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16 साल से कम उम्र के बच्चों को कोचिंग पढ़ाने पर लगी रोक, आखिर सरकार ने क्यों लिया ये एक्शन, जानिए वजह।

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कोचिंग संस्थानों पर केंद्र सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है. अब कोई भी कोचिंग संस्थान 16 साल से कम उम्र के छात्रों को अपने यहां नहीं पढ़ा सकते हैं. शिक्षा मंत्रालय द्वारा घोषित नए दिशानिर्देश के मुताबिक, देश के कोचिंग संस्थान 16 साल से कम उम्र के विद्यार्थियों को अपने यहां दाखिल नहीं कर सकेंगे और अच्छे नंबर या रैंक दिलाने की गारंटी जैसे भ्रामक वादे भी नहीं कर सकेंगे. माना जा रहा है कोचिंग संस्थानों को विनियमित करने के लिए दिशानिर्देश एक कानूनी ढांचे की आवश्यकता को पूरा करने और बेतरतीब तरीके से निजी कोचिंग संस्थानों की बढ़ोतरी को रोकने के लिए हैं.

केंद्र सरकार के दिशा निर्देश में कहा गया, ‘कोई भी कोचिंग संस्थान स्नातक से कम योग्यता वाले शिक्षकों को नियुक्त नहीं करेगा. कोचिंग संस्थान विद्यार्थियों के नामांकन के लिए माता-पिता को भ्रामक वादे या रैंक या अच्छे अंक की गारंटी नहीं दे सकते. संस्थान 16 वर्ष से कम उम्र के छात्रों का नामांकन नहीं कर सकते. विद्यार्थियों का कोचिंग संस्थान में नामांकन माध्यमिक विद्यालय परीक्षा के बाद ही होना चाहिए.’

क्यों हुआ यह एक्शन-

अब सवाल उठता है कि आखिर सरकार ने कोचिंग संस्थानों पर यह एक्शन क्यों लिया है. बीते कुछ समय से कोटा में जिस तरह से बच्चों के आत्महत्या के मामले सामने आए हैं, उसने सरकार की चिंता बढ़ा दी थी. यही वजह है कि सरकार ने छात्रों के आत्महत्या के बढ़ते मामलों को देखते हुए यह एक्शन लिया है. इतना ही नहीं, शिक्षा मंत्रालय ने यह दिशा निर्देश विद्यार्थियों की आत्महत्या के बढ़ते मामलों, आग की घटनाओं, कोचिंग संस्थानों में सुविधाओं की कमी के साथ-साथ उनके द्वारा अपनाई जाने वाली शिक्षण पद्धतियों के बारे में सरकार को मिली शिकायतों के बाद तैयार किए हैं.

दिशानिर्देश में क्या-क्या है-

शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी दिशानिर्देश के मुताबिक, ‘कोचिंग संस्थान कोचिंग की गुणवत्ता या उसमें दी जाने वाली सुविधाओं या ऐसे कोचिंग संस्थान या उनके संस्थान में पढ़े छात्र द्वारा प्राप्त परिणाम के बारे में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी दावे को लेकर कोई भ्रामक विज्ञापन प्रकाशित नहीं कर सकते हैं या प्रकाशित नहीं करवा सकते हैं या प्रकाशन में भाग नहीं ले सकते हैं.’ कोचिंग संस्थान किसी भी शिक्षक या ऐसे व्यक्ति की सेवाएं नहीं ले सकते, जो नैतिक कदाचार से जुड़े किसी भी अपराध के लिए दोषी ठहराया गया हो. कोई भी संस्थान तब तक पंजीकृत नहीं होगा जब तक कि उसके पास इन दिशानिर्देशों की आवश्यकता के अनुसार परामर्श प्रणाली न हो. दिशानिर्देश में कहा गया, ‘कोचिंग संस्थानों की एक वेबसाइट होगी जिसमें पढ़ाने वाले शिक्षकों (ट्यूटर) की योग्यता, पाठ्यक्रम/पाठ्य सामग्री, पूरा होने की अवधि, छात्रावास सुविधाएं और लिए जाने वाले शुल्क का अद्यतन विवरण होगा.’ नए दिशानिर्देशों के अनुसार, विद्यार्थियों पर कड़ी प्रतिस्पर्धा और शैक्षणिक दबाव के कारण कोचिंग संस्थानों को उन्हें तनाव से बचाने के लिए कदम उठाने चाहिए और उन पर अनावश्यक दबाव डाले बिना कक्षाएं संचालित करनी चाहिए.

