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Kedarnath Heli Service: इस बार भी IRCTC करेगा बुकिंग, 24 घंटे पहले टिकट रद्द किया तो वापस नहीं मिलेगा पैसा.

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चारधाम यात्रा में केदारनाथ धाम के लिए हेलिकॉप्टर टिकटों की बुकिंग अप्रैल के पहले सप्ताह में शुरू करने की तैयारी है। उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) जल्द ही बुकिंग की तिथि घोषित करेगा।

इस बार भी ऑनलाइन हेली टिकटों की बुकिंग आईआरसीटीसी के माध्यम से की जाएगी। यूकाडा ने टिकटों को रद्द करने व किराया वापस करने के लिए नीति बनाई है। यदि कोई यात्री उड़ान समय से 24 घंटे पहले टिकट रद्द करता है तो हेली कंपनी किराया वापस नहीं करेगी। 48 घंटे पहले टिकट रद्द करने पर किराये का 25 प्रतिशत ही वापस मिलेगा।

यात्रा के दौरान सबसे ज्यादा केदारनाथ हेली सेवा के लिए मारामारी रहती है। इस बार भी केदारनाथ धाम के लिए गुप्तकाशी, फाटा व सिरसी हेलिपैड से पवन हंस, हिमालयन हेली, ट्रांस भारत, ग्लोबल विक्ट्रा, थंबी एविएशन, केस्ट्रल एविएशन, एयरो एयरक्राफ्ट के माध्यम से हेली सेवा संचालित की जाएगी।

टिकट रद्द एवं किराया वापस नीति के अनुसार यात्रा तिथि से पांच दिन पहले टिकट रद्द करने पर 50 प्रतिशत किराया वापस होगा। जबकि पांच से अधिक दिन पहले टिकट रद्द करने पर किराया राशि का 75 प्रतिशत वापस मिलेगा। इसके अलावा खराब मौसम या तकनीकी कारणों के चलते उड़ान रद्द होने पर हेली कंपनी यात्रियों को पूरा किराया वापस करेगी।

 

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यूकाडा की सीईओ सोनिका ने बताया कि केदारनाथ हेली सेवा के लिए सभी तैयारी पूरी है। जल्द ही टिकटों की बुकिंग के लिए तिथि तय की जाएगी। हेली टिकट बुकिंग करने के बाद यदि यात्री किसी कारण से टिकट रद्द करता है तो उसे नीति के अनुसार किराया वापस किया जाएगा।

 

यमुनोत्री व गंगोत्री हेली सेवा के लिए डीजीसीए की अनुमति का इंतजार-

प्रदेश सरकार इस बार यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के लिए हवाई सेवा से जोड़ने की तैयारी कर रही है। इसके लिए डीजीसीए से अनुमति मिलने का इंतजार किया जा रहा है। डीजीसीए तकनीकी व सुरक्षा मानकों का परीक्षण करने के बाद ही अनुमति देती है। हालांकि यमुनोत्री धाम के लिए हेलिकॉप्टर की लैंडिंग का ट्रायल भी हो चुका है।

 

केदारनाथ हेली सेवा का किराया-

रूट                           2023     2024    प्रस्तावित किराया
सिरसी से केदारनाथ      5498     5,772      6061
फाटा से केदारनाथ        5500    5,774      6063
गुप्तकाशी से केदारनाथ  7740     8,126     8533
नोट-प्रति किराया आने व जाने का है।

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राज्य में लागू समान नागरिक संहिता के तहत लिव इन रिलेशनशिप के विरोध पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उनकी सरकार इस पर पीछे नहीं हटेगी। अलबत्ता जो भी सुझाव आएंगे, उनका स्वागत करेंगे। मुख्यमंत्री नई दिल्ली में एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में बोल रहे थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2022 के चुनाव में हमने प्रदेश की जनता को वचन दिया था कि भाजपा की सरकार बनेगी तो राज्य में समान नागरिक संहिता कानून लागू करेंगे। हमने अपना वचन पूरा किया। लिव इन रिलेशनशिप के विरोध पर उन्होंने कहा कि बेशक यह हमारी संस्कृति का हिस्सा नहीं है। लेकिन उच्चतम न्यायालय में यह विषय कई बार आया है।

