Category Archive : राज्य

कांग्रेस को एक और बड़ा झटका, 50 विधायक बीजेपी में जाने को तैयार, कुमारस्वामी ने किया सनसनीखेज खुलासा.

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पांच राज्यों में चुनावी नतीजे आने के बाद जिस तरह कांग्रेस के लिए नतीजे निराश करने वाले रहे हैं उससे कहीं न कहीं कांग्रेस में चिंता बनी हुई है,इन नतीजों ने उनके 2024 के मिशन को भी झटका लगा है. लेकिन अब दक्षिण से भी कांग्रेस को बड़ा झटका लगने की तैयारी है पांच राज्यों से पहले हुए चुनावों में कांग्रेस हिमाचल और कर्नाटक में जीत से काफी उत्साहित थी, लेकिन हाल ही में आये इन  चुनाव नतीजों ने कांग्रेस को बड़ा झटका दिया है इन झटकों से कांग्रेस उबर पाती उससे पहले कांग्रेस को एक और बड़ा झटका लगने का दावा किया जा रहा है,,कहा जा रहा है कि जिस कर्नाटक जीत से कांग्रेस में उत्साह था वो कर्नाटक अब उनके हाथ से निकल सकता है क्योंकि यहां के 50 से 60 कांग्रेसी विधायक पार्टी का साथ छोड़ भाजपा में शामिल होने की तैयारी में हैं. मतलब जो खेला महाराष्ट्र में हुआ वो अब कर्नाटक में होने जा रहा है.

जनता दल S  के नेता एचडी कुमारस्वामी के रविवार को एक चौंकाने वाला दावा सामने आया है। उनका कहना है कि कर्नाटक में कांग्रेस सरकार कभी भी गिर सकती है। कुमारस्वामी ने कहा कि केंद्र द्वारा शुरू की गई कानूनी परेशानियों से बचने के लिए सत्तारूढ़ कांग्रेस के एक प्रभावशाली मंत्री भाजपा में शामिल होने पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि मंत्री ‘50 से 60 विधायकों’ के साथ कांग्रेस पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो सकते हैं। इसके लिए वह भाजपा के नेताओं के साथ बातचीत कर रहे हैं।

जेडीएस नेता ने पत्रकारों से कहा कि कांग्रेस सरकार में सब कुछ ठीक नहीं है। उन्हें नहीं पता कि यह सरकार कब गिर जाएगी। एक मंत्री अपने खिलाफ दर्ज मामलों से बचने के लिए बेताब हैं। कुमारस्वामी ने कहा कि केंद्र ने उनके खिलाफ ऐसे मामले दर्ज किए हैं, जिनसे बच निकलने की कोई संभावना नहीं है। जब पत्रकारों ने नेता का नाम पूछा तो उन्होंने कहा कि छोटे नेताओं से ऐसे कदम की उम्मीद नहीं की जा सकती। केवल प्रभावशाली लोग ही ऐसा कर सकते हैं।

जनता दल एस के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि कर्नाटक में किसी भी समय महाराष्ट्र जैसा कुछ हो सकता है। उन्होंने कहा कि मौजूदा राजनीतिक माहौल को देखते हुए, कुछ भी हो सकता है।कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड़गे  ने कहा कि चुनाव के बाद कर्नाटक में जेडीएस का कोई अस्तित्व नहीं बचा है। अस्तित्व बचाने के लिए पार्टी संघर्ष कर रही है।जब कुमारस्वामी से नेता का नाम पूछा गया तो उन्होंने कहा कि छोटे नेताओं से ऐसे ‘निर्भीक’ कदम की उम्मीद नहीं की जा सकती उन्होंने कहा कि केवल ‘प्रभावशाली लोग’ ही ऐसा कर सकते हैं. जनता दल एस  के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि कर्नाटक में किसी भी समय ‘महाराष्ट्र जैसा कुछ’ हो सकता है. उन्होंने कहा, ‘मौजूदा राजनीतिक माहौल को देखते हुए कुछ भी हो सकता है.’

खरगे ने आगे कहा कि बीआरएस ने भाजपा के साथ गठबंधन किया। एक पार्टी के रूप में बने रहें इसे सुनिश्चित करने के लिए जो कर सकते हैं वह कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस का सफाया होने की बात भूल जाइए। चुनाव से पहले न तो जेडीएस और न ही भाजपा रहेगी।

कुल मिलाकर कर्नाटक में कांग्रेस के साथ खेला हो सकता है अगर कुमार स्वामी का दावा सही है तो फिर 2024 से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लग सकता है और दक्षिण में कमजोर पड़ती भाजपा के लिए ये बड़ा फायदा हो सकता है. कुमारस्वामी के दावे में कितना दम है ये तो आने वाले वक्त में पता चल जायेगा। लेकिन अगर ये दावा सही है तो कांग्रेस के लिए कर्नाटक में बड़ी चुनौती होगी अपने विधायकों को जोड़े रखने की क्योंकि जरा सी चूक और बीजेपी को मौका,, और कांग्रेस जानती है कि इस तरह के मौके बीजेपी को देना कितनी बड़ी भूल साबित हो सकती है.

Madhya Pradesh CM: मोहन यादव होंगे मध्य प्रदेश के अगले मुख्यमंत्री; सस्पेंस आखिरकार खत्म.

