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मुख्यमंत्री ने अंकिता भंडारी हत्या की सीबीआई जांच की संस्तुति की

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वर्गीय अंकिता भंडारी के माता–पिता की अनुरोध व उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए अंकिता भंडारी प्रकरण की CBI जांच कराए जाने की संस्तुति प्रदान की है ।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य शुरू से अंत तक निष्पक्ष, पारदर्शी और संवेदनशील तरीके से न्याय सुनिश्चित करना रहा है और आगे भी रहेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वर्गीय बहन अंकिता भंडारी के साथ हुई इस अत्यंत दुखद एवं हृदयविदारक घटना की जानकारी मिलते ही राज्य सरकार ने बिना किसी विलंब के पूर्ण संवेदनशीलता और निष्पक्षता के साथ कार्रवाई की। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल एक महिला आईपीएस अधिकारी के नेतृत्व में विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रकरण से जुड़े सभी अभियुक्तों को शीघ्र गिरफ्तार किया गया तथा राज्य सरकार की ओर से प्रभावी एवं सशक्त पैरवी सुनिश्चित की गई, जिसका परिणाम यह रहा कि विवेचना और ट्रायल के दौरान किसी भी अभियुक्त को जमानत नहीं मिल सकी। SIT द्वारा गहन विवेचना के पश्चात अभियुक्तों के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल की गई और निचली अदालत द्वारा सुनवाई पूर्ण होने पर अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह पूरे प्रकरण में इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि राज्य सरकार ने आरंभ से लेकर अंत तक निष्पक्षता, पारदर्शिता और दृढ़ता के साथ न्याय सुनिश्चित किया है। साथ ही, हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही कुछ ऑडियो क्लिप्स के संबंध में भी अलग–अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं, जिन पर जांच की प्रक्रिया निरंतर जारी है।

मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि सरकार की मंशा पूरी तरह स्पष्ट है और किसी भी तथ्य या साक्ष्य की अनदेखी नहीं की जाएगी। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि अंकिता केवल एक पीड़िता नहीं थी, बल्कि वह हमारी भी बहन और बेटी थी।

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि हाल ही में उन्होंने स्वयं स्वर्गीय अंकिता भंडारी के माता–पिता से मुलाकात की, जिसमें बातचीत के दौरान उन्होंने मामले की CBI जांच कराए जाने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वर्गीय अंकिता के माता–पिता के इस अनुरोध और उनकी भावनाओं का पूर्ण सम्मान करते हुए राज्य सरकार ने इस प्रकरण की CBI से जांच कराने का निर्णय लिया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पुनः दोहराया कि राज्य सरकार पहले भी न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध रही है और आगे भी पूरी दृढ़ता एवं संवेदनशीलता के साथ स्वर्गीय बहन अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए संकल्पबद्ध रहेगी।

उर्मिला सनावर के मामलों की जांच के लिए एसआईटी गठित,जनता आगे आये- उर्मिला

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उर्मिला सनावर के खिलाफ जनपद के विभिन्न थानों में दर्ज मुकदमों की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने एसआईटी गठन का निर्णय लिया है।
एसएसपी के आदेश पर सभी मामलों की जांच के लिए विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया गया है।

उधर, उर्मिला सनावर ने वीडियो बयान जारी कर कहा कि वपुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए छापे मार रही है। जबकि वो सबूत दे चुकी है। उर्मिला ने प्रदेश की जनता से अंकिता को न्याय दिलवाने के लिए आगे आने को कहा है।इस बीच, पुलिस प्रशासन का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य जांच प्रक्रिया को प्रभावी बनाते हुए किसी भी प्रकार के संदेह या पक्षपात की संभावना को समाप्त करना है। एसएसपी ने स्पष्ट किया है कि सभी मामलों की गहन जांच साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी और कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, ताकि मामलों का जल्द एवं न्यायसंगत निस्तारण हो सके।

 

एसपी सिटी को सौंपी गई एसआईटी की कमान

गठित एसआईटी की जिम्मेदारी पुलिस अधीक्षक नगर (एसपी सिटी) अभय कुमार सिंह को सौंपी गई है। टीम को निर्देश दिए हैं कि उर्मिला सनावर से जुड़े सभी प्रकरणों की बारीकी से जांच की जाए और प्रत्येक बिंदु पर निष्पक्ष आकलन के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाए। एसएसपी ने यह भी कहा है कि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

चार थानों में दर्ज हैं कुल चार मुकदमे

जानकारी के अनुसार उर्मिला सनावर के खिलाफ कोतवाली ज्वालापुर, कोतवाली रानीपुर, थाना बहादराबाद और थाना झबरेड़ा में कुल चार मुकदमे दर्ज हैं। अब इन सभी मामलों की जांच एक ही विशेष जांच टीम द्वारा की जाएगी। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि एकीकृत जांच से मामलों में पारदर्शिता बनी रहेगी और जांच की दिशा स्पष्ट रहेगी, जिससे भ्रम या विरोधाभास की स्थिति उत्पन्न नहीं होगी।

