भारी बारिश के बाद अलग-अलग कारणों से आठ लोगों की मौत हुई है, वहीं काफी संपत्ति का भी नुकसान हुआ है।

आंध्र प्रदेश के तिरुपति में भरे बांध-

आंध्र प्रदेश में चक्रवात मिचौंग के चलते भारी बारिश का दौर जारी है। तिरुपति में स्थित पांचों बांध बारिश के बाद पूरी क्षमता तक भर गए, जिसके चलते उनके गेटों को खोल दिया गया।

जाने तमिलनाडु में कहां-कितनी हुई बारिश-

तमिलनाडु में आज सुबह 08.30 बजे तक अलग-अलग स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश और भारी बारिश हुई। मौसम विभाग ने इससे जुड़े आंकड़े जारी किए हैं।

110 किमी प्रतिघंटे तक पहुंच जाएगी हवाओं की गति-

आईएमडी के बुलेटिन में कहा गया है कि पश्चिम मध्य बंगाल की खाड़ी के साथ-साथ दक्षिण आंध्र प्रदेश तट पर भीषण चक्रवाती तूफान पिछले छह घंटों के दौरान 12 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से उत्तर की दिशा में बढ़ता गया और मंगलवार को सुबह साढ़े आठ बजे यह कवाली से लगभग 40 किलोमीटर उत्तर पूर्व में 80 किलोमीटर, नेल्लोर के उत्तर-उत्तरपूर्व, बापटला से 80 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिणपश्चिम और मछलीपट्टनम से 140 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिणपश्चिम में केंद्रित था।

बुलेटिन में कहा गया है कि मौसम प्रणाली के लगभग उत्तर की ओर समानांतर और दक्षिण आंध्र प्रदेश तट के करीब बढ़ने की संभावना है और अगले चार घंटों के दौरान एक गंभीर चक्रवात के रूप में यह बापटला के करीब से होकर आगे जाएगा। इसकी गति 90-100 किलोमीटर प्रति घंटे से बढ़कर 110 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच जाएगी।’’

तमिलनाडु में घरों में घुसा पानी-

तमिलनाडु के चेन्नई में भारी बारिश से बाढ़ जैसी स्थिति है। आलम यह है कि मंगलवार को कम बारिश के बावजूद कई इलाकों में पानी लोगों के घरों में घुस गया। इससे जुड़े कई वीडियो भी सामने आए हैं।

तमिलनाडु में सड़कों पर चल रही नाव-

तमिलनाडु: चेन्नई के वेस्ट तंबरम सीटीओ कॉलोनी और सशिवराधन नगर इलाके में लोग आवाजाही के लिए नाव का इस्तेमाल कर रहे हैं। चक्रवात मिचौंग के कारण बारिश के बाद शहर में बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई है। तमिलनाडु के चेन्नई में चक्रवात मिचौंग के असर से भीषण बारिश के बाद मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया। उन्होंने प्रभावित लोगों को खाना भी बांटा।

ओडिशा में कल बंद रहेंगे शिक्षण संस्थान-

ओडिशा में चक्रवाती तूफान मिचौंग के असर को देखते हुए गजपति जिले के कलेक्टर ने भारी वर्षा के मद्देनजर सभी प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, हाई स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्रों को 6 दिसंबर 2023 को बंद रखने का निर्देश जारी किया है।’मिचौंग’ चक्रवात के प्रभाव से चेन्नई में बारिश के कारण कई जगहों पर जलभराव हुआ। वहीं, आंध्र प्रदेश बापटला में मध्यम बारिश हो रही और तेज़ हवाएं चल रही हैं।

उत्तरी तटीय तमिलनाडु और पुडुचेरी में मंगलवार सुबह ज्यादातर इलाकों पर हल्की से मध्यम बारिश और कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने के बाद वर्षा में कमी आने की संभावना है। मौसम विभाग (आईएमडी) ने यह जानकारी दी है। चक्रवात ‘मिगजॉम’ के कारण चेन्नई और आसपास के जिलों में सोमवार को बाढ़ ने तबाही मचा दी जिससे जनजीवन बाधित हो गया। इसके बाद बारिश की तीव्रता में कमी का पूर्वानुमान एक राहत का समाचार है। चेन्नई के कुछ हिस्सों के निवासियों ने मंगलवार तड़के से बारिश नहीं होने की सूचना दी और बताया कि उनके क्षेत्रों में बिजली सेवाएं बहाल कर दी गई हैं, लेकिन शहर में रेल सेवा निलंबित है।

Rajasthan Election 2023: मुख्यमंत्री पद को लेकर वसुंधरा का बड़ा दांव, क्या मानेगा आलाकमान !

