Category Archive : देहरादून

Vasantotsav 2025: राजभवन में आज से शुरु हुआ वसंतोत्सव का आगाज.. राज्यपाल ने किया 3 दिवसीय पुष्प प्रदर्शनी का शुभारंभ.

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राजभवन में आज शुक्रवार से रंग-बिरंगे फूलों का मेला लग गया है। तीन दिवसीय वसंतोत्सव-2025 (पुष्प प्रदर्शनी) का शुभारंभ राज्यपाल ने किया। पहले दिन दोपहर एक से शाम छह बजे और आठ व नौ मार्च को सुबह नौ से शाम छह बजे तक जनसामान्य को राजभवन में निशुल्क प्रवेश मिलेगा।

इस आयोजन में 15 मुख्य प्रतियोगिताओं की कुल 55 उप-श्रेणियां शामिल हैं, जिनमें प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया जाएगा। निर्णायक मंडल की ओर से चयनित विजेताओं को नौ मार्च को कुल 165 पुरस्कार दिए जाएंगे।

वेबसाइट पर कर सकते हैं पंजीकरण-

राज्यपाल के निर्देशन में इस वर्ष वसंतोत्सव में कई नवीन पहल शुरू की गई हैं। उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय ने इस आयोजन में आने वाले लोगों की गणना के लिए एआई एप्लिकेशन तैयार किया है। जिसके लिए राजभवन के मुख्य द्वार पर एआई इनेबल कैमरे लगाए गए हैं। इसके अलावा वसंतोत्सव में आने वाले आगंतुक वेबसाइट www.vmsbutu.it.com पर भी पंजीकरण कर सकते हैं, जहां रजिस्ट्रेशन करने पर आगंतुक की सुविधा के लिए एक आई-कार्ड जनरेट होगा, यह रजिस्ट्रेशन ऐच्छिक होगा।

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आईटीडीए की ओर से फीडबैक सिस्टम के लिए क्यूआर कोड लगाए गए हैं, जिससे आगंतुक अपने सुझाव और अनुभव साझा कर सकते हैं। इस पहल का उद्देश्य वसंतोत्सव को और अधिक प्रभावी और आकर्षक बनाना है। वसंतोत्सव-2025 न केवल पुष्प प्रेमियों के लिए एक अद्भुत अनुभव होगा, बल्कि यह नवाचार और तकनीकी विकास के नए आयाम भी स्थापित करेगा।

 

राजभवन में वसंतोत्सव के दौरान छावनी क्षेत्र में मार्ग रहेंगे परिवर्तित-

न्यू कैंट रोड स्थित राजभवन में वसंतोत्सव के तहत आयोजित होने वाली पुष्प प्रदर्शनी को लेकर पुलिस ने यातायात प्लान लागू किया है। कैंट क्षेत्र में कई मार्ग परिवर्तित रहेंगे। पुष्प प्रदर्शनी में आने वाले अधिकारियों के वाहन शौर्य स्थल के पास खाली मैदान में खड़े कराए जाएंगे। इसके अलावा प्रदर्शनी में आने वाले लोगों के निजी वाहन एनेक्सी तिराहा से आठवीं गढ़वाल राइफल के फुटबाल ग्राउंड में खड़े कराए जाएंगे। वहीं, बिंदाल और गढ़ी कैंट की ओर से आने वाले लोगों के वाहन महिंद्रा पार्क में खड़े कराए जाएंगे। एनेक्सी तिराहा से बीजापुर गेस्ट हाउस की ओर जाने वाले वाहनों को एनेक्सी तिराहा से सीएसडी तिराहा की ओर भेजा जाएगा। इस दौरान एनेक्सी तिराहा से बीजापुर गेस्ट हाउस की ओर वन-वे रहेगा। राजभवन के बाहर यातायात का दबाव होने पर प्लान के अनुसार वाहन भेजे जाएंगे। इस दौरान महिंद्रा ग्राउंड और आरटी ग्राउंड से शटल सेवा भी मिलेगी।

कैबिनेट विस्तार को लेकर सुगबुगाहट तेज, दो मंत्रियों पर हो रहा विचार… कुर्सी खाली हैं चार

