Day: March 13, 2026

Uttarakhand: 58 जगह मारे गए छापे, अवैध भंडारण पर 74 सिलिंडर हुए जब्त, विभाग ने अनियमितताओं पर वसूला अर्थदंड.

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खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता विभाग ने राज्य में एलपीजी एवं ईंधन की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था के दृष्टिगत राज्य में 280 जगहों का निरीक्षण किया। 58 जगहों पर छापा मारा। इस दौरान 74 सिलिंडर जब्त किए गए और चार प्राथमिकी दर्ज की गई हैं।

आयुक्त खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता रुचि मोहन रयाल ने बताया, प्रदेश में 10 से 12 मार्च तक विभिन्न जिलों में निरीक्षण किया गया। कार्रवाई के दौरान एक कांटा (वजन माप उपकरण) और दो रिफिलिंग किट भी जब्त की गई हैं। विभाग ने अनियमितताओं पर 4600 का अर्थदंड भी वसूला है।

आयुक्त ने कहा कि राज्य सरकार उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर गैस एवं ईंधन उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी प्रकार की कालाबाजारी, जमाखोरी या अवैध रिफिलिंग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

Uttarakhand: अब शिक्षकों के खाली पदों पर भर्ती से पहले वित्त और कार्मिक विभाग की सहमति जरूरी, आदेश हुए जारी.

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सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के खाली पदों पर भर्ती करने से पहले अब वित्त और कार्मिक विभाग की सहमति लेना अनिवार्य होगा। शासन ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। आदेश में कहा गया है कि छात्र-छात्राओं की संख्या में कमी की वजह से यह संभव है कि स्कूलों में शिक्षकों के पद जरूरत से अधिक हों। बजट की समीक्षा बैठक में यह बात सामने आई है।

शासन ने शिक्षा महानिदेशक को जारी आदेश में कहा, पूर्व में राज्य सरकार के विभिन्न शासनादेशों के माध्यम से छात्र संख्या के आधार पर माध्यमिक और प्रांरभिक शिक्षा विभाग के तहत शिक्षकों के पद सृजित किए गए हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट की समीक्षा में संज्ञान में आया कि स्कूलों में छात्र-छात्राओं की संख्या में लगातार कमी की वजह से संभव है कि शिक्षकों के पद जरूरत से ज्यादा हो रहे हैं।

ऐसे में शिक्षकों की भर्ती से पहले वित्त और कार्मिक विभाग को भर्ती के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा। प्रस्ताव में यह बताया जाएगा कि वर्तमान में स्कूलों में शिक्षकों के स्वीकृत पद और छात्रों की संख्या कितनी है। प्रस्तावित भर्ती का औचित्य और वित्तीय व्ययभार का विवरण भी देना होगा। वहीं, इस मामले में अपर निदेशक शिक्षा महानिदेशालय पदमेंद्र सकलानी ने निदेशक माध्यमिक शिक्षा को पत्र लिखा है।

बंदी की कगार पर हैं तीन हजार से ज्यादा स्कूल-

प्रदेश के सरकारी स्कूलों में छात्र-छात्राओं की संख्या तेजी से घट रही है। यही वजह है कि तीन हजार से ज्यादा स्कूल बंदी की कगार पर हैं। इसमें छात्र-छात्राओं की संख्या दस या फिर इससे भी कम रह गई है।

 

शिक्षा विभाग में पहले शिक्षकों के 2600 पद खत्म कर दिए गए थे, अब कुछ अन्य पद समाप्त किए जाने की तैयारी है। यह सार्वजनिक शिक्षा को समाप्त करने की साजिश है। -डॉ सोहन माजिला, पूर्व प्रांतीय महामंत्री राजकीय शिक्षक संघ

Uttarakhand: प्रदेश में बिजली की मांग में उछाल, बाजार में भारी किल्लत से संकट शुरू, कई जगह हुई बिजली की कटौती.

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प्रदेश में बिजली की मांग में भारी बढ़ोतरी, बाजार में भारी किल्लत की वजह से बिजली संकट शुरू हो गया है। पिछले दो दिनों में न केवल ग्रामीण बल्कि छोटे कस्बों और फर्नेश इंडस्ट्री में भी यूपीसीएल ने कटौती शुरू कर दी है। हालात ये हैं कि बाजार में भी यूपीसीएल को बिजली 10 रुपये प्रति यूनिट से कम नहीं मिल रही।

प्रदेश में एक मार्च को बिजली की मांग 3.8 करोड़ यूनिट थी। जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही है, मांग भी तेजी से उछल रही है। बृहस्पतिवार को बिजली की मांग बढ़कर 4.5 करोड़ यूनिट पर पहुंच गई। इसके सापेक्ष यूजेवीएनएल की बिजली केवल 90 लाख यूनिट मिल रही है, जबकि केंद्रीय पूल से 1.3 करोड़ यूनिट। कुल मिलाकर बिजली की उपलब्धता करीब 2.3 करोड़ यूनिट है। यूपीसीएल बाजार से करीब 70 लाख यूनिट खरीदने को मजबूर है।

बिजली की किल्लत की वजह से पिछले दो दिनों में हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर के ग्रामीण इलाकों में करीब दो से ढाई घंटे, छोटे कस्बों में करीब एक से डेढ़ घंटे और स्टील फर्नेश इंडस्ट्री में भी करीब दो घंटे की कटौती की जा रही है। यूपीसीएल प्रबंधन के मुताबिक, बाजार में बिजली की भारी किल्लत है। इंडियन एनर्जी एक्सचेंज में भी 10 रुपये प्रति यूनिट पर भी बिजली उपलब्ध नहीं हो पा रही है।

गैस किल्लत से बिजली उत्पादन प्रभावित-

इस्राइल-ईरान युद्ध के कारण गैस की कमी होने से गैस आधारित पावर प्लांट भी संकट में हैं। इस कारण यूपीसीएल के काशीपुर स्थित 214 मेगावाट का श्रावंती, गामा कंपनी का बिजली उत्पादन भी बंद है। इन्हें उत्पादन के लिए बाजार से गैस खरीदनी होगी, जो कि इस वक्त या तो उपलब्ध नहीं है या फिर महंगे दामों में मिल रही है। महंगी गैस से उत्पादन करने की सूरत में यूपीसीएल को इनकी बिजली 10 रुपये यूनिट से भी अधिक पैसे में मिलेगी। यूपीसीएल के एमडी अनिल कुमार का कहना है कि बाजार से मांग के सापेक्ष आपूर्ति पूरी करने का प्रयास किया जा रहा है।

 

नियामक आयोग ने 150 मेगावाट पीपीए रोका-

यूपीसीएल ने 500 मेगावाट बिजली खरीद का पीपीए नियामक आयोग की अनुमति के बाद किया था। इसमें से 350 मेगावाट बिजली तो तकनीकी दिक्कतों के कारण नहीं मिल पाई। 150 मेगावाट बिजली पर भी नियामक आयोग ने रोक लगा दी है। जानकारी के मुताबिक, इसका पीपीए करने के लिए नियामक आयोग से अनुमति लेनी होगी।