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राजस्थान में चुनाव नतीजे आने के बाद सीएम पद को लेकर लगातार सस्पेंस बढ़ता जा रहा है आज वसुंधरा राजे के घर पर करीब 20 से ज्यादा BJP के विधायक पहुंच चुके हैं. ऐसे में चर्चा गरम है कि क्या वसुंधरा को हाईकमान से ग्रीन सिग्नल मिल गया है सीएम पद की ताजपोशी का या राजस्थान की इस पूर्व सीएम ने आग से खेलने की तैयारी कर ली है? क्योंकि बीजेपी में किसी भी नेता की इतनी हिम्मत नहीं है कि केंद्रीय नेतृत्व के बिना ग्रीन सिग्नल के अपने घर पर विधायकों को परेड कराने लगे. दूसरी ओर सीएम पद के एक और दावेदार माने जा रहे बालकनाथ दिल्ली पहुंच गए हैं. इस बीच सवाल यह उठ रहे हैं कि क्या वसुंधरा बीजेपी में सचिन पायलट की राह पर हैं? सचिन पायलट को लगता था कि उनके नेतृत्व में चुनाव लड़ा गया है और कांग्रेस की जीत के कारण वो ही हैं. हालांकि कभी भी उनको 20 से अधिक विधायकों का समर्थन खुलकर नहीं मिला.

जिस तरह वसुंधरा के घर विधायक पहुंच रहे हैं और प्रेस के सामने आकर वसुंधरा को सीएम बनाने की बात कर रहे हैं उसे देखकर कोई भी कह सकता है कि वसुंधरा राजे ने प्रेशर पॉलिटिक्स शुरू कर दी है. BJP के नवनिर्वाचित जहाजपुर से आने वाले विधायक गोपीचंद मीणा ने वसुंधरा राजे से मुलाकात की और कहा कि लोग वसुंधरा राजे को मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं. ब्यावर से आने वाले विधायक सुरेश रावत भी वसुंधरा राजे से मिलने पहुंचे. उन्होंने कहा कि वसुंधरा ने पहले बहुत अच्छा काम किया है, लेकिन सीएम आलाकमान जिसे बनाए हम पार्टी के साथ हैं.इसके पहले बीजेपी विधायक बहादुर सिंह कोली जयपुर में वसुंधरा राजे के आवास में एंट्री करते हुए बोले थे कि वसुंधरा राजे को ही सीएम बनना चाहिए.हालांकि उन्होंने भी कहा कि वह पार्टी के फैसले के साथ हैं. हालांकि पार्टी के फैसले के समर्थन की बात तभी तक की जाती है जब तक उम्मीद रहती है कि आलाकमान हमारी बातें सुन रहा है.

चौंका सकता है बीजेपी हाईकमान का फैसला –

अगर वसुंधरा पार्टी पर प्रेशर बनाने के लेवल तक खुद को ले जाती हैं तो इसका अंजाम उनके पक्ष में जाएगा इसकी उम्मीद न के बराबर है.वर्तमान में राजस्थान की राजनीति में कांग्रेस भी इतनी ताकतवर नहीं है कि उसका सपोर्ट उन्हें मिल सके. अभी उनके घर पर कहा जा रहा है कि करीब 20 विधायक पहुंचे हुए हैं. यह सही है कि जिन विधायकों ने उनके घर पहुंचने की हिम्मत दिखाई है वास्तव में वसुंधरा के कट्टर समर्थक होंगे. हो सकता है कि एक दो विधायक और उनके पास हों. पर कांग्रेस के 69 एमएलए मिलकर भी उनका भला नहीं कर सकते. भारतीय जनता पार्टी की जो कार्यशैली है उससे तो यही लगता है कि कांग्रेस पार्टी के उन 69 विधायकों का भी भरोसा नहीं है कि वो कब तक अपनी पार्टी का दामन थामे रहेंगे.वसुंधरा के समर्थन की बात तो दूर की हो जाएगी.सचिन पायलट की तरह वो 20-22 विधायकों का साथ लेकर कभी भी क्रांति नहीं कर सकेंगी. बस पायलट की तरह असंतुष्ट बनकर राजनीति करनी होगी.