एसआईटी में शामिल अधिकारी
गठित विशेष जांच टीम में कुल सात सदस्य शामिल किए गए हैं। टीम में निरीक्षक शांति कुमार गंगवार (प्रभारी कोतवाली रानीपुर), निरीक्षक कुंदन सिंह राणा (प्रभारी कोतवाली ज्वालापुर), उप निरीक्षक अंकुर शर्मा (प्रभारी थाना बहादराबाद), उप निरीक्षक रविन्द्र सिंह (थाना झबरेड़ा), अपर उप निरीक्षक रणजीत सिंह बिष्ट (कार्यालय पुलिस अधीक्षक नगर), कांस्टेबल विनय (कार्यालय पुलिस अधीक्षक नगर) और कांस्टेबल वसीम (सीआईयू हरिद्वार) शामिल हैं।

 

कई स्थानों पर प्रदर्शन

वीआईपी के मुद्दे पर प्रदेश के हल्द्वानी में ज्योति अधिकारी के समर्थन में विरोध-प्रदर्शन जारी है।
देहरादून में महिला कांग्रेस ने स्पीकर के आवास का घेराव कर आंदोलन को धार दी।

प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी सीबीआई जॉच व वीआईपी के खुलासे को लेकर भाजपा के विरोध में आंदोलन जोर पकड़ता जा रहा है।

प्रदेश भाजपा संगठन के लचर व आत्मघाती बयानों से स्थिति और भी बिगड़ गयी है। प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के जातिगत बयान का आम जनता ने भारी विरोध कर दिया है।

अंकिता मर्डर केस में पहली बार बोले दो भाजपा नेता,  कहा, सीबीआई जांच जरूरी,

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र्मिला-सुरेश-आरती के अंदरूनी विवाद से जनित कथित वीआईपी विवाद में पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत और पूर्व विधायक विजया बड़थ्वाल ने भी चुप्पी तोड़ दी है।इन दोनों भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के बयान के बाद इस मुद्दे पर पार्टी के मतभेद भी सामने आ गए हैं। उधर, वीआईपी कांड को लेकर भाजपा हाईकमान में भी गम्भीर हलचल देखी जा रही है। निकट भविष्य में प्रदेश संगठन में बड़े बदलाव की उम्मीद भी बनने लगी है।

 

क्या कहा पूर्व सीएम त्रिवेंद्र ने

विजया बड़थ्वाल के बाद पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पत्रकारों से बातचीत में मामले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि यह महिलाओं से जुड़ा हुआ विषय है, जो समाज के 50 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करती हैं। त्रिवेंद्र रावत ने कहा कि यह मामला इस समय न्यायालय के विचाराधीन है । इसलिए सरकार कोई निर्णय नहीं ले सकती ।साथ ही यह भी जोड़ा कि इसकी गहराई से जांच की आवश्यकता है। पूर्व सीएम ने कहा कि इस तरह के गलत काम करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाना चाहिए। चाहे वह उनका अपना बच्चा हो या भाई, कानून सभी के लिए समान होना चाहिए और दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं समाज की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं और समाज पर धब्बा लगाने का काम करती हैं। त्रिवेंद्र सिंह रावत ने यह भी कहा कि जब यह घटना हुई थी, तब उन्हें व्यक्तिगत रूप से भी गहरा दुख और तकलीफ हुई.

 

इधऱ, यमकेश्वर से पूर्व विधायक विजया बड़थ्वाल ने तो तीखा लिखित बयान जारी कर कांग्रेस की तर्ज पर सीबीआई जांच की मांग कर डाली। यही नहीं, उन्होंने यह भी कह दिया कि न्याय होना ही पर्याप्त नहीं है। न्याय दिखना भी चाहिए।
उन्होंने कहा कि हम किसी भी पार्टी के हो सकते हैं, परंतु हमारी बेटियों की प्रतिष्ठा, सम्मान और अस्मिता की रक्षा हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। महादेव की इस पवित्र भूमि पर यदि हमारी बेटियाँ सुरक्षित नहीं हैं, तो इस राज्य को संभालने का क्या अर्थ बचता है?

