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Uttarakhand: नया रिकॉर्ड बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही चारधाम यात्रा, अब तक 12.60 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन.

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चारधाम यात्रा नया रिकॉर्ड बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। यात्रा में अब तक 12.60 लाख श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। बुधवार को चारों धामों में एक दिन में 80 हजार श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। चारधाम यात्रा शुरू हुए 25 दिन हो चुके हैं। केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री धाम में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं का आंकड़ा 12.60 लाख पार कर चुका है। केदारनाथ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है।

22 दिनों में ही 5.23 लाख से अधिक तीर्थयात्री दर्शन कर चुके हैं। उच्च हिमालयी क्षेत्र की यात्रा होने से प्रदेश सरकार यहां मौसम के मिजाज पर भी पूरी नजर रखे हुए है। मुख्यमंत्री धामी ने शीर्ष अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मौसम प्रतिकूल होने पर हर एक श्रद्धालु की सुरक्षा और सुविधा का पूरा ध्यान रखा जाए। मुख्यमंत्री धामी ने कहा, चारधाम यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

भीड़ नियंत्रण प्रणाली को प्रभावी बनाया गया
श्रद्धालु सुगमता से दर्शन कर सकें, इसके लिए स्लॉट प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण प्रणाली को प्रभावी बनाया गया है। रियल टाइम डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम का उपयोग किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत केदारनाथ में पुनर्निर्माण कार्य होने के बाद धाम दिव्य और भव्य रूप में नजर आ रहा है।

पैदल यात्रा मार्ग को बेहतर बनाए जाने से श्रद्धालुओं की राह आसान हुई है। सुरक्षित और व्यवस्थित यात्रा के लिए सरकार ने हरसंभव कदम उठाए हैं। मौसम पर नजर रखने के लिए विशेष निगरानी तंत्र बनाया गया है। हर परिस्थिति से निपटने के लिए सरकार तैयार है।

Chardham Yatra: चरम पर श्रद्धालुओं का उत्साह; 23 दिन में 11 लाख के पार पहुंचा दर्शन करने वालों का आंकड़ा

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चारधाम यात्रा में 23 दिन के भीतर दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं का आंकड़ा 11 लाख पार हो गया है। केदारनाथ व बदरीनाथ धाम में प्रतिदिन औसतन 15 से 20 हजार श्रद्धालु दर्शन कर रहे हैं। धामों में मौसम की चुनौतियों के बाद भी श्रद्धालुओं के कदम नहीं थम रहे हैं।

चारधाम यात्रा का आगाज 19 अप्रैल से गंगोत्री व यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने से हुआ था। 22 अप्रैल को केदारनाथ व 23 अप्रैल को बदरीनाथ धाम के कपाट खुले। यात्रा शुरू होते ही इस बार धामों में श्रद्धालुओं को खराब मौसम की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। बारिश से धामों में काफी ठंड है। इसके बावजूद बदरीनाथ व केदारनाथ धाम में आस्था का सैलाब उमड़ रहा है।

पर्यटन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार चारधाम यात्रा में अब तक 11 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। इसमें केदारनाथ धाम में 4.50 लाख से अधिक, बदरीनाथ धाम में 2.70 लाख, गंगोत्री में 1.65 लाख, यमुनोत्री में 1.69 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। इसके अलावा यात्रा पंजीकरण की संख्या 32.75 लाख पहुंच चुकी है।

हरिद्वार कुंभ 2027: हर की पैड़ी पर 39.60 लाख की लागत से बनेंगे तीन अस्थायी रैंप, भीड़ नियंत्रण के लिए बनी है योजना.

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कुंभ मेला 2027 के लिए हरकी पैड़ी पर तीन अस्थायी रैंप का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना पर अनुमानित 139.60 लाख रुपये की लागत आएगी और इसे दो महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। रैंप ब्रह्म कुंड में स्नान करने वाले श्रद्धालुओं, अखाड़ों और स्नानार्थियों की सुविधा के लिए बनाए जाएंगे।

यह निर्माण कार्य कुंभ मेला 2027 के तहत किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य हर की पैड़ी स्थित ब्रह्म कुंड में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को सुगम पहुंच प्रदान करना है। इन अस्थायी रैंप का निर्माण तीन अस्थायी स्टील सेतु पुलों के लिए किया जाएगा।

