Day: March 7, 2025

Uttarakhand: कई मंत्री व विधायक आधे कार्यकाल में नहीं खर्च कर पाए 50 प्रतिशत धनराशि।

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कई मंत्री व विधायक आधे कार्यकाल में नहीं खर्च कर पाए 50 प्रतिशत धनराशि

सूचना के जन अधिकार में हुआ खुलासा

वर्ष 2022-23 से दिसम्बर 24 तक का विवरण

 

उत्तराखंड के विधायकों का आधा कार्यकाल पूर्ण हो चुका हैं लेकिन अभी तक विधायक निधि में से कुल 61 प्रतिशत विधायक निधि ही खर्च हुई हैं।उत्तराखंड में सबसे कम विधायक निधि खर्च होने वाले विधायकों में किशोर उपाध्याय (15 प्रतिशत) डाॅ धन सिंह रावत (29), प्रेम चन्द्र अग्रवाल (33) डाॅ मोहन सिंह बिष्ट (34), खुशाल सिंह (34), प्रीतम सिंह (37), सरिता आर्य (40), सुरेश गडिया (42), बंशीधर भगत (43), भरत सिंह चौधरी (43), राजेन्द्र सिंह (44) तथा शक्ति लाल शाह (44) शामिल है।

 

देखें कुल खर्च विधायक निधि-

काशीपुर निवासी सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन (एडवोकेट) ने उत्तराखंड के ग्राम्य विकास आयुक्त कार्यालय से विधायक निधि खर्च सम्बन्धी विवरणों की सूचना मांगी थी। इसके उत्तर में उपायुक्त (प्रशासक) हेमन्ती गुंजियाल ने अपने पत्रांक 20211 के साथ वर्तमान विधायक निधि विवरण की फोटो प्रति उपलब्ध करायी है।

 

नदीम को उपलब्ध सूचना के अनुसार वर्ष 2022-23 से 2024-25 में माह दिसम्बर 2024 तक 96400 लाख की विधायक निधि उपलब्ध हुई लेकिन इसमें से केवल 61 प्रतिशत 58926.35 लाख की विधायक निधि ही खर्च हुई है जबकि 39 प्रतिशत 37459.65 लाख की विधायक निधि खर्च होने को शेष हैं।

 

सीएम धामी की 53 प्रतिशत, ऋषिकेश विधायक, वित्त मंत्री प्रेम चन्द्र अग्रवाल की 33 प्रतिशत, अन्य मंत्रियों में चौबट्टाखाल विधायक सतपाल महाराज की 56 प्रतिशत, मंसूरी विधायक गणेश जोशी की 72 प्रतिशत, श्रीनगर विधायक धन सिंह रावत की 29 प्रतिशत, नरेन्द्र नगर विधायक सुबोध उनियाल की 57 प्रतिशत, सोमेश्वर विधायक रेखा आर्य की 64 प्रतिशत, बागेश्वर विधायक चन्दन रामदास की 84 प्रतिशत तथा सितारगंज विधायक सौरभ बहुगणा की 85 प्रतिशत विधायक निधि खर्च हुई है।

 

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उत्तराखंड में सर्वाधिक विधायक निधि खर्च होने वाले विधायकों में प्रदीप बत्रा (90 प्रतिशत), अरविन्द पाण्डे (87), रवि बहादुर (85), सौरभ बहुगुणा (85), चन्दन रामदास (84), फुरकान अहमद (84), गोपाल सिंह राणा (83), उमेश कुमार (82), राजकुमार (81), उमेश शर्मा (80) शामिल है। प्रदेश के औसत 61 प्रतिशत से कम विधायक निधि खर्च होने वाले अन्य विधायकों में यशपाल आर्य (45), सुमित ह्रदयेश (46), रामसिंह कैड़ा (46), दुर्गेश पाल (47), सुरेश चैहान(47), श्रीमति शैला रानी (48), संजय डोभाल (49), श्रीमति रेणु सिंह (51), पुष्कर सिंह धामी (53), भोपाल राम टम्टा (55), सतपाल महराज (56), मनोज तिवारी (56), त्रिलोक सिंह चीमा (56),सुबोध उनियाल (57), मदन कौशिक (57), श्रीमति सविता कपूर (58), विनोद कण्डारी (58), दीवान सिंह बिष्ट (58), मयूख महर (60) तथा दिलीप सिंह (60 प्रतिशत) शामिल है।

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रक्षा भू सूचना विज्ञान अनुसंधान प्रतिष्ठान चंडीगढ़ ने उत्तराखंड के तीन जिलों में हिमस्खलन को लेकर चेतावनी दी है। कहा गया है कि चमोली, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ जिले में अगले 24 घंटे में 2950 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र में हिमस्खलन हो सकता है।