हम अपनी बेटियों की सुरक्षा के लिए किसी भी समझौते को स्वीकार नहीं कर सकते। यह सिर्फ एक मामला नहीं, बल्कि हमारी सामाजिक ज़िम्मेदारियों और नैतिक मूल्यों का प्रश्न है। गौरतलब है कि जिस वनन्तरा रिसॉर्ट में अंकिता  नौकरी करती थी। वह यमकेश्वर विधानसभा में आता है। और यहां से मौजूदा भाजपा विधायक रेनू बिष्ट और उमरेला कि पूर्व जिला पंचायत सदस्य आरती गौड़ पर वनन्तरा रिसॉर्ट में बुलडोजर चलाने का आरोप सुर्खियों में है। इस बीच, सालों से मौन साधे रही पूर्व विधायक विजया बड़थ्वाल के झकझोरने वाले बयान के बाद भाजपा की चिंता की लकीरें बढ़ गयी है।

विजया बड़थ्वाल व त्रिवेंद्र के बयान के बाद भाजपा के अंदर राजनीतिक हलचल तेज हो गयी है। प्रदेश भाजपाध्यक्ष महेंद्र भट्ट उर्मिला सनावर पर दिए गए बयान के बाद स्वंय घिर गए है।

 

उर्मिला मेरी पत्नी नहीं

इस मुद्दे पर भाजपा से निष्कासित सुरेश राठौर ने एक बार फिर प्रेस कांफ्रेंस कर उर्मिला सनावर की नीयत पर सवाल उठाए। कहा कि वो मेरे परिवार को बर्बाद कर रही है। चारित्रिक हनन कर रही है। मैंने फैक्ट्री बेच उर्मिला को 50 लाख रुपए दिए । वह ब्लैकमेल कर रही है। मुझे पति भी कहती है और कालनेमि भी।
राठौर यह कहने से भी नहीं चूके कि उन्होंने भाजपा को खून पसीने से सींचा।
राठौर ने कहा कि उर्मिला मेरी पत्नी नहीं है। सोशल मीडिया में कहने के बजाय उर्मिला को फैमिली कोर्ट जाना चाहिए।

उर्मिला -सुरेश

इस मामले में उक्रांद, महिला मंच, मूल निवास भू कानून समिति समेत अन्य संगठनों ने भी मोर्चा खोल दिया है। हरिद्वार जिले में ही भाजपा से जुड़े मोर्चा के नेता अंकित बहुखंडी के नेतृत्व में वीआईपी का पुतला दहन भी किया गया। बहुखंडी ने कहा कि अंकिता हत्याकांड के दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। इससे पूर्व,मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस प्रदेशव्यापी प्रदर्शन के तहत पुतला दहन कर चुकी है। सोशल मीडिया में कई आम लोग भी बयान जारी कर सुरेश-उर्मिला-आरती के ऑडियो की जांच की मांग कर रहे हैं।

 

वीडियो-ऑडियो विस्फोट से खुलने लगे हैं अंकिता मर्डर फ़ाइल के नाज़ुक पन्ने,पूर्व भाजपा विधायक के ऑडियो से बड़ा भाजपा नेता कठघरे में !

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अंकिता भंडारी हत्याकांड के बाद वीआईपी को लेकर जारी चर्चाओं ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है।
इस बीच, भाजपा से निष्कासित पूर्व विधायक सुरेश राठौर व उर्मिला सनावर की एक ऑडियो क्लिप ने भी तहलका मचा दिया है।

इस ऑडियो क्लिप में कथित तौर पर सुरेश राठौर और उर्मिला के बीच बातचीत में एक बड़े भाजपा नेता और महिला का नाम भी सामने आया है। इसमें राठौर कह रहे हैं कि उक्त भाजपा नेता में हरिद्वार की डाम कोठी में महिला को बुलाया था।

उर्मिला ने पूछा कि क्या वो महिला भाजपा नेता से मिलने गयी थी। इस पर पूर्व विधायक ने कहा कि वो गयी या नहीं। उसे पता नहीं। लेकिन उक्त महिला ने मुझे (राठौर)बताया था कि भाजपा नेता के वीडियो व ऑडियो क्लिप उसके पास हैं।

एक मिनट 31 सेकेंड के इस ऑडियो में भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर कहते हैं कि उक्त महिला ने ही वनन्तरा रिसॉर्ट में बुलडोजर चलवाया था। इस रिसॉर्ट इन अंकिता हत्याकांड हुआ था। साफ है कि उक्त महिला ने कथित भाजपा नेता के इशारे पर ही सबूत मिटाने के लिए वनन्तरा रिसॉर्ट में बुलडोजर चलवाया होगा।

इस ऑडियो क्लिप के वॉयरल होने से सुरेश राठौर, गट्टू और एक अन्य महिला के अन्तर्सम्बन्धों के भी राज खुल रहे हैं। यह भी साफ हो रहा है कि ‘गट्टू’ से नजदीकी सम्बंध रखने वाली उक्त महिला वनन्तरा रिसॉर्ट से जुड़े क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय रही है। और इस महिला के भाजपा के पूर्व विधायक राठौर से भी नजदीकी सम्बंध रहे हैं।

ऑडियो में राठौर यह भी खुलासा करते हैं कि उक्त महिला के तो अन्य छह सात लोगों से भी सम्बंध हैं। और एक बच्चा भी है।