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मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री की कुर्सी कौन संभालेगा, इसे लेकर कई दिनों से जारी सस्पेंस आज खत्म हो गया। विधायक दल की बैठक में मोहन यादव के नाम पर सहमति बन गई है। मोहन यादव उज्जैन दक्षिण से विधायक हैं। मोहन यादव को संघ का करीबी बताया जाता है। यादव उज्जैन दक्षिण से सीट से 2013, 2018 और 2023 में चुनाव जीत चुके हैं।

जानकारी के मुताबिक शिवराज सिंह चौहान ने ही मोहन यादव के नाम का प्रस्ताव विधायक दल की बैठक में किया था। इस एलान के साथ ही सभी कयासों पर विराम लग गया है। अब सूबे की कमान मोहन यादव के हाथों में होगी। सूत्रों का कहना है कि मोहन यादव का नाम आरएसएस ने ही दिल्ली हाईकमान को प्रस्तावित किया था। इसके बाद इनके नाम पर सहमति बन गई। नाम की घोषणा से बाद सबसे पहले संघ ने ही यादव को बधाई दी। उन्होंने भरे समारोह में फोन उठा कर बधाई स्वीकार भी की।

मध्यप्रदेश में दो उपमुख्यमंत्री भी होंगे। इनमें जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ला शामिल हैं। जगदीश देवड़ा मल्हारगढ़ और राजेंद्र शुक्ला  बिजावर से विधायक हैं। इसके अलावा स्पीकर पद के लिए नरेंद्र सिंह तोमर के नाम का एलान किया गया है।

यादव का विवादों से भी रहा है नाता-

मोहन यादव शिवराज सिंह चौहान की सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री का पद संभाल चुके हैं। वह साल 2013 में पहली बार विधायक बन कर आए थे। मोहन यादव एबीवीपी और संघ से जुड़े हुए बताए जा रहे हैं। साल 1984 में मोहन यादव छात्र संघ के अध्यक्ष और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के नगर मंत्री चुने गए थे।

मध्यप्रदेश के नए सीएम मोहन यादव का विवादों से काफी पुराना नाता रहा है। साल 2020 में उपचुनाव के समय असंयमित भाषा के प्रयोग के कारण चुनाव आयोग ने उनपर एक दिन के लिए प्रचार करने पर प्रतिबंधित लगा दिया था।

ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के समापन समारोह में पहुंचे गृहमंत्री अमित शाह, उत्तराखंड को लेकर कह दी ये बात

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उत्तराखंड में आयोजित दो दिवसीय वैश्विक निवेशक सम्मेलन के दूसरे और अंतिम दिन शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। वैश्विक निवेशक सम्मेलन के दूसरे दिन पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन, इंफ्रास्ट्रक्चर, वन एवं सहयोग क्षेत्र, उद्योग-स्टार्टअप, आयुष व वेलनेस, सहकारिता एवं खाद्य प्रसंस्करण विषय पर छह सत्र आयोजित किए गए।

 

इस खास मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उत्तराखंड ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2023 के समापन सत्र में भाग लिया और संबोधन दिया। इस मौके पर अमित शाह ने कहा कि मैंने उत्तराखंड के सीएम पुष्कर धामी से लक्ष्य के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि 2 लाख करोड़ रुपये, लेकिन आज 3.5 लाख करोड़ रुपये के एमओयू पर हस्ताक्षर हुए हैं। मैं इसके लिए राज्य प्रशासन को बधाई देना चाहता हूं। सीएम धामी के नेतृत्व में प्रदेश ने कमाल किया है।

 

दुनिया के सामने उदाहरण बनेगा उत्तराखंड

गृह मंत्री शाह ने कहा कि अब उत्तराखंड बनेगा। इसका विकास होगा और इसकी अलग पहचान बनेगी। ये इन्वेस्टर्स समिट दुनिया भर में यह एक मजबूत उदाहरण है कि यह अपनी प्राकृतिक सुंदरता से समझौता किए बिना और पर्यावरण-अनुकूल तरीकों का पालन करके खुद को व्यापार से जोड़ सकता है।

बतौर गृह मंत्री अमित शाह, सीएम धामी कहते हैं कि यहां कुदरत है…देव हैं…लेकिन मैं इसके साथ ये भी कहूंगा कि यहां भ्रष्टाचार मुक्त शासन भी है। जोकि इनवेस्टमेंट मुक्त निवेश के लिए भी जरूरी है। कहा कि पारदर्शिता उत्तराखंड का स्वभाव है। उन्होंने निवेशकों से कहा कि वह निश्चिंत होकर राज्य में निवेश करें, उन्हें भ्रष्टाचार नहीं मिलेगा।

 

कई हस्तियां भी बनीं निवेशक सम्मेलन की गवाह

निवेशक सम्मेलन में निवेशकों के अलावा कवि, लेखक व गीतकार प्रसून जोशी, पतंजलि आयुर्वेद के सीईओ आचार्य बालकृष्ण, परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष चिदानंद मुनि व अलग-अलग क्षेत्रों की मशहूर हस्तियां भी गवाह बनीं। सम्मेलन में प्रदेश सरकार के सात मंत्रियों के अलावा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, त्रिवेंद्र सिंह रावत, विजय बहुगुणा, तीरथ सिंह रावत, विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण, टिहरी सांसद माला राज्य लक्ष्मी, अल्मोड़ा के सांसद अजय टम्टा, पार्टी के प्रदेश महामंत्री संगठन अजेय कुमार, प्रदेश महामंत्री आदित्य कोठारी, पार्टी विधायक खजानदास, विनोद चमोली, मुन्ना सिंह चौहान, सहदेव पुंडीर, पार्टी प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान, प्रदेश प्रवक्ता हेमंत द्विवेदी समेत कई अन्य प्रमुख लोग उपस्थित रहे।

