Author: Pravesh Rana

वसुंधरा का सबसे बड़ा इम्तेहान,वसुंधरा राजस्थान में राज करेंगी या फिर दिल्ली का रास्ता पकड़ेंगी ?

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राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग हो चुकी है। 74 फीसदी की बंपर वोटिंग भी यह संकेत दे रहे हैं कि राजस्थान में पांच साल बाद सरकार बदलने की परंपरा कायम रह सकती है। मतलब बीजेपी की राह आसान हो सकती है,,,चुनाव से पूर्व के सर्वेक्षणों में बीजेपी ने कांग्रेस पर बढ़त ली थी। सट्टा बाजार भी बीजेपी को 120 से ज्यादा सीटें देकर सरकार बदलने की संभावना को प्रबल बना रहा है। बीजेपी ने मिजाज भांपते हुए पहले ही कई नेताओं को विधानसभा चुनाव मैदान में उतारकर संकेत दिए हैं,, कि राजस्थान को दस साल बाद नया नेतृत्व मिल सकता है। सीएम की रेस में राज्यवर्धन सिंह राठौर, दीया और गजेंद्र सिंह शेखावत का नाम आगे है। सूत्र बताते हैं कि बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व लोकसभा चुनावों से पहले नया चेहरे पर दांव लगाने के मूड में है। चुनाव से पहले राजकुमारी दीया कुमारी को नरेंद्र मोदी ने चुनाव प्रचार के दौरान तवज्जो देकर बता दिया था कि राजस्थान में पार्टी ने वसुंधरा राजे की काट ढूंढ ली है।

 क्या नए चेहरों को मौका देकर वसुंधरा को साफ़ -साफ़ संदेश देने की कोशिश की गयी है ?

तो आपको बता दें कि 2002 में भैरों सिंह शेखावत के उपराष्ट्रपति बनने के बाद राजस्थान की कमान वसुंधरा राजे को सौंपी गई। तब बीजेपी के पुराने नेताओं को यह बदलाव रास नहीं आया। पार्टी के बड़े नेता गुलाबचंद कटारिया ने राजे का विरोध किया। हालांकि तत्कालीन केंद्रीय नेतृत्व के आशीर्वाद से वसुंधरा राजे 2003 में मुख्यमंत्री बनीं। अपने कार्यकाल में वसुंधरा महिलाओं में काफी लोकप्रिय रहीं, मगर गुटबाजी बनी रही। 2013 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने बड़ी जीत हासिल की। मोदी लहर का आगाज हो चुका था। पार्टी को 163 सीटें मिलीं और कांग्रेस सिर्फ 21 विधानसभा सीटों पर सिमट गईं। वसुंधरा दोबारा मुख्यमंत्री बनी। इसके बाद से ही वसुंधरा के नेतृत्व पर सवाल उठने शुरु हो गए। 2023 विधानसभा चुनाव से पहले नरेंद्र मोदी ने राजस्थान में गुटबाजी खत्म करने के लिए बड़ी कवायद की। गुलाबचंद कटारिया को असम का राज्यपाल बना दिया गया और राजस्थान में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चुनाव लड़ने का फैसला किया गया। जनता को नए चेहरे का संदेश देने के लिए ही सांसद राज्यवर्धन राठौड़, बाबा बालक नाथ, किरोड़ी लाल मीना, भागीरथ चौधरी और देवजी पटेल को पार्टी ने विधानसभा चुनाव में उतार दिया।

 

 वसुंधरा राजे से नरेंद्र मोदी क्यों नाराज चल रहे हैं ?

दरअसल वसुंधरा राजे और नरेंद्र मोदी के बीच दूरियां 2013 के विधानसभा चुनाव के दौरान ही बढ़ने लगी थी। 2013 के विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत के बाद जीत का सेहरा समर्थकों ने वसुंधरा को पहना दिया, जबकि उस चुनाव में नरेंद्र मोदी के जादू चला था। मध्यप्रदेश समेत अन्य राज्यों के नेता जीत का श्रेय नरेंद्र मोदी को दे रहे थे। 2014 में वसुंधरा राजे ने फिर चूक कर दी। लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने राजस्थान की सभी 25 लोकसभा सीटें जीत लीं। मोदी लहर में बड़ी जीत के मायने निकाले गए, तब वसुंधरा राजे ने इसका श्रेय सामूहिक नेतृत्व को दिया। उन्होंने नरेंद्र मोदी को जीत का श्रेय देने से परहेज किया। बताया जाता है कि 2014 में नरेंद्र मोदी जब मंत्रिमंडल का गठन कर रहे थे, तब वसुंधरा राजे ने उन्हें अपने समर्थकों के नाम भेजे। तब उन्होंने नरेंद्र मोदी पर अपने समर्थकों को केंद्र में मंत्री बनाने का दबाव बनाया। बात तब बिगड़ गई जब वसुंधरा शपथ ग्रहण समारोह में नहीं पहुंची और दिल्ली के बीकानेर हाउस में बैठी रहीं। इसके बाद से दोनों नेताओं में अनबन शुरू हो गई। इसके बावजूद अड़ो और लड़ो पर कायम रहने वाली वसुंधरा अपने जनाधार के कारण राजस्थान में प्रासंगिक बनी रहीं।

