Category Archive : राज्य

Uttarakhand: पीएम आवास 2.0 से बदलेगी अब मलिन बस्तियों की सूरत, विस्थापन और पुनर्वास को लेकर किए खास प्रावधान.

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प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 से मलिन बस्तियों की सूरत बदल सकती है। इस बार योजना में मलिन बस्तियों के पुनर्वास और विस्थापन को लेकर भी खास प्रावधान किए गए हैं। राज्य में 582 मलिन बस्तियां पुनर्वास के इंतजार में हैं। पीएम आवास योजना 2.0 लॉन्च हो चुकी है।

उत्तराखंड ने इसके लिए केंद्र से करार भी कर लिया है। मलिन बस्तियों के पुनर्वास, विस्थापन को लेकर दो श्रेणियों में सरकार सहायता करेगी। पहली श्रेणी बीएलसी यानी लाभार्थी आधारित है।इसमें अपनी जमीन पर मकान बनाने के लिए केंद्र सरकार 2.25 लाख रुपये और राज्य सरकार 50 हजार रुपये की मदद देगी।
जमीन की कागजी प्रक्रिया भी निशुल्क होगी। मलिन बस्तियों के अपग्रेडेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत बनाने के लिए भी इस योजना में पैसा मिलेगा।दूसरी श्रेणी एफॉर्डेबल हाउसिंग इन पार्टनरशिप यानी एएचपी है। इसमें निजी विकासकर्ता की मदद से मलिन बस्तियों का पुनर्वास किया जा सकता है।
मलिन बस्ती की लोकेशन सही न होने पर अन्य किसी क्षेत्र में विकसित की जा सकती है। इसमें भी सरकार अलग से मदद करेगी। राज्य सरकार कई साल से मलिन बस्तियों के पुनर्वास और विस्थापन को लेकर प्रयास कर रही है। पीएमएवाई 2.0 से इसमें तेजी आने की संभावना है।

Tehri Lake: अब क्रूज बोट में बैठकर करें खूबसूरत वादियों का दीदार, टिहरी झील में सैलानी बिता सकेंगे रात.

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उत्तराखंड के टिहरी बांध की झील में साहसिक खेलों के शौकीनों के लिए अब नया लुत्फ उठाने का मौका भी मिलेगा। फ्लोटिंग हट्स के बाद अब झील में क्रूज बोट में भी सैलानी रात बिताकर पर्यटन गतिविधियों का आनंद उठा सकते हैं। झील में 12 कमरों के क्रूज बोट का पीपीपी मोड पर संचालन शुरू हो गया है। क्रूज बोट का संचालन कोटीकाॅलोनी से डोबरा-चांठी पुल तक किया जा रहा है।

टिहरी बांध की झील में तीन साल से कूज बोट निर्माणाधीन था। पर्यटन विभाग के सहयोग से पीपीपी मोड पर एक निजी कंपनी ने लगभग आठ करोड़ की लागत से क्रूज तैयार किया है। इसमें पर्यटकों के रुकने के लिए 12 कमरे, रेस्टोरेंट, शौचालय आदि सभी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। क्रूज की छत पर पर्वतीय क्षेत्र के घरों में लगे पठाल की प्रतिकृति की तरह बनाया गया है।

वर्तमान में कई तरह की 100 से अधिक बोट संचालित-

टिहरी झील में वर्ष 2014-15 में बोटिंग सेवा शुरू हुई थी। वर्तमान में कोटीकाॅलोनी बोटिंग प्वाइंट से पैरासेलिंग, बनाना राइडिंग, स्पीड बोट, जेट स्की, जॉर्बिंग, वाटर रोलर, वाटर स्कूटर समेत 100 से अधिक बोट संचालित की जा रही हैं। इसके अलावा डोबरा-चांठी और पीपलडाली में एक-एक नई बोट प्वाइंट जल्द शुरू होने की उम्मीद है।

टिहरी झील में क्रूज बोट का संचालन शुरू किया गया है। कोटीकॉलोनी से डोबरा-चांठी तक क्रूज बोट का संचालन होगा। फिलहाल क्रूज ट्रायल के तौर पर चलेगा। दो-तीन दिन में कंपनी विधिवत बुकिंग शुरू कर देगी।
– सोबत सिंह राणा, जिला पर्यटन अधिकारी, टिहरी

Uttarakhand: वर्ष 2026 तक सोलर प्लांट से मिलेगी 60 मेगावाट बिजली, बढ़ेगी आय, 100 करोड़ का बजट.

