राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद पहली सुबह रामलला के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए श्री रामजन्मभूमि मंदिर के बाहर सुरक्षा कर्मी तैनात किए गए। इस बीच यह बात सामने आई किअयोध्या में श्रद्धालुओं की कई किलोमीटर लंबी भीड़ की वजह से रामलला के दर्शन अस्थाई रूप से बंद कर दिए गए हैं। हालांकि, यह बात पूरी तरह से गलत है। अयोध्या पुलिस ने इस खबर को भ्रामक बताते हुए इसका खंडन किया है।
अयोध्या पुलिस ने अपने ऑफिशियल एक्स हैंडल पर इस खबर का खंडन करते हुए लिखा, ”कतिपय सोशल मीडिया के माध्यम से असत्य खबर फोटो के साथ सार्वजनिक रुप से प्रसारित की जा रही है कि जनपद अयोध्या में श्रद्धालुओं की कई किलोमीटर लम्बी भीड़ की वजह से श्री रामलला के दर्शन अस्थाई रूप से बंद किया गया है। अयोध्या पुलिस इस असत्य एवं भ्रामक खबर का खण्डन करती है।” भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा कर्मी तैनात, पुलिस ने कहा- धैर्य न खोएं
बता दें, अयोध्या के राम मंदिर में दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। भीड़ को संभालने के लिए पुलिस बल को काफी मशक्कत करनी पड़ी। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए श्री राम जन्मभूमि मंदिर के बाहर सुरक्षा कर्मी तैनात किए गए। इस बीच लखनऊ जोन के एडीजी पीयूष मोर्डिया ने लोगों से धैर्य बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोगों की संख्या ज्यादा है, इसलिए लोगों को इंतजार करना पड़ेगा। सभी के दर्शन होंगे, भारी वाहनों को डायवर्ट किया गया है, जिससे लोगों को परेशानी न हो।”
मंदिर के ‘गर्भ गृह’ में मौजूद प्रमुख सचिव गृह और विशेष डीजी कानून और व्यवस्था
अयोध्या राम मंदिर में बड़ी संख्या में भक्तों की आमद के साथ, यूपी के प्रमुख सचिव, गृह, संजय प्रसाद और विशेष डीजी कानून और व्यवस्था, प्रशांत कुमार भक्तों की व्यवस्थित आवाजाही की निगरानी के लिए मंदिर के ‘गर्भ गृह’ के अंदर मौजूद हैं।
कोचिंग संस्थानों पर केंद्र सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है. अब कोई भी कोचिंग संस्थान 16 साल से कम उम्र के छात्रों को अपने यहां नहीं पढ़ा सकते हैं. शिक्षा मंत्रालय द्वारा घोषित नए दिशानिर्देश के मुताबिक, देश के कोचिंग संस्थान 16 साल से कम उम्र के विद्यार्थियों को अपने यहां दाखिल नहीं कर सकेंगे और अच्छे नंबर या रैंक दिलाने की गारंटी जैसे भ्रामक वादे भी नहीं कर सकेंगे. माना जा रहा है कोचिंग संस्थानों को विनियमित करने के लिए दिशानिर्देश एक कानूनी ढांचे की आवश्यकता को पूरा करने और बेतरतीब तरीके से निजी कोचिंग संस्थानों की बढ़ोतरी को रोकने के लिए हैं.
केंद्र सरकार के दिशा निर्देश में कहा गया, ‘कोई भी कोचिंग संस्थान स्नातक से कम योग्यता वाले शिक्षकों को नियुक्त नहीं करेगा. कोचिंग संस्थान विद्यार्थियों के नामांकन के लिए माता-पिता को भ्रामक वादे या रैंक या अच्छे अंक की गारंटी नहीं दे सकते. संस्थान 16 वर्ष से कम उम्र के छात्रों का नामांकन नहीं कर सकते. विद्यार्थियों का कोचिंग संस्थान में नामांकन माध्यमिक विद्यालय परीक्षा के बाद ही होना चाहिए.’