इसमें कोई दो राय नहीं हो सकती कि वसुंधरा के पास राजस्थान में आज भी जबरदस्त जनसमर्थन है. उनकी रैलियों में जनता की भीड़ यह बताती थी कि राजस्थान के लोकल नेताओं में सबसे अधिक वो लोकप्रिय हैं. राजपूत की बेटी, जाटों की बहू और गुर्जरों की समधन की छवि के चलते उनकी पैठ हर वर्ग में रही है. यही कारण रहा कि बीजेपी आलाकमान ने उनको कमान तो नहीं दी पर उन्हें अलग-थलग भी नहीं होने दिया. हालांकि वसुंधरा इस बार के चुनावों में अपने होम डिस्ट्रिक्ट में ही कुछ नहीं कर पाईं. धौलपुर जिले की चारों सीटों में से एक भी बीजेपी नहीं जीत सकी है. इसी तरह वसुंधरा के कई खास लोग अभी अपना चुनाव नहीं जीत सके हैं. फिर भी अगर वसुंधरा प्रेशर बनाती हैं,,तो हो सकता है कि 2024 में होने वाले लोकसभा चुनावों तक पार्टी उन्हें राजस्थान की कमान सौंप दे. क्योंकि भारतीय जनता पार्टी का फोकस अभी पूरी तरह 2024 के लोकसभा चुनाव हैं. पार्टी नहीं चाहेगी कि जिस तरह अशोक गहलोत और सचिन पायलट की लड़ाई में राजस्थान में कांग्रेस का बंटाधार हो गया उसी तरह वसुंधरा राजे के चलते बीजेपी भी कमजोर हो.

Rajasthan: अशोक गहलोत की इन गलतियों ने फेरा राहुल गांधी की मेहनत पर पानी !

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राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 के परिणामों में कांग्रेस चारों खाने चित्त हो गई। प्रदेश की जनता ने राज बदल दिया, लेकिन रिवाज नहीं बदला। कांग्रेस की हार को लेकर सीएम अशोक गहलोत के ओएसडी लोकेश शर्मा का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने हार का जिम्मेदार गहलोत को ही बता दिया। उन्होंने गहलोत पर फरेबी बताते हुए 25 सितंबर 2022 की घटना का जिक्र किया। उन्होंने कहा पूरी घटना प्रायोजित थी। आलाकमान के खिलाफ विद्रोह कर अवमानना की गई। उसी दिन से ये खेल शुरू हो गया था।

लोकेश शर्मा ने एक्स कर लिखा- लोकतंत्र में जनता ही माई-बाप है और जनादेश शिरोधार्य है, विनम्रता से स्वीकार है। मैं नतीजों से आहत जरूर हूं, लेकिन अचंभित नहीं। कांग्रेस राजस्थान में निःसंदेह रिवाज बदल सकती थी। लेकिन, अशोक गहलोत कभी कोई बदलाव नहीं चाहते थे। यह कांग्रेस की नहीं बल्कि अशोक गहलोत की शिकस्त है।गहलोत के चेहरे पर उनको फ्री हैंड देकर उनके नेतृत्व में पार्टी ने चुनाव लड़ा और उनके मुताबिक प्रत्येक सीट पर वे स्वयं चुनाव लड़ रहे थे। न उनका अनुभव चला, न जादू। हर बार की तरह कांग्रेस को उनकी योजनाओं के सहारे जीत नहीं मिली और न ही अथाह पिंक प्रचार काम आया। तीसरी बार लगातार सीएम रहते हुए गहलोत ने पार्टी को फिर हाशिये पर लाकर खड़ा कर दिया। आज तक पार्टी से सिर्फ लिया ही लिया है, लेकिन कभी अपने  रहते पार्टी की सत्ता में वापसी नहीं करवा पाए गहलोत।

