Category Archive : देहरादून

उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों के आये अच्छे दिन, सीएम धामी ने किये खरीद के आदेश जारी।

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Dehradun: राज्य सरकार के अधीन विभिन्न विभाग और सरकारी कार्यालयों में आयोजित होने समारोहों, बैठकों के लिए स्थानीय समूहों के उत्पाद खरीदे जाएंगे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने इसके आदेश जारी कर दिए हैं।

महिलाओं और किसानों की मजबूती का बनेगा आधार –

मुख्य सचिव की ओर से गुरुवार को जारी आदेश में कहा गया है कि उत्तराखंड में अलग – अलग विभागों के सहयोग से विभिन्न प्रकार के स्वयं सहायता समूहों, किसान उत्पादक संगठनों, महिला कृषकों और एकल महिला उद्यमियों द्वारा कई प्रकार के उच्च गुणवत्ता युक्त स्थानीय उत्पाद बनाए जा रहे हैं। उत्तराखंड सरकार भी विभिन्न शासकीय कार्य्रकमों, बैठकों, समारोह में उपहार देने के लिए स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता के आधार पर क्रय करने पर जोर दे रही है। इसी क्रम में सभी विभाग, कार्यालय अपने अधीन होने वाले कार्यक्रमों, समारोहों के लिए स्थानीय उत्पादों की खरीद करेंगे। इससे समूहों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ ही, लोगों को भी गुणत्ता पूर्ण उत्पाद हासिल हो सकेंगे।

 

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स्थानीय उत्पादों का ब्रांड हाउस ऑफ हिमालयाज- 


प्रदेश सरकार ने गत वर्ष स्थानीय उत्पादों का अम्ब्रेला ब्रांड हाउस आफ हिमालयाज भी लांच किया है। इसका उद्घाटन खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों, दिसंबर 2023 के दौरान देहरादून में आयोजित ग्लोबल इंवेस्टर समिट के दौरान हुआ था। वर्तमान में हाउस ऑफ हिमालयाज ब्रांड के तहत आठ श्रेणी में कुल 35 उत्पादों को शामिल किया गया है। इसमें मिलेट्स बिस्किट, मुन्स्यारी, चकराता, हर्षिल की राजमा, चौलाई, तोर दाल, पहाड़ का परंपरागत लाल चावल, झंगोरा, गहथ, काले भट्ट, चाय, तेल, पर्सनल केयर, हैंडीक्राफ्ट के उत्पाद शामिल हैं।

 

गौरतलब है कि उत्तराखंडी उत्पादनों की मांग विगत कुछ वर्षों से पूरे देश में की जा रही है .. इससे न केवल प्रदेश के आम लोगों की आजीविका मजबूत होगी बल्कि महिलाओं के लिए ,जो स्वयं सहायता समूह के जरिए या खुद संचालन करती हैं उनको भी बहुत फायदा होगा

 

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Dehradun: सीएम पुष्कर सिंह धामी ने निर्देश दिए कि नई दिल्ली में नवनिर्मित उत्तराखंड निवास आम जन के लिए भी उपलब्ध कराया जाना सुनिश्चित किया जाए। सीएम ने  प्रकाशित खबरों का संज्ञान लेते हुए कहा कि उत्तराखंड निवास में कक्ष आरक्षण के लिए जारी शासनादेश को तत्काल संशोधित किया जाए और उत्तराखंड के आम व्यक्ति को भी उपलब्धता के आधार पर वहां कक्ष मिल सके ऐसी व्यवस्था की जाए। मुख्यमंत्री ने दरों का भी पुनर्निर्धारण करने के निर्देश दिए है।

 

बुधवार को जारी शासनादेश को सीएम धामी ने संशोधित करने के निर्देश दिए। शासनादेश के मुताबिक दिल्ली में बनाए गए नए उत्तराखंड निवास में केवल नेता और आला अफसरों को ही ठहरने की सुविधा दिए जाने की बात कही गई थी। बाकी के लिए यहां प्रवेश नहीं रहेगा। राज्य संपत्ति विभाग ने इसके लिए रेट लिस्ट और ठहरने के पात्र लोगों की सूची जारी कर दी थी।

