Author: Pravesh Rana

कांग्रेस ने पर्यवेक्षकों से मांगी संभावित प्रत्याशियों की रिपोर्ट

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प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करण माहरा ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर पार्टी के सभी पर्यवेक्षकों को निर्देश दिए हैं कि वे तत्काल अपने-अपने प्रभार वाले जनपदों में जिला पंचायत अध्यक्ष और क्षेत्र पंचायत प्रमुख पदों के संभावित प्रत्याशियों की रिपोर्ट प्रदेश मुख्यालय को भेजें।

प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष संगठन सूर्यकांत धस्माना ने बताया कि पर्यवेक्षकों को कहा गया है कि वे संबंधित जनपदों में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, विधायकों, पूर्व लोकसभा/विधानसभा प्रत्याशियों और नव-निर्वाचित पंचायत सदस्यों से संवाद कर संभावित प्रत्याशियों का पैनल तैयार करें।

 

धस्माना ने दावा किया कि प्रदेश के आठ जनपदों में कांग्रेस के पास जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर जीत की मजबूत संभावनाएं हैं। क्षेत्र पंचायतों में भी बड़ी संख्या में कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार जीते हैं। यदि चुनाव निष्पक्ष हुए, तो प्रदेश की तस्वीर बदल सकती है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ भाजपा शासन, प्रशासन और धनबल के बल पर हर हाल में चुनाव जीतने का प्रयास कर रही है।

जिला पंचायत अध्यक्ष व ब्लाक प्रमुख पद के चुनाव के लिए पार्टियों ने कसी कमर, पर्यवेक्षक तैनात

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जिला पंचायत अध्यक्ष व ब्लाक प्रमुख पद पर पार्टी समर्थित प्रत्याशियों के लिए भाजपा रणनीति बनाने में जुटी है। रविवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर भाजपा अध्यक्ष एवं राज्य सभा सांसद महेंद्र भट्ट ने त्रिस्तरीय पंचायत नतीजों व जिपं अध्यक्ष व ब्लाक प्रमुख पद चुनाव पर चर्चा की। सीएम आवास में भाजपा अध्यक्ष भट्ट व प्रदेश महामंत्री अजेय कुमार सीएम धामी से मिले।

भट्ट ने त्रिस्तरीय पंचायत में ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत व जिला पंचायतों में पार्टी समर्थित प्रत्याशियों की जीत पर मुख्यमंत्री को बधाई दी। इसके अलावा जिला पंचायत व ब्लाक प्रमुख पदों के चुनाव पर पार्टी समर्थित प्रत्याशी की जीत पर मंथन किया। चुनाव जीते निर्दलीय व बागियों का समर्थन जुटाने के लिए भाजपा ने रणनीति बनाई है।

पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को जिलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। देहरादून जिले में सात सीटों पर भाजपा समर्थित प्रत्याशी चुनाव जीते हैं। जबकि 13 सीटों पर कांग्रेस समर्थित व 10 सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशी विजयी रहे। भाजपा देहरादून जिले में भाजपा का जिला पंचायत अध्यक्ष बनाने का दावा कर रही है। भाजपा का तर्क है कि निर्दलीय प्रत्याशी भी भाजपा विचारधारा से जुड़े हैं।

सभी जिलों में पर्यवेक्षकों को तैनात किया गया
प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने जिला पंचायत अध्यक्ष व ब्लाक प्रमुख पद के चुनाव के लिए कमर कसी ली है। कांग्रेस ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए जिलों में तैनात पर्यवेक्षकों से संभावित प्रत्याशियों की रिपोर्ट मांगी है। प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष संगठन सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि पार्टी की ओर पंचायत चुनाव के लिए सभी जिलों में पर्यवेक्षकों को तैनात किया गया था।

इसमें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, पूर्व मंत्रियों व पूर्व विधायकों की जिम्मेदारी दी गई थी। प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा के दिशा-निर्देश पर सभी पर्यवेक्षकों को अपने-अपने जिलों में जिला पंचायत अध्यक्ष व क्षेत्र पंचायत प्रमुख पद पर संभावित प्रत्याशियों की रिपोर्ट प्रदेश मुख्यालय को भेजने के निर्देश दिए गए।