 

 

 बीजेपी राजस्थान में नया नेतृत्व क्यों चाह रही है ?

इस पर एक रणनीति बीजेपी की तरफ से दिखाई देती है,,,, पार्टी न सिर्फ राजस्थान में बल्कि पूरे देश के कई राज्यों में एक नये नेतृत्व को खड़ा करना चाहती है, जो अगले 25 साल तक लीड कर सकें। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद बीजेपी को राज्यों में ताकतवर नेतृत्व की जरूरत होगी, इसलिए युवा नेताओं में संभावना टटोली जा रही हैं। भैरों सिंह शेखावत भी 76 साल की उम्र में राजस्थान की जिम्मेदारी युवा नेताओं को सौंप दी थी। जब वसुंधरा राजे ने कमान संभाली थी, तब वह करीब 51 साल की थी। अब वह 71 वर्ष की हैं और राजस्थान में युवा नेतृत्व को कमान सौंपने की बारी फिर आ गई है। दीया कुमारी और राज्यवर्धन सिंह राठौड़ युवा चेहरे हैं, जिनमें भविष्य की संभावनाएं दिख रही हैं। बताया जा रहा है कि आरएसएस भी बीजेपी में युवा चेहरों को आगे लाने के पक्ष में है। सवाल यह है कि अगर 3 दिसंबर के बाद राजस्थान में सरकार बदलती है तो वसुंधरा राजे को क्या रोल मिलेगा ? सबसे बड़ा सवाल कि पूर्व मुख्यमंत्री रह चुकीं वसुंधरा के सहयोग के बिना राजस्थान में सरकार कैसे चलेगी? क्योकि राजस्थान बीजेपी में वसुंधरा समर्थकों की संख्या काफी है,,,जो किसी भी तरह का विवाद होने की स्तिथि में बीजेपी हाईकमान को असहज कर सकते हैं,,, चर्चा ये भी है कि वसुंधरा को संगठन में बड़ी जिम्मेदारी देकर संतुष्ट किया जाएगा और 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद उनकी केंद्र की राजनीति में एंट्री हो सकती है।लेकिन सबसे अहम सवाल क्या वसुंधरा इस सब के लिए तैयार होगी,,क्योकि वो पहले भी साफ़ कह चुकी है कि वो राजस्थान से कहीं नहीं जा रही,,,मतलब साफ़ है कि बीजेपी हाईकमान के लिए वसुंधरा को राजस्थान से अलग करना काफी मुश्किल और चुनौती पूर्ण भी हो सकता है,,,मतलब राजस्थान में बीजेपी की जीत की स्तिथि के बाद वसुंधरा का सबसे बड़ा इम्तेहान होना लगभग तय है,,,,,अब जल्द ही वक्त बताएगा कि वसुंधरा राजस्थान में राज करेंगी या फिर दिल्ली का रास्ता पकड़ेंगी ?

क्या 2024 चुनाव के बाद मोदी होंगे रिटायर, 70 पार के उम्मीदवारों को जगह देकर क्या संदेश देने की कोशिश कर रही BJP !

