मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को क्षेत्रीय संपर्क योजना (उड़ान योजना) के अंतर्गत पिथौरागढ़-मुनस्यारी-पिथौरागढ़ एवं हल्द्वानी-अल्मोड़ा-हल्द्वानी हवाई सेवाओं का मुख्यमंत्री आवास से वर्चुअल माध्यम से शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन हवाई सेवाओं के शुरू होने से राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों में आम नागरिकों का आवागमन सुगम होगा।
दूरस्थ क्षेत्रों में आम नागरिकों को सुगम परिवहन होगा उपलब्ध : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने कहा कि अल्मोड़ा और मुनस्यारी उत्तराखंड के प्राचीन नगर होने के साथ ही ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण शहर हैं। ये शहर प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक मंदिरों और समृद्ध संस्कृति के लिए देश और दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। हेली सेवा शुरू होने से अब पर्यटक अल्मोड़ा और मुनस्यारी तक और भी आसानी से पहुँच सकेंगे। इन सेवाओं से हल्द्वानी से अल्मोड़ा पहुँचने का समय 3 से 4 घंटे से घटकर महज़ कुछ मिनटों का रह जाएगा। हेली सेवाओं के प्रारंभ होने से दोनों क्षेत्रों में पर्यटन एवं आर्थिक विकास को गति मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उड़ान योजना जैसी दूरदर्शी योजना प्रारंभ की थी। इस योजना ने प्रदेश में हवाई संपर्क को मज़बूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जिसके अंतर्गत राज्य के कई हिस्सों में हवाई पट्टियों और हेलीपोर्ट्स का विकास किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में 18 हेलीपोर्ट्स से हेली सेवाओं के संचालन की दिशा में कार्य किया जा रहा है, जिनमें से अब तक 12 हेलीपोर्ट्स पर सेवाएँ सफलतापूर्वक प्रारंभ की जा चुकी हैं।
राज्य के अन्य क्षेत्रों को भी हेली सेवाओं से जोड़ा जाएगा
मुख्यमंत्री ने कहा कि हेली सेवाओं से अब तक गौचर, जोशियाड़ा, हल्द्वानी, मुनस्यारी, मसूरी, पिथौरागढ़, पंतनगर, चंपावत, बागेश्वर, नैनीताल और अल्मोड़ा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को जोड़ा जा चुका है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों को भी हेली सेवाओं से जोड़ा जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में हवाई संपर्क को सशक्त बनाने के साथ ही उत्तराखंड को वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख गंतव्य के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के विस्तार के लिए भी निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। जौलीग्रांट और पंतनगर एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय विमान सेवाओं के लिए विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।
गौरतलब है कि पिथौरागढ़ -मुनस्यारी -पिथौरागढ़ एवं हल्द्वानी-अल्मोड़ा-हल्द्वानी के लिए हेलीकॉप्टर सेवा सप्ताह में 7 दिन तथा प्रत्येक दिन दो बार संचालित होगी। पिथौरागढ़ से मुनस्यारी के लिए यह हेली सेवा सुबह 10:30 बजे एवं दोपहर 1:50 बजे चलेगी। वहीं मुनस्यारी से पिथौरागढ़ के लिए यह सेवा सुबह 10:50 बजे एवं दोपहर 2:10 बजे चलेगी।
हल्द्वानी से अल्मोड़ा के लिए हेली सेवा सुबह 11:50 बजे एवं दोपहर 3:10 बजे चलेगी। जबकि अल्मोड़ा से हल्द्वानी के लिए यह सेवा दोपहर 12:50 बजे एवं सायं 4:10 बजे चलेगी। इन हवाई सेवाओं का किराया ₹2500 है, जिसे यात्री https://airheritage.in/ के माध्यम से ऑनलाइन टिकट बुक कर सकते हैं।
कार्यक्रम में सचिव युकाडा सचिन कुर्वे, मुख्य कार्यकारी अधिकारी युकाडा आशीष चौहान एवं अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
उत्तराखण्ड सूचना आयोग ने विधानसभा सचिवालय में आरटीआई से जुड़े पत्रों के रखरखाव और कार्रवाई में गंभीर लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य सूचना आयुक्त राधा रतूड़ी ने निर्दलीय विधायक उमेश कुमार के दल बदल कानून के उल्लंघन से जुड़ी अपील (संख्या 42977/2025-26) की सुनवाई करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि विभागीय अपीलीय अधिकारी (उप सचिव, विधानसभा सचिवालय) एक माह के भीतर अपीलार्थी को पूर्ण सूचना उपलब्ध कराएं और प्रथम अपील का विधिवत निस्तारण करें।
मामला जन संघर्ष मोर्चा से जुड़े जयपाल सिंह की अपील से जुड़ा था। जिन्होंने निर्दलीय विधायक के दल बदल कानून के उल्लंघन सम्बन्धी याचिका पर विधानसभा सचिवालय से सूचना मांगी थी।
अपीलार्थी ने बताया कि उनका पत्र पंजीकृत डाक से भेजा गया था, लेकिन सचिवालय की ओर से दावा किया गया कि पत्र प्राप्त ही नहीं हुआ। आयोग ने इसे गंभीर व आपत्तिजनक मानते हुए कहा कि सचिवालय में आरटीआई आवेदनों और प्रथम अपीलों का समुचित रखरखाव नहीं हो रहा है।
मुख्य सूचना आयुक्त राधा रतूडी ने सचिव, विधानसभा सचिवालय को निर्देशित किया है कि प्रकरण की जांच करें और भविष्य में आरटीआई से संबंधित आवेदनों एवं प्रथम अपीलों के निस्तारण के लिए सुदृढ़ नियमावली तैयार कर संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश दें। साथ ही की गई कार्रवाई की सूचना आयोग को भी भेजी जाए।
स्पीकर की रहस्यमय चुप्पी- मोर्चा
जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने आरोप लगाया कि खानपुर विधायक उमेश कुमार के दल-बदल मामले में विधानसभाध्यक्ष ऋतु खंडूरी ने बचाव की भूमिका निभाई। इस प्रकरण का खुलासा मुख्य सूचना आयुक्त राधा रतूड़ी ने जन संघर्ष मोर्चा के जयपाल सिंह की अपील पर हुई सुनवाई के दौरान भी हुआ।
नेगी ने बताया कि ढाई से तीन वर्ष तक याचिका पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने पंजीकृत डाक से विधानसभा अध्यक्ष एवं सचिव को कार्रवाई हेतु पत्र भेजे, लेकिन विधानसभा सचिवालय ने मौखिक निर्देशों और दबाव में आकर पत्रों के सचिवालय तक न पहुंचने का हवाला दिया। यह दर्शाता है कि पूरा मामला दबाने की कोशिश की गई।
मुख्य सूचना आयुक्त ने सुनवाई में विधानसभा सचिवालय की लापरवाही को गंभीर मानते हुए उपसचिव और सचिव को समुचित जांच तथा अनुरोध पत्रों/अपीलों के निस्तारण के निर्देश दिए।
नेगी ने कहा कि हैरानी की बात है कि जिस विधायक पर ब्लैकमेलिंग, जालसाजी, यौन शोषण और संपत्ति हड़पने जैसे गंभीर आरोप हों, ऐसे विधायक का बचाव विधानसभाध्यक्ष क्यों कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले ने विधानसभाध्यक्ष की मिलीभगत की पोल खोल दी है।
