Author: Manisha Rana

भारत-मालदीव में विवाद जारी, नई दिल्ली ने राजदूत को किया तलब, जानिए कहां से शुरू हुआ विवाद.

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India-Maldives Relations: भारत-मालदीव के बीच राजनयिक विवाद सोमवार (8 जनवरी) को भी जारी रहा. इस बीच मालदीव के राजदूत को भारत ने तलब किया. वहीं सोशल मीडिया पर इस समय लक्षद्वीप बनाम मालदीव की एक जंग छिड़ी हुई है। पीएम नरेंद्र मोदी की लक्षद्वीप की यात्रा के बाद ये बहस शुरू हुई है। पीएम की इस यात्रा से अटकलें लगाई कि मालदीव के पेंच कसने के लिए भारत अपने द्वीपों में पर्यटन को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा है। पीएम मोदी के दौरे के बाद से लक्षद्वीप गूगल सर्च इंजन पर सबसे ज्यादा सर्च किया जाने वाला कीवर्ड रहा है। शुक्रवार को, 50,000 से अधिक लोगों ने केंद्र शासित प्रदेश को गूगल पर देखा, इसकी वजह ये पीएम की पोस्ट भी रही, जिसमें उन्होंने इस जगह की आश्चर्यजनक सुंदरता और वहां के लोगों की गर्मजोशी के बारे में लिखा।
 
नरेंद्र मोदी के लक्षद्वीप दौरे के बाद सोशल मीडिया पर आग भड़काने का काम मालदीव की सत्ताधारी पार्टी के नेताओं के ट्वीट ने किया। इन ट्वीट में नरेंद्र मोदी का मजाक उड़ाया गया तो भारतीयों को गंदा कहते हुए नस्लीय टिप्पणियां की गईं। इसमें जाहिर रमीज और मरियम शिउना खासतौर से अपने कमेंट के चलचते सोशल मीडिया पर भारतीयों के निशाने पर आए। इसी का नतीजा था कि सोशल मीडिया पर रविवार को बायकॉट मालदीव ट्रेंड करने लगा।
1. भारतीय विदेश मंत्रालय ने मालदीव के राजदूत को सोमवार को तलब किया. मालशा शरीफ, मरियम शिउना और अब्दुल्ला महज़ूम माजिद की पीएम मोदी के खिलाफ की गई टिप्पणी को लेकर कड़ी चिंता व्यक्त की. तीनों मंत्रियों को निलंबित किया जा चुका है.

2.  मालदीव की सरकार ने भारतीय उच्चायुक्त मुनु मुहावर को कहा कि उसके निलंबित किये जा चुके तीन उप मंत्रियों की पीएम मोदी के खिलाफ दिए गए अपमानजनक बयान सरकार के रुख को प्रदर्शित नहीं करते. द सन ऑनलाइन’ की रिपोर्ट के मुताबिक मालदीव के एक शीर्ष सरकारी अधिकारी ने कहा कि बैठक में नसीर ने पड़ोसियों के लिए मालदीव का सतत समर्थन दोहराया. भारतीय उच्चायोग ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर बताया कि विदेश मंत्रालय में डॉ अली नसीर मोहम्मद के साथ द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा करने के लिए भारतीय उच्चायुक्त की बैठक पहले से तय थी.

3. पीएम मोदी पर मालदीव के मंत्रियों की टिप्पणी पर लक्षद्वीप के लोकसभा सांसद मोहम्मद फैजल ने कहा कि कुछ भी बोलने से पहले दो बार सोचें. फैजल ने पीटीआई से बात करते हुए कहा, ‘‘माननीय प्रधानमंत्री की लक्षद्वीप के पर्यटन को लेकर की गई टिप्पणी पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला था. मालदीव के उप मंत्रियों की गई टिप्पणी अवांछित और बेतुकी थीं. ’’

4.  मालशा शरीफ, मरियम शिउना और अब्दुल्ला महज़ूम माजिद ने पीएम मोदी के लक्षद्वीप की फोटो शेयर करने को लेकर टिप्पणी की थी. तीनों ने कहा था कि पीएम मोदी ऐसा लक्षद्वीप को मालदीव के वैकल्पिक पर्यटन स्थल के रूप में पेश करने की एक कोशिश करने के लिए कर रहे हैं.

5. भारत से विवाद के बीच मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू चीन की राजकीय यात्रा पर गए हैं. यहां मुइज्जू राष्ट्रपति शी चिनफिंग से द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा करेंगे. मोहम्मद मुइज्जू को चीन का करीबी माना जाता है.

6. कांग्रेस ने कहा कि मालदीव और चीन के रिश्ते भारत के लिए चिंता की बात है. कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा, ” मालदीव हमेशा भारत को चीन के ऊपर तरजीह देता रहा है. अब, लेकिन मालदीव को चीन को प्राथमिकता दे रहा है.”