फीस को लेकर भी गाइडलाइन-

दिशानिर्देश में कहा गया, ‘कोचिंग संस्थानों को संकट और तनावपूर्ण स्थितियों में छात्रों को निरंतर सहायता प्रदान करने के लिए तत्काल हस्तक्षेप के लिए एक तंत्र स्थापित करना चाहिए. सक्षम प्राधिकारी यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा सकता है कि कोचिंग संस्थान द्वारा एक परामर्श प्रणाली विकसित की जाए जो छात्रों और अभिभावकों के लिए आसानी से उपलब्ध हो.’ दिशा निर्देश में विद्यार्थियों के मानसिक कल्याण को लेकर विस्तृत रूपरेखा पिछले साल कोटा में रिकॉर्ड संख्या में छात्रों की आत्महत्या करने की घटना के बाद आई है. दिशा निर्देश में कहा गया कि विभिन्न पाठ्यक्रमों का शुल्क पारदर्शी और तार्किक होना चाहिए और वसूले जाने वाले शुल्क की रसीद दी जानी चाहिए. इसमें साफ किया गया है कि अगर छात्र बीच में ही पाठ्यक्रम छोड़ता है तो उसकी बची हुई अवधि की फीस लौटाई जानी चाहिए.

राज्य सरकार को मिली जिम्मेदारी-

नीति को सशक्त बनाते हुए केंद्र ने सुझाव दिया है कि कोचिंग संस्थानों पर दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाना चाहिए या अत्यधिक शुल्क वसूलने पर उनका पंजीकरण रद्द कर दिया जाना चाहिए. कोचिंग संस्थानों की उचित निगरानी के लिए सरकार ने दिशानिर्देश के प्रभावी होने के तीन महीने के भीतर नए और मौजूदा कोचिंग संस्थानों का पंजीकरण करने का प्रस्ताव किया है. दिशानिर्देश के मुताबिक राज्य सरकार कोचिंग संस्थान की गतिविधियों की निगरानी के लिए जिम्मेदार होंगे.

Bharat Jodo Nyay Yatra: असम के CM हिमंत बिस्वा सरमा का बड़ा बयान, राहुल गांधी होंगे गिरफ्तार!

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी इन दिनों भारत जोड़ों न्याय यात्रा पर हैं। राहुल गांधी की यात्रा असम पहुंच चुकी है असम में यह यात्रा 17 जिलों से होकर गुजरेगी वहीं राहुल गांधी की न्याय यात्रा को लेकर राजनीति भी खूब हो रही है राहुल गांधी की यात्रा को लेकर बीजेपी लगातार हमलावर है।

असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा राहुल गांधी के न्याय यात्रा को लेकर बड़ा बयान दिए हैं। उन्होंने कहा है कि,  राहुल गांधी को शहर के अंदर प्रवेश करने की इजाजत नहीं दी जाएगी,, अगर वह फिर भी जिद्द कर शहर में आते हैं तो उनके खिलाफ केस दर्ज होगी औऱ उनकी गिरफ्तारी होगी। 

राहुल गांधी की यात्रा नगालैंड से असम पहुंच चुकी है असम के शिवसागर जिले से शुरू होकर यह यात्रा राज्य के अन्य 17 जिलों से गुजरेगी इसी में गुवाहाटी शहर भी शामिल है जिसको लेकर राजनीतिक भूचाल आया है उन्होंने कहा कि, “हमने कहा है कि शहरों के अंदर से नहीं जाना है जो भी वैकल्पिक रास्ता मांगा जाएगा उसकी अनुमति दे दी जाएगी लेकिन अगर शहर के अंदर से जाने की जिद की जाएगी तो हम पुलिस की व्यवस्था नहीं करेंगे ”मैं केस दर्ज कर लूंगा और चुनाव के बाद गिरफ्तार करूंगा अभी कुछ नहीं करूंगा”।

और अब खबर आ रही है कि राहुल गांधी के खिलाफ असम पुलिस ने FIR भी दर्ज कर दी गयी है न्यूज एजेंसी पीटीआई ने पुलिस अधिकारी के हवाले से यह जानकारी दी है अधिकारी ने कहा, ”जोरहाट सदर पुलिस स्टेशन ने स्वत: संज्ञान लेते हुए यह एफआईआर यात्रा और उसके मुख्य आयोजक के खिलाफ दर्ज की है ” अधिकारी के अनुसार, एफआईआर में उल्लेख किया गया है कि यात्रा ने जिला प्रशासन के मानदंडों का पालन नहीं किया और सड़क सुरक्षा मानदंडों का उल्लंघन किया.