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प्रदेश में एक बार फिर जल्द कैबिनेट विस्तार को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। धामी कैबिनेट में चार कुर्सियां लंबे समय से खाली हैं। भाजपा के सूत्रों के मुताबिक, इन चार खाली कुर्सियों को भरने के साथ ही कुछ बदलाव भी हो सकते हैं। मंत्रियों के विभागों में फेरबदल की भी संभावना है।

इस बीच भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने भी कैबिनेट विस्तार के संकेत दिए हैं। हालांकि उनका कहना है कि गेंद केंद्रीय नेतृत्व के पाले में है। हालही में हुईं कुछ घटनाएं और बयानबाजी को इन अटकलों से जोड़कर देखा जा रहा है।क्षेत्रवाद की राजनीति पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में भट्ट से सवाल पूछा तो उन्होंने कहा, किसको रखना है और किसको हटाना है, यह विषय केंद्र का है। केंद्र को ही निर्णय लेने होते हैं। मंत्रिमंडल में विस्तार की संभावना से जुड़े प्रश्न पर भट्ट ने कहा कि निश्चिततौर पर मंत्रिमंडल विस्तार कभी भी हो सकता है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय नेतृत्व को मौजूदा हालात की रिपोर्ट भेज दी गई है।

लंबे समय से प्रस्तावित है कैबिनेट विस्तार

भट्ट के इस बयान से कैबिनेट विस्तार की चर्चाओं को और बल मिल गया है। प्रदेश में लंबे समय से कैबिनेट विस्तार प्रस्तावित है। हर बार मंत्रिमंडल में फेरबदल की चर्चाएं गरम होती हैं और समय के साथ ठंडी पड़ जाती हैं। देखा गया है कि अकसर सीएम के दिल्ली दौरे के दौरान कैबिनेट विस्तार की अटकलें तेज हो जाती हैं। माना जा रहा है कि केंद्रीय नेतृत्व से हरी झंडी न मिलना ही कैबिनेट विस्तार में देरी की वजह है।

चार कुर्सियां खालीं, दो को बदलने पर विचार

पूर्व कैबिनेट मंत्री चंदन राम दास के निधन के बाद धामी कैबिनेट में खाली कुर्सियों की संख्या चार हो चुकी है। परफॉरमेंस के आधार पर एक कैबिनेट मंत्री को बदले जाने की चर्चाएं सत्ता के गलियारों में लंबे समय से गर्म हैं। मौजूदा परिस्थितियों में अब एक और कैबिनेट मंत्री को बदले जाने की चर्चा शुरू हो गई है।

प्रदेश में नर्सिंग अफसरों के 1000 पदों पर जल्द होगी भर्ती, नए पदों के सृजन के भी निर्देश

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प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण एवं विस्तारीकरण के दृष्टिगत चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में नर्सिंग अधिकारियों के 1000 और पदों पर भर्ती की जाएगी। इसके लिए विभागीय अधिकारियों को आईपीएचएस मानकों के अनुरूप नए पदों के सृजन के निर्देश दे दिए गए हैं।

संस्कृति विभाग के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि हरिद्वार व पिथौरागढ़ मेडिकल कालेज में नर्सिंग अधिकारी के 480 पद सृजित किए गए हैं। इसके अलावा 15 छोटे अस्पतालों को उच्चीकृत कर उप जिला चिकित्सालय बनाया जा रहा है। इनमें भी नर्सिंग अधिकारी के 150–200 पदों में बढ़ोतरी होगी। पूर्व में की गई भर्ती में भी कुछ पद रिक्त रह गए हैं।

 

ऐसे में करीब 1000 पदों पर जल्द ही भर्ती की जाएगी। उन्होंने कहा कि मेडिकल कालेजों में चयनित नर्सिंग अधिकारियों को 30 मार्च तक नियुक्ति पत्र जारी कर दिए जाएंगे। जिन्हें एक सप्ताह में ज्वाइन करना होगा। इसके बाद 10 अप्रैल तक वेटिंग लिस्ट भी जारी कर दी जाएगी.

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में चयनित कुछ नर्सिंग अधिकारी चिकित्सा शिक्षा विभाग की नर्सिंग भर्ती में भी शामिल हुए हैं। जबकि उन्हें आवेदन के लिए मना किया गया था। उनके आवेदन करने से 60-70 नए लोगों का हक मारा जा रहा है।

Uttarakhand: प्रदेश में इस साल नहीं बढ़ेगा गन्ने का न्यूनतम समर्थन मूल्य, धामी कैबिनेट में लिया गया ये निर्णय.

