Author: Pravesh Rana

रेबीज संक्रमित युवक की निजी अस्पताल में हुई मौत, कुत्ते के काटने के छह माह बाद दिखे थे लक्षण

16 Minutes Read -

रेबीज संक्रमित मरीज की सोमवार सुबह करीब सात बजे मौत हो गई। युवक को एम्स में भी राहत नहीं मिली थी। लिहाजा उसके परिजन उसे एक निजी अस्पताल ले गए थे। वहां पर उसने दम तोड़ दिया। दून अस्पताल में रविवार को रेबीज के गंभीर लक्षण दिखने वाले युवक को लाया गया था। करीब तीन घंटे तक उसे दून अस्पताल में उपचार दिया गया था। बाद में हालत बिगड़ने पर उसे एम्स ऋषिकेश रेफर कर दिया गया था।

अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर रविंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि व्यक्ति को पानी और उजाले से डर लगने के साथ ही उसके मुंह से लगातार लार गिर रही थी। उसके अंदर तीव्र आक्रामकता के लक्षण भी दिख रहे थे। मृतक की मां शशि शर्मा ने बताया कि उसे दून अस्पताल से एम्स ऋषिकेश लेकर गई थीं जहां पर उसको प्राथमिक उपचार दिया गया था। स्थिति में सुधार नहीं होने पर उसे दूसरे अस्पताल में लेकर गईं, जहां पर सुबह उसकी मौत हो गई।

 

कुत्ते के काटने के छह माह बाद दिखे रेबीज के गंभीर लक्षण, युवक एम्स रेफर

दून अस्पताल में रविवार को रेबीज के गंभीर लक्षण दिखने वाले एक 30 वर्षीय युवक को भर्ती किया गया। करीब चार घंटे बाद हालत बिगड़ने पर उसे एम्स ऋषिकेश रेफर कर दिया गया। युवक को पानी और उजाले से डर लगने के साथ ही उसके मुंह से लगातार लार गिर रही थी। साथ ही तीव्र आक्रामकता के लक्षण भी दिख रहे थे।

चिकित्सकों समेत वहां मौजूद सभी लोग हैरान हो गए। काफी देर तक चिकित्सक समझ ही नहीं पाए कि युवक को क्या परेशानी है। परिजनों ने जब छह महीने पूर्व युवक को कुत्ते के काटने की बात बताई तो चिकित्सकों को रेबीज होने का संदेह हुआ।

एंटी रेबीज वैक्सीन नहीं लगवाई गई
इसके बाद क्लीनिकल जांच की तो यह बात काफी हद तक पुख्ता भी हो गई। चिकित्सक के अनुसार युवक देहरादून का ही रहने वाला है। परिजनों ने यह बात भी बताई कि युवक को कुत्ते के काटने के बाद एंटी रेबीज वैक्सीन नहीं लगवाई गई।

रेबीज का नहीं है कोई उपचार 
डॉ. आरएस बिष्ट के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति रेबीज की चपेट में आ जाए तो उसका कोई उपचार नहीं है। ऐसे में लोगों का जागरूक होना बेहद जरूरी है। अगर किसी को गली या फिर पालतू कुत्ता काटता है तो उसे जरूरी तौर पर एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाना चाहिए।

दून अस्पताल में हर रोज वैक्सीन लगवाने पहुंच रहे 35 लोग 
दून अस्पताल के आपात चिकित्सा अधिकारी डॉ. अमित अरुण ने बताया कि अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाने हर रोज करीब 35 लोग पहुंच रहे हैं। इनमें से 10 से 12 लोग गंभीर घायल होते हैं जिनको एंटी रेबीज के साथ ही सीरम भी लगाना पड़ता है। इन दिनों कुत्ते काटने के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिली है।

सीएम ने थराली आपदा प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया

14 Minutes Read -

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को चमोली जिले के आपदा प्रभावित थराली क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया और प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। उन्होंने अधिकारियों को राहत एवं पुनर्वास कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कुलसारी राहत शिविर का दौरा कर प्रभावितों से फीडबैक लिया और हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया। इस दौरान उन्होंने पूर्णतः क्षतिग्रस्त मकानों एवं मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये की तत्काल सहायता राशि के चेक प्रदान किए। साथ ही बेघर हुए परिवारों के पुनर्वास की उचित व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए।

सीएम ने कहा कि राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं और राज्य सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ प्रभावितों के साथ खड़ी है। उन्होंने जिला प्रशासन द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना भी की।

जिलाधिकारी संदीप तिवारी ने बताया कि प्रभावितों को सुरक्षित राहत शिविरों में ठहराया गया है तथा भोजन, चिकित्सा और रहने की उचित व्यवस्था की गई है। क्षतिग्रस्त सड़क मार्गों को सुचारू कर दिया गया है और शीघ्र ही बिजली व पेयजल आपूर्ति भी बहाल कर दी जाएगी।

मुख्यमंत्री के साथ विधायक भूपाल राम टम्टा, जिला पंचायत अध्यक्ष दौलत सिंह बिष्ट, पुलिस अधीक्षक सर्वेश पंवार समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

27 करोड़ के चंदे में उत्तराखण्ड बीजेपी ने अपनाई पारदर्शिता,हरक सिंह पर भरोसा नहीं किया जा सकता-त्रिवेंद्र

