देहरादून। राज्य में अल्पसंख्यक छात्रों के लिए संचालित छात्रवृत्ति योजना में करोड़ों रुपये के गबन का मामला उजागर होने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विशेष जांच टीम (एसआईटी) से जांच कराने के निर्देश दिए हैं। सीएम ने साफ कहा कि इस घोटाले में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
सरकार की प्रारंभिक जांच में पाया गया कि 2021–22 और 2022–23 के दौरान कई संस्थानों ने फर्जी दस्तावेज और गलत सूचनाओं के आधार पर छात्रवृत्ति की भारी-भरकम रकम हड़प ली। इन संस्थाओं में मदरसे, संस्कृत विद्यालय और अन्य निजी स्कूल-कॉलेज शामिल हैं।
केंद्र सरकार से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, राज्य की 92 संस्थाओं पर संदेह है, जिनमें से 17 में गबन की पुष्टि हो चुकी है। ऊधमसिंहनगर का सरस्वती शिशु मंदिर हाई स्कूल और रुद्रप्रयाग का एक महाविद्यालय भी अनियमितताओं में शामिल पाया गया। कई मामलों में फर्जी आधार कार्ड, निवास प्रमाणपत्र और छात्रों की मनगढ़ंत सूची तैयार कर पैसा निकाला गया।
एसआईटी अब नैनीताल, हरिद्वार और अन्य जिलों की संस्थाओं के साथ-साथ संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच करेगी। केंद्र सरकार ने सात बिंदुओं पर जांच के निर्देश दिए हैं, जिनमें दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करना भी शामिल है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्रवृत्ति जैसी कल्याणकारी योजना में भ्रष्टाचार करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
जिम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की पाखरो रेंज में हुए बहुचर्चित घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को चार अधिकारियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में चार्जशीट दाखिल कर दी।
आरोपियों में तत्कालीन डीएफओ किशनचंद, तत्कालीन डीएफओ अभिषेक तिवारी, रेंजर बृज बिहारी शर्मा और रेंजर मथुरा सिंह मावदी शामिल हैं।
इस मामले में तत्कालीन वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत की भूमिका की भी जांच हो रही है।
घोटाले में बड़े अधिकारियों के नाम भी सामने आए थे। विभागीय जवाब तलब का खेल भी कुछ समय चला था। लेकिन फिलहाल डीएफओ व रेंज स्तर के अधिकारियों की मिलीभगत पायी गयी।
ईडी की जांच में सामने आया कि इन अधिकारियों ने मिलीभगत कर पाखरो रेंज में टाइगर सफारी के नाम पर अवैध निर्माण कराया और सरकारी धन का दुरुपयोग करते हुए करोड़ों की संपत्ति जुटाई।
ईडी ने इसी महीने किशनचंद के बेटों और बृज बिहारी शर्मा की पत्नी के नाम पर अर्जित करीब 1.75 करोड़ की संपत्ति अटैच की है।
क्या है मामला?
साल 2019 में पाखरो रेंज की 106 हेक्टेयर वन भूमि पर टाइगर सफारी बनाने का काम बिना किसी वित्तीय मंजूरी के शुरू कर दिया गया। पेड़ों की कटाई और अवैध निर्माण की शिकायत पर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने निरीक्षण किया, जिसमें भारी अनियमितताएं पाई गईं।
जांच में खुलासा हुआ कि इस योजना के नाम पर करीब 215 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए। पहले विजिलेंस और फिर सीबीआई ने मुकदमा दर्ज किया और चार्जशीट दाखिल की। अब ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच करते हुए चार अधिकारियों को आरोपी बनाया है।
शासन ने अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति घोटाले के मामले में रडार पर आए संस्थानों का दोबारा सत्यापन कराने का फैसला किया है। इसके अलावा जांच के दौरान रुद्रप्रयाग में वासुकेदार में संस्कृत महाविद्यालय में गड़बड़ी मिली है, यह संस्थान एक विशेष समुदाय के व्यक्ति द्वारा चलाया जा रहा था।यहां पर पश्चिम बंगाल के 24 परगना के रहने वाले छात्राओं का पंजीकरण कराया गया था। मई में शासन ने राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल के विश्लेषण में संदिग्ध पाए गए 92 संस्थानों और स्कूलों में जांच के आदेश दिए थे।
