Author: Pravesh Rana

दो घंटे की यात्रा अब सिर्फ 15 मिनट में, इन राज्यों का सफर आसान और पैसे की भी होगी बचत; जानिए अटल सेतु से क्या बदलेगा?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को महाराष्ट्र के दौरे पर हैं। अपने दौरे में पीएम मुंबई में अटल सेतु को जनता को समर्पित किया। देश की आर्थिक राजधानी में बना यह पुल देश का सबसे लंबा पुल है। अधिकारियों ने कहा है कि पुल से हर रोज करीब 70 हजार यात्री सफर करेंगे जिनके समय और ईंधन खर्च में बहुत अधिक कमी आएगी।

जानिये कहाँ बनाया गया है अटल सेतु ?

इसका पूरा नाम अटल बिहारी वाजपेयी सेवारी-न्हावा शेवा अटल सेतु है। पहले इसे मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक (एमटीएचएल) के नाम से भी जाना जाता था। यह अरब सागर में ठाणे क्रीक पर 22 किलोमीटर लंबा ट्विन-कैरिज वे छह-लेन पुल है। अटल सेतु मुंबई में सेवरी को रायगढ़ जिले में चिरले से जोड़ता है।

पुल कितने समय में हुआ बनकर तैयार ?

पहली बार 1962 में ‘मुंबई मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र के लिए सड़क प्रणाली की योजना’ के नाम से इसका विचार सामने आया था। 34 साल बाद 1994 में परियोजना की व्यवहार्यता रिपोर्ट शुरू हुई। वहीं 2006 में निविदाएं बुलाई गईं जबकि इसके 10 साल बाद 2016 में पीएम मोदी ने इस पुल का शिलान्यास किया। आखिरकार परियोजना पर काम अप्रैल 2018 में शुरू हुआ।

परियोजना की लागत कितनी है?
अटल सेतु का निर्माण 17,840 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से किया गया है। आरटीआई के माध्यम से प्राप्त जानकारी के अनुसार, अनुमानित लागत से ज्यादा व्यय हुआ है। 14,712.70 करोड़ रुपये इसकी मूल लागत थी लेकिन कोविड के कारण लगने वाले लॉकडाउन की वजह से इसमें देरी हुई और व्यय ज्यादा हुआ।

इस पुल की विशेषता क्या है? 
अटल सेतु लगभग 21.8 किमी लंबा और 6-लेन वाला है जो 16.5 किमी लंबा समुद्र के ऊपर और लगभग 5.5 किमी जमीन पर बना है। यह भारत का सबसे लंबा पुल है, जो देश का सबसे लंबा समुद्री पुल भी है। यह मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे और नवी मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को तेज कनेक्टिविटी प्रदान करेगा और मुंबई से पुणे, गोवा और दक्षिण भारत की यात्रा में लगने वाले समय को भी कम करेगा। अटल सेतु मुंबई से नवी मुंबई के बीच लगने वाले मौजूदा दो घंटे के समय को कम करके 15-20 मिनट कर देगा। वहीं अधिकारियों ने कहा कि इस पुल से गुजरने वाले लोगों को हर यात्रा में कम से कम 500 रुपये तक के ईंधन की भी बचत होगी। इसके साथ ही यह मुंबई बंदरगाह और जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह के बीच कनेक्टिविटी को भी बेहतर बनाएगा।

इसका आम लोगों को कितना फायदा होगा? 
हजारों करोड़ की लागत से बना अटल सेतु मुंबई को नवी मुंबई से जोड़ेगा। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के लिए यह पुल नई जीवन रेखा बनेगा, वहीं बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में यह भारत के विकास की नई इबारत है। एक अनुमान के मुताबिक पुल से हर रोज करीब 70 हजार लोग सफर करेंगे। यहां 400 कैमरे लगे हैं, इसके अलावा ट्रैफिक के दबाव की जानकारी जुटाने के लिए एआई आधारित सेंसर लगे हैं।

इस बीच, मुंबई पुलिस ने जानकारी दी है कि समुद्री पुल पर चार पहिया वाहनों जैसे कार, टैक्सी, हल्के मोटर वाहन, मिनीबस और टू-एक्सल बस की गति सीमा 100 किलोमीटर प्रति घंटा होगी और पुल के चढ़ने और उतरने पर गति 40 किलोमीटर प्रति घंटा तक सीमित रहेगी। हालांकि, मोटर बाइक, ऑटो रिक्शा और ट्रैक्टर को इस पुल पर अनुमति नहीं होगी।

अधिकारियों ने यह भी बताया कि मुंबई की ओर जाने वाले मल्टी-एक्सल भारी वाहनों, ट्रकों और बसों को ईस्टर्न फ्रीवे पर प्रवेश नहीं मिलेगा।

Uttarakhand: 3 घंटे से ज्यादा देरी से चली ट्रेन तो टिकट की रकम होगी वापस, जानिए रेलवे ने क्यों लिया ये फैसला.