 

 

उत्तराखंड निवास में केवल राज्यपाल, मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, मंत्री, नेता प्रतिपक्ष, हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश व न्यायाधीश, सांसद, विधायक, दायित्वधारी, पूर्व मुख्यमंत्री, एडवोकेट जनरल, राष्ट्रीय या राज्य स्तर का दर्जा प्राप्त राजनैतिक दलों के प्रदेश अध्यक्ष, विभिन्न संवैधानिक आयोगों के अध्यक्ष, मेयर, जिपं अध्यक्ष, मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव, पुलिस महानिदेशक, अपर पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक, प्रमुख वन संरक्षक, मुख्य वन संरक्षक, राज्य के मुख्य स्थायी अधिवक्ता, 13-ए ग्रेड लेवल या उच्च वेतन के अफसरों को ठहरने की सुविधा दी जानी थी।

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अपर सचिवों से लेकर आम आदमी तक के लिए यहां ठहरने की व्यवस्था नहीं की गई। जिसका संज्ञान लेते हुए सीएम धामी ने तत्काल इसे संशोधित करने के निर्देश दिए। यहां उत्तराखंड शासन या सरकारी विभागों की बैठक निशुल्क कराई जा सकेंगी। निगमों या समितियों को बैठक के लिए 15,000 रुपये प्रतिदिन प्रति कार्यक्रम देने होंगे। अन्य को 35,000 रुपये प्रति कार्यक्रम देने होंगे।

 

Uttarakhand: सीएम धामी देंगे उत्तराखंड को नई पहचान, जल्द बनेगी उत्तराखंड वेडिंग डेस्टिनेशन नीति। 

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Dehradun: उत्तराखंड एक ऐसा राज्य जिसमें पर्यटन को लेकर अपार संभावनाएं हैं,,सिर्फ चार धाम यात्रा ही नहीं कई जगहें ऐसी हैं जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जानी जाती है,,,,लेकिन पर्याप्त प्रचार – प्रसार और उचित व्यवस्थाएं न होने के चलते इन जगहों को देश दुनिया नहीं जानती है,लेकिन चारधाम यात्रा के साथ – साथ इन स्थानों के विकास के लिए एक नया तरीका धामी सरकार ने ढूढ़ लिया है,,,,दरअसल ऐसे स्थानों को देश दुनिया की नजर में लाने के लिए सरकार ने अब कई जगहों को वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने का फैसला किया है,इसके लिए बाकयदा सरकार ने निति बनाने की तरफ तेजी से कदम बढ़ा दिया है। 

 

उत्तराखंड में वेडिंग डेस्टिनेशन विकसित किये जाने के लिए पर्यटन विभाग चार सप्ताह में पॉलिसी बनाएगा।पंतनगर और देहरादून एयरपोर्ट में विमानों की नाइट लैंडिंग की व्यवस्था के लिए की जा रही कार्यवाही में तेजी लाई जाए। दो नये शहरों को विकसित करने की कार्ययोजना को धरातल पर लाने के लिए तेजी से कार्यवाही की जाए। गंगा और शारदा कॉरिडोर डेवलपमेंट और डाकपत्थर में बनने वाले नॉलेज सिटी के लिए चरणबद्ध तरीके से कार्य किये जाएं। जून 2026 तक सभी परियोजनाओं पर विधिवत कार्य प्रारंभ किया जाए। सचिवालय में उत्तराखंड निवेश और आधारिक संरचना विकास बोर्ड (यू.आई.आई.डी.बी.) की तृतीय बैठक के दौरान ये निर्देश मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को दिये। मुख्यमंत्री ने कहा कि विरासत के साथ विकास के मॉडल पर कार्य किया जाए।

 