क्यों हुआ यह एक्शन-
अब सवाल उठता है कि आखिर सरकार ने कोचिंग संस्थानों पर यह एक्शन क्यों लिया है. बीते कुछ समय से कोटा में जिस तरह से बच्चों के आत्महत्या के मामले सामने आए हैं, उसने सरकार की चिंता बढ़ा दी थी. यही वजह है कि सरकार ने छात्रों के आत्महत्या के बढ़ते मामलों को देखते हुए यह एक्शन लिया है. इतना ही नहीं, शिक्षा मंत्रालय ने यह दिशा निर्देश विद्यार्थियों की आत्महत्या के बढ़ते मामलों, आग की घटनाओं, कोचिंग संस्थानों में सुविधाओं की कमी के साथ-साथ उनके द्वारा अपनाई जाने वाली शिक्षण पद्धतियों के बारे में सरकार को मिली शिकायतों के बाद तैयार किए हैं.
दिशानिर्देश में क्या-क्या है-
शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी दिशानिर्देश के मुताबिक, ‘कोचिंग संस्थान कोचिंग की गुणवत्ता या उसमें दी जाने वाली सुविधाओं या ऐसे कोचिंग संस्थान या उनके संस्थान में पढ़े छात्र द्वारा प्राप्त परिणाम के बारे में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी दावे को लेकर कोई भ्रामक विज्ञापन प्रकाशित नहीं कर सकते हैं या प्रकाशित नहीं करवा सकते हैं या प्रकाशन में भाग नहीं ले सकते हैं.’ कोचिंग संस्थान किसी भी शिक्षक या ऐसे व्यक्ति की सेवाएं नहीं ले सकते, जो नैतिक कदाचार से जुड़े किसी भी अपराध के लिए दोषी ठहराया गया हो. कोई भी संस्थान तब तक पंजीकृत नहीं होगा जब तक कि उसके पास इन दिशानिर्देशों की आवश्यकता के अनुसार परामर्श प्रणाली न हो. दिशानिर्देश में कहा गया, ‘कोचिंग संस्थानों की एक वेबसाइट होगी जिसमें पढ़ाने वाले शिक्षकों (ट्यूटर) की योग्यता, पाठ्यक्रम/पाठ्य सामग्री, पूरा होने की अवधि, छात्रावास सुविधाएं और लिए जाने वाले शुल्क का अद्यतन विवरण होगा.’ नए दिशानिर्देशों के अनुसार, विद्यार्थियों पर कड़ी प्रतिस्पर्धा और शैक्षणिक दबाव के कारण कोचिंग संस्थानों को उन्हें तनाव से बचाने के लिए कदम उठाने चाहिए और उन पर अनावश्यक दबाव डाले बिना कक्षाएं संचालित करनी चाहिए.
फीस को लेकर भी गाइडलाइन-
दिशानिर्देश में कहा गया, ‘कोचिंग संस्थानों को संकट और तनावपूर्ण स्थितियों में छात्रों को निरंतर सहायता प्रदान करने के लिए तत्काल हस्तक्षेप के लिए एक तंत्र स्थापित करना चाहिए. सक्षम प्राधिकारी यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा सकता है कि कोचिंग संस्थान द्वारा एक परामर्श प्रणाली विकसित की जाए जो छात्रों और अभिभावकों के लिए आसानी से उपलब्ध हो.’ दिशा निर्देश में विद्यार्थियों के मानसिक कल्याण को लेकर विस्तृत रूपरेखा पिछले साल कोटा में रिकॉर्ड संख्या में छात्रों की आत्महत्या करने की घटना के बाद आई है. दिशा निर्देश में कहा गया कि विभिन्न पाठ्यक्रमों का शुल्क पारदर्शी और तार्किक होना चाहिए और वसूले जाने वाले शुल्क की रसीद दी जानी चाहिए. इसमें साफ किया गया है कि अगर छात्र बीच में ही पाठ्यक्रम छोड़ता है तो उसकी बची हुई अवधि की फीस लौटाई जानी चाहिए.
राज्य सरकार को मिली जिम्मेदारी-
नीति को सशक्त बनाते हुए केंद्र ने सुझाव दिया है कि कोचिंग संस्थानों पर दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाना चाहिए या अत्यधिक शुल्क वसूलने पर उनका पंजीकरण रद्द कर दिया जाना चाहिए. कोचिंग संस्थानों की उचित निगरानी के लिए सरकार ने दिशानिर्देश के प्रभावी होने के तीन महीने के भीतर नए और मौजूदा कोचिंग संस्थानों का पंजीकरण करने का प्रस्ताव किया है. दिशानिर्देश के मुताबिक राज्य सरकार कोचिंग संस्थान की गतिविधियों की निगरानी के लिए जिम्मेदार होंगे.