आलाकमान के साथ फरेब, ऊपर सही फीडबैक न पहुंचने देना, किसी को विकल्प तक न बनने देना, अपरिपक्व और अपने फायदे के लिए जुड़े लोगों से घिरे रहकर आत्ममुग्धता में लगातार गलत निर्णय और आपाधापी में फैसले लेते रहना, तमाम फीडबैक और सर्वे को दरकिनार कर अपनी मनमर्जी और अपने पसंदीदा प्रत्याशियों को उनकी स्पष्ट हार को देखते हुए भी टिकट दिलवाने की जिद हार का कारण रही। आज के ये नतीजे तय थे। मैं स्वयं मुख्यमंत्री को यह पहले बता चुका था, कई बार आगाह कर चुका था। लेकिन, उन्हें कोई ऐसी सलाह या ऐसा व्यक्ति अपने साथ नहीं चाहिए था जो सच बताए।

क्या कहा अशोक गहलोत के OSD ने- 

एक टीवी चैनल को दिए अपने इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि मैं छः महीने लगातार घूम-घूम कर राजस्थान के कस्बों-गांव-ढाणी में गया, लोगों से मिला, हजारों युवाओं के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किए। लगभग 127 विधानसभा क्षेत्रों को कवर करते हुए ग्राउंड रिपोर्ट सीएम को लाकर दी। जमीनी हकीकत को बिना लाग-लपेट सामने रखा। ताकि, समय पर सुधारात्मक कदम उठाते हुए फैसले किए जा सकें, जिससे पार्टी की वापसी सुनिश्चित हो।

मैंने खुद भी चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की थी, पहले बीकानेर से फिर सीएम के कहने पर भीलवाड़ा से, जिस सीट को हम 20 साल से हार रहे थे। लेकिन, ये नया प्रयोग नहीं कर पाए। बीडी कल्ला के लिए मैंने 6 महीने पहले ही बता दिया था कि वे 20 हजार से ज्यादा मत से चुनाव हारेंगे और वही हुआ। अशोक गहलोत ने इस तरह फैसले लिए गए कि विकल्प तैयार ही नहीं हो पाए। 25 सितंबर की घटना भी पूरी तरह से प्रायोजित थी, जब आलाकमान के खिलाफ विद्रोह कर अवमानना की गई थी उसी दिन से खेल शुरू हो गया था।

क्या ये थी राजस्थान में कांग्रेस की हार की बड़ी वजह-

आपको बता दें कि राजस्थान विधानसभा चुनाव  में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को छोड़कर उनके 25 मंत्री चुनावी मैदान में उतरे थे। इनमें से 17 मंत्रियों को हार का सामना करना पड़ा। मंत्री प्रताप सिंह खाचरिया वास और बीडी कल्ला समेत कई बड़े चेहरों को जनता ने सिरे से खारिज कर दिया।मतलब जो गहलोत के osd कह रहे हैं वो सही साबित हुआ ,गहलोत हवा का रुख समझने में नाकाम साबित हुए. राजस्थान में कांग्रेस की हार की एक बड़ी वजह पार्टी की आपसी कलह रही. कई नेता नाराज हुए लेकिन गहलोत ने उन्हें सही तरीके से हैंडल नहीं किया. पार्टी के अंदर गुटबाजी और कई बागी नेताओं ने पार्टी का खेल बिगाड़ा. यहां तक कि कई नेताओं ने निर्दलीय चुनाव लड़ा तो कुछ को बीजेपी ने अपने पाले में कर लिया.