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मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की आगामी 25 साल की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विभिन्न विकास योजनाओं का सुनियोजित प्लान कर कार्य किये जाएं। 2047 तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए राज्य में भी अल्पकालिक, लघुकालिक और दीर्घकालीन योजनाओं पर कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड निवेश और आधारिक संरचना विकास बोर्ड के तहत सभी परियोजनाओं से संबंधित क्षेत्रों के विकास के लिए सुनियोजित तरीके से कार्य किया जाए। जनप्रतिनिधियों और स्टेक होल्डर्स के सुझावों को शामिल कर परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं की नियमित समीक्षा की जायेगी।

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मुख्यमंत्री ने प्रदेश को वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में पहचान दिलाने के लिये विभिन्न स्थानों का चयन कर वहां अवस्थापना सुविधाओं के विकास पर ध्यान देने को कहा। इसके लिए वेडिंग प्लानरों, होटल समूहों से सहयोग लेकर इसके प्रचार प्रसार पर भी ध्यान देने पर बल दिया। राज्यों में दो नये शहरों के विकास और सभी प्रकार की मूलभूत सुविधाएं विकसित करने के लिए स्पष्ट कार्ययोजना के तहत कार्य करने के उन्होंने निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि यू.आई.आई.डी.बी. की परियोजनाओं के तहत पर्यटन और तीर्थाटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थानों के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाए। गंगा और शारदा कॉरिडोर के पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व को ध्यान में रखते हुए कार्य किये जाएं। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि राज्य हित में जिन उद्देश्यों की पूर्ति के लिये यू.आई.आई.डी.बी. का गठन किया गया है, उसके परिणाम शीघ्र धरातल पर दिखाई दें।

 

बैठक में कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, विधायक मदन कौशिक, रेनू बिष्ट, उपाध्यक्ष अवस्थापना अनुश्रवण परिषद विश्वास डाबर, मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, अपर मुख्य सचिव आनंद वर्धन, प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, शैलेश बगोली, दिलीप जावलकर, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, विनय शंकर पाण्डेय, डॉ. आर राजेश कुमार, उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी, जिलाधिकारी देहरादून सविन बंसल, जिलाधिकारी पौड़ी डॉ. आशीष चौहान, जिलाधिकारी हरिद्वार कर्मेन्द्र सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

Uttarakhand: निकायों की जमीन और दुकान की लीज के लिए अब शासन की अनुमति जरूरी, जारी किए आदेश।

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उत्तराखंड के 105 नगर निकायों की जमीन व दुकान की लीज के लिए अब शासन की अनुमति जरूरी होगी। सचिव शहरी विकास नितेश झा ने इस संबंध में निकायों को आदेश जारी कर दिया है। लीज का नवीनीकरण भी शासन की अनुमति से ही होगा।

सचिव शहरी विकास नितेश झा के मुताबिक, यह संज्ञान में आया है कि कई नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत अपने स्वामित्व की जमीनों, भवन आदि को किराए और लीज पर बाजार दर से कम दरों पर आवंटित कर रहे हैं।

लीज की ऐसी संपत्तियां, जिनका नवीनीकरण पूरा हो चुका है, उन्हें भी बिना शासन के पूर्व अनुमोदन निकाय के स्तर से बाजार दरों से कम दरों पर नवीनीकरण किया जा रहा है। इससे नगर निकायों को आर्थिक रूप से काफी नुकसान हो रहा है। 

प्रस्तावों पर शासन के अनुमोदन के बिना मंजूर नहीं किया जाएगा

निकायों को गंभीरता अपनाते हुए सुधारात्मक कदम उठाने की जरूरत है। सचिव शहरी विकास ने 30 अप्रैल 2010 के शासनादेश को याद दिलाते हुए स्पष्ट किया है कि निकायों की ओर से लीज नवीनीकरण से संबंधित प्रस्तावों पर शासन के अनुमोदन के बिना मंजूर नहीं किया जाएगा।
निकायों के स्वामित्व या प्रबंधन की संपत्ति जैसे भूमि, व्यावसायिक भूमि आदि को किराए या लीज पर प्रचलित बाजार मूल्य से न्यून दरों पर आवंटित नहीं कर सकेंगे। बल्कि, बाजार मूल्य या उससे अधिक दरों पर आवंटित किया जाएगा।