पर्यवेक्षक रिपोर्ट देने से पहले जिलाें के वरिष्ठ नेताओं, विधायकों, लोकसभा व विधानसभा चुनाव के प्रत्याशियों के अलावा जिला पंचायत व क्षेत्र पंचायत के नव निर्वाचित सदस्यों से समन्वय बनाकर संभावित प्रत्याशियों का पैनल तैयार कर प्रदेश मुख्यालय को भेजेंगे। उपाध्यक्ष संगठन धस्माना ने कहा, त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में कांग्रेस का बेहतर प्रदर्शन रहा है। जिला पंचायत अध्यक्ष व ब्लाक प्रमुख पद पर पारदर्शी तरीके से चुनाव हुए तो प्रदेश में बड़ा उलटफेर होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा धन बल का इस्तेमाल कर किसी तरह से चुनाव जीतने का प्रपंच कर रही है।

धार्मिक स्थलों के लिए बनेगा मास्टर प्लान,भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा और जनसुविधाओं के लिए तैयार होगा विस्तृत खाका

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हरिद्वार स्थित मनसा देवी मंदिर में 27 जुलाई को हुई दुखद घटना के बाद, मुख्यमंत्री ने तीर्थ यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को लेकर राज्य के सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों के लिए मास्टर प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में मंगलवार को प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु ने सचिव पर्यटन को आदेश जारी कर धार्मिक स्थलों पर भीड़ नियंत्रण, प्रवेश-निकास व्यवस्था और जनसुविधाओं के लिए शीघ्र मास्टर प्लान तैयार करने को कहा है।

प्रमुख सचिव ने निर्देश दिए कि जिन धार्मिक स्थलों पर तीर्थयात्रियों की अधिक संख्या रहती है, उन्हें प्राथमिकता दी जाए और मास्टर प्लान के निर्माण एवं क्रियान्वयन में दोनों मंडलों के मंडलायुक्तों का सहयोग लिया जाए। साथ ही तीर्थ स्थलों के मार्गों पर यदि कोई अवैध अतिक्रमण है, तो उन्हें प्राथमिकता के आधार पर हटाया जाए।

मास्टर प्लान में शामिल प्रमुख बिंदु:

भीड़ नियंत्रण और मार्गदर्शन व्यवस्था

स्थल की धारण क्षमता का वैज्ञानिक आकलन व विकास

पृथक प्रवेश व निकास मार्ग

प्रतीक्षा स्थलों का निर्माण

आपातकालीन निकासी के विकल्प

स्वच्छ पेयजल, शौचालय, प्राथमिक उपचार केंद्र

सुव्यवस्थित सूचना प्रणाली

पार्किंग की समुचित व्यवस्था

पर्याप्त सुरक्षा बलों की तैनाती

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि:

> “उत्तराखंड में हर वर्ष करोड़ों तीर्थ यात्री आते हैं। उनकी सुरक्षा और सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता है। सभी प्रमुख तीर्थ स्थलों के आसपास जनसुविधाएं विकसित कर यात्रा को अधिक सुव्यवस्थित बनाया जाएगा।”

प्रदेश के 550 सरकारी स्कूलों की बदलेगी तस्वीर, देश के प्रतिष्ठित औद्योगिक समूह लेंगे गोद

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उत्तराखंड के 550 सरकारी स्कूलों को देश के प्रतिष्ठित औद्योगिक समूहों गोद लेंगे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा कि हम एक ऐसी ऐतिहासिक पहल के साक्षी बन रहे हैं, जो न केवल राज्य की शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करेगी, बल्कि आने वाली कई पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला भी रखेगी।

सीएम धामी ने कहा कि आज का दिन शैक्षणिक इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में अंकित होने जा रहा है। कहा कि मुझे अत्यंत प्रसन्नता है कि राज्य के 550 सरकारी स्कूलों को देश के प्रतिष्ठित औद्योगिक समूहों द्वारा गोद लिया जा रहा है।मुझे यह भी बताया गया है कि इनमें से अधिकांश स्कूल ऐसे हैं, जिन्हें आज वास्तव में इसकी आवश्यकता है। दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों के स्कूल वर्षों से संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं।

पांच अस्पतालों में नहीं मिला इलाज, बेटे शुभांशु की मौत

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मैं देश की सरहद पर खड़ा हूं लेकिन अपने ही घर के चिराग को सिस्टम की बेरुखी से नहीं बचा पाया। यह दर्द है उस सैनिक का जिसने अपने डेढ़ साल के बेटे को सिर्फ इसलिए खो दिया क्योंकि एक अस्पताल से दूसरे तक रेफर करते-करते लचर सरकारी स्वास्थ्य तंत्र ने कीमती समय गंवा दिया।