7. विवाद के बीच ईज़माईट्रिप ने मालदीव के लिए सभी फ्लाइट बुकिंग पर रोक लगा दी है.  ईज़माईट्रिप के सीईओ निशांत पिट्टी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, “लक्षद्वीप का पानी और बीच (समुद्र तट) मालद्वीव/सेशल्स जैसे ही अच्छे हैं. हम ईज़माईट्रिप पर इस बेहद खूबसूरत पर्यटन स्थल को बढ़ावा देने के लिए खास पेशकश लेकर आएंगे जहां हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हाल में गए थे.”

8. टूर ऑपरेटरों के संगठन इंडियन एसोसिएशन ऑफ टूर ऑपरेटर्स (आईएटीओ) ने कहा कि मालदीव की यात्रा के लिए कोई नई पूछताछ की नहीं जा रही. आईएटीओ के अध्यक्ष राजीव मेहरा ने कहा, ”भारतीय पर्यटकों की ओर से मालदीव के लिए कोई नई पूछताछ नहीं आ रही है.”

9. मालदीव की यात्रा करने वालों में पूरी दुनिया में भारत के लोग सबसे ज्यादा है. मालदीव के पर्यटन मंत्रालय के मुताबिक, 2023 में 2.03 लाख से अधिक भारतीयों ने मालदीव की यात्रा की.

10. पीएम मोदी लक्षद्वीप कई परियोजनाओं का उद्घाटन करने के लिए हाल ही में गए थे. इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर फोटो शेयर कर बताया था कि उन्होंने यात्रा के दौरान स्नॉर्कलिंग का लुत्फ उठाया.  उन्होंने लिखा, ‘‘जो लोग रोमांचकारी अनुभव लेना चाहते हैं, लक्षद्वीप उनकी लिस्ट में जरूर होना चाहिए.’’

युवाओं के लिए खुशखबरी, समूह-ग के 136 पदों पर निकली भर्ती, 12वीं पास युवाओं को मिलेगा मौका, जानें कब से करें अप्लाई.

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उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने सोमवार को इंटरमीडिएट स्तरीय भर्ती का विज्ञापन जारी किया। इसके तहत पशुधन प्रसार अधिकारी, सहायक प्रशिक्षण अधिकारी, प्रदर्शक और निरीक्षक के 136 पदों पर भर्ती का मौका मिलेगा। इसके लिए 10 जनवरी से आवेदन शुरू होने जा रहे हैं।

आयोग के सचिव सुरेंद्र सिंह रावत ने बताया कि इस भर्ती के तहत पशुपालन विभाग में पशुधन प्रसार अधिकारी के 120, उद्यान विभाग में सहायक प्रशिक्षण अधिकारी के तीन, रेशम विभाग में प्रदर्शक रेशम के 10 और निरीक्षक रेशम के तीन पदों पर मौका मिलेगा।

उन्होंने बताया कि इसके लिए 10 से 30 जनवरी तक ऑनलाइन आवेदन होंगे। एक से तीन फरवरी तक आवेदन में संशोधन का मौका मिलेगा। परीक्षा 11 फरवरी को प्रस्तावित की गई है। परीक्षा आवेदन में जनरल, ओबीसी को 300 रुपये, एससी, एसटी, ईडब्ल्यूएस व दिव्यांग अभ्यर्थियों को 150 रुपये शुल्क देय होगा। आयोग ने विज्ञापन के साथ ही सिलेबस भी जारी कर दिया है।

कर्मशाला अनुदेशकों की चयन सूची भेजी-

आयोग सचिव रावत ने बताया कि कर्मशाला अनुदेश भर्ती की परीक्षा 12 जून 2022 में हुई थी। इसके अभिलेख सत्यापन पिछले साल 27 अप्रैल से दो मई तक किए गए। इस आधार पर सोमवार को आयोग ने 120 अभ्यर्थियों की चयन संस्तुति विभाग को भेज दी है। अब चुने गए युवाओं को अपने विभाग में ज्वाइन करना है।

BJP: विधानसभा के बाद अब लोकसभा चुनावों की तैयारी में है भाजपा, देशभर में महिलाओं को जोड़ने का अभियान तेज.