परमार्थ निकेतन जाएंगे गृहमंत्री

परमार्थ निकेतन में गृहमंत्री अमित शाह के प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतेजाम किए हैं। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एसएसपी पौड़ी, टिहरी व एसपी चमोली ने पुलिस अधिकारियों व कर्मियों को ब्रीफ किया। आज शनिवार शाम गृहमंत्री अमित शाह का परमार्थ निकेतन की आरती में शामिल होने का कार्यक्रम प्रस्तावित है। अमित शाह का हेलिकॉप्टर वेद निकेतन के समीप हेलीपैड पर पर लैंड करेगा। यहां से वह कार से परमार्थ निकेतन पहुंचेंगे। इस दौरान पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रहेगी।

‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ बना उत्तराखंड के उत्पादों का ब्रांड, पीएम मोदी ने किया लॉन्च

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राज्य के सभी उत्पादों को अब एक नाम से पहचाना जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज शुक्रवार को वैश्विक निवेशक सम्मेलन के दौरान हाउस ऑफ हिमालयाज की लांचिंग की। अभी तक हिमाद्री, हिलांस, ग्राम्यश्री जैसे तमाम उत्पाद अलग-अलग नाम से बाजार में जाते हैं, लेकिन अब सभी हाउस ऑफ हिमालयाज के नाम से पहचाने जाएंगे।

फरवरी में धामी कैबिनेट ने एक निर्णय लिया था कि प्रदेश के सभी उत्पादों की क्वालिटी, मार्केटिंग व ब्रांडिंग के लिए समिति का गठन किया जाए। इस आधार पर एक समिति का गठन किया गया है। इस समिति ने हाउस ऑफ हिमालयाज नाम पर मुहर लगाई। इस नाम का रजिस्ट्रेशन करा दिया गया है। ट्रेडमार्क के लिए आवेदन भी कर दिया गया है।

सचिव ग्राम्य विकास राधिका झा ने बताया कि अब हाउस ऑफ हिमालयाज उत्तराखंड का ब्रांड होगा। हिमाद्री, हिलांस समेत तमाम समितियों, स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को इसी ब्रांड नाम के साथ बाजार में उतारा जाएगा। इससे न केवल राष्ट्रीय, बल्कि भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उत्पादों को बेहतर बाजार मिलेगा।अपर सचिव ग्राम्य विकास नितिका खंडेलवाल ने बताया, हाउस ऑफ हिमालयाज उत्तराखंड का ब्रांड नाम हो गया है। जैसे टाटा या अन्य कंपनियों का एक नाम चलता है और विभिन्न उत्पाद बाजार में आते हैं। उसी तरह यह ब्रांड नाम चलेगा। उन्होंने कहा, सभी उत्पादों की अपनी पहचान के साथ हाउस ऑफ हिमालयाज का टैग उनके साथ रहेगा।

Uttarakhand Investors Summit: डबल इंजन के ‘डबल’ प्रयास हर तरफ दिख रहे, पढ़ें प्रधानमंत्री मोदी के भाषण की ये बातें.

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उत्तराखंड में आज से दो दिवसीय वैश्विक निवेशक सम्मेलन का शुभारंभ हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन का शुभारंभ किया। सम्मेलन में देश-दुनिया के 5000 से अधिक निवेशक और प्रतिनिधि शामिल हुए हैं। राज्य में विभिन्न सेक्टर में निवेश के लिए अभी तक तीन लाख करोड़ रुपये के एमओयू हो चुके हैं। कई बड़े निवेश के लिए सम्मेलन में करार हो सकते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि यहां आकर मन धन्य हो जाता है। कुछ वर्ष पहले जब मैं बाबा केदार के दर्शन को निकला था तो अचानक मेरे मुंह से निकला था कि 21वीं सदी का ये तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक है। मुझे खुशी है कि उस कथन को मैं लगातार पूरा होते देख रहा हूं।

उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि मैं देशवासियों को भरोसा दिलाता हूं कि मेरे तीसरे कार्यकाल में भारत दुनिया की टॉप थ्री इकॉनमी में आकर रहेगा। मोदी ने अगले आम चुनाव को लेकर भी ये इशारा किया।

पढ़ें प्रधानमंत्री के भाषण की बड़ी बातें-

 