देहरादून समेत कई नगर निकाय ऐसे हैं, जिनकी करोड़ों की संपत्तियां कुछ ही रुपयों के किराये पर दी गई हैं। इनमें कई संपत्तियां तो निकायों के प्रभावशाली लोगों ने अपने चहेतों को औने-पौने दामों पर लीज पर दी हुई हैं। माना जा रहा है कि सरकार की सख्ती के बाद इस दिशा में कुछ सुधार होगा।

 

Dehradun: भू-कानून और मूल निवास को लेकर भूख हड़ताल शुरु, शहीद स्मारक पर पुलिस फोर्स तैनात।

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सशक्त भू-कानून और मूल निवास की मांग को लेकर आमरण अनशन करने की तैयारी में मूल निवास, भू कानून समन्वय संघर्ष समिति के संयोजक मोहित डिमरी को पुलिस ने रोक दिया। पुलिस ने शहीद स्मारक के गेट पर ताला भी लगा दिया है। मोहित ने निर्णय लिया है कि वह शहीद स्मारक के गेट के बाहर ही भूख हड़ताल शुरू करेंगे।

मूल निवास, भू-कानून समन्वय संघर्ष समिति ने आज मंगलवार से शहीद स्मारक पर आमरण अनशन शुरु करने का एलान किया था। समिति को महिला मंच और राज्य आंदोलनकारी मंच सहित कई संगठनों ने अपना समर्थन दिया है। समिति का कहना है कि भूमि कानूनों में हुए संशोधनों को रद्द किया जाए।

इसके साथ ही निवेश के नाम पर दी गई जमीनों का ब्यौरा सार्वजनिक किया जाए।समिति के संयोजक मोहित डिमरी ने कहा कि उत्तराखंड सरकार मजबूत भू-कानून को लेकर गंभीर नहीं है। सरकार बजट सत्र में भू-कानून लाने की बात कर रही है, लेकिन किस तरह का भू-कानून सरकार लाएगी, स्थिति स्पष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि 2018 के बाद भूमि कानूनों में हुए सभी संशोधनों को अध्यादेश के जरिये रद्द किया जाय।

 

 

400 से अधिक गांव नगरीय क्षेत्र में हुए शामिल-
भूमि कानून की धारा-2 को हटाया जाए। इस धारा की वजह से नगरीय क्षेत्रों में गांवों के शामिल होने से कृषि भूमि खत्म हो रही है। 400 से अधिक गांव नगरीय क्षेत्र में शामिल हुए हैं और 50 हजार हैक्टेयर कृषि भूमि को खुर्द-बुर्द करने का रास्ता खोल दिया गया। साथ ही भूमि कानून के बिल को विधानसभा में पारित करने से पूर्व इसके ड्राफ्ट को जन समीक्षा के लिए सार्वजनिक किया जाए।

 

 

निवेश के नाम पर दी गई जमीनों का ब्यौरा और इससे मिले रोजगार को सार्वजनिक किया जाय। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने 250 वर्ग मीटर से अधिक जमीन खरीदी है, उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाय। समिति ने कहा कि मूल निवासियों को चिह्नित किया जाए। वहीं, 90 प्रतिशत नौकरियों और सरकारी योजनाओं में मूल निवासियों की भागीदारी होनी चाहिए।

 

सरकार भू कानून और मूल निवास पर अपनी मंशा साफ करे-
समिति के महासचिव प्रांजल नौडियाल ने कहा कि सरकार भू कानून और मूल निवास पर अपनी मंशा साफ करे। महिला मंच की उपाध्यक्ष निर्मला बिष्ट ने कहा, राज्य आंदोलन में महिलाओं ने सर्वोच्च बलिदान देकर इस राज्य के सपने को साकार करने में अग्रणी भूमिका निभाई। वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी मोहन सिंह रावत ने कहा, 42 शहीदों ने अपनी शहादत देकर राज्य के निर्माण का सपना साकार किया, लेकिन आज जमीन के कानून खुर्द बुर्द किए गए और मूल निवासियों के अधिकार छीने गए।