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आगामी लोकसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने महिलाओं को जोड़ने का अभियान तेज कर दिया है। भाजपा महिला मोर्चा ने मंगलवार को इस मुद्दे को लेकर मुख्यालय में एक बैठक की। इसमें भाजपा महामंत्री तरुण चुग, केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर और राष्ट्रीय सचिव विजया राहतकर शामिल हुए।

नए सदस्यों को जोड़ने का काम-
गौरतलब है, हाल के विधानसभा चुनावों में पार्टी को महिलाओं का अच्छा-खासा समर्थन मिला था। खासतौर पर मध्य प्रदेश में महिलाओं ने जिस तरह से बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया, उसके नतीजे भी देखने को मिले। यही वजह है कि अब पार्टी लोकसभा चुनाव में देश भर में महिलाओं को जोड़ने के अभियान पर विस्तारपूर्वक रणनीति बनानी शुरू कर दी है। भाजपा महिला मोर्चा को देशभर में सेल्फ हेल्प ग्रुप के साथ संपर्क करने और अलग-अलग योजनाओं के जरिए नए सदस्यों को जोड़ने का काम दिया गया है।

पीएम भी होंगे शामिल-

 
बैठक में महिलाओं के स्व-सहायता समूहों को सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं और कार्यक्रमों से अवगत कराने की रणनीति बनाई जा रही है। इसके बाद भाजपा महिला मोर्चा के एक बड़े कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल होंगे। 


छह जनवरी को हुई बैठक- 
इससे पहले, पार्टी सूत्रों ने शनिवार को बताया था कि छह जनवरी को भाजपा ने अपने सभी पार्टी मोर्चों की बैठक की थी और हाल में किए गए कार्यों की समीक्षा की। भाजपा महासचिव बीएल संतोष की अध्यक्षता में बैठक हुई थी। इस दौरान, वरिष्ठ नेतृत्व ने यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि जनता तक पहुंचने का प्रयास किया जाएं। बैठक में सभी भाजपा मोर्चा के अध्यक्ष, मोर्चा प्रभारी, वरिष्ठ पदाधिकारी आदि उपस्थित थे। 

संगठन को पहले से अधिक मजबूत बनाने पर चर्चा- 
सूत्रों ने बताया था कि संगठन को पहले से अधिक मजबूत बनाने पर चर्चा की गई। इसके अलावा बैठक में सभी मोर्चों के राष्ट्रीय अध्यक्षों को निर्देश दिया गया था कि वे ज्यादा से ज्यादा सम्मेलन करें और अपनी जाति के लोगों से ज्यादा से ज्यादा संपर्क बनाएं। वहीं, गांवों का दौरा करने, सम्मेलन आयोजित करने, लाभार्थियों से संपर्क करने, सामुदायिक बैठकें आयोजित करने आदि पर चर्चा की गई थी।

Bilkis Bano: बिलकिस बानो मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों की सजा माफी पर लगाई रोक, राहुल गांधी बोले- न्याय की जीत.

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गुजरात सरकार द्वारा बिलकिस बानो मामले में 11 दोषियों की सजा में छूट देने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया हैं। मामले में एक गवाह ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि बानो को वास्तव में आज न्याय मिला है। मैं इस मामले में गवाहों में से एक हूं। इन 11 दोषियों को महाराष्ट्र की एक अदालत ने सजा सुनाई थी। गुजरात सरकार का उन्हें रिहा करने का फैसला गलत था, इसलिए हमने इसे अदालत में चुनौती दी थी। फैसले के बाद दाहोद जिले के देवगढ़ बारिया में बिलकिस बानो के रिश्तेदारों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद खुशी जाहिर करते हुए जमकर आतिशबाजी की हैं।

वास्तव में आज मिला पूर्ण न्याय-अब्दुल रजाक-
देवगढ़ बारिया शहर के रहने वाले मामले के गवाहों में से एक अब्दुल रजाक मंसूरी ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि मुझे खुशी है कि सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार के फैसले को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने दोषियों को आत्मसमर्पण करने के लिए कहा हैं। मुझे लगता है कि आज हमें न्याय मिला हैं। गौरतलब है कि गोधरा में 2002 में हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान बिलकिस बानो 21 साल की थीं औ पांच माह की गर्भवती भी थी। उस दौरान आरोपियों द्वारा उनके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया था। इस दौरान आरोपियों ने उनकी तीन साल की बेटी और परिवार के सात लोगों की हत्या कर दी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने पलटा गुजरात सरकार का फैसला-दरअसल, गुजरात सरकार ने 11 दोषियों को सजा में छूट देकर 15 अगस्त 2022 को रिहा कर दिया था। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने सजा में दी गई छूट को सोमवार को रद्द कर दिया और दोषियों को दो सप्ताह के भीतर जेल अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया। न्यायालय ने कहा कि गुजरात सरकार को छूट का आदेश पारित करने का अधिकार नहीं था।

राहुल गांधी बोले- फैसले ने बताया कौन देता है अपराधियों को पनाह-

इसी बीच, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने एक बार फिर दिखा दिया कि अपराधियों को पनाह कौन देता हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखते हुए राहुल गांधी ने कहा कि बिलकिस बानो का अथक संघर्ष अहंकारी भाजपा सरकार के खिलाफ न्याय की जीत का प्रतीक है। चुनावी लाभ के लिए न्याय की हत्या करने की प्रवृत्ति लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरनाक हैं।

Old Pension: पुरानी पेंशन की बहाली को लेकर केंद्र और राज्य के कर्मचारियों ने देशभर में शुरू की रिले हंगर स्ट्राइक.