सचिन पायलट और अशोक गहलोत की लड़ाई तो पूरे देश में चर्चा का मुद्दा रही, दोनों नेता काम छोड़कर आपसी लड़ाई पर ज्यादा फोकस करते दिखे. सरकार बनते ही दोनों के बीच खींचतान शुरू हुई तो खत्म होने का नाम नहीं लिया. कई बार आलाकमान ने दोनों को मनाने की कोशिश की, यहां तक कि राहुल गांधी ने खुद चुनाव प्रचार के दौरान दोनों को एक साथ मंच पर लाकर ये संदेश देने की कोशिश की कि पार्टी में सबकुछ ठीक है, लेकिन दोनों के दिल नहीं मिले.राजस्थान में कांग्रेस की हार की वजह सीएम अशोक गहलोत का अहंकार भी रहा, उनका अति आत्म विश्वास और अहंकार उन्हें ले डूबा. गहलोत के साथियों ने उन पर अहंकारी होने का आरोप लगाया. खुद उनकी पार्टी के कई विधायकों ने अपनी बात न सुनने का आरोप लगाया, वहीं सचिन पायलट से उनकी लड़ाई तो पिछले साल सरकार बनने के बाद से ही चल रही है. कई बार मीडिया के सामने आकर गहलोत ने सचिन पायलट को निकम्मा और गद्दार तक कह दिया.

राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं का पेपर लीक मामला गहलोत सरकार पर भारी पड़ा, बीजेपी ने चुनाव के दौरान इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस को खूब घेरा. पेपर लीक को लेकर गहलोत को युवाओं के गुस्से का शिकार होना पड़ा. पिछले पांच साल के गहलोत कार्यकाल में कई परीक्षाओं के पेपर लीक के मामले सामने आए, जिसको लेकर बीजेपी ने गहलोत पर एक्शन ना लेने का आरोप भी लगाया. ये मुद्दा गहलोत सरकार के लिए भारी पड़ा. कुल मिलाकर राजस्थान में गहलोत का रवैया राहुल गांधी की मेहनत  पर पानी फेर गया.

Mizoram Election: 6 क्षेत्रीय दलों के गठजोड़ से बनी पार्टी मिजोरम में सत्ता के शीर्ष पर, जानिये ZPM के बनने की कहानी.

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भारत के पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम में विधानसभा चुनाव के वोटों के गिनती जारी है। अब तक के नतीजों में जोराम पीपुल्स मूवमेंट (जेडपीएम) ने 25 सीटें जीतकर बहुमत हासिल कर लिया है। 40 सीटों वाले मिजोरम विधानसभा में बहुमत के लिए 21 सीटों की जरूरत थी। एक पूर्व आईपीएस अधिकारी, विधायक और पूर्व सांसद लालडुहोमा द्वारा स्थापित पार्टी जेडपीएम के मिजोरम में सत्ता के शिखर तक पहुंचने की कहानी बहुत दिलचस्प रही है। आइए जानते हैं इस पार्टी के बारे में सब कुछ।  

कैसे हुआ जोरम पीपुल्स मूवमेंट का गठन? 

जोरम पीपुल्स मूवमेंट का गठन छह क्षेत्रीय दलों के गठबंधन के रूप में किया गया था। यह छह क्षेत्रीय दल थे- मिजोरम पीपुल्स कॉन्फ्रेंस, जोरम नेशनलिस्ट पार्टी, जोरम एक्सोडस मूवमेंट, जोरम डिसेंट्रेलाइजेशन फ्रंट, जोरम रिफॉर्मेशन फ्रंट और मिजोरम पीपुल्स पार्टी। इन दलों ने आगे चलकर एक एकीकृत इकाई के रूप में विलय कर दिया, इसके बाद आधिकारिक तौर पर 2018 में जोरम पीपुल्स मूवमेंट यानी आज के जेडपीएम का गठन हुआ। हालांकि चुनाव आयोग में पंजीकृत होने के लिए जेडपीएम को और इंतजार करना पड़ा।

2018 के विधानसभा चुनावों में निर्दलीय लड़े जेडपीएम प्रत्याशी

2018 के मिजोरम विधान सभा चुनावों में जेडपीएम पहली बार मैदान में उतरा। पार्टी ने खुद को मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) के राजनीतिक विकल्प के रूप में पेश किया। पार्टी ने शराबबंदी की वकालत की। पार्टी ने 36 में से 40 सीटों पर चुनाव लड़ा। उस वक्त लालडुहोमा की गठित पार्टी को चुनाव आयोग से मान्यता नहीं मिल सकी थी, जिसके कारण उनके उम्मीदवारों को निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनावी मैदान में उतरना पड़ा था। निर्दलीय उम्मीदवारों के रूप में जेडपीएम ने 8 सीटों पर जीत हासिल की। यह अपेक्षाकृत नए ज़ोरम पीपुल्स मूवमेंट के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी। चुनाव में लालडुहोमा ने तत्कालीन मुख्यमंत्री लालथनहलवा को करारी शिकस्त दी, जिसके बाद से वे राजनीतिक गलियारों में सुर्खियां बन गए।