बहरहाल, भाजपा के बड़े नेता से जुड़े ऑडियो-वीडियो के खेल ने राजनीति में खलबली मचा दी है।
हालांकि, कोटद्वार कोर्ट इसी साल अंकिता मर्डर केस के आरोपी पुलकित आर्य व अन्य दो को सजा सुना चुकी है। तीनों ही जेल में है। लेकिन जांच में वीआईपी के नाम का कोई खुलासा नहीं होने के बाद अब कई महीने बाद कहीं “गट्टू ” और कहीं सीधे नाम का उल्लेख भाजपा के लिए चिंता का सबब बन गया है।

इधऱ, राठौर की दूसरी पत्नी उर्मिला ताजातरीन वीडियो में साफ कह रही है कि अंकिता ने गट्टू के पास जाने से मना कर दिया था। इसलिए उसकी हत्या कर दी गयी।

इसके अलावा वॉयरल ऑडियो से यह भी साफ हो रहा है कि राठौर ने बेहतर रिश्ते के समय उर्मिला सनावर को यह गुप्त बातें बता दी थी। और अब रिश्ते खराब होने पर उर्मिला अपने वॉयरल वीडियो में अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े अनसुलझे तथ्य सामने रख रही है।

अंकिता हत्याकांड को लेकर एक बार फिर सोशल मीडिया में बहस छिड़ गयी है। लोगों का कहना है कि कोर्ट और जांच एजेंसी को वीडियो और ऑडियो क्लिप की जांच कर राठौर, उर्मिला और उक्त महिला से भी पूछताछ करनी चाहिए।

अगर ऐसा हुआ तो लम्बे समय से वीआईपी के चेहरे पर पड़े नकाब के बेनकाब होने की पूरी उम्मीद है।

बहरहाल, इन नये खुलासे के बाद एक बार फिर कोर्ट के  स्वंय संज्ञान लेने और पुलिस की नयी जांच को लेकर भी बहस शुरू हो गयी है। अगर परिजनों की मांग पर या किसी ब्यक्ति की ओर से दायर याचिका पर कोर्ट या पुलिस संज्ञान लेती है तो वीआईपी की अनसुलझी गुत्थी से पर्दा उठने की संभावना जताई जा रही है,,,हलांकि dsruncut इन किसी भी आरोपों की सत्यता की पुष्टि नहीं करता, ये सब जांच का विषय है,,,,बरहाल इस पुरे मामले में भाजपा की तरफ से चुप्पी है,,,बरहाल अंकिता का vip कौन इस मुद्दे ने एक बार फिर चर्चा पकड़ ली है,,,

 

अंकिता भंडारी हत्याकांड- वायरल वीडियो के बाद कांग्रेस का हमला

उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और प्रवक्ता धीरेंद्र प्रताप ने कहा है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को इस बात का खुलासा करना चाहिए की अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े मामले में जिस गटू का जिक्र एक महिला के वायरल हुए वीडियो में किया है वह गट्टू कौन है??

धीरेंद्र प्रताप ने कहा है कि इस महिला के वायरल हुए वीडियो में यह बात भी सामने आई है कि हरिद्वार के पूर्व विधायक सुरेश राठौर का इस गट्टू से कोई संबंध है ।

धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड ने पूरे उत्तराखंड की जनता को झकझोर कर रखा हुआ है । ऐसी स्थिति में इस गट्टू नाम का अचानक सतह पर आना चिंता का विषय है । मुख्यमंत्री को चाहिए कि इस गट्टू का जल्दी पता लगाए और विधायक सुरेश राठौर की गतिविधियों के बारे में भी बताएं कि वह आखिर क्यों इस महिला के निशाने पर बने हुए हैं।

Uttarakhand: राफ्टिंग गाइडों के लिए प्राथमिक चिकित्सा का प्रशिक्षण अनिवार्य, आयु सीमा बढ़ाने पर भी सहमति.

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जनवरी से शुरू होगा राफ्टिंग गाइडों का विशेष प्रशिक्षण-

 

Dehradun: राज्य में राफ्टिंग की संभावनाओं को सुदृढ़, सुरक्षित एवं व्यवस्थित करने के उद्देश्य से 22 दिसंबर 2025 को पर्यटन सचिव एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी धीराज सिंह गब्र्याल की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में राफ्टिंग एसोसिएशन, राफ्टिंग गाइड एसोसिएशन, राफ्टिंग तकनीकी एवं विनियामक समिति, गंगा नदी राफ्टिंग समिति सहित संबंधित हितधारकों ने प्रतिभाग किया।