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 प्रदेश में सौर ऊर्जा आने वाले वर्षों में सरकार की आय का बड़ा साधन भी बनेगी। सरकारी भवनों में लग रहे सोलर पावर प्लांट से मिलने वाली अतिरिक्त विद्युत से होने वाली आय ऊर्जा निगम को सरकारी कोष में जमा करानी होगी।

इसके लिए विभागों के साथ निगम विद्युत खरीद अनुबंध करेगा। अभी 305 सरकारी भवनों में नौ मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादित हो रही है। इसे वर्ष 2026 तक 60 मेगावाट करने का लक्ष्य है।

 

सौर ऊर्जा को सरकार कर रही प्रोत्साहित-

प्रदेश में सौर ऊर्जा को सरकार प्रोत्साहन दे रही है। इसके लिए सरकारी और निजी, दोनों क्षेत्रों में सोलर पावर प्लांट लगाने के लिए सब्सिडी के रूप में आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।

 

विशेष रूप से सरकारी भवनों में सोलर प्लांट लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। यही नहीं, प्लांट लगाने के लिए इस पर होने वाले खर्च को सरकारी भवनों की निर्माण लागत में जोड़ा जाएगा।

 

इसके लिए लोक निर्माण विभाग को निर्देश दिए गए हैं। वर्तमान में 307 सरकारी भवनों में नौ मेगावाट क्षमता के सोलर प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं।

 

1965 सरकारी भवनों में प्लांट की स्थापना प्रस्तावित-

वित्तीय वर्ष 2024-25 में 1965 सरकारी भवनों में सोलर प्लांट की स्थापना प्रस्तावित है। इनके प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। चालू वित्तीय वर्ष में इसके लिए 100 करोड़ रुपये बजट रखा गया है।

 

अपर मुख्य सचिव वित्त आनंद वर्धन ने कहा कि शासकीय भवनों में स्थापित सोलर प्लांट से ऊर्जा निगम को अतिरिक्त बिजली मिल रही है। निगम को इस आय को सरकारी कोष में जमा कराना होगा।

 

इस संबंध में विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। विशेष रूप से सरकारी भवनों से उनकी खपत के अतिरिक्त मिलने वाली विद्युत ऊर्जा निगम को प्राप्त हो रही है।

 

इस संबंध में अब ऊर्जा निगम को संबंधित विभाग के साथ विद्युत खरीद अनुबंध करना है। इससे अतिरिक्त विद्युत से सरकार को भी आय होगी। इस योजना से संबंधित गाइडलाइन में भी संशोधन किया जाएगा।

 

Dehradun: भू-कानून और मूल निवास को लेकर भूख हड़ताल शुरु, शहीद स्मारक पर पुलिस फोर्स तैनात।

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सशक्त भू-कानून और मूल निवास की मांग को लेकर आमरण अनशन करने की तैयारी में मूल निवास, भू कानून समन्वय संघर्ष समिति के संयोजक मोहित डिमरी को पुलिस ने रोक दिया। पुलिस ने शहीद स्मारक के गेट पर ताला भी लगा दिया है। मोहित ने निर्णय लिया है कि वह शहीद स्मारक के गेट के बाहर ही भूख हड़ताल शुरू करेंगे।