मणिपुर के कांगपोकपी जिले में दो गुटों के बीच गोलीबारी हुई। इस गोलीबारी में एक व्यक्ति की मौत हो गई। गोलीबारी बुधवार रात को हुई, जब संदिग्ध उग्रवादियों ने कांगचुप इलाके में हमला किया। इसके जवाब में विलेज वॉलंटियर्स ने जवाब में गोलीबारी की। दोनों तरफ से हुई फायरिंग में एक विलेज वालंटियर की गोली लगने से मौत हो गई। मृतक की पहचान टी मनोरंजन के रूप में हुई है।
महिलाओं ने किया विरोध प्रदर्शन-
बुधवार रात को इंफाल में कई जगह गोलीबारी की घटनाएं हुईं। हिंसा में हो रहीं हत्याओं के खिलाफ इंफाल घाटी में गुरुवार को बड़ी संख्या में महिलाओं ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने मांग की है कि हिंसा बंद होनी चाहिए और साथ ही उन्होंने इंटर एजेंसी यूनिफाइड कमांड के चेयरमैन को पद से हटाने की भी मांग की। बीते साल मणिपुर सरकार ने इंटर एजेंसी यूनिफाइड कमांड का प्रमुख कुलदीप सिंह को नियुक्त किया था। महिलाओं ने इंफाल के मुख्य बाजार से लेकर सीएम आवास और राजभवन तक मार्च किया। राजभवन से 300 मीटर दूर महिला प्रदर्शनकारियों को रोक दिया गया। जिसके चलते प्रदर्शनकारी महिलाएं और सुरक्षाकर्मियों में झड़प भी हुई।
प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिसकर्मियों ने आंसू गैस के गोले छोड़े।
जोशीमठ भू-धंसाव के बाद खतरे की जद में नजर आ रहे नैनीताल शहर को बचाने और भविष्य की निर्माण योजनाओं को तैयार करने के लिए इसका भू-तकनीकी एवं भू-भौतिकीय सर्वेक्षण होगा। इसके अलावा नैनीताल में स्लोप स्थायित्व का भी सर्वेक्षण होगा। इसके लिए भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही शहर का लाइडर मैप भी तैयार किया जाएगा।
दरअसल, जोशीमठ भू-धंसाव के बाद सरकार ने तय किया था कि सभी पर्वतीय शहरों की धारण क्षमता का आकलन कराया जाएगा। इस कड़ी में पहले चरण में 15 शहरों का चयन किया गया था। सबसे पहले नैनीताल की धारण क्षमता के आकलन के साथ ही इसे भू-धंसाव से बचाने के लिए सर्वेक्षण होगा। इसके तहत नैनीताल का लाइडर (लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग) मैप तैयार किया जाएगा। इस तकनीक का उपयोग उच्च-रिजॉल्यूशन वाले मानचित्र बनाने में किया जाता है।
यहां पैदा हो रहा है खतरा-
नैनीताल की बुनियाद समझा जाने वाला बलिया नाला लगातार भू-स्खलन की जद में आ रहा है, इसका ट्रीटमेंट भी शुरू किया गया है। वहीं, नैनीताल का शीर्ष नैना पीक, भुजा टिफ्फन टॉप व स्नो व्यू की रमणीक पहाड़ी में भूस्खलन सक्रिय है।
यह होगा फायदा-
भू-सर्वेक्षण के बाद लाइडर मैप बनने से यह स्पष्ट हो सकेगा कि शहर में कितनी ऊंचाई तक के भवन सुरक्षित हैं। पहले से जो भवन बने हुए हैं, उनका शहर पर कितना बोझ है। कितने ढलान पर कितनी मंजिल के ऐसे भवन हैं, जो आपदा के लिहाज से खतरे में हैं। कितने डिग्री ढलान पर कितनी मंजिल के भवन बनाए जाने चाहिए। पर्वतीय शहरों में वह कौन सी भूमि व स्थान हैं, जहां भवन बनाना खतरनाक हो सकता है। भविष्य में नए निर्माण से लेकर सीवर, पेयजल तक का पूरा काम उसी मैप के हिसाब से होगा। इसके लिए मास्टर प्लान भी उसी के अनुसार बनाया जाएगा।
हमने नैनीताल के भू-सर्वेक्षण व लाइडर मैपिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए जल्द एजेंसी का चयन कर लिया जाएगा। इसके बाद बाकी अन्य शहरों के लिए भी यह प्रक्रिया शुरू की जाएगी। -डॉ. रंजीत सिन्हा, सचिव, आपदा प्रबंधन