गौरतलब है कि अप्रैल 2022 में खानपुर से निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ने नई पार्टी बनाने का ऐलान किया था। मई में विधानसभा में दल बदल कानून के उल्लंघन सम्बन्धी याचिका दाखिल की गई थी। लेकिन विधानसभा भर्ती घोटाले में तुरत फुरत 200 से अधिक तदर्थ कर्मियों को नौकरी से हटाने वालीं स्पीकर ऋतु खण्डूडी उमेश कुमार के मुद्दे पर कोई निर्णय नहीं ले पायीं।
तीन साल से अधिक समय बीतने के बाद भी विधायक उमेश कुमार की सदस्यता पर फैसला नहीं होने पर कई सवाल उठ रहे हैं।
पूर्व के सालों में भी विधानसभा स्पीकर दल बदल कानून के उल्लंघन के मामले में कई विधायकों से इस्तीफा के चुके हैं। लेकिन स्पीकर ऋतु खंडूड़ी किस दबाव में उमेश कुमार की विधायकी पर निर्णय नहीं ले पा रही है। यह भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
यहां यह भी अहम बात है कि बीते मई महीने में विस सचिवालय ने याचिकाकर्ता और विधायक को नोटिस जारी किया था। लेकिन उसके बाद क्या फैसला लिया गया। यह किसी को पता नहीं।
इधऱ, मोर्चा सदस्य जयपाल की आरटीआई पर मांगी गई सूचना पर भी विधानसभा सचिवालय ने कह दिया कि उन्हें यह पत्र मिला ही नहीं। जबकि पंजीकृत डाक से पत्र भेजा गया था।
इधऱ, जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष रघुनाथ नेगी ने कहा कि दल बदल कानून के उल्लंघन पर चुप्पी ओढ़ने वालीं स्पीकर ऋतु खंडूरी के इस्तीफे तक मोर्चा चुप बैठने वाला नहीं है।
स्पीकर नहीं लें समय पर फैसला तो लोकतंत्र को होगा नुकसान” – सुप्रीम कोर्ट
देश की सर्वोच्च अदालत ने विधायकों और सांसदों की अयोग्यता याचिकाओं में समय-बद्धता न बरतने वाले स्पीकरों की प्रक्रिया पर कड़ी नाराज़गी जताई है। जुलाई 2025 के इस आदेश से हलचल मच गई ।
चीफ जस्टिस बी.आर. गवई एवं जस्टिस ए.जी. मसीह की बेंच की तल्ख टिप्पणी और स्पीकर को तीन महीने में निर्णय लेने के आदेश के बाद हलचल मच गई
सुप्रीम कोर्ट ने ये तीखी टिप्पणी गुरुवार 31 जुलाई 2025 को की। सर्वोच्च न्यायालय ने तेलंगाना विधानसभा के स्पीकर को दस BRS विधायकों की अयोग्यता याचिकाओं का निर्णय तीन महीने के भीतर लेने का निर्देश देते हुए, गम्भीर विलंब और लोकतंत्र पर संभावित खतरों को लेकर स्पष्ट टिप्पणी कर सिस्टम को कठघरे में खड़ा कर दिया।
दल-बदल कानून के उल्लंघन का एक चर्चित मसला उत्तराखण्ड से भी जुड़ा है। इस मुद्दे पर स्पीकर ने तीन महीने ही नहीं बल्कि तीन साल से ज्यादा निकाल दिए। लेकिन कोई फैसला नहीं दिया।
हालिया बेरोजगार आंदोलन की अपार सफलता के बाद युवा शक्ति पूरे जोश में है। युवा शक्ति का रथ कोटद्वार की ओर मोड़ने की पूरी तैयारी हो चुकी है।आंदोलित युवा शक्ति ने पेपर लीक के मुद्दे पर प्रदेश सरकार से सीबीआई जांच समेत अन्य प्रमुख मांगे मनवाने के बाद आराम न करते हुए नयी जंग का ऐलान कर दिया। इस बार निशाने पर स्पीकर को लिया गया है।
बेरोजगार संघ के पूर्व अध्यक्ष बॉबी पंवार ने स्पीकर ऋतु खंडूड़ी को पत्र लिख कर खानपुर के निर्दलीय विधायक उमेश कुमार के दल बदल उल्लंघन से जुड़ी लंबित याचिका पर जल्द निर्णय लेने को कहा है।स्पीकर को सम्बोधित पत्र में बॉबी पंवार ने कहा की लोकतंत्र संविधान से चलता है। न कि व्यक्तिगत पसंद -नापसन्द से।बॉबी ने कहा कि तीन साल से अधिक समय बीतने के बाद भी स्पीकर ने इस मुद्दे पर कोई निर्णय नहीं लिया। उन्होंने कहा कि दल बदल कानून के उल्लंघन पर सुप्रीम कोर्ट की तल्खी के बाद भी स्पीकर ने संविधान के तहत कोई ठोस फैसला नहीं लिया।स्वाभिमान मोर्चा के अध्यक्ष बॉबी पंवार ने उमेश कुमार की सदस्यता पर चुप्पी साधे कांग्रेस के नेताओं को भी आड़े हाथ लिया।
उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा ने 30 सितंबर को विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी को लिखे पत्र में खानपुर विधायक उमेश कुमार की सदस्यता समाप्त करने की मांग की है। संगठन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल ही में विधानसभा अध्यक्षों पर दल बदल याचिकाओं को लंबित रखने को लेकर की गई तल्ख टिप्पणी के बावजूद, मई 2022 से दर्जनों याचिकाएं लंबित हैं और उन पर कोई निर्णय नहीं लिया गया।
मोर्चा ने पत्र में लिखा कि पूर्व अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने पुरोला विधायक राजकुमार, धनोल्टी विधायक प्रीतम पवार और भीमताल विधायक राम सिंह कैड़ा की सदस्यता समाप्त कर संवैधानिक परंपराओं का सम्मान किया था। जबकि वर्तमान अध्यक्ष की ओर से खानपुर मामले में कोई फैसला न लेना गलत संदेश देता है।
पत्र में कहा गया कि यदि किसी व्यक्तिगत कारण से निर्णय नहीं लिया जा रहा है तो विधानसभा अध्यक्ष को जनता के सामने स्पष्ट करना चाहिए। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि इस पर शीघ्र कार्यवाही नहीं हुई तो यह संविधान और लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत एक गलत उदाहरण बनेगा।
गौरतलब है कि मार्च 2022 में खानपुर से निर्दलीय विधायक का चुनाव जीतने के बाद उमेश कुमार ने एक नए दल में शामिल हो गए थे। इस कार्यक्रम की खूब खबरें छपी थी। मई 2022 में रविंद्र पनियाला समेत कई अन्य ने दल बदल कानून के उल्लंघन सम्बन्धी याचिका विधानसभा में पेश की थी।
लेकिन इतना लंबा समय बीतने के बाद स्पीकर ने नियमों के तहत कोई फैसला नहीं लिया। स्पीकर पर किसका दबाव है, राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी सरगर्म है।
दूसरी ओर, पूर्व सीएम हरीश रावत भी स्टिंग करने वाले उमेश कुमार पर अन्य मुद्दों पर तो आक्रमण करते हैं। लेकिन उनकी विधायक बेटी अनुपमा रावत ने कभी भी उमेश कुमार के दल बदल कानून के उल्लंघन पर कोई सवाल नहीं उठाया। अन्य बड़े कांग्रेस नेता भी मौन साधे हुए हैं।
कुछ दिन पूर्व, मुख्य सूचना आयुक्त राधा रतूडी ने भी विधानसभा सचिवालय को उमेश कुमार से जुड़े मसले पर पत्रावली के रख रखाव की सख्त हिदायत दी थी।
इधर, बॉबी पंवार ने इस मुद्दे पर लीड लेते हुए स्पीकर की विधानसभा कोटद्वार में युवा शक्ति रथ मोड़ने का ऐलान कर हड़कंप मचा दिया है। देखना यह है कि सुप्रीम कोर्ट की तल्खी व बॉबी पंवार की चेतावनी के बाद भी स्पीकर ऋतु खंडूड़ी लंबित फैसले को कितने दिन और टाले रखती है..