गढ़वाल-कुमाऊं के ग्वालदम, बैजनाथ, बागेश्वर, अल्मोड़ा और हल्द्वानी के अस्पतालों के डॉक्टर मासूम को नहीं बचा सके। उन्होंने हायर सेंटर भेजकर अपनी जिम्मेदारी से हाथ खींच लिए। गढ़वाल मंडल के सुदूर चमोली जिले के चिडंगा गांव के निवासी और वर्तमान में जम्मू-कश्मीर में तैनात सैनिक दिनेश चंद्र के लिए 10 जुलाई की रात कभी न भूलने वाली बन गई। दोपहर बाद उनके डेढ़ साल के बेटे शुभांशु जोशी की अचानक तबीयत बिगड़ने लगी। मां और पत्नी उसे लेकर ग्वालदम अस्पताल पहुंचीं लेकिन वहां इलाज नहीं मिल सका। वहां से बच्चे को कुमाऊं मंडल के बैजनाथ अस्पताल और फिर बागेश्वर के लिए रेफर कर दिया गया। कलेजे के टुकड़े को सीने से लगाए घरवाले धरती और आसमान दोनों के भगवानों से मिन्नतें करते रहे। बागेश्वर जिला अस्पताल में शाम छह बजे भर्ती बच्चे की हालत गंभीर बताते हुए डॉक्टर ने उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया।

 

डीएम को सुनाया दुखड़ा तब मिली एंबुलेंस
बेटे के अंतिम संस्कार के बाद दिनेश ने सोशल मीडिया पर एक मार्मिक वीडियो साझा किया। इसमें कहा कि बागेश्वर में जब परिजनों ने 108 एंबुलेंस के लिए कॉल किया तो सिर्फ आश्वासन मिला। एक घंटा बीत गया। बच्चा तड़प रहा था और एंबुलेंस का कोई पता नहीं था। आखिरकार उन्होंने खुद डीएम को फोन कर मदद मांगी। उनके आदेश पर रात साढ़े नौ बजे एंबुलेंस मिली। बच्चे को अल्मोड़ा ले जाया गया लेकिन वहां से हल्द्वानी रेफर कर दिया गया। बच्चे को हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल लेकर पहुंचे लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। वहां शुभांशु की सांसें टूट गईं। अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लेने की बात कही है। अथाह पीड़ा से गुजर रहे परिजनों का कहना है कि अब किसी जांच से क्या होगा जब जिंदगी ही चली गई।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो पर परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच की जाएगी। 108 सेवा के प्रभारी को नोटिस भेजकर सेवा को दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। शिकायती पत्र मिलने के वाद पूरे प्रकरण की जांच की जाएगी। जो भी स्वास्थ्य कर्मी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। -डॉ. कुमार आदित्य तिवारी, सीएमओ, बागेश्वर

अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति घोटाले की जांच को एसआईटी गठित

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देहरादून। राज्य में अल्पसंख्यक छात्रों के लिए संचालित छात्रवृत्ति योजना में करोड़ों रुपये के गबन का मामला उजागर होने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विशेष जांच टीम (एसआईटी) से जांच कराने के निर्देश दिए हैं। सीएम ने साफ कहा कि इस घोटाले में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

सरकार की प्रारंभिक जांच में पाया गया कि 2021–22 और 2022–23 के दौरान कई संस्थानों ने फर्जी दस्तावेज और गलत सूचनाओं के आधार पर छात्रवृत्ति की भारी-भरकम रकम हड़प ली। इन संस्थाओं में मदरसे, संस्कृत विद्यालय और अन्य निजी स्कूल-कॉलेज शामिल हैं।

केंद्र सरकार से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, राज्य की 92 संस्थाओं पर संदेह है, जिनमें से 17 में गबन की पुष्टि हो चुकी है। ऊधमसिंहनगर का सरस्वती शिशु मंदिर हाई स्कूल और रुद्रप्रयाग का एक महाविद्यालय भी अनियमितताओं में शामिल पाया गया। कई मामलों में फर्जी आधार कार्ड, निवास प्रमाणपत्र और छात्रों की मनगढ़ंत सूची तैयार कर पैसा निकाला गया।

एसआईटी अब नैनीताल, हरिद्वार और अन्य जिलों की संस्थाओं के साथ-साथ संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच करेगी। केंद्र सरकार ने सात बिंदुओं पर जांच के निर्देश दिए हैं, जिनमें दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करना भी शामिल है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्रवृत्ति जैसी कल्याणकारी योजना में भ्रष्टाचार करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।