बैठक में वर्तमान में कार्यरत राफ्टिंग गाइडों की फर्स्ट एड एवं सीपीआर से संबंधित तकनीकी दक्षता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। इस क्रम में मोंटाना (यूएसए) से संबद्ध संस्था Hanifl Centre, जो पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार के साथ कार्यरत है, के माध्यम से प्रथम चरण में तीन दिवसीय Wilderness First Aid (WFA) प्रशिक्षण आयोजित करने का निर्णय लिया गया। यह प्रशिक्षण जनवरी 2026 के प्रथम सप्ताह से प्रारंभ होगा। इसके माध्यम से जनवरी–फरवरी 2026 के दौरान राफ्टिंग व्यवसाय से जुड़े लगभग 900 गाइडों को तकनीकी रूप से दक्ष बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

 

बैठक के दौरान राफ्टिंग एसोसिएशन द्वारा उठाए गए प्रमुख मुद्दों—नदी तटों पर राफ्टिंग कैंपों की पुनः स्थापना, गंगा नदी की वहन क्षमता का पुनः आकलन, मुख्य मार्ग से राफ्टिंग पिकअप प्वाइंट में सुधार तथा राफ्टिंग पर्यटकों की सुरक्षा के लिए एम्बुलेंस व्यवस्था—पर पर्यटन सचिव द्वारा शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया गया।

इसके साथ ही राफ्टिंग गाइड एसोसिएशन के प्रस्ताव पर राफ्टिंग गाइडों की अधिकतम आयु सीमा 50 वर्ष से बढ़ाकर 60 वर्ष किए जाने पर सहमति व्यक्त की गई। गंगा नदी राफ्टिंग समिति द्वारा लिए जाने वाले शुल्क में वृद्धि पर भी राफ्टिंग एवं गाइड एसोसिएशन की सहमति बनी।

अंत में पर्यटन सचिव एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने गंगा नदी राफ्टिंग समिति के सचिव, संबंधित अधिकारियों एवं हितधारकों को प्रशिक्षण कार्यक्रम शीघ्र प्रारंभ करने के निर्देश दिए तथा उत्तराखंड के राफ्टिंग व्यवसाय को राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त पहचान दिलाने के लिए ठोस प्रयास करने का आह्वान किया।

बैठक में उप निदेशक पर्यटन अमित लोहनी, वरिष्ठ साहसिक खेल अधिकारी एवं सचिव गंगा नदी राफ्टिंग समिति जसपाल सिंह चौहान, साहसिक खेल अधिकारी सीमा नौटियाल, थल क्रीड़ा विशेषज्ञ भूपेन्द्र सिंह, राफ्टिंग समिति अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह नेगी, उपाध्यक्ष रामपाल सिंह, तकनीकी समिति सदस्य अरविन्द भारद्वाज, विनियामक समिति सदस्य मंजूल रावत, ध्रुवनाथ राणा सहित अन्य अधिकारी एवं हितधारक उपस्थित रहे।

Uttarakhand: देश में सबसे पहले उत्तराखंड में प्रयोग होगी यह तकनीक, 100 KM से तेज हवाओं के बीच केदारनाथ में चलेगा रोपवे.

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रोपवे परियोजना से सुरक्षित और सहज होने जा रही पवित्र धाम केदारनाथ व हेमकुंड साहिब यात्रा में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। इन परियोजनाओं में देश में पहली बार सबसे सुरक्षित व उन्नत ट्राई-केबल डिटैचेबल गोंडोला रोपवे तकनीक (3एस) का प्रयोग होगा।

अभी इस तकनीक का प्रयोग विश्व के चुनिंदा देशों में ही किया जा रहा है। इस तकनीक में सौ किलोमीटर प्रति घंटे की गति से भी तेज हवा में रोपवे का सुरक्षित संचालन किया जा सकेगा।

इस तकनीक में दो स्थिर ट्रैक रोप पर गोंडोला केबिन पूरी तरह संतुलित रहते हैं। इससे केबिन के हवा में डगमगाने की संभावना नहीं रहती।

उत्तराखंड में महत्वाकांक्षी सोनप्रयाग-केदारनाथ व गोविंदघाट-हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजनाओं में सबसे पहले प्रयोग होने जा रही ट्राई-केबल डिटैचेबल गोंडोला रोपवे तकनीक (3एस) तकनीक की सबसे बड़ी खासियत तेज हवा व विषम मौसम में गोंडोला केबिन की स्थिरता है।

इस तकनीक में रोपवे संचालन के लिए तीन अलग-अलग स्टील के तारों का उपयोग किया जाता है। इनमें से दो स्थिर केबल (ट्रैक रोप) केबिन के पूरे भार को संभालते हैं, जबकि एक चलायमान केबल (हाल रोप) केबिन को आगे-पीछे खींचता है।

यह तकनीक सामान्य रोपवे प्रणालियों से अलग है। सामान्य रोपवे में एक या दो केबल पर ही पूरा भार और गति निर्भर होती है, 3-एस सिस्टम में भार और गति अलग-अलग केबलों पर होने से सुरक्षा कई गुना बढ़ जाती है।