सेवा में,
श्रीमती ऋतू खंडूरी जी माननीय विधानसभा अध्यक्ष उत्तराखंड
विषय : सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी के बावजूद खानपुर विधानसभा की दलबदल याचिका विषयक।
माननीय अध्यक्ष विधानसभा
पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्षों द्वारा दल बदल याचिकाओं को जानबूझकर लटकाने को लेकर जो तल्ख टिप्पणी की गई उसके बाद उत्तराखंड के लोगों को यकीन था कि उत्तराखंड में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का सम्मान किया जाएगा।
मई 2022 आपके कार्यालय में खानपुर के विधायक उमेश कुमार के दल बदल करने और उनकी विधायकी समाप्त करने को लेकर जो दर्जनों याचिकाएं डाली गई इसके बावजूद आपने उपरोक्त विधायक की विधायकी समाप्त नहीं की। आपसे पहले विधानसभा अध्यक्ष रहे प्रेमचंद अग्रवाल के सम्मुख जब पुरोला के विधायक राजकुमार धनोल्टी के विधायक प्रीतम पवार और भीमताल के विधायक राम सिंह कैड़ा की इसी प्रकार दल बदल की याचिकायें आई तो प्रेमचंद अग्रवाल ने विधानसभा अध्यक्ष की पद की गरिमा रखते हुए तीनों विधायकी समाप्त कर कानून का पालन किया जिस कुर्सी पर आप बैठी है वह नियम कायदे कानून और परंपराओं के लिए जानी जाती है। इतने लंबे समय से आप द्वारा दल बदल की उस याचिका पर निर्णय न लेने से बहुत स्पष्ट संदेश जा रहा है कि आप उस कुर्सी से न्याय नहीं कर रही है जिस पर आप आसीन हैं।
अगर आपकी कोई व्यक्तिगत मजबूरी है तो उसे आपको कोटद्वार की जनता से लेकर यमकेश्वर के लोगों तक जरूर बताना चाहिए।। हमारा स्पष्ट मानना है यह देश संविधान से चलता है और सदन में नियम कायदे कानून और परंपराएं ही सदन को आगे बढ़ाते ती हैं हम यह भी जानते हैं कि जिन लोगों ने राम सिंह कैड़ा राजकुमार और प्रीतम पंवार की विधायकी समाप्त करने के लिए छाती पीठ कर शोर मचाया था वह आज मित्र विपक्ष के रूप में मलाई खा रहे हैं।
यह प्रदेश की जनता अपनी खुली नजर से देख रही है। उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा ने आपको इस बारे में पहले भी कई बार विभिन्न तरीके से अनुरोध किया कि आप दल बदल की इस स्पष्ट श्रेणी की याचिका पर निर्णय देकर खानपुर के विधायक उमेश कुमार की विधायकी को समाप्त करने का आदेश दें। ऐसा ना हो कि आपने बाद बनने वाले विधानसभा अध्यक्ष आपके द्वारा इन गलत निर्णय को आत्मसात करने को मजबूर हों ऐसा होना संविधान के खिलाफ होगा और नियम कायदे कानून और परंपराओं के विपरीत होगा
कृपया शीघ्र कार्यवाही कर दल बदल की इस गलत परंपरा को समाप्त करने की कृपा करें।
विधानसभा अध्यक्ष श्रीमती ऋतू खंडूरी जी उत्तराखंड का युवा सीबीआई जांच करवाने का दम रखता है ।
एक प्रदेश में दो प्रकार के कानून नहीं हो सकते हैं इसी प्रकार दलबदल के लिए भारत के संविधान में जो व्यवस्था दी है उसका उल्लंघन नहीं किया जा सकता। मई 2022 से दल बदल की जो याचिकाएं दबाई गई है सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद यदि बात समझ में ना आ रही हो तो युवा शक्ति का रथ बहुत जल्द कोटद्वार की ओर ही कूच करेगा।
उत्तराखंड में किसी को भी संविधान का उल्लंघन नहीं करने दिया जाएगा।
परीक्षाएं सही से नहीं करवा पाएंगे,,पेपर लीक होते रहेंगे,,नकल माफिया जेल से बाहर आते रहेंगे,,,और जब बेरोजगार अपनी आवाज उठाने के लिए इक्क्ठे होंगे,,,तो धारा 163 लगा देंगे,,,क्या अब सच में इस प्रदेश में युवाओं की सबसे बड़ी समस्या रोजगार से जुड़े इस अहम पहलू पर कोई ध्यान दे भी रहा है की नहीं ,,,,,,क्या इस प्रदेश में एक सख्त नकल विरोधी कानून के बाद भी नौकरियों की खरीद फरोख्त जारी है,,,,ताजा घटनाक्रम ने कई पुराने सवालों को एक बार फिर से ज़िंदा कर दिया है ,,,जो सवाल थोड़े से मद्दम हो चले थे,,एक बार फिर उठने शुरू हो गए हैं,,,आज के वीडियो में विस्तार से पुरे घटनाक्रम को आपको बताएंगे,,,पुलिस से लेकर आयोग और छात्रों के हर आरोप से आपको रु बरु करवाएंगे,,,साथ ही वो ऑडियो भी आपको दिखाएंगे जो इन उठते सारे सवालों की वजह बना है,,
उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की स्नातक स्तरीय परीक्षा एक बार फिर सवालों के घेरे में है,,,रविवार को परीक्षा शुरू होने के कुछ ही देर बाद पेपर लीक होने का दावा सामने आया, जिससे भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगे हैं ,,,मामला तब और गंभीर हो गया जब बेरोजगार संघ अध्यक्ष राम कंडवाल और सुरेश सिंह के साथ ही उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा के अध्यक्ष बॉबी पंवार सहित त्रिभुवन सिंह चौहान और मोहित डिमरी ने भी इस मुहीम को आगे बढ़ा दिया ,,,,,,उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा के अध्यक्ष और बेरोजगार संघ के पूर्व अध्यक्ष बॉबी पंवार ने दावा किया कि परीक्षा का पेपर शुरू होते ही बाहर आ गया था। पंवार ने वायरल स्क्रीनशॉट का हवाला देते हुए तत्काल जांच की मांग की। बेरोजगार संघ के प्रदेश अध्यक्ष राम कंडवाल ने कहा कि संघ ने पहले ही प्रशासन को पेपर लीक की आशंका जताई थी। उन्होंने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि इतनी सतर्कता के बावजूद पेपर बाहर आना सरकार और आयोग की नाकामी ही है। कंडवाल ने कहा कि हर बार पेपर लीक कैसे हो जाता है????/ सरकार और आयोग जवाब दें। मामला तब और गरमा गया जब इस मामले में पूछताछ के लिए उत्तराखंड पुलिस और हरिद्वार SOG ने बॉबी पंवार पर ही सवालों की बौछार कर दी ,, पंवार के सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पर उठाये आयोग के विरुद्ध सवालों पर ,,जिससे युवाओं में और ज्यादा रोष बढ़ गया
दरअसल रविवार की दोपहर लगभग 12 बजे सोशल मीडिया पर वायरल हुए कथित पेपर के स्क्रीनशॉट ने अभ्यर्थियों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया,,,,यहां गौर करने वाली बात ये है कि एक दिन पहले ही यानी शनिवार को एसटीएफ और स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप एसओजी ने कुख्यात नकल माफिया हाकम सिंह और उसके सहयोगी पंकज गौड़ को परीक्षा के संबंध में देहरादून से ही गिरफ्तार कर लिया था ,,, ये दोनों अभ्यर्थियों को परीक्षा में पास कराने का झांसा देकर 12 से 15 लाख रुपये तक की मांग कर रहे थे,,,,जिसका एक कथित ऑडियो भी वायरल हुआ,,, ये ऑडियो पंकज गौड़ का का बताया जा रहा है,