यह परियोजना कुंभ मेले के दौरान भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहायक होगी। यह कार्य कुंभ मेले के शुरुआत होने से दो महीने पूर्व पूरा किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। इस बार कुंभ मेला 2027 में आने वाले श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए यह परियोजना महत्वपूर्ण साबित होगी।

200 मीटर लंबा और तीन मीटर चौड़ा होगा रैंप-

तीन अस्थायी रैंप का निर्माण तीन अस्थायी स्टील सेतु पुलों के लिए किया जाएगा। प्रत्येक रैंप की अनुमानित लंबाई 200 मीटर और चौड़ाई तीन मीटर निर्धारित की गई है। इससे तीन अलग-अलग सेतू से होकर लोग ब्रह्म कुंड से दूसरी तरफ मेला आरक्षित क्षेत्र के खुले स्थान पर जा सकेंगे। कुंभ मेले की तैयारियों को समय पर अंतिम रूप दिया जा सके इसकी तैयारियों के बीच रैंप के निर्माण को स्वीकृति मिली है।

 

उत्तराखंड: सौगात व स्वागत के बीच सफलता का मंत्र देकर जाएंगे पीएम मोदी, भाजपा के लिए हैट्रिक आसान बनाना मकसद.

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उत्तराखंड में लगातार तीसरी सरकार का रिकॉर्ड कायम बनाने के लिए भाजपा की तैयारियां नए मुकाम की ओर बढ़ रही हैं। गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चुनावी माहौल को यहां जो ऊंचाईयां दी हैं, उन्हें बुलंदी तक पहुंचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सफलता का मंत्र देकर जाएंगे। भाजपा ने उनके स्वागत की भव्य तैयारी की है।

पीएम मोदी की 14 अप्रैल को हेलिकॉप्टर से गणेशपुर स्थित हेलीपैड़ पर पहुंचेंगे। वहां से एशिया के सबसे लंबे एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर से होते हुए उनका काफिला डाटकाली मंदिर तक पहुंचेगा। वह उत्तराखंड को यहां इस एक्सप्रेस वे समेत करोड़ों की सौगात की सौगात देंगे तो भाजपा संगठन ने भी उनके स्वागत की बड़ी तैयारी की है।

डाटकाली मंदिर से लेकर कैंट स्थित मंहिद्रा ग्राउंड तक भाजपा के 30,000 कार्यकर्ता सड़क के दोनों ओर पीएम मोदी पर पुष्पवर्षा कर स्वागत करेंगे। इसके लिए देहरादून, सहारनपुर, हरिद्वार व अन्य क्षेत्रों से कई टन गुलाब की पंखुड़ियों का इंतजाम किया गया है।

भाजपा के लिए हैट्रिक बनाना आसान हो-

दावा है कि पीएम मोदी की रैली में भी 30,000 से अधिक कार्यकर्ता शामिल होंगे। भाजपा ने पांच संगठनात्मक जिलों देहरादून ग्रामीण, देहरादून, ऋषिकेश, हरिद्वार और रुड़की के अलावा टिहरी के नरेंद्रनगर व उत्तरकाशी से भी कार्यकर्ताओं की टीमें रैली के लिए लगाए हैं। पीएम मोदी रैली के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से बातचीत भी करेंगे। मकसद होगा कि चुनावी माहौल को नई बुलंदियों तक पहुंचाएं, जिससे भाजपा के लिए हैट्रिक बनाना आसान हो। इधर, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बृहस्पतिवार को पीएम मोदी की रैली की तैयारियों की समीक्षा बैठक लेंगे। इसमें संगठन के प्रदेश अध्यक्ष समेत सभी पदाधिकारी शामिल होंगे।

 

भव्य होगा कार्यक्रम-

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि पीएम मोदी की रैली का कार्यक्रम भव्य होगा। उन्होंने बताया कि सीएम धामी की अध्यक्षता में बैठक होगी। वहीं, पीएम पर पुष्पवर्षा की जाएगी। वह शहर में डाटकाली मंदिर से गढ़ी कैंट स्थित महिंद्रा ग्राउंड तक कार से पहुंचेंगे। बताया कि इस दौरान वह दून-दिल्ली एक्सप्रेसवे का लोकार्पण करेंगे।