यह विश्वस्तरीय तकनीक अभी तक स्विट्जरलैंड, आस्ट्रिया, फ्रांस, जर्मनी, कनाडा और चीन में उपयोग में लाई जा रही है।

एआइ बताएगा कहां खराब केबल-ब्रेक-

3-एस तकनीक में एआइ आधारित स्मार्ट तकनीक काम करती है। सेंसर और कैमरों से मिलने वाले रीयल-टाइम डेटा का एआइ विश्लेषण कर केबल, ब्रेक और ड्राइव सिस्टम में संभावित खराबी का पूर्वानुमान लगा लेता है। इससे दुर्घटनाओं की आशंका कम होती है।

3-एस रोपवे की प्रमुख विशेषताएं-

  • प्रत्येक केबिन बंद, वातानुकूलित व मौसम-रोधी होगा, इससे हर मौसम में सुरक्षित व आरामदायक यात्रा संभव होगी।
  • वजन संतुलन के लिए सेंसर और मल्टी-लेयर ब्रेक सिस्टम से रोपवे का संचालन और अधिक सुरक्षित रहेगा।
  • इस प्रणाली में कम टावर प्रयोग होंगे, एक टावर से दूसरे टावर के बीच लंबी दूरी होगी, जिससे निर्माण कम होगा और पर्यावरण को न्यूनतम नुकसान पहुंचेगा।
  • डिटैचेबल ग्रिप सिस्टम से स्टेशन पर गति कम और लाइन पर तेज रहेगी, इससे यात्रा समय में कमी आएगी।
  • आधुनिक केबिन डिजाइन में 16 से 20 या उससे अधिक यात्रियों का एक साथ सुरक्षित परिवहन संभव होगा।
  • एंटी-आइसिंग तकनीक से बर्फबारी में भी निर्बाध और शोर-कंपन रहित आरामदायक सफर सुनिश्चित होगा।

हर साल दो लाख से अधिक भारतीय छोड़ रहे हैं नागरिकता

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18 लाख से अधिक भारतीय नागरिकों ने वर्ष 2011 से 2023 तक 13 वर्षों में अपनी भारतीय नागरिकता छोड़कर अन्य देशों की नागरिकता प्राप्त की हैं। वर्ष 2022 तथा 2023 में तो यह दर प्रतिवर्ष दो लाख नागरिकों से भी अधिक हैं। यह खुलासा सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन (एडवोकेट) को विदेश मंत्रालय के जन सूचना अधिकारी द्वारा उपलब्ध करायी गयी सूचना से हुआ हैं।

काशीपुर निवासी सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन (एडवोकेट) ने विदेश मंत्रालय के जन सूचना अधिकारी से भारत की नागरिकता छोड़कर विदेशों की नागरिकता प्राप्त करने वालांे की संख्या की सूचना चाही थी। इसके उत्तर में विदेश मंत्रालय के जन सूचना अधिकारी/अवर सचिव तरूण कुमार ने अपने पत्रांक 551 से उत्तर उपलब्ध कराया है। जन सूचना अधिकारी ने राज्यसभा में कपिल सिब्बल तथा डा0 जोहन बिट्स के प्रश्नों के उत्तर में जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होने को लिखित करते हुये उसका इंटरनेट लिंक उपलब्ध कराया है।

नदीम द्वारा उक्त लिंक से सांसदों के प्रश्नों के उत्तर डाउनलोड करने पर वर्ष 2011 से 2023 तक भारत की नागरिकता छोड़ने वाले भारतीयों की संख्या प्रकाश में आयी है।

नदीम को उपलब्ध सूचना के अनुसार वर्ष 2022 में पिछले 13 वर्षों में सर्वाधिक 2,25,620 भारतीय नागरिकों ने अपनी भारतीय नागरिकता स्वेच्छा से छोड़ी है। दूसरे स्थान पर वर्ष 2023 में 2,16,219 भारतीय नागरिकों ने अपनी नागरिकता छोड़ी हैं। पिछले 13 वर्षों में सबसे कम नागरिकता छोड़ने वाले भारतीय नागरिकों की संख्या 85256 वर्ष 2020 में रही हैं।
वर्ष 2011 में 1,22,819, वर्ष 2012 में 120,923, वर्ष 2013 में 1,31,405, वर्ष 2014 में 1,29,328, वर्ष 2015 में 1,31,489, वर्ष 2016 में 1,41,603, वर्ष 2017 में 1,33049, वर्ष 2018 में 134561, वर्ष 2019 में 1,44017, वर्ष 2020 में 85256, वर्ष 2021 में 163370, वर्ष 2022 में 225620, वर्ष 2023 में 2,16,219 भारतीय नागरिकों ने स्वेच्छा से अपनी भारतीय नागरिकता त्याग दी है।