जांच में 92 संस्थानों में से 17 संस्थानों में अल्पसंख्यक छात्रों की छात्रवृत्ति में गड़बड़ी का पता चला था। प्रकरण में शासन ने अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय को जांच रिपोर्ट भेज दी थी। अब शासन ने जांच की रडार पर आए संस्थानों का दोबारा सत्यापन कराने का फैसला किया है, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते कहते हैं कि यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि जांच के दौरान त्रुटिवश कोई संस्थान बच तो नहीं गया है। इस संबंध में जिलाधिकारियों को पत्र भेजा गया है।
दूसरे राज्य के छात्राओं के पंजीकरण का मामला सामने आया
अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति घोटाले की जांच के दौरान रुद्रप्रयाग जिले से जुड़ा मामला सामने आया है। यहां पर विशेष समुदाय के व्यक्ति द्वारा वासुकेदार में श्री सरस्वती संस्कृति महाविद्यालय संस्थान संचालित किया जा रहा था। इस संस्थान में जांच के दौरान दो छात्राएं पश्चिम बंगाल की थी, जिनका संबंधित संस्थान से पंजीकरण कराया गया था। विशेष सचिव डॉ. धकाते कहते हैं कि जांच में पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों के छात्रों के पंजीकरण की बात सामने आई है। इस संस्थान का संचालन नसरुद्दीन नामक व्यक्ति कर रहा था। प्रकरण में जांच के दौरान जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर कार्रवाई होगी।
कांग्रेस नेता और उत्तराखंड के पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने ईडी की कार्रवाई पर जोरदार पलटवार किया है। उन्होंने साफ कहा कि अगर कोर्ट में उन पर लगे आरोप साबित हो जाते हैं तो वे राजनीति से हमेशा के लिए संन्यास ले लेंगे। लेकिन अगर अदालत में निर्दोष साबित हुए तो इस “साजिश” में शामिल लोगों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा करेंगे।
कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस वार्ता के दौरान हरक सिंह ने अपने विरोधियों को चेताते हुए कहा, “मैं न दबने वाला हूं, न झुकने वाला। जितनी भी साजिशें कर लो, मैं लड़ता रहूंगा।”
हरक सिंह ने कहा कि वो दूध के धुले नहीं है। लेकिन सहसपुर मामले में उनकी कोई गलती नहीं है। ईडी ने गलत मुद्दे।पर छेड़ दिया जैसे सीबीआई ने 2003 के जेनी प्रकरण में मुझे फंसाया था। बाद में मुझे क्लीन चिट मिली थी।
उन्होंने ईडी की कार्रवाई को बदले की भावना से प्रेरित बताते हुए कहा कि सहसपुर की विवादित जमीन उन्होंने 2002 में पूरी तरह कानूनी तरीके से खरीदी थी। इस जमीन का रिकॉर्ड 1962 से पूर्व मालिक के नाम पर दर्ज था और सारे दस्तावेज उनके पास मौजूद हैं।
हरक सिंह ने याद दिलाया कि इस मामले की जांच पहले भाजपा सरकार में और फिर कांग्रेस की सरकार में हो चुकी है, लेकिन किसी भी जांच में कोई ठोस सबूत नहीं मिला। अब मामला कोर्ट के सामने है और उन्हें पूरी उम्मीद है कि न्याय मिलेगा।
उन्होंने ईडी को खुली चुनौती देते हुए कहा कि अगर एजेंसी आरोप साबित कर दे, तो वे तुरंत राजनीति से संन्यास ले लेंगे। लेकिन अगर निर्दोष निकले तो कानूनी लड़ाई लड़कर साजिश रचने वालों को बेनकाब करेंगे।
भाजपा पर हमला करते हुए हरक सिंह ने कहा कि पार्टी अब अपने आदर्शों से भटक चुकी है और विरोधियों के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा छोड़ने का उन्हें कोई मलाल नहीं है।