Uttarakhand: पहली बार प्रवासी पंचायतों की रूपरेखा तैयार, होगा संवाद, 24 अप्रैल को टिहरी से की जाएगी शुरूआत

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राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों व दूसरे राज्यों में रह रहे प्रवासियों को वापस अपने पैतृक गांव लौटने के लिए उत्तराखंड पलायन निवारण आयोग ने प्रवासी पंचायतों की रूपरेखा तैयार कर ली है। पहली बार प्रदेश के हर जिले में प्रवासी पंचायतें होंगी। इसकी शुरूआत 24 अप्रैल को टिहरी जिले से की जाएगी।

 

उत्तराखंड पलायन निवारण आयोग की सर्वे के अनुसार 6282 प्रवासी अपने गांव लौटे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हर जिले में प्रवासी पंचायत कराने के निर्देश दिए थे। पलायन आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. एसएस नेगी की अध्यक्षता में पौड़ी में हुई बैठक में प्रवासी पंचायतों की रूपरेखा तैयार की है। प्रवासी पंचायतों में राज्य के दूसरे जिलों या बाहरी राज्यों में रहने वाले उन प्रवासियों को आमंत्रित किया जाएगा, जो अपने गांव लौटने के इच्छुक हैं।

प्रवासी स्वरोजगार क्षेत्र में अनुभवों को साझा करेंगे-
कोविड काल में अपने गांव लौटे प्रवासियों ने अनुभव के आधार पर स्वरोजगार को अपनाया है। कई प्रवासी कृषि, बागवानी, मसाले की खेती, सगंध फसलें, मधुमक्खी पालन, पुष्प उत्पादन, मशरूम उत्पादन के अलावा होमस्टे, होटल, रेस्टोरेंट, पशुपालन, डेयरी में अच्छा काम कर रहे हैं। ऐसे प्रवासी स्वरोजगार क्षेत्र में अनुभवों को साझा करेंगे।

प्रवासी पंचायतों की रूपरेखा तय हो गई है। नवंबर तक प्रदेश के सभी जिलों में प्रवासी पंचायतों का आयोजन कर लिया जाएगा। जिला स्तर पर विभागीय अधिकारियों की ओर से सरकार की स्वरोजगार योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। -डॉ. एसएस नेगी, उपाध्यक्ष, उत्तराखंड पलायन निवारण आयोग

Uttarakhand News: पर्वतीय क्षेत्रों में बनेंगे 17 नए मिनी स्टेडियम, राज्य में खेलों को मिलेगा बढ़ावा.

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प्रदेश के खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों के लिए खुशखबरी है। राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में 17 नए मिनी स्टेडियम बनेंगे। युवा कल्याण विभाग के तहत टिहरी, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़, पौड़ी सहित विभिन्न जिलों के लिए हैं 11 स्टेडियम प्रस्तावित हैं। वहीं, छह निर्माणाधीन हैं।

युवा कल्याण विभाग के अधिकारियों के मुताबिक टिहरी के नैलचामी, घरगांव डांडा, पिथौरागढ़ के ग्यालदेवी, उत्तरकाशी के ग्राम पंचायत भंकोली के राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, पौड़ी जिले के एकेश्वर ब्लॉक मुख्यालय और दुगड्डा में मिनी स्टेडियम का निर्माण प्रस्तावित है।

इसके अलावा नैनीताल जिले के भीमताल, चंपावत के बनबसा, बागेश्वर के देवतोली और अल्मोड़ा जिले के छौलछीना में मिनी स्टेडियम का निर्माण किया जाएगा। खेल मंत्री रेखा आर्या के मुताबिक वर्तमान में राज्य में खेल विभाग के 30 और युवा कल्याण विभाग के 102 मिनी स्टेडियम हैं।

Uttarakhand: हरिद्वार में दिखेगी नए कानूनों की सरलता, धामी सरकार की सफलता की झलक, गृह मंत्री शाह करेंगे मुआयना.