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प्रदेश में इस साल गन्ने का न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं बढ़ेगा। धामी कैबिनेट ने पिछले साल के मूल्य को इस बार भी यथावत रखने का निर्णय लिया है। जिसके तहत अगेती का 375 और सामान्य प्रजाति का 365 रुपये प्रति क्विंटल मूल्य मिलेगा।

कैबिनेट में आए प्रस्ताव में कहा गया कि राज्य की सहकारी सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र की चीनी मिलों की ओर से पेराई सत्रों के दौरान क्रय किए जाने वाले गन्ने का राज्य परामर्शित मूल्य इसके लिए गठित राज्य परामर्शी समिति की संस्तुति के आधार पर तय किया जाता है।

राज्य परामर्शी समिति की संस्तुति के आधार पर पिछले पेराई सत्र के लिए तय गन्ने के राज्य परामर्शित मूल्य को चालू पेराई सत्र 2024-25 में यथावत रखे जाने का निर्णय लिया गया है। वहीं, पिछले पेराई सत्र की तरह गन्ना विकास अंशदान (कमीशन) की दर 5.50 रुपए प्रति क्विंटल तय किए जाने की भी मंजूरी दी गई।

 

Uttarakhand: प्रमोशन की चाह रखने वाले सभी कर्मचारियों की मुराद होगी पूरी…पूरे सेवा काल में एक बार मिलेगी प्रमोशन के मानकों में छूट.

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प्रमोशन की चाह रखने वाले उन सभी कर्मचारियों की मुराद अब पूरी हो जाएगी, जिनके विभाग में ऊपर का पद खाली है और वे इस पद पर प्रमोशन के लिए तय अहर्ता का 50 फीसदी पूरा करते हैं। प्रदेश मंत्रिमंडल ने राज्य कर्मचारियों को उनके पूरे सेवाकाल में एक बार प्रमोशन के मानकों में छूट देने का फैसला किया है।

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद समेत कई अन्य कर्मचारी संगठन पिछले काफी समय से पदोन्नति में शिथिलीकरण की नियमावली को लागू करने की मांग कर रहे थे। उनकी मांग पर सरकार ने इसे लागू किया भी था। लेकिन इसके लिए एक निश्चित समयावधि तय कर दी थी। लेकिन कर्मचारियों की लगातार मांग के बाद अब सरकार ने इसे फिर से लागू कर दिया है और इसके लिए कोई समय अवधि तय नहीं की है।

इस निर्णय से उन कर्मचारियों को लाभ होगा, जिनके पद से ऊपर वाला पद लंबे समय से खाली है और वे उस पद के लिए 50 प्रतिशत अहर्ता पूरी करते हैं। मिसाल के तौर पर यदि किसी पद पर पदोन्नति के लिए 10 साल की सेवा निर्धारित है और वह पद रिक्त है तो इससे नीचे के पद पर कार्यरत कर्मचारी सिर्फ पांच साल की सेवा अवधि में पदोन्नति के लिए पात्र हो जाएगा। लेकिन यह छूट उन कर्मचारियों व अधिकारियों को नहीं मिलेगी, जो प्रोबेशन अवधि में हैं।

मांग पूरी होने पर कर्मचारी संगठनों में खुशी-

प्रमोशन में शिथिलीकरण की मांग पूरी होने पर कर्मचारी संगठनों में खुशी की लहर है। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश अध्यक्ष अरुण पांडेय ने कहा कि उनके अधिवेशन में इस मांग को प्रमुखता से रखा गया था और सरकार से शिथिलीकरण सेवा नियमावली को लागू करने की मांग की गई थी। हमें खुशी है कि अधिवेशन के बाद हमारी यह मांग मान ली गई।

नई आबकारी नीति 2025 को मंजूरी,ओवररेटिंग की शिकायत सही पाए जाने पर दुकान का लाइसेंस होगा रद्द

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नई आबकारी नीति 2025 – निवेश, रोजगार और राजस्व के नए आयाम।

राज्य के धार्मिक क्षेत्रों के निकटवर्ती मदिरा अनुज्ञापनों को बंद करने का लिया गया निर्णय ।

वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 5060 करोड़ रुपये का राजस्व लक्ष्य