गौरतलब है कि शुक्रवार को ईडी ने मनी लांड्रिंग के केस में पूर्व मंत्री हरक सिंह समेत पांच लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है।
ईडी की कार्रवाई भाजपा की राजनीतिक साजिश का हिस्सा- धस्माना
देहरादून । उत्तराखंड कांग्रेस के उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दायर आरोप पत्र को राजनीतिक साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा पूरे देश में ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग जैसी केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है ताकि विपक्ष की आवाज को दबाया जा सके।
धस्माना ने सवाल किया कि हरक सिंह रावत जब लंबे समय तक भाजपा में मंत्री थे, तब उनके खिलाफ कोई जांच या कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उन्होंने कहा, “अगर आज भी हरक सिंह भाजपा में होते, तो क्या उनके खिलाफ यह कार्रवाई होती? निश्चित रूप से नहीं।”
कांग्रेस नेता ने विश्वास जताया कि अदालत में हरक सिंह रावत को न्याय मिलेगा। “उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है। वे इस मामले में साफ निकल कर आएंगे,” धस्माना ने कहा।
उन्होंने केंद्र सरकार पर केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर राजनीतिक बदले की भावना से कार्रवाई करने का आरोप लगाया और कहा कि कांग्रेस इसका पुरज़ोर विरोध करेगी।
उत्तराखण्ड पेयजल निगम के अध्यक्ष शैलेश बगोली ने कर्मचारी आचरण नियमावली के उल्लंघन पर सुजीत कुमार विकास (प्रभारी मुख्य अभियंता (कु0) मूल पद अधीक्षण अभियंता उत्तराखण्ड़ पेयजल निगम हल्द्वानी) को तत्काल प्रभाव से निलम्बित कर दिया।
निलंबन आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सुजीत कुमार विकास के विरूद्ध संजय कुमार पुत्र चन्द्रपाल सिंह ने अपने शिकायती-पत्र में उल्लेख किया है कि वह पानी की योजनाओं में पेटी पर कार्य करता है। वर्ष 2022 में सुजीत कुमार विकास, तत्कालीन अधीक्षण अभियन्ता, निर्माण मण्डल, उत्तराखण्ड पेयजल निगम, देहरादून ने संजय कुमार की फर्म मै० हर्ष इन्टरप्राईजेज का उत्तराखण्ड पेयजल निगम में पंजीकरण करवाने एवं विभाग में कार्य दिलाने का आश्वासन दिया।
इसके एवज में सुजीत कुमार विकास के कहने पर संजय कुमार ने अपनी प्रोपराइटरशिप फर्म मै० हर्ष इन्टरप्राइजेज के माध्यम से बैंक ऑफ बडौदा, फॉयर स्टेशन के पास बाजपुर रोड, काशीपुर के बैंक खाता सं० 53930200001457 से मै० कुचु-पुचु इंटरप्राइजेज के कोटक महिन्द्रा बैंक खाते में दिनांक 06.07.2022. दिनांक 06.07.2022. दिनांक 07.07.2022, दिनांक 07.07.2022 एवं दिनांक 08.06.2022 को रू0 2.00 लाख की पांच किस्तों में कुल रू0 10.00 लाख, स्थानान्तरित किये गये।
विभाग में उपलब्ध अभिलेखों के अवलोकन से ज्ञात होता है कि मै० कुचु-पुचु इन्टरप्राइजेज, वह फर्म है, जिसकी पार्टनर सुजीत कुमार विकास की पत्नी श्रीमती रंजु कुमारी हैं। सुजीत कुमार विकास को स्पष्टीकरण हेतु 15 दिनों का समय दिया गया था, परन्तु सुजीत कुमार विकास द्वारा आतिथि तक कोई प्रत्युत्तर प्रस्तुत नहीं किया गया है।
अध्यक्ष उत्तराखण्ड पेयजल निगम द्वारा स्पष्ट किया गया है कि सुजीत कुमार विकास के विरुद्ध उपरोक्त आरोप बेहद गम्भीर प्रकृति के हैं तथा सुजीत कुमार विकास द्वारा किया गया उपरोक्त कृत्य उत्तराखण्ड पेयजल निगम कर्मचारी आचरण विनियमावली का स्पष्ट उल्लंघन होना दर्शाता है। सुजीत कुमार विकास के प्रभारी मुख्य अभियन्ता (कु०), हल्द्वानी के पद पर बने रहने से विभाग के अन्य अधिकारियों/कर्मचारियों के कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है।
अतः उत्तराखण्ड पेयजल निगम कार्मिक (अनुशासन एवं अपील) विनियमावली में निहित प्राविधानों के तहत सुजीत कुमार विकास, अधीक्षण अभियंता को तत्काल प्रभाव से निलम्बित किया जाता है।