पाखरो रेंज घोटाला: ईडी ने चार अफसरों पर मनी लॉन्ड्रिंग में दाखिल की चार्जशीट

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जिम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की पाखरो रेंज में हुए बहुचर्चित घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को चार अधिकारियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में चार्जशीट दाखिल कर दी।
आरोपियों में तत्कालीन डीएफओ किशनचंद, तत्कालीन डीएफओ अभिषेक तिवारी, रेंजर बृज बिहारी शर्मा और रेंजर मथुरा सिंह मावदी शामिल हैं।
इस मामले में तत्कालीन वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत की भूमिका की भी जांच हो रही है।
घोटाले में बड़े अधिकारियों के नाम भी सामने आए थे। विभागीय जवाब तलब का खेल भी कुछ समय चला था। लेकिन फिलहाल डीएफओ व रेंज स्तर के अधिकारियों की मिलीभगत पायी गयी।

ईडी की जांच में सामने आया कि इन अधिकारियों ने मिलीभगत कर पाखरो रेंज में टाइगर सफारी के नाम पर अवैध निर्माण कराया और सरकारी धन का दुरुपयोग करते हुए करोड़ों की संपत्ति जुटाई।
ईडी ने इसी महीने किशनचंद के बेटों और बृज बिहारी शर्मा की पत्नी के नाम पर अर्जित करीब 1.75 करोड़ की संपत्ति अटैच की है।

 

क्या है मामला?

साल 2019 में पाखरो रेंज की 106 हेक्टेयर वन भूमि पर टाइगर सफारी बनाने का काम बिना किसी वित्तीय मंजूरी के शुरू कर दिया गया। पेड़ों की कटाई और अवैध निर्माण की शिकायत पर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने निरीक्षण किया, जिसमें भारी अनियमितताएं पाई गईं।
जांच में खुलासा हुआ कि इस योजना के नाम पर करीब 215 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए। पहले विजिलेंस और फिर सीबीआई ने मुकदमा दर्ज किया और चार्जशीट दाखिल की। अब ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच करते हुए चार अधिकारियों को आरोपी बनाया है।

हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: दो जगह वोटर लिस्ट में नाम वालों पर रोक

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नैनीताल। हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग को तगड़ा झटका दिया है। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य में होने वाले पंचायत चुनाव को लेकर अहम आदेश दिया है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि जिन उम्मीदवारों के नाम शहर और गाँव — दोनों जगह की वोटर लिस्ट में दर्ज हैं, वे पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। ऐसे मामलों में तुरंत रोक लगाने के निर्देश देते हुए कोर्ट ने कहा कि यह आदेश चुनाव प्रक्रिया को बाधित नहीं करता, बल्कि चुनावी नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए है।पंचायत चुनाव नाम वापसी के आखिरी दिन हाईकोर्ट के आदेश से  खलबली मची है।

 

गौरतलब है कि 6 जुलाई को राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव के आदेश में नगर निकाय क्व मतदाताओं का पंचायत चुनाव लड़ने का रास्ता साफ ही गया था।

हालांकि, बाद में सचिव ने एक और आदेश जारी कर कहा कि पंचायती राज एक्ट के हिसाब से होंगे चुनाव।

इधऱ, इन आदेशों के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने 6 जुलाई के आदेश पर रोक लगा दी।

इधऱ, यह भी काबिलेगौर है कि 11 जुलाई ,शुक्रवार को नाम वापसी का अंतिम दिन है। ऐसे में हाईकोर्ट के स्टे के बाद राज्य निर्वाचन आयोग प्रतिबंधित दावेदारों को अब चुनाव लड़ने से कैसे रोक पायेगा?

नैनीताल के बुडलकोट क्षेत्र में 51 बाहरी लोगों के नाम वोटर लिस्ट में शामिल करने के मामले में भी सरकार से जवाब मांगा गया है। अदालत के इस आदेश से कई प्रत्याशियों की दावेदारी पर असर पड़ सकता है।

‘यह सिर्फ एक सीन था’ कहकर फंसे राठौर, कांग्रेस ने पूछा– कारवां लुटा कैसे?