हम लोकतांत्रिक मान्यताओं को मानने वाले लोग हैं। लिव इन रिलेशनशिप पर यदि कोई सुझाव आएगा तो उसका स्वागत करेंगे। लेकिन सरकार इस पर अब पीछे नहीं हटेगी।चारधाम यात्रा के दौरान रील कल्चर पर रोक से जुड़े प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने कहा कि तीर्थांटन और पर्यटन के फर्क को समझना होगा।
बैकफुट में नहीं जाएंगे: धामी

चारधाम यात्रा विशुद्ध रूप से यात्रा होनी चाहिए। हमारे पूर्वजों के समय से यात्रा के नियम बने हैं। ये यात्रा धर्म के लिए है। पुराने रील चलाने से देश और दुनिया में गलत संदेश जाता है। सीएम ने कहा कि 2013 की आपदा के बाद केदारनाथ में पीएम मोदी के नेतृत्व व मार्गदर्शन में पुनर्निर्माण कार्य हुए।

केदारनाथ को भव्य और दिव्य बनाने के लिए इकोलॉजी का पूरा ध्यान रखा गया। इकोलॉजी और इकॉनमी में संतुलन हमारी सरकार के विकास का मॉडल है। धामों की अपनी एक धारण क्षमता है। इसलिए हम भीड़ के दबाव को नियंत्रित करने के लिए आसपास के क्षेत्रों में नए स्थान विकसित कर रहे हैं। इन रिलेशनशिप का अब रिकॉर्ड है। कोई चेंज नहीं होगा। बैकफुट में नहीं जाएंगे। सुझावों को शामिल करेंगे।

 

 

आपदाएं राज्य के सामने सबसे बड़ी चुनौती- धामी

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड राज्य के सामने सबसे बड़ी चुनौती आपदाएं हैं। यहां बादल फटने, भूस्खलन, हिमस्खलन की घटनाएं अकसर होती हैं। सिलक्यारा टनल हादसे पर उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के मार्गदर्शन, संवेदनशीलता और सहयोग से यह ऑपरेशन सफल रहा। आज वैज्ञानिक इस पर शोध कर रहे हैं।

 

 

हम कानून पर चलने वाले, इसलिए विरोध नहीं होता- धामी

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश और दुनिया के लोग देवभूमि को आस्था व श्रद्धा से देखते हैं। इसलिए राज्य में अतिक्रमण किसी भी कीमत पर सही नहीं है। अतिक्रमण हटाने का अभियान रुकने वाला नहीं है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अवैध मदरसों और मजारों के खिलाफ छेड़े गए अभियान का इसलिए विरोध नहीं होता क्योंकि हम कानून पर चलने वाले लोग हैं। राज्य में हर कार्रवाई और अभियान कानून के तहत हो रहे हैं। अनेक स्थानों में सरकारी भूमि पर अवैध मजारें बनीं थीं। इस लैंड जिहाद के खिलाफ हमने अभियान चलाया। करीब 6000 एकड़ सरकारी जमीन अतिक्रमण से मुक्त कराई गई। राज्य में मदरसों में पढ़ने वालों की पहचान छुपाई जा रही थी। जहां भी मदरसे अवैध पाए गए, उन्हें सील किया गया। हमारा मानना है कि देवभूमि की पवित्रता बनीं रहनी चाहिए।

 

वक्फ कानून भी राज्य में लागू कराएंगे-

मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण और डेमोग्राफी में बदलाव रोकने के लिए हमने सत्यापन अभियान चलाया। यूसीसी लागू किया। लैंड जिहाद रोकने के लिए अतिक्रमण हटाए। जबरन धर्मांतरण रोकने के लिए सख्त कानून बनाया। उत्तराखंड में वक्फ कानून भी लागू कराएंगे।