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देहरादून रेलवे स्टेशन के मुख्य वाणिज्य निरीक्षक ने कहा कि कोहरे के चलते सुबह के समय ही ट्रेन का संचालन प्रभावित हो रहा है। ऐसे में अगर किसी यात्री को ट्रेन का तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ा और वह यात्रा नहीं करता तो उसके टिकट की पूरी रकम उसे लौटाई जाएगी।

अगर यात्रियों को तीन घंटे से अधिक समय तक ट्रेन का इंतजार करना पड़ा तो उनके टिकट की पूरी रकम उन्हें लौटाई जाएगी। मैदानी इलाकों में सुबह के समय कोहरा छाने से ट्रेन की रफ्तार धीरे होने लगी है। दून में ट्रेन देरी से पहुंचने के कारण यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

इन दिनों हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर, दिल्ली समेत पंजाब, उत्तर प्रदेश के कई जिलों में घना कोहरा छा रहा है। देहरादून रेलवे स्टेशन के मुख्य वाणिज्य निरीक्षक सुभाष अग्रवाल ने कहा कोहरे के चलते सुबह के समय ही ट्रेन का संचालन प्रभावित हो रहा है।

धीमी गति होने की वजह से ट्रेन देरी से पहुंच रही है। ऐसे में अगर किसी यात्री को ट्रेन का तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ा और वह यात्रा नहीं करता तो उसके टिकट की पूरी रकम उसे लौटाई जाएगी। हालांकि दिन के समय मौसम साफ होने से संचालन किया जा रहा है।

भारत के पासपोर्ट की ताकत बढ़ी या घटी ? पढ़िए ये पूरी रिपोर्ट.

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पूरी भाजपा देश को हर समय ये बताने में लगी है कि मोदी जी के आने से देश के पासपोर्ट की ताकत कितनी बढ़ गयी है लेकिन असल सच्चाई कुछ और है। हेनले पासपोर्ट इंडेक्स की इस साल की रिपोर्ट में ये बात उजागर हुई है. हेनले पासपोर्ट इंडेक्स दुनिया के सभी पासपोर्ट की मूल आधिकारिक रैंकिंग है जिससे किसी भी देश के पासपोर्ट की ताकत का पता चलता है।


2024 में हेनले पासपोर्ट इंडेक्स में दुनिया भर के कुल 6 देशों ने टॉप पर जगह बनाई है दुनिया के सबसे शक्तिशाली पासपोर्ट वाले देशों में यूरोपीय संघ के चार सदस्य देश फ्रांस, जर्मनी, इटली और स्पेन शामिल हैं जबकि एशियाई देशों में से इस लिस्ट में  हमेशा से टॉप पर रहे दो एशियाई देश इस बार भी टॉप पायदान पर अपनी जगह बनाए हुए हैं और ये देश हैं जापान और सिंगापुर यानी इन 6 देशों के पासपोर्ट सबसे ताकतवर है. यह पासपोर्ट अपने नागरिकों को दुनिया के 227 देशों  में से 194 में बिना वीजा के एंट्री की सुविधा मुहैया कराते हैं

अब आप यही सोच रहे होंगे कि फिर भारत इस लिस्ट में कहां है तो आपको ये जानकर हैरानी होगी कि भारत इस लिस्ट में 80  नंबर पर खड़ा है,,, जी हाँ 80 नंबर पर और देश में डंका पीटा जा रहा है कि भारत के पासपोर्ट की ताकत बहुत बढ़ गयी है हेनले पासपोर्ट इंडेक्स पर टॉप 10 में यूरोपीय देशों को जगह मिली है दक्षिण कोरिया फिनलैंड और स्वीडन इस लिस्ट में दूसरे स्थान पर हैं। ये तीनों देश 193 देशों के लिए वीजा-मुक्त यात्रा का दावा करते हैं तीसरे स्थान पर ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, आयरलैंड और नीदरलैंड हैं। ये देश 192 देशों के लिए वीजा-मुक्त यात्रा का दावा करते हैं।

2024 हेनले पासपोर्ट इंडेक्स में भारत 80वें स्थान पर है भारत के पासपोर्ट के साथ थाईलैंड, इंडोनेशिया, मॉरीशस, श्रीलंका और मालदीव जैसे जगहों की यात्रा की जा सकती है हालांकि मालदीव के साथ भी आजकल भारत के रिश्ते कुछ ठीक नहीं है दूसरी तरफ भारत के पड़ोसी देशों की बात करें तो जहां 85 जगहों में वीजा-फ्री एंट्री के लिए चीन को 62वें स्थान पर रखा गया है


अब जरा साल कुछ साल पहले की रैंकिंग पर भी नजर डालते हैं साल 2006 में भारत की रैंकिंग आज से काफी अच्छी थी साल 2006 में भी भारत का पासपोर्ट 71 वें स्थान पर था जबकि साल 2014 में जब तक मनमोहन सरकार का कार्यकाल खत्म हुआ था,,उस समय भी भारत के पासपोर्ट की रैंकिंग 76 वें  स्थान पर थी जबकि मोदी सरकार के एक साल सत्ता में पुरे होने के बाद 2015 में भारत के पासपोर्ट की रैंक गिरकर 88 नंबर पर पहुंच गया था गजब तो साल 2021 में हुआ जब नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल में भारत के पासपोर्ट की कीमत गिरकर 90 नंबर पर पहुंच गया और आज वर्तमान में भारत का पासपोर्ट 80 नंबर पर आता है

 हेनले पासपोर्ट इंडेक्स ने बीजेपी के उन नेताओं को आईना दिखाया है जो कहते नहीं थकते कि मोदी जी की सरकार में भारत के पासपोर्ट की ताकत बहुत तेजी से बढ़ी है और पासपोर्ट की इज्जत बढ़ गयी है जबकि हेनले पासपोर्ट इंडेक्स साफ़ दिखा रहा है कि बजाय आज के पूर्व की मनमोहन सरकार में भारत का पासपोर्ट ज्यादा मजबूत था

सरकार-ट्रांसपोर्टर्स के बीच सुलह; ड्राइवर्स तुरंत काम पर लौटेंगे, आश्वासन के बाद हड़ताल खत्म

