जेल में बंदियों की मौत के बाद उनके आश्रितों को अब मुआवजा दिया जाएगा। इसके लिए बजट में नए मद के तहत एक करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रदेश में यह व्यवस्था पहली बार की गई है। पिछले दिनों इस संबंध में नीति बनाई गई थी। मृतक बंदियों के आश्रितों को नियमानुसार श्रेणीवार मुआवजे की धनराशि दी जाएगी।
बता दें कि जेल में तमाम कारणों से हर साल बंदियों की मौत हो जाती है। इसमें कुछ आपराधिक घटनाओं के कारण और कुछ सामान्य व बीमारियों के कारण होने वाली मौतें शामिल हैं। लेकिन, अभी तक प्रदेश में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं थी कि इन बंदियों के आश्रितों को किसी प्रकार का मुआवजा दिया जाए। मसलन, यदि जेल में बंद कैदी घर में अकेला कमाने वाला था और उसकी जेल में मौत हो जाती है तो उसके आश्रितों के प्रतिपूर्ति की व्यवस्था नहीं थी। ऐसे में पिछले दिनों सरकार ने इसके लिए नई नीति बनाई थी।
अब बजट में नई मदों में इस मद को भी शामिल किया गया है। जेलों में इस प्रकार की मौत होने पर उनके आश्रितों को मुआवजे के लिए एक करोड़ रुपये का बजट दिया गया है। इस बजट को कैदी की श्रेणी के आधार पर नियमानुसार दिया जाएगा। यानी विचाराधीन कैदी, सजायाफ्ता कैदी, आपराधिक मौत, सामान्य मौत, बीमारी के कारण हुई मौत आदि को अलग-अलग श्रेणियों में रखा जाएगा। इसके आधार पर ही उन्हें एक लाख रुपये से लेकर पांच या उससे अधिक दिया जाएगा। हालांकि, इससे पहले मौत किस कारण से और किन परिस्थितियों में हुई इस बात की जांच की जाएगी।
किमाड़ी क्षेत्र में बच्चे को मारने वाले गुलदार को आदमखोर घोषित कर करते हुए गोली मारने के आदेश दिए गए हैं। घटना के अगले दिन सोमवार को मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक समीर सिन्हा की ओर से आदेश जारी किए गए हैं। इसके साथ ही क्षेत्र में गुलदार को पकड़ने के लिए आठ पिंजरे और 12 कैमरा ट्रैप भी लगाए गए हैं। गुलदार दिखने पर पहले उसे ट्रेंकुलाइज किया जाएगा और फिर आवश्यकता पड़ने पर गोली मार दी जाएगी।
बता दें कि रविवार शाम करीब आठ बजे गलज्वाड़ी वन बीट से सटी मराड़ी गुर्जर बस्ती में गुलदार ने मीर हमजा के 10 वर्षीय बेटा डेरे से बाहर लघुशंका करने के लिए गया था। इस दौरान झाड़ियों में घात लगाकर बैठे गुलदार ने उस पर हमला कर दिया। चीखने पर बच्चे के पिता मीर हमजा अन्य ग्रामीण बाहर आए और गुलदार के जबड़े से बच्चे को छुड़ाने का प्रयास किया। भीड़ के पहुंचने पर गुलदार बच्चे को छोड़कर जंगल की ओर भाग गया। बुरी तरह घायल बच्चे को जब तक अस्पताल ले जाया जाता उसने दम तोड़ दिया। सूचना मिलने पर वन विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची, जिन्हें स्थानीय निवासियों के विरोध का सामना करना पड़ा।
स्थानीय निवासियों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। साथ ही पुलिस को शव ले जाने से भी रोका। हालांकि, बाद में पुलिस ने बस्तीवासियों को शांत कराया और शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाया गया। इधर, वन विभाग और पुलिस की टीम भी देर रात तक क्षेत्र के आसपास कांबिंग की। प्रभागीय वनाधिकारी देहरादून नितीशमणि त्रिपाठी ने बताया कि सोमवार को भी क्षेत्र में सुबह से ही गश्त की जा रही है। तीन शिफ्ट में वन विभाग की तीन टीमें गुलदार की तलाश में जुटी हैं। इसके बाद मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक समीर सिन्हा ने गुलदार को आदमखोर घोषित करते हुए गोली मारने के आदेश दिए हैं।
मलेथा में गुलदार को मारने के मामले की जांच के आदेश-
टिहरी जिले के कीर्ति नगर ब्लॉक के मलेथा गांव में गुलदार को मारने के मामले में प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव डा. समीर सिन्हा ने चीफ गढ़वाल को जांच के आदेश दिए हैं। कहा, गुलदार ने किन परिस्थितियों में ग्रामीणों पर हमला किया। इन सभी पहलुओं की जांच की जाए।
