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Uttarakhand: प्रमोशन की चाह रखने वाले सभी कर्मचारियों की मुराद होगी पूरी…पूरे सेवा काल में एक बार मिलेगी प्रमोशन के मानकों में छूट.

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प्रमोशन की चाह रखने वाले उन सभी कर्मचारियों की मुराद अब पूरी हो जाएगी, जिनके विभाग में ऊपर का पद खाली है और वे इस पद पर प्रमोशन के लिए तय अहर्ता का 50 फीसदी पूरा करते हैं। प्रदेश मंत्रिमंडल ने राज्य कर्मचारियों को उनके पूरे सेवाकाल में एक बार प्रमोशन के मानकों में छूट देने का फैसला किया है।

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद समेत कई अन्य कर्मचारी संगठन पिछले काफी समय से पदोन्नति में शिथिलीकरण की नियमावली को लागू करने की मांग कर रहे थे। उनकी मांग पर सरकार ने इसे लागू किया भी था। लेकिन इसके लिए एक निश्चित समयावधि तय कर दी थी। लेकिन कर्मचारियों की लगातार मांग के बाद अब सरकार ने इसे फिर से लागू कर दिया है और इसके लिए कोई समय अवधि तय नहीं की है।

इस निर्णय से उन कर्मचारियों को लाभ होगा, जिनके पद से ऊपर वाला पद लंबे समय से खाली है और वे उस पद के लिए 50 प्रतिशत अहर्ता पूरी करते हैं। मिसाल के तौर पर यदि किसी पद पर पदोन्नति के लिए 10 साल की सेवा निर्धारित है और वह पद रिक्त है तो इससे नीचे के पद पर कार्यरत कर्मचारी सिर्फ पांच साल की सेवा अवधि में पदोन्नति के लिए पात्र हो जाएगा। लेकिन यह छूट उन कर्मचारियों व अधिकारियों को नहीं मिलेगी, जो प्रोबेशन अवधि में हैं।

मांग पूरी होने पर कर्मचारी संगठनों में खुशी-

प्रमोशन में शिथिलीकरण की मांग पूरी होने पर कर्मचारी संगठनों में खुशी की लहर है। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश अध्यक्ष अरुण पांडेय ने कहा कि उनके अधिवेशन में इस मांग को प्रमुखता से रखा गया था और सरकार से शिथिलीकरण सेवा नियमावली को लागू करने की मांग की गई थी। हमें खुशी है कि अधिवेशन के बाद हमारी यह मांग मान ली गई।

नई आबकारी नीति 2025 को मंजूरी,ओवररेटिंग की शिकायत सही पाए जाने पर दुकान का लाइसेंस होगा रद्द

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नई आबकारी नीति 2025 – निवेश, रोजगार और राजस्व के नए आयाम।

राज्य के धार्मिक क्षेत्रों के निकटवर्ती मदिरा अनुज्ञापनों को बंद करने का लिया गया निर्णय ।

वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 5060 करोड़ रुपये का राजस्व लक्ष्य

ओवररेटिंग की शिकायत सही पाए जाने पर दुकान का लाइसेंस होगा रद्द

नई आबकारी नीति 2025 को कैबिनेट ने दी मंजूरी।

 

 

राज्य की नई आबकारी नीति 2025 में धार्मिक क्षेत्रों की महत्ता को ध्यान में रखते हुए उनके निकटवर्ती मदिरा अनुज्ञापनों को बंद करने का निर्णय लिया गया है। जनसंवेदनाओं को सर्वोपरि रखते हुए, शराब की बिक्री पर और अधिक नियंत्रण किया जायेगा। उप-दुकानों और मैट्रो मदिरा बिक्री व्यवस्था को समाप्त किया गया है। नई आबकारी नीति में किसी दुकान पर एमआरपी से अधिक कीमत ली जाती है, तो लाइसेंस निरस्त करने का प्राविधान किया गया है। डिपार्टमेंटल स्टोर्स पर भी mrp लागू होगी, जिससे उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा होगी।

वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 5060 करोड़ रुपये का राजस्व लक्ष्य

पिछले दो वर्षों में आबकारी राजस्व में राज्य में काफी वृद्धि हुई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 5060 करोड़ रुपये के राजस्व लक्ष्य को निर्धारित किया गया है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में 4000 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 4038.69 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया गया। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 4439 करोड़ रुपये का लक्ष्य के सापेक्ष अब तक लगभग 4000 करोड़ रुपये की प्राप्ति हो चुकी है।

पर्वतीय क्षेत्रों में से वाइनरी इकाइयों को अगले 15 वर्षों तक आबकारी शुल्क में दी जाएगी छूट ।