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  • हिट एंड रन को लेकर नए कानून के खिआमलाफ आक्रोश के बीच जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। ट्रांसपोर्टर्स ने देशव्यापी हड़ताल की। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए केंद्रीय गृह सचिव ने उनके साथ बैठक की। बैठक और वार्ता का नतीजा भी तत्काल देखने को मिला। अब ट्रांसपोर्टर तत्काल ड्यूटी पर लौटेंगे। इससे पहले अखिल भारतीय परिवहन कांग्रेस की बैठक पर केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने कहा, “हमने आज अखिल भारतीय परिवहन कांग्रेस के प्रतिनिधियों से चर्चा की।

अजय भल्ला ने कहा, सरकार ये बताना चाहती है कि नए कानून और जुर्माने के प्रावधान अभी लागू नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा, भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(2) लागू करने से पहले अखिल भारतीय परिवहन कांग्रेस से विचार विमर्श किया जाएगा। ड्राइवरों और ट्रांसपोर्टर की चिंंताओं को सुनने के बाद ही अंति निर्णय लिया जाएगा।

बैठक के बाद ट्रांसपोर्टर क्या बोले?
अखिल भारतीय मोटर परिवहन कांग्रेस (AIMTC) के अध्यक्ष अमृत लाल मदन ने गृह सचिव के साथ बैठक के बाद गतिरोध खत्म करने की अपील की। उन्होंने ड्राइवरों से कहा, आप सिर्फ हमारे ड्राइवर नहीं, सैनिक हैं। हम नहीं चाहते कि आप किसी भी असुविधा का सामना करें।

खुद गृह मंत्री शाह से मिला आश्वासन
उन्होंने कहा, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आश्वस्त किया है कि सरकार, कानून के तहत 10 साल की सजा और जुर्माने के प्रावधान पर रोक लगाएगी। अमृत लाल मदन के मुताबिक अखिल भारतीय मोटर परिवहन कांग्रेस की अगली बैठक तक कोई कानून लागू नहीं किया जाएगा।

किशोरी से दुष्कर्म मामले में दोषी भाजपा विधायक रामदुलार गोंड को 25 साल की कैद, दस लाख रुपये का जुर्माना

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उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में दुद्धी सीट से भाजपा विधायक रामदुलार गोंड को किशोरी से दुष्कर्म मामले में सजा का एलान हो गया है। भाजपा विधायक रामदुलार गोंड को कोर्ट ने 25 साल की कैद तथा 10 लाख रूपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड की धनराशि पीड़िता को मिलेगी।किशोरी से दुष्कर्म के मामले में सोनभद्र की एमपी-एमएलए कोर्ट ने ये फैसला सुनाया है। नवंबर 2014 में म्योरपुर थाने में मुकदमा दर्ज हुआ था और आठ सालों की लंबी सुनवाई के बाद फैसला आया है।

 

एमपी-एमएलए कोर्ट ने भाजपा विधायक रामदुलार गोंड के 25 वर्ष कैद और दस लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। विधायक को किशोरी के साथ दुष्कर्म का दोषी पाया गया है। आठ साल तक चली लंबी कानूनी लड़ाई के बाद बृहस्पतिवार को कोर्ट ने फैसला सुनाया। एमपी-एमएलए कोर्ट के न्यायाधीश एहसानुल्लाह खां ने अर्थदंड की समूची राशि पीड़िता को देने का आदेश दिया है। कोर्ट के फैसले के बाद भाजपा और विधायक समर्थकों को तगड़ा झटका लगा है। आदेश के बाद रामदुलार गोंड की विधायकी जानी तय मानी जा रही है। विधायक के अधिवक्ता ने फैसले को उच्च अदालत में चुनौती देने की बात कही है।

बता दें कि किशोरी से दुष्कर्म के मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट ने 12 दिसंबर को भाजपा विधायक रामदुलार गोंड को दोषी करार दिया था। मंगलवार को सुनवाई के बाद एमपी-एमएलए कोर्ट के न्यायाधीश एहसानुल्लाह खान ने सजा सुनाने के लिए 15 दिसंबर की तिथि निर्धारित की थी।

 

पीड़िता के भाई ने जाहिर की खुशी, कहा नौ साल बाद न्याय मिला
एमपी-एमएलए कोर्ट से विधायक रामदुलार गोंड को सजा होने पर पीड़िता के भाई ने खुशी जाहिर की। सुनवाई के दौरान मंगलवार को आए पीड़िता के भाई जब इस संबंध में वार्ता की गई तो उनका कहना था कि अदालत के फैसले वे वह बेहद खुश है। नौ साल के संघर्ष के बाद आज उसे न्याय मिला है। बता दें कि पीड़िता के भाई की शिकायत पर ही नौ साल पहले रामदुलार गोंड के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज हुआ था।