 

इस दौरान कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने  शिवसागर जिले में दावा किया कि देश में शायद सबसे भ्रष्ट सरकार और सबसे भ्रष्ट मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा इस राज्य में है.कुल मिलाकर बीजेपी और कांग्रेस आमने सामने आ चुके हैं ।  

Ram Mandir: 22 जनवरी को उत्तराखंड में सरकारी दफ्तरों में रहेगी आधे दिन की छुट्टी, जानिए कितने बजे खुलेंगे दफ्तर।

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अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर उत्तराखंड सरकार ने 22 जनवरी को सरकारी दफ्तरों में आधे दिन की छुट्टी घोषित की है। इस संबंध में आदेश जारी कर दिए गए हैं। आदेश के बाद कर्मचारी नेताओं ने कहा कि सरकार द्वारा सरकारी कार्यों में आधा दिन का अवकाश किया गया है जो की औचित्यहीन है।

आदेश से नाखुश कर्मचारियों ने कहा कि क्या कर्मचारी शिक्षक पहले प्राण प्रतिष्ठा में भाग लेंगे और 2:30 बजे बाद अपने कार्यालय में आएंगे जोकि असंभव है। सरकार अवकाश पर पुनर्विचार करके 22 जनवरी 2024 को पूरे दिन का अवकाश घोषित करें।

पूरा देश इस समय राममय

भाजपा के राष्ट्रीय सह-कोषाध्यक्ष व राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने भी मुख्यमंत्री से सार्वजनिक अवकाश घोषित करने का अनुरोध किया था। उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री को एक पत्र भी लिखा था।बंसल ने अपने पत्र में कहा कि 22 जनवरी को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम है। इसकी उत्तराखंड समेत पूरे विश्व में भव्य आयोजन की तैयारी चल रही है। पूरा देश इस समय राममय है। आस्था और विश्वास का यह महापर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है।

हर व्यक्ति 22 जनवरी का कार्यक्रम देखने को उत्सुक है। प्रत्येक रामभक्त इस प्राण प्रतिष्ठा समारोह का साक्षी बनना चाहता है। उत्तर प्रदेश, हरियाणा आदि प्रदेशों में 22 जनवरी को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है, ताकि लोग धूमधाम से यह उत्सव मना सकें।

जोशीमठ के बाद अब नैनीताल शहर पर मंडराया खतरा, जानिए क्यों जोशीमठ बनने की राह पर है नैनीताल।

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जोशीमठ भू-धंसाव के बाद खतरे की जद में नजर आ रहे नैनीताल शहर को बचाने और भविष्य की निर्माण योजनाओं को तैयार करने के लिए इसका भू-तकनीकी एवं भू-भौतिकीय सर्वेक्षण होगा। इसके अलावा नैनीताल में स्लोप स्थायित्व का भी सर्वेक्षण होगा। इसके लिए भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही शहर का लाइडर मैप भी तैयार किया जाएगा।

 

दरअसल, जोशीमठ भू-धंसाव के बाद सरकार ने तय किया था कि सभी पर्वतीय शहरों की धारण क्षमता का आकलन कराया जाएगा। इस कड़ी में पहले चरण में 15 शहरों का चयन किया गया था। सबसे पहले नैनीताल की धारण क्षमता के आकलन के साथ ही इसे भू-धंसाव से बचाने के लिए सर्वेक्षण होगा। इसके तहत नैनीताल का लाइडर (लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग) मैप तैयार किया जाएगा। इस तकनीक का उपयोग उच्च-रिजॉल्यूशन वाले मानचित्र बनाने में किया जाता है।

यहां पैदा हो रहा है खतरा-

नैनीताल की बुनियाद समझा जाने वाला बलिया नाला लगातार भू-स्खलन की जद में आ रहा है, इसका ट्रीटमेंट भी शुरू किया गया है। वहीं, नैनीताल का शीर्ष नैना पीक, भुजा टिफ्फन टॉप व स्नो व्यू की रमणीक पहाड़ी में भूस्खलन सक्रिय है।

यह होगा फायदा-

भू-सर्वेक्षण के बाद लाइडर मैप बनने से यह स्पष्ट हो सकेगा कि शहर में कितनी ऊंचाई तक के भवन सुरक्षित हैं। पहले से जो भवन बने हुए हैं, उनका शहर पर कितना बोझ है। कितने ढलान पर कितनी मंजिल के ऐसे भवन हैं, जो आपदा के लिहाज से खतरे में हैं। कितने डिग्री ढलान पर कितनी मंजिल के भवन बनाए जाने चाहिए। पर्वतीय शहरों में वह कौन सी भूमि व स्थान हैं, जहां भवन बनाना खतरनाक हो सकता है। भविष्य में नए निर्माण से लेकर सीवर, पेयजल तक का पूरा काम उसी मैप के हिसाब से होगा। इसके लिए मास्टर प्लान भी उसी के अनुसार बनाया जाएगा।

पहले चरण में इन 15 शहरों का होगा अध्ययन-

गोपेश्वर, पौड़ी, श्रीनगर, कर्णप्रयाग, नई टिहरी, उत्तरकाशी, लैंसडौन, रानीखेत, नैनीताल, कपकोट, धारचूला, चंपावत, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, भवाली।

हमने नैनीताल के भू-सर्वेक्षण व लाइडर मैपिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए जल्द एजेंसी का चयन कर लिया जाएगा। इसके बाद बाकी अन्य शहरों के लिए भी यह प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
-डॉ. रंजीत सिन्हा, सचिव, आपदा प्रबंधन 

 

Ayodhya : नए सिरे से बस रही है रामनगरी, 4 साल में 10 गुना बढ़ी जमीन की कीमत, जानिए क्या कुछ बदला. 