ओवररेटिंग की शिकायत सही पाए जाने पर दुकान का लाइसेंस होगा रद्द

नई आबकारी नीति 2025 को कैबिनेट ने दी मंजूरी।

 

 

राज्य की नई आबकारी नीति 2025 में धार्मिक क्षेत्रों की महत्ता को ध्यान में रखते हुए उनके निकटवर्ती मदिरा अनुज्ञापनों को बंद करने का निर्णय लिया गया है। जनसंवेदनाओं को सर्वोपरि रखते हुए, शराब की बिक्री पर और अधिक नियंत्रण किया जायेगा। उप-दुकानों और मैट्रो मदिरा बिक्री व्यवस्था को समाप्त किया गया है। नई आबकारी नीति में किसी दुकान पर एमआरपी से अधिक कीमत ली जाती है, तो लाइसेंस निरस्त करने का प्राविधान किया गया है। डिपार्टमेंटल स्टोर्स पर भी mrp लागू होगी, जिससे उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा होगी।

वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 5060 करोड़ रुपये का राजस्व लक्ष्य

पिछले दो वर्षों में आबकारी राजस्व में राज्य में काफी वृद्धि हुई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 5060 करोड़ रुपये के राजस्व लक्ष्य को निर्धारित किया गया है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में 4000 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 4038.69 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया गया। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 4439 करोड़ रुपये का लक्ष्य के सापेक्ष अब तक लगभग 4000 करोड़ रुपये की प्राप्ति हो चुकी है।

पर्वतीय क्षेत्रों में से वाइनरी इकाइयों को अगले 15 वर्षों तक आबकारी शुल्क में दी जाएगी छूट ।

नई आबकारी नीति के तहत स्थानीय निवासियों को प्राथमिकता और रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। थोक मदिरा अनुज्ञापन केवल उत्तराखंड निवासियों को जारी किए जाएंगे, जिससे राज्य में आर्थिक अवसर बढ़ेंगे। पर्वतीय क्षेत्रों में वाइनरी को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य में उत्पादित फलों से वाइनरी इकाइयों को अगले 15 वर्षों तक आबकारी शुल्क में छूट दी जाएगी। इससे कृषकों और बागवानी क्षेत्र में कार्य करने वालों को आर्थिक लाभ मिलेगा। मदिरा उद्योग में निवेश को प्रोत्साहित करने के निर्यात शुल्क में कटौती की गई है। माल्ट एवं स्प्रिट उद्योगों को पर्वतीय क्षेत्रों में विशेष सुविधाएँ प्रदान की जाएंगी।

स्थानीय कृषि उत्पादों को डिस्टिलरी द्वारा प्रयोग करने के लिए किया जा रहा है प्रोत्साहित ।

आबकारी नीति के तहत नवीनीकरण, लॉटरी और अधिकतम ऑफर जैसी पारदर्शी प्रक्रियाओं के माध्यम से दुकानें आवंटित की जाएंगी। आवंटन प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनाया गया है। स्थानीय कृषि उत्पादों को डिस्टिलरी (आसवनी इकाइयों) द्वारा प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी और उन्हें नए बाजार उपलब्ध होंगे। आबकारी नीति-2025 में जनसाधारण को मदिरा के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक बनाने के विशेष अभियान चलाने का प्राविधान किया गया है। नई आबकारी नीति प्रदेश में आर्थिक सुदृढ़ीकरण, पारदर्शिता और सामाजिक जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है।

Cabinet बैठक में आए 17 प्रस्ताव, उत्तराखंड आंदोलन का इतिहास पढ़ेंगे बच्चे, ये अहम फैसले भी शामिल

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में 17 प्रस्ताव आए। सीएम की घोषणा के तहत उत्तराखंड आंदोलन और सांस्कृतिक विरासत का इतिहास कक्षा 6 से 8 तक हमारी विरासत एवं विभूतियां पढ़ाए जाने के  प्रस्ताव पर मुहर लगी। इसके साथ ही धामी कैबिनेट कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए।