 

पीएम मोदी आधुनिक भारत के शिल्पकार- धामी

प्रधानमंत्री के साथ काम करने के अनुभव को भी सीएम धामी ने साझा किय। उन्होंने पीएम को आधुनिक भारत का शिल्पकार बताया। उन्होंने पीएम के साथ अपनी पहली मुलाकात के अनुभव को भी साझा किया। उन्होंने कहा कि पीएम हर छोटी चीज पर ध्यान देते हैं। सामान्य व्यक्ति की चिंता करते हैं।

उत्तराखंड में मदरसों की मान्यता प्रक्रिया में हुआ बड़ा बदलाव, अब लेनी होगी इनकी इजाजत.

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उत्तराखंड में संचालित अवैध मदरसों पर सख्त रुख अपनाने के बाद सरकार अब मदरसों को मान्यता देने की व्यवस्था में बदलाव करने जा रही है। मान्यता के लिए जिलाधिकारी की अनुमति जरूरी होगी। इसके साथ ही कुछ नए प्रविधान भी किए जाएंगे। 

उत्तराखंड मदरसा शिक्षा परिषद की ओर से इस सिलसिले में भेजे गए प्रस्ताव पर शासन मंथन में जुटा है। इसे वित्त, न्याय व कार्मिक विभाग को भेजा गया है।
मदरसा शिक्षा परिषद के अंतर्गत राज्य में लगभग 450 मदरसे पंजीकृत हैं, जो अपने सभी दस्तावेजों के साथ ही आय-व्यय का ब्योरा शासन को देते हैं।  यही नहीं, राज्य में 500 से अधिक मदरसे बिना किसी मान्यता के चल रहे हैं। इन अवैध मदरसों पर पिछले एक माह से कार्रवाई चल रही है और अभी तक 159 मदरसे सील किए जा चुके हैं। यही नहीं, सरकार ने अवैध मदरसों को मिलने वाली फंडिंग की जांच के आदेश भी दिए हैं। 

इसी क्रम में अब मदरसों को मान्यता देने की व्यवस्था को सख्त किया जा रहा है। इसके लिए नियमावली में बदलाव किया जाएगा। मदरसा शिक्षा परिषद की ओर से इसका प्रस्ताव भी शासन को भेजा गया है। इसमें मदरसों की मान्यता के लिए जिला प्रशासन की भूमिका तय करने पर जोर दिया गया है।

जिला प्रशासन की भूमिका तय करने पर बल

प्रस्ताव किया गया है कि मान्यता से संबंधित प्रत्येक आवेदन की डीएम की अध्यक्षता में गठित कमेटी सभी पहलुओं से जांच पड़ताल करेगी। फिर डीएम की संस्तुति के बाद आवेदन को मदरसा शिक्षा परिषद को भेजा जाएगा। 

अभी तक जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के माध्यम से प्राप्त होने वाले आवेदन मदरसा शिक्षा परिषद को भेजे जाने की व्यवस्था है। इसके अलावा मदरसों की मान्यता के नवीनीकरण में भी जिला प्रशासन की भूमिका तय करने पर बल दिया गया है।

Uttarakhand News: सीएम धामी बोले- सतत विकास लक्ष्यों को 2030 तक प्राप्त करने के लिए उत्तराखंड सरकार प्रतिबद्ध.