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चार वर्षों में सरकार अयोध्या में करीब 31 हजार करोड़ रुपये का निवेश कर इसे नए सिरे से बसा रही है। यह यूपी के किसी भी जिले में इन वर्षों में किए गए निवेश से अधिक ही है। 2017-18 में यहां जमीन के करीब छह हजार सौदे हुए। 2022-2023 में सौदे साढ़े चार गुना बढ़कर 27,000 तक पहुंच गए।
एक साल में ही पर्यटक सवा दो लाख से बढ़कर सवा दो करोड़ हो गए। जमीन की कीमत सिर्फ चार साल में दस गुना बढ़ गई। 30 साल पहले इस शहर में कोई आना नहीं चाहता था। लोग कहते थे, इस नगरी को माता सीता का श्राप लगा है। घर वीरान पड़े थे, क्योंकि नई पीढ़ी नौकरी के लिए दूर चली गई थी। मगर, राममंदिर से खड़े हुए धार्मिक पर्यटन ने नई अयोध्या तैयार कर दी है।

महंगी हो रही जमीन-

प्रॉपर्टी डीलर बृजेंद्र दुबे करीब दस साल से जमीन की खरीद-फरोख्त का काम कर रहे हैं। वह बताते हैं कि जो जमीन चार साल पहले 1,000 रुपये/वर्ग फुट में आसानी से मिल जाती थी, वह आज 4000 रुपये/वर्ग फुट में भी नहीं मिल रही है। पहले इस काम से 10-20 लोग ही जुड़े थे, अब एक हजार से ऊपर हो गए हैं। कोसी परिक्रमा के आसपास जमीन पांच लाख में मिल जाती थी। अब 30 लाख तक में मिल रही है। शहर के अंदर रामपथ पर जमीन के दाम बहुत बढ़े हैं। दो साल में कीमत एक हजार से बढ़कर छह हजार रुपये प्रति वर्ग फुट हो गई है।

बाजार दर बहुत अधिक, सरकार को हो रहा नुकसान

सरकार का सर्किल रेट कम है और बाजार का रेट बहुत अधिक है। रोजाना सैकड़ों रजिस्ट्री हो रही हैं। इससे सरकार को अच्छी-खासी चपत भी लग रही है। एक अफसर के मुताबिक सर्किल रेट बढ़ाने के लिए कई बार फाइल गई, मगर रुक जा रही है। सरकार का मानना है कि सर्किल रेट बढ़ने से उसे मुआवजा अधिक देना पड़ेगा। हालांकि जितना मुआवजा सरकार को भविष्य में नहीं देना पड़ेगा, उससे अधिक तो राजस्व में नुकसान हो जा रहा है। इसीलिए लक्ष्य के सापेक्ष आय नहीं हो पा रही है। 2023-24 वित्तीय वर्ष में दिसंबर में 1,028.81 लाख रुपये आय हुई, जो तय लक्ष्य का 74.71 फीसदी था।

नए सिरे से बस रही रामनगरी
अयोध्या में अब तक सबसे बड़ी रजिस्ट्री राम मंदिर ट्रस्ट ने कराई है। ट्रस्ट ने बैकुंठ धाम के पास 14 हजार 730 वर्गमीटर जमीन ली। इससे सरकार को 55 करोड़ 47 लाख 800 रुपये का राजस्व मिला। इसके अलावा आवास विकास प्राधिकरण ने टाउनशिप विकसित करने के लिए 1,194 एकड़ जमीन की खरीद की।

. बैनामे में आई कमी : विभागों की ओर से जहां-जहां जमीन का अधिग्रहण किया गया है, वहां जमीन की बिक्री में कमी आई है। दरअसल अधिग्रहण के आसपास की जमीन महंगी हो गई हैं। किसान भी नहीं बेच रहे हैं। इसमें सहादतगंज से नयाघाट मार्ग, गोसाईगंज बाईपास के आसपास के गांव, हवाई पट्टी के आसपास और प्रवेश द्वार राजेपुर उपरहार, दर्शन नगर रेलवे स्टेशन, पंचकोसी परिक्रमा मार्ग, चौदह परिक्रमा मार्ग और चौरासी कोसी परिक्रमा मार्ग के आसपास यही स्थिति है।