वन विभाग की टीम ने 23 फरवरी को गुलदार को मार गिराया था। वन विभाग की ओर से बताया गया कि यह गुलदार दो दिन में नौ लोगों पर हमला कर चुका था। इनमें पांच महिलाएं और चार वनकर्मी शामिल थे। वन विभाग की ओर से कहा गया कि गुलदार को आत्मरक्षा में मारा गया, जबकि सोशल मीडिया में गुलदार को मारने का जो वीडियो वायरल हो रहा, उसमें आत्म रक्षा वाली बात सामने नहीं आ रही है।
ऐसे में कुछ लोगों का कहना है कि गुलदार को मारने के बजाए उसे ट्रेंकुलाइज किया जा सकता था। उधर, विधायक विनोद कंडारी का कहना है कि गुलदार को जनहित में मारा गया। गुलदार क्षेत्र में कई लोगों को घायल कर चुका था।
उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में आज मंगलवार को भी हल्की बारिश के साथ बर्फबारी होने के आसार हैं। मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से जारी पूर्वानुमान के अनुसार उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिले में बिजली चमकने और गर्जन के साथ बारिश होने के आसार हैं।
जबकि, इन जिलों के तीन हजार मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी होने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पर्वतीय जिलों में मौसम बदलने के असर मैदानी इलाकों में भी देखने को मिलेगा।
देहरादून में 27 फरवरी को आंशिक रूप से लेकर आमतौर पर बादल छाए रहेंगे। अधिकतम तापमान 24 और न्यूनतम 11 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है।
उत्तराखंड की राजनीति में गैरसैंण हमेशा एक बड़ा मुद्दा रहा है बावजूद इसके लिए धामी सरकार ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण को लेकर काफी उदासीन दिखाई दे रही है ये बात ऐसे ही नहीं कही जा रही बल्कि इसके पीछे की बड़ी वजह भी है. जिन पहाड़ों की जनता वहां के विधायकों को जीताकर सदन भेजती है वही विधायक चुनाव जीतने के बाद देहरादून छोड़कर पहाड़ नहीं चढ़ना चाहते। क्योंकि उनको वहां ठंड लगती है.
उत्तराखंड सरकार का बजट सत्र देहरादून में शुरू हो चुका है. बजट सत्र शुरू होने से पहले इसके लिए सरकार ने विधायकों से राय मांगी थी कि बजट सत्र गैरसैंण में होना चाहिए या फिर देहरादून में इसी विषय को लेकर लगभग 36 विधायकों ने एक पत्र सरकार को सौंपा है विधायकों ने सत्र देहरादून में कराए जाने की बात कही. विधायकों का तर्क था कि गैरसैंण में काफी सर्दी है ऐसे में वहां सत्र करने में काफी मुश्किल होगी इसके बाद सरकार ने अपनी कैबिनेट में यह फैसला लिया कि सत्र इस बार देहरादून में होगा।
क्या कहा हरीश रावत ने-
वहीं सत्र देहरादून में कराए जाने को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता हरीश रावत का कहना है कि ऐसे विधायकों को हिमालय राज्यों से चले जाना चाहिए जिन्हें यहां पर ठंड लगती है खास बात यह है कि चिट्ठी लिखने वाले विधायकों में छह विधायक कांग्रेस के भी शामिल है तो वहीं एक बसपा और दो निर्दलीय विधायक भी शामिल है, इन विधायकों के पत्र के आधार पर ही सत्र देहरादून में कराया जा रहा है वरना ये सत्र इस बार उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में होना था इसको लेकर पूर्व सीएम और कांग्रेस के नेता हरीश रावत ने साफ कहा है कि विधायकों की चिट्ठी से क्या लेना देना सरकार को खुद फैसला करना चाहिए और सत्र गैरसैंण में करना चाहिए ये सरकार की विफलता है।
गांधी पार्क में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एक घंटे का सांकेतिक मौन व्रत रखा-
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ गांधी पार्क में एक घंटे का सांकेतिक मौन व्रत रखा. मौन व्रत के समापन पर उपस्थित सभी कार्यकर्ताओं ने रघुपति राघव राजा राम भजन गाकर धामी सरकार की सद्बुद्धि के लिए प्रार्थना की उन्होंने कहा कि हिमालयी राज्य की अवधारणा के साथ बने राज्य की सरकार को गैरसैंण में ठंड लग रही है.