सोमवार को कैबिनेट समाप्त होने के बाद सचिव गृह शैलेश बगोली ने जानकारी दी। कक्षा 10 के बाद जो छात्र तीन वर्षीय पॉलिटेक्निक डिप्लोमा करते हैं, उन्हें कक्षा 12 के समकक्ष माना जाएगा। चीनी मिलों के लिए अगेती 375 रुपये, सामान्य प्रजाति 365 रुपए प्रति कुंतल की गई। जबकि गन्ना समर्थन मूल्य में कोई बदलाव नहीं किया गया है। उप महानिरीक्षक, अधीक्षक कारागार की नियमावली पास की गई। वहीं भारतीय न्याय संहिता के तहत नियमालिओं को अनुमोदन किया गया। मंत्रिमंडल ने आबकारी नीति को भी मंजूरी दे दी है।

 

ये महत्वपूर्ण फैसले भी

-राज्य कर्मियों के लिए शिथिलीकरण का लाभ एक बार मिलेगा। कुछ नियमावली में शिथिलीकरण की व्यवस्था है। ये सभी कर्मचारियों के लिए लागू हो गई है। 50% तक छूट।

-राज्य संपत्ति विभाग की समूह-क व समूह-ख की सेवा नियमावली को अनुमोदन।
-मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना लागू करने पर कैबिनेट की मंजूरी। स्वरोजगार के लिए 2 लाख रुपये तक मिलेंगे।
-पेंशन एवं हकदारी निदेशालय में कनिष्ठ सहायक के 13 पद सृजित करने पर।
-उत्तराखंड में यूपीएस लागू करने पर कैबिनेट की मंजूरी। जो कर्मचारी चाहेंगे, वो इसमें आ सकेंगे।
-स्टाम्प व निबंधन विभाग में 213 से बढ़कर पड़ 240 हुए।
-अपर पुलिस अधीक्षक उच्चतम वेतनमान की नियमावली को मंजूरी।
-ट्राउट प्रोत्साहन योजना मंजूर। 200 करोड़ की योजना। मत्स्य पालकों को 5 साल तक इनपुट दिया जाएगा।
-कार्मिक : रिवोल्विंग फंड इस्तेमाल करने की नियमावली को मंजूरी।
– उधमसिंह नगर की प्रयाग फार्म की 1354 एकड़ भूमि इंडस्ट्री को दी जाएगी।
-एकीकृत स्वयं सहायता योजना। 2.3 करोड़ सीएलएफ के लिए।
-गौला, कोसी, दाबका नदियों में सुरक्षा एवं सीमांत शुल्क आदि को रिवाइस किया गया।

कई फैसलों पर होंगे निर्णय, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के 2347 पदों पर होगी भर्ती

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प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में 2347 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के पदों पर आउटसोर्स के माध्यम से भर्ती होगी। भर्ती को पहले प्रयाग पोर्टल के माध्यम से कराया जाना प्रस्तावित था, लेकिन अब जेम पोर्टल से कराया जा सकता है। इसके लिए आगामी कैबिनेट में प्रस्ताव आएगा।

प्रदेश के विद्यालयों में चतुर्थ श्रेणी के कई पद खाली हैं। इन पदों को आउटसोर्स से भरा जा सके इसके लिए पिछले काफी समय से प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार ने पहले निर्णय लिया था कि प्रयाग पोर्टल के माध्यम से इन पदों को भरा जाए, लेकिन इससे इन पदों को भरने में तकनीकी दिक्कत आ रही है। यही वजह है कि भर्ती से संबंधित इस प्रस्ताव को अब कैबिनेट में लाया जा रहा है।

प्रदेश की 7499 ग्राम पंचायतों का OBC आरक्षण तय, आयोग ने मुख्यमंत्री धामी को सौंपी रिपोर्ट

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उत्तराखंड की 7499 ग्राम पंचायतों का ओबीसी आरक्षण तय हो गया है। एकल सदस्यीय समर्पित आयोग के अध्यक्ष बीएस वर्मा ने बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ये रिपोर्ट सौंप दी।राज्य के भीतर स्थानीय निकायों में सभी स्तरों पर अन्य पिछड़ा वर्ग के पिछड़ेपन की प्रकृति और उसके निहितार्थों की समसामयिक एवं अनुभवजन्य तरीके से गहन जांच करने के लिए गठित एकल सदस्यीय समर्पित आयोग के अध्यक्ष बीएस वर्मा ने ग्रामीण स्थानीय निकायों के सामान्य निर्वाचन के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग को आरक्षण, प्रतिनिधित्व देने के लिए 12 जिलों की तीसरी रिपोर्ट सौंपी।

 

 