21 Minutes Read -

हरिद्वार से सांसद और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने हरक के ताजातरीन आरोपों का जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि संक्रमणकाल से गुजर रहे हरक सिंह की बातों पर भरोसा नहीं किया जाना चाहिए।

कांग्रेस नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए त्रिवेंद्र ने कहा कि हरक सिंह रावत पर भरोसा नहीं किया जा सकता। वह कब, क्या बोलेंगे, यह उन्हें खुद भी नहीं पता होता। इस समय वे अपने जीवन के संक्रमण काल से गुजर रहे हैं, इसलिए अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं।

कहा है कि मौजूदा हालात में प्रदेश में सुधार की सख्त जरूरत है। उन्होंने साफ कहा कि किसी भी सूरत में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की छवि को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। पार्टी की छवि खराब करने वालों को बार-बार चेताना संगठन का फर्ज है।

पत्रकारों से बातचीत में त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि पुलिस के कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कई मामलों में 8-8 महीने से प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है, वहीं कुछ मामलों में 2-2 महीने से रिपोर्ट लंबित है।
उन्होंने इसे बेहद चिंताजनक और अफसोसजनक स्थिति बताया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जनता ने भाजपा पर भरोसा जताते हुए 47 विधायक और पांच सांसद जीताकर दिए हैं। ऐसे में पार्टी का दायित्व है कि हर हाल में जनता के विश्वास को बनाए रखा जाए।

गौरतलब है कि जुलाई के महीने में पूर्व सीएम ने डीजीपी को पत्र लिख 50 करोड़ की धोखाधड़ी के मामले में कार्रवाई के लिए लिखा था। लेकिन कोई कार्रवाई नही हुई (देखें पत्र)।

इधर, पूर्व सीएम ने कांग्रेस नेता हरक के भाजपा को 30 करोड़ रुपये चंदा मिलने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी को 27 करोड़ रुपये का चंदा मिला था, जो पूरी तरह पारदर्शिता के साथ चेक द्वारा प्राप्त हुआ है। इसका एक-एक हिसाब मौजूद है।

उन्होंने कहा कि देश की हर राजनीतिक पार्टी को चंदा मिलता है और इसमें कोई गलत बात नहीं है। लेकिन यह जरूरी है कि मदद पारदर्शी तरीके से मिले।
भाजपा ने यही किया है। त्रिवेंद्र ने कटाक्ष करते हुए कहा कि हरक सिंह कभी-कभी सच बोल देते हैं, लेकिन अक्सर अगले ही दिन अपने ही बयान से पलट जाते हैं। खनन के मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में खनन होना जरूरी है, लेकिन यह केवल कानून और मर्यादा के दायरे में होना चाहिए।
अगर नदियों से नियंत्रित खनन नहीं होगा तो खेत-खलिहान कट जाएंगे और राजस्व की भी हानि होगी। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे तालाब से पानी लेना जरूरी है, लेकिन मशीन लगाकर पूरा तालाब खाली कर देना गलत है। उसी तरह खनन नियंत्रित और नियमों के तहत होना चाहिए।
गैरसैंण में संपन्न मानसून सत्र के दौरान विपक्ष के रवैये पर भी उन्होंने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विरोध करना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन यह मर्यादित और नियमों के दायरे में होना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस विधायकों के सदन में अमर्यादित आचरण की आलोचना करते हुए कहा कि अध्यक्ष के आसन के सामने बिस्तर लगाकर सोना लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत है।

त्रिवेंद्र ने दो टूक कहा कि यदि भविष्य में कांग्रेस सत्ता में आती है और भाजपा ऐसा व्यवहार करती है तो कांग्रेस को भी यह स्वीकार नहीं होगा। उन्होंने कहा कि जनता ने अपने विश्वास से प्रतिनिधियों को विधानसभा भेजा है। यदि विधायक अपना दायित्व नहीं निभाते हैं तो जनता समय आने पर हिसाब करना भी जानती है।

…मां धारी देवी की भी कसम खायी थी हरक ने

उल्लेखनीय है कि हरक सिंह रावत बीते कुछ दिन से भाजपा सरकार पर हमला कर रहे हैं। हाल ही में हरक सिंह ने एक और कसम खा डाली। हरक में कहा कि वे तभी माला पहनेंगे जब भाजपा की ‘अंत्येष्टि’ कर देंगे। हरक की।यह कसम में चर्चा का विषय बनी हुई है।
गौरतलब है कि 2012 में विजय बहुगुणा के सीएम बनने से खफा हरक सिंह ने मां धारी देवी की कसम खाकर कहा था कि कैबिनेट मंत्री नहीं बनेंगे। लेकिन कुछ महीने बाद विजय बहुगुणा कैबिनेट में मंत्री पद की शपथ ले ली थी।

हर्षिल झील पंचर करने में मिली बड़ी कामयाबी, घटने लगा जलस्तर

83 Minutes Read -

उत्तरकाशी के हर्षिल में बनी झील को आखिरकार शनिवार को सफलतापूर्वक पंचर कर दिया गया। झील से पानी की निकासी के लिए उत्तराखंड जल विद्युत निगम, सिंचाई विभाग, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। विभागीय टीमों ने नदी के समानांतर एक नहर तैयार कर झील के पानी को चैनलाइज किया। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद विभिन्न विभागों के 30 से अधिक कर्मचारियों ने शनिवार को युद्ध स्तर पर काम करते हुए झील से पानी की निकासी सुनिश्चित की।