उत्तर भारत में तापमान लगातार गिर रहा है। इससे जहां ठंड बढ़ रही है वहीं जनजीवन रुक सा गया है। घने कोहरे के कारण विमान और रेल सेवा के साथ सड़क यातायात भी प्रभावित हो रहा है। पहाड़ों से लेकर मैदान क्षेत्रों तक मौसम ठंडा बना हुआ है।
दिल्ली में लगातार चौथे दिन न्यूनतम तापमान चार डिग्री से नीचे रहा। मंगलवार को दिल्ली में न्यूनतम तापमान 3.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जबकि अधिकतम तापमान 17.4 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक घने कोहरे के साथ भीषण सर्दी की चेतावनी जारी की है। दिल्ली के कुछ हिस्सों में शीतलहर चलेगी और बुधवार को सुबह घना कोहरा होगा।
पंजाब में शून्य से नीचे पहुंचा तापमान-
पंजाब के नवांशहर में मंगलवार को न्यूनतम तापमान माइनस 0.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। यहां सोमवार को न्यूनतम तापमान माइनस 0.2 था। वहीं, चंडीगढ़ में न्यूनतम तापमान 2.7 डिग्री, पटियाला में 3.1 डिग्री, लुधियाना में 3.3 डिग्री, फतेहगढ़ साहिब में 3.4 डिग्री, गुरदासपुर में 3.5 डिग्री और अमृतसर में 5.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने बुधवार को घने कोहरे और शीतलहर का रेड अलर्ट जारी किया है।
मंगलवार को दृश्यता रही शून्य-
हरियाणा में जनवरी में तीसरी बार तापमान एक डिग्री सेल्सियस से नीचे रहा। महेंद्रगढ़ का न्यनूतम तापमान 0.7 डिग्री और रेवाड़ी का 1.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।वहीं, पानीपत, फतेहाबाद सहित चार जिलों की सीजन की सबसे सर्द रात रही। मंगलवार सुबह घने कोहरे से दृश्यता शून्य रही। इससे लोगों को परेशानी का भी सामना करना पड़ा है।
U.P में कोहरे और गलन से नहीं राहत-
उत्तर प्रदेश में कोहरे और गलन का चक्र टूट नहीं रहा है। लगातार चौथे दिन मंगलवार को भी कई जिलों में सुबह की शुरुआत कोहरे के साथ हुई। दोपहर में धूप निकली, मगर सर्द हवा के आगे बेअसर ही रही। मेरठ फिर सबसे सर्द जिला रहा और यहां मंगलवार को तापमान 3.8 डिग्री रहा।
ट्रेनों और उड़ानों पर कोहरे का बड़ा असर-
वहीं ट्रेनों और उड़ानों पर कोहरे का असर जारी है। 22 जनवरी तक शीतलहर प्रचंड रूप में चलती रहेगी। 45 से अधिक जिलों में घना कोहरा का अलर्ट जारी किया गया है।बिहार में आज 12 जिलों में हल्की वर्षा के आसार : बिहार में हिमालय की तलहटी से आ रही बर्फीली हवाओं के कारण घने कोहरा व भीषण ठंड का प्रभाव बीते पांच दिनों से बना हुआ है।
पटना का भी वही हाल-
मंगलवार को बिहार के पटना सहित 17 शहरों के न्यूनतम तापमान में आंशिक वृद्धि हुई। वहीं, पटना समेत 22 शहरों के अधिकतम तापमान में गिरावट दर्ज की गई। बुधवार को पटना समेत 12 जिलों में हल्की वर्षा के आसार हैं। इससे 20 जनवरी तक प्रदेश के अधिकतर भाग में शीत दिवस की स्थिति बनी रहेगी।
पहाड़ों में भी लगातार गिर रहा है तापमान-
उत्तराखंड में पिछले तीन दिन में रात के तापमान दो से तीन डिग्री सेल्सियस की कमी आई है। चंपावत तापमान माइनस 1.1 डिग्री व अल्मोड़ा का माइनस 2.1 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है। पंतनगर एयरपोर्ट पर पिछले 20 दिन से उड़ानें नहीं भरी जा रही हैं।