इससे पहले आयोग ने 14 अगस्त 2022 को हरिद्वार की प्रथम रिपोर्ट सौंपी थी। हरिद्वार की प्रथम रिपोर्ट और बाकी 12 जिलों की तृतीय रिपोर्ट के त्रिस्तरीय पंचायतों में जैसे जिला पंचायत अध्यक्षों के कुल 13, जिला पंचायत के प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों (वार्ड) के कुल 358, क्षेत्र पंचायत प्रमुख के कुल 89, क्षेत्र पंचायत के प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों (वार्ड) के कुल 2974, ग्राम पंचायत प्रधानों के कुल 7499 और ग्राम पंचायत के प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों (वार्ड) के कुल 55,589 पदों पर ओबीसी को प्रतिनिधित्व देने के लिए 2011 की जनगणना के आधार पर आयोग ने अपनी सिफारिश की है।

 

इस रिपोर्ट के हिसाब से जिन ग्राम पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों, जिला पंचायतों में ओबीसी की आबादी ज्यादा है, वहां आरक्षण ज्यादा मिलेगा जबकि जहां आबादी कम है, वहां ओबीसी का प्रतिनिधित्व भी कम हो जाएगा। अभी सरकार को इस रिपोर्ट को स्वीकार करना है। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, गणेश जोशी, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक खजानदास, सविता कपूर, बृजभूषण गैरोला, सचिव पंचायतीराज चन्द्रेश यादव, निदेशक पंचायतीराज निधि यादव, अपर सचिव पंचायतीराज पन्ना लाल शुक्ला, सदस्य सचिव डीएस राणा, उप निदेशक मनोज कुमार तिवारी व आयोग से सुबोध बिजल्वाण उपस्थित रहे।

27 नवंबर को खत्म हुआ था कार्यकाल
राज्य में हरिद्वार को छोड़कर बाकी 12 जिलों की ग्राम पंचायतों का कार्यकाल पिछले साल 27 नवंबर, क्षेत्र पंचायतों का 29 नवंबर और जिला पंचायतों का एक दिसंबर को खत्म हो गया था। इनके चुनाव वर्ष 2019 में हुए थे। हरिद्वार का त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव वर्ष 2022 में हुआ था। फिलहाल सभी ग्राम पंचायतें प्रशासकों के हवाले हैं।

Uttarakhand: वन विभाग में करोड़ों का घोटाला, अपने  ऐशो-आराम पर लुटा दिया फंड !

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वन विभाग में करोड़ों का घोटाला,अपने  ऐशो-आराम पर लुटा दिया फंड !

उत्तराखंड में कैग यानि CAG की रिपोर्ट आने के बाद उत्तराखंड सरकार के वन विभाग में हड़कंप मचा हुआ है. कैग ने राज्य में 2019-20 से 2021-23 के दौरान कैंपा के तहत हुए कार्याें का मूल्यांकन किया है। इसमें कई अनियमितता का खुलासा किया.. CAG रिपोर्ट में वन विभाग के CAMPA फंड में घोटालों की लंबी फेहरिस्त सामने आयी जिससे वन विभाग के अधिकारीयों के साथ-साथ वन मंत्री सुबोध उनियाल पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

उत्तराखंड में वनों के संरक्षण और पुनर्वनीकरण के लिए आवंटित फंड को घोर लापरवाही और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया गया। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा रिपोर्ट (2019-2022) में ₹13.86 करोड़ की अवैध निकासी और वित्तीय अनियमितताओं का पर्दाफाश हुआ है, सवाल यही है कि क्या वन मंत्री को इस घोटाले का कुछ भी पता नहीं था, जो इतने साल तक उनके सामने नहीं आ सका.. सबसे पहले आपको बताते हैं कि CAMPA फंड कहां-कहां बर्बाद हुआ।