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सात मार्च को होने वाले हरिद्वार दौरे के दौरान देश के तीन नए आपराधिक कानूनों पर आधारित विशेष प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इसमें युवाओं को इन कानूनों की जानकारी दी जाएगी, साथ ही पुष्कर सिंह धामी सरकार के चार वर्ष पूरे होने पर सरकार की प्रमुख उपलब्धियों की झलक भी प्रस्तुत की जाएगी।

गृह मंत्री शाह के हरिद्वार दौरे की तैयारियां जोरों पर हैं। भाजपा डेढ़ लाख से अधिक कार्यकर्ताओं के पहुंचने का दावा कर रहा है तो वहीं सरकारी विभाग के अधिकारी केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं की झलक दिखाने की तैयारी में हैं। सात से नौ मार्च तक न्याय संहिता विषय पर राज्यस्तरीय प्रदर्शनी बैरागी कैंप में हो रही है। इसमें भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) प्रमुख तौर पर दिखेंगी।

राज्य सरकार के चार वर्ष पूरे होने पर-

प्रदर्शनी में नए कानूनों की प्रमुख विशेषताओं को सरल और प्रभावी माध्यमों से प्रस्तुत किया जाएगा। इसमें समयबद्ध जांच एवं आरोप-पत्र की अनिवार्यता, शून्य प्राथमिकी तथा इलेक्ट्रॉनिक प्राथमिकी की व्यवस्था, सात वर्ष से अधिक दंडनीय अपराधों में अनिवार्य विधि-विज्ञान जांच, इलेक्ट्रॉनिक एवं डिजिटल साक्ष्यों की वैधता, महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध अपराधों के लिए सशक्त प्रावधान, संगठित अपराध, साइबर अपराध एवं आतंकवाद से संबंधित स्पष्ट दंड प्रावधान, पीड़ित प्रतिकर योजना तथा संपत्ति की शीघ्र वापसी की व्यवस्था को प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा।

सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी ने बताया कि कार्यक्रम में राज्य सरकार के चार वर्ष पूरे होने पर उपलिब्धयों की झलक भी नजर आएगी। उन्होंने बताया कि विभिन्न विभागों की सफल योजनाओं की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। प्रदर्शनी में राज्य सरकार की ओर से बुनियादी ढांचे के विकास, सड़क एवं संपर्क मार्गों के सुदृढ़ीकरण, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, शिक्षा क्षेत्र में सुधार, निवेश प्रोत्साहन, पर्यटन विकास, धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण तथा सीमांत क्षेत्रों के विकास के लिए किए गए कार्यों को प्रदर्शित किया जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जनसभा को संबोधित करेंगे।

उत्तराखंड में बदहाल कानून-व्यवस्था को लेकर कांग्रेस की विशाल रैली, एक साथ जुटे पार्टी के दिग्गज नेता.

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कांग्रेस की प्रस्तावित रैली में भारी संख्या में भीड़ उमड़ी। लोकभवन घेराव कूच से पहले प्रदेश प्रभारी शैलजा सहित पार्टी के वरिष्ठ नेता एक साथ मंच पर दिखे। राज्यपाल आवास कूच के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा प्रचार प्रसार सामग्री लगाई गई थी, लेकिन आज सुबह इन्हें हटा दिया गया। कांग्रेस नेताओं ने इसकी निंदा करते हुए कहा कि सरकार आवाज दबाना चाहती है।

 

प्रदेश कांग्रेस कार्यकर्ता आज सोमवार को जन मुद्दों को लेकर लोकभवन का घेराव करने पहुंचे। प्रदर्शन में प्रदेशभर से पार्टी नेता व कार्यकर्ता शामिल हुए। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व में कार्यकर्ता प्रदेश में महिला अपराध, बेरोजगारी, महंगाई, कानून व्यवस्था, भ्रष्टाचार, जंगली जानवरों के हमले, पलायन, आपदा प्रभावितों को राहत व मुआवजा, बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं, किसानों को फसल का नुकसान होने पर मुआवजा न मिलने समेत अन्य मुद्दों पर लोकभवन का घेराव करने पहुंचे।

 

पार्टी के सभी नेता व कार्यकर्ता परेड ग्राउंड में एकत्रित हुए, जहां से लोकभवन घेराव के लिए कूच करने निकले। रैली में प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व सीएम हरीश रावत, कांग्रेस चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ.हरक सिंह रावत, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा समेत पार्टी के सभी वरिष्ठ नेता व कार्यकर्ता भाजपा सरकार के खिलाफ हुंकार भरी।