  • पीएम मोदी ने कविता से भाषण की शुरुआत की। कहा- जहां अंजुली में गंगाजल हो, जहां हर एक मन बस निश्चल हो, जहां नारी में सच्चा बल हो उस देवभूमि का आशीर्वाद लिए मैं चलता जाता हूं। है भाग्य मेरा सौभाग्य मैं तुमको शीश नवाता हूं।
  • मैं देशवासियों को भरोसा दिलाता हूं कि मेरे तीसरे कार्यकाल में भारत दुनिया के टॉप थ्री इकॉनमी में आकर रहेगा। मोदी ने अगले आम चुनाव को लेकर भी ये इशारा किया।
  • मेक इन इंडिया की तरह वेड इन इंडिया भी चलाया जाए। आप कुछ निवेश करना पाओ या नहीं लेकिन अपने परिवार की एक डेस्टिनेशन वेडिंग अगले पांच साल में उत्तराखंड में करें। अगर पांच साल में पांच हजार डेस्टिनेशन वेडिंग भी उत्तराखंड में हुई तो ये एक नया क्षेत्र खड़ा हो जाएगा। देश के धन्ना सेठ इस बारे में सोचेंगे तो बड़ा बदलाव आएगा।
  • आप सभी बिजनेस की दुनिया के दिग्गज हैं। आप अपने काम का विश्लेषण करते हैं। आप सभी चुनौती का आकलन करके रणनीति बनाते हैं। ऐसा करने से हमें चारों तरफ एस्पिरेशन, होप, सेल्फ कॉन्फिडेंस दिखेगी। देश में पॉलिसी गवर्न सरकार दिखेगी।
  • भारत की मजबूती का फायदा उत्तराखंड समेत देश के हर राज्य को हो रहा है।उत्तराखंड इसलिए भी विशेष है क्योंकि यहां डबल इंजन सरकार है। डबल प्रयास चारों तरफ दिख रहे हैं। राज्य सरकार तेजी से यहां काम हो रहा है।
  • दिल्ली देहरादून एक्सप्रेस वे से दूरी 2.5 घंटे की होने जा रही है।
  • ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल लाइन से रेल कनेक्टिविटी आसान होने जा रही है।
  • पहले की सरकारें सीमावर्ती इलाकों को कम से कम पहुंच वाली थी। डबल इंजन ने इस धारणा को बदला। हम सीमावर्ती गांवों को विकसित करने जा रहे हैं।
  • पीएम मोदी ने सरकार को हाउस ऑफ हिमालयाज की बधाई दी। कहा कि यहां के लोकल उत्पादों को विदेशी बाजार में स्थापित करने की पहल है। ये वोकल फ़ॉर लोकल और लोकल फ़ॉर ग्लोबल का कारक बनेगा।
  • विकसित भारत के निर्माण के लिए राष्ट्रीय चरित्र को सशक्त करना होगा। ऐसे काम करने होंगे जिससे हमारे स्टैंडर्ड दुनिया फॉलो करें।
  • विकसित भारत अस्थिरता नहीं बल्कि स्थिरता चाहता है।
  • हमारे देश में मिलेट से लेकर तमाम फूड्स हैं जो पोषक हैं। किसानों की मेहनत बेकार नहीं जानी चाहिए। भारत की कंपनियों के लिए ये अभूतपूर्व समय है। अगले कुछ वर्षों में भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकॉनमी बनने जा रहा है।
  • जिसमें दम हो, मैदान में आ जाएं, फायदा उठा लें। मैं गारंटी देता हूं कि जो बातें हम बताते हैं उन्हें पूरा कराने को हम खड़े भी रहते हैं।
  • मेरे जीवन के एक पहलू को बनाने में इस धरती का बड़ा योगदान है। अगर उसे कुछ लौटाने का अवसर मिलता है तो उसका आनंद भी कुछ और होता है।
    आइए इस पवित्र धरती में चल पड़िए। आपके काम में कभी कोई बाधा नहीं आएगी।

Assembly Election 2023: इन राज्यों में CM कैंडिडेट की तस्वीर हुई साफ! जानिये अभी किन 3 राज्यों में फंसा है पेंच.

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 पांचों चुनावी राज्यों के परिणाम सामने आ चुके हैं, जिसके बाद यह तय हो गया है किस राज्य में कौन-सी पार्टी अपनी सरकार बनाने जा रही है। दरअसल, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में भाजपा ने प्रचंड जीत हासिल की है। वहीं, तेलंगाना में कांग्रेस ने बीआरएस पार्टी के हाथ से सत्ता छीन ली है। इसके अलावा, मिजोरम में जोरम पीपुल्स मूवमेंट (Zoram People’s Movement) को दो-तिहाई से ज्यादा बहुमत मिला है।

जानिए कहां किसकी हालत कैसी?

सत्ता में आने के बाद अब पार्टियों के सामने एक नई चुनौती आकर खड़ी हो गई है। दरअसल, छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्य प्रदेश में अब तक भाजपा ने किसी चेहरे पर मुहर नहीं लगाई है, जबकि कांग्रेस द्वारा तेलंगाना का सीएम तय होने को लेकर पार्टी में ही विरोध देखा जा रहा है। हालांकि, तेलंगाना में स्थिति स्थिर है और सीएम पद के लिए एक ही नाम सामने आ रहा है।

हालांकि, यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि किसी भी राज्य में पार्टियों ने आधिकारिक तौर पर किसी भी नाम की घोषणा नहीं की है।

मध्य प्रदेश में शिवराज या कोई और?

मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने सत्ता पर अपनी पकड़ को और भी मजबूत कर लिया है। दरअसल, पांच साल तक अपनी सत्ता के जरिए जनता के दिलों पर छाप छोड़ने वाली पार्टी ने एक बार फिर सत्ता पर अपना हक बरकरार रखा है। भाजपा ने प्रदेश में पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले काफी अच्छा प्रदर्शन रखा है। इसके बाद भी प्रदेश में भाजपा के सामने एक बड़ी मुसीबत आकर खड़ी हो गई है। दरअसल, प्रदेश में अब तक सीएम पद के लिए किसी के नाम पर मुहर नहीं लगाई गई है।

हालांकि, प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान प्रमुख नेताओं में से एक है, जिन्होंने इस बार भाजपा को भारी जीत दिलाई है। उन्होंने 1990 में अपने निर्वाचन क्षेत्र बुधनी में पहली जीत हासिल की थी, उसके बाद से आज तक वह सीट पर अपना कब्जा बनाए हुए हैं। उन्होंने पहली बार 2005 में सीएम पद की शपथ ली थी और पिछले पांच सालों में भी उन्होंने सीएम पद पर काबिज रहते हुए काफी प्रसिद्धि पाई है।