पर्यावरण संरक्षण के नाम पर सरकारी अधिकारी ऐशो-आराम का सामान खरीदते रहे जिनमें iPhones, लैपटॉप, फ्रिज और कूलर की खरीद की बात सामने आयी है सरकारी इमारतों की मरम्मत और साज-सज्जा के पैसे से वन विभाग के ऑफिस और अफसरों के आवास चमकते रहे, लेकिन जंगल उजड़ते रहे जंगल बचाने के बजाय CAMPA फंड को कानूनी लड़ाइयों पर लुटाया गया ऐसी जगह को पौध रोपण के लिए चुना गया जहां  हकीकत में  पेड़ टिक ही नहीं सकते थे. 7 मामलों में 8 साल से ज्यादा की देरी से वृक्षारोपण किया गया.. देर से वृक्षारोपण, लागत में बेतहाशा बढ़ोतरी से धन को लुटाया गया वनीकरण की स्थिति एकदम नाकाम रही. CAG के अनुसार, लगाए गए पेड़ों का सिर्फ 33.51% ही जिंदा बचा, जबकि Forest Research Institute के मानकों के अनुसार 60-65% सफलता दर होनी चाहिए थी.. मतलब वन विभाग लगाए गए पेड़ों को भी बचाने में नाकमयाब रहा, अफसरों की मिलीभगत ऐसी कि बिना सही जांच किए ही भूमि को उपयुक्त बताया गया और ऐसे अधिकारीयों के  खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।

 

कैग की रिपोर्ट में हुआ खुलासा-

इतना ही नहीं सरकार की बड़ी लापरवाही और वित्तीय घोटाले का भी कैग की रिपोर्ट में खुलासा किया गया है विभाग द्वारा  275 करोड़ का ब्याज नहीं चुकाया गया CAMPA ने कई बार अनुरोध किया, लेकिन राज्य सरकार ने 2019-22 के दौरान ब्याज नहीं चुकाया. 76.35 करोड़ के मंजूर प्लान पर कोई फंड जारी नहीं किया गया.  सरकार ने स्वीकृत योजनाओं पर भी पैसा नहीं दिया, जिससे परियोजनाएं ठप पड़ी रहीं जबकि जुलाई 2020 से नवंबर 2021 के बीच CEO ने Head of Forest Force की अनुमति के बिना फंड जारी किया, जो नियमों के खिलाफ था बिना केंद्र की मंजूरी के जंगलों की कटाई की गयी, राज्य सरकार ने केंद्र की मंजूरी के बिना ही जंगलों को उद्योगों और इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए सौंप दिया।

ये हाल वन विभाग के तब हैं जब उत्तराखंड के जंगलों में आग लगने की घटनाओं में साल दर साल बेतहाशा वृद्धि हो रही है। 2002 में जंगल की आग की 922 घटनाएं हुई थीं जिनकी संख्या 2024 में 21 हजार पार हो गई। इन घटनाओं में एक लाख 80 हजार हेक्टेयर से अधिक जंगल जल गए, भारतीय वन सर्वेक्षण  की हाल में जारी हुई रिपोर्ट पर गौर करें तो नवंबर 2023 से जून 2024 के बीच देश में वनों में दो लाख से अधिक घटनाएं हुईं। इनमें सर्वाधिक 74% की वृद्धि उत्तराखंड में रिकॉर्ड की गई। इसी कारण वनाग्नि में पिछले वर्ष 13वें नंबर पर रहा उत्तराखंड अब पहले स्थान पर है, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी में न्याय मित्र की रिपोर्ट में भी कहा गया है कि उत्तराखंड में वनाग्नि प्रबंधन के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे की कमी है इसमें अग्निशमन उपकरणों, गश्ती वाहन और समन्वय के लिए संचार उपकरणों की कमी शामिल है.. लेकिन इस पर धायण देने के बजाय अधिकारी पैसा अपने ऐशो-आराम का सामान जुटाने में पैसे लुटा रहे हैं।

 

Uttarakhand: आवास बनाने वालों के लिए धामी सरकार ने खोले छूट के द्वार, सपना होगा साकार, जानिए कैसे मिलेगा फायदा.

 

वन विभाग का काम करने का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि अभी हाल ही में हल्द्वानी में आग से बचाने के लिए की जाने वाली कंट्रोल बर्निग में कई नए लगाए पौधे भी जल गए इस पुरे घटनाक्रम से वन विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं कि वन विभाग आग बुझाने के बजाय नए पौधे ही जलाने में लग गया है,,, अब सवाल ये है इस सबके  जिम्मेदारों पर क्या कोई कार्रवाई होगी भी या नहीं CAG की रिपोर्ट ने वन विभाग की लापरवाही और भ्रष्टाचार को उजागर कर दिया है,,, क्या उत्तराखंड सरकार दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करेगी या ये रिपोर्ट भी अन्य घोटालों की तरह फाइलों में ही दफन हो जाएगी ?