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केंद्र एवं राज्य सरकारों के कर्मचारी संगठन, पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की तैयारी कर रहे हैं। इससे पहले सरकार को चेताने के लिए देशभर के सरकारी कर्मचारियों ने आठ जनवरी से 11 जनवरी तक ‘रिले हंगर स्ट्राइक’ शुरू की है। ओपीएस के लिए गठित नेशनल ज्वाइंट काउंसिल ऑफ एक्शन (एनजेसीए) के संयोजक शिव गोपाल मिश्रा सहित कई एसोसिएशनों के पदाधिकारियों ने सोमवार को दिल्ली के जंतर मंतर पर रिले हंगर स्ट्राइक में हिस्सा लिया। एआईपीईएफ और कन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एंप्लाइज एंड वर्कर्स सहित विभिन्न फेडरेशन और एसोसिएशन इस हंगर स्ट्राइक में भाग ले रही हैं।

इन विभागों में हुआ था स्ट्राइक बैलेट-

सरकारी कर्मचारी, पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर विभिन्न चरणों में आंदोलन कर रहे हैं। इसी के तहत रामलीला मैदान में रैली और धरने प्रदर्शन हुए हैं। कर्मचारियों ने सरकार को चेताया है कि इस मुद्दे पर देश में अनिश्चितकालीन हड़ताल हो सकती है। इस हड़ताल के लिए देश के दो बड़े कर्मचारी संगठन, रेलवे और रक्षा (सिविल) ने अपनी सहमति दी है। स्ट्राइक बैलेट में रेलवे के 11 लाख कर्मियों में से 96 फीसदी कर्मचारी ओपीएस लागू न करने की स्थिति में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए तैयार हैं। इसके अलावा रक्षा विभाग (सिविल) के चार लाख कर्मियों में से 97 फीसदी कर्मी, हड़ताल के पक्ष में है। कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों का कहना है कि जनवरी में हड़ताल की तिथि की घोषणा की जाएगी। इससे पहले देशभर के सरकार कर्मचारी, ‘रिले हंगर स्ट्राइक’ पर बैठेंगे। यह स्ट्राइक सरकार को चेताने के लिए है।

जल्द शुरू हो सकती है अनिश्चितकालीन हड़ताल-

एनजेसीए के पदाधिकारियों का कहना है, सरकारी कार्यालयों और प्रतिष्ठानों में बहुत जल्द अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू हो सकती है। इस हड़ताल की स्थिति में रेल थम जाएंगी और रक्षा क्षेत्र के उद्योगों में कामकाज बंद हो जाएगा। इसके चलते केंद्र में ही नहीं, बल्कि विभिन्न राज्यों में भी सरकारी कामकाज प्रभावित होगा। केंद्र और राज्य सरकार के विभागों, संगठनों एवं प्रतिष्ठानों के सामने आठ जनवरी से 11 जनवरी तक हो रही ‘रिले हंगर स्ट्राइक’, अनिश्चितकालीन हड़ताल का ही पहला चरण है। विभिन्न कर्मचारी संगठन, भूखे रह कर सरकार से ‘पुरानी पेंशन बहाली’ की मांग करेंगे। रिले हंगर स्ट्राइक में एक निर्धारित अवधि के बाद कर्मियों की दूसरी टोली, भूख हड़ताल स्थल पर पहुंचेगी। कर्मचारी संगठनों की एक ही मांग है, गारंटीकृत पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली। केंद्र सरकार ने इस बाबत एक कमेटी का गठन किया है। हालांकि उसमें ओपीएस का कहीं भी जिक्र नहीं है। कमेटी, केवल एनपीएस में सुधार को लेकर अपनी रिपोर्ट देगी। पिछले संसद सत्र में लोकसभा सदस्य नव कुमार सरनीया, दीपक बैज और कृपाल बालाजी तुमाने द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया था कि ओपीएस बहाली को लेकर केंद्र सरकार के विचाराधीन कोई प्रस्ताव नहीं है।