 

 

समिति को इन संगठनों का मिला समर्थन-

मूल निवास, भू कानून समन्वय संघर्ष समिति के आंदोलन को पूर्व सैनिक संगठन, महिला मंच, आंदोलनकारी मंच, उत्तराखंड संयुक्त आंदोलनकारी मंच, पहाड़ी स्वाभिमान सेना, धाद, देवभूमि संगठन, महानगर ऑटो यूनियन, दून गढ़वाल जीप कमांडर कल्याण समिति, उपनल महासंघ, अतिथि शिक्षक संगठन, पूर्व कर्मचारी संगठन, ओपीएस संगठन, चारधाम महापंचायत, गढ़ कुमाऊं मंडल, गढ़वाल सभा, उत्तराखंड त्रिस्तरीय पंचायत संगठन, राठ महासभा, आर्यन छात्र संगठन सहित कई संगठनों का समर्थन मिला है।

Uttarakhand: प्रदेश के 13वें डीजीपी बने दीपम सेठ, गृह विभाग ने जारी किए आदेश, 1995 बैच के हैं आईपीएस अधिकारी.

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दीपम सेठ उत्तराखंड के 13वें डीजीपी बन गए हैं। गृह विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। एडीजी दीपम सेठ ने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से लौटकर सोमवार को मूल कैडर ज्वाइन किया। ज्वाइन करते ही उन्हें पुलिस के 13वें मुखिया की जिम्मेदारी भी दी गई।
दीपम सेठ 1995 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। और वर्ष 2019 से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर थे। अभी उनकी प्रतिनियुक्ति अवधि पूरी नहीं हुई थी कि शासन ने उन्हें वापस बुलाने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखा था। पत्र के एक दिन बाद ही केंद्र ने उन्हें रिलीव भी कर दिया। बता दें कि एडीजी दीपम सेठ उत्तराखंड कैडर के वर्तमान में सबसे वरिष्ठ अधिकारी हैं। पिछले साल पूर्व डीजीपी अशोक कुमार के सेवानिवृत्त होने के बाद सेठ के वापस आने की चर्चाएं हुई थीं।
सरकार ने उनका नाम भी डीजीपी के पैनल में शामिल करते हुए यूपीएससी को भेजा था। लेकिन, वह प्रतिनियुक्ति से वापस नहीं आए थे। ऐसे में सभी जरूरी अर्हताएं पूरी करने वाले अधिकारियों में एडीजी अभिनव कुमार का नंबर आ गया था। उन्होंने पिछले साल 30 नवंबर की शाम को प्रदेश के 12वें डीजीपी (कार्यवाहक) के रूप में पुलिस की कमान संभाली थी। लेकिन, पिछले दिनों फिर से डीजीपी के चयन के लिए एक पैनल यूपीएससी भेजा गया। मगर, इस पैनल में अभिनव कुमार का नाम शामिल नहीं था।
यूपी की तर्ज पर डीजीपी का करने की सिफारिश
पिछले दिनों कार्यवाहक डीजीपी अभिनव कुमार ने गृह सचिव को पत्र लिखकर यहां डीजीपी का चयन यूपी की तर्ज पर करने की सिफारिश की थी। उन्होंने मौजूदा उत्तराखंड पुलिस एक्ट के नियमों का हवाला भी दिया था। इसमें दो साल के लिए शासन की समिति ही डीजीपी का चयन कर सकती है। लेकिन, अब एकाएक गृह विभाग की ओर से केंद्र सरकार को शुक्रवार को पत्र लिखकर आईपीएस दीपम सेठ को वापस भेजने की मांग की थी।