मूल निवास, भू-कानून समन्वय संघर्ष समिति ने आज मंगलवार से शहीद स्मारक पर आमरण अनशन शुरु करने का एलान किया था। समिति को महिला मंच और राज्य आंदोलनकारी मंच सहित कई संगठनों ने अपना समर्थन दिया है। समिति का कहना है कि भूमि कानूनों में हुए संशोधनों को रद्द किया जाए।

इसके साथ ही निवेश के नाम पर दी गई जमीनों का ब्यौरा सार्वजनिक किया जाए।समिति के संयोजक मोहित डिमरी ने कहा कि उत्तराखंड सरकार मजबूत भू-कानून को लेकर गंभीर नहीं है। सरकार बजट सत्र में भू-कानून लाने की बात कर रही है, लेकिन किस तरह का भू-कानून सरकार लाएगी, स्थिति स्पष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि 2018 के बाद भूमि कानूनों में हुए सभी संशोधनों को अध्यादेश के जरिये रद्द किया जाय।

 

 

400 से अधिक गांव नगरीय क्षेत्र में हुए शामिल-
भूमि कानून की धारा-2 को हटाया जाए। इस धारा की वजह से नगरीय क्षेत्रों में गांवों के शामिल होने से कृषि भूमि खत्म हो रही है। 400 से अधिक गांव नगरीय क्षेत्र में शामिल हुए हैं और 50 हजार हैक्टेयर कृषि भूमि को खुर्द-बुर्द करने का रास्ता खोल दिया गया। साथ ही भूमि कानून के बिल को विधानसभा में पारित करने से पूर्व इसके ड्राफ्ट को जन समीक्षा के लिए सार्वजनिक किया जाए।

 

 

निवेश के नाम पर दी गई जमीनों का ब्यौरा और इससे मिले रोजगार को सार्वजनिक किया जाय। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने 250 वर्ग मीटर से अधिक जमीन खरीदी है, उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाय। समिति ने कहा कि मूल निवासियों को चिह्नित किया जाए। वहीं, 90 प्रतिशत नौकरियों और सरकारी योजनाओं में मूल निवासियों की भागीदारी होनी चाहिए।

 

सरकार भू कानून और मूल निवास पर अपनी मंशा साफ करे-
समिति के महासचिव प्रांजल नौडियाल ने कहा कि सरकार भू कानून और मूल निवास पर अपनी मंशा साफ करे। महिला मंच की उपाध्यक्ष निर्मला बिष्ट ने कहा, राज्य आंदोलन में महिलाओं ने सर्वोच्च बलिदान देकर इस राज्य के सपने को साकार करने में अग्रणी भूमिका निभाई। वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी मोहन सिंह रावत ने कहा, 42 शहीदों ने अपनी शहादत देकर राज्य के निर्माण का सपना साकार किया, लेकिन आज जमीन के कानून खुर्द बुर्द किए गए और मूल निवासियों के अधिकार छीने गए।

 

 

समिति को इन संगठनों का मिला समर्थन-

मूल निवास, भू कानून समन्वय संघर्ष समिति के आंदोलन को पूर्व सैनिक संगठन, महिला मंच, आंदोलनकारी मंच, उत्तराखंड संयुक्त आंदोलनकारी मंच, पहाड़ी स्वाभिमान सेना, धाद, देवभूमि संगठन, महानगर ऑटो यूनियन, दून गढ़वाल जीप कमांडर कल्याण समिति, उपनल महासंघ, अतिथि शिक्षक संगठन, पूर्व कर्मचारी संगठन, ओपीएस संगठन, चारधाम महापंचायत, गढ़ कुमाऊं मंडल, गढ़वाल सभा, उत्तराखंड त्रिस्तरीय पंचायत संगठन, राठ महासभा, आर्यन छात्र संगठन सहित कई संगठनों का समर्थन मिला है।

Accident: ऋषिकेश में बड़ा हादसा, ट्रक ने कई वाहनों को मारी टक्कर, UKD नेता त्रिवेंद्र पंवार समेत 3 की मौत.