नई आबकारी नीति के तहत स्थानीय निवासियों को प्राथमिकता और रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। थोक मदिरा अनुज्ञापन केवल उत्तराखंड निवासियों को जारी किए जाएंगे, जिससे राज्य में आर्थिक अवसर बढ़ेंगे। पर्वतीय क्षेत्रों में वाइनरी को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य में उत्पादित फलों से वाइनरी इकाइयों को अगले 15 वर्षों तक आबकारी शुल्क में छूट दी जाएगी। इससे कृषकों और बागवानी क्षेत्र में कार्य करने वालों को आर्थिक लाभ मिलेगा। मदिरा उद्योग में निवेश को प्रोत्साहित करने के निर्यात शुल्क में कटौती की गई है। माल्ट एवं स्प्रिट उद्योगों को पर्वतीय क्षेत्रों में विशेष सुविधाएँ प्रदान की जाएंगी।

स्थानीय कृषि उत्पादों को डिस्टिलरी द्वारा प्रयोग करने के लिए किया जा रहा है प्रोत्साहित ।

आबकारी नीति के तहत नवीनीकरण, लॉटरी और अधिकतम ऑफर जैसी पारदर्शी प्रक्रियाओं के माध्यम से दुकानें आवंटित की जाएंगी। आवंटन प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनाया गया है। स्थानीय कृषि उत्पादों को डिस्टिलरी (आसवनी इकाइयों) द्वारा प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी और उन्हें नए बाजार उपलब्ध होंगे। आबकारी नीति-2025 में जनसाधारण को मदिरा के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक बनाने के विशेष अभियान चलाने का प्राविधान किया गया है। नई आबकारी नीति प्रदेश में आर्थिक सुदृढ़ीकरण, पारदर्शिता और सामाजिक जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है।

Cabinet बैठक में आए 17 प्रस्ताव, उत्तराखंड आंदोलन का इतिहास पढ़ेंगे बच्चे, ये अहम फैसले भी शामिल

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में 17 प्रस्ताव आए। सीएम की घोषणा के तहत उत्तराखंड आंदोलन और सांस्कृतिक विरासत का इतिहास कक्षा 6 से 8 तक हमारी विरासत एवं विभूतियां पढ़ाए जाने के  प्रस्ताव पर मुहर लगी। इसके साथ ही धामी कैबिनेट कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए।

सोमवार को कैबिनेट समाप्त होने के बाद सचिव गृह शैलेश बगोली ने जानकारी दी। कक्षा 10 के बाद जो छात्र तीन वर्षीय पॉलिटेक्निक डिप्लोमा करते हैं, उन्हें कक्षा 12 के समकक्ष माना जाएगा। चीनी मिलों के लिए अगेती 375 रुपये, सामान्य प्रजाति 365 रुपए प्रति कुंतल की गई। जबकि गन्ना समर्थन मूल्य में कोई बदलाव नहीं किया गया है। उप महानिरीक्षक, अधीक्षक कारागार की नियमावली पास की गई। वहीं भारतीय न्याय संहिता के तहत नियमालिओं को अनुमोदन किया गया। मंत्रिमंडल ने आबकारी नीति को भी मंजूरी दे दी है।

 

ये महत्वपूर्ण फैसले भी

-राज्य कर्मियों के लिए शिथिलीकरण का लाभ एक बार मिलेगा। कुछ नियमावली में शिथिलीकरण की व्यवस्था है। ये सभी कर्मचारियों के लिए लागू हो गई है। 50% तक छूट।

-राज्य संपत्ति विभाग की समूह-क व समूह-ख की सेवा नियमावली को अनुमोदन।
-मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना लागू करने पर कैबिनेट की मंजूरी। स्वरोजगार के लिए 2 लाख रुपये तक मिलेंगे।
-पेंशन एवं हकदारी निदेशालय में कनिष्ठ सहायक के 13 पद सृजित करने पर।
-उत्तराखंड में यूपीएस लागू करने पर कैबिनेट की मंजूरी। जो कर्मचारी चाहेंगे, वो इसमें आ सकेंगे।
-स्टाम्प व निबंधन विभाग में 213 से बढ़कर पड़ 240 हुए।
-अपर पुलिस अधीक्षक उच्चतम वेतनमान की नियमावली को मंजूरी।
-ट्राउट प्रोत्साहन योजना मंजूर। 200 करोड़ की योजना। मत्स्य पालकों को 5 साल तक इनपुट दिया जाएगा।
-कार्मिक : रिवोल्विंग फंड इस्तेमाल करने की नियमावली को मंजूरी।
– उधमसिंह नगर की प्रयाग फार्म की 1354 एकड़ भूमि इंडस्ट्री को दी जाएगी।
-एकीकृत स्वयं सहायता योजना। 2.3 करोड़ सीएलएफ के लिए।
-गौला, कोसी, दाबका नदियों में सुरक्षा एवं सीमांत शुल्क आदि को रिवाइस किया गया।

कई फैसलों पर होंगे निर्णय, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के 2347 पदों पर होगी भर्ती