जम्मू में मंगलवार को धूप खिलने से थोड़ी राहत मिली और अधिकतम तापमान 16.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। हालांकि में रविवार-सोमवार की रात मौजूदा सर्दियों की सबसे ठंडी रात रही और न्यूनतम तापमान 2.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ।हिमाचल प्रदेश में मौसम विभाग ने दो दिन हिमपात व वर्षा की संभावना जताई थी, लेकिन मंगलवार को पश्चिमी विक्षोभ का कोई प्रभाव नहीं दिखा।
मौसम विज्ञान केंद्र श्रीनगर के अनुसार 16 से 20 के बीच ऊपरी पहाड़ी क्षेत्रों में हल्की बर्फबारी की संभावना है।
विलंबित उड़ानें हुईं कम, यात्रियों की परेशानी नहीं-
घने कोहरे के कारण विमानों के आवागमन में हो रही देरी थमने का नाम नहीं ले रही है। मंगलवार को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय 288 उड़ानें विलंब की चपेट में आईं। विलंबित विमानों की संख्या के लिहाज से देखें, तो रविवार और सोमवार के मुकाबले इनमें कमी आई, लेकिन यात्रियों की परेशानी जारी है।
कोहरे के कारण सबसे ज्यादा घरेलू उड़ानें प्रभावित रहीं। सबसे ज्यादा असर प्रस्थान पर पड़ा। सुबह छह से 10 बजे के बीच कम से कम 70 उड़ानों में देरी हुई। इसके बाद स्थिति धीरे-धीरे सुधरने लगी। आगमन की बात करें, तो यहां भी विलंब देखने को मिला।
27 घंटे से अधिक विलंब से रवाना हुई बिहार संपर्क क्रांति
कोहरे के कारण लंबी दूरी की 125 से ज्यादा ट्रेनें विलंब से दिल्ली से पहुंचीं। कई ट्रेनें एक दिन बाद अपने गंतव्य पर पहुंच रही हैं।
सोमवार को रवाना होने वाली नई दिल्ली-दरभंगा बिहार संपर्क क्रांति एक्सप्रेस 27 घंटे 50 मिनट की देरी से मंगलवार शाम 4:50 बजे रवाना हुई। वहीं, मंगलवार को चलने वाली यह ट्रेन साढ़े 15 घंटे की देरी से बुधवार शाम साढ़े चार बजे चलेगी। ट्रेन के देरी से चलने से यात्री परेशान हैं।
उत्तराखंड के 51 वाइब्रेंट विलेज के बीच पांच सड़कों के लिए केंद्र ने 119.44 करोड़ को मंजूरी देते हुए इसकी 26.06 करोड़ की पहली किस्त जारी कर दी है। राज्य सरकार वाइब्रेंट विलेज से संबंधित सभी योजनाओं की डीपीआर केंद्र को भेज चुकी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर भारत-चीन सीमा पर स्थित उत्तरकाशी जिले के 10, चमोली जिले के जोशीमठ के 14, पिथौरागढ़ जिले के धारचूला के 17, कनालीछीना के 2, मुनस्यारी के 8 गांवों को वाइब्रेंट विलेज घोषित किया गया था। इन गांवों में विकास कार्यों के लिए संबंधित जिलों के डीएम से प्रस्ताव मांगे गए थे। इन प्रस्तावों पर पिछले साल 26 सितंबर को हुई बैठक में कुछ संशोधन के साथ मुख्य सचिव ने अनुमोदन दे दिया था। इसके लिए सभी डीपीआर केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेज दी गई हैं।
कुल 506 में से 66 परियोजनाएं वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत और 440 अन्य योजनाओं से कंवर्जेंस के तहत पूरी होनी हैं। गृह मंत्रालय ने वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत 43.96 किमी लंबाई की पांच सड़कों के लिए 119.443 करोड़ की स्वीकृति दी है, जिसमें से 26.06 करोड़ की पहली किश्त जारी कर दी है। सचिव ग्राम्य विकास राधिका झा ने बताया कि वाइब्रेंट विलेज संबंधी प्रस्ताव गृह मंत्रालय को ऑनलाइन माध्यम से भेजे जा चुके हैं। इसी के तहत पांच सड़कों को मंजूरी मिली है।