पांच अगस्त की आपदा से धराली और हर्षिल में भागीरथी नदी का प्रवाह प्रभावित हो गया था। धराली में भागीरथी नदी का प्रवाह मुखबा गांव के ठीक नीचे हो रहा है, वहीं, हर्षिल में नदी के मुहाने पर बड़े-बड़े पेड़, बोल्डर और मिट्टी-गाद फंसने से यहां झील बनने लगी थी और इसका दायरा 1200 मीटर तक पहुंच गया था और झील की गहराई 15 फिट तक मापी गई थी। लगातार हो रही बारिश के बीच पानी की बहुत कम निकासी से बढ़ते जल स्तर पर यहां गंगोत्री हाईवे भी भी झील में समा गया था। झील के बढ़ते खतरे के बीच यूजेवीएनएल और सिंचाई विभाग के 30 इंजीनियरों की टीम के साथ ही सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन पिछले तीन दिन से झील को पंचर करने में जुटे थे। आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि शनिवार सुबह यहां भागीरथी को चैनेलाइज कर नदी के समान्तर पानी के प्रवाह शुरू करने के साथ ही मुहाने पर फंसे पेड़ों को हटाने के बाद पानी की निकासी बढ़ने से झील का जल स्तर घटने लगा। यहां विशेषज्ञ लगातार झील पर नजर बने हुए हैं।

उत्तरकाशी आपदा: आंखों से नींद और मन का छिन गया सुकून, मानसिक घाव के बाद लोग घबराहट और बेचैनी से परेशान

30 Minutes Read -

पांच अगस्त को खीर गंगा के रौद्र रूप ने धराली और हर्षिल घाटी में सिर्फ घरों और संपत्तियों को ही नुकसान नहीं पहुंचाया बल्कि लोगों के मन पर भी गहरा असर डाला है। लापता अपनों की चिंता और तबाही के खौफ से कई लोग घबराहट, बेचैनी और नींद न आने जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।

इस मानसिक पीड़ा को समझने के लिए स्टेट मेंटल हेल्थ अस्पताल सेलाकुई देहरादून के मनोचिकित्सक डॉ. रोहित गोदवाल और उनकी टीम ने धराली का दौरा किया। पहले दिन की जांच में करीब 150 लोगों में से 10 लोग गंभीर मानसिक समस्याओं से ग्रस्त मिले। डॉ. रोहित ने बताया कि ये लोग ज्यादातर वे हैं जिन्होंने अपनी आंखों से तबाही का मंजर देखा और जिनके परिजन अब भी लापता हैं।

डॉ. रोहित गोदवाल का कहना है कि यह पीटीएसडी (पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर) की स्थिति है। इस स्थिति में व्यक्ति को बार-बार घटना याद आती है। दिल की धड़कन तेज हो जाती है और वह छोटी-सी आहट से भी घबरा जाता है। दूसरे दिन के परीक्षण में भी 70 में से 10 लोग चिड़चिड़ापन और घबराहट से ग्रस्त पाए गए। सबसे अधिक प्रभावित बुजुर्ग और युवा थे। महिलाएं और बच्चों की संख्या बेहद कम है।

 

आठ दिन तक की काउंसलिंग
उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों गंगोत्री, धराली, गंगनानी, डबरानी, भटवाड़ी और हीना में शिविर लगाए हैं। डॉ. गोदवाल ने आठ दिन तक धराली और हर्षिल अस्पताल में लोगों की काउंसलिंग की। उन्होंने लोगों को सलाह दी है कि वे खुद को अकेला न रखें, घटना के बारे में बार-बार चर्चा करने से बचें और परिवार के साथ समय बिताकर माहौल को सकारात्मक बनाएं। यदि कोई मानसिक समस्या से जूझ रहा है तो वह हेल्पलाइन नंबर 144166 पर कॉल करके 24 घंटे काउंसलिंग और मार्गदर्शन ले सकता है।

कम्युनिटी हेल्थ सेंटर सहसपुर देहरादून के सीएमएस डॉ. मोहन डोगरा ने बताया कि कई लोगों ने थकान और कमजोरी की शिकायत की लेकिन दवा लेने और आराम करने के बाद अब उनकी हालत सामान्य है। वहीं धराली आपदा के नोडल अधिकारी डॉ. सीपी त्रिपाठी ने कहा कि आपदा के माहौल में गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों को जितना हो सके खुशनुमा माहौल में रखना चाहिए।