लोढ़ा ग्रुप ने सरकार से भी दिए अधिक दाम-
बृजेंद्र दुबे बताते हैं कि लोढ़ा ग्रुप के आने के बाद जमीन के दाम आसमान छूने लगे। इस ग्रुप ने किसानों को सरकार के चार गुना सर्किल रेट के मुकाबले छह गुना तक दाम दिए। इस ग्रुप ने अयोध्या से बाहर रामपुर हलवारा, राजेपुर क्षेत्र के बीच में सोसायटी बनाने के लिए जमीन खरीदी। यहां 2020 तक हाल यह था कि 50 हजार रुपये बिस्वा जमीन मिल रही थी। आज दाम चार लाख रुपये बिस्वा हो गया है।

नौकरी छोड़ अपने शहर लौट रहे युवा
मलावन के अनूप पांडेय गुजरात में नौकरी करते थे। यहां के बढ़ते वैभव व संभावनाओं को देखते हुए नौकरी छोड़ दी और कार खरीदकर पर्यटकों के लिए लगा दी है। कहते हैं, अब घर पर ही रोजगार मिल रहा है। इंजीनियर बृजेश पाठक प्रयागराज से नौकरी छोड़कर आए और आयुर्वेदिक दवा बनाने लगे हैं। अविनाश दुबे ने नौकरी छोड़कर गुड़ बनाने का काम शुरू किया है। 50 रुपये से लेकर 5 हजार रुपये किलो तक गुड़ तैयार कर रहे हैं। गुड़ में स्वर्ण भस्म भी डाल रहे हैं। अरविंद चौरसिया चंडीगढ़ से लौटकर यहां डोसा की दुकान चला रहे हैं।

बानगी हैं तस्वीरें…

तस्वीरें बानगी हैं रामनगरी में आस्था और वैभव के संगम की। पहली तस्वीर महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट की है, जो नई अयोध्या है। पहले चरण में इस पर 1450 करोड़ की लागत आई है। छह जनवरी से यहां उड़ान भी शुरू हो गई। अनुमान है कि प्रतिवर्ष लाखों यात्री यहां आएंगे। अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन भी अद्भुत बन पड़ा है। वहीं, दूसरी तस्वीर है दुनिया की सबसे बड़ी 108 फुट लंबी अगरबत्ती की। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास की मौजूदगी में इसे मंगलवार को प्रज्वलित किया गया। इस अगरबत्ती की खुशबू विकास में डूबी पूरी अयोध्या को 45 दिन तक सुगंधित करती रहेगी। इस अगरबत्ती का वजन 3610 किलो और चौड़ाई 3.5 फुट है। यह पर्यावरण के अनुकूल है। इसके निर्माण में 376 किलो नारियल के गोले, 1470 किलो गाय का गोबर, 420 किलो जड़ी बूटियां और 190 किलो घी का इस्तेमाल किया गया है।

Weather News: तापमान में आयी गिरावट, अगले चार दिन पड़ेगी कड़ाके की ठंड, जानिए अपने शहर के मौसम का हाल

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उत्तर भारत में तापमान लगातार गिर रहा है। इससे जहां ठंड बढ़ रही है वहीं जनजीवन रुक सा गया है। घने कोहरे के कारण विमान और रेल सेवा के साथ सड़क यातायात भी प्रभावित हो रहा है। पहाड़ों से लेकर मैदान क्षेत्रों तक मौसम ठंडा बना हुआ है।

दिल्ली में लगातार चौथे दिन न्यूनतम तापमान चार डिग्री से नीचे रहा। मंगलवार को दिल्ली में न्यूनतम तापमान 3.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जबकि अधिकतम तापमान 17.4 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक घने कोहरे के साथ भीषण सर्दी की चेतावनी जारी की है। दिल्ली के कुछ हिस्सों में शीतलहर चलेगी और बुधवार को सुबह घना कोहरा होगा।

पंजाब में शून्य से नीचे पहुंचा तापमान-

पंजाब के नवांशहर में मंगलवार को न्यूनतम तापमान माइनस 0.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। यहां सोमवार को न्यूनतम तापमान माइनस 0.2 था। वहीं, चंडीगढ़ में न्यूनतम तापमान 2.7 डिग्री, पटियाला में 3.1 डिग्री, लुधियाना में 3.3 डिग्री, फतेहगढ़ साहिब में 3.4 डिग्री, गुरदासपुर में 3.5 डिग्री और अमृतसर में 5.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने बुधवार को घने कोहरे और शीतलहर का रेड अलर्ट जारी किया है।