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प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में 2347 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के पदों पर आउटसोर्स के माध्यम से भर्ती होगी। भर्ती को पहले प्रयाग पोर्टल के माध्यम से कराया जाना प्रस्तावित था, लेकिन अब जेम पोर्टल से कराया जा सकता है। इसके लिए आगामी कैबिनेट में प्रस्ताव आएगा।

प्रदेश के विद्यालयों में चतुर्थ श्रेणी के कई पद खाली हैं। इन पदों को आउटसोर्स से भरा जा सके इसके लिए पिछले काफी समय से प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार ने पहले निर्णय लिया था कि प्रयाग पोर्टल के माध्यम से इन पदों को भरा जाए, लेकिन इससे इन पदों को भरने में तकनीकी दिक्कत आ रही है। यही वजह है कि भर्ती से संबंधित इस प्रस्ताव को अब कैबिनेट में लाया जा रहा है।

प्रदेश की 7499 ग्राम पंचायतों का OBC आरक्षण तय, आयोग ने मुख्यमंत्री धामी को सौंपी रिपोर्ट

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उत्तराखंड की 7499 ग्राम पंचायतों का ओबीसी आरक्षण तय हो गया है। एकल सदस्यीय समर्पित आयोग के अध्यक्ष बीएस वर्मा ने बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ये रिपोर्ट सौंप दी।राज्य के भीतर स्थानीय निकायों में सभी स्तरों पर अन्य पिछड़ा वर्ग के पिछड़ेपन की प्रकृति और उसके निहितार्थों की समसामयिक एवं अनुभवजन्य तरीके से गहन जांच करने के लिए गठित एकल सदस्यीय समर्पित आयोग के अध्यक्ष बीएस वर्मा ने ग्रामीण स्थानीय निकायों के सामान्य निर्वाचन के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग को आरक्षण, प्रतिनिधित्व देने के लिए 12 जिलों की तीसरी रिपोर्ट सौंपी।

 

 

इससे पहले आयोग ने 14 अगस्त 2022 को हरिद्वार की प्रथम रिपोर्ट सौंपी थी। हरिद्वार की प्रथम रिपोर्ट और बाकी 12 जिलों की तृतीय रिपोर्ट के त्रिस्तरीय पंचायतों में जैसे जिला पंचायत अध्यक्षों के कुल 13, जिला पंचायत के प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों (वार्ड) के कुल 358, क्षेत्र पंचायत प्रमुख के कुल 89, क्षेत्र पंचायत के प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों (वार्ड) के कुल 2974, ग्राम पंचायत प्रधानों के कुल 7499 और ग्राम पंचायत के प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों (वार्ड) के कुल 55,589 पदों पर ओबीसी को प्रतिनिधित्व देने के लिए 2011 की जनगणना के आधार पर आयोग ने अपनी सिफारिश की है।

 

इस रिपोर्ट के हिसाब से जिन ग्राम पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों, जिला पंचायतों में ओबीसी की आबादी ज्यादा है, वहां आरक्षण ज्यादा मिलेगा जबकि जहां आबादी कम है, वहां ओबीसी का प्रतिनिधित्व भी कम हो जाएगा। अभी सरकार को इस रिपोर्ट को स्वीकार करना है। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, गणेश जोशी, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक खजानदास, सविता कपूर, बृजभूषण गैरोला, सचिव पंचायतीराज चन्द्रेश यादव, निदेशक पंचायतीराज निधि यादव, अपर सचिव पंचायतीराज पन्ना लाल शुक्ला, सदस्य सचिव डीएस राणा, उप निदेशक मनोज कुमार तिवारी व आयोग से सुबोध बिजल्वाण उपस्थित रहे।

27 नवंबर को खत्म हुआ था कार्यकाल
राज्य में हरिद्वार को छोड़कर बाकी 12 जिलों की ग्राम पंचायतों का कार्यकाल पिछले साल 27 नवंबर, क्षेत्र पंचायतों का 29 नवंबर और जिला पंचायतों का एक दिसंबर को खत्म हो गया था। इनके चुनाव वर्ष 2019 में हुए थे। हरिद्वार का त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव वर्ष 2022 में हुआ था। फिलहाल सभी ग्राम पंचायतें प्रशासकों के हवाले हैं।

Uttarakhand: वन विभाग में करोड़ों का घोटाला, अपने  ऐशो-आराम पर लुटा दिया फंड !

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वन विभाग में करोड़ों का घोटाला,अपने  ऐशो-आराम पर लुटा दिया फंड !

