Day: August 28, 2025

उत्तराखंड में इस साल समूह-ग के 1098 पदों पर होगी भर्ती, आयोग ने जारी किया कैलेंडर

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उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने वर्ष 2025-26 के लिए समूह-ग भर्ती परीक्षाओं का वार्षिक कार्यक्रम घोषित कर दिया है। आयोग ने विभिन्न विभागों में होने वाली सीधी भर्तियों के लिए विज्ञापन और परीक्षाओं की संभावित तिथियां तय कर दी हैं।

कार्यक्रम के अनुसार वन दरोगा के 124 पदों के लिए विज्ञापन 28 अक्तूबर 2025 को जारी होगा और इसकी परीक्षा पांच अप्रैल 2026 से होगी। सहायक समीक्षाधिकारी व वैयक्तिक सहायक की टंकण एवं आशुलेखन परीक्षा 17 नवम्बर 2025 से प्रस्तावित है। उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के सदस्य के 20 पद के लिए साक्षात्कार 15 दिसम्बर 2025 से आयोजित होंगे।

माध्यमिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक एलटी (विशेष शिक्षा शिक्षक) के 128 पदों हेतु विज्ञापन 12 सितम्बर 2025 को प्रकाशित होगा और परीक्षा 18 जनवरी 2026 से कराई जाएगी। विशेष तकनीकी योग्यता वाले 62 पदों के लिए विज्ञापन 26 सितम्बर 2025 को निकलेगा तथा परीक्षा एक फरवरी 2026 से होगी।

 

वाहन चालक परीक्षण सात अप्रैल 2026 से प्रस्तावित
विभिन्न विभागों में वाहन चालक के 37 पदों के लिए विज्ञापन 15 अक्तूबर 2025 को आएगा और परीक्षा 22 फरवरी 2026 से होगी। कृषि इंटरमीडिएट एवं स्नातक योग्यता वाले 212 पदों के लिए विज्ञापन 31 अक्तूबर 2025 को प्रकाशित होगा और परीक्षा 15 मार्च 2026 से होगी। सहायक लेखाकार के 36 पदों के लिए विज्ञापन 14 नवम्बर 2025 को जारी होगा और परीक्षा 29 मार्च 2026 से होगी। वाहन चालक परीक्षण सात अप्रैल 2026 से प्रस्तावित है।

सामान्य ग्रुप-सी के अंतर्गत कनिष्ठ सहायक, वैयक्तिक सहायक एवं अन्य पदों की भर्ती के लिए 386 पदों पर विज्ञापन पांच दिसम्बर 2025 को आएगा और परीक्षा 10 मई 2026 से होगी। आईटीआई, डिप्लोमा एवं डिग्री स्तर की योग्यता वाले 41 पदों के लिए विज्ञापन 24 दिसम्बर 2025 को प्रकाशित होगा तथा परीक्षा 31 मई 2026 से आयोजित होगी।

इसके अलावा विज्ञान विषय (इंटरमीडिएट,स्नातक) योग्यता वाले चार पदों के लिए विज्ञापन सात जनवरी 2026 को निकलेगा और परीक्षा सात जून 2026 से होगी। विभिन्न विभागों में स्नातक स्तर की योग्यता वाले 48 पदों का विज्ञापन 21 जनवरी 2026 को आएगा तथा परीक्षा 21 जून 2026 से कराई जाएगी।

टंकण एवं आशुलेखन परीक्षा 30 जून 2026 से शुरू होगी। आयोग के सचिव डॉ. शिव कुमार बरनवाल ने स्पष्ट किया है कि यह पूरा कार्यक्रम केवल प्रस्तावित है और अपरिहार्य परिस्थितियों में रिक्तियों की संख्या एवं परीक्षा तिथियों में बदलाव किया जा सकता है।

आपदा का असर…अब केवल केदारनाथ-बदरीनाथ पर टिकी चारधाम यात्रा, लेकिन भूस्खलन बड़ी चुनौती

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आपदा के कारण चारधाम यात्रा केदारनाथ व बदरीनाथ धाम पर टिकी है लेकिन दोनों की यात्रा की राह में भूस्खलन बड़ी चुनौती है। उत्तरकाशी जिले में आई आपदा से गंगोत्री व यमुनोत्री धाम की यात्रा पूरी तरह से बंद है। इस बार भारी बारिश से चारधाम यात्रा के संचालन पर ज्यादा असर पड़ा है।आमतौर पर मानसून सीजन चारधाम यात्रा में आने वाले तीर्थ यात्रियों की संख्या में कमी आती है। सितंबर माह में फिर से यात्रा की रफ्तार बढ़ जाती है लेकिन इस बार उत्तरकाशी जिले में आई आपदा से गंगोत्री व यमुनोत्री धाम की यात्रा बंद पड़ी है। श्रद्धालुओं के जयकारों से गूंजने वाले दोनों धामों में इन दिनों सन्नाटा पसरा है।