विदेश मंत्रालय द्वारा उपलब्ध करायी गयी सूचना के अनुसार भारतीय नागरिकता छोड़कर विश्व के 135 देशों की नागरिकता इन व्यक्तियों द्वारा प्राप्त की गयी है। जिन देशों की नागरिकता भारतीय नागरिकता छोड़कर भारतीयों द्वारा प्राप्त की गयी है उनमें जहां पड़ोसी देश, बांग्लादेश, म्यांमार, नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका शामिल है, वहीं विकसित माने जाने वाले देश यू के, यू.एस.एस. रूस, चीन, इटली, फ्रांस, जर्मनी व जापान तथा आर्थिक सम्पन्न वाले देशों में इराक, इरान, इटली, तुर्की, यमन, जम्बिया, कज़ाकश्तान, केनिया, मलेशिया, मालद्वीव, ओमान, कतर, सऊदी अरब, साउथ अफ्रीका, सुडान देश भी शामिल है।

 

SIR: 22 साल में दोगुने हुए मतदाता… छंटनी के लिए प्री एसआईआर, यहां बढ़े सबसे ज्यादा मतदाता; देखें आंकड़े.

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पिछले 22 साल में मतदाताओं की संख्या देहरादून जिले में आठ लाख से लगभग 16 लाख हो गई है। इसमें सबसे ज्यादा मतदाता नगर निगम देहरादून में बढ़े हैं। इन बढ़े मतदाताओं की कुंडली खंगालने की तैयारी शुरू हो गई है।

फिलहाल बीएलओ ने प्री एसआईआर शुरू कर दिया है। 2003 की मतदाता सूची को इसका आधार बनाया जा रहा है। इसी महीने के अंत तक प्री एसआईआर पूरा करना है ताकि मुख्य एसआईआर के आदेश आएं और उस काम को पूरी गुणवत्ता और समयसीमा में पूरा किया जा सके।

विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) देश के 12 राज्यों में चल रहा है और जल्द ही उत्तराखंड में भी शुरू होने वाला है। इसी कड़ी में प्रशासन ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं।

रोजाना 30 मतदाताओं का मिलान-
बीएलओ प्री एसआईआर के तहत घर-घर जाकर रोजाना 30 मतदाताओं का मिलान कर रहे हैं। मुख्य एसआईआर में राजनीतिक दलों के एजेंटों को भरोसे में लेने के साथ ही उनकी मदद ली जाएगी ताकि एसआईआर निष्पक्ष हो और किसी प्रकार के आरोप न लगें।
वर्तमान मतदाता सूची के साथ होगा मिलान-
सुपरवाइजर से लेकर बीएलओ कार्य में जुट गए हैं। बीएलओ की ओर से 2003 और 2005 की मतदाता सूची के बीच नामों में अंतर को खोजा जाएगा और उसके कारण की समीक्षा की जाएगी। वर्तमान मतदाता सूची के साथ मिलान भी किया जाएगा।
दून में बढ़े सबसे ज्यादा मतदाता-
जिले में सबसे ज्यादा विस्तार देहरादून नगर निगम का हुआ। 2003 में यहां मात्र 45 वार्ड थे। अनुमानित मतदाताओं की संख्या उस समय करीब दो-ढाई लाख रही। उसके बाद शहर का तेजी से विकास हुआ। 45 वार्ड से आज नगर निगम 100 वार्ड तक पहुंच गया।
पूरे जिले में आज करीब 15.56 लाख के करीब मतदाता हैं। इनमें पुरुष मतदाता 8.9 लाख और महिला मतदाता 7.47 लाख के करीब हैं। अकेले देहरादून शहर में मतदाताओं की संख्या 7.71 लाख से ज्यादा है।
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2018 नगर निगम के चुनाव के बाद से ही कुल मतदाताओं में देहरादून शहर में 22 प्रतिशत से ज्यादा वृद्धि हुई। ऐसे में 2003 के सापेक्ष मतदाताओं की संख्या यहां तीन गुना से ज्यादा बढ़ी।

देहरादून में प्री एसआईआर चल रहा है। अभी मुख्य एसआईआर शुरू नहीं हुआ और न ही इसकी तिथि आई है। प्री एसआईआर के तहत प्रति बीएलओ को रोजाना 30 मतदाताओं के घर जाना है। दिसंबर के अंत तक इसके पूरा होने की उम्मीद है। – अभिनव शाह, सीडीओ

पीसीएस…उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने प्री परीक्षा परिणाम की गलती मुख्य परीक्षा में भी दोहराई

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उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने पीसीएस प्री परीक्षा के परिणाम में जो गलतियां की थीं, उन्हें भी मुख्य परीक्षा परिणाम में दोहरा दिया। इस कारण पूरी गड़बड़ी हुई। आखिरकार आयोग ने इस तकनीकी त्रुटि को दूर करते हुए अर्हता के हिसाब से चयनित अभ्यर्थियों का संशोधित परिणाम जारी किया है। इसमें सभी गड़बड़ियां दुरुस्त कर ली गई हैं।