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ऋषिकेश में देर रात दर्दनाक हादसा हो गया। नटराज चौक के पास भीषण दुर्घटना में यूकेडी नेता व राज्य आंदोलनकारी त्रिवेंद्र पंवार समेत तीन लोगों की मौत हो गई। हादसे में एक व्यक्ति गंभीर घायल था, जिसने आज सुबह दम तोड़ दिया। हादसा इतना भीषण था कि दूर तक वाहनों के टुकड़े फैल गए। घटनास्थल के पास घंटों तक अफरा-तफरी का माहौल रहा।

पुलिस के मुताबिक रविवार देर रात एक तेज रफ्तार सीमेंट से लदे ट्रक ने नटराज चौक के पास स्थित वेडिंग प्वाइंट के सामने खड़ी पांच गाड़ियों को टक्कर मार दी। इस भिड़ंत के दौरान वहां पर मौजूद अन्य लोग भी चपेट में आ गए। घटनास्थल पर अफरा-तरफी मच गई। घटना के बाद ट्रक चालक फरार हो गया। हादसे में घायल यूकेडी के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष और संरक्षक राज्य आंदोलनकारी त्रिवेंद्र सिंह पंवार को एम्स ऋषिकेश ले जाया गया।
जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। एम्स के पीआरओ संदीप कुमार ने बताया कि पंवार के साथ ही एम्स लाए गए लालतप्पड़ निवासी गुरजीत सिंह की भी मौत हो गई। वहीं, एक व्यक्ति के गंभीर ने भी आज सुबह दम तोड़ दिया। बताया जा रहा है कि पंवार एक पूर्व राज्यमंत्री के बेटे की शादी में शामिल होने यहां पहुंचे थे, इसी दौरान यह हादसा हो गया।

Uttarakhand: प्रदेश के 13वें डीजीपी बने दीपम सेठ, गृह विभाग ने जारी किए आदेश, 1995 बैच के हैं आईपीएस अधिकारी.

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दीपम सेठ उत्तराखंड के 13वें डीजीपी बन गए हैं। गृह विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। एडीजी दीपम सेठ ने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से लौटकर सोमवार को मूल कैडर ज्वाइन किया। ज्वाइन करते ही उन्हें पुलिस के 13वें मुखिया की जिम्मेदारी भी दी गई।
दीपम सेठ 1995 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। और वर्ष 2019 से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर थे। अभी उनकी प्रतिनियुक्ति अवधि पूरी नहीं हुई थी कि शासन ने उन्हें वापस बुलाने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखा था। पत्र के एक दिन बाद ही केंद्र ने उन्हें रिलीव भी कर दिया। बता दें कि एडीजी दीपम सेठ उत्तराखंड कैडर के वर्तमान में सबसे वरिष्ठ अधिकारी हैं। पिछले साल पूर्व डीजीपी अशोक कुमार के सेवानिवृत्त होने के बाद सेठ के वापस आने की चर्चाएं हुई थीं।
सरकार ने उनका नाम भी डीजीपी के पैनल में शामिल करते हुए यूपीएससी को भेजा था। लेकिन, वह प्रतिनियुक्ति से वापस नहीं आए थे। ऐसे में सभी जरूरी अर्हताएं पूरी करने वाले अधिकारियों में एडीजी अभिनव कुमार का नंबर आ गया था। उन्होंने पिछले साल 30 नवंबर की शाम को प्रदेश के 12वें डीजीपी (कार्यवाहक) के रूप में पुलिस की कमान संभाली थी। लेकिन, पिछले दिनों फिर से डीजीपी के चयन के लिए एक पैनल यूपीएससी भेजा गया। मगर, इस पैनल में अभिनव कुमार का नाम शामिल नहीं था।
यूपी की तर्ज पर डीजीपी का करने की सिफारिश
पिछले दिनों कार्यवाहक डीजीपी अभिनव कुमार ने गृह सचिव को पत्र लिखकर यहां डीजीपी का चयन यूपी की तर्ज पर करने की सिफारिश की थी। उन्होंने मौजूदा उत्तराखंड पुलिस एक्ट के नियमों का हवाला भी दिया था। इसमें दो साल के लिए शासन की समिति ही डीजीपी का चयन कर सकती है। लेकिन, अब एकाएक गृह विभाग की ओर से केंद्र सरकार को शुक्रवार को पत्र लिखकर आईपीएस दीपम सेठ को वापस भेजने की मांग की थी।