बीजेपी पार्टी के संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद इंदौर-एक विधानसभा सीट से विधायक चुने गए कैलाश विजयवर्गीय का प्रदर्शन भी अपनी सीट पर काफी बेहतर रहा है। इनको मुख्यमंत्री पद के लिए शिवराज सिंह चौहान का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। हालांकि, कैलाश विजयवर्गीय के अलावा केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल, ज्योतिरादित्य सिंधिया और नरेंद्र सिंह तोमर जैसे बड़े नेताओं को भी पद के लिए अन्य संभावितों में देखा जा रहा है।

राजस्थान में मुख्यमंत्री पद पर सस्पेंस बरकरार-

राजस्थान में भाजपा ने कांग्रेस के हाथ से सत्ता छीनकर उसे करारी शिकस्त दी है। फिलहाल, प्रदेश में भाजपा ने सीएम पद पर किसी का नाम तय नहीं किया है। हालांकि, कतार में भाजपा के कई बड़े और दिग्गज नेताओं का नाम शामिल है। दरअसल, अब तक राजस्थान में भाजपा सरकार बनने के बाद वसुंधरा राजे ने सत्ता संभाली है, लेकिन इस बार भाजपा बिना सीएम चेहरे के ही चुनावी मैदान में उतरी थी।

वसुंधरा राजे दो बार राजस्थान में सीएम पद संभाल चुकी हैं। वसुंधरा राजे 4 बार विधायक रह चुकी हैं। 5 बार लोकसभा सांसद रह चुकी हैं 14 नवंबर, 2002 से 14 दिसंबर, 2003 तक पार्टी प्रदेशाध्यक्ष रही हैं। इसके अलावा, उनका पहला कार्यकाल 2003 से 2008 तक और दूसरा कार्यकाल 2013 से 2018 तक रहा।

इस बार सीएम रेस में बाबा बालकनाथ योगी का नाम भी शामिल है। अलवर के सांसद बाबा बालकनाथ को लोकप्रिय रूप से राजस्थान के योगी के रूप में जाना जाता है और वह मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं। तिजारा विधानसभा क्षेत्र से 40 वर्षीय नेता अपनी विवादास्पद टिप्पणियों के लिए जाने जाते हैं।

जयपुर के शाही परिवार की सदस्य दीया कुमारी साल 2013 में भाजपा में शामिल हुईं। उसके बाद से उन्होंने तीन चुनावों में जीते हैं। वह 2019 के आम चुनाव में 5.51 लाख वोटों के अंतर से जीती थीं। जो की उस वक्त की सबसे बड़ी जीत में से एक थी। इन्हें राजस्थान में सीएम पद के लिए एक अच्छा दावेदार माना गया है।

इसके अलावा, सीएम रेस में सीपी जोशी, किरोड़ी लाल मीणा, अर्जुन राम मेघवाल, गजेंद्र सिंह शेखावत और ओम बिरला का नाम शामिल है।

छत्तीसगढ़ में छाएगा किस चेहरे का जादू

छत्तीसगढ़ में भी भाजपा ने कांग्रेस से सत्ता की कुर्सी छीनकर अपनी पकड़ बना ली है। भाजपा ने इस बार मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किए बिना ही चुनाव लड़ा था। ऐसे में भाजपा की इस जीत के बाद पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष अरुण साव को सीएम पद का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। इसके अलावा, भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लता उसेंडी, पूर्व भाजपा अध्यक्ष विष्णुदेव साय और भाजपा के महामंत्री व पूर्व आईएएस ओपी चौधरी के नाम को लेकर भी चर्चा है।

प्रदेश में लगातार आदिवासी मुख्यमंत्री की भी मांग होती रही है । ऐसे में अनुसूचित जनजाति(एसटी) वर्ग से प्रदेश में बड़े चेहरे में केंद्रीय राज्यमंत्री रेणुका सिंह, पूर्व राज्यसभा सदस्य रामविचार नेताम, पूर्व भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय, भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लता उसेंडी व युवा नेता में पूर्व मंत्री केदार कश्यप का नाम पहले आता है।

तेलंगाना में कांग्रेस में छिड़ा विरोध

तेलंगाना में कांग्रेस ने बीआरएस को हराकर पहली बार राज्य में जीत हासिल की है। चुनाव परिणाम आने के दो दिन बाद भी मुख्यमंत्री के नाम पर स्थिति साफ नहीं हुई है। तेलंगाना में मुख्यमंत्री पद के लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रेवंत रेड्डी का नाम सामने आ रहा है, लेकिन अब तक कांग्रेस के जीते हुए सभी 64 विधायकों के बीच सीएम के चयन पर सहमति नहीं बन पाई है।

साथ ही, पार्टी की ओर से भी अब तक सीएम पद पर किसी के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

मिजोरम में तय हुआ नाम!

पूर्व आईपीएस लालदूहोमा की पार्टी जोरम पीपुल्स मूवमेंट (जेडपीएम) को मिजोरम में दो-तिहाई बहुमत मिला है। सोमवार को हुई मतगणना में 40 सदस्यीय मिजोरम विधानसभा में 27 सीटें जीतकर जेडपीएम ने मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) को सत्ता से बाहर कर दिया।

इसके बाद ही, सीएम पद के लिए लालदूहोमा के नाम का शोर है, लेकिन अब तक पार्टी की ओर से इस नाम की आधिकारिक घोषणा होना बाकी है।

Uttarakhand: केदारनाथ में हुई बर्फ़बारी, पारा-6 डिग्री पहुंचा, आज कहीं बारिश तो कहीं कोहरा, जानिए कहां कैसा है मौसम का हाल.