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 मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वर्ष 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। इकोनॉमी और इकोलॉजी के संतुलन के लिए त्रिस्तरीय एवं नौ सूत्रीय नीति की शुरुआत की गई है, जो सतत विकास लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में एसडीजी एचीवर अवार्ड समारोह में तीन व्यक्तियों, नौ संस्थानों और चार औद्योगिक प्रतिष्ठानों को सम्मानित किया।

 

इस अवसर पर उन्होंने गत वर्ष एसडीजी अवार्ड से पुरस्कृत व्यक्तियों और संस्थानों द्वारा की गई अभिनव पहल की पुस्तक अग्रगामी 2.0 और एसडीजी इंडेक्स उत्तराखंड 2023-24 का लोकार्पण भी किया।

एसडीजी इंडिया इंडेक्स में प्रथम स्थान पर राज्य-

मुख्यमंत्री ने कहा कि तीन साल पहले एसडीजी इंडिया इंडेक्स में राज्य नौवें स्थान पर था। आज राज्य देश में प्रथम स्थान पर है। गरीबी उन्मूलन, खाद्य सुरक्षा, पेयजल एवं स्वच्छता, जन्म के समय लिंगानुपात, स्वच्छ ऊर्जा, शहरी विकास, वित्तीय समावेशन और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में राज्य ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं।

 

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मुख्यमंत्री उद्यमिता प्रोत्साहन योजना, सौर ऊर्जा क्रांति, स्मार्ट सिटी मिशन और मुख्यमंत्री शहरी आजीविका योजना जैसी योजनाओं के माध्यम से इन क्षेत्रों को सशक्त बनाने का कार्य कर रही है। राज्य में जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन जैसी कई चुनौतियां हैं, जहां प्रभावी कार्य करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि सबके सामूहिक प्रयासों से हमे राज्य को और आगे बढ़ाना है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने वर्ष 2023-24 के लिए जारी जिलेवार रैंकिंग में प्रथम स्थान पर आने वाले नैनीताल, दूसरे स्थान पर आने वाले देहरादून और तीसरे स्थान पर आने वाले उत्तरकाशी के मुख्य विकास अधिकारियों को सम्मानित किया।

 

इस अवसर पर विधायक सविता कपूर, दुर्गेश्वर लाल, मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, यूएनडीपी की रेजिडेंट प्रतिनिधि डा एंजेला लुसुगी, पूर्व मुख्य सचिव एन रविशंकर, प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम, ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग के उपाध्यक्ष एसएस नेगी व सीपीपीजीजी के एसीईओ मनोज पंत उपस्थित थे।

 

एसडीजी अवार्ड से इन्हें किया गया सम्मानित-

  • व्यक्ति: गनन त्रिपाठी, गुरजीत सिंह और सुबोध शाह।
  • संस्थाएं: हिमालयन स्टडी सर्कल फार एनवायरमेंट चाइल्ड एजुकेशन हेल्थ एंड रिसर्च, सुविधा एनजीओ, जागृति सेवा समिति, शक्ति फार्म चारा उत्पादक सहकारी समिति, सोसायटी फार हिमालयन एसेंशियल नेचुरल एंड रिसर्च, हिम विकास सेल्फ रिलायंट को-आपरेटिव, भारतीय ग्रामोथान संस्था, दानपुर लोक कला संस्कृति संगम।
  • औद्योगिक प्रतिष्ठान: ब्रिटेनिया इंडस्ट्रीज लिमिटेड, रिलेक्सो फुटवियन लिमिटेड, टीएचडीसीआइएल, टाटा एआइजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड।

Uttarakhand News: टिहरी झील की विकास परियोजना में 95 करोड़ के कार्यों को मंजूरी, प्रवेश द्वार का होगा निर्माण.

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एशियन डेवलमेंट बैंक(एडीबी) की सहायता प्राप्त टिहरी झील विकास परियोजना के तहत 95 करोड़ के कार्यों को मंजूरी दी गई। इसमें सीवर लाइन, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, ठोस कूड़ा प्रबंधन, प्रवेश द्वार व महादेव मंदिर का निर्माण किया जाएगा।

सचिवालय में सोमवार को मुख्य सचिव राधा रतूड़ी की अध्यक्षता में उच्चाधिकार प्राप्त समिति की बैठक में टिहरी झील विकास परियोजना के तहत होने वाले पर्यटन विकास संबंधित कार्यों के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। नई टिहरी में 54.05 करोड़ रुपये की लागत से सीवर नेटवर्क के साथ 5 नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जाएंगे।