गारंटी कृत पुरानी पेंशन योजना बहाल करनी होगी-

शिव गोपाल मिश्रा के मुताबिक, ओपीएस पर केंद्र और सरकार के कर्मचारी लगातार अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। कर्मचारी संगठनों ने रामलीला मैदान में रैलियां की हैं। सरकार के समक्ष कई प्लेटफॉर्म के माध्यम से ओपीएस की मांग उठाई गई है। हमने सरकार को स्पष्ट तौर पर बता दिया है कि कर्मचारियों को ओपीएस के अलावा कुछ भी मंजूर नहीं है। सरकार को एनपीएस खत्म करना होगा और गारंटीकृत पुरानी पेंशन योजना बहाल करनी पड़ेगी। ओपीएस एक गैर राजनीतिक मुद्दा है। केंद्र या राज्यों में सरकार चाहे जिस भी दल की हो, हमारा आंदोलन जारी रहेगा। रेलवे के 11 लाख कर्मियों में से 96 फीसदी कर्मचारी ओपीएस लागू न करने की स्थिति में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए तैयार हैं। ज्वाइंट फोरम में केंद्रीय संगठनों के अलावा राज्यों के भी 36 संगठन भी शामिल हैं।

चुनाव में बड़े उलटफेर का दावा-

ओपीएस के लिए गठित नेशनल ज्वाइंट काउंसिल ऑफ एक्शन (एनजेसीए) की संचालन समिति के राष्ट्रीय संयोजक एवं स्टाफ साइड की राष्ट्रीय परिषद ‘जेसीएम’ के सचिव शिवगोपाल मिश्रा के मुताबिक, लोकसभा चुनाव से पहले पुरानी पेंशन लागू नहीं होती है, तो भाजपा को उसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। कर्मियों, पेंशनरों और उनके रिश्तेदारों को मिलाकर यह संख्या दस करोड़ के पार चली जाती है। चुनाव में बड़ा उलटफेर करने के लिए यह संख्या निर्णायक है।

पीएफआरडीए में संशोधन के बिना ओपीएस संभव नहीं-

कन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स के महासचिव एसबी यादव ने कहा, केंद्र सरकार को पुरानी पेंशन योजना लागू करनी होगी। एनपीएस का पैसा, ‘पेंशन फंड एंड रेगुलेटरी अथारिटी’ (पीएफआरडीए) के पास जमा है। नई पेंशन योजना ‘एनपीएस’ के अंतर्गत केंद्रीय मद में जमा यह पैसा राज्यों को नहीं दिया जा सकता। वह पैसा केवल उन कर्मचारियों के पास जाएगा, जो इसका योगदान कर रहे हैं। ओपीएस लागू करने से पहले पीएफआरडीए में संशोधन करना पड़ेगा। कन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स ने सरकार के समक्ष बड़े स्तर पर यह मांग उठाई है। इस बाबत नवंबर में रामलीला मैदान में कन्फेडरेशन ने एक विशाल रैली भी आयोजित की थी।

18 साल बाद रिटायर हुए कर्मी को मिली इतनी पेंशन-

शिव गोपाल मिश्रा का कहना है कि एनपीएस में कर्मियों जो पेंशन मिल रही है, उतनी तो बुढ़ापा पेंशन ही है। एनपीएस स्कीम में शामिल कर्मी, 18 साल बाद रिटायर हो रहे हैं, उन्हें क्या मिला है। एक कर्मी को एनपीएस में 2417 रुपये मासिक पेंशन मिली है, दूसरे को 2506 रुपये और तीसरे कर्मी को 4900 रुपये प्रतिमाह की पेंशन मिली है। अगर यही कर्मचारी पुरानी पेंशन व्यवस्था के दायरे में होते तो उन्हें प्रतिमाह क्रमश: 15250 रुपये, 17150 रुपये और 28450 रुपये मिलते। एनपीएस में कर्मियों द्वारा हर माह अपने वेतन का दस फीसदी शेयर डालने के बाद भी उन्हें रिटायरमेंट पर मामूली सी पेंशन मिलती है।

Uttarakhand: शिक्षा मंत्री के खुद के ही गृह क्षेत्र में स्कूलों की हालत जर्जर, खतरे में छात्रों का भविष्य.