निलम्बन की अवधि में सुजीत कुमार विकास, कार्यालय महाप्रबंधक (प्रशिक्षण), मानव संसाधन प्रकोष्ठ, उत्तराखण्ड पेयजल निगम, रूडकी में सम्बद्ध रहेंगे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विजिलेंस को भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्यवाही के लिए खुली छूट प्रदान की हुई है। इसका असर, साल दर साल बढ़ते विजिलेंस ट्रैप और गिरफ्तारियों की संख्या में रूप में नजर आ रहा है। यही नहीं मजबूत साक्ष्य के आधार विजिलेंस गत साढ़े चार साल में 71 प्रतिशत मामलों में आरोपियों को कोर्ट से सजा दिलाने में कामयाब रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य का पदभार संभालते ही भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टालरेंस पर रुख साफ कर दिया था।
बीते चार साल में बडे से बड़े आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। आंकड़ों पर गौर करें तो राज्य में साल दर साल विजिलेंस ट्रैप और गिरफ्तारियों के साथ ही सजा के मामले भी बढ़ते जा रहे हैं। इस दौरान विजिलेंस ने कुल 82 ट्रैप में 94 गिरफ्तारियों को अंजाम दिया, जिसमें 13 राजपत्रित अधिकारी शामिल हैं। बीते साढ़े चार साल से विजिलेंस के पास कुल 125 शिकायतें प्राप्त हुई, जिसमें 18 में सामान्य जांच, 25 में खुली जांच के बाद 82 ट्रैप किए गए। गिरफ्तारी के बाद विजिलेंस ठोस साक्ष्य और मजबूत पैरवी से कोर्ट में सजा की दर को भी 71 प्रतिशत तक ले जान में कामयाब रही है। इससे साफ है कि सरकार भ्रष्टाचार की समस्या को जड़ से खत्म करने के मिशन पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर सतर्कता विभाग ने शिकायत दर्ज कराने के लिए टोल फ्री नम्बर 1064 भी जारी किया है। यही नहीं मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को अंतिम फैसला आने तक आरोपियों को पूर्व के दायित्व या अहम जिम्मेदारी नहीं देने के साथ ही ट्रैप के मामलों में अभियोजन की प्रक्रिया में तेजी जाने के निर्देश दिए हैं।
भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार जारी
वर्ष गिरफ्तारी निर्णय सजा 2021 07 02 02
2022 15 03 01
2023 20 18 16
2024 38 13 07
2025 14 03 02
(नोट साल 2025 के आंकड़े जुलाई 15 तक के हैं)
बड़े बड़ों को किया गिरफ्तार
01 – लोनिवि एई
नैनीताल जिले में लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता को ठेकेदार से ₹10 हजार रिश्वत मांगने पर रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया ।
02 – यूपीसीएल जेई
देहरादून के हरबर्टपुर सब स्टेशन के एक जेई को विजिलेंस ने ₹15000 की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया।
03 – एलआईयू कर्मी
नैनीताल जिले के रामनगर में विजिलेंस की टीम ने एलआईयू के उप निरीक्षक और मुख्य आरक्षी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया।
04 -रोडवेज एजीएम
काशीपुर में रोडवेज सहायक महाप्रबंधक को अनुबंधित बस संचालन के बदले 90 हजार रुपए रिश्वत लेते गिरफ्तार किया।
05 – खंड शिक्षा अधिकारी
हरिद्वार के खानपुर ब्लॉक में खंड शिक्षा अधिकारी को ₹10 हजार की घूस लेते गिरफ्तार किया गया।
06 – जीएसटी सहायक आयुक्त
देहरादून में कार्यरत जीएसटी सहायक आयुक्त को 75 हजार की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया।
07 – जिला आबकारी अधिकारी
रुद्रपुर में तैनात जिला आबकारी अधिकारी को शराब कारोबारी से 10 लाख रुपए के माल के एवज में 10 फीसदी रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया।