2019 में जेडपीएम को चुनाव आयोग से मान्यता मिली

जेडपीएम का उद्देश्य मिजोरम के लोगों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को उठाना था। इसका गठन  सामाजिक चिंताओं और सामुदायिक कल्याण पर ध्यान देने के लिए एक गैर-राजनीतिक इकाई के रूप में किया गया था। भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) ने आधिकारिक तौर पर जुलाई 2019 में पार्टी को पंजीकृत किया। हालांकि इस खुशी खबर के बीच एक बुरी खबर भी आई। एक तरफ जेडपीएम को राजनीतिक पार्टी का दर्जा मिला दूसरी ओर इसकी सबसे बड़ी संस्थापक पार्टी, मिजोरम पीपुल्स कॉन्फ्रेंस, 2019 में ही गठबंधन से बाहर हो गई।

2023 के मिजोरम विधानसभा चुनाव में जेडपीएम को बहुमत

2023 के मिजोरम विधानसभा चुनावों में, जेडपीएम ने सभी 40 सीटों पर चुनाव लड़ा। सात नवंबर को हुए चुनाव में 80 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ। चार दिसंबर को शुरू हुए वोटों की गिनती में जेडपीएम ने मिनट तक 40 में से 25 सीटें जीतकर बहुमत हासिल कर ली है। ऐसे में प्रदेश में जेडपीएम की सरकार बननी और लालडुहोमा का मुख्यमंत्री बनना तय हो गया है।

कभी पीएम के सुरक्षा प्रभारी रहे हैं जेडपीएम के संस्थापक लालडुहोमा?

मिज़ोरम में सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी जेडपीएम के अध्यक्ष लालडुहोमा मिज़ोरम के एक पूर्व आईपीएस अधिकारी हैं। एक स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक, 1972 से 1977 तक लालडुहोमा ने मिजोरम के मुख्यमंत्री के प्रधान सहायक के तौर पर काम किया था। अपनी स्नातक की पढ़ाई के बाद उन्होंने भारतीय सिविल सेवा परीक्षा दी। 1977 में आईपीएस बनने के बाद उन्होंने गोवा में एक स्क्वाड लीडर के तौर पर काम किया। तैनाती के दौरान उन्होंने तस्करों पर बड़ी कार्रवाई की। पुलिस अधिकारी के तौर पर उनकी उपलब्धियां सामाचार पत्रों की सुर्खियां बनने लगी थीं। 1982 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उन्हें अपना सुरक्षा प्रभारी नियुक्त किया था। पुलिस उपायुक्त के रूप में विशेष पदोन्नति दी गई थी। राजीव गांधी की अध्यक्षता में 1982 एशियाई खेलों की आयोजन समिति के सचिव भी थे।

कैसे हुई लालडुहोमा की राजनीति में ‘एंट्री’?

1984 में पुलिस सेवा से इस्तीफा देने के बाद वे कांग्रेस में शामिल हो गए थे। उसी वर्ष दिसंबर माह में लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज कर लालडुहोमा संसद पहुंचे थे। 1988 में कांग्रेस की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद उन्हें दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित किया गया था, जिसके कारण उन्हें लोकसभा की सदस्यता गंवानी पड़ी थी।

MP Election Results: मामा का लाड़ली बहनों को दुलार और इमोशनल कार्ड, कुछ इस तरह शिवराज चौहान ने पलटी बाजी.

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Election Result 2023 : Rajasthan Election में बाप बेटी और चाचा भतीजे की रोचक जंग.

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चाचा विधायक हैं हमारे, ये कहते हुए कई भतीजों को आपने सुना होगा, लेकिन राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 के सियासी मैदान में भतीजे और भतीजियों ने चाचा से मुकाबला किया। इसके अलावा पति-पत्नी, जीजा-साली, देवर-भाभी और भाई-भाई, पिता-पुत्री ने भी एक दूसरे को टक्कर दी। करीब 47 दिन चले इस सियासी गृहयुद्ध के परिणाम सामने आ रहे हैं।जिसमें एक बार फिर जनता मोदी के चेहरे पर मोहर लगाती दिखाई दे रही है,,,  आइये हम आपको बताते हैं कि  किन  सीटों पर रिश्तेदार ही रिश्तेदारों को हराने जा रहे हैं.