भजन लाल शर्मा होंगे राजस्थान के नए सीएम, विधायक दल की बैठक में हुआ फैसला

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दिल्ली से आए पर्यवेक्षकों ने विधायक दल की बैठक के बाद सांगानेर से विधायक भजनलाल शर्मा का नाम राजस्थान के मुख्यमंत्री के लिए तय कर लिया है. भाजपा आलाकमान ने केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, विनोद तावड़े और सरोज पांडेय को राजस्थान का पर्यवेक्षक बनाया था, राजस्थान में नए सीएम को लेकर सस्पेंस अब खत्म हो गया है. सांगानेर सीट से विधायक बने भजनलाल शर्मा ही राजस्थान के नए मुख्यमंत्री होंगे. दिल्ली से आए पर्यवेक्षकों ने विधायक दल की बैठक के बाद भजनलाल शर्मा का नाम तय कर लिया है. भाजपा आलाकमान ने केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, विनोद तावड़े और सरोज पांडेय को राजस्थान का पर्यवेक्षक बनाया था. आज दोपहर तीनों नेता जयपुर पहुंचे, विधायकों संग बैठक की. आज दोपहर केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह ने वसुंधरा राजे से वन टू वन मीटिंग की थी. उधर, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी राजनाथ सिंह से फोन पर बात की थी.
बताते चलें कि राजस्थान का रण जीतने के बाद भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही थी कि सीएम किसे चुना जाए. लेकिन सीएम पद की यह रेस अब थम गई है. इस रेस में कई नाम चल रहे थे. इस लिस्ट में सबसे पहला नाम वसुंधरा राजे का चल रहा था. वो पहले भी राजस्थान की कमान संभाल चुकी हैं. इसके अलावा राजस्थान में हिंदुत्व के पोस्टर बॉय बन गए बाबा बालकनाथ के नाम पर भी चर्चा थी वहीं गजेंद्र शेखावत, सीपी जोशी, दीया कुमारी और राजवर्धन राठौड़ जैसे नाम भी रेस में थे.

छात्र राजनीति से शुरुआत,मध्य प्रदेश के नए मुख्यमंत्री मोहन यादव,मां सीता पर दिया था विवादित बयान,, पढ़ें मोहन की कहानी

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मप्र के नए मुख्यमंत्री मोहन यादव का नाम चौंकाने वाला रहा। इसके साथ ही मध्यप्रदेश का सीएम बनने की दौड़ से सभी नाम बाहर हो गए। अब मप्र की कमान मोहन यादव के हाथ में रहेगी। यानी प्रदेश में अब शिव का राज नहीं मोहन राज होगा। मोहन यादव ने अपने राजनीति सफर की शुरुआत छात्र जीवन से की थी। अब वे प्रदेश के सत्ता के शीर्ष पर विराजमान हो गए हैं।

 

छात्र राजनीति से करियर की शुरुआत करने वाले डॉ. मोहन यादव को भाजपा ने बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। अगले पांच साल के लिए डॉ. मोहन यादव को जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनके अलावा जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ला प्रदेश के नए उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभालेंगे। वहीं नरेंद्र सिंह तोमर को एमपी विधानसभा स्पीकर की जिम्मेदारी दी गई है। डॉ. मोहन यादव 2013 और 2018 के बाद 2023 में भी उज्जैन दक्षिण विधानसभा सीट पर चुनाव जीते हैं। डॉ. मोहन यादव का जन्म 25 मार्च 1965 को मध्य प्रदेश के उज्जैन में हुआ था। उनके पिता पूनमचंद यादव और माता लीलाबाई यादव हैं। उनकी पत्नी सीमा यादव हैं।

 

मोहन यादव की शिक्षा और करियर
डॉ. मोहन यादव माधव विज्ञान महाविद्यालय से पढ़ाई की। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद उज्जैन के नगर मंत्री रहे हैं। 1982 में छात्र संघ के सह-सचिव चुने गए थे। भाजपा की राज्य कार्यकारिणी के सदस्य और सिंहस्थ मध्य प्रदेश की केंद्रीय समिति के सदस्य रहे हैं। मध्य प्रदेश विकास प्राधिकरण केप्रमुख, पश्चिम रेलवे बोर्ड में सलाहकार समिति के सदस्य भी रहे हैं।

कांग्रेस के इन आरोपों का कर चुके हैं सामना
उज्जैन के मास्टर प्लान को लेकर कांग्रेस ने गंभीर आरोप लगाए थे। कहा था कि मोहन यादव ने अपने परिवार को लाभ पहुंचाने के लिए मास्टर प्लान को गलत तरीके से पास कराया है। यादव ने इन आरोपों को खारिज कर दिया। लोगों ने भी इनआरोपों को गंभीरता से नहीं लिया और मोहन यादव को ही दोबारा विधायक बनाकर भोपाल भेजा है।

इन मामलों में रहे चर्चा में
माता सीता को लेकर एक विवादित बयान भी चर्चा में रहा है। उन्होंने कहा था कि मर्यादा के कारण भगवा राम को सीता को छोड़ना पड़ा था। उन्होंने वन में बच्चों को जन्म दिया। कष्ट झेलकर भी राम की मंगलकामनना करती रहीं। आज के दौर में ये जीवन तलाक के बाद की जिंदगी जैसा है।

ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के समापन समारोह में पहुंचे गृहमंत्री अमित शाह, उत्तराखंड को लेकर कह दी ये बात

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उत्तराखंड में आयोजित दो दिवसीय वैश्विक निवेशक सम्मेलन के दूसरे और अंतिम दिन शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। वैश्विक निवेशक सम्मेलन के दूसरे दिन पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन, इंफ्रास्ट्रक्चर, वन एवं सहयोग क्षेत्र, उद्योग-स्टार्टअप, आयुष व वेलनेस, सहकारिता एवं खाद्य प्रसंस्करण विषय पर छह सत्र आयोजित किए गए।

 

इस खास मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उत्तराखंड ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2023 के समापन सत्र में भाग लिया और संबोधन दिया। इस मौके पर अमित शाह ने कहा कि मैंने उत्तराखंड के सीएम पुष्कर धामी से लक्ष्य के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि 2 लाख करोड़ रुपये, लेकिन आज 3.5 लाख करोड़ रुपये के एमओयू पर हस्ताक्षर हुए हैं। मैं इसके लिए राज्य प्रशासन को बधाई देना चाहता हूं। सीएम धामी के नेतृत्व में प्रदेश ने कमाल किया है।