 

आयोग ने पीसीएस प्री परीक्षा का परिणाम 23 दिसंबर 2024 को जारी किया था। इसमें परिवीक्षा अधिकारी (महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग) के पद के लिए 12 अभ्यर्थियों को क्वालिफाई घोषित किया गया था। इनके रोल नंबर 107132, 119742, 120925, 144302, 146609, 162271, 176078, 186453, 219236, 219819, 238736, 245207 हैं। जब मुख्य परीक्षा परिणाम आया तो आयोग ने इनमें से 162439, 182463 और 197739 को सफल घोषित किया।

 

अभ्यर्थियों ने आयोग के सामने सवाल उठाया
परिवीक्षा अधिकारी प्री परीक्षा की संशोधित कटऑफ 95.9854 अंक थी। जो तीन अभ्यर्थी इस पद के लिए प्री परीक्षा में आयोग ने सफल घोषित किए थे, उनमें से एक के अंक 81.2988, दूसरे के 82.3486 और तीसरे के अंक 91.7894 थे। आयोग ने प्री परीक्षा परिणाम में कटऑफ और अर्हता से कम वाले अभ्यर्थियों को परिवीक्षा अधिकारी के पदों के लिए सफल घोषित किया।

इस गलती को आगे बढ़ाते हुए आयोग ने इस साल 29 नवंबर को मुख्य परीक्षा परिणाम में इन कम कटऑफ वाले तीन अभ्यर्थियों को ही परिवीक्षा अधिकारी पद के लिए सफल घोषित किया। जब इस पर कुछ अभ्यर्थियों ने आयोग के सामने सवाल उठाया तो आयोग ने इसकी जांच पड़ताल की। तब खुलकर यह गलती समझ आई।

 

सोमवार को मुख्य परीक्षा का जो संशोधित परिणाम जारी हुआ, उसमें पूर्व के तीनों अभ्यर्थियों(162439, 182463 और 197739) को आयोग ने परिवीक्षा अधिकारी से हटाकर समेकित पदों के परिणाम में शामिल कर दिया। जबकि इनकी जगह तीन नए अभ्यर्थियों 162271(प्री में 100.1814 अंक), 219236(प्री में 95.9854 अंक), 245207(प्री में 99.6560) को मुख्य परीक्षा में सफल घोषित किया गया है। इन सभी के अंक प्री परीक्षा की कटऑफ 95.9854 से अधिक हैं और पद के हिसाब से पात्रता भी रखते हैं।

चार से बदलेगा मौसम, बारिश-बर्फबारी के आसार, प्रदेश भर में सूखी ठंड कर रही परेशान

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दो महीने से शुष्क मौसम का सीधा असर तापमान में देखने को मिल रहा है। सुबह-शाम के तापमान में बड़ा अंतर है लेकिन सामान्य तापमान में गिरावट नहीं हो रही है। इस कारण प्रदेश भर में सूखी ठंड परेशान कर रही है।आंकड़ों में नजर डाले तो सोमवार को दून का अधिकतम तापमान सामान्य से एक डिग्री इजाफे के साथ 25 डिग्री और न्यूनतम तापमान सामान्य से एक डिग्री गिरावट के साथ 7.8 दर्ज किया गया। इसके उलट पर्वतीय जिले नई टिहरी में दिन का अधिकतम तापमान सामान्य से दो डिग्री इजाफे के साथ 20.6 और रात का न्यूनतम तापमान भी सामान्य से पांच डिग्री बढ़ोतरी के साथ 9.3 डिग्री रिकॉर्ड किया गया।

 

उधर मुक्तेश्वर का भी हाल कुछ ऐसा ही रहा। यहां दिन का अधिकतम तापमान सामान्य से पांच डिग्री ज्यादा 21.3 और न्यूनतम तापमान भी सामान्य से पांच डिग्री अधिकतम के साथ 9.3 रहा। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अक्तूबर से ही प्रदेश भर में अच्छी धूप खिल रही है। यही वजह है कि दिन के साथ अब रात के न्यूनतम तापमान भी इजाफा देखने को मिल रहा है। आने वाले दिनों की बात करें तो तीन दिसंबर तक प्रदेश भर में मौसम शुष्क रहेगा।

 

उत्तराखंड में लंबे समय से बारिश-बर्फबारी का इंतजार है। ऐसे में मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से जारी पूर्वानुमान के अनुसार चार दिसंबर से मौसम बदल सकता है। उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ जिले के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश होने के आसार हैं। जबकि 3500 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी भी होने की संभावना है। ऐसा ही मौसम प्रदेश भर में सात दिसंबर तक रहने के आसार हैं।