 

इसमें पहली सीट है राजस्थान के दातारामगढ़ की सीट, जिसमे पति-पत्नी एक ही सीट पर लड़े, सीकर जिले की दातांरामगढ़ सीट पर कांग्रेस से मौजूदा विधायक वीरेंद्र सिंह चुनाव लड़े। वहीं, जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) से उनकी पत्नी डॉ. रीटा सिंह ने उन्हें टक्कर दी थी। वह जेजेपी की महिला मोर्चा की अध्यक्ष भी हैं।  दूसरी सीट है अलवर ग्रामीण जहां  बेटी ने पिता को ही चुनौती  दी थी, अलवर जिले की इस सीट से भाजपा से जयराम जाटव चुनावी मैदान में उतरे थे। उनकी बेटी मीना कुमारी ने निर्दलीय चुनाव लड़ा। जयराम इस सीट से दो बार विधायक रह चुके हैं। तीसरी सीट आती है,धौलपुर,जहां  साली और जीजा में  मुकाबला चल रहा है,,धौलपुर जिले की इस सीट से कांग्रेस के टिकट पर शोभारानी कुशवाह ने चुनाव लड़ा।

शिवचरण कुशवाह भाजपा के टिकट पर मैदान में उतरे। ये दोनों रिश्ते में जीजा साली लगते हैं।  चौथी सीट आती है भादरा जहां भतीजे चाचा को टक्कर देते दिखाई दे रहे हैं,,चूरू जिले की इस सीट पर भाजपा से संजीव बेनीवाल ने चुनाव लड़ा। वहीं, कांग्रेस से उनके भतीजे अजीत बेनीवाल मैदान में उतरे थे। संजीव भाजपा से दो बार विधायक रह चुके हैं।पांचवी सीट आती है  खेतड़ी जहां  चाचा या भतीजी कौन पड़ेगा भारी इस पर फैसला आने वाला है,,, झुंझुनू जिले की इस सीट पर भाजपा से धर्मपाल गुर्जर ने चुनाव लड़ा। कांग्रेस से मनीषा गुर्जर ने उन्हें टक्कर दी है । दोनों रिश्ते में चाचा और भतीजी लगते हैं। एक और सीट है नागौर जहां चाचा-भतीजी में कांटे की टक्कर चल रही है,,नागौर जिले की इस सीट पर मिर्धा परिवार के दो सदस्यों में मुकाबला हुआ था। पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा ने भाजपा से चुनाव लड़ा। वहीं, उनके चाचा हरेंद्र मिर्धा कांग्रेस से चुनावी मैदान में थे। अब कुछ ही देर में ये भी साफ़ हो जायेगा कि कौन अपना किस अपने पर भारी पड़ता है.

Election Results 2023: जानिए सभी बड़ी सीटों का हाल.

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Election Results: मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में विधानसभा चुनाव के नतीजे आज घोषित किए जाएंगे। इसके लिए कड़ी सुरक्षा में मतगणना शुरू हो गई है। इन राज्यों में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से लेकर अशोक गहलोत का चुनावी भविष्य दांव पर है। भूपेश बघेल और के. चंद्रशेखर राव भी चुनावी मैदान में किस्मत आजमा रहे हैं।  आइए जानते हैं इन चारों राज्यों की उन हॉट सीट यानी चर्चित सीटों के बारे में, जिन पर सिर्फ इन्हीं राज्यों की जनता नहीं, बल्कि पूरे देश के लोगों की नजर है.

किन-किन राज्यों में और कब चुनाव कराए गए?