हम देवभूमि उत्तराखंड को भ्रष्टाचार मुक्त करते हुए, सुशासन की कार्य संस्कृति विकसित करना चाहते हैं। इसी क्रम में मुख्य सेवक के रूप में कार्यभार संभालने के दिन से ही विजिलेंस को भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान छेड़ने के निर्देश दिए, जिसका असर अब नजर आ रहा है। भ्रष्टाचारियों को अंतिम अदालत सजा दिलाए जाने के लिए भी मजबूत पैरवी की जा रही है। पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड
देहरादून। मुख्यमंत्री के निर्देश पर चलाए जा रहे “ऑपरेशन कालनेमि” के तहत दून पुलिस ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए साधु-संतों का भेष धरकर लोगों को ठगने वाले 25 ढोंगी बाबाओं को गिरफ्तार किया। इनमें एक बांग्लादेशी नागरिक भी शामिल है, जिस पर विदेशी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।
एसएसपी खुद नेहरू कॉलोनी क्षेत्र में पहुंचे और सड़क किनारे बैठे बाबाओं से पूछताछ की। ज्योतिष विद्या और साधु परंपरा का कोई प्रमाण न देने पर उन्होंने मौके पर ही पुलिस को कार्यवाही के निर्देश दिए।
विभिन्न थाना क्षेत्रों में पुलिस ने फर्जी बाबाओं को गिरफ्तार किया, जिनमें 20 से अधिक अन्य राज्यों के हैं।
गिरफ्तारियां:
बांग्लादेशी नागरिक रूकन रकम उर्फ शाह आलम (26), प्रदीप (सहारनपुर), अजय चौहान (सहारनपुर), अनिल गिरी (हिमाचल), मंगल सिंह और रोझा सिंह (देहरादून), कोमल कुमार व अश्वनी कुमार (हाथरस), राजानाथ (देहरादून), रामकृष्ण और शौकीनाथ (यमुनानगर), मदन सिंह (चंपावत/हरिद्वार), राहुल जोशी (बिजनौर/देहरादून), मोहम्मद सलीम (हरिद्वार), और अन्य राजस्थान, असम, उत्तर प्रदेश व हरिद्वार के निवासी शामिल हैं।
एसएसपी ने बताया कि ऐसे फर्जी बाबाओं के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी ताकि देवभूमि में धर्म के नाम पर ठगी और आस्था से खिलवाड़ करने वालों पर सख्त शिकंजा कसा जा सके।
उत्तराखंड की सियासत इन दिनों एक अनोखे ‘प्रेम प्रसंग’ को लेकर गर्म है, जिसमें अभिनय, सियासत, महिला सम्मान और नैतिकता के तमाम आयाम एक साथ उलझे हुए हैं। चर्चित भाजपा नेता और हरिद्वार जिले के ज्वालापुर से पूर्व विधायक सुरेश राठौर हाल ही में उर्मिला सनावर (फिल्म अभिनेत्री) के साथ मंच साझा करते हुए उसे “अपने जीवन की साथी” बता बैठे। कैमरे और माइक के सामने रिश्तों का यह सार्वजनिक ऐलान कुछ ही घंटों में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
लेकिन हंगामा बढ़ते ही राठौर पलट गए। सफाई दी कि “यह तो बस एक फिल्म का सीन था”। इस सफाई ने आग में घी डालने का काम किया। सवाल उठने लगे कि क्या अब भाजपा नेताओं की सार्वजनिक घोषणाएं भी किसी स्क्रिप्ट का हिस्सा हैं? और अगर यह अभिनय था तो मंच, माला और सार्वजनिक संवाद किसलिए?
प्रकरण गरमाया तो भाजपा ने भी पैंतरा बदला। पहले चुप्पी साधे रही, फिर जनदबाव बढ़ने पर राठौर को पार्टी की छवि धूमिल करने और अनुशासनहीनता के आरोप में नोटिस थमा दिया गया। राठौर ने प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट से भेंट कर अपना पक्ष रखा है, जिस पर पार्टी विचार कर रही है।
लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस को हमलावर होने का मौका दे दिया।
पार्टी की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा, “नाटक, झूठ और पाखंड की शैली से जनता को भ्रमित नहीं किया जा सकता।” उन्होंने तंज कसते हुए पूछा, “तू इधर-उधर की बात न कर, ये बता कारवां लुटा कैसे?”
गरिमा ने भाजपा से पूछा कि क्या यह पहला मामला है जब पार्टी के नेता महिलाओं से जुड़े विवादों में फंसे हों? क्या हर बार कार्रवाई तब होती है जब जनता का गुस्सा उबाल पर आ जाता है? और क्या UCC जैसे कानूनों का हवाला सिर्फ जनता को उलझाने के लिए दिया जाता है?