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क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बढ़ती हुई उम्र उनके और उनकी कुर्सी के बीच में आ रही है क्या बढ़ती उम्र में रिटायरमेंट लेकर घर बैठने का पीएम मोदी का दिया फार्मूला अब उन्हीं के गले की फांस बन गया है. और इसलिए क्या मोदी आगे के लिए अपना रास्ता साफ कर रहे हैं, यह सवाल उठने शुरू हुए मध्य प्रदेश चुनाव में बीजेपी प्रत्याशियों की सूची सामने आने के बाद क्योंकि इस सूची में करीब 15 ऐसे लोगों को टिकट दिया गया है जिनकी उम्र 70 साल से ज्यादा है बल्कि ये भी कहा जा सकता है कि थोड़ी बहुत नहीं बहुत ज्यादा है, क्योंकि ये सूची बता रही है कि भाजपा अपने ही संकल्प से पीछे हट रही है इसलिए ही सूची कई सवाल खड़े कर रही है और सबसे ज्यादा सवाल उठ रहे हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर, लोग कह रहे हैं कि कहीं इस बदलाव की बढ़ती वजह पीएम मोदी  की बढ़ती हुई उम्र तो नहीं,,  वो 73 के हो चुके हैं और जब अगला लोकसभा चुनाव लड़ेंगे तब तक 74 के हो जाएंगे मतलब उन्हीं के जन्म प्रमाण पत्र के हिसाब से मोदी अगर 2024 में जीते भी 5 साल के शासन के अंत में 80 साल के हो चुके होंगे,, इस उम्र का आदमी भारत जैसे बड़े देश को चलाने के लिए शारीरिक और मानसिक तौर पर कितना फिट होता है यह सवाल संघ, भाजपा और देश की जनता के सामने है.  क्योंकि ये तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही बता चुके थे कि इतनी ज्यादा उम्र राजनीति के लिए सही नहीं होती.

 

इस सवाल के बाद दो और सवाल खड़े होते हैं,, की क्या ये बदलाव मोदी के लिए खुशी से किया जा रहा है,, सहमति से किया जा रहा है,, या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यह बदलाव खुद करवा रहे हैं यानी कि दबाव में करवाया जा रहा है.. अब पहले यह जान लेते हैं की सूची पर सवाल क्यों खड़े हो रहे हैं,, मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव चल रहे हैं और भाजपा राज्य में जीतने के लिए सभी तरीके अपना रही है लेकिन पार्टी के प्रत्याशियों की सूची शुरुआत से ही वादों में घिरी हुई है पहले तो सूची सामने आने के बाद बीजेपी की अंतर्कलह खुलकर सामने आ गई खुद अमित शाह को नाराज नेताओं को मनाने के लिए मध्य प्रदेश में आना पड़ा,, ऐसे में अब पार्टी अपने प्रत्याशियों की उम्र को लेकर सवालों में घिर गई है.

दरअसल पार्टी ने तीन केंद्रीय मंत्रियों और एक महासचिव समेत 7 सांसदों को मैदान में उतारा है,, बीजेपी ने इस बार 70 से ज्यादा उम्र के 14 उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है जिनमें सबसे उम्र दराज 80 साल है,, इसके बाद से हर तरफ से इसी सूची की चर्चाएं हैं. सवाल उठ रहे हैं कि आखिर भाजपा अपने ही संकल्प से पीछे क्यों हट रही है,, क्या यह पार्टी की मजबूरी है या उसकी जरूरत,, सवाल उठने की सबसे बड़ी वजह पार्टी का अपना ही संकल्प है. दरअसल पार्टी ने तय किया था कि 70 से ज्यादा उम्र के होने पर नेता सक्रिय राजनीति से हटकर नई पीढ़ी को आगे बढ़ाएंगे, इस से युवाओं को मौका मिलेगा जिससे नई सोच, नए विचारों के साथ पार्टी आगे बढ़ेगी लेकिन अब जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव नजदीक आ रहा है पार्टी तो उलटी गंगा बहा रही है. देखने को मिल रहा है कि पार्टी उन्ही पुराने चेहरों पर दाव लगा रही है.

 

इसको लेकर तमाम तरह के कयास लग रहे हैं लेकिन ज्यादातर लोगों का मानना है कि यह सब मोदी की वजह से हो रहा है इसे ऐसे समझिए कि पार्टी ने कह तो दिया था कि 70 से ऊपर के लोगों को टिकट नहीं दिया जाएगा लेकिन मोदी की ही उम्र अब 73 हो चुकी है उस हिसाब से अब 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें टिकट नहीं मिलना चाहिए, लेकिन मोदी तो तीसरे टर्म का सपना सजा रहे हैं बाकायदा लाल किले से उन्होंने इसका ऐलान किया था ऐसे में अगर बढ़ती उम्र की वजह से उन्हें टिकट ही नहीं मिलेगा तो उनका सपना कैसे पूरा होगा. यही वजह है कि पार्टी अभी से मोदी का रास्ता क्लियर करने में लग गई है या ये भी कह सकते हैं कि पीएम मोदी खुद ही ऐसा करवा रहे हैं,, हालांकि इसके कयास तभी से लगने लगे थे जब कर्नाटक चुनाव में येदियुरप्पा को भाजपा ने अपना पोस्टर बॉय बनाया था जबकि उनकी उम्र 80 साल थी मजाक की बात तो यह है कि उन्हें सीएम की कुर्सी से हटाया गया था बढ़ती उम्र का हवाला देकर. लेकिन जैसे ही चुनाव आए और कर्नाटक में बिना येदुरप्पा के नाव डूबती दिखाई दी तो भाजपा ने उन्हें माथे पर बैठा लिया हालांकि तब तक बहुत देर हो चुकी थी और कांग्रेस ने भाजपा के छक्के छुड़ा दिए लेकिन अब तो बीजेपी 70 पार को आउट करने के खुद मोदी के ही संकल्प से पीछे हटती हुई नजर आ रही है.