Uttarakhand: 26 नवंबर से भूख हड़ताल पर बैठेगी भू-कानून समन्वय संघर्ष समिति।

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प्रेस क्लब देहरादून में मूल निवास, भू कानून समन्वय संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने प्रेस वार्ता की इस अवसर पर उन्होंने संविधान दिवस यानि की 26 नवंबर से शहीद स्मारक देहरादून में भूख हड़ताल शुरू करने का ऐलान किया है। संघर्ष समिति के संयोजक मोहित डिमरी भूख हड़ताल पर बैठेंगे। वही प्रेसवार्ता करते हुए मूल, निवास भू-कानून समन्वय संघर्ष समिति के संयोजक मोहित डिमरी ने कहा कि उत्तराखंड सरकार मजबूत भू-कानून को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं दिखाई दे रही है। सरकार बजट सत्र में भू-कानून लाने की बात कर रही है, लेकिन किस तरह का भू-कानून सरकार लाएगी, स्थिति स्पष्ट नहीं है। कहीं ऐसा तो नहीं हर बार की तरह भू-माफिया के पक्ष में सरकार कानून लेकर आए।

Kedarnath By Election Result 2024: भाजपा को मिला बाबा केदार का आशीर्वाद, 5623 वोटों से की जीत दर्ज, केदारनाथ में खिला कमल.

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विधानसभा की केदारनाथ सीट के उपचुनाव में बाजी भाजपा के हाथ लग चुकी है। भाजपा प्रत्‍याशी आशा नौटियाल ने कांग्रेस प्रत्‍याशी मनोज रातव को हराकर जीत दर्ज की है। भाजपा प्रत्‍याशी आशा नौटियाल को 23814 वोट‍ मिले। वहीं कांग्रेस प्रत्‍याशी मनोज रावत को 18191 मत प्राप्‍त हुए हैं। भाजपा ने 5623 वोटों से जीत दर्ज की है।

90 हजार से अधिक मतदाता वाली केदारनाथ विधानसभा की जनता ने शनिवार को अपना जनादेश दिया। जनता ने भाजपा प्रत्याशी आशा नौटियाल को अपना विधायक चुना है। इसी के साथ केदारनाथ विधानसभा में महिला प्रत्याशी की जीत का मिथक भी भाजपा ने दोहराया।
पिछले करीब तीन महीने से उपचुनाव की तैयारी में जुटे सियासी दलों की तैयारियों और प्रत्याशियों और उनके समर्थकों के लगातार 17 दिन तक किए धुआंधार प्रचार का फल जनता ने भाजपा की झोली में डाला। अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए भाजपा ने कई कसर नहीं छोड़ी। वहींकेदारनाथ उपचुनाव के दौरान कांग्रेस ने नई दिल्ली में केदारनाथ मंदिर के शिलान्यास को मुद्दा बनाने पर पूरा जोर दिया। लेकिन केदारनाथ मंदिर के चक्रव्यूह में कांग्रेस खुद ही फंस गई और पार नहीं पा पाई। 

तीन महीने पहले चुनावी प्रबंधन के रणनीतिकारों को मैदान में उतारा-
उपचुनाव का विधिवत एलान से तकरीबन तीन महीने पहले चुनावी प्रबंधन के रणनीतिकारों को मैदान में उतार दिया था। युवा मंत्री सौरभ बहुगुणा और प्रदेश महामंत्री आदित्य कोठारी संग विधायक भरत चौधरी का वहां प्रचार थमने तक अधिकतम समय गुजरा है।