 

दुनिया के सामने उदाहरण बनेगा उत्तराखंड

गृह मंत्री शाह ने कहा कि अब उत्तराखंड बनेगा। इसका विकास होगा और इसकी अलग पहचान बनेगी। ये इन्वेस्टर्स समिट दुनिया भर में यह एक मजबूत उदाहरण है कि यह अपनी प्राकृतिक सुंदरता से समझौता किए बिना और पर्यावरण-अनुकूल तरीकों का पालन करके खुद को व्यापार से जोड़ सकता है।

बतौर गृह मंत्री अमित शाह, सीएम धामी कहते हैं कि यहां कुदरत है…देव हैं…लेकिन मैं इसके साथ ये भी कहूंगा कि यहां भ्रष्टाचार मुक्त शासन भी है। जोकि इनवेस्टमेंट मुक्त निवेश के लिए भी जरूरी है। कहा कि पारदर्शिता उत्तराखंड का स्वभाव है। उन्होंने निवेशकों से कहा कि वह निश्चिंत होकर राज्य में निवेश करें, उन्हें भ्रष्टाचार नहीं मिलेगा।

 

कई हस्तियां भी बनीं निवेशक सम्मेलन की गवाह

निवेशक सम्मेलन में निवेशकों के अलावा कवि, लेखक व गीतकार प्रसून जोशी, पतंजलि आयुर्वेद के सीईओ आचार्य बालकृष्ण, परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष चिदानंद मुनि व अलग-अलग क्षेत्रों की मशहूर हस्तियां भी गवाह बनीं। सम्मेलन में प्रदेश सरकार के सात मंत्रियों के अलावा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, त्रिवेंद्र सिंह रावत, विजय बहुगुणा, तीरथ सिंह रावत, विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण, टिहरी सांसद माला राज्य लक्ष्मी, अल्मोड़ा के सांसद अजय टम्टा, पार्टी के प्रदेश महामंत्री संगठन अजेय कुमार, प्रदेश महामंत्री आदित्य कोठारी, पार्टी विधायक खजानदास, विनोद चमोली, मुन्ना सिंह चौहान, सहदेव पुंडीर, पार्टी प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान, प्रदेश प्रवक्ता हेमंत द्विवेदी समेत कई अन्य प्रमुख लोग उपस्थित रहे।

परमार्थ निकेतन जाएंगे गृहमंत्री

परमार्थ निकेतन में गृहमंत्री अमित शाह के प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतेजाम किए हैं। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एसएसपी पौड़ी, टिहरी व एसपी चमोली ने पुलिस अधिकारियों व कर्मियों को ब्रीफ किया। आज शनिवार शाम गृहमंत्री अमित शाह का परमार्थ निकेतन की आरती में शामिल होने का कार्यक्रम प्रस्तावित है। अमित शाह का हेलिकॉप्टर वेद निकेतन के समीप हेलीपैड पर पर लैंड करेगा। यहां से वह कार से परमार्थ निकेतन पहुंचेंगे। इस दौरान पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रहेगी।

‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ बना उत्तराखंड के उत्पादों का ब्रांड, पीएम मोदी ने किया लॉन्च

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राज्य के सभी उत्पादों को अब एक नाम से पहचाना जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज शुक्रवार को वैश्विक निवेशक सम्मेलन के दौरान हाउस ऑफ हिमालयाज की लांचिंग की। अभी तक हिमाद्री, हिलांस, ग्राम्यश्री जैसे तमाम उत्पाद अलग-अलग नाम से बाजार में जाते हैं, लेकिन अब सभी हाउस ऑफ हिमालयाज के नाम से पहचाने जाएंगे।

फरवरी में धामी कैबिनेट ने एक निर्णय लिया था कि प्रदेश के सभी उत्पादों की क्वालिटी, मार्केटिंग व ब्रांडिंग के लिए समिति का गठन किया जाए। इस आधार पर एक समिति का गठन किया गया है। इस समिति ने हाउस ऑफ हिमालयाज नाम पर मुहर लगाई। इस नाम का रजिस्ट्रेशन करा दिया गया है। ट्रेडमार्क के लिए आवेदन भी कर दिया गया है।

सचिव ग्राम्य विकास राधिका झा ने बताया कि अब हाउस ऑफ हिमालयाज उत्तराखंड का ब्रांड होगा। हिमाद्री, हिलांस समेत तमाम समितियों, स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को इसी ब्रांड नाम के साथ बाजार में उतारा जाएगा। इससे न केवल राष्ट्रीय, बल्कि भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उत्पादों को बेहतर बाजार मिलेगा।अपर सचिव ग्राम्य विकास नितिका खंडेलवाल ने बताया, हाउस ऑफ हिमालयाज उत्तराखंड का ब्रांड नाम हो गया है। जैसे टाटा या अन्य कंपनियों का एक नाम चलता है और विभिन्न उत्पाद बाजार में आते हैं। उसी तरह यह ब्रांड नाम चलेगा। उन्होंने कहा, सभी उत्पादों की अपनी पहचान के साथ हाउस ऑफ हिमालयाज का टैग उनके साथ रहेगा।

3 साल में 13 सरकार,मोदी की इस योजना ने बदला देश का चुनावी गणित !