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प्रदेश के पर्वतीय जिलों के कुछ इलाकों में हल्की बारिश होने से ठंड बढ़ सकती है। मैदानी इलाकों में कोहरा लगने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिले के कुछ इलाकों में बारिश होने की संभावना जताई है।

अन्य जिलों में मौसम शुष्क रहेगा। ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार जिले के कुछ इलाकों में सुबह के समय कोहरा छाने से ठंड बढ़ सकती है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है आठ दिसंबर तक प्रदेश भर में मौसम शुष्क रहेगा। इसके बाद पर्वतीय जिलों में बारिश व बर्फबारी होने से तापमान में गिरावट रिकॉर्ड की जाएगी। इसका असर मैदानी इलाकों में भी देखने को मिलेगा।

वहीं केदारनाथ में सोमवार देर शाम को तापमान माइनस छह डिग्री पहुंच गया। धाम में जमकर बर्फबारी भी हो रही है। मौसम की बेरुखी से केदारनाथ में पुनर्निर्माण कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। इधर, निचले इलाकों में भी सोमवार को कुछ देर हल्की बारिश हुई, जिससे ठंड बढ़ गई है। उधर, पहाड़ों की रानी मसूरी में भी देर रात हुई बारिश हुई। जौनपुर के नागटिब्बा में रात को बर्फबारी होने से क्षेत्र में ठंड बढ़ गई है। वहीं यमुनोत्री धाम सहित यमुना घाटी में कल की बारिश बर्फबारी से ठंड बढ़ गई।

सोमवार को सुबह से ही केदारनाथ में हल्के बादल छाए रहे। दिन चढ़ने के साथ यहां मौसम खराब होता गया और दोपहर 3 बजे से हल्की-हल्की बर्फबारी होने लगी।

देर रात तक रुक-रुककर हल्की बर्फबारी होती रही। खराब मौसम के कारण केदारनाथ में तापमान में काफी गिरावट आई है, जिससे ठंड बढ़ गई है।

धाम में अधिकतम तापमान दो डिग्री और न्यूनतम माइनस छह डिग्री दर्ज किया गया। जिला आपदा प्रबंधन-प्राधिकरण, लोनिवि के ईई विनय झिक्वांण ने बताया कि खराब मौसम के कारण पुनर्निर्माण कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।

केदारनाथ में इन दिनों 300 मजदूर पुनर्निर्माण कार्य में जुटे हुए हैं।

INDIA में टूट!: तो क्या टूटने जा रहा है इंडिया गठबंधन ! ममता, नीतीश का बैठक में आने से इंकार. 

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Rajasthan Election 2023: मुख्यमंत्री पद को लेकर वसुंधरा का बड़ा दांव, क्या मानेगा आलाकमान !

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राजस्थान में चुनाव नतीजे आने के बाद सीएम पद को लेकर लगातार सस्पेंस बढ़ता जा रहा है आज वसुंधरा राजे के घर पर करीब 20 से ज्यादा BJP के विधायक पहुंच चुके हैं. ऐसे में चर्चा गरम है कि क्या वसुंधरा को हाईकमान से ग्रीन सिग्नल मिल गया है सीएम पद की ताजपोशी का या राजस्थान की इस पूर्व सीएम ने आग से खेलने की तैयारी कर ली है? क्योंकि बीजेपी में किसी भी नेता की इतनी हिम्मत नहीं है कि केंद्रीय नेतृत्व के बिना ग्रीन सिग्नल के अपने घर पर विधायकों को परेड कराने लगे. दूसरी ओर सीएम पद के एक और दावेदार माने जा रहे बालकनाथ दिल्ली पहुंच गए हैं. इस बीच सवाल यह उठ रहे हैं कि क्या वसुंधरा बीजेपी में सचिन पायलट की राह पर हैं? सचिन पायलट को लगता था कि उनके नेतृत्व में चुनाव लड़ा गया है और कांग्रेस की जीत के कारण वो ही हैं. हालांकि कभी भी उनको 20 से अधिक विधायकों का समर्थन खुलकर नहीं मिला.

जिस तरह वसुंधरा के घर विधायक पहुंच रहे हैं और प्रेस के सामने आकर वसुंधरा को सीएम बनाने की बात कर रहे हैं उसे देखकर कोई भी कह सकता है कि वसुंधरा राजे ने प्रेशर पॉलिटिक्स शुरू कर दी है. BJP के नवनिर्वाचित जहाजपुर से आने वाले विधायक गोपीचंद मीणा ने वसुंधरा राजे से मुलाकात की और कहा कि लोग वसुंधरा राजे को मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं. ब्यावर से आने वाले विधायक सुरेश रावत भी वसुंधरा राजे से मिलने पहुंचे. उन्होंने कहा कि वसुंधरा ने पहले बहुत अच्छा काम किया है, लेकिन सीएम आलाकमान जिसे बनाए हम पार्टी के साथ हैं.इसके पहले बीजेपी विधायक बहादुर सिंह कोली जयपुर में वसुंधरा राजे के आवास में एंट्री करते हुए बोले थे कि वसुंधरा राजे को ही सीएम बनना चाहिए.हालांकि उन्होंने भी कहा कि वह पार्टी के फैसले के साथ हैं. हालांकि पार्टी के फैसले के समर्थन की बात तभी तक की जाती है जब तक उम्मीद रहती है कि आलाकमान हमारी बातें सुन रहा है.