चीन सीमा पर माणा के पास बीते सप्ताह हिमस्खलन हुआ था, जिसकी चपेट में 55 मजदूर आ गए थे। इनमें से 46 को सुरक्षित निकाला गया, जबकि आठ की मौत हो गई थी। श्रमिकों को निकालने के लिए तीन दिन तक रेस्क्यू अभियान चला।

 

 

माणा हिमस्खलन की घटना के बाद माणा-माणा पास हाईवे का चौड़ीकरण कार्य पीछे खिसक गया है। हाईवे पर सुधारीकरण व चौड़ीकरण कार्य वर्ष 2027 के अक्तूबर माह में पूर्ण होना था, लेकिन इस घटना से कार्य की रफ्तार धीमी पड़ने के आसार हैं। बीआरओ ने मजदूरों के ठहरने के लिए नए कंटेनर स्थापित करने के लिए बदरीनाथ से माणा के बीच सुरक्षित स्थान की ढूंढ भी शुरू कर दी है।

दो से तीन फीट तक बर्फ जमी-

अभी इस क्षेत्र में दो से तीन फीट तक बर्फ जमी है। बर्फ पिघलने के बाद सबसे पहले मजदूरों को रहने के लिए नए कंटेनर स्थापित किए जाएंगे। पिछले दो साल से माणा गांव-माणा पास हाईवे का सुधारीकरण और चौड़ीकरण कार्य चल रहा है। बीआरओ (सीमा सड़क संगठन) की ओर से प्राइवेट फर्म को हाईवे चौड़ीकरण का काम सौंपा गया है।इसके लिए क्षेत्र में मजदूर निवासरत थे। ये मजदूर हाईवे चौड़ीकरण कार्य करने के बाद रात्रि विश्राम के लिए माणा पास इंट्री गेट के समीप स्थापित कंटेनर में पहुंच जाते हैं। यहां मजदूरों के आठ कंटेनर और एक शेल्टर था। जो अब हिमस्खलन की चपेट में आने से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। यदि मौसम साफ रहा तो अप्रैल माह के अंत तक सीमा क्षेत्र में बर्फ पिघल सकेगी।

Vasantotsav 2025: राजभवन में आज से शुरु हुआ वसंतोत्सव का आगाज.. राज्यपाल ने किया 3 दिवसीय पुष्प प्रदर्शनी का शुभारंभ.

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राजभवन में आज शुक्रवार से रंग-बिरंगे फूलों का मेला लग गया है। तीन दिवसीय वसंतोत्सव-2025 (पुष्प प्रदर्शनी) का शुभारंभ राज्यपाल ने किया। पहले दिन दोपहर एक से शाम छह बजे और आठ व नौ मार्च को सुबह नौ से शाम छह बजे तक जनसामान्य को राजभवन में निशुल्क प्रवेश मिलेगा।

इस आयोजन में 15 मुख्य प्रतियोगिताओं की कुल 55 उप-श्रेणियां शामिल हैं, जिनमें प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया जाएगा। निर्णायक मंडल की ओर से चयनित विजेताओं को नौ मार्च को कुल 165 पुरस्कार दिए जाएंगे।

वेबसाइट पर कर सकते हैं पंजीकरण-

राज्यपाल के निर्देशन में इस वर्ष वसंतोत्सव में कई नवीन पहल शुरू की गई हैं। उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय ने इस आयोजन में आने वाले लोगों की गणना के लिए एआई एप्लिकेशन तैयार किया है। जिसके लिए राजभवन के मुख्य द्वार पर एआई इनेबल कैमरे लगाए गए हैं। इसके अलावा वसंतोत्सव में आने वाले आगंतुक वेबसाइट www.vmsbutu.it.com पर भी पंजीकरण कर सकते हैं, जहां रजिस्ट्रेशन करने पर आगंतुक की सुविधा के लिए एक आई-कार्ड जनरेट होगा, यह रजिस्ट्रेशन ऐच्छिक होगा।

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आईटीडीए की ओर से फीडबैक सिस्टम के लिए क्यूआर कोड लगाए गए हैं, जिससे आगंतुक अपने सुझाव और अनुभव साझा कर सकते हैं। इस पहल का उद्देश्य वसंतोत्सव को और अधिक प्रभावी और आकर्षक बनाना है। वसंतोत्सव-2025 न केवल पुष्प प्रेमियों के लिए एक अद्भुत अनुभव होगा, बल्कि यह नवाचार और तकनीकी विकास के नए आयाम भी स्थापित करेगा।

 