ग्रामीणों का जीवन स्तर सुधरेगा-
पिछले आम बजट में सरकार ने वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम की घोषणा की थी। इसके तहत सीमांत गांवों के निवासी लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए विभिन्न योजनाएं बनाई गई हैं। चूंकि उत्तराखंड में करीब छह माह तक लोग सीमांत गांव में रहते हैं और छह माह तक पलायन करके दूसरे स्थानों पर रहते हैं। इसलिए राज्य सरकार ने उनके लिए दोनों स्थानों पर पीएम आवास योजना के तहत आवास बनाने का प्रस्ताव भी गृह मंत्रालय को भेजा हुआ है।
उत्तराखंड के चार गांवों में अचानक लॉक डाउन लगा दिया गया। इन गांवों का कोई भी व्यक्ति न तो गांव की सीमा से बाहर जा सकेगा और न ही बाहर से कोई इन गांवों में प्रवेश कर सकेगा। दरअसल, देवभूमि उत्तराखंड में देवताओं की पूजा करने के लिए हर गांव और क्षेत्र के अपने-अपने अनुष्ठान और रिवाज हैं। ऐसा ही एक रिवाज सीमांत जिले चमोली की उर्गम घाटी के चार गांवों में खुशहाली, अच्छी फसल और सेहत के लिए अनुष्ठान चल रहा है।
प्रत्येक 60 साल में होने वाली यह पूजा चार दिन तक चलेगी। पूजा-अर्चना निर्विघ्न चले, इसलिए गांवों की सीमाओं पर पूजित चावल व अन्य अनाज से मंत्रों के जरिए लक्ष्मण रेखा खींच दी गई है। जितने दिन तक पूजा-अर्चना होगी, उतने दिन तक इन गांवों का कोई भी व्यक्ति न तो गांव की सीमा से बाहर जा सकेगा और न ही बाहर से कोई इन गांवों में प्रवेश कर सकेगा।
उर्गम घाटी के डुंग्री, बरोसी और जोशीमठ क्षेत्र के सलूड़ और डुंगरा गांव के लोग इन दिनों भूमियाल देवता के मंदिर में पूजा अर्चना में मग्न हैं। 10 जनवरी को अपराह्न दो बजे से गांव के भूमियाल देवता के मंदिर में उबेद (मंत्रों से गांव की घेरबाड़) कार्यक्रम शुरू हुआ। पूजा शुरू होने से पहले चारों गांवों की सीमाओं का मंत्रों से बंधन कर दिया गया।
पूजा-अर्चना में तल्लीन ग्रामीण-
इसके बाद वाहनों की आवाजाही पर भी आयोजकों ने पूरी तरह से पाबंदी लगा दी। एक तरह से वहां देवता की पूजा के लिए लॉकडाउन है। यह लॉकडाउन 10 जनवरी से लगा था और 13 जनवरी तक रहेगा। इस दिन पूजा-अर्चना संपन्न होने के साथ ही सीमाओं के बंधन खोल दिए जाएंगे। तब गांवों में वाहनों की आवाजाही हो सकेगी। इसके साथ ही स्थानीय ग्रामीण भी इधर-उधर जा सकेंगे, लेकिन जितने दिन देवता की पूजा के लिए लॉकडाउन रहेगा, उतने दिन सभी ग्रामीण देवता के मंदिर में पूजा-अर्चना में तल्लीन रहेंगे।गांव में करीब 60 साल बाद यह कार्यक्रम हो रहा है। इसे उबेद उखेल कहते हैं। गांव की खुशहाली, दुख, बीमारी दूर करने, अच्छी फसल, पशुओं और मनुष्यों की अच्छी सेहत के लिए यह कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। भूमियाल देवता की पूजा-अर्चना में कोई विघ्न न आए, इसके लिए गांवों की सीमाओं का मंत्रों से पूजित चावल और अन्य अनाज से बंधन कर लिया जाता है।
जिले के कई अन्य जगहों पर उबेद कार्यक्रम आयोजित होता है। यह गांवों की खुशहाली के लिए किया जाता है। इसमें भूमियाल व आराध्य देवताओं की पूजा-अर्चना की जाती है।
उत्तराखंड के कुमाऊं के मैदानी इलाकों में कोहरे और सर्द लहरों से तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। इससे गलन बढ़ने लगी है। वहीं, आज भी सुबह से खटीमा, रुद्रपुर, हल्द्वानी में कोहरा छाया हुआ है।
मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के अनुसार, आज उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, देहरादून, पौड़ी, टिहरी, अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़, नैनीताल, ऊधमसिंह नगर, चंपावत और हरिद्वार में पाले को लेकर यलो अलर्ट जारी किया है।
वहीं, बुधवार मौसम का सबसे ठंडा दिन रहा। दिन का तापमान 11 डिग्री रहा तो रात में पारा आठ डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। शहर सुबह घने कोहरे के आगोश में रहा तो दिनभर बादल और ठंडी हवाओं से जनजीवन प्रभावित रहा। कड़ाके की सर्दी से बचने के लिए घरों और दफ्तरों में लोगों ने अलाव, हीटर का सहारा लिया। सड़कों पर भी जहां कहीं अलाव जलता दिखा, लोग वहीं ठिठक गए।
मौसम विभाग ने मैदानी क्षेत्रों में शीतलहर के साथ घना कोहरा छाने और पर्वतीय क्षेत्रों में पाले को लेकर यलो अलर्ट जारी किया है। उधर, नैनीताल में मंगलवार शाम सवा सात बजे बारिश और ओलावृष्टि के बाद बुधवार को चटक धूप खिली रही। मौसम साफ रहने से लोगों को ठंड से काफी राहत मिली। अमर उजाला टीम ने सर्द मौसम में शहर के अलग-अलग जगहों के हालात का जायजा लिया। महिला और बेस अस्पताल में ठिठुरते मरीजों का हाल जाना। वहीं सरकारी दफ्तरों में अधिकारियों, कर्मचारियों ने हीटर की ताप में खुद को गर्म रखा।
उत्तराखंड में विकास किस तेजी के साथ हो रहा है कि प्रदेश बनने के इतने साल बाद भी लोगों को बुनियादी सुविधाओं के लिए आंदोलन करना पड़ता है सरकार के लिए शर्म की बात तो तब हो जाती है जब बुनियादी जरूरत के लिए 100 साल की बुजुर्ग महिला को धरने पर बैठना पड़े।
एक तरफ सरकार 2024 की चुनाव की तैयारी में लगी हुई है तो वहीं दूसरी तरफ आजादी के 73 वर्षों बाद भी 100 वर्ष की बुजुर्ग महिला सड़क मार्ग की लड़ाई लड़ रही है।सड़क न होने के कारण ग्रामीणों को परेशानी हो रही है और अब ये ग्रामीण चुनाव बहिष्कार का ऐलान कर पिछले 15 दिनों से धरने पर है. आजादी के 73 साल बाद भी दूरस्थ सीमावर्ती गांव सड़क मार्ग से अछूते हैं ग्रामीण 25 से 50 किलोमीटर प्रतिदिन पैदल चलने के लिए मजबूर हैं आलम यह है कि लगभग 10 साल पहले स्वीकृत हो चुका सड़क मार्ग अब तक बनकर तैयार नहीं हो सका है।
सड़क मार्ग की मांग को लेकर जोशीमठ के सेंजी डुमक के ग्रामीण लगभग पिछले 15 दिनों से आंदोलन कर रहे है इन लोगों ने चुनाव बहिष्कार की भी चेतावनी दी है आंदोलनकारियों में 100 साल की बुजुर्ग महिला बच्ची देवी भी शामिल हैं, जो लगातार 15 दिनों से कड़कड़ाती सर्दी के बीच इस उम्मीद में धरने पर बैठी हैं कि उनकी गुहार शासन स्तर तक पहुंचेगी और उनके जीते जी गांव सड़क मार्ग से जुड़ सकेगा लेकिन सरकार शायद 2024 चुनाव की तैयारी में इतना व्यस्त है कि उसको इन ग्रामीणों की सुध लेने का भी समय नहीं है।
ग्रामीणों और अपने बड़े बुजुर्गों की परेशानी को देख विद्यालय में पढ़ने वाले छोटे-छोटे बच्चों को भी तरस आ गया लेकिन सरकार को नहीं छोटे स्कूली बच्चों ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी है इसमें बच्चों ने लिखा है कि उनके गांव को सड़क मार्ग से जोड़ा जाए गांव में सड़क न होने के कारण उन्हें प्रतिदिन 25 से 50 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता है विद्यालय बहुत दूर है और बर्फबारी और बरसात के दिनों में यहां पहुंचना कठिन होता है।