यह ऑडियो जिसमें कोटद्वार के एक अभ्यर्थी से 15 लाख में चयन करवाने का दावा किया जा रहा है,,,,इसके वायरल होने के बाद पुरे प्रदेश के युवाओं में रोष फैल गया,,,,हाकम सिंह के एक बार फिर एक्टिव होने पर लोग हर जगह यही पूछ रहे हैं कि आखिर हाकम सिंहं का हाकिम कौन है,,,जबकि पुलिस कह रही है कि हाकम सिंह का कोई हाकिम नहीं,,, पुलिस ने ये साफ़ इशारा कर दिया की हाकम का कोई हाकम नहीं ,, बल्कि ये एक गिरोह है ,,,पुलिस का ये इशारा भी कई सवालों को जन्म दे रहा है कि आखिर कोई भी एक मामूली सा आदमी इतना बड़ा खेल करता आ रहा है और वो भी बिना किसी सरपरस्ती के ????।खैर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मामले के खुलासे के साथ कहा था कि हाकम कुछ अभ्यार्थियों को कोरा झांसा देकर 12 से 15 लाख रुपये ऐंठने के फिराक में था, लेकिन वहीं दूसरी ओर सह-आरोपी पंकज गौड़ का इकबालिया बयान और हाकम की कॉल रिकॉर्डिंग गहरी साजिश का खुलासा कर रही है।
पंकज गौड़ के बयान के मुताबिक़ वो खुद परीक्षा में बैठने वाला था। उसने हाकम तक पहचान निकाली और उससे संपर्क बनाया। हाकम ने उसे परीक्षा पास करवा नौकरी लगवाने का भरोसा दिलाया। उसने पंकज को कहा कि यदि वह 15-15 लाख के पांच उम्मीदवार लाएगा तो उसके 12 लाख रुपये बच जाएंगे, यानी उसका काम फ्री में हो जाएगा। यह बयान खुद पंकज ने पुलिस को दिया है, जिससे जाहिर होता है कि वह हाकम की पहुंच पर भरोसा कर रहा था, इसलिए वह खुद भी रुपये देने को तैयार था।
पुलिस की जांच के मुताबिक शुरुआत में पंकज की मुलाक़ात उत्तरकाशी के ओटगांव निवासी रोबिन प्रसाद से हुई थी, जो परीक्षा पास करने के लिए पंकज गौड़ के संपर्क में था। पंकज से पूछताछ में पता चला कि वह अरुण पंवार, रोबिन नौटियाल, गुलशन, मोनिका डोभाल, काला के संपर्क में था, जिन्हें उसने यकीन दिलाया था कि हाकम उसके संपर्क में है। उन्हें यकीन दिलाया है कि 15 लाख रुपये देने पर परीक्षा पास करवा कर नौकरी लगवा दी जाएगी।
इसी क्रम हाकम सिंह की कॉल रिकॉर्डिंग भी वायरल हो रही है, जिसमें वह साफ कह रहा है कि इस बार पिछली गलती नहीं करनी। पिछली बार 12-12 लाख में ज्यादा अभ्यर्थियों का जिम्मा लिया था, जिस वजह से मामला बिगड़ गया। इस बार ज्यादा पैसे और कम काम होगा, यानी 15 लाख लेकर कुछ अभ्यर्थियों का ही काम किया जाएगा, ताकि किसी को शक न हो। पंकज ने इकबालिया बयान दिया है कि उसने अन्य अभ्यर्थियों को परीक्षा पास कराने के लिए अपनी तरफ से तीन लाख रुपये बढ़ाकर बताए थे, ताकी उसका काम फ्री में हो जाए। उसे हाकम के जरिये रुपये कमाने का लालच भी आ गया था। इस बयान से विरोधाभास सामने आ रहा है कि पंकज एक तरफ तो हाकम की पहुंच पर भरोसा करके खुद भी 12 लाख देने वाला था,
जांच के क्रम में एक पैन ड्राइव की रिकॉर्डिंग भी पुलिस को मिली, जिसमें हाकम 21 सितंबर को होने वाली परीक्षा पास कराने व नौकरी लगाने का दावा कर रहा है, यह रिकॉर्डिंग भी जाहिर करती है कि साजिश कहीं गहरी थी, जिसमें बड़े स्तर पर मिलीभगत की आशंका है। इसमें हाकम 15 लाख रुपये की राशि के एवज में अभ्यर्थी को परीक्षा में ओएमआर शीट खाली छोड़ने को कह रहा है, जिसे बाद में भरा जाएगा, इससे जाहिर होता है कि वह अभ्यर्थियों को कोरा झांसा नहीं दे रहा था। उसके पास ट्रिक और लिंक दोनों थे।
दूसरी तरफ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी कह रहे हैं कि दोनों गिरफ्तार आरोपी अभ्यर्थियों को कोरा झांसा दे रहे थे, उनके परीक्षा पास कराने के दावे को लेकर कोई लिंक नहीं मिले।
अब पुलिस जांच का एक पहलू और देखिये,,,,देहरादून पुलिस और आयोग ने प्रेस वार्ता करके खुलासा किया कि पेपर का सिर्फ एक सेट यानी तीन ही पन्ने हरिद्वार के एक सेंटर से एक अभ्यर्थी के लिए बाहर आया था,,, इसके पीछे कोई बड़ा गिरोह शामिल नहीं, इसलिए पूरी परीक्षा की शुचिता पर सवाल खड़ा नहीं होता,,,यह पेपर सिर्फ कुछ लोगों के बीच ही पहुंचा,,, है न कमाल की बात,,, पुलिस खुद कह रही है कि एक सेट बाहर आया था,,और कुछ लोगों के बीच पहुंचा था,,,और ऐसे में कहा जा रहा है कि इससे पूरी परीक्षा की शुचिता पर सवाल खड़ा नहीं होता,,,इतनी बड़ी लापरवाही सामने आती है और आयोग कह रहा है कि सवाल उठाना लाजमी नहीं है,,,खासकर तब जब आयोग के मुखिया गणेश मर्तोलिया कोई और नहीं बल्कि उत्तराखंड पुलिस के एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी रह चुके हैं ,, कई जिलों की कमान खुद संभल चुके हैं,, उसके बाद भी उनका ये जवाब गले से नीचे नहीं उतरता ,,,
जांच में एक और बात सामने आयी है कि खालिद नाम का कोई शख्स है जिसके लिए पेपर बाहर आया,,,अब उसके संपर्क में आए छात्रों की जांच व तलाश जारी है,,, पुलिस के अनुसार खालिद पूरे कांड का प्रमुख है, जो खुद हरिद्वार के एक सेंटर में परीक्षा देने बैठा था,,,पुलिस को आशंका है कि उसके लिए ही पेपर बाहर आया ताकि उस तक सवालों के जवाब पहुंचाए जा सके,,,सेंटर से खालिद की बहन तक के पास पेपर के स्क्रीन शॉट पहुंचे,,, बहन ने टिहरी में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत सहायक प्रोफेसर सुमन तक वो स्क्रीनशॉट भेजे और सवालों के जवाब मांगे,,, सुमन ने जवाब भेज दिए लेकिन बाद में शक होने पर पुलिस के पास जाने लगीं लेकिन उससे पहले बॉबी पंवार से बात की,,,,इससे एक बात और स्पष्ट होती है कि अब ऐसी धांधलियों में पुलिस से ज्यादा लोगों को उत्तराखंड के युथ और बॉबी पंवार पर भरोसा है,,,