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“अंधेर नगरी चौपट राजा, टका सेर भाजी टका सेर खाजा”   ये एक प्रसिद्ध हिंदी कहावत है जिसका अर्थ है कि एक अयोग्य शासक के नेतृत्व में  कमी और अव्यवस्था के कारण परिस्थितियां खराब हो जाती हैं। ये कहावत  उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं एक स्कूल की छत इतनी जर्जर हो चुकी है जो कि कभी भी गिर सकती है। ये छत कहीं और की नहीं बल्कि उत्तराखंड के शिक्षा हब कहे जाने वाले और खुद शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत का गृह क्षेत्र श्रीनगर शहर के बालिका इंटर कॉलेज की है।

श्रीनगर बाजार के ऐतिहासिक बालिका इंटर कॉलेज के जर्जर भवन में बालिकाएं बिना शिक्षक के पढ़ रहीं हैं। ऐसे में सरकार के ‘पढ़ेगी बेटियां तो बढ़ेगी बेटियां’ का नारा जुमला साबित होता दिखाई दे रहा है कई क्षेत्रों से करीब 300  से अधिक  छात्राएं यहां पढ़ती हैं अन्य सरकारी विद्यालयों की अपेक्षा यहां सबसे अधिक छात्र संख्या है बावजूद इसके  80 के दशक में बना विद्यालय भवन जर्जर हो चुका है आए दिन छत का प्लास्टर गिरने से छात्राओं के लिए खतरा बना हुआ है शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत का क्षेत्र होने के कारण वो कई चक्कर यहां लगाते हैं लेकिन उनकी नजर इस पर कभी गयी नहीं।

कई वर्षो से हैं अध्यापिकाओं के कई पद खाली- 

इतना ही नहीं इसके अलावा विद्यालय में वर्षों से अध्यापिकाओं के कई पद रिक्त हैं. एक तरफ शिक्षा मंत्री अध्यापकों का वेतन बढ़ाने की बात कर रहे हैं तो दूसरी तरफ अध्यापक ही नहीं है और बच्चे खुद ही अपने अध्यापक बन कर पढ़ाई करने को मजबूर हैं ऊपर से छत कब सर पर गिर जाए उसका अलग डर रहता है।विद्यालय में समाजशास्त्र व अर्थशास्त्र के प्रवक्ता का पद 2016-17 से खाली है, 2020 से जीव विज्ञान का पद खाली है, इसके अलावा गणित विषय का पद रिक्त होने से अन्य विद्यालय से अध्यापक की व्यवस्था की गई है भूगोल के प्रवक्ता अवैतनिक अवकाश पर जाने से इस विषय में अतिथि शिक्षक तैनात है वहीं अंग्रेजी विषय भी व्यवस्था के सहारे संचालित हो रहा है।

अभी हाल ही में उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने वैश्विक निवेशक सम्मेलन में निवेशकों को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तराखंड में 10 नए निजी विश्वविद्यालय और तीन नए मेडिकल कॉलेज खोले जाएंगे ये एक अच्छा कदम भी है लेकिन बुनियादी शिक्षा का क्या जब बुनियाद ही सही नहीं पड़ेगी तो इन महाविद्यालयों और मेडिकल कालेज का क्या फायदा। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि उत्तराखंड में 2024 तक पाँच लाख बच्चे अन्य राज्यों से पढ़ने आए, जबकि एक लाख विदेशी बच्चे यहाँ आकर पढ़ें, लेकिन खुद के बच्चे जब अध्यापकों और एक अच्छे भवन के लिए तरस रहे हो तो फिर इस तरह की आशा करना बेमानी है

Coronavirus Alert: देशभर में 24 घंटे में आए कोरोना के 761 नए मामले, 12 लोगों की हुई मौत.

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सक्रिय मामलों की संख्या में केरल पहले स्थान पर है। केरल में मौजूदा समय में 1,249 सक्रिय मामले है, वहीं कर्नाटक में 1,240, महाराष्ट्र में 914, तमिलनाडु में 190, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश में 128 सक्रिय मामले हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार भारत में शुक्रवार को कोविड-19 के 761 मामले सामने आए हैं। इन आंकड़ों के मुताबिक 12 नए मौत के मामले भी दर्ज किए गए हैं। शुक्रवार की सुबह आठ बजे के आंकड़ों के अनुसार देशभर में सक्रिय कोविड-19 मामले 4,423 से घटकर 4,334 हो गई है। 

सक्रिय मामलों की संख्या में केरल पहले स्थान पर है। केरल में मौजूदा समय में 1,249 सक्रिय मामले है, वहीं कर्नाटक में 1,240, महाराष्ट्र में 914, तमिलनाडु में 190, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश में 128 सक्रिय मामले हैं। मरने वाले 12 लोगों में पांच केरल से हैं। वहीं कर्नाटक में चार, महाराष्ट्र में दो और उत्तर प्रदेश में एक की मौत हो चुकी है। पांच दिसंबर तक दैनिक मामलों की संख्या दो अंकों में थी, लेकिन ठंड बढ़ने के बाद मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। 
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार राष्ट्रीय रिकवरी दर 98.81 फीसदी पर पहुंच गई है। वेबसाइट के अनुसार देशभर में अब तक 220.67 करोड़ कोविड-19 की खुराक दी जा चुकी है। 

Uttarakhand: धामी सरकार का बड़ा फैसला, प्रदेश में कृषि और उद्यान भूमि खरीद पर रोक का आदेश जारी.