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वर्ष 2020 में पूरी दुनिया कोरोना संकट से जूझ रही थी। भारत सरकार भी इससे निपटने के लिए देश में लॉकडाउन लागू कर चुकी थी। आफत इस कदर बढ़ी कि गरीबों के सामने पेट भरने की चुनौती खड़ी हो गई। ऐसे में केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) की शुरुआत की। इस योजना के तहत गरीबों को 5 किलो मुफ्त अनाज दिया जाता है। तीन साल पहले शुरू हुई ये योजना धीरे-धीरे मोदी सरकार का चेहरा बन गई। यही कारण रहा कि इस फ्री अनाज योजना के 8 चरण हो चुके हैं। अब नवें चरण के तहत प्रधानमंत्री ने इसे अगले पांच साल तक बढ़ाने का ऐलान कर दिया है।

केंद्र सरकार के इस फैसले के तमाम सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं। दरअसल जबसे ये योजना शुरू हुई है, तब तक आज यानि दिसंबर, 2023 तक कुल 23 राज्यों में विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। इनमें से 13 राज्यों में भाजपा या तो सीधे या गठबंधन के सहयोगियों के दम पर सत्ता में आ चुकी है। इसमें गुजरात, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में सरकार में वापसी भी शामिल है। भाजपा गठबंधन असम, पुद्दुचेरी, गुजरात, गोआ, मणिपुर, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, त्रिपुरा, मेघालय, नगालैंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान में सत्तारूढ़ हो चुका है।

देश में हर साल चुनाव दर चुनाव के बीच कैसे इस योजना को समय-समय पर बढ़ाया गया। इस पर भी नजर डाल लेते हैं। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना की शुरुआत अप्रैल से जून 2020 में हुई। फिर जुलाई से नवंबर 2020 तक के लिए इसे बढ़ाया गया। इसके बाद मई और जून 2021 में इस योजना का तीसरा चरण आया। फिर जुलाई से नवंबर 2021 तक योजना ने चौथा चरण, दिसंबर 2021 से मार्च 2022 तक पांचवा चरण, अप्रैल 2022 से सितंबर 2022 तक छठा चरण, अक्टूबर 2022 से दिसंबर 2022 तक सातवां चरण और जनवरी 2023 से दिसंबर 2023 तक आठवां चरण पूरा किया।

अब योजना को पांच साल तक बढ़ा दिया गया है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर लिखा, “देश के मेरे परिवारजनों में से कोई भी भूखा नहीं सोए, हमारी सरकार इसके लिए प्रतिबद्ध है। अपनी इसी भावना को ध्यान में रखते हुए हमने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को अगले पांच वर्षों तक बढ़ा दिया है। यानि मेरे गरीब भाई-बहनों के लिए वर्ष 2028 तक मुफ्त राशन की व्यवस्था निरंतर जारी रहेगी। इसका फायदा करीब 81 करोड़ देशवासियों को मिलेगा। मुझे विश्वास है कि हमारा यह प्रयास उनके जीवन को अधिक से अधिक आसान और बेहतर बनाएगा।’’

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माना जाता है कि 2019 में मोदी सरकार की वापसी में महत्वाकांक्षी उज्जवला योजना का विशेष योगदान रहा। अब धीरे-धीरे फ्री राशन योजना अपना असर दिखाने लगी है। योजना के विस्तार को कहीं न कहीं लोकसभा चुनाव की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है। वैसे 2021 से ही चुनाव दर चुनाव बीजेपी को मिल रही सफलता के पीछे इसका विशेष योगदान माना जा रहा है। पिछले तीन सालों में बीजेपी की जीत का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। उसने न सिर्फ यूपी, एमपी, गुजरात जैसे बड़े राज्यों में सत्ता बचाई है, बल्कि राजस्थान, छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में उसने कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर दिया।

यही नहीं पश्चिम बंगाल जैसे राज्य में जहां भाजपा का जनाधार काफी सिमटा हुआ था, वहां भी पार्टी अब वामदलों और कांग्रेस को पीछे छोड़कर प्रमुख विपक्षी दल बनकर उभरी है। इसी तरह बिहार चुनाव में भी बीजेपी का ग्राफ बढ़ गया।

बिहार में भाजपा का बढ़ा ग्राफ
2020 में बिहार और दिल्ली के विधानसभा चुनाव हुए। बिहार में बीजेपी ने पहले से बेहतर प्रदर्शन करते हुए 74 सीटें हासिल कीं। इस चुनाव में नीतीश कुमार की जदयू 43 सीट लेकर तीसरे पर खिसक गई। वहीं राजद 75 सीटों के साथ सबसे बड़ा दल बनी। दिल्ली विधानसभा चुनावों में भाजपा को उम्मीद के मुताबिक सफलता तो नहीं मिली। वह सिर्फ 8 सीटें ही जीत सकी।लेकिन इस बार उसने 2015 के मुकाबले अपने वोट प्रतिशत में काफी सुधार कर लिया। कुल 63 सीटें ऐसी रहीं, जहां बीजेपी का वोट प्रतिशत बढ़ गया। इनमें 20 सीटों पर तो 10 फीसदी से ज्यादा का वोट शेयर बढ़ा। नजफगढ़ सीट पर तो वोट शेयर में 21.5 फीसदी की बढ़त दर्ज हुई। बहरहाल, दिल्ली में आम आदमी पार्टी 62 सीटें जीतकर एकतरफा विजेता बनी।