उत्तराखंड में कैग यानि CAG की रिपोर्ट आने के बाद उत्तराखंड सरकार के वन विभाग में हड़कंप मचा हुआ है. कैग ने राज्य में 2019-20 से 2021-23 के दौरान कैंपा के तहत हुए कार्याें का मूल्यांकन किया है। इसमें कई अनियमितता का खुलासा किया.. CAG रिपोर्ट में वन विभाग के CAMPA फंड में घोटालों की लंबी फेहरिस्त सामने आयी जिससे वन विभाग के अधिकारीयों के साथ-साथ वन मंत्री सुबोध उनियाल पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

उत्तराखंड में वनों के संरक्षण और पुनर्वनीकरण के लिए आवंटित फंड को घोर लापरवाही और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया गया। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा रिपोर्ट (2019-2022) में ₹13.86 करोड़ की अवैध निकासी और वित्तीय अनियमितताओं का पर्दाफाश हुआ है, सवाल यही है कि क्या वन मंत्री को इस घोटाले का कुछ भी पता नहीं था, जो इतने साल तक उनके सामने नहीं आ सका.. सबसे पहले आपको बताते हैं कि CAMPA फंड कहां-कहां बर्बाद हुआ।

पर्यावरण संरक्षण के नाम पर सरकारी अधिकारी ऐशो-आराम का सामान खरीदते रहे जिनमें iPhones, लैपटॉप, फ्रिज और कूलर की खरीद की बात सामने आयी है सरकारी इमारतों की मरम्मत और साज-सज्जा के पैसे से वन विभाग के ऑफिस और अफसरों के आवास चमकते रहे, लेकिन जंगल उजड़ते रहे जंगल बचाने के बजाय CAMPA फंड को कानूनी लड़ाइयों पर लुटाया गया ऐसी जगह को पौध रोपण के लिए चुना गया जहां  हकीकत में  पेड़ टिक ही नहीं सकते थे. 7 मामलों में 8 साल से ज्यादा की देरी से वृक्षारोपण किया गया.. देर से वृक्षारोपण, लागत में बेतहाशा बढ़ोतरी से धन को लुटाया गया वनीकरण की स्थिति एकदम नाकाम रही. CAG के अनुसार, लगाए गए पेड़ों का सिर्फ 33.51% ही जिंदा बचा, जबकि Forest Research Institute के मानकों के अनुसार 60-65% सफलता दर होनी चाहिए थी.. मतलब वन विभाग लगाए गए पेड़ों को भी बचाने में नाकमयाब रहा, अफसरों की मिलीभगत ऐसी कि बिना सही जांच किए ही भूमि को उपयुक्त बताया गया और ऐसे अधिकारीयों के  खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।

 

कैग की रिपोर्ट में हुआ खुलासा-

इतना ही नहीं सरकार की बड़ी लापरवाही और वित्तीय घोटाले का भी कैग की रिपोर्ट में खुलासा किया गया है विभाग द्वारा  275 करोड़ का ब्याज नहीं चुकाया गया CAMPA ने कई बार अनुरोध किया, लेकिन राज्य सरकार ने 2019-22 के दौरान ब्याज नहीं चुकाया. 76.35 करोड़ के मंजूर प्लान पर कोई फंड जारी नहीं किया गया.  सरकार ने स्वीकृत योजनाओं पर भी पैसा नहीं दिया, जिससे परियोजनाएं ठप पड़ी रहीं जबकि जुलाई 2020 से नवंबर 2021 के बीच CEO ने Head of Forest Force की अनुमति के बिना फंड जारी किया, जो नियमों के खिलाफ था बिना केंद्र की मंजूरी के जंगलों की कटाई की गयी, राज्य सरकार ने केंद्र की मंजूरी के बिना ही जंगलों को उद्योगों और इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए सौंप दिया।

ये हाल वन विभाग के तब हैं जब उत्तराखंड के जंगलों में आग लगने की घटनाओं में साल दर साल बेतहाशा वृद्धि हो रही है। 2002 में जंगल की आग की 922 घटनाएं हुई थीं जिनकी संख्या 2024 में 21 हजार पार हो गई। इन घटनाओं में एक लाख 80 हजार हेक्टेयर से अधिक जंगल जल गए, भारतीय वन सर्वेक्षण  की हाल में जारी हुई रिपोर्ट पर गौर करें तो नवंबर 2023 से जून 2024 के बीच देश में वनों में दो लाख से अधिक घटनाएं हुईं। इनमें सर्वाधिक 74% की वृद्धि उत्तराखंड में रिकॉर्ड की गई। इसी कारण वनाग्नि में पिछले वर्ष 13वें नंबर पर रहा उत्तराखंड अब पहले स्थान पर है, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी में न्याय मित्र की रिपोर्ट में भी कहा गया है कि उत्तराखंड में वनाग्नि प्रबंधन के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे की कमी है इसमें अग्निशमन उपकरणों, गश्ती वाहन और समन्वय के लिए संचार उपकरणों की कमी शामिल है.. लेकिन इस पर धायण देने के बजाय अधिकारी पैसा अपने ऐशो-आराम का सामान जुटाने में पैसे लुटा रहे हैं।

 

Uttarakhand: आवास बनाने वालों के लिए धामी सरकार ने खोले छूट के द्वार, सपना होगा साकार, जानिए कैसे मिलेगा फायदा.