37.11 करोड़ रुपये की लागत से ठोस कूड़ा प्रबंधन व कचरा प्रबंधन सेंटर, 1.46 करोड़ की लागत से महादेव मंदिर का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा 2.33 करोड़ की लागत से प्रवेश द्वार निर्माण के प्रस्ताव को अनुमोदन दिया गया है।

बैठक में मुख्य सचिव ने टिहरी के मदन नेगी रोपवे के लिए ब्रिडकुल को नोडल एजेंसी नियुक्त करने की अनुमति दी। इसके साथ ही परियोजना कर्मचारियों के लिए टीए व डीए भत्ते, महिला कर्मचारियों के लिए चाइल्ड केयर लीव का अनुमोदन दिया गया। मुख्य सचिव ने जल संस्थान के ग्रामीण जलापूर्ति के लिए सेंटेज चार्ज के प्रस्ताव को वित्त विभाग में भेजने के निर्देश दिए।

Kedarnath Temple: इस बार संगम पर बने पुल से मंदिर तक पहुंचेंगे श्रद्धालु, आपदा के 11 साल बाद बनकर हुआ तैयार.

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आपदा के ग्यारह वर्ष बाद केदारनाथ मंदिर तक पहुंच के लिए स्थायी पैदल पुल बनकर तैयार हो गया है और इस वर्ष बाबा केदार के भक्त इसी पुल से होकर मंदाकिनी नदी किनारे बने आस्था पथ से मंदिर तक पहुंचेंगे। लोक निर्माण विभाग ने दो वर्ष में 54 मीटर लंबे पैदल पुल का निर्माण किया है।

 

इस पुल के बनने से हेलिपैड से मंदिर तक की दूरी भी कम हो गई है। आगामी 2 मई से केदारनाथ यात्रा शुरू होगी। इस वर्ष पैदल व हेलिकॉप्टर से धाम पहुंचने वाले श्रद्धालु मंदाकिनी व सरस्वती नदी के संगम पर बने 54 मीटर लंबे पुल से होकर मंदाकिनी नदी किनारे निर्मित आस्था पथ के रास्ते लगभग 450 मीटर की दूरी तय कर मंदिर में पहुंचेंगे।

यहां पर बाबा केदार के दर्शन कर श्रद्धालुओं को मंदिर मार्ग से वापस भेजा जाएगा। बीते दो वर्षों तक श्रद्धालु हेलिपैड से सरस्वती नदी किनारे बने आस्था पथ से होकर भैरवनाथ जाने वाले पुल से मंदिर तक पहुंच रहे थे।

इस दौरान उन्हें लगभग 800 मीटर की दूरी तय करनी पड़ रही थी। लेकिन, अब संगम पर बने पुल से यह दूरी 500 मीटर रह गई है।

बता दें कि 16/17 जून 2013 में आपदा से केदारनाथ में व्यापक नुकसान हो गया था। तब सैलाब में संगम पर बना स्थायी पुल भी बह गया था। पुल के बहने के बाद मंंदिर तक पहुंच के लिए बैली ब्रिज बनाया गया था, जिससे बीते नौ वर्ष तक यात्रा संचालित होती रही।

केदारनाथ पुनर्निर्माण के तहत वर्ष 2022 में इस पुल को हटाकर स्थायी पुल का कार्य शुरू किया गया था। लोक निर्माण विभाग ने विषम परिस्थितियों में करीब ढाई वर्ष में इस पुल को तैयार किया है। अब इसी पुल के सहारे केदारनाथ मंदिर तक पहुंचा जाएगा।

Kedarnath: बर्फ की घाटी से होकर बाबा केदार के दर्शन को पहुंचे श्रद्धालु, हिमखंडों को काटकर बन रहा रास्ता, देखें तस्वीरें.