नैनीताल जिला पंचायत चुनाव में नया मोड़,गायब हुए सदस्यों ने जारी किया वीडियो

28 Minutes Read -

नैनीताल जिला पंचायत चुनाव के दौरान कांग्रेसियों की ओर से कांग्रेस के पांच जिला पंचायत के सदस्यों को भाजपा के नेताओं द्वारा अपहरण करने के मामले में नया मोड़ आया है। मामले में हल्द्वानी में कांग्रेय कार्यकर्ताओं ने धरना प्रदर्शन किया। जिसके बाद शुक्रवार देर शाम लापता जिला पंचायत सदस्यों ने अपना वीडियो जारी किया है। वीडियो में उन्होंने कहा कि उनका अपहरण नहीं हुआ है। सोशल मीडिया से उनके अपहरण की जानकारी मिली है, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है। उन्होंने वीडियो जारी कर कहा है कि वह अपनी मर्जी से पांच लोग घूमने के लिए निकले हैं। किसी तरह का कोई चिंता करने की जरूरत नहीं है। जहां भी हैं वह लोग सुरक्षित हैं। जल्द ही सभी लोग सामने आ जाएंगे।

 

नैनीताल जिला पंचायत चुनाव की वोट गिनती कड़ी सुरक्षा और वीडियोग्राफिंग के बीच पूरी हुई। नतीजों को सील कर हाईकोर्ट कोर्ट के निर्देशों के अधीन रखा गया है। डीएम ने बताया कि राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशों के तहत 22 जिला पंचायत सदस्यों के वोटों की गिनती की गई। नियमावली में री-पोलिंग का प्रावधान न होने के कारण सीधे काउंटिंग हुई। केवल बूथ कैप्चरिंग, तकनीकी खामी या बैलेट बॉक्स को नुकसान होने पर ही री-पोलिंग हो सकती है। चुनाव परिणाम सील्ड लिफाफे में रखा गया है, जिसे 18 अगस्त को हाईकोर्ट में पेश किया जाएगा।

पंचायत चुनाव डबल वोटर: नियम विरुद्ध चुनाव जीतने वालों का कार्यकाल होगा रद्द! हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

19 Minutes Read -

उत्तराखंड हाईकोर्ट में बीडीसी चुनाव में पराजित प्रत्याशियों द्वारा दायर अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई के बाद इन मामलों को चुनाव याचिका के रूप में प्रस्तुत करने को कहा है. साथ ही कहा कि इन चुनाव याचिकाओं का 6 माह के भीतर निस्तारण किया जाए. कोर्ट ने किसी भी याचिका में अंतरिम आदेश नहीं दिया है. इन याचिकाओं की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश जी नरेंद्र और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ में हुई.

मामले के अनुसार, पौढ़ी गढ़वाल निवासी दीक्षा नेगी, टिहरी निवासी नीरू चौधरी और उत्तरकाशी निवासी उषा ने अपनी याचिका में कहा कि वे बीडीसी सदस्य का चुनाव हारे हैं और उनके खिलाफ जो प्रत्याशी जीते हैं, उनके दो जगह की मतदाता सूची में नाम थे. इसलिए उनका निर्वाचन रद्द किया जाए और उन्हें 14 अगस्त को ब्लॉक प्रमुख, ज्येष्ठ प्रमुख और कनिष्ठ प्रमुख के चुनाव में मतदान करने से रोका जाए. जबकि वर्षा राणा, गंगा नेगी, कनिका, त्रिलोक बिष्ट ने कहा कि वे चुनाव जीते हैं. लेकिन उनके खिलाफ लड़ रहे प्रत्याशी दूसरे क्षेत्र से चुनाव जीते हैं. जिनके दो मतदाता सूची में नाम थे. इसलिए उनका निर्वाचन रद्द किया जाए और उन्हें भी 14 अगस्त को होने वाले ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में मतदान करने से रोका जाए.

याचिकाकर्ताओं के अनुसार हाईकोर्ट ने 11 जुलाई 2025 को शक्ति सिंह बर्त्वाल की याचिका में अंतरिम आदेश जारी कर राज्य निर्वाचन आयोग के सर्कुलर पर रोक लगा दी थी. जिसमें आयोग ने दो जगह वोटर लिस्ट में नाम वाले व्यक्ति को मतदान करने और चुनाव लड़ने की अनुमति दे दी थी. लेकिन तब चुनाव आयोग ने 11 जुलाई तक त्रिस्तरीय पंचायत हेतु नामांकन प्रक्रिया हो जाने के कारण निर्वाचन प्रक्रिया जारी रखी. जिसके बाद दो जगह वोटर लिस्ट में नाम वाले व्यक्ति चुनाव में भाग लेने में सफल रहे. जिन्हें अब चुनाव याचिकाओं के रूप में बड़े स्तर पर हाईकोर्ट में चुनौती मिल रही है.

 

याचिकाकर्ता ने कोर्ट के सामने यह तथ्य रखा कि, ठीक है वे चुनाव हार गए. उसके बाद अगर चुनाव को वे चुनौती देते हैं तो उसका निर्णय पंचायत का कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी नहीं आता और कोर्ट में मामला चलता रहता है. जिसपर आज कोर्ट ने अहम फैसला देते हुए कहा कि चुनाव से संबंधित जो भी याचिकाएं दायर होंगी, उनका निस्तारण 6 माह के भीतर होगा. जो प्रत्याशी नियमों, शर्तों के अनुसार जीता है, वह कार्यकाल पूरा करेगा. अगर नियमों के विरुद्ध जीता है तो उसका कार्यकाल निर्णय आने के बाद रद्द होगा.

जिला पंचायत सदस्यों का अपहरण’ बताकर कांग्रेसी हाईकोर्ट पहुंचे, जमकर हंगामा; होगा चुनाव का बहिष्कार?