भाजपा की ओर से प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान ने स्पष्ट किया कि पार्टी किसी भी प्रकार के अमर्यादित आचरण को स्वीकार नहीं करती। उन्होंने बताया कि अनुशासन समिति में राठौर के मामले पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
सियासत और व्यक्तिगत जीवन की यह जटिल गाथा एक ओर राजनीति के चरित्र पर सवाल खड़े कर रही है, तो दूसरी ओर दर्शा रही है कि अब जनता केवल भाषणों से नहीं, आचरण से भी जवाब मांगती है।
जमीन घोटाले में फंसे हरिद्वार नगर निगम के पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी के 16 माह के कार्यकाल का विशेष ऑडिट होगा। इसके लिए ऑडिट निदेशालय ने दो पर्यवेक्षक अधिकारी और विशेष लेखा परीक्षा दल का गठन कर दिया है। इस टीम को 15 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट देनी है।
हरिद्वार में नगर निगम पर कूड़े के ढ़ेर के पास स्थित अनुपयुक्त और सस्ती 35 बीघा कृषि भूमि को बिना आवश्यकता 54 करोड़ रुपये में खरीदने के मामले में निलंबित चल रहे आईएएस वरुण चौधरी की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर बृहस्पतिवार को निदेशालय लेखा परीक्षा ने वरुण चौधरी के 25 नवंबर 2023 से 20 मार्च 2025 तक के बतौर नगर आयुक्त कार्यकाल का विशेष ऑडिट करने के लिए समिति का गठन कर दिया। इसके लिए उप निदेशक विजय प्रताप सिंह को पर्यवेक्षक अधिकारी और सहायक निदेशक रजत मेहरा को सहायक पर्यवेक्षक अधिकारी नियुक्त किया गया है।
वहीं, विशेष ऑडिट समिति लेखा परीक्षा अधिकारी किशन सिंह बिष्ट के नेतृत्व में गठित की गई है, जिसमें लेखा परीक्षा अधिकारी संजय गुप्ता, ओम प्रकाश, सहायक लेखा परीक्षा अधिकारी भूपेंद्र सिंह और वरिष्ठ लेखा परीक्षक विमल मित्तल को शामिल किया गया है। इस समिति को 15 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट देनी है। इस दौरान समिति से जुड़े सभी अधिकारी अन्य कार्यों से मुक्त रहेंगे। उन्हें नगर निगम की ओर से अलग से कार्यालय उपलब्ध कराया जाएगा। दोनों पर्यवेक्षक अधिकारियों की निगरानी में ऑडिट होगा।
उत्तराखंड भाजपा की डबल इंजन की सरकार लगभग चार साल पुरे करने वाली है,,,अभी वर्तमान में भाजपा के कई मंत्री पद खाली हैं,,,पूर्व में वित्त मंत्री रहे प्रेमचंद अग्रवाल विवाद के चलते अपना पद गवां चुके हैं,,,कई और मंत्री हैं जिनके विभागों के कामकाज को लेकर सवाल उठ रहे हैं,,, ऐसे में पहले से ही मंत्रियों का टोटा झेल रही भाजपा सरकार के एक और मंत्री गणेश जोशी फिर से चर्चाओं में आ गए हैं,,,अभी उनके विभाग की टेंडर प्रक्रिया में भी उन पर सवाल उठे हैं ,,जिस पर काफी बवाल हुआ ही है ,,,लेकिन जिस मुद्दे ने उनकी मुश्किलें सबसे ज्यादा बढ़ा दी हैं पहले उस पर बात कर लेते हैं.
अब चूँकि पहले से ही भाजपा की डबल इंजन की सरकार के कई मंत्री सवालों के घेरे में हैं,,,और उस पर गणेश जोशी जो भाजपा सरकार में कई अहम मंत्रालय संभाल रहे हैं,, उनकी मुश्किलों में इजाफा होना तो चिंता का विषय सरकार के लिए है ही ,,,और इस बार तो किसी विपक्षी ने नहीं बल्कि माननीय कोर्ट ने उनकी मुश्किलों को बढ़ा दिया है,,,,दरअसल भाजपा मंत्री आय से अधिक सम्पति के मामले में घिरे हुए हैं,,,,और अब कोर्ट के आदेश ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं.
दरअसल कुछ समय पूर्व देहरादून के आरटीआई कार्यकर्ता और पेशे से वकील ,,विकेश सिंह नेगी ने नैनीताल हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया था कि मंत्री गणेश जोशी ने 2022 के विधानसभा चुनाव में अपने शपथ पत्र में 9 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की थी। नेगी का आरोप है कि यह संपत्ति जोशी की आय के ज्ञात स्रोतों से मेल नहीं खाती,,,,याचिकाकर्ता ने मंत्री गणेश जोशी की संपत्ति की विजिलेंस जांच की मांग की,,,, तत्पश्चात विशेष विजिलेंस कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार को 8 अक्टूबर 2024 तक इस पर निर्णय लेने का निर्देश दिया था,,,,, हालांकि, सरकार ने इस समय सीमा का पालन नहीं किया,,,, जिसके बाद मामला फिर से हाई कोर्ट पहुंचा,,,नैनीताल हाई कोर्ट ने गणेश जोशी को 23 जुलाई 2025 तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है,,,, कोर्ट ने सरकार से ये भी पूछा है कि क्या उनकी संपत्ति की जांच विजिलेंस को सौंपी जाएगी ?