इस पर राजनीति के जानकारों के कान खड़े हो गए हैं क्योंकि भाजपा ने केवल कुछ विधायकों की जीत के लिए मोदी का बनाया हुआ संकल्प नहीं तोड़ा है खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बढ़ती हुई उम्र के उठने वाले सवालों को किनारे करने के लिए तोड़ा है क्योंकि यदुरप्पा से पहले भी ऐसे कई नाम है जिन्हे पार्टी ने उम्र का हवाला देकर भाजपा की सक्रिय राजनीति से आउट कर दिया था. लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी इसका सबसे बड़ा उदाहरण है.  2014 के बाद पार्टी बार-बार यह संदेश देती रही कि वो किसी  विरासत,, परंपरागत राजनीति और तौर तरीकों को ढोने की बजाय लगातार बदलाव,, युवाओं और नए चेहरों को वरीयता देने में विश्वास रखती है, और इसी के तहत पार्टी ने पहले अपने राष्ट्र कार्यकारिणी से अपने मुखर राज्यसभा सदस्य सुब्रमण्यम स्वामी और सख्त तेवर वाली नेता मेनका गांधी और राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले विनय कटिहार को बाहर कर दिया,  इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में उम्र का ख्याल रखा गया पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी को मार्गदर्शक मंडल में बैठा दिया उनके मंत्रिमंडल के कई चेहरों को 75 साल के होने की वजह से अपना पद खोना पड़ा,  कलराज मिश्रा के अलावा कई मंत्रियों को इस्तीफा देना पड़ा.

दूसरा बड़ा उदाहरण 2019 में टिकट बंटवारे का था, वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और डॉ मुरली मनोहर जोशी को भी टिकट नहीं मिला.. पार्टी ने वजह बताई थी कि जब पुराने लोग अपनी सीट छोड़ेंगे नहीं तो युवाओं को कैसे मौका मिलेगा लेकिन मध्य प्रदेश के लिए प्रत्याशियों की लिस्ट आने के बाद लोग तंज कस रहे हैं कि मोदी है तो मुमकिन है. पीएम मोदी के लिए अपने ही बनाए नियमों और संकल्पों का कोई मतलब नहीं है.

2024 आने से पहले ही फिल्डिंग शुरू हो गयी है, जिससे जब 2024 में मोदी को टिकट मिले तो कोई बीजेपी नेता और विपक्ष के नेता उंगली ना उठा सके. हालांकि कुछ लोगों का मानना है कि कर्नाटक चुनाव में हार के बाद से पार्टी ने थोड़ा सबक लिया है कर्नाटक में उसने पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार जिनकी उम्र 67 और पूर्व उपमुख्यमंत्री केसी सुरप्पा जिनकी उम्र 74 थी उन जैसे दिग्गज और पुराने नेताओं के बजाय युवा उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी थी इससे पार्टी को नुकसान हुआ,, इसलिए पुराने चेहरों पर दाव लगाना पार्टी की मजबूरी भी है लेकिन कुछ लोगों का कहना है कि क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी कुर्सी,, अपनी जगह छोड़ना नहीं चाहते इसलिए अभी से माहौल बनना शुरू हो गया है. खैर जो भी हो पार्टी को इससे फायदा होगा या नहीं ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा लेकिन इस लिस्ट ने बीजेपी की चारों तरफ फजीहत जरुर करवा दी है की ये पार्टी सिर्फ बड़ी-बड़ी बातें और दावे करना जानती हैं उस पर टिकना नहीं जानती.

world cup 2023: वो जादूगर जिसने टीम इंडिया के खिलाड़ियों को बना दिया स्पाइडरमैन.

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J&k: जम्मू-कश्मीर में भयानक हादसा, 36 लोगों की मौत, 19 लोग बुरी तरह घायल.