18 Minutes Read -

जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव को लेकर नैनीताल में जमकर हंगामा हो रहा है। कांग्रेस जिला अध्यक्ष राहुल छिमवाल ने कुछ लोगों पर उनके जिला पंचायत सदस्यों का अपहरण करने का आरोप लगाया है। इसको लेकर कांग्रेस कार्यकर्ता न्याय की मांग को लेकर हाईकोर्ट गए। नेता प्रतिपक्ष ने इसका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर जारी किया है।

बृहस्पतिवार को जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव के लिए मतदान करने जा रहे जिला पंचायत सदस्यों को कई लोगों ने जिला पंचायत कार्यालय के पास से ही जबरन उठा लिया। जिसका वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। कांग्रेसियों ने पुलिस के सामने ही उनके समर्थक जिला पंचायत सदस्यों को अगवा करने का आरोप लगाया है। जिसके बाद सभी कांग्रेसी नेता हाईकोर्ट की शरण चले गए हैं। जिसके बाद नैनीताल का माहौल गर्म हो गया है।

धराली (उत्तरकाशी) में भीषण तबाही — तथ्य, कारण और ग्राउंड-रिपोर्ट के क्या कहती हैं !

38 Minutes Read -

5–6 अगस्त 2025 को उत्तरकाशी के धाराली (Dharali / Kheer Gad / Harsil के पास) में अचानक हुई भयंकर जल-प्रलय / भूस्खलन-मंडी (flash flood / debris flow / mudslide) ने गांव के कई हिस्से और पर्यटन-व्यवसाय तहस-नहस कर दिए। कई मकान, होटल, दुकानें, एप्पल-ओरचार्ड और सड़क-इन्फ्रास्ट्रक्चर बह गए; दर्जनों लोग घायल या लापता हैं, कुछ की मृत्यु की पुष्टि हुई और बड़ी राहत-और-रेस्क्यू कार्रवाई चल रही है। स्थानीय और केंद्रीय बचाव दलों (आर्मी, NDRF, SDRF, ITBP) ने बचाव कार्य तेज कर दिए हैं और राज्य सरकार ने राहत घोषणाएँ कीं

 

क्या हुआ — ताज़ा तथ्य (फैक्ट्स)

  • घटना का समय और जगह: घटना 5 अगस्त 2025 की दोपहर के आसपास (लगभग 13:30–13:45 स्थानीय समय) खरग (Kheer / Kheer Gad) जल-जल और धाराली गांव के पास हुई।

  • प्रभावित लोग और क्षति: कई घर, होटेल/होमस्टे, दुकानें और बाग (विशेषकर एप्पल-बाग) भारी मलबे में दब गए; शुरुआती रिपोर्टों में कम-से-कम 4 मौतें और दर्जनों (कुछ रिपोर्टों में 40+ या 50+) लापता बताये गए हैं, जबकि सैकड़ों लोग प्रभावित या संतप्त हुए और कई अनेकों का बेघर होना रिपोर्ट हुआ। सरकार और प्रशासन ने कई लोगों को बचाया; आधिकारिक खोज-बचाव और बचाव संख्या समय-समय पर अपडेट हो रही है।

  • बचाव-प्रक्रिया: इंडियन आर्मी (Ibex ब्रिगेड), NDRF, SDRF, ITBP और स्थानीय पुलिस व स्वास्थ्य दल मौके पर हैं; भारी मशीनरी, हेली-लिफ्ट और मैनपावर से रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। राज्य सरकार ने प्रभावित परिवारों के लिए वित्तीय राहत घोषणाएँ की हैं (प्रारम्भिक पैकेज, ब्यौरे स्थानीय घोषणा पर निर्भर)

  • कारण — वैज्ञानिक और मानवीय तीसरे-आयाम

  • (A) तत्काल कारण — क्लाउडबर्स्ट / अचानक तेज वर्षा

    मीडिया और मौसम विभाग (IMD) की पड़ताल के अनुसार घटना की शुरुआत एक तीव्र-वर्षा (cloudburst) / अचानक अत्यधिक स्थानीय downpour से हुई, जिससे Kheer Gad में पानी की अचानक मात्रा बढ़ी और बहाव-ऊर्जा जमीनी मलबे के साथ नीचे उतरते हुए धावा-बोलकर गांव में प्रवेश कर गई। IMD व स्थानीय रिपोर्टों ने कुछ स्थानों पर अल्प-समय में असाधारण बारिश दर्ज़ की — क्लाउडबर्स्ट की परिभाषा से मेल खाती तीव्रता    
  • (B) जियो-हाइड्रोलॉजिक गठन — भू-खण्ड, ग्लेशियल लिंक, डिब्रिस-फ्लो

    वैज्ञानिक और उपग्रह-विश्लेषण (ISRO समेत) ने सुझाव दिया है कि यह केवल बारिश का साधारण प्ले नहीं था — इसमें ग्लेशियर-सम्बन्धी विस्फोट (GLOF), किसी चट्टान/हिमखंड के टूटने से उत्पन्न ढेर या पहले से जमा ढेर का अचानक खुलना, तथा मलबे-भरे फ्लो (debris flow) की भूमिका हो सकती है। ऐसे घटनाओं में पानी के साथ बड़े-बड़े पत्थर, मिट्टी और बढ़ा-चढ़ा मलबा झटके में बहुत दूर तक और तेज़ रफ्तार से आ जाता है। इस पर आगे की तकनीकी जांच जारी है।