ऐसे में गणेश जोशी का मामला न केवल उनके लिए बल्कि सरकार के लिए भी एक बड़ी उलझन बन गया है,,,,अब एक सवाल ये भी खड़ा हो गया है कि क्या मुख़्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस मामले में कोई ठोस फैसला लेकर विजिलेंस जांच की संस्तुति देंगे,,,जैसा की कोर्ट ने भी पूछा है,,,,दरअसल ये धामी सरकार की जीरो टोरलेंस निति की भी परीक्षा होगी,,,क्योंकि जिस तरह का एक्शन सरकार ने हरिद्वार नगर निगम घोटाले में लिया उससे धामी सरकार से उम्मीदें बढ़ी हैं,,,लेकिन सवाल इस बार मुख्यम्नत्री पुष्कर सिहं धामी के खुद के ही मंत्री के खिलाफ निर्णय लेने का है ,,,,,,सवाल ये भी है कि कोर्ट में सरकार क्या जवाब दाखिल करेगी ,,,,? दोस्तों अगर आपको भी लगता है की जीरो टॉलरेंस की नीति को अपनाते हुए क्या जवाब दाखिल करना चाहिए माननीय कोर्ट के समक्ष तो कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर रखें
मंत्री गणेश जोशी पर याचिकाकर्ता विकेश नेगी ने आरोप लगाया है कि जोशी ने बागवानी, जैविक खेती, विदेशी दौरों और निर्माणाधीन सैन्य धाम के निर्माण में गड़बड़ी और अनियमितताएं कीं, जिससे उनकी संपत्ति में असामान्य वृद्धि हुई,,, गणेश जोशी ने 2022 के विधानसभा चुनाव में अपने शपथ पत्र में लगभग 9 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की थी। इसमें चल और अचल संपत्ति दोनों शामिल हैं। 2018 में उनकी घोषित संपत्ति 3.19 करोड़ रुपये थी, जो 2022 में 9 करोड़ रुपये हो गई। यह वृद्धि आय से अधिक संपत्ति के आरोपों का आधार बनी,,,याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि जोशी ने बागवानी विभाग, जैविक खेती, और सैन्य धाम जैसे क्षेत्रों में सरकारी धन का दुरुपयोग कर संपत्ति अर्जित की है.
याचिका के समर्थन में विकेश नेगी ने कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी और उनके परिवार की संपत्तियों के ब्योरे उपलब्ध कराये हैं ,, इन आंकड़ों का आधार याचिकाकर्ता ने 2022 के चुनावी हलफनामे को बनाया है ,, एक्टिविस्ट विकेश नेगी की माने तो 15 वर्ष में मंत्री गणेश जोशी की कुल कमाई 35 लाख होनी चाहिए ,, क्यूंकि उन्होंने न तो अपना व्यवसाय है और न ही खेती है .
वैसे इस मामले में माननीय जोशी जी को अपने सहयोगी मंत्रिओं से कुछ सीख लेना चाहिए था ,, जो मंत्री विधायक होने के साथ साथ उत्तराखंड के किसान भी हैं ,, मतलब ऐसा उन्होंने अपनी आय के स्रोतों में ज़ाहिर किया है ,, व्यक्तिगत रूप से हम उन सभी मंत्रिओं से भी दरख्वास्त करेंगे की वो अपने सहयोगी मंत्री को खेती का ज्ञान दें ,, और इसी ज्ञान की गंगा को उत्तराखंड के किसानों तक भी पहुंचाएं ताकि उत्तराखंड का हर किसान इन सभी मंत्रिओं की तरह ही करोड़ों में खेल सके
नैनीताल हाई कोर्ट ने जोशी को 23 जुलाई 2025 तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं । कोर्ट ने याचिकाकर्ता से भी प्रति उत्तर मांगा है,,,इन सभी मामलों पर मंत्री गणेश जोशी ने इन आरोपों को “राजनीतिक साजिश” करार दिया और कहा कि यह उनकी छवि खराब करने की कोशिश है,,,,वैसे सिर्फ ऐसा नहीं है कि गणेश जोशी आय से अधिक सम्पति के मामले में विवादों में रहे हैं,,,बल्कि कई अन्य विवाद भी उनसे जुड़े हुए हैं,,,जोशी पर कई बार विवादास्पद बयान देने का आरोप लगा है। उदाहरण के लिए, 2022 में उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर अमर्यादित टिप्पणी की थी ,,,,जिस पर उनका खूब विरोध हुआ,,,इसके आलावा 2022 में चारधाम यात्रा के लिए आरटीपीसीआर टेस्ट अनिवार्य करने का उनका बयान विवादों में रहा, जिसे बाद में सीएम पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर खारिज कर दिया गया था ,,,