मंगलवार को दृश्यता रही शून्य-

हरियाणा में जनवरी में तीसरी बार तापमान एक डिग्री सेल्सियस से नीचे रहा। महेंद्रगढ़ का न्यनूतम तापमान 0.7 डिग्री और रेवाड़ी का 1.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।वहीं, पानीपत, फतेहाबाद सहित चार जिलों की सीजन की सबसे सर्द रात रही। मंगलवार सुबह घने कोहरे से दृश्यता शून्य रही। इससे लोगों को परेशानी का भी सामना करना पड़ा है।

U.P में कोहरे और गलन से नहीं राहत-

उत्तर प्रदेश में कोहरे और गलन का चक्र टूट नहीं रहा है। लगातार चौथे दिन मंगलवार को भी कई जिलों में सुबह की शुरुआत कोहरे के साथ हुई। दोपहर में धूप निकली, मगर सर्द हवा के आगे बेअसर ही रही। मेरठ फिर सबसे सर्द जिला रहा और यहां मंगलवार को तापमान 3.8 डिग्री रहा।

ट्रेनों और उड़ानों पर कोहरे का बड़ा असर-

वहीं ट्रेनों और उड़ानों पर कोहरे का असर जारी है। 22 जनवरी तक शीतलहर प्रचंड रूप में चलती रहेगी। 45 से अधिक जिलों में घना कोहरा का अलर्ट जारी किया गया है।बिहार में आज 12 जिलों में हल्की वर्षा के आसार : बिहार में हिमालय की तलहटी से आ रही बर्फीली हवाओं के कारण घने कोहरा व भीषण ठंड का प्रभाव बीते पांच दिनों से बना हुआ है।

पटना का भी वही हाल-

मंगलवार को बिहार के पटना सहित 17 शहरों के न्यूनतम तापमान में आंशिक वृद्धि हुई। वहीं, पटना समेत 22 शहरों के अधिकतम तापमान में गिरावट दर्ज की गई। बुधवार को पटना समेत 12 जिलों में हल्की वर्षा के आसार हैं। इससे 20 जनवरी तक प्रदेश के अधिकतर भाग में शीत दिवस की स्थिति बनी रहेगी।

पहाड़ों में भी लगातार गिर रहा है तापमान-

उत्तराखंड में पिछले तीन दिन में रात के तापमान दो से तीन डिग्री सेल्सियस की कमी आई है। चंपावत तापमान माइनस 1.1 डिग्री व अल्मोड़ा का माइनस 2.1 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है। पंतनगर एयरपोर्ट पर पिछले 20 दिन से उड़ानें नहीं भरी जा रही हैं।

जम्मू में मंगलवार को धूप खिलने से थोड़ी राहत मिली और अधिकतम तापमान 16.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। हालांकि में रविवार-सोमवार की रात मौजूदा सर्दियों की सबसे ठंडी रात रही और न्यूनतम तापमान 2.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ।हिमाचल प्रदेश में मौसम विभाग ने दो दिन हिमपात व वर्षा की संभावना जताई थी, लेकिन मंगलवार को पश्चिमी विक्षोभ का कोई प्रभाव नहीं दिखा।
मौसम विज्ञान केंद्र श्रीनगर के अनुसार 16 से 20 के बीच ऊपरी पहाड़ी क्षेत्रों में हल्की बर्फबारी की संभावना है।

विलंबित उड़ानें हुईं कम, यात्रियों की परेशानी नहीं-

घने कोहरे के कारण विमानों के आवागमन में हो रही देरी थमने का नाम नहीं ले रही है। मंगलवार को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय 288 उड़ानें विलंब की चपेट में आईं। विलंबित विमानों की संख्या के लिहाज से देखें, तो रविवार और सोमवार के मुकाबले इनमें कमी आई, लेकिन यात्रियों की परेशानी जारी है।

कोहरे के कारण सबसे ज्यादा घरेलू उड़ानें प्रभावित रहीं। सबसे ज्यादा असर प्रस्थान पर पड़ा। सुबह छह से 10 बजे के बीच कम से कम 70 उड़ानों में देरी हुई। इसके बाद स्थिति धीरे-धीरे सुधरने लगी। आगमन की बात करें, तो यहां भी विलंब देखने को मिला।

27 घंटे से अधिक विलंब से रवाना हुई बिहार संपर्क क्रांति

कोहरे के कारण लंबी दूरी की 125 से ज्यादा ट्रेनें विलंब से दिल्ली से पहुंचीं। कई ट्रेनें एक दिन बाद अपने गंतव्य पर पहुंच रही हैं।

सोमवार को रवाना होने वाली नई दिल्ली-दरभंगा बिहार संपर्क क्रांति एक्सप्रेस 27 घंटे 50 मिनट की देरी से मंगलवार शाम 4:50 बजे रवाना हुई। वहीं, मंगलवार को चलने वाली यह ट्रेन साढ़े 15 घंटे की देरी से बुधवार शाम साढ़े चार बजे चलेगी। ट्रेन के देरी से चलने से यात्री परेशान हैं।

Uttarakhand: 51 वाइब्रेंट विलेज में अब पहुंच हो सकेगी आसान, सड़कों के लिए पहली किस्त जारी.