Uttarakhand: 26 नवंबर से भूख हड़ताल पर बैठेगी भू-कानून समन्वय संघर्ष समिति।

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प्रेस क्लब देहरादून में मूल निवास, भू कानून समन्वय संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने प्रेस वार्ता की इस अवसर पर उन्होंने संविधान दिवस यानि की 26 नवंबर से शहीद स्मारक देहरादून में भूख हड़ताल शुरू करने का ऐलान किया है। संघर्ष समिति के संयोजक मोहित डिमरी भूख हड़ताल पर बैठेंगे। वही प्रेसवार्ता करते हुए मूल, निवास भू-कानून समन्वय संघर्ष समिति के संयोजक मोहित डिमरी ने कहा कि उत्तराखंड सरकार मजबूत भू-कानून को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं दिखाई दे रही है। सरकार बजट सत्र में भू-कानून लाने की बात कर रही है, लेकिन किस तरह का भू-कानून सरकार लाएगी, स्थिति स्पष्ट नहीं है। कहीं ऐसा तो नहीं हर बार की तरह भू-माफिया के पक्ष में सरकार कानून लेकर आए।

Uttarakhand: निकाय चुनाव की तैयारियों में जुटी भाजपा, पर्यवेक्षकों सर्वे रिपोर्ट पर बनेगा प्रत्याशियों का पैनल.

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केदारनाथ उपचुनाव के बाद अब भाजपा निकाय चुनाव की तैयारियों में जुट गए हैं। बृहस्पतिवार को भाजपा मुख्यालय में 19 सांगठनिक जिलों के पदाधिकारियों के साथ नगर निगम, नगर पालिका व नगर पंचायत अध्यक्ष पद के संभावित प्रत्याशियों पर मंथन किया गया।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा, पहले चरण में निकाय चुनाव के लिए निगम, पालिका व नगर पंचायतों में अध्यक्ष पद के दावेदारों की जानकारी ली जा रही है। बैठक में संभावित प्रत्याशियों को लेकर जिला पदाधिकारियों के साथ पर गहन विचार विमर्श किया गया।

 

प्रत्याशियों का पैनल होगा तैयार-

इसके बाद पर्यवेक्षकों की टोली भी सभी निकायों में जाकर मंडल पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं व वार्ड सदस्यों से प्रत्याशी को लेकर फीडबैक लेगी। पार्टी की ओर से प्रत्याशी चयन के लिए सर्वे कराया जाएगा। पर्यवेक्षक और सर्वे रिपोर्ट के आधार पर प्रत्याशियों का पैनल तैयार होगा।

बैठक में 19 सांगठनिक जिलों के अध्यक्ष, महामंत्री समेत जिलों के पार्टी विधायक शामिल हुए, जिसमें प्रदेश अध्यक्ष ने चुनाव तैयारियों की जानकारी ली। भट्ट ने बताया, पार्टी सभी निकायों में जीत हासिल करने के लिए अपनी तैयारियों को अंतिम रूप दे रही है। बैठक में जिला वार स्थानीय राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों पर फीड बैक लिया गया।

निकाय चुनाव की घोषणा के बाद पर्यवेक्षकों की टोली निकायों में भेजी जाएगी। इसके बाद प्रदेश पार्लियामेंट्री बोर्ड से केंद्रीय नेतृत्व को प्रत्याशियों का पैनल भेजा जाएगा। बैठक में प्रदेश महामंत्री संगठन अजेय कुमार, प्रदेश उपाध्यक्ष कुलदीप कुमार, प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान समेत जिलों के पदाधिकारी मौजूद रहे।

उत्तराखंड में बढ़ती दुर्घटनाओं पर अब सुप्रीम कोर्ट ने तलब की रिपोर्ट, मुख्य सचिव को भेजा पत्र.