यहां एक और चीज घटित हुई,,,महिला प्रोफेसर पुलिस के सामने बताती है कि उनके द्वारा प्रकरण की जानकारी पुलिस को देने हेतु एक प्रार्थना पत्र लिखा गया था लेकिन बॉबी पंवार द्वारा उक्त महिला से पेपर के स्क्रीनशॉट मांगते हुए उसे इस सम्बन्ध में पुलिस को अवगत न करने के लिये कहा गया,,,,जिसके बॉबी पंवार द्वारा बिना किसी सक्षम अधिकारी को प्रकरण के सम्बन्ध में अवगत कराये बिना परीक्षा प्रणाली को सनसनीखेज बनाने के उद्देश्य से उक्त स्क्रीनशॉट्स को सोशल मीडिया पर वायरल किया गया,,,जिन्हें कुछ अन्य लोगों द्वारा भी सोशल मीडिया अकाउंट पर प्रसारित करते हुए सरकार तथा सिस्टम के विरूद्ध आपत्ति जनक पोस्ट की गई। अब इन बातों की भी पुलिस जांच कर रही है,,,,की आखिर बॉबी पंवार ने पुलिस के सक्षम अधिकारी को इस मामले से अवगत कराये बगैर खुद ही जज बनने की कोशिश क्यों की
इन्हीं सवालों के बीच पुलिस ने बॉबी की भूमिका की भी जांच शुरू कर दी है,,,मुख्य आरोपी खालिद फरार बताया जा रहा है,,जबकि उसकी बहिन को गिरफ्तार कर लिया गया है,,,साथ ही इस पुरे प्रकरण को सामने लाने वाली महिला प्रोफ़ेसर के खिलाफ भी जांच शुरू हो गयी है,,,बॉबी पंवार भी कह रहे हैं ,,,कि इस पुरे प्रकरण की जांच सीबीआई करे और पहली शुरुआत उनसे ही की जाय,,,सरकार भी कह रही है कि अब आरोपी बख्से नहीं जायेंगे,,,,सवाल कई हैं कि आखिरकार जब परीक्षा में मोबाईल नहीं ले जा सकते तो फिर अंदर से फोटो बाहर कैसे आ गए,,,जब परीक्षा केंद्रों पर जैमर लगे होते हैं,ऐसे में फोटो बाहर आना अपने आप में परीक्षा की तैयारियों पर सवाल उठाता है,,,इस पुरे प्रकरण में हाकम सिंह की गिरफ्तारी में जिस युवा ने प्रमुख भूमिका निभाई वो हैं बेरोजगार संघ के अध्यक्ष राम कंडवाल,,,उन्होंने पांच दिन तक रिक्शे में घूम कर नकल माफिया की खोज की,,,,स्कूटी से उत्तरकाशी तक गए,,,,जो 15 लाख वाला ऑडियो हमने आपको इससे पहले सुनाया वो भी राम कंडवाल के कारन ही हो पाया,,,,ऐसे युवाओं को इस प्रदेश को आज के समय में सबसे ज्यादा जरूरत है,,,
अब जरा जिन पर इन सभी परीक्षाओं को निर्विवाद रूप से कराने की जिम्मेदारी है उन आयोग के चेयरमैन गणेश शंकर मर्तोलिया का बयान भी सुन लीजिए,,,ताकि सनद रहे ,,, मर्तोलिया साहब कह रहे हैं कि सिर्फ तीन पन्ने बाहर आये हैं इसको पेपर लीक होना नहीं कहा जा सकता,,,,तो साहिब पेपर लीक होना कहते किसको हैं ,,जरा ये ज्ञान वर्षा भी कर दीजिये ,,,खैर बयां सुनिए साहब का
तो पूछा ये भी जाना चाहिए कि आखिर पेपर लीक फिर किसे कहा जाता है,,,
सवाल ये है कि 11 बजे पेपर शुरू होता है और दावे के अनुसार 11. 30 बजे वो तीन पन्ने बाहर आ जाते हैं,,,और मर्तोलिया साहब कह रहे हैं कि इसको पेपर लीक होना नहीं कहा जा सकता,,,,तो फिर वही बता दें कि इसको क्या कहा जाता है,,,और फिर पेपर लीक किसे कहते हैं,,,उनका बयान सुन कर तो एक वरिष्ठ भूवैज्ञानिक एमपीएस बिष्ट ने , What a joke.,,कहकर मर्तोलिया साहब को सर्टिफिकेट ही दे दिया ,,,,,,..खैर चेयरमैन आयोग गणेश मर्तोलिया ने यह भी बताया कि परीक्षा केंद्रों पर जैमर लगाए गए थे, जिससे यह सवाल उठता है कि इतने सुरक्षा उपायों के बावजूद ये पन्ने बाहर कैसे आए,,,,,कमाल की बात ये है कि भाजपा के कुछ नेता खुद कह रहे हैं कि तीन पन्ने बाहर आये लेकिन पेपर लीक नहीं हुआ और ये सरकार के खिलाफ षड्यंत्र है,,,कमाल करते हैं हमारे नेता जी
सवाल फिर वही कि किसके दम पर जमानत पर जेल से बाहर आया शख्स फिर ऐसे घटनाक्रम करने की हिम्मत जुटा पा रहा है,,मतलब हाकम का हाकिम तो कहीं न कहीं vip बना बैठा ही है ,,वैसे vip से हमारा अभिप्राय सिर्फ हाकम के हाकिम को लेकर ही है ,, कृपया इसे किसी बच्ची की निर्मम हत्या से न जोड़ा जाए ,,,,
एक बात और है पानी पी पी कर त्रिवेंद्र सिंह रावत को हाकम के मामले में कोसने वाले खानपुर से निर्दलीय विधायक उमेश कुमार को अब सोचना होगा ,, क्यूंकि हाकम के खिलाफ सबसे पहले और बुलंद आवाज़ में विरोध करने वाले पहले भाजपाई खुद त्रिवेंद्र सिंह रावत ही बन गए हैं ,, ,, अक्सर
पूर्व मुख्य्मंत्री और हरिद्वार संसद त्रिवेंद्र सिंह रावत जो 2023 में बेरोजगारों पर लाठीचार्ज का भी विरोध कर चुके हैं,,,उन्होंने एक बार फिर कड़ी कार्यवाही और न्यायिक जांच की मांग की है,,,अब त्रिवेंद्र के नक़ल को लेकर लिए गए कड़े तेवर ये तो साबित करते ही हैं की हाकम सिंह की तस्वीर सिर्फ एक ही ज़ुबान नहीं बोलती ,,यकीन नहीं तो इन कुछ तस्वीरों पर ही नज़र दाल लीजिये ,,,ऐसे में उमेश कुमार की आवाज़ बाकी के चित्रित नेताओं को घेरने के लिए भी उठेगी ये देखना महत्वपूर्ण होगा ,, और अगर आवाज़ उठी तो उसका तीखापन भी मायने रखेगा ,,, खैर अपने बयान से ये तो त्रिवेंद्र ने साफ़ कर दिया की हाकम का हाकिम अभी वाइट कॉलर में आसपास ही मौजूद है जिसपर कड़ी कार्यवाही की बात वो कर रहे हैं ,,,
खैर त्रिवेंद्र सिंह रावत को छोड़कर सत्ता पक्ष का कोई भी नेता फिर चाहे वो महेंद्र बाहुबली हों या फिर कुछ दिन पहले पुलिस को कोसने वाले विधायक ख़ज़ान दास हों या आपदा में जिलाधिकारी देहरादून को अपशब्द कहने वाले मंत्री गणेश जोशी हों ,, कोई भी बेरोजगार युवाओं की मांग पर साथ नहीं दिखाई दे रहा है,,,,,सब के सब ऐसे चुप्पी साधे बैठे हैं ,,उम्मीद विपक्ष से भी थी ,,,,,कि युवाओं की इस पीड़ा में वो उनकी आवाज में अपनी आवाज मिलाते,,,,लेकिन अफ़सोस विपक्ष के नेता सिर्फ शोसल मिडिया और अपने मुख्यालय में ही इसका विरोध करते रह गए,,,,इससे एक बात और साबित होती है कि विपक्ष के रूप में कांग्रेस भी सिर्फ उन मुद्दों पर आगे आती है जो उनकी राजनीती को सूट करता है,,,एक तरफ राहुल गांधी युवाओं की बात करते नहीं थकते तो दूसरी तरफ उनकी पार्टी का कोई भी बड़ा नेता युवाओं के साथ सड़क पर खड़ा नहीं दिखाई दिया,, गढ़वाल से लोकसभा चुनाव लड़ चुके पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने जरूर दिल्ली एयरपोर्ट से एक सन्देश युवाओं को दिया जिसमे साफ़ उनकी तरफ से कहा गया की वो निजी तौर पर युवाओं के साथ कंधे से कन्धा मिलकर खड़े हैं ,, देहरादून वापिस पहुँचते ही तमाम प्रदेश के युवा मुझे परेड गरिउण्ड में अपने बीच पाएंगे
कुछ और भी सवाल हैं जो इस परीक्षा के बाद सामने आये हैं ,,,,कुछ परीक्षा देने वाले छात्रों ने कई शंशय इस परीक्षा पर जताये हैं,,,इन युवाओं की कुछ और शंकाएं हैं जो इस परीक्षा ही नहीं इस पुरे सिस्टम पर सवालिया निशान खड़ा कर रही हैं,,,