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 उत्तराखंड की सियासत इन दिनों एक अनोखे ‘प्रेम प्रसंग’ को लेकर गर्म है, जिसमें अभिनय, सियासत, महिला सम्मान और नैतिकता के तमाम आयाम एक साथ उलझे हुए हैं। चर्चित भाजपा नेता और हरिद्वार जिले के ज्वालापुर से पूर्व विधायक सुरेश राठौर हाल ही में उर्मिला सनावर (फिल्म अभिनेत्री) के साथ मंच साझा करते हुए उसे “अपने जीवन की साथी” बता बैठे। कैमरे और माइक के सामने रिश्तों का यह सार्वजनिक ऐलान कुछ ही घंटों में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

लेकिन हंगामा बढ़ते ही राठौर पलट गए। सफाई दी कि “यह तो बस एक फिल्म का सीन था”। इस सफाई ने आग में घी डालने का काम किया। सवाल उठने लगे कि क्या अब भाजपा नेताओं की सार्वजनिक घोषणाएं भी किसी स्क्रिप्ट का हिस्सा हैं? और अगर यह अभिनय था तो मंच, माला और सार्वजनिक संवाद किसलिए?

 

 

प्रकरण गरमाया तो भाजपा ने भी पैंतरा बदला। पहले चुप्पी साधे रही, फिर जनदबाव बढ़ने पर राठौर को पार्टी की छवि धूमिल करने और अनुशासनहीनता के आरोप में नोटिस थमा दिया गया। राठौर ने प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट से भेंट कर अपना पक्ष रखा है, जिस पर पार्टी विचार कर रही है।

लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस को हमलावर होने का मौका दे दिया।
पार्टी की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा, “नाटक, झूठ और पाखंड की शैली से जनता को भ्रमित नहीं किया जा सकता।” उन्होंने तंज कसते हुए पूछा, “तू इधर-उधर की बात न कर, ये बता कारवां लुटा कैसे?”

गरिमा ने भाजपा से पूछा कि क्या यह पहला मामला है जब पार्टी के नेता महिलाओं से जुड़े विवादों में फंसे हों? क्या हर बार कार्रवाई तब होती है जब जनता का गुस्सा उबाल पर आ जाता है? और क्या UCC जैसे कानूनों का हवाला सिर्फ जनता को उलझाने के लिए दिया जाता है?

भाजपा की ओर से प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान ने स्पष्ट किया कि पार्टी किसी भी प्रकार के अमर्यादित आचरण को स्वीकार नहीं करती। उन्होंने बताया कि अनुशासन समिति में राठौर के मामले पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।

सियासत और व्यक्तिगत जीवन की यह जटिल गाथा एक ओर राजनीति के चरित्र पर सवाल खड़े कर रही है, तो दूसरी ओर दर्शा रही है कि अब जनता केवल भाषणों से नहीं, आचरण से भी जवाब मांगती है।

पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट की रोक बरकरार,सभी याचिकाओं को किया गया क्लब

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उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों पर लगी अंतरिम रोक को फिलहाल बरकरार रखा है। राज्य सरकार की ओर से आज मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ के समक्ष स्टे वेकेशन (रोक हटाने) का अनुरोध किया गया, जिसे खंडपीठ ने बुधवार दोपहर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।

गौरतलब है कि राज्य निर्वाचन आयुक्त ने 21 जून को प्रदेश के 12 जिलों में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों का कार्यक्रम जारी कर चुके हैं। लेकिन बीते सोमवार को हाईकोर्ट ने पंचायत आरक्षण के मुद्दे को लेकर चुनावों पर रोक लगा दी। इससे सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा। इस मसले पर नौकरशाही की ढिलाई भी सामने आ रही है।

इधऱ, मामले में अब तक दायर की गई सभी याचिकाओं को एक साथ क्लब कर बुधवार को सुनवाई की जाएगी। हाईकोर्ट ने सरकार को सुनवाई में अपना पक्ष स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।

गौरतलब है कि पिछले सप्ताह कोर्ट ने पंचायत चुनावों में आरक्षण प्रक्रिया को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए चुनावी प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी थी। याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि सरकार ने आरक्षण रोस्टर और अधिसूचना प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की है, जिससे संवैधानिक प्रक्रिया पर प्रश्नचिन्ह लग गया है।

अब बुधवार की सुनवाई से यह तय होगा कि क्या अदालत पंचायत चुनावों पर लगी रोक हटाती है या मामले में कोई अंतरिम व्यवस्था जारी रखती है।
बहरहाल, प्रत्याशी 25 जून से भरे जाने वाले नामांकन की तैयारी कर रहे थे। अब भारी असमंजस का मंजर देखने को मिल रहा है।