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Kedarnath Dham: बीते दिनों केदारनाथ में भारी बर्फबारी हुई थी। जिसके बाद से यहां भारी मात्रा में बर्फ जम गई है। लोनिवि के मजदूर बर्फ हटाने में जुटे हैं।

दो मई से शुरू होने वाली केदारनाथ यात्रा के दौरान बाबा केदार के भक्त बर्फ की संकरी घाटी से होकर धाम पहुंचेंगे। गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर रामबाड़ा से लिनचोली के बीच पसरे विशालकाय हिमखंडों को काटकर लोक निर्माण विभाग के मजदूर रास्ता तैयार करने में जुटे हैं।

इस वर्ष फरवरी पहले सप्ताह और इस माह के पहले व दूसरे सप्ताह में केदारनाथ सहित पैदल मार्ग तक भारी बर्फबारी हुई थी। इन दिनों भी केदारनाथ में तीन फीट से अधिक बर्फ जमा है।

 

 

वहीं, गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर रामबाड़ा से केदारनाथ तक बर्फ के कारण पैदल आवाजाही संभव नहीं है। यहां बीते 14 मार्च से लोक निर्माण विभाग के 70 से अधिक मजदूर बर्फ को काटकर रास्ता बनाने में जुटे हैं।

11 दिनों में लगभग ढाई किमी हिस्से में बर्फ साफ कर आवाजाही के लिए रास्ता तैयार हो चुका है। इन दिनों मजदूर थारू हिमखंड को काटने में जुटे हैं। यहां पर लगभग 20 फीट ऊंचे हिमखंड को काटकर ढाई फीट चौड़ा रास्ता बनाया जा रहा है।

बर्फ काटने से यहां गहरी व संकरी घाटी सी बन गई है। इन हालातों में यहां बर्फ खिसकने का खतरा बना है। लोनिवि के अधिशासी अभियंता विनय झिक्वांण ने बताया कि मौसम अनुकूल नहीं होने के बाद भी बर्फ सफाई का कार्य जोरों पर चल रहा है। हिमखंड जोन पर आने वाले दिनों में रास्ते की चौड़ाई बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।

Uttarakhand: धामी सरकार के 3 साल बेमिसाल ने सोशल मीडिया पर मचाया धमाल.. धामी के 3 वर्षों के कार्यकाल को जनता ने सराहा.

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सरकार के तीन साल X पर टॉप ट्रेंड बना

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के 3 वर्षों के कार्यकाल को जनता ने सराहा

धामी सरकार के ऐतिहासिक निर्णयों पर जनता की मुहर

 

उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार के सफल तीन वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में सोशल मीडिया पर जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। #DhamiKe3SaalBemisaal हैशटैग के साथ हजारों लोगों ने ट्वीट किए और धामी सरकार को सेवा, सुशासन और विकास के इन तीन वर्षों के लिए शुभकामनाएँ दीं।

आज दोपहर #DhamiKe3SaalBemisaal हैशटैग तेजी से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ट्रेंड करने लगा। देखते ही देखते अनेक ट्वीट्स और पोस्ट्स के साथ यह हैशटैग टॉप ट्रेंडिंग में आ गया। लोग उत्तराखंड सरकार की विभिन्न उपलब्धियों—इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार, धार्मिक पर्यटन, निवेश, रोजगार, महिला सशक्तिकरण और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन—को लेकर अपने विचार साझा कर रहे थे।

 

जनता का अभूतपूर्व समर्थन-

उत्तराखंड के आम नागरिकों के अलावा, राजनीतिक हस्तियों, युवा वर्ग, सामाजिक संगठनों और विभिन्न क्षेत्रों के लोगों ने इस अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लिया। लोगों ने धामी सरकार की नीतियों और प्रदेश के विकास में उनके योगदान की सराहना करते हुए पोस्ट किए।