चौंका सकता है बीजेपी हाईकमान का फैसला –

अगर वसुंधरा पार्टी पर प्रेशर बनाने के लेवल तक खुद को ले जाती हैं तो इसका अंजाम उनके पक्ष में जाएगा इसकी उम्मीद न के बराबर है.वर्तमान में राजस्थान की राजनीति में कांग्रेस भी इतनी ताकतवर नहीं है कि उसका सपोर्ट उन्हें मिल सके. अभी उनके घर पर कहा जा रहा है कि करीब 20 विधायक पहुंचे हुए हैं. यह सही है कि जिन विधायकों ने उनके घर पहुंचने की हिम्मत दिखाई है वास्तव में वसुंधरा के कट्टर समर्थक होंगे. हो सकता है कि एक दो विधायक और उनके पास हों. पर कांग्रेस के 69 एमएलए मिलकर भी उनका भला नहीं कर सकते. भारतीय जनता पार्टी की जो कार्यशैली है उससे तो यही लगता है कि कांग्रेस पार्टी के उन 69 विधायकों का भी भरोसा नहीं है कि वो कब तक अपनी पार्टी का दामन थामे रहेंगे.वसुंधरा के समर्थन की बात तो दूर की हो जाएगी.सचिन पायलट की तरह वो 20-22 विधायकों का साथ लेकर कभी भी क्रांति नहीं कर सकेंगी. बस पायलट की तरह असंतुष्ट बनकर राजनीति करनी होगी.

इसमें कोई दो राय नहीं हो सकती कि वसुंधरा के पास राजस्थान में आज भी जबरदस्त जनसमर्थन है. उनकी रैलियों में जनता की भीड़ यह बताती थी कि राजस्थान के लोकल नेताओं में सबसे अधिक वो लोकप्रिय हैं. राजपूत की बेटी, जाटों की बहू और गुर्जरों की समधन की छवि के चलते उनकी पैठ हर वर्ग में रही है. यही कारण रहा कि बीजेपी आलाकमान ने उनको कमान तो नहीं दी पर उन्हें अलग-थलग भी नहीं होने दिया. हालांकि वसुंधरा इस बार के चुनावों में अपने होम डिस्ट्रिक्ट में ही कुछ नहीं कर पाईं. धौलपुर जिले की चारों सीटों में से एक भी बीजेपी नहीं जीत सकी है. इसी तरह वसुंधरा के कई खास लोग अभी अपना चुनाव नहीं जीत सके हैं. फिर भी अगर वसुंधरा प्रेशर बनाती हैं,,तो हो सकता है कि 2024 में होने वाले लोकसभा चुनावों तक पार्टी उन्हें राजस्थान की कमान सौंप दे. क्योंकि भारतीय जनता पार्टी का फोकस अभी पूरी तरह 2024 के लोकसभा चुनाव हैं. पार्टी नहीं चाहेगी कि जिस तरह अशोक गहलोत और सचिन पायलट की लड़ाई में राजस्थान में कांग्रेस का बंटाधार हो गया उसी तरह वसुंधरा राजे के चलते बीजेपी भी कमजोर हो.

Rajasthan: अशोक गहलोत की इन गलतियों ने फेरा राहुल गांधी की मेहनत पर पानी !

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राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 के परिणामों में कांग्रेस चारों खाने चित्त हो गई। प्रदेश की जनता ने राज बदल दिया, लेकिन रिवाज नहीं बदला। कांग्रेस की हार को लेकर सीएम अशोक गहलोत के ओएसडी लोकेश शर्मा का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने हार का जिम्मेदार गहलोत को ही बता दिया। उन्होंने गहलोत पर फरेबी बताते हुए 25 सितंबर 2022 की घटना का जिक्र किया। उन्होंने कहा पूरी घटना प्रायोजित थी। आलाकमान के खिलाफ विद्रोह कर अवमानना की गई। उसी दिन से ये खेल शुरू हो गया था।

लोकेश शर्मा ने एक्स कर लिखा- लोकतंत्र में जनता ही माई-बाप है और जनादेश शिरोधार्य है, विनम्रता से स्वीकार है। मैं नतीजों से आहत जरूर हूं, लेकिन अचंभित नहीं। कांग्रेस राजस्थान में निःसंदेह रिवाज बदल सकती थी। लेकिन, अशोक गहलोत कभी कोई बदलाव नहीं चाहते थे। यह कांग्रेस की नहीं बल्कि अशोक गहलोत की शिकस्त है।गहलोत के चेहरे पर उनको फ्री हैंड देकर उनके नेतृत्व में पार्टी ने चुनाव लड़ा और उनके मुताबिक प्रत्येक सीट पर वे स्वयं चुनाव लड़ रहे थे। न उनका अनुभव चला, न जादू। हर बार की तरह कांग्रेस को उनकी योजनाओं के सहारे जीत नहीं मिली और न ही अथाह पिंक प्रचार काम आया। तीसरी बार लगातार सीएम रहते हुए गहलोत ने पार्टी को फिर हाशिये पर लाकर खड़ा कर दिया। आज तक पार्टी से सिर्फ लिया ही लिया है, लेकिन कभी अपने  रहते पार्टी की सत्ता में वापसी नहीं करवा पाए गहलोत।