 

वन विभाग का काम करने का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि अभी हाल ही में हल्द्वानी में आग से बचाने के लिए की जाने वाली कंट्रोल बर्निग में कई नए लगाए पौधे भी जल गए इस पुरे घटनाक्रम से वन विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं कि वन विभाग आग बुझाने के बजाय नए पौधे ही जलाने में लग गया है,,, अब सवाल ये है इस सबके  जिम्मेदारों पर क्या कोई कार्रवाई होगी भी या नहीं CAG की रिपोर्ट ने वन विभाग की लापरवाही और भ्रष्टाचार को उजागर कर दिया है,,, क्या उत्तराखंड सरकार दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करेगी या ये रिपोर्ट भी अन्य घोटालों की तरह फाइलों में ही दफन हो जाएगी ?

Uttarakhand: इस बार 2 मई को खुलेंगे केदारनाथ धाम के कपाट, महाशिवरात्रि के शुभ पर्व पर घोषित हुई तिथि.

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ऊधमसिंह नगर जिले में ग्रीष्मकालीन धान की खेती पर लगे प्रतिबंध को इस साल के लिए हटा लिया गया है। इसकी जानकारी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक समाचार एजेंसी के माध्यम से दी। इस प्रतिबंध का किसान संगठनों ने लगातार विरोध किया था। किच्छा विधायक तिलकराज बेहड़ ने आंदोलन की चेतावनी दी थी, जबकि गदरपुर विधायक अरविंद पांडेय ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर प्रतिबंध हटाने की मांग की थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले साल इस पाबंदी को फिर से लागू किया जा सकता है।

पंचकेदार गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर में आज महाशिवरात्रि के अवसर पर केदारनाथ के रावल भीमाशंकर लिंग की मौजूदगी में श्री केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि तय हुई। आचार्य द्वारा पंचांग गणना के अनुसार मंदिर के कपाट खुलने की तिथि व समय घोषित किया गया।

इसके लिए केदारनाथ धाम के रावल भीमाशंकर लिंग भी ऊखीमठ पहुंच गए थे। पुजारी शिव शंकर लिंग, बागेश लिंग और गंगाधर लिंग ने बताया कि ओंकारेश्वर मंदिर में सुबह छह बजे से पूजा-अर्चना शुरू हुई। बाबा केदार को बाल भोग, महाभोग लगाते हुए आरती की गई। इसके उपरांत रावल भीमाशंकर लिंग की मौजूदगी में श्री केदारनाथ धाम के कपाट दो मई को खोले जाने की तिथि घोषित की गई।

 

Uttarakhand: आवास बनाने वालों के लिए धामी सरकार ने खोले छूट के द्वार, सपना होगा साकार, जानिए कैसे मिलेगा फायदा.

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धामी सरकार ने नई आवास नीति में गरीबों का आशियाने का सपना पूरा करने के लिए विकासकर्ताओं के लिए छूट के द्वार खोल दिए हैं। ईडब्ल्यूएस श्रेणी में नौ लाख के आवास पर 3.5 से 4.5 लाख रुपये राज्य व केंद्र सरकार देगी। केवल 4.5 से 5.5 लाख रुपये लाभार्थी को देने होंगे। इस रकम के लिए बैंक से लोन लेने की प्रक्रिया और खर्च भी आसान कर दिए गए हैं।

 

इस तरह से मिलेंगे लाभ-

मैदानी क्षेत्रों में भवन पर छूट

 

ईडब्ल्यूएस आवास पर मैदानी क्षेत्रों में प्रति आवास अधिकतम नौ लाख रुपये तय किए गए हैं। इसमें 5.5 लाख रुपये लाभार्थी को वहन करने हैं। दो लाख रुपये का अनुदान राज्य सरकार और 1.5 लाख रुपये का अनुदान केंद्र सरकार देगी। आवास बनाने वाले को नौ लाख रुपये या 30 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर, जो भी अधिक होगा, वह मिलेगा।

 

 

पर्वतीय क्षेत्रों में बाखली शैली की छूट-

बाखली शैली में भवन बनाने पर और सुविधा होगी। ईडब्ल्यूएस के प्रति आवास नौ लाख में से केवल 4.5 लाख लाभार्थी को देने होंगे। तीन लाख रुपये का अनुदान राज्य सरकार देगी, जबकि 1.5 लाख रुपये का अनुदान केंद्र सरकार देगी। यानी आधा पैसा सरकार देगी।

 