 

 

कांग्रेस की प्रस्तावित रैली के चलते पुलिस ने रूट डायवर्जन प्लान लागू किया है। प्रदेश युवा कांग्रेस प्रभारी व राष्ट्रीय महासचिव सुरभि द्विवेदी ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में अराजकता फैलाने व शांति भंग करने वालों के खिलाफ युवा कांग्रेस ढाल बनेगी। युवा कांग्रेस के मोहब्बत के सिपाही अराजक तत्वों से लोगों की सुरक्षा के लिए खड़े रहेंगे।

द्विवेदी ने कहा कि एक समय था जब देश दुनिया में देहरादून को सुरक्षित शहर के रूप में जाना जाता था लेकिन आज प्रदेश में अराजकता फैलाकर भय का माहौल बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बजरंग दल जैसे संगठन धर्म के नाम पर हिंसा फैलाने का प्रयास कर रहे हैं और उन्हें सरकार का संरक्षण मिल रहा है। उन्होंने कहा, बजरंग दल पंजीकृत संगठन नहीं है।

बजरंग बली के नाम पर गुंडागर्दी की जा रही है। उन्होंने सवाल किया कि बजरंग दल वास्तव में हिंदू रक्षक हैं, तो अंकिता भंडारी हत्याकांड मामले में न्याय के लिए आवाज क्यों नहीं उठाई?।

Uttarakhand: प्रदेश में प्री एसआईआर के तहत 1 से 15 फरवरी तक विशेष अभियान, दूसरे चरण में इन पर रहेगा फोकस.

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भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के तहत उत्तराखंड में प्री एसआईआर गतिविधियों के अंतर्गत 1 से 15 फरवरी 2026 तक विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान बीएलओ आउटरीच अभियान के दूसरे चरण में युवा एवं महिला मतदाताओं की मैपिंग पर विशेष फोकस रहेगा।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम के निर्देशन में चल रहे अभियान के पहले चरण में प्रदेश के 75 प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग पूरी की जा चुकी है। अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने बताया कि वर्तमान मतदाता सूची की 2003 की मतदाता सूची से मैपिंग की जा रही है।

उन्होंने मतदाताओं से बीएलओ को सहयोग देने की अपील की है। निर्वाचन विभाग ने मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दलों से शतप्रतिशत बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) नियुक्त करने का भी आग्रह किया है।

Kedarnath Dham: इस बार नई गाइडलाइन जारी, मंदिर परिसर में मोबाइल पर पूरी तरह प्रतिबंध, भारी जुर्माने की तैयारी.

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आगामी केदारनाथ यात्रा को लेकर प्रशासन इस बार नई गाइडलाइन लाने की कवायद में जुटा है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत केदारनाथ धाम के मंदिर परिसर में मोबाइल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जा सकता है, वहीं नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भी भारी जुर्माना लगाए जाने की संभावना है।

जिला प्रशासन इस योजना को लागू करने के लिए बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर बातचीत कर रहा है। इसके साथ ही मंदिर क्षेत्र में मोबाइल जमा कराने जैसी व्यवस्था पर भी विचार किया जा रहा है, जिसकी जिम्मेदारी मंदिर समिति को सौंपी जा सकती है।

बता दें कि बीते कुछ वर्षों से केदारनाथ क्षेत्र में दर्शन के दौरान मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से दर्शन भाव और श्रद्धा भाव में कमी आने को लेकर तीर्थ पुरोहितों, पंडा समाज और बीकेटीसी के बीच लगातार चर्चा होती रही है। पिछली यात्रा में भी मोबाइल फोन प्रतिबंध का मुद्दा उठा था। इसी को ध्यान में रखते हुए ऋषिकेश में हुई चारधाम से जुड़ी अहम बैठक में सभी धामों में मोबाइल बैन पर विचार किया गया।

 

इधर, मंदिर परिसर में मोबाइल बैन को लेकर जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने बताया कि केदारनाथ क्षेत्र में मोबाइल प्रतिबंध को लेकर बीकेटीसी से बातचीत चल रही है। मंदिर परिसर के आसपास चेतावनी बोर्ड लगाने और मोबाइल उपयोग पर जुर्माना लगाने समेत मोबाईल फोन जमा जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है।