अब इस पुरे घटनाक्रम के बाद बेरोजगार संघ के आह्वाहन पर देहरादून की सड़कों पर एक बार फिर सरकार और आयोग के खिलाफ युवाओं की भारी भीड़ जमा है ,,,,पुलिस ने इस पुरे इलाके में धारा 163 लागू की,,,लेकिन फिर भी बड़ी संख्या में युवा यहां पहुंचे,,,हालत बिगड़े नहीं इसके लिए कई जगहों से आ रहे युवाओं को रास्ते में भी रोका गया,,,,बावजूद इसके युवाओं की भारी भीड़ देहरादून में जमा हो गयी,,,हालाँकि पिछली बार से सबक लेते हुए पुलिस इस बार काफी सतर्क दिखाई दे रही है ,,,संघ के अध्यक्ष राम कंडवाल के साथ पेपर लीक से गुस्साए प्रदेश भर के युवा देहरादून के परेड मैदान में डटे हुए हैं। बेरोजगार संघ ने इस पूरे मामले की सीबीआई जांच करने की मांग रखी है।उनकी साथ ही मांग है कि 21 सितंबर को होने वाली परीक्षा को स्थगित किया जाए।पूर्व में इसके लिए मुख्यमंत्री से लेकर आयोग के अध्यक्ष से भी संघ के पदाधिकारियों ने मुलाकात की थी। लेकिन युवाओं की इस बात को पूरी तरह से अनदेखा किया गया।सिर्फ देहरादून ही नहीं कुमाऊं के हल्द्वानी में भी युवा इसके खिलाफ एकत्र हुए,,,,
बेरोजगार युवा परेड ग्राउंड में सोमवार सुबह से अभी तक डटे हुए हैं,,, सड़क पर ही रात गुजार रहे हैं ,,वहीँ चूल्हा जला खाना भी खा रहे हैं ,, मतलब एक बार फिरसे युवाओं ने खूँटा गाड़ दिया है अपनी मांगों को लेकर ,,,वैसे इसे इस प्रदेश का दुर्भाग्य ही कहा जायेगा कि प्रदेश का भविष्य सड़कों पर सोने को मजबूर हो गया है,,, जब प्रदेश के लोग अपने घरों में चैन की नींद सोये हुए हैं ,,ये युवा उन्हीं के बच्चों के भविष्य के लिए सड़कों पर ,सर के नीचे ईंट पत्थर को तकिया बना खुले में सोये हुए हैं , इन युवाओं के जज्बे को सलाम जरूर किया जाना चाहिए ,,,
ऐसे में हमारी भी प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से अपील है की वो निष्पक्ष रूप से प्रदेश के भविष्यकर्ता युवाओं के दोषियों को ऐसी सजा दिलवाएं की अगली बार कोई माफिआ कैसा भी हो ,,,वो हिम्म्मत न कर सके प्रदेश के भविष्य से खिलवाड़ करने की ,,
इस मुद्दे पर तेज़ तर्रार पत्रकार और प्रदेश गठन कीलड़ाइ में शामिल रहे आंदोलनकारी गजेंद्र रावत की कलम भी गरज़ पड़ी है ,, गजेंद्र तीखा व्यंग करते हुए लिखते हैं कि पेपर लीक नहीं हुआ… बस एक सेंटर से तीन पेज टहलने निकल गए ठीक वैसे ही जैसे नैनीताल में जिला पंचायत सदस्य किडनैप नहीं हुए… वो तो बस घूमने-फिरने गए थे ,,,दरअसल असल में समस्या पेपर या नेताओं की नहीं है, समस्या जनता की याददाश्त की है…क्योंकि इस प्रदेश में हर बार नई पैकिंग में वही पुराना सामान बिक ही जाता है,और खरीदार भी जनता ही होती है,,,, उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों से हजारों लोगों ने सिर्फ इसलिए पलायन किया कि उनके बच्चों को बेहतर शिक्षा मिले और उनका बच्चा भी कॉम्पिटेटिव एक्जाम में बैठने लायक बन जाए । अपना पेट काटकर बच्चों को प्ले ग्रुप से लेकर 12वीं तक पढाने के बाद अपना तन मन धन झोंककर बच्चों को कोचिंग दिलवाई उन्हें परीक्षा में पास करने लायक भी बनाया की वो इस लायक बन सके की प्रतियोगी परीक्षा पास कर सके ,,, लेकिन हाकम सिंह जैसे अपराधियों ने योग्य बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करते हुए 12 से 15 लाख रुपए में पेपर खरीदने वालों को नौकरियां बेचने का काम कर दिया ,, वो भी फिर से,,,
यह सिर्फ किसी बच्चे के सपने खत्म होने का मसला नहीं है बल्कि सरहद पर बैठे उस फौजी के साथ भी बहुत बड़ी धोखाधड़ी है जिसने अपने बच्चों को इस आस के साथ पढ़ने के लिए शहरों में भेजा है कि कल के दिन उसका बच्चा किसी लायक बन जाएगा,,,,,18 से 20 साल तक किसी परिवार की मेहनत, उसके बच्चे की लगन, उसका पैसा सब कुछ हाकम सिंह जैसों के सामने सरेआम बिकने लग जाए तो ऐसे हाकम सिंह को जेल से बाहर ही क्यों आने दिया जाए , ,जिस देहरादून की गलियों में कभी जाकर देखिए किस प्रकार गरीब के बच्चे परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं.कभी उन लाइब्रेरी में जाकर देखिए जहाँ एक वक्त का खाना खाकर बहुत सारे बच्चे इस आस में पढ़ने के लिए बैठे होते हैं कि इस बार तो पेपर पास हो ही जाएगा. ऐसे प्रतिभावान बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करना किसी भी बड़े अपराद से कम नहीं हो सकता ,,,,
उत्तराखंड के 70 विधायक और आठ सांसदों से यह पूछा जाना चाहिए कि तुम अपने बच्चों को क्यों बेहतरीन स्कूलों में पढ़ा रहे हो?इसलिए ना कि कल के दिन तुम्हारे बच्चे किसी लायक बन जाए अगर तुम्हारे बच्चों के भविष्य के साथ हाकम सिंह जैसे अपराधी आज सरेआम इतने बड़े अपराध को अंजाम दे रहे हैं तो तुम्हारा विधायक और सांसद होना क्या मायने रखता है?
यह सवाल उन अधिकारियों कर्मचारी और समाज के हर उस व्यक्ति से भी है कि जो अपने बच्चों को अच्छा भविष्य दिलाना चाहते हैं
गजेंद्र लिखते हैं कि आखिरकार इतना बड़ा भारी भरकम नकल विरोधी कानून आने के बावजूद हाकम सिंह जैसी ताकत जिंदा क्यों है?
अंत में एक बात तो साफ़ है कि सरकार को सख्ती और बरतनी होंगी ,युवाओं की आवाज़ को गंभीरता से सुन्ना होगा ,,और नक़ल माफिआ हाकम सिंह ,झूठा रॉब ग़ालिब कर लोगों के पैसे ऐंठने वाले हिमांशु चमोली ,सत्ता की लालसा में अपनी बेटी का सौदा करने वाली अनामिका शर्मा और चन्दन मनराल जैसे प्रदेश पर लगे धब्बों को पूरी ताकत से न केवल मिटाना होगा ,, बल्कि इंच बराबर भी ऐसे ककरोज़ फिर से न पनप पाएं उसके लिए मजबूत तरीके से पुलिसिया पेस्ट कण्ट्रोल करना होगा ,,,धामी जी आपको अपने नेताओं अधिकारिओं में से उनकी पहचान भी करनी होगी जो ऐसे गंदे कृत्य में शामिल हैं ,, उनको भी सलाखों के पीछे पहुंचाने की जिम्मेदारी आपकी ही है
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शैक्षिक उत्कृष्टता पुरस्कार समारोह में बोर्ड परीक्षाओं में शीर्ष 10 स्थान प्राप्त करने वाले हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट के 75 मेधावी छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया.