आलाकमान के साथ फरेब, ऊपर सही फीडबैक न पहुंचने देना, किसी को विकल्प तक न बनने देना, अपरिपक्व और अपने फायदे के लिए जुड़े लोगों से घिरे रहकर आत्ममुग्धता में लगातार गलत निर्णय और आपाधापी में फैसले लेते रहना, तमाम फीडबैक और सर्वे को दरकिनार कर अपनी मनमर्जी और अपने पसंदीदा प्रत्याशियों को उनकी स्पष्ट हार को देखते हुए भी टिकट दिलवाने की जिद हार का कारण रही। आज के ये नतीजे तय थे। मैं स्वयं मुख्यमंत्री को यह पहले बता चुका था, कई बार आगाह कर चुका था। लेकिन, उन्हें कोई ऐसी सलाह या ऐसा व्यक्ति अपने साथ नहीं चाहिए था जो सच बताए।

क्या कहा अशोक गहलोत के OSD ने- 

एक टीवी चैनल को दिए अपने इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि मैं छः महीने लगातार घूम-घूम कर राजस्थान के कस्बों-गांव-ढाणी में गया, लोगों से मिला, हजारों युवाओं के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किए। लगभग 127 विधानसभा क्षेत्रों को कवर करते हुए ग्राउंड रिपोर्ट सीएम को लाकर दी। जमीनी हकीकत को बिना लाग-लपेट सामने रखा। ताकि, समय पर सुधारात्मक कदम उठाते हुए फैसले किए जा सकें, जिससे पार्टी की वापसी सुनिश्चित हो।

मैंने खुद भी चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की थी, पहले बीकानेर से फिर सीएम के कहने पर भीलवाड़ा से, जिस सीट को हम 20 साल से हार रहे थे। लेकिन, ये नया प्रयोग नहीं कर पाए। बीडी कल्ला के लिए मैंने 6 महीने पहले ही बता दिया था कि वे 20 हजार से ज्यादा मत से चुनाव हारेंगे और वही हुआ। अशोक गहलोत ने इस तरह फैसले लिए गए कि विकल्प तैयार ही नहीं हो पाए। 25 सितंबर की घटना भी पूरी तरह से प्रायोजित थी, जब आलाकमान के खिलाफ विद्रोह कर अवमानना की गई थी उसी दिन से खेल शुरू हो गया था।

क्या ये थी राजस्थान में कांग्रेस की हार की बड़ी वजह-

आपको बता दें कि राजस्थान विधानसभा चुनाव  में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को छोड़कर उनके 25 मंत्री चुनावी मैदान में उतरे थे। इनमें से 17 मंत्रियों को हार का सामना करना पड़ा। मंत्री प्रताप सिंह खाचरिया वास और बीडी कल्ला समेत कई बड़े चेहरों को जनता ने सिरे से खारिज कर दिया।मतलब जो गहलोत के osd कह रहे हैं वो सही साबित हुआ ,गहलोत हवा का रुख समझने में नाकाम साबित हुए. राजस्थान में कांग्रेस की हार की एक बड़ी वजह पार्टी की आपसी कलह रही. कई नेता नाराज हुए लेकिन गहलोत ने उन्हें सही तरीके से हैंडल नहीं किया. पार्टी के अंदर गुटबाजी और कई बागी नेताओं ने पार्टी का खेल बिगाड़ा. यहां तक कि कई नेताओं ने निर्दलीय चुनाव लड़ा तो कुछ को बीजेपी ने अपने पाले में कर लिया.

सचिन पायलट और अशोक गहलोत की लड़ाई तो पूरे देश में चर्चा का मुद्दा रही, दोनों नेता काम छोड़कर आपसी लड़ाई पर ज्यादा फोकस करते दिखे. सरकार बनते ही दोनों के बीच खींचतान शुरू हुई तो खत्म होने का नाम नहीं लिया. कई बार आलाकमान ने दोनों को मनाने की कोशिश की, यहां तक कि राहुल गांधी ने खुद चुनाव प्रचार के दौरान दोनों को एक साथ मंच पर लाकर ये संदेश देने की कोशिश की कि पार्टी में सबकुछ ठीक है, लेकिन दोनों के दिल नहीं मिले.राजस्थान में कांग्रेस की हार की वजह सीएम अशोक गहलोत का अहंकार भी रहा, उनका अति आत्म विश्वास और अहंकार उन्हें ले डूबा. गहलोत के साथियों ने उन पर अहंकारी होने का आरोप लगाया. खुद उनकी पार्टी के कई विधायकों ने अपनी बात न सुनने का आरोप लगाया, वहीं सचिन पायलट से उनकी लड़ाई तो पिछले साल सरकार बनने के बाद से ही चल रही है. कई बार मीडिया के सामने आकर गहलोत ने सचिन पायलट को निकम्मा और गद्दार तक कह दिया.

राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं का पेपर लीक मामला गहलोत सरकार पर भारी पड़ा, बीजेपी ने चुनाव के दौरान इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस को खूब घेरा. पेपर लीक को लेकर गहलोत को युवाओं के गुस्से का शिकार होना पड़ा. पिछले पांच साल के गहलोत कार्यकाल में कई परीक्षाओं के पेपर लीक के मामले सामने आए, जिसको लेकर बीजेपी ने गहलोत पर एक्शन ना लेने का आरोप भी लगाया. ये मुद्दा गहलोत सरकार के लिए भारी पड़ा. कुल मिलाकर राजस्थान में गहलोत का रवैया राहुल गांधी की मेहनत  पर पानी फेर गया.