महिला प्रत्याशी पर लगाया दांव-
महिला मतदाता बहुल सीट पर दो बार की विधायक रही महिला चेहरे आशा नौटियाल पर लगाया गया दांव भाजपा का मजबूत पक्ष बना। भाजपा को उम्मीद थी कि  महिला प्रत्याशी पर लगाया गया दांव सही साबित होगा और महिला उम्मीदवार की जीत का मिथक दोहराएगा।

ये प्रत्याशी थे मैदान में-

उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने आशा नौटियाल, कांग्रेस ने मनोज रावत और उत्तराखंड क्रांति दल ने डा. आशुतोष भंडारी को मैदान में उतारा है। तीन अन्य उम्मीदवार आरपी सिंह, त्रिभुवन सिंह चौहान और प्रदीप रोशन रुड़िया निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं।

Maharashtra Result: महाराष्ट्र में लाडकी बहीण योजना ने कैसे बदला खेल, जानिए लोकसभा के बाद महायुति ने कैसे पलटी बाजी?

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महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे आज आ रहे हैं। शुरुआती दौर में भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति नतीजों में बहुत आगे दिख रही है तो महाविकस अघाड़ी काफी पीछे है। एमवीए में कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (शपा) जैसे दल शामिल हैं। चुनाव से पहले महायुति सरकार ने महिलाओं के लिए शुरू की गई मुख्यमंत्री- माझी लाडकी बहीण योजना को ‘गेमचेंजर’ बताया था और इसे पूरे प्रचार में एक अहम मुद्दा बनाया था। यह योजना महायुति और एमवीए के लिए इस लिहाज से भी अहम रही कि दोनों ने इस योजना को अपने चुनावी घोषणापत्र में शामिल किया। सत्ताधारी पार्टी के नेताओं ने महाराष्ट्र के नतीजों के पीछे लाडकी बहीण योजना को बताया है।

क्या है माझी लाडकी बहीण योजना जो बनी ‘गेमचेंजर’?
महाराष्ट्र सरकार ने 28 जून 2024 को ‘मुख्यमंत्री माझी लड़की बहीण’ योजना शुरू करने को मंजूरी दी थी। इस योजना के जरिए महाराष्ट्र में 21 से 65 साल की पात्र महिलाओं को 1,500 रुपये की आर्थिक मदद दी जा रही है। इस योजना का लाभ सीधे डीबीटी द्वारा महिलाओं को उनके खाते में दिया जा रहा है। सरकार का कहना है कि राज्य में महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता, उनके स्वास्थ्य और पोषण में सुधार और परिवार में उनकी अहम भूमिका को मजबूत करने के लिए यह योजना शुरू की गई थी।
किन महिलाओं को योजना का लाभ मिला?
1. लाभार्थी महाराष्ट्र राज्य का निवासी होना चाहिए।
2. राज्य में विवाहित, विधवा, तलाकशुदा, परित्यक्ता एवं निराश्रित महिलाएं और परिवार में केवल एक अविवाहित महिला।
3. न्यूनतम आयु 21 वर्ष और अधिकतम आयु 65 वर्ष पूरी होने तक।
4. लाभार्थी के पास आधार लिंक के साथ अपना बैंक खाता होना चाहिए।
5. लाभार्थी परिवार की वार्षिक आय रु. 2.50 लाख से अधिक नहीं होनी चाहिए।

इस योजना की कितनी महिलाएं लाभार्थी बनीं?
माझी लाडकी बहीण योजना के पोर्टल पर मौजूद जानकारी के अनुसार इस योजना के लिए कुल 1.12 करोड़ प्राप्त आवेदन मिले थे। वहीं पोर्टल पर स्वीकृत आवेदनों की कुल संख्या 1.06 करोड़ है। वहीं, महाराष्ट्र की महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने बताया कि मुख्यमंत्री माझी लड़की बहीण योजना का उद्देश्य 2.34 करोड़ पात्र महिलाओं को आर्थिक लाभ देना है।