X पर टॉप ट्रेंड बना #DhamiKe3SaalBemisaal-

लगातार बढ़ते समर्थन और जनता की भागीदारी के कारण #DhamiKe3SaalBemisaal X पर ट्रेंड करता रहा और टॉप पोजिशन पर बना रहा। यह उत्तराखंड सरकार की नीतियों और जनता के विश्वास का प्रमाण है। यह न केवल सरकार की उपलब्धियों को उजागर करता है, बल्कि जनता के विश्वास और समर्थन को भी दर्शाता है।

उत्तराखंड में सियासी सरगर्मियां तेज, नवरात्र में हो सकती है कैबिनेट में फेरबदल.. 3 मंत्रियों की होगी विदाई.

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प्रदेश की धामी सरकार एक ओर अपने तीन साल पूरे होने के जश्न की तैयारी कर रही है, वहीं दूसरी ओर नवरात्र पर कैबिनेट नए रूप में दिखाई देगी। कैबिनेट में पांच खाली पद भरे जाने के साथ ही तीन कैबिनेट मंत्रियों की विदाई के संकेत मिल रहे हैं। नए मंत्रिमंडल का जो ड्राफ्ट तैयार हो रहा है, उसमें जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों का खास ध्यान रखा गया है।

इस ड्राफ्ट पर केंद्रीय नेतृत्व की मुहर लगनी है। हालांकि मुख्यमंत्री दिल्ली दौरे को कैबिनेट में बदलाव की संभावना के तौर पर देखा गया। लेकिन सूत्रों के मुताबिक, धामी का यह दौरा एक विवाह समारोह में शामिल होने को लेकर था। कैबिनेट में फेरबदल को लेकर केंद्रीय नेतृत्व से चर्चा करने के लिए धामी बाद में दिल्ली जाएंगे।

पंजाबी समाज के विधायक को मिल सकती है जगह-

बहरहाल सूत्रों का कहना है कि नई कैबिनेट का जो ड्राफ्ट तैयार किया गया है, उसमें तीन वरिष्ठ मंत्रियों की विदाई की संभावना जताई जा रही है। तीनों मंत्रियों की विदाई का आधार उनकी परफारमेंस बनेगी। कैबिनेट में पंजाबी समाज के विधायक को जगह मिल सकती है।

क्षेत्रीय व जातीय संतुलन के हिसाब से वरिष्ठता व अनुभव के आधार पर मंत्री बनाया जा सकता है। कैबिनेट में बदलाव को लेकर केंद्रीय नेताओं से पहले बातचीत होगी। चर्चा का यह सिलसिला राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बंगलूरू में 21 से 23 तक होने वाली प्रतिनिधि सभा के बाद शुरू हो सकता है।

पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष प्रतिनिधि सभा में शामिल होंगे। 23 मार्च को सरकार के तीन साल पूरे हो जाएंगे। इसके बाद सीएम धामी केंद्रीय नेतृत्व से बातचीत करने के लिए दिल्ली जा सकते हैं। तब तक केंद्रीय नेताओं के आरएसएस की प्रतिनिधि सभा से लौट आने की संभावना है। इन सभी परिस्थितियों के आधार पर अब यही माना जा रहा है नवरात्र में कैबिनेट में फेरबदल की कवायद को अंजाम दिया जा सकता है।

पहले हो सकता है भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का एलान-

उत्तराखंड में प्रदेश मंत्रिमंडल में बदलाव से पहले भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष का एलान हो सकता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के बुधवार को दिल्ली में होने के बाद सियासी हलकों में कैबिनेट में फेरबदल की संभावना को लेकर चर्चाओं का बाजार गरमाता रहा। हालांकि मुख्यमंत्री बृहस्पतिवार को लौट आएंगे। भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में कई नामों की चर्चा है। इनमें भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सांसद महेंद्र भट्ट को दोबारा अध्यक्ष बनाए जाने चर्चाएं भी खासी गर्म रही हैं। पिछले कुछ दिनों से भट्ट अपने बयानों और बेटे के भूमि सौदे को लेकर सोशल मीडिया में विरोधियों के निशाने पर हैं। भाजपा के प्रदेश महामंत्री आदित्य कोठारी का नाम की भी चर्चा है।