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डोडा में एक बस अनियंत्रित होकर करीब 300 फीट गहरी खाई में जा गिरी है। इस हादसे में 36 लोगों मौत हो गई है जबकि 19 लोग घायल हुए हैं। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घटना पर शोक जताया है।

श्रीनगर- जम्मू संभाग के जिला डोडा में बड़ा सड़क हादसा हो गया है। जिले के अस्सर में एक बस अनियंत्रित होकर करीब 300 फीट गहरी खाई में जा गिरी। बस किश्तवाड़ से जम्मू की ओर जा रही थी। हादसे में 36 लोगों की मौत हो गई है जबकि 19 लोग घायल हो गए हैं। सभी घायलों को किश्तवाड और डोडा के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। गंभीर रूप से घायलों को एयरलिफ्ट कर जम्मू भेजा गया है।

ओवरटेक के चलते हुआ हादसा-

पुलिस ने बताया कि शुरुआती जानकारी में पता चला है कि इस मार्ग पर तीन बसें एक साथ चल रही थी और एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ में यह बड़ा हादसा हो गया। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने हादसे पर दुख जताया-

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने हादसे पर शोक जताया। उन्होंने कहा कि इस घटना से बेहद दुखी हूं। पीड़ित परिवारों के प्रति मेरी संवेदना है। घायलों के जल्दी ठीक होने की कामना करता हूं। बता दें कि उपराज्यपाल ने सभी घायलों को तुरंत मदद पहुंचाने का निर्देश दिया है।

गृहमंत्री अमित शाह ने भी जताया दुख-

गृहमंत्री शाह ने भी हादसे पर दुःख जताया है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के डोडा में सड़क हादसे की घटना जानकर बहुत दुख हुआ। स्थानीय प्रशासन उस खाई में बचाव अभियान चला रहा है जहां बस हादसे का शिकार हुई है। उन्होंने कहा कि मृतकों के परिवारों के प्रति मेरी संवेदना है और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं।

विधानसभा में ये क्या बोल गए CM नीतीश कुमार, मुंह दबाकर हंसने लगे पुरुष विधायक; झेंप गईं महिलाएं

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Nitish Kumar Viral Statement- बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को विधानसभा में जाति आधारित गणना की रिपोर्ट पेश की। जब जाति आधारित गणना पर चर्चा चल रही थी तो सीएम नीतीश कुमार ने ऐसा बयान दे दिया, जिसे सुन हर कोई हैरान है। इस दौरान उन्होंने प्रजनन दर पर भी चर्चा की। चर्चा के दौरान सीएम नीतीश कुमार ने पति-पत्नी के बीच बनने वाले शारीरिक संबंधों पर टिप्पणी की। उनके बयान सुन पूरे सदन का माहौल एकाएक बदल गया। पुरुष विधायक हंसने लगे तो महिलाएं झेंप गईं।

सदन में बोलते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि सब लोग ठीक से समझ लीजिए। यहां जो पत्रकार लोग बैठे हैं, वो लोग भी समझ लें। दरअसल, नीतीश कुमार ने प्रजनन दर पर चर्चा करते हुए हाथों से कुछ इशारे किए और कहा, “हम चाहते हैं लड़की पढ़ाई करे। जब शादी होगा लड़का-लड़की में, तो जो पुरुष है वो तो रोज रात में करता है ना… तो उसी में और (बच्चा) पैदा हो जाता है। और लड़की पढ़ लेती है तो उसको मालूम रहेगा कि ऊ (पति) करेगा ठीक है, लेकिन अंतिम में भीतर मत घुसाओ, उसको बाहर कर दो। उसी वजह से संख्या घट रही है।
पूरे सदन में इस बयान के दौरान अजीब स्थिति देखने को मिली. नीतीश कुमार जब जनसंख्या नियंत्रण पर ज्ञान दे रहे थे, उस वक्त उनके पीछे बैठे मंत्री और विधायक मुस्कुरा रहे थे। हालांकि जब उन्हें लगा कि नीतीश कुमार कंट्रोल खो दिए हैं, तो वो झेंप गए। जिस वक्त नीतीश कुमार सदन में बोल रहे थे, उस वक्त महिला विधायक भी मौजूद थीं।
अपने संबोधन में नीतीश ने कहा कि 2011 की जनगणना की तुलना में साक्षरता दर 61 फीसदी से बढ़कर 79 फीसदी से ऊपर हो गई है.महिला शिक्षा की स्थिति में बहुत सुधार हुआ है. मैट्रिक पास संख्या 24 लाख से बढ़कर 55 लाख से ऊपर है. इंटर पास महिलाओं की संख्या पहले 12 लाख 55 हजार थी. अब 42 लाख से ऊपर है. ग्रैजुएट महिलाओं की संख्या 4 लाख 35 हजार से बढ़कर 34 लाख के पार हो गई है.
 