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उत्तराखंड के 51 वाइब्रेंट विलेज के बीच पांच सड़कों के लिए केंद्र ने 119.44 करोड़ को मंजूरी देते हुए इसकी 26.06 करोड़ की पहली किस्त जारी कर दी है। राज्य सरकार वाइब्रेंट विलेज से संबंधित सभी योजनाओं की डीपीआर केंद्र को भेज चुकी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर भारत-चीन सीमा पर स्थित उत्तरकाशी जिले के 10, चमोली जिले के जोशीमठ के 14, पिथौरागढ़ जिले के धारचूला के 17, कनालीछीना के 2, मुनस्यारी के 8 गांवों को वाइब्रेंट विलेज घोषित किया गया था। इन गांवों में विकास कार्यों के लिए संबंधित जिलों के डीएम से प्रस्ताव मांगे गए थे। इन प्रस्तावों पर पिछले साल 26 सितंबर को हुई बैठक में कुछ संशोधन के साथ मुख्य सचिव ने अनुमोदन दे दिया था। इसके लिए सभी डीपीआर केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेज दी गई हैं।

कुल 506 में से 66 परियोजनाएं वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत और 440 अन्य योजनाओं से कंवर्जेंस के तहत पूरी होनी हैं। गृह मंत्रालय ने वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत 43.96 किमी लंबाई की पांच सड़कों के लिए 119.443 करोड़ की स्वीकृति दी है, जिसमें से 26.06 करोड़ की पहली किश्त जारी कर दी है। सचिव ग्राम्य विकास राधिका झा ने बताया कि वाइब्रेंट विलेज संबंधी प्रस्ताव गृह मंत्रालय को ऑनलाइन माध्यम से भेजे जा चुके हैं। इसी के तहत पांच सड़कों को मंजूरी मिली है।

ग्रामीणों का जीवन स्तर सुधरेगा-

 
पिछले आम बजट में सरकार ने वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम की घोषणा की थी। इसके तहत सीमांत गांवों के निवासी लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए विभिन्न योजनाएं बनाई गई हैं। चूंकि उत्तराखंड में करीब छह माह तक लोग सीमांत गांव में रहते हैं और छह माह तक पलायन करके दूसरे स्थानों पर रहते हैं। इसलिए राज्य सरकार ने उनके लिए दोनों स्थानों पर पीएम आवास योजना के तहत आवास बनाने का प्रस्ताव भी गृह मंत्रालय को भेजा हुआ है।

Uttarakhand: जानिए उत्तराखंड के इन 4 गांवों में अचानक क्यों लगा लॉकडाउन।

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दो घंटे की यात्रा अब सिर्फ 15 मिनट में, इन राज्यों का सफर आसान और पैसे की भी होगी बचत; जानिए अटल सेतु से क्या बदलेगा?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को महाराष्ट्र के दौरे पर हैं। अपने दौरे में पीएम मुंबई में अटल सेतु को जनता को समर्पित किया। देश की आर्थिक राजधानी में बना यह पुल देश का सबसे लंबा पुल है। अधिकारियों ने कहा है कि पुल से हर रोज करीब 70 हजार यात्री सफर करेंगे जिनके समय और ईंधन खर्च में बहुत अधिक कमी आएगी।

जानिये कहाँ बनाया गया है अटल सेतु ?

इसका पूरा नाम अटल बिहारी वाजपेयी सेवारी-न्हावा शेवा अटल सेतु है। पहले इसे मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक (एमटीएचएल) के नाम से भी जाना जाता था। यह अरब सागर में ठाणे क्रीक पर 22 किलोमीटर लंबा ट्विन-कैरिज वे छह-लेन पुल है। अटल सेतु मुंबई में सेवरी को रायगढ़ जिले में चिरले से जोड़ता है।

पुल कितने समय में हुआ बनकर तैयार ?