समारोह के दौरान संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश में जहां एक ओर, 226 विद्यालयों को पीएम श्री विद्यालय के रूप में विकसित किया जा रहा है, वहीं सभी 13 जनपदों के 1300 विद्यालयों में वर्चुअल कक्षाएं भी संचालित की जा रही हैं। साथ ही, दूरस्थ क्षेत्रों तक बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए 5-पीएम ई-विद्या चैनल भी संचालित किए जा रहे हैं।
धामी ने कहा कि राज्य के सभी राजकीय और सहायता प्राप्त विद्यालयों में कक्षा एक से 12 तक के सभी विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्य पुस्तकें भी उपलब्ध कराई जा रही है। इसके अलावा उत्तराखंड के सरकारी और अशासकीय स्कूलों के छठवीं से 12वीं कक्षा तक के मेधावी छात्र-छात्राओं को, मुख्यमंत्री मेधावी छात्र प्रोत्साहन छात्रवृत्ति योजना के माध्यम से प्रत्येक माह छात्रवृत्ति भी प्रदान की जा रही है, राज्य के बच्चों के व्यक्तित्व विकास के उद्देश्य से प्रत्येक विकासखंड के 10वीं और 12वीं के मेधावी छात्रों को भारत भ्रमण पर भी भेजा जा रहा है।मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा, संघ लोक सेवा आयोग, एनडीए, सीडीएस आदि की लिखित परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थियों को साक्षात्कार की तैयारी के लिए 50 हजार रुपए की वित्तीय सहायता भी प्रदान की जा रही है।
एक शिकायत के आधार पर अराजकता का प्रयास –
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नकल माफियाओं पर अंकुश लगाने के लिए उत्तराखंड में देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। उनकी माने तो चार वर्षों में राज्य के 25 हजार से अधिक युवाओं का चयन सरकारी नौकरी में हुआ है,जबकि राज्य बनने के शुरुआती 21 साल में कुल 16 हजार नियुक्तियां ही हुई थी।
सख्त नकल विरोधी कानून के लागू होने के बाद से अब तक 100 से अधिक नकल माफियाओं को सलाखों के पीछे पहुंचाने का काम किया जा चुका है। धामी ने कहा कि कुछ लोगों को पारदर्शिता के साथ युवाओं का सरकारी नौकरियों में जाना रास नहीं आ रहा है। इसलिए कुछ लोग युवाओं के भविष्य को अंधकार में धकेलने के लिए संगठित रूप से पेपर लीक का षड्यंत्र रच रहे हैं। हाल ही में राज्य में पेपर लीक कराने का असफल प्रयास किया गया, सिर्फ एक जगह की शिकायत के आधार पर अराजकता फैलाने का प्रयास किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह के मामलों के लिए पहले से ही सख्त कानून बना है, जिससे इस प्रकरण में सख्ती से कार्यवाही की जाएगी।
एक – एक नकल माफिया को करेंगे गिरफ्तार-
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने हाल में सामने आई परीक्षा गड़बड़ी की जांच के लिए एक एसआईटी गठन का निर्णय लिया है। एसआईटी जांच के आधार पर इस मामले में निर्णायक कार्रवाई की जाएगी। सरकार राज्य में एक-एक नकल माफिया को चुन-चुन कर गिरफ्तार कर, सजा दिलवाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने शपथ लेने के बाद ही संकल्प लिया था कि रिक्त पदों को प्राथमिकता पर भरा जाएगा। इसके बाद रिकॉर्ड भर्तियां हुई हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सीबीआई जांच के जरिए भर्ती प्रक्रिया को बाधित करने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि सरकार का उद्देश्य पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ भर्ती करना है। सरकार भर्ती में देरी के कारण किसी भी युवा के साथ अन्याय नहीं होने देगी।
कार्यक्रम में सम्मलित उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने कहा कि इस साल बोर्ड परीक्षा में प्रथम श्रेणी से पास होने वाले छात्र- छात्राओं की संख्या 18 प्रतिशत बढ़ी है। अब अंक सुधार परीक्षा भी हो रही है, इससे छात्र- छात्राओं पर परीक्षा को लेकर रहने वाला दवाब कम हुआ है।
यह बात कोई नई नहीं है कि प्राकृतिक आपदाओं को रोका नहीं जा सकता है, लेकिन उससे जानमाल के नुकसान को कम जरूर किया जा सकता है। यह कैसे करना है, इस बात को भी हमारे विज्ञानी और नियोजन के विशेषज्ञ चीख-चीख कर लंबे समय से कहते आ रहे हैं कि प्रकृति के रास्ते में नहीं आना है। लेकिन, लगता है कि राजधानी दून में ही आपदा से बचे रहने का सबसे बड़ा सबक हम भूल गए हैं।
सोमवार रात को हुई अतिवृष्टि और सहस्त्रधारा क्षेत्र में दो जगह फटे बाद के जो हालात पैदा हुए, उससे साफ हो गया कि नदियों का गला घोंटने का अंजाम कितना खतरनाक हो सकता है। दून में नदी क्षेत्रों में धड़ल्ले से किए गए अतिक्रमण की खतरनाक स्थिति सेटेलाइट चित्रों में भी समाने आई है। जिसमें दिख रहा है कि काठबंगला क्षेत्र में रिस्पना नदी की भूमि वर्ष 2003 से 2018 के बीच में किस कदर जमकर अतिक्रमण किए गए।
वरिष्ठ भूविज्ञानी और एचएनबी गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय में भूविज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रो. एमपीएस बिष्ट ने राज्य गठन के महज तीन साल बाद और इसके 15 साल बाद 2018 के चित्रों का अध्ययन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो काठबंगला क्षेत्र वर्तमान में अतिक्रमण से पूरी तरह भर चुका है, वहां वर्ष 2003 में रिस्पना नदी के दोनों किनारे पूरी तरह खाली थे।
इसके साथ ही दोनों किनारों पर जंगलनुमा एक पूरा क्षेत्र था। वहीं, महज 15 साल बाद 2018 में सेटेलाइट चित्र में रिस्पना नदी बमुश्किल नजर आ रही है। सेटेलाइट चित्र में दोनों छोर पर घनी बस्तियां और भवन नजर आ रहे हैं। इसके अलावा 15 साल पहले का जंगलनुमा भाग 95 प्रतिशत तक गायब हो चुका है।
देहरादून में रिस्पना और बिंदाल नदी क्षेत्रों में अतिक्रमण की बाढ़ पर मनमोहन लखेड़ा बनाम राज्य में नैनीताल हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया था। अतिक्रमण पर कार्रवाई करने के आदेश के बाद सरकारी मशीनरी हरकत में भी आई थी। तब उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (यूसैक) ने इसरो के माध्यम से अमेरिकी कंपनी मैक्सर से शहर के सभी 60 वार्डों (अब बढ़कर संख्या 100) के सेटेलाइट चित्र मंगाए थे।
यह चित्र प्रत्येक छह माह के अंतर में अतिक्रमण की स्थिति को बयां करने वाले थे। उस समय कुल 2100 सेटेलाइट चित्र मंगाए गए थे। हालांकि, अतिक्रमण पर न तो कार्रवाई की गई और न ही चित्रों के आधार पर अतिक्रमण की भयानक स्थिति को बाहर आने दिया गया। यह चित्र वर्तमान में भी यूसैक कार्यालय में डंप पड़े हैं।
सांसद अनिल बलूनी व विधायक विनोद कंडारी के वाहन के देवप्रयाग डिग्री कॉलेज के निकट पहाड़ी से अचानक हुए भूस्खलन की चपेट में आने से बाल-बाल बच गए। दोनों वाहन से देवप्रयाग में आपदा से हुए नुकसान का जायजा लेने आ रहे थे। इसी दौरान डिग्री काॅलेज के निकट पहाड़ी से अचानक भूस्खलन हो गया। जिससे उनका वाहन मलबे मेें फंस गया।
गनीमत रही कि पहाड़ी से गिरे मलबे से कोई चोटिल नहीं हुआ। इसके बाद सांसद बलूनी तहसीलदार के वाहन से देवप्रयाग तक पहुंचे। यहां सभी कार्यक्रमों में भाग लेने के बाद वह प्राइवेट वाहन से देहरादून के लिए रवाना हुए। उनके सरकारी वाहन को निकालने के लिए एनएच की ओर से मलबा हटाने का कार्य शुरू कर दिया गया था।
भीषण प्राकृतिक आपदा से गुजर रहा उत्तराखंड
सांसद अनिल बलूनी ने कहा कि उत्तराखंड में इस वर्ष आई भीषण अतिवृष्टि और भूस्खलन ने इतने गहरे घाव दिए हैं, जिन्हें भरने में बहुत समय लगेगा। कल शाम आपदा प्रभावित क्षेत्र में भूस्खलन का एक भयावह दृश्य आप सभी के साथ साझा कर रहा हूं। यह दृश्य स्वयं बता रहा है कि हमारा उत्तराखंड इस समय कितनी भीषण प्राकृतिक आपदा से गुजर रहा है।