इस आंदोलन में 100 साल की बच्ची देवी ही नहीं बल्कि 5 और 7 साल के कई छोटे बच्चे भी शामिल हैं सिर्फ 100 साल की महिला ही नहीं इस आंदोलन में 90 साल के बुजुर्ग भी कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं जिस उम्र में पीठ पर स्कूल बैग और हाथों में कलम थामना था उस उम्र में नैनिहाल हाथ में माइक और पीठ पर इस आंदोलन को ढो रहे हैं और हमारी सरकार सिर्फ नारों में ही विकास समझ रही है। एक ओर देश के सीमांत गांवों को विकसित करने के लिए केंद्र सरकार ने वाइब्रेंट विलेज योजना चला रही है जिसमें उत्तराखंड के तीन जिलों के 51 गांवों को भी शामिल किया है लेकिन ये गांव आज भी भगवान भरोसे चल रहे हैं।
मणिपुर कांग्रेस के अध्यक्ष मेघचंद्र ने पार्टी नेताओं के साथ बुधवार सुबह मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह से उनके कार्यालय में मुलाकात की। बाद में उन्हें सूचित किया कि कानून एवं व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए सरकार इस ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ को अनुमति नहीं दे सकती है।
मणिपुर सरकार ने 14 जनवरी को इंफाल पूर्वी जिले के हट्टा कांगजेइबुंग में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ शुरू करने के लिए जमीनी अनुमति जारी करने से इनकार कर दिया है। कांग्रेस ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है, जिसके बाद से राजनीति तेज हो गई है। कांग्रेस ने राज्य सरकार पर इसको लेकर राजनीतिक करने का आरोप भी लगाया है। गौरतलब है कि मणिपुर कांग्रेस के अध्यक्ष और कांग्रेस विधायक के मेघचंद्र ने पार्टी नेताओं के साथ बुधवार सुबह मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह से उनके कार्यालय में मुलाकात की। बाद में उन्हें सूचित किया कि कानून एवं व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए सरकार इस यात्रा को अनुमति नहीं दे सकती है।
मणिपुर कांग्रेस के अध्यक्ष मेघचंद्र ने कहा कि भारत जोड़ो न्याय यात्रा के आयोजन स्थल को बदल दिया है। अब थौबल जिले के कोंगजोम में एक निजी स्थान में इसका आयोजन किया जाएगा। बता दें कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भारत जोड़ो न्याय यात्रा कोहरी झंडी दिखाएंगे। यात्रा 14 राज्यों और 85 जिलों को कवर करने के बाद 20 मार्च को इसका समापन होगा। उल्लेखनीय है कि मंगलवार को मणिपुर के मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने कहा था कि सरकार विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों से रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार इस पर निर्णय लेगी।
हमें यात्रा केवल मणि्पुर से शुरू करनी है- वेणुगोपाल
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि हमें जानकारी मिली है कि मणिपुर सरकार ने इंफाल के पैलेस ग्राउंड में यात्रा आयोजित करने के हमारे अनुरोध को अस्वीकार कर दिया है। जब हम पूर्व से पश्चिम तक यात्रा शुरू कर रहे हैं, तो हम मणिपुर को कैसे छोड़ सकते हैं। फिर हम देश के लोगों को क्या संदेश दे रहे हैं। हमें यात्रा केवल मणिपुर से शुरू करने की आवश्यकता है। अब हम मणिपुर में किसी अन्य स्थान से यात्रा शुरू करने जा रहे हैं।