स्टाम्प शुल्क में छूट-

ईडब्ल्यूएस के लिए 1000, एलआईजी के लिए 5000, एलएमआईजी के लिए 10,000 रुपये तय हुआ है। अभी तक छह प्रतिशत स्टाम्प शुल्क और दो प्रतिशत पंजीकरण शुल्क लगता था। जैसे अगर 10 लाख का घर है तो उसका छह प्रतिशत के हिसाब से 60,000 रुपये स्टाम्प शुल्क और दो प्रतिशत पंजीकरण के हिसाब से 20,000 रुपये पंजीकरण शुल्क लगता था। 80,000 रुपये के बजाए अब ये काम महज 1500 रुपये(500 रुपये पंजीकरण) में होगा। इसी प्रकार, बैंक से लोन लेने पर अनुबंध में स्टाम्प शुल्क 0.5 प्रतिशत लगता था जो अब नहीं लगेगा। यानी 10 लाख के आवास में 5000 रुपये भी बचेंगे।

 

ये वीडियो भी देखें..

 

ईडब्ल्यूएस पर ये भी छूट-

10,000 वर्ग मीटर का भू-उपयोग परिवर्तन प्राधिकरण के स्तर से तीन माह के भीतर होगा। ईडब्ल्यूएस का नक्शा पास कराने का कोई शुल्क प्राधिकरण नहीं लेगा। परियोजना के लिए जमीन खरीदने वाली बिल्डरों को अलग से स्टाम्प शुल्क में छूट मिलेगी। यहां सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने पर इसकी प्रतिपूर्ति सरकार करेगी। परियोजना में कॉमर्शियल फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) मैदानी क्षेत्र में 25 प्रतिशत और पर्वतीय क्षेत्र में 30 प्रतिशत होगा। राज्य कर की प्रतिपूर्ति भी सरकार करेगी। परियोजना के लिए बैंक से लोन लेने पर ब्याज की प्रतिपूर्ति सरकार करेगी।

 

मैदान में अब ऊंची इमारतें बनेंगी-

मैदानी क्षेत्रों में आमतौर पर चार मंजिला भवन ईडब्ल्यूएस श्रेणी के बनते रहे हैं, जिनमें लिफ्ट का प्रावधान नहीं था। नई आवास नीति के हिसाब से अब आठ मंजिला या निर्धारित 30 मीटर ऊंचाई तक के भवन बना सकेंगे। इसमें लिफ्ट लगा सकेंगे, जिसका 10 साल तक रख-रखाव बिल्डर को करना होगा।

Uttarakhand: 24 गेम चेंजर योजनाओं से प्रदेश को उत्कृष्ट बनाने की तैयारी शुरु, जानिए क्या है सरकार का मास्टर प्लान.

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सरकार ने 24 विभागों की गेम चेंजर योजनाओं पर बजट में खास फोकस किया है। दो वर्षों के भीतर इन योजनाओं का असर धरातल पर नजर आएगा। आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में सरकार ने इनका जिक्र किया है। माना जा रहा है कि सशक्त उत्तराखंड@25 की परिकल्पना को इससे साकार किया जा सकेगा।

किस विभाग की कौन सी गेम चेंजर योजना-

 

1-कृषि : ई-रूपी योजना। यह कैश का डिजिटल फॉर्म है। बुनियादी ढांचे जैसे डिजिटल पेमेंट सिस्टम, सुरक्षा प्रणाली विकसित होगी। दूरस्थ गांवों तक वित्तीय सेवाएं मिलेंगी। कार्बन फुटप्रिंट कम होगा। राजस्व बढ़ेगा। कागज व धातु का उपयोग कम होगा। इसके लिए बजट में 25 करोड़ दिए गए हैं।

 

2-बदरी: केदार मंदिर समिति: शीतकालीन चारधाम यात्रा योजना। शीतकालीन चारधाम यात्रा को प्रोत्साहित करने के लिए फिल्मी हस्तियों, प्रतिष्ठित खिलाड़ियों व विभिन्न क्षेत्रों के ख्याति प्राप्त महानुभावों से संपर्क कर उन्हें ब्रांड एंबेसडर बनाया जाएगा। इनकी सेवाएं भी ली जा सकती हैं।

3-पशुपालन : वाइब्रेंट विलेज योजना। स्थानीय उत्पादों जैसे जीवित बकरी, भेड़, कुक्कुट, ट्राउट मछली की आपूर्ति आईटीबीपी को देकर हर साल 20 करोड़ व्यावसाय। दूसरी, ग्राम्य गो सेवक योजना में छह जिलों में 54 गो सेवकों को मान्यता। ये सार्वजनिक स्थानों पर घूमते निराश्रित नर गोवंश की संख्या में कमी पर कार्य करेंगे। फसलें व जनमानस को आसानी होगी। रोजगार बढ़ेगा।

4-सगंध पौध केंद्र : महक क्रांति योजना। यह योजना 2035 तक चलेगी। मुख्य लक्ष्य एरोमा वैली की स्थापना। 118 करोड़ के बजट से सुगंधित पौधों की खेती को बढ़ावा, किसानों की आय में वृदि्ध, सुगंधित तेलों व उत्पादों का उत्पादन बढ़ाना, राज्य को आत्मनिर्भर बनाने का काम होगा।