बीजेपी विधायकों ने सीएम को घेरा
नीतीश के बयान पर विधायकों की प्रतिक्रियाएं भी आ रही हैं. पूरे सदन में इस बयान के दौरान अजीब स्थिति देखने को मिली. महिला विधायक इसपर नाराज दिखीं. वहीं कुछ अन्य विधायक हंस रहे थे. नीतीश के बयान पर विधायकों की प्रतिक्रियाएं भी आ रही हैं. बीजेपी नेता तारकिशोर प्रसाद ने कहा कि इस बात को सीएम और अच्छे तरीके से कह सकते थे. वहीं बीजेपी विधायक निक्की हेम्ब्रम ने कहा कि इस बात को सीएम मर्यादित तरीके से कह सकते थे. महिलाओं के प्रति उनके मन में सम्मान नजर नहीं आया.

MP Election 2023: मध्य प्रदेश चुनाव से पहले वीडियो ने बढ़ाया पारा, MP की राजनीति में बवाल; BJP ने बताया साजिश.

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Chardham Yatra 2023: तय हुई तिथि और मुहूर्त, जानिए कब होंगे चारो धामों के कपाट बंद.

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दशहरा के पावन पर्व पर विश्व प्रसिद्ध यमुनोत्री और बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने की तिथि व मुहूर्त तय किया गया। मंगलवार को मां यमुना के शीतकालीन प्रवास खरशाली गांव स्थित मंदिर परिसर में पुरोहित समाज की बैठक में मुहूर्त निकाला गया। यमुनोत्री धाम के कपाट 15 नवंबर बुधवार को भाई दूज के पावन पर्व पर 11 बजकर 57 मिनट पर अभिजीत मुहूर्त(मकर लग्न) में विशेष पूजा अर्चना के बाद छह माह के लिए बंद किए जाएंगे।

आपको बता दें कि गंगोत्री धाम के कपाट बंद होने की तिथि व मुहूर्त शारदीय नवरात्र के पहले दिन तय किया गया था। गंगोत्री धाम के कपाट शीतकाल के लिए 14 नवंबर को अन्नकूट के पावन पर्व पर अभिजीत मुहूर्त की शुभ बेला पर 11 बजकर 45 मिनट पर बंद किए जाएंगे।

इस दिन बंद होंगे बदरीनाथ धाम के कपाट –

बदरीनाथ धाम के कपाट बंद करने के शुभ मुहूर्त की घोषणा भी आज की गई। धाम के कपाट 18 नवंबर शाम तीन बजकर 33 मिनट पर शीतकाल के लिए बंद होंगे। जबकि 15 नवंबर को भैया दूज के दिन केदारनाथ धाम और यमुनोत्री धाम के कपाट बंद होंगे।

विजयदशमी के पर्व पर यानी आज मंगलवार को द्वितीय केदार भगवान मदमहेश्वर और तुंगनाथ मंदिर के कपाट बंद होने की तिथि घोषित की गई। मदमहेश्वर मंदिर के कपाट 22 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे। शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में बैठक कर मुहुर्त निकाला गया।

परंपरानुसार, सुबह आठ बजे से ओंकारेश्वर मंदिर में द्वितीय केदार की विशेष पूजा-अर्चना शुरू की गई। आराध्य का शृंगार, अभिषेक व भोग के साथ ही विद्वान आचार्यगणों पंचांग गणना कर शीतकाल के लिए कपाट बंद करने की तिथि व समय तय किया।

इस दिन बंद होंगे तुंगनाथ मंदिर के कपाट-

वहीं, आज ही तुंगनाथ के कपाट बंद करने की तिथि घोषित की गई। तुंगनाथ मंदिर के कपाट आगामी एक नवंबर को बंद होंगे। तुंगनाथ के शीतकालीन गद्दीस्थल मर्कटेश्वर मंदिर में भी सुबह आठ बजे से विशेष पूजा-अर्चना शुरू हुई थी। इस वर्ष मंदिर में आराध्य के दर्शनों को अभी तक रिकॉर्ड श्रद्धालु पहुंचे हैं।

Rajasthan Election: BJP ने राजस्थान में आज अपने 83 उम्मीदवारों की सूची की जारी, वसुंधरा पांचवीं बार झालरापाटन से मैदान में.