मिजोरम में सभी 40 सीटों पर 7 नवंबर को मतदान हुआ। छत्तीसगढ़ में पहले चरण में 20 सीटों पर 7 नवंबर, जबकि दूसरे चरण में 70 सीटों पर  17 नवंबर वोट डाले गए। इसी के साथ मध्य प्रदेश की सभी 230 सीटों पर 17 नवंबर को मतदान हुआ। इसके बाद राजस्थान में 200 सीटों पर 25 नवंबर को लोगों ने मताधिकार का इस्तेमाल किया। वहीं, तेलंगाना में 119 सीटों पर 30 नवंबर को वोट डाले गए.

मध्य प्रदेश की हॉट सीटों का हाल-

मध्य प्रदेश की 230 सदस्यीय विधानसभा के लिए 17 नवंबर को मतदान हुआ था। 2,534 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला अब हो रहा है। वैसे तो सभी सीटें अपने आप में खास है, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा प्रदेश की हॉट सीटों की है। आइए जानते हैं उनमें से कुछ अहम सीटों का हाल…

राजस्थान की हॉट सीटों का हाल-

 

 

राजस्थान में विधानसभा की 199 सीटों पर 25 नवंबर को मतदान हुआ था। श्रीगंगानगर जिले की श्रीकरणपुर सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार गुरमीत सिंह कुन्नर के निधन के कारण चुनाव स्थगित कर दिया गया था। इस चुनाव में मतदाताओं ने चुनाव में उतरे 1863 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला किया। आइए जानते हैं अहम हॉट सीटों का हाल…

छत्तीसगढ़ की हॉट सीटों का हाल-

 

छत्तीसगढ़ की 90 विधानसभा सीटों के लिए दो चरणों के लिए चुनाव हुए थे। पहले चरण के तहत 20 सीटों पर 7 नवंबर और दूसरे चरण की 70 विधानसभा सीटों पर 17 नवंबर को मतदान हुआ था। मतदाताओं ने सभी प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला कर दिया है, जिसके नतीजे आज सामने आ रहे हैं। आइए जानतें हैं, प्रदेश की सबसे ज्यादा चर्चित सीटों का हाल.

तेलंगाना की हॉट सीटों का हाल-

 

तेलंगाना की 119 सदस्यीय विधानसभा के लिए 30 नवंबर को मतदान हुआ था। मतदाताओं ने चुनाव में उतरे 2,290 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला किया। वैसे तो सभी सीटें अपने आप में खास है, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा राज्य की हॉट सीटों की है। इन सीटों में मुख्यमंत्री और पूर्व क्रिकेटर से लेकर चुनाव लड़ रहे लोकसभा सांसदों की सीटें भी शामिल हैं।

Vidhan Sabha Election Results 2023: मध्य प्रदेश में कमल-राज, राजस्थान में कायम रिवाज.

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Vidhan Sabha Election Results 2023: मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में मतगणना जारी है। अब तक के रुझानों में मध्य प्रदेश और राजस्थान में भाजपा ने बहुमत के आंकड़े को पार कर लिया है। छत्तीसगढ़ में भाजपा-कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर है और तेलंगाना में कांग्रेस भारी बहुमत के साथ जीतती दिख रही है।

मध्य प्रदेश, राजस्थान में भाजपा आगे-

चुनाव आयोग के सुबह साढ़े 11 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश में भाजपा 156 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं कांग्रेस 71 सीटों पर आगे है।

राजस्थान में भाजपा 116 सीटों पर आगे है। कांग्रेस 67 सीटों पर और बसपा 3 सीटों पर आगे है।

छत्तीसगढ़ में भाजपा 44 सीटों पर और कांग्रेस 41 सीटों पर आगे चल रही हैं।

तेलंगाना में कांग्रेस 61 सीटों पर और बीआरएस 36 सीटों पर आगे है। वहीं भाजपा 10 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं एआईएमआईएम एक सीट पर आगे चल रही है।

MP Election Result Live: नरोत्तम मिश्रा पिछड़े, सीएम शिवराज आगे

चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार,  मध्य प्रदेश में राज्य के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा दो हजार वोटों से पिछड़ रहे हैं। वहीं सीएम शिवराज सिंह चौहान बड़े अंतर से अपने प्रतिद्वंदी से आगे चल रहे हैं। वहीं राजस्थान में सीएम अशोक गहलोत सरदारपुरा सीट से आठ हजार वोटों से आगे चल रहे हैं।