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उत्तराखंड में कृषि और उद्यानिकी के लिए जिलाधिकारी की अनुमति से जमीन खरीदने पर सरकार ने नए साल से रोक लगाने का फैसला लिया था। इस संबंध में आज आदेश जारी कर दिए गए हैं। इससे पहले धामी सरकार जमीन खरीदने वालों की पृष्ठभूमि की जांच का फैसला भी ले चुकी है।

वर्तमान में उत्तराखंड राज्य के लिए नया भू-कानून तैयार करने के लिए प्रारूप समिति गठित की गई है, इसलिए प्रदेश हित व जनहित में यह निर्णय लिया गया कि भू-कानून समिति की आख्या प्रस्तुत करने तक या अग्रिम आदेशों तक जिलाधिकारी राज्य से बाहर के व्यक्तियों को कृषि एवं उद्यान के उद्देश्य से भूमि क्रय करने की अनुमति के प्रस्ताव में निर्णय नहीं लेंगे।

कृषि भूमि खरीदने वालों की संख्या बढ़ी 

राज्य में पिछले कुछ वर्षों में तेजी से कृषि भूमि खरीदने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है। लगातार ये मुद्दा उठ रहा है कि कृषि भूमि को बाहरी राज्यों के लोग आकर खरीद रहे हैं। इसके लिए पूर्व में भू-कानून बनाने के लिए सुभाष कुमार की समिति बनाई गई थी। इस समिति ने सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी। इसी रिपोर्ट से अब प्रारूप तैयार किया जा रहा है। इसके बाद सरकार भू-कानून पर नए साल में अहम फैसला ले सकती है। 

 

मई में जमीन खरीद से पहले पृष्ठभूमि की जांच का हुआ था फैसला-

पिछले साल मई माह में धामी सरकार ने कैबिनेट में ये निर्णय लिया था कि राज्य में भूमि खरीदने वाले की पहले पृष्ठभूमि और मकसद की जांच होगी। उसके बाद अनुमति दी जाएगी। तब सीएम धामी ने कहा था कि प्रदेश में जमीन बेरोक-टोक खरीदी जाती थी, लेकिन अब पूरी पृष्ठभूमि जांचने के बाद अनुमति दी जाएगी। इसके लिए अध्यादेश लाने की भी तैयारी की जा रही है।

Arvind Kejriwal: दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल की गिरफ्तारी की आशंका, क्या अयोध्या के जश्न में बनेगा ऐसा संयोग.

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एक तरफ तो राम मंदिर को लेकर लोगों के बीच उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है तो वहीं दूसरी ओर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी को लेकर लगातार संशय बढ़ता जा रहा है दिल्ली की नई शराब नीति के कथित घोटाले में दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी को लेकर संशय बढ़ता जा रहा है। भाजपा से जुड़े नेताओं और जांच एजेंसी के सूत्रों की मानें, तो अयोध्या में राम के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान केजरीवाल की गिरफ्तारी संभव है।

वजह, उस वक्त दिल्ली सहित देश के दूसरे क्षेत्रों में राम मंदिर को लेकर उत्साह का माहौल रहेगा। खासतौर पर उत्तर भारत में भाजपा, इस कार्यक्रम को सियासत में फायदे के तौर पर देख रही है। यही वजह है कि भाजपा ने प्राण प्रतिष्ठा समारोह को देश विदेश तक पहुंचा दिया है। इसी दौरान दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल गिरफ्तार किए जा सकते हैं।

ED ने दिल्ली सीएम केजरीवाल को अब तक भेजे 3 समन- 

सूत्रों का कहना है कि राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान केजरीवाल की गिरफ्तारी संभव है। अभी तक केजरीवाल को ईडी ने तीन समन भेजे हैं। केजरीवाल, किसी भी समन पर जांच एजेंसी के समक्ष प्रस्तुत नहीं हुए हैं। अब ऐसी संभावना जताई जा रही है कि जांच एजेंसी, किसी भी वक्त केजरीवाल को गिरफ्तार कर सकती है। अगर अब केजरीवाल की गिरफ्तारी होती है, तो आम आदमी पार्टी, इसका बड़ा पॉलिटिकल माइलेज ले सकती है। खासतौर पर, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब व उत्तर प्रदेश में आप का बड़ा विरोध प्रदर्शन देखने को मिल सकता है। इससे राम मंदिर का प्राण प्रतिष्ठा समारोह प्रभावित हो सकता है। राजनीतिक प्रदर्शन से रोड जाम जैसी स्थिति के पैदा होने के आसार हैं। ट्रेनों की आवाजाही पर भी असर पड़ सकता है। दूसरी तरफ भाजपा, देश एवं विदेश से लोगों को अयोध्या लाने की तैयारी कर रही है। ऐसे में केजरीवाल की गिरफ्तारी 22 जनवरी के आसपास संभव है।