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अब राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने भी 83 उम्मीदवारों की सूची आज जारी कर दी है. एक दिन पहले ही दिल्ली में भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक हुई थी, जिसमें इन नामों पर अंतिम मुहर लगी थी। पहली सूची में भाजपा ने 41 उम्मीदवार घोषित किए थे। भाजपा अब तक 124 नामों का ऐलान कर चुकी है, जबकि 76 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा होना बाकी है।

यहां से लड़ेंगी वसुंधरा चुनाव-

चुनाव की सरगर्मी जब से शुरू हुई, तब से सबसे बड़ा सवाल यही था कि पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की क्या भूमिका होगी और क्या वे विधानसभा चुनाव लड़ेंगी? भाजपा की दूसरी सूची में सबसे बड़ा नाम वसुंधरा राजे का ही है। वे झालावाड़ की झालरापाटन विधानसभा सीट से पांचवीं बार चुनाव लड़ेंगी।

 

पूनिया को आमेर से टिकट-

नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ की सीट बदल दी गई है। वे इस बार चूरू जिले की तारानगर से चुनाव लड़ेंगे। पिछली बार वे चुरू से जीते थे। चुरू से उनकी जगह हरलाल सहारण को टिकट दिया गया है। आमेर से भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया को टिकट दिया गया है।

 

राजवी की सीट बदली, कांग्रेस से आईं ज्योति मिर्धा नागौर से उम्मीदवार-

कांग्रेस से भाजपा में आईं पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा को नागौर से उम्मीदवार बनाया गया है।  पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोसिंह शेखावत के दामाद नरपत सिंह राजवी को चित्तौड़गढ़ से उम्मीदवार बनाया गया है। वे पिछली बार जयपुर की विद्याधर नगर सीट से चुनाव लड़े थे, जहां से इस बार भाजपा ने सांसद और जयपुर के पूर्व शाही घराने से ताल्लुक रखने वाली दीया कुमारी को टिकट दिया है। राजसमंद से दीप्ति माहेश्वरी को टिकट दिया गया है। वे दिवंगत भाजपा नेता रहीं किरण माहेश्वरी की बेटी हैं। यहां हुए उपचुनाव में दीप्ति ही निर्वाचित हुई थीं।

पूर्व राजघराने से जुड़े मेवाड़ और सिद्धि कुमारी यहां से लड़ेंगे चुनाव-

नाथरद्वारा से कुंवर विश्वराज सिंह मेवाड़ को टिकट दिया गया है। मेवाड़ के पूर्व शाही घराने से ताल्लुक रखने वाली विश्वराज कुछ दिन पहले भाजपा में शामिल हुए थे। यहां से विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी कांग्रेस के मौजूदा विधायक हैं। कांग्रेस ने दोबारा जोशी को ही यहां से मैदान में उतारा है। बीकानेर के पूर्व राजघराने से संबंध रखने वाली सिद्धि कुमारी को बीकानेर पूर्व से फिर से चुनाव लड़ेंगी। पिछली बार वे इस सीट से जीती थीं।

वसुंधरा के इन समर्थकों को भी मिला टिकट-

वसुंधरा के समर्थकों को भी भाजपा की दूसरी सूची में मौका मिला है। प्रताप सिंह सिंघवी को छाबड़ा सीट से फिर से टिकट मिला है। वे यहीं से मौजूदा विधायक हैं। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कालीचरण सराफ को भी मालवीय नगर से फिर से टिकट मिला है।

 

 

Chardham Yatra: धीरे-धीरे कम होने लगी केदारनाथ यात्रा की रफ्तार, जानिए अब तक कितनों ने किए दर्शन.

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2023 में 25 अप्रैल से शुरू हुई केदारनाथ यात्रा में इस वर्ष अभी तक 17 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं, बीते दिनों केदारनाथ धाम में हुई बर्फबारी से ठंड बढ़ने से यात्रा की रफ्तार भी कम हो गई है।

बीते दिनों हुई बारिश और बर्फबारी के चलते केदारनाथ यात्रा की रफ्तार थमने लगी है। एक सप्ताह से धाम में प्रतिदिन दर्शनार्थियों की संख्या में कमी दर्ज की जा रही है। वहीं, केदारघाटी में होटल, रेस्टोरेंट और लॉज को भी गिनती की बुकिंग मिल रही है।

25 अप्रैल से शुरू हुई केदारनाथ यात्रा में इस वर्ष अभी तक 17 लाख 30 हजार से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं, लेकिन बीते दिनों केदारनाथ में हुई बर्फबारी से ठंड बढ़ने से यात्रा की रफ्तार भी थम गई है। सोनप्रयाग से केदारनाथ जाने वाले यात्रियों की संख्या घटने के साथ ही दर्शनार्थियों की संख्या भी प्रतिदिन घटने लगी है।

पांच दिनों में धाम में जहां 15 अक्तूबर को धाम में 10,546 श्रद्धालु पहुंचे थे, वहीं बीती 17-18 अक्तूबर को 7,365 और 7,905 शिव भक्तों ने बाबा केदार के दर्शन किए। इधर, श्रीकेदार धाम होटल एसोसिएशन के सचिव नितिन जमलोकी का कहना है कि यात्रा के पहले चरण की तरह दूसरे चरण में भी होटल, रेस्टोरेंट और लॉज संचालकों को सीमित बुकिंग मिली हैं। दूसरे चरण में भी गिनती की बुकिंग मिली है।

Rajasthan Election: कांग्रेस की उम्मीदवारों की पहली सूची हुई जारी, जानिए कौन कहां से लड़ेंगे चुनाव.