 

पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार 30 अप्रैल से चारधाम यात्रा शुरू हुई थी। अब तक चारधाम में 42.54 लाख से अधिक तीर्थयात्री दर्शन कर चुके हैं। गंगोत्री व यमुनोत्री धाम की यात्रा बंद है। जबकि केदारनाथ व बदरीनाथ धाम में प्रतिदिन तीन से पांच हजार श्रद्धालु दर्शन कर रहे हैं। बदरीनाथ धाम मार्ग पर कमेड़ा, लामबगड़ भूस्खलन के कारण भूस्खलन से यात्रा बाधित हो रही है। जबकि केदारनाथ धाम जाने के लिए सोनप्रयाग व गौरीकुंड के बीच भूस्खलन एक बड़ी चुनौती है।

पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज का कहना है कि आपदा के कारण चारधाम यात्रा में रफ्तार थमी है। मौसम बदलने के बाद फिर से यात्रा गति पकड़ेगी। इस बार बारिश के कारण जगह-जगह भूस्खलन की संभावना अधिक रहती है। इसे देखते हुए तीर्थयात्रियों को मौसम की जानकारी प्राप्त करने के बाद यात्रा करनी चाहिए।

 

चारधाम यात्रा व हेमकुंड साहिब में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या
       धाम                                    दर्शन कर चुके तीर्थयात्री

 

  • केदारनाथ                                          14.80 लाख
  • बदरीनाथ                                           12.78 लाख
  • गंगोत्री                                                6.69 लाख
  • यमुनोत्री                                              5.86 लाख
  • हेमकुंड साहिब                                    2.49 लाख

मातृशक्ति ने लिलियम की खुशबू से गढ़ी नई पहचान,प्रति वर्ष 10 लाख आय का लक्ष्य रखा गया है निर्धारित

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार का आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड का संकल्प अब धरातल पर खिलता नज़र आ रहा है। जनपद पौड़ी गढ़वाल के कोट ब्लॉक की महिलाएं लिलियम फूलों की खेती से आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की नई कहानी लिख रही हैं। इन फूलों की खुशबू अब न केवल खेतों में, बल्कि महिलाओं के जीवन में भी उम्मीद और समृद्धि की महक भर रही है।

उद्यान विभाग, ग्रामोत्थान परियोजना एवं एनएचएलएम के संयुक्त प्रयासों से कोट ब्लॉक में 22 पॉली हाउस बनाए गए हैं। पहले चरण में आठ पॉली हाउसों में महिला समूहों ने हॉलैंड से आयातित ओरिएंटल और डासिंग स्टार वैरायटी के बल्ब लगाए हैं।

महिलाओं को जिला योजना से 50 प्रतिशत अनुदान

उत्पादन से लेकर विपणन तक हर स्तर पर सहयोग और बाज़ार उपलब्ध कराने की गारंटी सरकार द्वारा दी जा रही है। ए-ग्रेड लिलियम की कीमत 80 रुपये, बी-ग्रेड 70 रुपये और सी-ग्रेड 60 रुपये तक तय की गई है। इससे यहां की महिलाएं प्रति वर्ष 10 लाख रुपये तक की आय का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा –
“उत्तराखण्ड की मातृशक्ति हमारे राज्य का वास्तविक बल है। कोट ब्लॉक की महिलाओं ने यह सिद्ध कर दिया है कि संकल्प और परिश्रम से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। यह सिर्फ फूलों की खेती नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, नवाचार और महिला सशक्तिकरण की जीवंत मिसाल है। हमारी सरकार हर बेटी और हर महिला को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड के सपने को साकार करने में हमारी मातृशक्ति सबसे बड़ी सहभागी बनेगी।”

यह पहल न केवल महिलाओं की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर रही है, बल्कि प्रदेश सरकार की महिला सशक्तिकरण, नवाचार आधारित खेती और आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड की परिकल्पना को नई दिशा दे रही है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का विज़न

“हमारा संकल्प है कि उत्तराखण्ड की हर बेटी और हर महिला अपने सपनों को पंख दे सके।आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड का मार्ग हमारी मातृशक्ति के साहस और मेहनत से ही प्रकाशित होगा। आज पौड़ी की धरती से जो खुशबू उठ रही है, वही कल पूरे उत्तराखण्ड की पहचान बनेगी।”