रक्षा बंधन पर शुरू की गई इस योजना को सरकार द्वारा महाराष्ट्र के अनुपूरक बजट में शामिल किया गया है। इस योजना के लिए राज्य के खजाने से सालाना 46,000 करोड़ रुपये के आवंटन की आवश्यकता होगी। महाराष्ट्र सरकार ने योजना के तहत दिवाली बोनस 2024 की घोषणा भी की थी। पात्र महिलाओं को लाडकी बहीण योजना दिवाली बोनस 2024 पहल के जरिए चौथी और पांचवीं किस्त के भुगतान में 3,000 रुपये सीधे उनके बैंक खातों में जमा किए गए थे।

चुनाव में लाडकी बहीण योजना कैसे मुद्दा बनी?
सत्ताधारी महायुति ने अपने पूरे प्रचार के दौरान लाडकी बहीण योजना को चुनावी मुद्दा बनाकर इसका प्रचार किया। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने चुनावी अभियान में कहा कि यह योजना चुनाव में सरकार के लिए गेमचेंजर साबित होगी। वहीं विधानसभा चुनाव के लिए जारी घोषणा पत्र में महायुति ने लाडकी बहना योजना के तहत महिलाओं को हर माह 2,100 रुपये देने का वादे किया था। वहीं महाविकास अघाड़ी (एमवीए) ने भी अपने चुनावी घोषणा पत्र ‘महाराष्ट्रनामा’ में मुख्यत: पांच गारंटियों पर केंद्रित किया था। इस घोषणा पत्र में महिलाओं को हर माह 3,000 रुपये देने का वादा किया गया था।

महाराष्ट्र में बुधवार को विधानसभा चुनाव 2024 के लिए मतदान कराया गया था। राज्य के 36 जिलों की सभी 288 सीटों पर वोटिंग हुई जहां कई जिलों के मतदाताओं में जबरदस्त रुझान दिखा। आंकड़े के अनुसार राज्य में कुल 66.05% मतदान दर्ज किया गया। महाराष्ट्र के इस चुनाव में 9.70 करोड़ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए पात्र थे। इनमें से 5.00 करोड़ पुरुष, 4.69 करोड़ महिलाएं और 6,101 थर्ड जेंडर मतदाता थे। 2019 में महाराष्ट्र में कुल 61.44% वोटिंग दर्ज की गई थी। इस तरह से राज्य में पिछले विधानसभा चुनाव में मुकाबले 4.61% ज्यादा वोटिंग हुई।

महाराष्ट्र में इस विधानसभा चुनाव में कुल मतदान में लगभग 4.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, लेकिन इस वृद्धि में महिलाओं का योगदान अहम है। 2019 के चुनावों में महिला मतदाताओं का मतदान प्रतिशत 59.26 प्रतिशत से बढ़कर इस साल 65.21 प्रतिशत हो गया है। यानी 5.95 प्रतिशत अंकों की वृद्धि हुई है। मुंबई, इसके उपनगरों और इसके आस-पास के जिलों में भी महिला मतदाताओं की संख्या में काफी वृद्धि देखी गई। इसमें ठाणे जिले में 11 प्रतिशत अंकों की वृद्धि देखी गई, इसके बाद आदिवासी जिले पालघर में नौ प्रतिशत अंकों की वृद्धि हुई और मुंबई महानगर क्षेत्र में 2019 के चुनावों की तुलना में कम से कम सात प्रतिशत अंकों की वृद्धि हुई।

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने विधानसभा चुनावों के दौरान मतदान में हुई वृद्धि का श्रेय ‘सत्ता समर्थक भावना’ को दिया। उन्होंने दावा किया, ‘प्रारंभिक फीडबैक से पता चलता है कि मतदाताओं, विशेषकर महिलाओं के बीच मतदान प्रतिशत में वृद्धि हुई है। हमें जानकारी मिली है कि लाडकी बहीण योजना के कारण हमारे लिए वोट करने वाली महिलाओं का प्रतिशत बढ़ा है।’

Kedarnath Assembly By Election: केदारघाटी की जनता ने आशा नौटियाल पर दिखाया विश्वास, जानिए यहां पर कब से है महिला प्रत्याशी की जीत का मिथक बरकरार.