तमिलनाडु में पहली बार चार विधायक, पश्चिम बंगाल में प्रमुख विपक्षी दल
वर्ष 2021 में केंद्र ने फ्री अनाज योजना को दो बार बढ़ाया। पहला मई और जून 2021, फिर जुलाई से नवंबर 2021 तक। इसी साल असम, केरल, पुद्दुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनाव हुए। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को बीजेपी चुनौती दे रही थी। हालांकि चुनाव परिणाम आए तो ममता बनर्जी ने आसानी से भाजपा को हरा दिया। लेकिन इस हार के बावजूद भाजपा का प्रदर्शन चर्चा में रहा। दरअसल बीजेपी ने 2016 के विधानसभा चुनावों में बंगाल में सिर्फ 3 सीटें जीती थीं। उस दौरान उसका वोट प्रतिशत करीब 10 फीसदी था। लेकिन 2021 में ये वोट शेयर सीधे उछलकर 38.1 फीसदी पर पहुंच गया और बीजेपी ने 77 सीटें अपने नाम की। ये प्रदर्शन इसलिए और भी महत्वपूर्ण माना गया क्योंकि अभी तक बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के सामने लेफ्ट और कांग्रेस के दल ही चुनौती देने वाले माने जाते थे। लेकिन बीजेपी ने इन्हें किनारे लगा दिया और प्रमुख विपक्षी दल बनकर उभरी।

असम में दमदार वापसी
असम के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की साख दांव पर लगी थी क्योंकि वह यहां सत्ता बनाए रखने की लड़ाई लड़ रही थी। आखिरकार बीजेपी सत्ता बचाने में कामयाब रही। चुनाव में बीजेपी ने 33.21 वोट शेयर के साथ 60 सीटें जीतीं। उसके सहयोगी दल असम गण परिषद ने 9, यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी ने 6 सीटें अपने नाम कीं। वहीं प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस 29.67 वोट शेयर के बावजूद 29 सीटें ही जीत सकी।

तमिलनाडु में पहली बार खिला कमल
इसी तरह तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में भाजपा के 20 में से चार उम्मीदवार विजयी हुए। इस जीत ने पार्टी के 15 साल लंबे इंतजार को खत्म कर दिया। भाजपा की तरफ से राष्ट्रीय महिला शाखा की अध्यक्ष वनाथी श्रीनिवासन, जयललिता के निधन के बाद भाजपा में शामिल हुए अन्नाद्रमुक के पूर्व मंत्री नैनेर नागेंद्रन, सीएस सरस्वती और भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारी एमआर गांधी ने जीत हासिल की।

केरल में साफ मगर बढ़ गया वोट का ग्राफ
केरल विधानसभा चुनाव में भाजपा को एक भी सीट पर जीत नसीब नहीं हुई। लेकिन भाजपा के वोट शेयर में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। 2016 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने 10.6 फीसदी वोट हासिल किए, वहीं 2021 में उसने 11.30 फीसदी वोट मिले। 2016 में भाजपा प्रत्याशी 6 विधानसभा सीटों पर दूसरे स्थान पर रहे थे, वहीं 2021 में 9 सीटों पर बीजेपी दूसरे नंबर पर रही।

पुद्दुचेरी में सरकार
इसी तरह पुद्दुचेरी विधानसभा चुनावों में भाजपा ने अपने सहयोगी ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस के साथ आसानी से सरकार बना ली। बीजेपी को इस चुनाव में 6 सीटें मिलीं, जबकि एनआर कांग्रेस को 10 सीटें मिलीं। चुनाव में इंडियन नेशनल कांग्रेस को महज 2 सीटों से संतोष करना पड़ा। बता दें 33 सीटों वाली इस विधानसभा में 30 सीटों पर विधायक चुनाव के जरिए चुनकर आते हैं, वहीं बाकी की 3 सीटों पर केंद्र द्वारा नामित किए जाते हैं। 2016 में केंद्र सरकार ने इसके लिए बीजेपी के सदस्यों को ही नामित किया था।

इसके बाद आया वर्ष 2022, इससे पहले ही मोदी सरकार ने मुफ्त अनाज की स्कीम को दिसंबर 2021 से मार्च 2022 तक बढ़ा दिया था। इस साल दो बार और ये स्कीम बढ़ी, पहले अप्रैल 2022 से सितंबर 2022 तक फिर अक्टूबर 2022 से दिसंबर 2022 तक। इस साल कुल 7 राज्यों उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, गोआ, मणिपुर और पंजाब के विधानसभा चुनाव हुए।

यूपी चुनाव में तो भाजपा ने सारे रिकॉर्ड ही तोड़ डाले। यहां भाजपा गठबंधन ने 403 में से कुल 274 सीटें जीतीं। योगी आदित्यनाथ 37 साल बाद यूपी में लगातार दूसरी बार बहुमत की सरकार बनाने वाले मुख्यमंत्री बन गए। सीधी लड़ाई में भाजपा को जहां 45 प्रतिशत से ज्यादा वोट मिले, वहीं सपा 36 प्रतिशत वोट हासिल करने के बावजूद काफी पीछे रह गई।

यूपी में बजा मुफ्त अनाज का डंका
इस चुनाव में मुफ्त अनाज स्कीम एक बड़ा मुद्दा बनी और बीजेपी ने पूर्वांचल से लेकर वेस्ट यूपी तक शानदार जीत हासिल की। चुनाव की शुरुआत उन जिलों से हुई, जहां जहां किसान आंदोलन का सर्वाधिक असर था। उस चरण की 58 सीटों में भाजपा को 46 सीटें मिली। तिकुनिया कांड के कारण चर्चा में आए लखीमपुर में विपक्षी दलों का का खाता तक नहीं खुला। दूसरा व सातवां चरण ही ऐसा रहा जहां सपा भाजपा को टक्कर देती दिखी। लेकिन पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी व सीएम के गृह जिले गोरखपुर में क्लीन स्वीप करने के साथ ही भाजपा ने नोएडा, गाजियाबाद, हापुड़, बुलंदशहर, शाहजहांपुर, पीलीभीत, हरदोई, गोंडा, कन्नौज, कुशीनगर, मिर्जापुर सहित कई जिलों में सारी सीटें अपने झोली में डाल लीं।