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Rajasthan Election 2023- राजस्थान में अब लंबे समय के इंतजार के बाद आखिरकार कांग्रेस प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर दी गई। इस पहली लिस्ट में पार्टी ने 33 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया है। कांग्रेस की पहली सूची में अशोक गहलोत के साथ ही सचिन पायलट, दिव्या मदेरणा, गोविंद सिंह डोटासरा, डॉ. अर्चना शर्मा, ममता भूपेश के साथ ही अशोक चांदना का नाम भी शामिल है।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सरदारपुरा से चुनाव लड़ेंगे। वहीं, सचिन पायलट टोंक से, ममता भूपेश सिकराय से, दिव्या मदेरणा ओसियां से चुनाव मैदान में उतारी गई हैं। पहली सूची में सीपी जोशी का नाम भी शामिल है, जिनके नाम को लेकर आशंकाएं जताई जा रही थी।

2020 में बागी विधायकों को भी टिकट-


2020 में सचिन पायलट के साथ बगावत करने वाले कई विधायकों को भी कांग्रेस की पहली सूची में टिकट मिला है।  विराटनगर सीट इंद्राज गुर्जर को फिर से टिकट मिल गया है। इसी तरह लाडनू सीट से मुकेश भाकर फिर से टिकट पाने में सफल रहे हैं। वहीं, वल्लभनगर से विधायक गजेंद्र सिंह शक्तावत का टिकट जरूर कट गया है, लेकिन उनकी जगह उनकी पत्नी प्रीति को टिकट दिया गया है। इसी तरह परबतसर से विधायक रामनिवास गावड़िया भी फिर से टिकट पा गए हैं।

 

पायलट को चुनौती देने वाले को भी टिकट-


सचिन पायलट का साथ देने वालों को टिकट मिला है, साथ ही उनको चुनौती देने वाले अशोक चांदना को भी पार्टी ने टिकट दिया है। राजस्थान के सियासी हलके में अक्सर कहा जाता है कि सचिन पायलट के सामने गुर्जर नेता के रूप में अशोक गहलोत चांदना को आगे बढ़ाते रहे हैं। पायलट और चांदना के बीच 2022 में तल्खी तब सामने आई थी जब पुष्कर में कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला के अस्थि विसर्जन कार्यक्रम में खेल राज्य मंत्री अशोक चांदना पर जूते-चप्पल फेंकने की घटना हुई थी। तब चंदाना ने ट्वीट कर पायलट को खुली चुनौती दी थी। चांदाना ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा ” मुझ पर जूता फेंकवाकर सचिन पायलट यदि मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं तो जल्दी से बन जाए, क्योंकि आज मेरा लड़ने का मन नहीं है। जिस दिन मैं लड़ने पर आ गया तो फिर एक ही बचेगा और यह मैं चाहता नहीं हूं।”

CM गहलोत ने दौसा में किया प्रत्याशियों का एलान-


आज यानी शुक्रवार को प्रियंका गांधी की जनसभा में सीएम अशोक गहलोत ने इशारों ही इशारों में दौसा जिले की पांच विधानसभा के टिकट बांट दिए। जिनमें चार कांग्रेस के वर्तमान विधायकों और पांचवां टिकट महवा विधानसभा से निर्दलीय विधायक ओमप्रकाश हुडला को देने की बात कही। भाषण के आखिर में गहलोत ने कहा- आप लोग दौसा से हमारे ममता भूपेश, मुरारी मीणा, गजराज खटाना और मुरारी लाल मीणा को जिताकर भेजो।

जानिए, राजस्थान का चुनावी कार्यक्रम-


30 अक्टूबर को अधिसूचना जारी की जाएगी। छह नवंबर तक नामांकन किया जा सकता है। सात नवंबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी। नौ नवंबर नाम वापसी की आखिरी तारीख है। 25 नवंबर को मतदान होगा, जबकि नतीजे तीन दिसंबर को सामने आएंगे