एक और मामला है जो गणेश जोशी को विवादों में लेकर जाता है ,, वो है उद्यान विभाग का घोटाला जो मुख्य रूप से 15 लाख पौधों की खरीद से जुड़ा है , इस मामले में आरोप है कि इन पौधों के खरीद करते समय कीमत से ज्यादा रकम अदा की गयी है ,,जो की 70 करोड़ बताई जाती है ,, करोड़ों रुपए के भुगतान में सीधे तौर पर फर्जीवाड़ा पकड़ा गया है. इस घोटाले में शासन की जांच के साथ ही हाई कोर्ट के समक्ष दायर याचिका में घोटाले से संबंधित तमाम आरोपों को पुष्ट किया जा चुका है. हाईकोर्ट ने ही इस घोटाले की सीबीआई जांच के आदेश दिए थे .वर्ष 2023 में चर्चित फल पौध खरीद घोटाले में सीबीआई ने जिस नर्सरी के खिलाफ एफआईआर कराई है।विभाग ने उसी नर्सरी को दोबारा फल पौध आवंटन का काम दिया।
इसके अलावा 2023 में जोशी के सामने एक युवक की पिटाई का वीडियो वायरल हुआ, जिसके बाद कांग्रेस ने उन पर कानून व्यवस्था बनाए रखने में निष्क्रियता का आरोप लगाया। 2024 में चुनाव प्रचार के दौरान जोशी को पूर्व सैनिकों और ग्रामीणों ने घेर लिया था , जिन्होंने उन पर पेयजल किल्लत जैसे स्थानीय मुद्दों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया,,,और वर्तमान में हाल ही में उन पर आरोप लगा कि जोशी के कृषि विभाग में टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता हुई, जहां टेंडर खुलने से पहले ही एक ठेकेदार ने एग्री मित्र मेला का काम शुरू कर दिया था,,,,हालाँकि जब इस मामले ने तूल पकड़ा तो सरकार ने ये मेला ही रद्द करवा दिया,,,,मेला रद्द होने से गड़बड़ी के आरोप को और बल मिला,,, जिस पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने गणेश जोशी का स्टैंड लेते हुए कहा कि ऐसे मेले रद्द या एक्सटेंड होते रहते हैं ,, पर भाजपा अध्यक्ष से न तो किसी सम्मानित मिडिया ने ये सवाल पूछा की आखिर कैसे जिस काम को लेकर टेंडर निकलने में दो दिन बाकी हैं उस पर आखिर क्यों किसी ठेकेदार की तरफ से पहले ही काम शुरू हो गया ,, यक़ीनन उनके पास जवाब होता नहीं ,,, वैसे अक्सर ही ये देखा गया है की अध्यक्ष महेंद्र भट्ट मंत्रिओं के बचाव के लिए ही जाने जाते हैं ,, खासकर उन मंत्रिओं के मामलों में ,,जिन मामलों में विवाद रहा है ,, खैर पहले मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल थे और इस बार मंत्री गणेश जोशी हैं ,,
सवाल यही है कि भाजपा के एक के बाद एक मंत्री लगातार सवालों के घेरे में घिरते दिखाई दे रहे हैं,,,जिससे डबल इंजन की सरकार पर दबाव बढ़ रहा है,,,,2027 से पहले इस तरह के आरोप भाजपा सरकार को असहज कर रहे हैं,,,अगर समय रहते भाजपा सरकार इन सभी का जवाब नहीं दे पायी तो 2027 में कई नेताओं के साथ पार्टी की डगर जरूर मुश्किल हो सकती है,,,इसलिए अब ये मुख़्यमंत्री की जवाब देहि भी बन गयी है कि वो अपने मंत्रियों पर लग रहे आरोपों की निष्पक्ष जांच करवाएं ताकि सच सामने आये,,,,और अगर कोई इसमें लिप्त है तो उस पर कार्यवाही भी होनी चाहिए,,,बहरहाल अब गणेश जोशी मामले में कोर्ट में क्या होने वाला है इस पर देहरादून से लेकर दिल्ली तक सबकी नजरें हैं,, और उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण उत्तराखंड की जनता की नज़रें भी हैं ,, क्यूंकि संसाधन और पैसा आखिर हैं तो उत्तराखंड का ही…..