  • (C) मानवीय/नियोजन कारण (anthropogenic factors)

    • बस्तियों का नदी-तट/फ़्लड-प्लेन पर बनना: विशेषज्ञों ने कहा कि धाराली और आसपास के कई निर्माण नदी की तरफ़/फ्लड-plain पर हुए हैं — जिनमें कई होटेल, होमस्टे और दुकानें भी शामिल हैं — जो जीवनदायिनी भू-अवसरो में बने हुए थे और रन-ऑफ के मार्ग में आ गए।

    • पर्यटन-बूम और अगणित निर्माण: पर्यटन के बढ़ते दबाव ने खड़ी ढलानों व नदी के किनारे अस्थायी व स्थायी संरचनाओं का निर्माण बढ़ा दिया, जिनमें पर्यावरण नियमों का उल्लंघन भी हो सकता है।

    • जलवायु परिवर्तन का योगदान: हिमालयी क्षेत्र में तापमान व वायुमंडलीय नमी के बदलाव से तीव्र वर्षा-इवेंट्स (extreme precipitation), ग्लेशियर अस्थिरता और अनपेक्षित डिब्रिस-फ्लो के जोखिम बढ़ रहे हैं — इसलिए केवल “एकल घटना” नहीं, बल्कि जोखिम बढ़ने का ढांचा दिखाई देता है।

      3) ग्राउंड-रिपोर्ट — पीड़ितों के अनुभव और स्थानीय हालात

      (नीचे के विवरण विभिन्न स्थानीय अखबारों, स्थानीय फार्म और तस्वीर-वीडियो रिपोर्ट्स और राहत-कर्मियों के बयानों पर आधारित हैं।)

      • स्थानीय किसानों और होस्टल-मालिकों का कहना है कि झट-पटक 30–60 सेकण्ड में मलबा और पानी ने जगह को तबाह कर दिया; कई लोगों ने बस समय रहते भागकर अपनी जान बचाई। कुछ पर्यटक और मजदूर ऐसे थे जो कुछ मिनट पहले ही सुरक्षित स्थान की तरफ़ चले गए और वे लोगों ने लंबी पैदल यात्रा कर कर-कर के बचाव-कहानियाँ सुनाईं।

      • कई छोटे व्यापारी और किसान बड़े आर्थिक घाटे में हैं — एप्पल-बाग, राजमा और सब्ज़ी की फसलों का बड़ा नुकसान बताया जा रहा है; स्थानीय हवाले से लाखों रुपये का प्रारम्भिक आंकलन आ चुका है।

      • मोबाइल नेटवर्क व सड़कों का टूटना बचाव को कठिन बना रहा है; कई इलाकों में भारी मशीनों और हेलीकॉप्टर-सहायता के जरिए ही लोग पहुँच रहे हैं।

        4) बचाव-कार्यों का आकलन और चुनौतियाँ

        • तत्काल-उपलब्धता: आर्मी-ब्रिगेड, NDRF, SDRF, ITBP और स्थानीय प्रशासन सक्रिय हैं — शुरुआती दिनों में 100+ लोगों के रेस्क्यू का दावा और लगातार सर्वे चल रहे हैं। पर मौसम की पुनरावृत्ति, भूस्खलन का जोखिम और सड़कों की क्षति बचाव को सीमित कर रहे हैं।

        • खोज-बचाव-तकनीक: मलबे के नीचे लोगों का पता लगाने के लिए कट्टर-मशीनरी, कुत्ते-टीम, थर्मल स्कैन जैसे साधन इस्तेमाल हो रहे हैं; पर कठिन भू-रचना में हर घंटा महत्वपूर्ण है।


        5) विस्तृत मूल्यांकन — यह घटना अकेली नहीं

        विशेषज्ञों का कहना है कि धाराली जैसी घटनाएँ हिमालय में बढ़ती जा रही अनुक्रमिक आपदाओं का हिस्सा हैं — जहां छोटे-छोटे घाटों, नदी-हेल्थ का बिगड़ना, अनियोजित बस्तियाँ और बढ़ती वर्षा के साथ जोखिमों में वृद्धि हो रही है। धाराली में दिख रहा पैटर्न — नदी-तट पर विकास + अचानक उथल-पुथल करने वाली बारिश/ग्लेशियर-इवेंट — पहले भी अन्य जगहों पर समान रूप से विनाशकारी रहा है। नीति-स्तर पर जमीन की मैपिंग, रिस्क-जोन निर्धारण और निर्माण नियंत्रण की व्यवस्था को मज़बूत करने की तत्काल ज़रूरत बताई जा रही है।

        6) क्या किया जाना चाहिए — नीतिगत और तकनीकी सुझाव

        1. तुरंत (short term): प्रभावितों को पारदर्शी आर्थिक सहायता, अस्थायी आवास, मनो-सामाजिक सहायता और कृषि पुनरुत्थान-पैकेज (बीज, लगातार इनकम सहायता) उपलब्ध कराना। राज्य के द्वारा घोषित सहायता पैकेज का फास्ट-ट्रैक क्रियान्वयन जरूरी है।