उन्होंने कहा कि ‘मैं बाबा केदारनाथ से सभी लोगों के सुरक्षित जीवन, अच्छे स्वास्थ्य एवं खुशहाली की मंगलकामना करता हूं। आपदा की इस घड़ी में जन जन की सेवा में लगे सभी अधिकारियों, एनडीआरएफ-एसडीआरएफ के जवानों, प्रशासन और कठिन परिस्थितियों में भी सड़कों से मलबा हटाने वाले कर्मचारियों के सेवाभाव की सराहना करता हूं।’
उत्तराखंड के चमोली जिले के नंदानगर क्षेत्र में बुधवार देर रात बादल फटने से भारी तबाही मच गई। एक ही रात में तीन गांवों में घर, गौशालाएं, और ज़िंदगियां मलबे में समा गईं। अब तक 12 लोगोंके लापता होने की पुष्टि हो चुकी है, जबकि करीब 30 से अधिक भवन क्षतिग्रस्त हुए हैं। रेस्क्यू टीमें मलबे में दबे लोगों की तलाश में जुटी हैं।
200 से अधिक ग्रामीणों कोसुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। घाट तहसील के नंदानगर क्षेत्र में बुधवार देर रात बादल फटने से भारी नुकसान हुआ है। आपदा में अब तक 12 लोगों के लापता होने की सूचना है। इसमें सबसे अधिक प्रभावित ग्राम कुंतरी लगा फाली है, जहां 8 लोग लापता हैं और 15 से 20 भवन व गौशालाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं। रात तीन बजे के करीब भारी बारिश के बीच लोगों के घरों पर मलबा आ गिरा।
दो महिलाओं और एक बच्चे को मलबे से निकाला
दो महिलाओं और एक बच्चे को पुलिस व डीडीआरएफ की टीमों ने मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला। इन घायलों को नंदानगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है। करीब 200 ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। वहीं, ग्राम कुंतरी लगा सरपाणी में भी दो लोग लापता हैं और दो भवन ध्वस्त हुए हैं। यहां भी रेस्क्यू टीमों ने 100 ग्रामीणों को सुरक्षित निकाला। ग्राम धुर्मा में मोक्ष नदी उफान पर आ गई, जिससे दो लोग लापता हैं और करीब 10 मकानों को नुकसान पहुंचा है।
बचाव कार्यों में एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी (गौचर 8वीं वाहिनी), डीडीआरएफ और राजस्व विभाग की टीमें जुटी हैं। लेकिन सड़कों के जगह-जगह बंद होने और भूस्खलन के कारण टीमों को घटनास्थल पर पहुंचने में देरी हो रही है। अधिकतर टीमें अब पैदल मार्ग से मौके पर पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिव आपदा प्रबंधन से चमोली की स्थिति की जानकारी ली और निर्देश दिए कि लापता लोगों की खोज में कोई कोताही न हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है और सभी राहत शिविरों में रहने, खाने, इलाज और सुरक्षा की व्यवस्था की जाए।
घटना की सूचना मिलते ही सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी डीआईजी राजकुमार नेगी, और यूएसडीएमए के विशेषज्ञों ने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से निगरानी शुरू कर दी है। सभी बचाव टीमें सक्रिय कर मौके पर भेजी गई हैं। कंट्रोल रूम से हर गतिविधि पर निगरानी रखी जा रही है।
उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में आज भी तेज बारिश के आसार हैं। हालांकि मैदानी इलाकों में राहत रहेगी। मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से जारी पूर्वानुमान के अनुसार नैनीताल, बागेश्वर, पिथौरागढ़ जिले के कुछ इलाकों में तेज बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है।
इसके अलावा देहरादून, उत्तरकाशी, चंपावत और ऊधमसिंह नगर जिले के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश की संभावना है।
आने वाले दिनों की बात करें तो 23 सितंबर तक प्रदेशभर में हल्की बारिश के आसार हैं।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और मौसम के बदले पैटर्न के चलते इस बार मानसून में तेज दौर की अधिक बारिश हो रही है।
वहीं दून घाटी में आई आपदा में दूसरा सबसे बड़ा हादसा मालदेवता क्षेत्र के फुलेत गांव में हुआ है। यहां पर एक मकान के मलबे में सहारनपुर के छह लोगों के दबे होने की आशंका है।
सात घंटों तक पैदल चलकर गांव में पहुंची एसडीआरएफ ने बुधवार पूरे दिन सर्च ऑपरेशन चलाया। बावजूद इसके देर शाम तक किसी को भी खोजा नहीं जा सका।
आपदा से पहले से कराह रहे जिले के नंदानगर प्रखंड में 17 सितम्बर की रात फिर कहर बन कर टूटी। नंदानगर में पांच लोगों के लापता होने की सूचना मिली है जबकि दो लोग घायल बताए जा रहे हैं।
आपदा परिचालन केंद्र से गुरुवार की सुबह 6 बजे से 6 बजकर 18 मिनट पर जारी प्रारंभिक सूचना के अनुसार नगर पंचायत नंदानगर के वार्ड कुन्तरि लगाफाली में भारी वर्षा के कारण मलबा आने से 06 भवन क्षतिग्रस्त हुए हैं। घटना में 05 लोगों के लापता होने की सूचना है। 02 को बचा लिया गया है।
नंदानगर तहसील के धुर्मा गांव में भी भारी वर्षा के कारण 4-5 भवनों की क्षति की सूचना प्राप्त हुई है। प्रारंभिक सूचना के अनुसार जनहानि नहीं है। मोक्ष नदी का जलस्तर बढ़ा है।
प्रशासनिक स्तर पर इन खबरों की पुष्टि के प्रयास किए जा रहे हैं।
दूसरी ओर बांजबगड़, मोख धुर्मा आदि क्षेत्रों में बादल फटने से हर तरह तबाही का खौफनाक मंजर पसरा हुआ है। पीड़ित ग्रामीणों ने जिलाधिकारी संदीप तिवारी तक किसी तरह सूचना पहुंचा कर अपने स्तर से स्थिति का आकलन कर राहत पहुंचाने की अपील की है।
प्रारंभिक खबरों में बताया गया है कि पूरे इलाके में भारी तबाही हुई है।
मोक्ष नदी के किनारे बसे सेरा गांव में सर्वाधिक नुकसान की खबर है। सेरा गांव में बीती 8 जुलाई को भी भारी तबाही हुई थी। तब से किसी तरह जीवन पटरी पर लौट रहा था लेकिन 17 सितम्बर को दोबारा आई भीषण आपदा ने सब कुछ तबाह कर दिया। सेरा के लोगों पर प्रकृति की मार के बाद यह महामार पड़ी है
लापता ग्रामीणों का विवरण
उधर, नंदानगर में बादल फटने से पांच लोगों के लापता होने की खबर है। इस आपदा में वहां दो लोगों के घायल होने की जानकारी मिली है।
शुरुआती खबरों के मुताबिक सेरा में महिपाल सिंह, अवतार सिंह, पुष्कर के आवासीय भवन खतरे की जद में हैं। खेत खलिहान को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
सेरा में सबसे पहले महिपाल सिंह का बाथरूम बहा। यह घर के कोने में बना था। उसके बाद मोक्ष नदी का जल घर में घुस गया। इस कारण घर पूरी तरह खतरे की जद में है। उसके बगल के अवतार सिंह और पुष्कर सिंह के घर भी खतरे में आ गए। रात को किसी तरह भाग कर लोगों ने जान बचाई। सेरा से ऊपर पहाड़ी पर बसे धुर्मा गांव में भी बादल फटने से की आवासीय भवन असुरक्षित हो गए हैं जबकि गांव के ही बागड़ टॉप में कई दुकानें और मकान बह गए हैं।
बताया जा रहा है कि बागड़ बस्ती के ऊपर से बादल पटने के कारण भारी मलबा आने से नदी ने रास्ता बदला से सेरा गांव में घरों को नुकसान पहुंचाया। उधर नंदानगर के कुंतरी, फफाली बांजबगड़ में भी भारी तबाही की खबर है। वहां कई घर मलबा आने से दब से गए हैं। बादल फटते ही लोग जंगलों की ओर भागे। अभी तक जनहानि के बारे में कोई जानकारी नहीं है किंतु तबाही के मंजर ने लोगों को बदहवास कर दिया है। नंदानगर की शुरुआती खबरों में बताया जा रहा है कि बलबीर सिंह, विनोद सिंह, प्रकाश सिंह, अवतार सिंह, सिबर सिंह, महिपाल सिंह बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
आपदा के बाद पूरे इलाके का संपर्क कट गया है। बादल फटने के साथ ही इलाके में बिजली आपूर्ति ठप हो गई थी। सड़कों को भी भारी नुकसान पहुंचा है, इस कारण आवाजाही भी ठप है। सेरा में सड़क पर बने पेट्रोल पंप में भी मलबा भर गया है। बिजली न होने से मोबाइल भी वहां काम नहीं कर पा रहे हैं।
प्रशासन को किसी तरह सूचना पहुंचा दी गई है किंतु प्रशासन के लिए भी इस आपदा प्रभावित क्षेत्र तक पहुंच बनाना आसान नहीं है। लोग सहमे हुए हैं और नियति को कोस रहे हैं। पीड़ितों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। हालात इस कदर बिगड़ गए हैं कि उन्हें रोने के अलावा कुछ नहीं सूझ रहा है।