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 उत्तराखंड में बढ़ रही सड़क दुर्घटनाओं का स्वत: संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शासन से कारणों की विस्तृत जांच रिपोर्ट तलब की है। सुप्रीम कोर्ट कमेटी आन रोड सेफ्टी के सचिव संजय मित्तल ने मुख्य सचिव राधा रतूड़ी को पत्र भेजकर दुर्घटनाओं के सभी कारणों व दुर्घटना नियंत्रण को उठाए गए कदमों की विस्तृत रिपोर्ट 15 दिसंबर तक उपलब्ध कराने को कहा है। 

कमेटी ने देहरादून के ओएनजीसी चौक पर इनोवा कार दुर्घटना में छह युवाओं की मृत्यु और अल्मोड़ा में बस दुर्घटना में 38 यात्रियों की मौत का संज्ञान लिया है। प्रदेश में वाहनों की बेलगाम गति, ओवरलोडिंग व प्रवर्तन एजेंसियों की चेकिंग में लापरवाही के कारण हो रही दुर्घटनाओं पर भी कमेटी ने चिंता जताई है। 

सुप्रीम कोर्ट ने शासन से मांगा जवाब-

जस्टिस अभय मनोहर सप्रे की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट कमेटी आन रोड सेफ्टी के सचिव संजय मित्तल के पत्र में कमेटी ने 11 नवंबर की देर रात दो बजे देहरादून में ओएनजीसी चौक पर हुई दुर्घटना का मुख्य कारण प्रवर्तन एजेंसियों की रात्रि चेकिंग में बरती गई लापरवाही को भी माना है। कमेटी ने चिंता जताते हुए यह जवाब मांगा है कि शासन की ओर से इस लापरवाही पर क्या कार्रवाई की गई।

बता दें कि, दुर्घटना वाली रात जाखन-मसूरी रोड से पार्टी कर लौट रहे सात युवाओं की बिना पंजीयन नंबर की इनोवा हाइक्रास कार बेलगाम गति से शहर में पुलिस के पांच बैरियर से गुजरती हुई 10 किमी दूर ओएनजीसी चौक तक पहुंच गई, लेकिन कहीं भी यह कार चेकिंग के लिए नहीं रोकी गई। एक बीएमडब्ल्यू कार को ओवरटेक करने के प्रयास में तकरीबन 180 किमी प्रतिघंटा की गति से दौड़ रही यह कार एक कंटेनर से टकराकर पेड़ में जा घुसी थी। 

इस भयावह सड़क दुर्घटना में कार सवार दो युवाओं के सिर धड़ से अलग हो गए थे, जबकि शेष के शव भी क्षत-विक्षत स्थिति में सड़क पर बिखर गए थे। सभी युवा 20 से 24 वर्ष के थे और उनमें तीन युवतियां भी शामिल थीं। इस दुर्घटना में कार सवार एक युवक जीवित है, जिसका सिनर्जी अस्पताल में उपचार चल रहा है।

सुप्रीम कोर्ट की कमेटी का पत्र मिलने के बाद मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने इस संबंध में सचिव परिवहन बृजेश संत को निर्धारित समय में विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के आदेश दिए हैं। वहीं, सुप्रीम कोर्ट कमेटी आन रोड सेफ्टी ने अल्मोड़ा के मार्चुला में हुई बस दुर्घटना पर भी सरकार से रिपोर्ट मांगी है। गत चार नवंबर की सुबह ओवरलोड बस खाई में गिरने से 38 यात्रियों की मृत्यु हो गई थी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दुर्घटना के बाद दो एआरटीओ को निलंबित कर दिया था। बता दें कि, उपरोक्त दोनों दुर्घटनाओं में शासन स्तर पर पहले से जांच चल रही हैं, लेकिन अब तक कोई निष्कर्ष नहीं निकला है।

Uttarakhand: शिक्षक भर्ती में 70 से अधिक चयनित महिला अभ्यर्थियों का चयन होगा रद्द, नहीं मिलेगा आरक्षण का लाभ.