राजभवन में वसंतोत्सव के दौरान छावनी क्षेत्र में मार्ग रहेंगे परिवर्तित-

न्यू कैंट रोड स्थित राजभवन में वसंतोत्सव के तहत आयोजित होने वाली पुष्प प्रदर्शनी को लेकर पुलिस ने यातायात प्लान लागू किया है। कैंट क्षेत्र में कई मार्ग परिवर्तित रहेंगे। पुष्प प्रदर्शनी में आने वाले अधिकारियों के वाहन शौर्य स्थल के पास खाली मैदान में खड़े कराए जाएंगे। इसके अलावा प्रदर्शनी में आने वाले लोगों के निजी वाहन एनेक्सी तिराहा से आठवीं गढ़वाल राइफल के फुटबाल ग्राउंड में खड़े कराए जाएंगे। वहीं, बिंदाल और गढ़ी कैंट की ओर से आने वाले लोगों के वाहन महिंद्रा पार्क में खड़े कराए जाएंगे। एनेक्सी तिराहा से बीजापुर गेस्ट हाउस की ओर जाने वाले वाहनों को एनेक्सी तिराहा से सीएसडी तिराहा की ओर भेजा जाएगा। इस दौरान एनेक्सी तिराहा से बीजापुर गेस्ट हाउस की ओर वन-वे रहेगा। राजभवन के बाहर यातायात का दबाव होने पर प्लान के अनुसार वाहन भेजे जाएंगे। इस दौरान महिंद्रा ग्राउंड और आरटी ग्राउंड से शटल सेवा भी मिलेगी।

PM Modi Uttarkashi Visit: देश तक पहुंचा शीतकालीन यात्रा का संदेश, चारधाम यात्रा का आधार भी होगा तैयार.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की केमेस्ट्री से बहुत कम समय में उत्तराखंड की शीतकालीन यात्रा देश-दुनिया की नजरों में आ गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मां गंगा के शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा और खूबसूरत हर्षिल से पूरे देश में शीतकालीन यात्रा का संदेश पहुंचा। उन्होंने जिस अंदाज में उत्तराखंड की यात्रा का प्रमोशन किया है, वह अभूतपूर्व है। इसके बाद उत्तराखंड के शीतकालीन पर्यटन के सरपट दौड़ने की पूरी उम्मीद की जा रही है। इससे चारधाम यात्रा की मजबूती का आधार पर तैयार होगा।

प्रधानमंत्री का यह प्रवास उस वक्त हुआ है, जब दो महीने की शीतकालीन यात्रा शेष है। इसके बाद 30 अप्रैल से चारधाम यात्रा का श्रीगणेश होना है। ऐसे में प्रधानमंत्री के एक प्रवास ने उत्तराखंड की दोनों यात्राओं के लिए बेहतर आधार तैयार कर दिया है। प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड का हर तरह से प्रमोशन किया। प्रमोशन के लिए घाम तापो पर्यटन की बात हो, धर्माचार्यों और योगाचार्यों से शीतकाल में योग शिविर आयोजित करने की बात हो, कॉरपोरेट को सेमिनार का सुझाव हो, फिल्म निर्माताओं को फिल्मों की शूटिंग के लिए आह्वान हो या फिर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर से अपील हो, सबने अपना अलग प्रभाव छोड़ा है।

रजत जयंती वर्ष में सबसे गंभीर प्रयास-

उत्तराखंड के रजत जयंती वर्ष में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शीतकालीन यात्रा का सबसे बड़ा प्रमोशन कर दिया है। इस यात्रा के प्रमोशन के लिए इससे पहले कभी इतने गंभीर प्रयास नहीं हुए। उत्तराखंड की शीतकालीन यात्रा के साथ प्रधानमंत्री के जुड़ाव के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जो प्रयास किए थे, उसका सार्थक परिणाम सामने आया है। बहुत कम समय में उत्तराखंड की शीतकालीन यात्रा और पर्यटन देश-दुनिया की नजरों में आ गए हैं।

 

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फिर साबित हुए सबसे बड़े ब्रांड एंबेसडर-

प्रधानमंत्री एक बार फिर उत्तराखंड के लिए सबसे बड़े ब्रांड एंबेसडर साबित हुए हैं। केदारनाथ धाम का उदाहरण सामने है, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सक्रियता से श्रद्धालुओं के पहुंचने के नए रिकार्ड बने हैं। शीतकालीन यात्रा का हिस्सा बनने की इच्छा प्रधानमंत्री ने 28 जनवरी को राष्ट्रीय खेलों के शुभारंभ के मौके पर ही जाहिर कर दी थी। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उत्तराखंड से भावनात्मक लगाव ही है, वह कार्यक्रम में बदलाव के बावजूद मुखवा-हर्षिल पहुंच गए।

मुखबा हर्षिल निहाल, पीएम-सीएम का आभार-

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुखवा आगमन से पूरा क्षेत्र निहाल है। स्वतंत्र भारत के इतिहास में यह पहला अवसर है, जबकि कोई प्रधानमंत्री मां गंगा के शीतकालीन प्रवास स्थल पर पूजा-अर्चना के लिए पहुंचा हो। गंगोेत्री मंदिर के सचिव सुरेश सेमवाल का कहना है-यह अवसर गौरवान्वित करने वाला है। तीर्थ पुरोहित और लोक कलाकार रजनीकांत सेमवाल कहते हैं-मुखवा का चयन करने के लिए पीएम व सीएम के प्रति हम आभारी हैं।