        2. मिड-टर्म: प्रभावित इलाकों की विज्ञान आधारित रि-ज़ोनिंग — खतरनाक फ्लड-प्लेन व चैनल-मार्गों पर पुनर्निर्माण प्रतिबंध और वैकल्पिक आजीविका/रिलोकेशन-पैकज। स्थानीय समुदायों के साथ सहमति से कम्पेन्सेशन और स्थायी पुनर्वास।

        3. लॉन्ग-टर्म (सिस्टमिक): हिमालयी जल-विज्ञान पर निगरानी (GIS/सैटेलाइट), ग्लेशियर/डिब्रिस-डैम पर रिसर्च, ग्रामीण और पर्यटन-निर्माण के लिए कठोर पर्यावरणीय नियम, तथा दक्षिणी-नैशनल डेटा-बेस जहाँ हर नया निर्माण की पर्यावरणीय स्वीकृति सार्वजनिक हो। ISRO जैसे संस्थानों के सैटेलाइट-डेटा से जोखिम मानचित्र नियमित अपडेट किए जाने चाहिए।

        4. अर्ली वार्निंग और कम्युनिटी-रिजिलिएन्स: स्थानीय-स्तर पर सतर्कता-सिस्टम (रबर-बेल/सार्वजनिक सायरन/वीएचएफ), बाढ़-रन-वे के बारे में नियमित जागरूकता, और पर्यटन/मकान मालिकों के लिए आपदा-तैयारी आवश्यक।


        7) राजनीतिक-प्रशासनिक जिम्मेदारी और पारदर्शिता

        घटना ने सवाल उठाये हैं कि क्यों संवेदनशील नदी-किनारे/फ्लड-प्लेन पर बिखरे निर्माणों पर पैनी निगरानी नहीं थी; स्थानीय नियमन, पर्यावरण स्वीकृति और पर्यटन-पॉलिसी में भ्रष्ट-लापरवाही के संकेत भी जाँच के विषय हैं। राहत और पुनर्वास में पारदर्शिता, कम्पेन्सेशन की तात्कालिकता और भूमि-रिहैबिलिटेशन योजनाओं में जनता की भागीदारी जरूरी होगी। विशेषज्ञों ने कहा है कि सिर्फ राहत बाँटना पर्याप्त नहीं — पुनरावृत्ति रोके जाने वाले कदम लेना अनिवार्य है।

        निष्कर्ष — धराली एक चेतावनी है

        धराली-आपदा केवल एक स्थानीय दुर्घटना नहीं है — यह हिमालयी इलाकों में बढ़ते खतरों, अनियोजित विकास, और बदलते मौसम पैटर्न का मिलाजुला नतीजा है। तत्काल राहत-कार्रवाइयों के साथ-साथ शासन-स्तर पर दीर्घकालिक, विज्ञान-आधारित नीति और स्थानीय समुदायों के अधिकारों-आधार पर पुनर्विकास ही भविष्य में इसी तरह की त्रासदियों की पुनरावृत्ति रोक सकता है। पीड़ितों के लिए त्वरित और मानवीय सहायता, प्रभावित कृषि व आजीविका का बहाल करना तथा भविष्य के लिए जोखिम-कम करने वाले अनुशासनात्मक कदम अब न सिर्फ़ जरुरी बल्कि अनिवार्य हैं।

मलबे में लापता लोगों की तलाश शुरू…सेना और एसडीआरएफ समेत कई टीमें जुटीं

18 Minutes Read -

धराली आपदा में जिंदगी की तलाश जारी है। आपदा को एक हफ्ता हो गया है। वहीं, मौसम की चुनौती के बीच आज रेस्क्यू के लिए सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ व जिला प्रशासन ड्रोन और अन्य अत्याधुनिक उपकरणों की मदद से मलबे में दबे लोगों की तलाश में जुटी हैं.

 

Uttarkashi Dharali Cloudburst Live news Rescue and Search Operation 7th day bad Weather All Update In Hindi

घोड़े खच्चरों से पहुंचाई जा रही खाद्य सामग्री

ग्रामीणों के लिए घोड़े खच्चरों के माध्यम से राशन सामग्री पहुंचाई जा रही है। वहीं आपदा प्रभावित ग्रामीणों के लिए समेश्वर देवता मंदिर में सामूहिक भोजन बनाया जा रहा है।

मलबे के बीच लापता लोगों की तलाश शुरू

धराली आपदा के छह दिन बाद वहां पर मलबे में सेना, आईटीबीपी सहित एनडीआरफ, एसडीआरएफ की ओर से खोज बचाव शुरू कर दिया गया है। मलबे के बीच खुदाई कर लापता लोगों को ढूढा जा रहा है। वहीं, निम और सेना रेको डिडेकटर मशीन से वहां पर सर्च अभियान चला रही है।

बैंक ऑफ बड़ौदा ने सीएम राहत कोष में दी एक करोड़ की राशि

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर बैंक ऑफ बड़ौदा के प्रतिनिधियों ने उत्तरकाशी जिले के धराली में आई आपदा में राहत कार्यों के लिए सीएम राहत कोष में एक करोड़ की राशि दी। रविवार को सीएम आवास में बैंक ऑफ बड़ौदा के प्रतिनिधिमंडल ने धराली व हर्षिल क्षेत्र में आई आपदा के राहत कार्यों के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष में एक करोड़ की धनराशि का योगदान दिया। मुख्यमंत्री ने बैंक प्रबंधन का आभार व्यक्त किया।