पहली बार 1962 में ‘मुंबई मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र के लिए सड़क प्रणाली की योजना’ के नाम से इसका विचार सामने आया था। 34 साल बाद 1994 में परियोजना की व्यवहार्यता रिपोर्ट शुरू हुई। वहीं 2006 में निविदाएं बुलाई गईं जबकि इसके 10 साल बाद 2016 में पीएम मोदी ने इस पुल का शिलान्यास किया। आखिरकार परियोजना पर काम अप्रैल 2018 में शुरू हुआ।

परियोजना की लागत कितनी है?
अटल सेतु का निर्माण 17,840 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से किया गया है। आरटीआई के माध्यम से प्राप्त जानकारी के अनुसार, अनुमानित लागत से ज्यादा व्यय हुआ है। 14,712.70 करोड़ रुपये इसकी मूल लागत थी लेकिन कोविड के कारण लगने वाले लॉकडाउन की वजह से इसमें देरी हुई और व्यय ज्यादा हुआ।

इस पुल की विशेषता क्या है? 
अटल सेतु लगभग 21.8 किमी लंबा और 6-लेन वाला है जो 16.5 किमी लंबा समुद्र के ऊपर और लगभग 5.5 किमी जमीन पर बना है। यह भारत का सबसे लंबा पुल है, जो देश का सबसे लंबा समुद्री पुल भी है। यह मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे और नवी मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को तेज कनेक्टिविटी प्रदान करेगा और मुंबई से पुणे, गोवा और दक्षिण भारत की यात्रा में लगने वाले समय को भी कम करेगा। अटल सेतु मुंबई से नवी मुंबई के बीच लगने वाले मौजूदा दो घंटे के समय को कम करके 15-20 मिनट कर देगा। वहीं अधिकारियों ने कहा कि इस पुल से गुजरने वाले लोगों को हर यात्रा में कम से कम 500 रुपये तक के ईंधन की भी बचत होगी। इसके साथ ही यह मुंबई बंदरगाह और जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह के बीच कनेक्टिविटी को भी बेहतर बनाएगा।

इसका आम लोगों को कितना फायदा होगा? 
हजारों करोड़ की लागत से बना अटल सेतु मुंबई को नवी मुंबई से जोड़ेगा। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के लिए यह पुल नई जीवन रेखा बनेगा, वहीं बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में यह भारत के विकास की नई इबारत है। एक अनुमान के मुताबिक पुल से हर रोज करीब 70 हजार लोग सफर करेंगे। यहां 400 कैमरे लगे हैं, इसके अलावा ट्रैफिक के दबाव की जानकारी जुटाने के लिए एआई आधारित सेंसर लगे हैं।

इस बीच, मुंबई पुलिस ने जानकारी दी है कि समुद्री पुल पर चार पहिया वाहनों जैसे कार, टैक्सी, हल्के मोटर वाहन, मिनीबस और टू-एक्सल बस की गति सीमा 100 किलोमीटर प्रति घंटा होगी और पुल के चढ़ने और उतरने पर गति 40 किलोमीटर प्रति घंटा तक सीमित रहेगी। हालांकि, मोटर बाइक, ऑटो रिक्शा और ट्रैक्टर को इस पुल पर अनुमति नहीं होगी।

अधिकारियों ने यह भी बताया कि मुंबई की ओर जाने वाले मल्टी-एक्सल भारी वाहनों, ट्रकों और बसों को ईस्टर्न फ्रीवे पर प्रवेश नहीं मिलेगा।

Uttarakhand: 3 घंटे से ज्यादा देरी से चली ट्रेन तो टिकट की रकम होगी वापस, जानिए रेलवे ने क्यों लिया ये फैसला.

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देहरादून रेलवे स्टेशन के मुख्य वाणिज्य निरीक्षक ने कहा कि कोहरे के चलते सुबह के समय ही ट्रेन का संचालन प्रभावित हो रहा है। ऐसे में अगर किसी यात्री को ट्रेन का तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ा और वह यात्रा नहीं करता तो उसके टिकट की पूरी रकम उसे लौटाई जाएगी।

अगर यात्रियों को तीन घंटे से अधिक समय तक ट्रेन का इंतजार करना पड़ा तो उनके टिकट की पूरी रकम उन्हें लौटाई जाएगी। मैदानी इलाकों में सुबह के समय कोहरा छाने से ट्रेन की रफ्तार धीरे होने लगी है। दून में ट्रेन देरी से पहुंचने के कारण यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

इन दिनों हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर, दिल्ली समेत पंजाब, उत्तर प्रदेश के कई जिलों में घना कोहरा छा रहा है। देहरादून रेलवे स्टेशन के मुख्य वाणिज्य निरीक्षक सुभाष अग्रवाल ने कहा कोहरे के चलते सुबह के समय ही ट्रेन का संचालन प्रभावित हो रहा है।

धीमी गति होने की वजह से ट्रेन देरी से पहुंच रही है। ऐसे में अगर किसी यात्री को ट्रेन का तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ा और वह यात्रा नहीं करता तो उसके टिकट की पूरी रकम उसे लौटाई जाएगी। हालांकि दिन के समय मौसम साफ होने से संचालन किया जा रहा है।