गुरुवार को दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा, देश में खुलेआम गुंडागर्दी चल रही है। किसी को भी पकड़कर जेल डाल दो। बतौर केजरीवाल, मेरी सबसे बड़ी ताकत ईमानदारी है। ये झूठे केस लगाकर मेरी ईमानदारी पर चोट करना चाहते हैं। मेरे वकील ने बताया कि ये सभी समन गैरकानूनी हैं, ये गैरकानूनी क्यों हैं, इनका जवाब मैंने ईडी को दिया है। अगर ये सही समन भेजते हैं, तो मैं जांच में सहयोग करूंगा। पहले भी सीबीआई जांच में सहयोग दिया है। भाजपा का मकसद सही जांच करना नहीं है। इसके पीछे मुझे, लोकसभा चुनाव में प्रचार करने से रोकना है। अरविंद केजरीवाल लोकसभा चुनाव के मद्देनजर 6, 7 व 8 जनवरी को गुजरात दौरे पर रहेंगे। वे आप कार्यकर्ता सम्मलेन और जनसभा को संबोधित करेंगे। जेल में बंद आप विधायक चैतर बसावा से भी केजरीवाल से मिलने का कार्यक्रम है।

क्या कहा अरविंद केजरीवाल ने ? 
केजरीवाल ने कहा, ईडी के समन गैरकानूनी हैं। जो भी नेता भाजपा में शामिल नहीं होता, उसे ये लोग ‘भाजपा’ जेल में भेज देते हैं। मनीष सिसोदिया और संजय सिंह को भी इन्होंने इसलिए जेल में डाला है। अगर वे  भाजपा से हाथ मिला लेते, तो जेल से बाहर होते। जो भी व्यक्ति इनसे हाथ मिला लेता है, वह ईमानदार हो जाता है। देश में बहुत खतरनाक खेल चल रहा है। मेरे खून का हर कतरा देश के लिए है। अरविंद केजरीवाल ने कहा, आप लोग दो साल से शराब घोटाले का नाम सुन रहे हैं। जांच एजेंसियों को इस घोटाले में एक भी पैसा नहीं मिला है। वजह, ऐसा कोई घोटाला

Uttarakhand: गाड़ी का VIP नंबर लेने का बढ़ा क्रेज, जानिए कितने लाख में बिके ये नंबर 0001; 0009.

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वाहन की नंबर प्लेट यूनिक और फैंसी दिखाने के लिए हल्द्वानी के वाहन मालिक लाखों रुपये खर्च कर रहे हैं। दिसंबर महीने में 0001 नंबर लेने के लिए एक वाहन मालिक ने 3.38 लाख रुपये खर्च किए हैं। वहीं दो अन्य वाहन मालिकों ने पसंदीदा नंबर लेने के लिए एक लाख रुपये से अधिक खर्च किए हैं जबकि करीब 30 वाहन चालकों ने भी नीलामी से अपना पसंदीदा नंबर चुना है।

 

परिवहन विभाग के अंतर्गत आने वाले हल्द्वानी और रुद्रपुर में फैंसी नंबर लेने के मामले में नैनीताल जिले के वाहन मालिक नीलामी में जमकर रुपया लगा रहे हैं। दिसंबर में नैनीताल जिले में 26 वाहन मालिकों ने नीलामी से अपना पसंदीदा नंबर लिया है जबकि रुद्रपुर में 9 वाहन मालिकों ने फैंसी नंबर लिए हैं। 

दरअसल परिवहन विभाग महीने में दो बार 15 और 30 तारीख को फैंसी नंबरों की नीलामी करता है जिसके लिए शुरुआती 6 दिन नंबर के लिए आवेदन करने का समय दिया जाता है। इसके बाद नीलामी की जाती है। नीलामी में 0001 और 0786 नंबर का बेस प्राइस सबसे अधिक एक लाख रुपये तय है। हल्द्वानी में सबसे अधिक बोली 0001 नंबर के लिए 3.38 लाख रुपये के लिए लगी है जबकि 0009 नंबर 1.62 लाख रुपये और 1111 नंबर 1.05 लाख रुपये में बिका है। 
0007 नंबर के लिए वाहन मालिक ने 60 हजार रुपये खर्च किए हैं जबकि 32 हजार रुपये में एक, 26 हजार में चार, 25 हजार रुपये में 8 नंबर नीलाम हुए हैं। वहीं दूसरी ओर रुद्रपुर में सबसे महंगा नंबर 30 हजार रुपये में नीलाम हुआ है।