मत्स्य हैचरी का पीपीपी मोड पर संचालन-

5-मत्स्य : प्लॉट फार्मिंग योजना, राज्य स्तरीय एकीकृत एक्वा पार्क, मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना व ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के तहत मत्स्य हैचरी का पीपीपी मोड पर संचालन। इससे किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी।

6-उद्यान : एप्पल मिशन, नाबार्ड की आरआईडीएफ योजना के तहत क्लस्टर पॉलीहाउस की स्थापना। ये योजनाएं राज्य में बागवानी के विकास को नई दिशा देंगे।

7-वन : उत्तराखंड में इको-टूरिज्म और गैर प्रकाष्ठ वन उपज का विकास, हर्बल एवं इको-टूरिज्म परियोजना। हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर को छोड़कर बाकी जिलों में ये योजनाएं चलेंगी।

8-ग्राम्य विकास : हाउस ऑफ हिमालयाज योजना। इसके लिए बजट में 10 करोड़ का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना के लिए भी 10 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

9-शहरी विकास : 100 करोड़ से राज्य में 100 नए पार्कों का निर्माण। एआई के माध्यम से 275 करोड़ से स्ट्रीट लाइट का मैनेजमेंट।

10-स्टाम्प एवं निबंधन विभाग : पेपरलैस रजिस्ट्रेशन।

11-पंचायती राज : ग्राम पंचायतों में अवस्थापना सुविधा, पंचायत डेवलपमेंट इंडेक्स आधारित थीमेटिक ग्राम पंचायत विकास योजना का निर्माण।

12-श्रम: मदृश्रम पोर्टल तैयार करना। हरिद्वार, देहरादून, नैनीताल, ऊधमसिंह नगर को शून्य बाल श्रम क्षेत्र बनाना।

13-पर्यटन : उत्तराखंड पर्यटन उद्यमी प्रोत्साहन योजना 2024, स्थायी निवासियों को एक करोड़ से पांच करोड़ तक पूंजी निवेश के लिए प्रोत्साहित करना।

70 चार्जिंग स्टेशन की स्थापना-

14-परिवहन : पीएम ई-बस सेवा के तहत इलेक्टि्रक बस संचालन। चारधाम यात्रा मार्ग पर 28 ई-चार्जिंग स्टेशन, जो 856 किमी मार्ग को कवर करेंगे। 7.75 करोड़ खर्च होगा। दूसरे चरण में 41 चार्जिंग स्टेशन, तीसरे चरण में 70 चार्जिंग स्टेशन की स्थापना की जाएगी।

15-माध्यमिक शिक्षा : प्रोजेक्ट प्रज्ञा एवं वैश्विक संस्थाओं के सहयोग से हॉस्पिटैलिटी एंड कलिनरी क्षेत्र में छात्रों का प्रशिक्षण।

16-तकनीकी शिक्षा: ऑनलाइन प्रशिक्षण एवं रोजगार योजनाएं।

17-उच्च शिक्षा : समर्थ ई-गवर्नमेंट पोर्टल फॉर डिजिटलाइनेशन व देवभूमि उद्यमिता योजना।

18-कौशल विकास: मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन एवं वैश्विक रोजगार योजना के लिए 15 करोड़ का प्रावधान। स्किल सेंसस के लिए 50 लाख। नियोक्ता व नौकरी वालों के लिए एकीकृत पोर्टल योजना के लिए 50 लाख, सेवायोजन कार्यालयों का पुनर्गठन के लिए दो करोड़। लक्षित समूह की नौकरी के लिए पांच लाख का प्रावधान।

यूटिलिटी डक्ट पॉलिसी-

19-नियोजन: सेतु आयोग का गठन, यूआईआईडीबी गठन, सर्विस सेक्टर नीति का गठन, परिवार पहचान पत्र।

20-ऊर्जा: मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना।

21-चाय बोर्ड : टी टूरिज्म योजना, होम स्टे योजना।

22- सिंचाई: बांध, बैराज निर्माण। स्लोप स्टेबलाइजेशन। स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज।

23-स्वास्थ्य: दूरस्थ क्षेत्रों के लिए विशेषज्ञ परामर्श, द्वार पर निदान, आत्मनिर्भर मेडिसिटी को बढ़ावा। अस्पताल प्रबंधन सूचना प्रणाली व नर्सिंग छात्रों का कौशल विकास।

24-लोक निर्माण विभाग: रिस्पना-बिंदाल पर चाल लेन एलिवेटेड सड़क निर्माण। दून-मसूरी कनेक्टिविटी, देहरादून रिंग रोड, यूटिलिटी डक्ट पॉलिसी।