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हॉट सीट केदारनाथ विधानसभा में महिला प्रत्याशी की जीत का मिथक भाजपा ने दोहराया है। धुआंधार प्रचार का फल भाजपा को मिला और केदारघाटी की जनता ने आशा पर उम्मीद जताई। केदारनाथ विधानसभा उपचुनाव में भाजपा ने महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व विधायक आशा नौटियाल को प्रत्याशी बनाया। वर्ष 2017 के बाद वह एक बार फिर चुनाव मैदान में उतरीं।

उत्तराखंड राज्य बनने के बाद वर्ष 2002 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में वह केदारनाथ विस की पहली विधायक चुनी गईं, तब वह भाजपा से प्रत्याशी थीं। वर्ष 2007 में भी उन्हें क्षेत्रीय जनता ने अपना विधायक चुना था। इसके बाद दो बार चुनाव में उन्हें पराजय मिली। ऊखीमठ विकासखंड के दिलमी गांव निवासी आशा नौटियाल एक सामान्य परिवार से संबंध रखती हैं।
उनके पति रमेश नौटियाल पत्रकारिता से जुड़े रहे हैं। वह वर्ष 1996 में पहली बार ऊखीमठ वार्ड से निर्विरोध जिला पंचायत सदस्य चुनी गईं।इसके बाद वर्ष 1997-98 में उन्हें भाजपा ने जिला उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी और वर्ष 1999 में उन्हें महिला मोर्चा का जिलाध्यक्ष चुना गया। सौम्य व्यवहार और निरंतर जनसंपर्क की वजह से वर्ष 2002 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में आशा नौटियाल को भाजपा ने केदारनाथ विस से प्रत्याशी बनाया और वह विजयी हुईं। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी दिवंगत विधायक शैलारानी रावत को पराजित किया था।
आशा नौटियाल की जब पुन: पार्टी में हुई वापसी-
वर्ष 2007 में भी भाजपा ने उन्हें प्रत्याशी बनाया और उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी कुंवर सिंह नेगी को पराजित कर विजयश्री हासिल की। वर्ष 2012 में लगातार तीसरी बार वह भाजपा की प्रत्याशी घोषित हुईं, पर इस बार उन्हें कांग्रेस प्रत्याशी शैलारानी रावत से हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद वर्ष 2016 में शैलारानी रावत भाजपा में शामिल हो गईं और वर्ष 2017 में भाजपा ने उन्हें अपना प्रत्याशी बना दिया, जिस पर आशा नौटियाल ने पार्टी से बगावत करते हुए निर्दलीय चुनाव लड़ा और तीसरे स्थान पर रहीं। तब, कांग्रेस से मनोज रावत विधायक चुने गए और निर्दलीय कुलदीप रावत दूसरे स्थान पर रहे।
कुछ समय बाद आशा नौटियाल की पुन: पार्टी में वापसी हुई और वह क्षेत्र में सक्रिय हो गईं। वर्ष 2022 में पार्टी ने पुन: शैलारानी रावत को प्रत्याशी बनाया और वह जीत गईं। वहीं, आशा नौटियाल को महिला मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया, जिसके बाद वह सीधे हाईकमान के संपर्क में आ गईं। इस बार सदस्यता अभियान में भी वह गांव-गांव संपर्क करती दिखीं। विस क्षेत्र में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है।