आज प्रभावितों को राहत राशि वितरित की जाएगी- गंगोत्री विधायक

गंगोत्री विधायक सुरेश चौहान ने कहा, “फिलहाल 50 लापता लोगों की सूची तैयार की गई है। बिहार और उत्तर प्रदेश से कई लापता लोग जो काम के लिए यहां आए थे, उनकी भी तलाश की गई है। टीम सक्रिय रूप से बचाव कार्य कर रही है, खोजी कुत्ते उनके स्थान की खोज कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने स्वयं एक शिविर स्थापित किया और दो दिनों तक  कार्य की निगरानी की। मैं 3-4 दिनों से यहां हूं। प्रभावित लोगों के लिए आवश्यक धन और अन्य आपूर्ति भी यहां पहुंच गई है। सड़कें खोलना और धराली को फिर से बसाना हमारे लिए एक चुनौती है। मुख्यमंत्री इसके लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं। प्रधानमंत्री भी मुख्यमंत्री से बात कर रहे हैं।  मुख्यमंत्री ने तुरंत उन मृतकों के परिजनों के लिए 5-5 लाख रुपये की घोषणा की है। आज, सभी प्रभावितों को राशि वितरित की जाएगी।”

43 लोग लापता- गढ़वाल कमिश्नर

गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडे ने बताया कि धराली आपदा में 43 लोग अब तक मिसिंग चल रहे हैं। आपदा प्रभावितों के पुनर्वास और राहत पैकेज देने के लिए राजस्व परिषद के सचिव की अध्यक्षता में जो कमेटी गठित की गई है। वह आज उत्तरकाशी पहुंच जाएगी। टीम प्रभावित क्षेत्र में जाकर वहां हुए नुकसान कार्यों का जायजा लेगी और प्रत्येक व्यक्ति से संवाद कर उनके हित में जो भी अच्छा राहत पैकेज हो सकता है, वह दिया जाएगा।

धराली आपदा में ध्वस्त कल्प केदार देवता के मंदिर का पुनर्निर्माण होगा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने डीएम सहित संबंधित विभागों के सचिवों को धराली आपदाग्रस्त क्षेत्र में क्षतिग्रस्त हुए निजी, सार्वजनिक संपत्ति के आकलन को सात दिन में तैयार करने का निर्देश दिया है। मुख्य सचिव को आकलन तैयार होते ही केंद्र सरकार को भेजने को कहा। उन्होंने कहा कि धराली आपदा में ध्वस्त हुए कल्प केदार देवता के मंदिर का पुर्निर्माण किया जाएगासीएम धामी ने यह निर्देश आपदा कंट्रोल रूम में रेस्क्यू अभियान की समीक्षा के दौरान दिए। उन्होंने राज्य के सभी आपदाग्रस्त क्षेत्रों में सरकार की ओर से दी जा रही तात्कालिक सहायता वितरण कार्य जल्द से जल्द पूरा करने को कहा। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों को सहायता राशि फौरी रूप में दी जा रही है। इस किसी भी प्रकार की नकारात्मकता नहीं फैलाई जानी चाहिए। ज्योर्तिमठ के लिए तैयार राहत पैकेज का समिति करेगी अध्ययन : धराली आपदा प्रभावितों के पुनर्वास और आजीविका के लिए शासन ने सचिव राजस्व की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति बनाई थी। यह समिति जोशीमठ के लिए तैयार किए राहत पैकेज का भी अध्ययन करेगी।

हर्षिल में बनी झील से पानी निकासी का काम मैनुअल करने की तैयारी

सिंचाई विभाग हर्षिल में बनी कृत्रिम झील से पानी की निकासी रास्ता बनाने का काम मैनुअल करने की तैयारी में है। सिंचाई विभाग के अधिकारी और श्रमिक आज हेलिकाप्टर के माध्यम से हर्षिल जाएंगे। अधिकारियों को वहीं पर कैंप करने का भी निर्देश दिया गया है। वहीं झील पर जल निकासी का कार्य करने के लिए यूजेवीएनएल की टीम भी हर्षिल पहुंच गई है।

उत्तरकाशी को हर्षिल से जोड़ने वाला पुल बना

उत्तरकाशी को हर्षिल से जोड़ने वाले पुल का पुनर्निर्माण किया गया है। इससे पांच अगस्त को उत्तरकाशी जिले के धराली और हर्षिल में बादल फटने और अचानक आई बाढ़ के बाद मशीनरी और राहत सामग्री की आसान आवाजाही हो सकेगी।

खोज और बचाव अभियान का दूसरा चरण शुरू

आपदाग्रस्त धराली में पुलिस ने खोज और बचाव अभियान का दूसरा चरण शुरू कर दिया है। इसके लिए आईजी एसडीआरएफ अरुण मोहन जोशी को इंसीडेंट कमांडर और कमांडेंट एसडीआरएफ अर्पण यदुवंशी को डिप्टी कमांडर बनाया गया है। धराली में फंसे लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। अब लापता लोगों की तलाश की जाएगी।