धामी सरकार ने पेश किया एक लाख करोड़ से ज्यादा का बजट, सात बिंदुओं पर रहा फोकस

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उत्तराखंड में आज विधानसभा सत्र के तीसरे दिन धामी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 का बजट पेश किया। वित्त मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने 1,01175.33 करोड़ का बजट पेश किया।वित्त मंंत्री प्रेम चंद अग्रवाल ने पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के शब्दों को दोहराया। कहा कि राज्य सरलीकरण, समाधान व निस्तारीकरण के मार्ग पर अग्रसरित हैं। बजट हमारे प्रदेश की आर्थिक दिशा और नीतियों का प्रमाण है। उत्तराखंड अनेक कार्यों का साक्षी रहा है। हम आत्मनिर्भर उत्तराखंड बनाने के लिए हम प्रयत्नशील हैं।

Uttarakhand Budget 2025 finance minister presented Budget Know Important Facts

बजट में राजस्व घाटा नहीं

बजट में कोई भी राजस्व घाटा अनुमानित नहीं है। बजट में 59954.65 करोड़ राजस्व व्यय है। इसमें 41220.68 करोड़ पूंजीगत व्यय के लिए रखे गए हैं। 12604492 का रजकोषीय घाट होने का अनुमान है जो जीडीपी का 2.94 प्रतिशत है। यह एफआरबीएम एक्ट की सीमा के भीतर है।

बजट में सात बिंदुओं पर फोकस रहा

  •  कृषि
  •  उद्योग
  •  ऊर्जा
  • अवसंरचना
  • संयोजकता
  • संयोजकता
  • पर्यटन
  • आयुष

बजट ‘ज्ञान’ ‘GYAN’पर आधारित

  • गरीब
  • युवा
  • अन्नदाता
  • नारी

इन क्षेत्रों में हुआ इतने करोड़ का प्रावधान

  • एमएसएमई उद्योगों के लिए 50 करोड़।
  • मेगा इंडस्ट्री नीति के लिए 35 करोड़।
  • स्टार्टअप उद्यमिता प्रोत्साहन के लिए 30 करोड़।
  • यूजेवीएनएल की तीन बैटरी आधारित परिजनाएं मार्च 2026 तक पूरी होंगी।
  • मेगा प्रोजेक्ट योजना के तहत 500 करोड़।
  • जमरानी बांध के लिए 625 करोड़।
  • सौंग बांध के लिए 75 करोड़।
  • लखवाड़ के लिए 285 करोड़ राज्यों के लिए विशेष पूंजीगत सहायता के तहत 1500 करोड़।
  • जल जीवन मिशन के लिए 1843 करोड़।
  •  नगर पेयजल के लिए 100 करोड़।
  •  अनुसूचित जाति बाहुल्य क्षेत्रों के विकास के लिए 60 करोड़।
  •  अल्पसंख्यक बाहुल्य क्षेत्रों के लिए 08 करोड़ मिलेंगे।
  • पूंजीगत मद में लोनिवि को 1268.70 करोड़।
  • पीएमजीएसवाई के तहत 1065 करोड़।
  • नागरिक उड्डयन विभाग को 36.88 करोड़।
  • बस अड्डों के निर्माण के लिए 15 करोड़ मिलेंगे।
  • लोनिवि में सड़क अनुरक्षण के लिए 900 करोड़

पर्यटन के लिए

  • पूंजीगत कार्यों के विकास के लिए 100  करोड़।
  • टिहरी झील के विकास के लिए 100 करोड़।
  • मानसखंड योजना के विकास के लिए 25 करोड़।
  • वाइब्रेंट विलेज योजना के लिए 20 करोड़।
  • नए पर्यटन स्थलों के विकास के लिए 10 करोड़।
  • चारधाम मार्ग सुधारीकरण के लिए 10 करोड़।

ये काम होंगे

  • 220 किमी नई सड़कें बनेंगी।
  • 1000 किमी सड़कों का पुनर्निर्माण
  • 1550 किमी मार्ग नवीनीकरण
  • 1200 किमी सड़क सुरक्षा कार्य और 37 पुल बनाने का लक्ष्य है।

इकोलॉजी के साथ-साथ इकोनॉमी

  • सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करना।
  • पर्यावरणोन्मुखी नीतियों का निर्धारण।
  • स्वच्छ पर्यावरण एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर बल।
  • स्थिति-स्थापक पर्यावरण की सुनिश्चितीकरण।

महत्वपूर्ण योजना / प्रावधान

  • कैम्पा योजना के लिए 395 करोड़।
  • जलवायु परिवर्तन शमन के लिए 60 करोड़।
  • स्प्रिंग एंड रिवर रेजुबिनेशन प्राधिकरण (सारा) के अन्तर्गत 125 करोड़।
  • सार्वजनिक वनों के सृजन हेतु 10 करोड़।