 

यदि पार्टी ब्राह्मण चेहरे के बजाय दलित चेहरे का प्रयोग करेगी तो पूर्व कैबिनेट मंत्री खजानदास के नाम को गंभीरता से देखा जा रहा है। इनके अलावा वरिष्ठ विधायक विनोद चमोली के नाम की भी चर्चा है। महिला चेहरे के तौर पर पार्टी विधायक आशा नौटियाल और महिला मोर्चा की राष्ट्रीय महामंत्री दीप्ति रावत भारद्वाज का नाम भी लिया जा रहा है। कई विधायक व अन्य युवा नेताओं के नाम की भी चर्चा है।

Hockey India Championship: राष्ट्रीय चैंपियनशिप के लिए उत्तराखंड की हॉकी टीम हुई घोषित.

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उत्तरप्रदेश के झांसी में चार से 15 अप्रैल तक आयोजित होने वाले 15 वीं हॉकी इंडिया सीनियर पुरुष राष्ट्रीय चैंपियनशिप के लिए चयनित उत्तराखंड की टीम में हरिद्वार के सबसे अधिक पांच खिलाड़ी शामिल हैं।

ऊधमसिंह नगर और अल्मोड़ा जिले के तीन-तीन और देहरादून, पौड़ी, पिथौरागढ़, बागेश्वर समेत स्पोर्ट्स कालेज के खिलाड़ियों का चयन भी उत्तराखंड की टीम में किया गया है। उत्तराखंड की टीम में चयनित छह खिलाड़ी पूर्व में भी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं जबकि जूनियर में खेलने वाले कई खिलाड़ियों को भी इस बार सीनियर टीम से खेलने का मौका मिला है।

40 खिलाड़ियों ने किया प्रतिभाग-

मंगलवार को हल्द्वानी के गौलापार स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय स्पोर्ट्स स्टेडियम में आयोजित चयन ट्रायल में उत्तराखंड के विभिन्न जनपदों व स्पोर्ट्स कालेज से 40 खिलाड़ियों ने प्रतिभाग किया। चयन ट्रायल में उम्दा प्रदर्शन के आधार पर उत्तराखंड की 18 सदस्यीय टीम का चयन किया गया है।राष्ट्रीय स्तर की हॉकी प्रतियोगिताओं और राष्ट्रीय खेलों में उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व कर चुके विशाल (हरिद्वार), रुपिन (हरिद्वार), रूपेश (हरिद्वार), राहुल (स्पोर्ट्स कालेज), आशु कुमार (हरिद्वार) और दीपांशु (ऊधमसिंह नगर) को चयन ट्रायल में शानदार प्रदर्शन के आधार पर फिर से टीम में शामिल किया गया है।

 

इनका भी हुआ चयन-

इसके अलावा रितिक सैनी (काशीपुर), अक्षत रावत (कोटद्वार), मो. साहेब (देहरादून), बाबी (काशीपुर), दीपक फर्त्याल (अल्मोड़ा), रितिक राज (अल्मोड़ा), अमित सिरोला (हरिद्वार),गौरव मेहरा (अल्मोड़ा), विवेक उपरारी (पिथौरागढ़), मान सिंह दानू (बागेश्वर), विवेक शर्मा और रईस अहमद का चयन किया गया है।

 

चयनकर्ताओ में उप निदेशक खेल राशिका सिद्दीकी, उपक्रीड़ा अधिकारी वरुण बेलवाल, भारतीय वायु सेना के पूर्व चीफ कोच पुष्कर सिंह रावत, अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी हरीश भाकुनी और हॉकी के पूर्व चीफ कोच वीरेंद्र परिहार शामिल रहे।