उत्तराखंड में वापसी
इसी तरह उत्तराखंड में भी भाजपा दोबारा सरकार बनाने में कामयाब रही। भले ही इसके सीएम पुष्कर सिंह धामी अपना चुनाव हार किए लेकिन 70 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा के 47 विधायक पहुंच गए। 2016 तके 57 सीटें जीतने वाली भाजपा को 10 सीटों को नुकसान जरूर हुआ।

मणिपुर और गोआ में भी कमल
मणिपुर विधानसभा चुनावों में भी भाजपा ने 32 सीटें हासिल की और सरकार बना ली। उसने 2017 के विधानसभा चुनावों में 21सीटें ही हासिल की थी। वहीं उस चुनाव में 28 सीटें जीतने वाली कांग्रेस सिर्फ 5 सीटों पर सिमटकर रह गई। 40 विधानसभा सीटों वाले प्रदेश गोआ में भाजपा बेहतर प्रदर्शन् के किया और 2017 के मुकाबले 7 ज्यादा 20 सीटें जीतीं। कांग्रेस को चुनावों में 6 सीटों का नुकसान हुआ और वह 11 पर खड़ी रह गई।

हिमाचल और पंजाब में खराब प्रदर्शन
हालांकि भाजपा को हिमाचल प्रदेश में उम्मीद के अनुसार लाभ नहीं मिला। यहां की जनता से 1985 से कायम रिवाज को बनाए रखा। चुनाव में कांग्रेस 40 सीटें जीती, जबकि बीजेपी 25 पर सिमट गई। 2017 में बीजेपी ने 44 सीटें जीतकर बहुमत की सरकार बनाई थी और कांग्रेस सिर्फ 21 सीटों पर ही सिमटकर रह गई थी। इसी तरह पंजाब में भाजपा के मत प्रतिशत में हल्का सा इजाफा जरूर हुआ और वह 6.6 प्रतिशत हो गया लेकिन वह सिर्फ दो सीटें ही जीत सकी।

गुजरात में रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन

गुजरात विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने सारे रेकॉर्ड तोड़ दिए। बीजेपी ने यहां की 182 विधानसभा सीटों में से 156 सीटें अपने नाम कीं। यह गुजरात में किसी पार्टी का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। इससे पहले 1985 में माधव सिंह सोलंकी की अगुवाई में कांग्रेस ने 149 सीटें जीती थीं। कांग्रेस इस चुनाव में सिर्फ 17 सीटों पर सिमटकर रह गई।

इन जीतों के साथ में फ्री राशन स्कीम का कितना योगदान था, इसका अंदाजा केंद्र सरकार के इस फैसले से ही लगाया जा सकता है। अभी तक कुछ महीनों के लिए ही इस स्कीम को बढ़ाया जाता था लेकिन इस साल इसे जनवरी 2023 से सीधे दिसंबर 2023 तक के लिए बढ़ा दिया गया।

कर्नाटक में सत्ता से बाहर हुई भाजपा पर वोट शेयर बरकरार
हालांकि इस साल कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भाजपा को भारी नुकसान हुआ और वह सत्ता से बाहर हो गई। 2018 में जहां भाजपा 104 सीटें जीतकर सरकार बनाने में सफल रही थी, वहीं इस बार वह सिर्फ 66 सीटें ही जीत सकी। कांग्रेस ने इस चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया और 80 सीटों से बढ़कर 135 सीटें अपने नाम की और सत्ता पर काबिज हुई। खास बात ये ही रही कि इस चुनाव में बीजेपी के वोट शेयर में कोई बदलाव नहीं हुआ। वह 36 प्रतिशत पर बनी रही। वहीं कांग्रेस 7 प्रतिशत ज्यादा 43 फीसदी वोट शेयर के साथ जीती। कई राजनीतिक विश्लेषकों ने ये जरूर कहा कि बीजेपी का ये वोट शेयर कर्नाटक के केवल दो क्षेत्रों पुराना मैसूर और बेंगलुरु से आया। जबकि 2018 के चुनावों में यह वोट शेयर कर जगह से था। दक्षिण कर्नाटक में बिना सीटें जीते जेडीएस के वोट शेयर में सेंधमारी की।

त्रिपुरा, नागालैंड और मेघालय में एनडीए सरकार
त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में बीजेपी गठबंधन को नुकसान जरूर हुआ लेकिन सत्ता उनके हाथ बनी रही। बीजेपी गठबंधन को इस चुनाव में 33 सीटें मिली, 2018 के मुकाबले यह 11 सीटें कम रही। तब अकेले बीजेपी को 36 सीटें मिली थीं और उसके सहयोगी दल आईपीएफटी को 8 सीटें मिली थीं। इसी तरह पिछली बार बीजेपी को 43 प्रतिशत से ज्यादा वोट मिले थे, इस बार उसे 39 प्रतिशत वोट मिले। इसी तरह नागालैंड और मेघायल में भी भाजपा गठबंधन सरकार बनाने में कामयाब रहा।