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प्रदेश के सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक के पदों पर चयनित 70 से अधिक महिला अभ्यर्थियों का चयन रद्द होगा। उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा समेत अन्य राज्यों की इन महिला अभ्यर्थियों का विवाह उत्तराखंड में हुआ है।

शिक्षा निदेशालय ने आरक्षित वर्ग की इन महिला अभ्यर्थियों के मामले में शासन से दो महीने पहले दिशा-निर्देश मांगा था कि इन्हें नियुक्ति में आरक्षण का लाभ दिया जाए या नहीं। शासन के अधिकारियों के मुताबिक कार्मिक विभाग के 10 अक्तूबर 2002 के शासनादेश के मुताबिक इन्हें आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता।

2906 पदों पर चल रही शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया-
प्रदेश में इन दिनों 2906 पदों पर शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। शिक्षा निदेशालय के मुताबिक भर्ती में ऐसे द्विवर्षीय डीएलएड अभ्यर्थियों ने भी आवेदन किया। जिनका विवाह अन्य राज्य से उत्तराखंड में हुआ है।

इन अभ्यर्थियों की अन्य राज्य के आरक्षण एवं उत्तराखंड राज्य के आरक्षण की स्थिति समान है। शिक्षा निदेशालय ने 27 अगस्त 2024 को शासन को लिखे पत्र में कहा कि समान जाति के आधार पर अन्य राज्य के अभ्यर्थियों को उत्तराखंड राज्य में आरक्षण का लाभ दिया जाना है या नहीं इस संबंध में दिशा-निर्देश दिया जाए।

आरक्षण की सुविधा अपने पैतृक राज्य में ही मिलेगी-
शासन के अधिकारियों के मुताबिक शिक्षा निदेशालय से दिशा-निर्देश मांगे जाने के बाद शासन ने समाज कल्याण, कार्मिक और न्याय विभाग से इस संबंध में सुझाव मांगा था। जिस पर कार्मिक विभाग के 10 अक्तूबर 2002 के शासनादेश का हवाला दिया गया कि उत्तराखंड राज्य के अलावा उत्तर प्रदेश एवं अन्य किसी राज्य का कोई व्यक्ति उत्तराखंड राज्य की राज्याधीन सेवाओं में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के लिए अनुमन्य आरक्षण का लाभ नहीं पा सकेगा।

इसके अलावा समाज कल्याण विभाग के 29 दिसंबर 2008 का वह शासनादेश जो डीएम देहरादून को संबोधित है। उसके बिंदु संख्या तीन में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा 74 में संरक्षण केवल सेवा शर्तों के लिए है। ऐसे संरक्षण में ऐसे कर्मचारियों की संतान को अपने पैतृक राज्य के अलावा दूसरे राज्य में आरक्षण की कोई सुविधा नहीं मिलेगी न ही उन्हें दूसरे राज्य के लिए अनुसूचित जाति, जनजाति व अन्य पिछड़ा वर्ग का समझा जाएगा। उन्हें आरक्षण की सुविधा अपने पैतृक राज्य में ही मिलेगी।

नियुक्ति के लिए उत्तराखंड की बहुओं ने किया था आंदोलन-

नियुक्ति की मांग को लेकर उत्तराखंड की बहुओं ने पिछले दिनों शिक्षा निदेशालय में प्रदर्शन कर धरना दिया था। उनका कहना था कि उत्तराखंड में उनका विवाह हुआ है। उन्हें नौकरी में आरक्षण का लाभ देते हुए नियुक्ति दी जाए।

ये शिक्षक हो सकते हैं बर्खास्त-

शिक्षक भर्ती में कुछ ऐसे अभ्यर्थी भी शामिल हैं। जिसने अन्य राज्यों से डीएलएड के लिए स्थायी निवास की बाध्यता के बावजूद डीएलएड करने के बाद उत्तराखंड में नियुक्ति पा ली। जबकि नियुक्ति के लिए उत्तराखंड का स्थायी या मूल निवासी होना जरूरी है।

कुछ अभ्यर्थियों ने यूपी का जाति प्रमाण पत्र रद्द करवाने के बाद उत्तराखंड से जाति एवं निवास प्रमाण पत्र बनवाया है। उनके पति के आधार पर यह प्रमाण पत्र बना है। जिसे डीएम ने जारी किया है। इनके आरक्षण के मामले में समाज कल्याण, कार्मिक और न्याय से परामर्श शासन को मिल चुका है, लेकिन अभी निदेशालय को कोई निर्देश जारी नहीं हुआ। -आरएल आर्य, अपर निदेशक प्रारंभिक शिक्षा