रावत ने कहा कि यह उत्तराखंड का दुर्भाग्य ही है की यहां के जनप्रतिनिधियों को कुछ ज्यादा ही ठंड लगती है उन्होंने बजट सत्र की अवधि को लेकर भी सवाल उठाए और कहा की प्रचंड बहुमत और डबल इंजन के 7 साल बाद भी प्रदेश सरकार यदि गैरसैंण में कर्मचारियों, पुलिस कर्मियों एवं पत्रकारों के लिए मूलभूत व्यवस्थाएं तक जुटा पाने में समर्थ नहीं रही तो दोष किसको दिया जाए. आम आदमी पार्टी के नेता ने भी अर्धनग्न होकर सरकार के इस फैसले के खिलाफ देहरादून विधानसभा के बाहर प्रदर्शन किया। और कहा कि पहाड़ियों को ठंड नहीं लगती मगर उत्तराखंड के विधायकों ने गैरसैण को लगभग पूरी तरह से गैर बना दिया है।
गैरसैंण में विधानसभा भवन बनाने के लिए करोड़ों रुपया पानी की तरह बहाया गया है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर वहां सब कुछ जीरो है यही कारण है कि सत्र के अलावा कोई विधायक या मंत्री गैरसैंण की तरफ जाने को भी तैयार नहीं होता है गैरसैंण को लेकर वैसे तो सत्ताधारी दल कई दावे करता रहता है, लेकिन सत्र कराने तक में परहेज करने वाली सरकार से इसको लेकर बहुत उम्मीद करना बेमानी है ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित होने के बावजूद गैरसैंण से भराड़ीसैंण तक सिर्फ ठंड के सिवाय कोई सरगर्मी नहीं है सैकड़ों करोड़ के भव्य विधानमंडल भवन और आलीशान आवासीय परिसरों के निर्माण से आगे वहां सब कुछ ठहर सा गया है। 12 महीनों में सिर्फ चंद दिनों के लिए गर्मियों की यह राजधानी तभी गुलजार दिखती है जब सरकार यहां सत्र कराने पहुंचती है। सरकार के जाते ही फिर लंबा सन्नाटा पसर जाता है,,ऐसा लगता है मानो उत्तराखंड के माननीय विधायक यहां सिर्फ गर्मियों की छुटियाँ बिताने जाते हैं।
भराड़ीसैंण में विधानसभा सत्र का आयोजन होते कई वर्ष हो चुके हैं, लेकिन सरकारें वहां कभी व्यवस्थाएं नहीं बना पाईं। इन्हीं बदइंतजामी के बहाने अब विधायकों से लेकर अफसर तक वहां जाने से परहेज कर रहे हैं सिर्फ चुनाव के दौरान राजनीतिक पार्टियां गैरसैंण को वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करती रही हैं 2020 में त्रिवेंद्र सरकार ने गैरसैंण को प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया. राजधानी बने हुए तीन वर्ष का वक्त हो गया लेकिन इन तीन सालों में गैरसैंण में विकास के नाम पर कितने बदलाव हुए यह सवाल आज भी बना है, लेकिन जब हमारे माननीयों को ही गैरसैण में ठंड लग रही हो तो इसके विकास की उम्मीद भी करना बेमानी है।
आज विधानसभा का बजट सत्र का पहला दिन है। राज्यपाल के अभिभाषण के साथ सदन में सत्र की शुरुआत हुई। राज्यपाल के अभिभाषण में सरकार के वर्ष 2025 तक उत्तराखंड को देश का श्रेष्ठ व सशक्त राज्य बनाने का रोडमैप दिखा।
विधानसभा का बजट सत्र आज यानी 26 फरवरी से 1 मार्च तक चलेगा। सोमवार को सुबह 11 बजे से विस का बजट सत्र शुरू हुआ। इसके बाद राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) का अभिभाषण शुरू हुआ।
इस दौरान राज्यपाल ने कहा कि विकसित भारत के संकल्प में विकसित उत्तराखंड परिकल्पना नहीं विश्वास है। प्रदेश की तरक्की में अहम योगदान देने वालों का आभार जताते हुए उन्होंने कहा कि विगत वित्तीय वर्ष 2023-24 में कई उपलब्धि हासिल हुई है। हमारा प्रदेश सर्वश्रेष्ठ राज्यों की श्रेणी में खड़ा होगा। भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की कड़ी में सशक्त उत्तराखंड @ 2025 से कई आयाम हासिल किए गए।
महिलाओं को समान अधिकार दिए गए- राज्यपाल
राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखंड विधानसभा ने राज्य के सभी नागरिकों को समान अधिकार देने वाली समान नागरिक संहिता को पास करके देश का पहला राज्य बना दिया है। अब सभी धर्म-समुदायों की महिलाओं को समान अधिकार दिए गए।
अपने अभिभाषण में राज्यपाल ने कहा कि थाना स्तर पर महिलाओं को सुरक्षित माहौल देने के लिए महिला डेस्क स्थापित है। पुलिस ने महिलाओं को कानूनी मदद के लिए टोल फ्री नम्बर जारी किया है। जेल विकास बोर्ड का गठन किया गया है। वहीं जी 20 की तीन बैठक से राज्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का सफल आयोजन किया गया।
राज्यपाल ने कहा कि राज्य में इज ऑफ डूइंग के साथ ही पीस ऑफ डूइंग का माहौल है। यूआईआईडीबी का गठन किया गया। आगामी पांच वर्ष में उत्तराखंड को देश के अग्रणी राज्य बनाने के लिए सशक्त उत्तराखंड पर काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि 1300 कानून चिन्हित करके 400 से ज्यादा का विलोपन किया जा चुका है।
उन्होंने बताया कि सीएम कॉन्क्लेव के एजेंडा बिंदु के अनुरूप, केंद्र व राज्यों की 12 विभागों की 20 योजनाओं का मूल्यांकन कराया जा रहा है। मानसखंड मंदिर माला मिशन के तहत 48 पुराने मंदिरों का चिन्हित किया गया है। पहले चरण में 16 मंदिरों के पुनरुद्धार किया जा रहा है। इसके अलावा बदरीनाथ धाम को स्मार्ट स्पिरिचुअल करने की दिशा में सरकार काम कर रही है।
टिहरी में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर अपणु स्कूल अपणु प्रमाण शुरू किया गया है। जिसमें जरूरी प्रमाणपत्र स्कूल में ही बन रहे हैं। विद्या समीक्षा केंद्र स्थापित करने वाला उत्तराखंड देश का तीसरा राज्य बन गया है। अपणी सरकार के तहत डोर स्टेप डिलीवरी देहरादून नगर निगम के 100 वार्डों में चलाई जा रही है। जल्दी ही अन्य निकायों में इसे लागू किया जाएगा। प्रदेश में 12 इको टूरिज्म गंतव्यों को तैयार किया जा रहा है। 13 हेलिपैड तैयार हो चुके हैं। सात हेलीपोर्ट बनाने पर काम चल रहा है। जो पीपीपी मोड़ पर बनेंगे।
विधायकों की ओर से मिले 300 से अधिक प्रश्न-
पहले दिन अभिभाषण के अलावा अन्य कोई विधायी कार्य नहीं होंगे। राज्यपाल के अभिभाषण के बाद सदन की कार्यवाही स्थगित हो जाएगी। भोजनावकाश के बाद तीन बजे से फिर से सदन चलेगा। सत्र के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली है। विधायकों की ओर से 300 से अधिक प्रश्न मिले हैं। रविवार देर रात विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण के यमुना कॉलोनी स्थित आवास पर कार्यमंत्रणा समिति की बैठक हुई, जिसमें एक मार्च तक सदन संचालित करने के लिए एजेंडा तय किया गया। बैठक में संसदीय कार्यमंत्री प्रेमचंद अग्रवाल, विधायक खजना दास व उमेश शर्मा मौजूद रहे। विपक्ष की ओर से नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और कांग्रेस विधायक प्रीतम सिंह ने कार्यमंत्रणा से इस्तीफा दे रखा है, वह कार्यमंत्रणा में शामिल नहीं हुए।
27 फरवरी को होगा बजट पेश –
प्रदेश सरकार 27 फरवरी को बजट पेश करेगी। हालांकि, कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में तय किया गया कि बजट 27 को सदन में लाया जाएगा। 28 को राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव लाया जाएगा। 29 को विभागवार अनुदान मांगों पर चर्चा होगी, जबकि एक मार्च को बजट पारित किया जाएगा। सरकार की ओर से वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए 90 हजार करोड़ रुपये का अनुमानित बजट लाने की संभावना है। जिसमें सरकार का फोकस सशक्त उत्तराखंड का संकल्प रहेगा। इसके अलावा महिलाओं, युवाओं के लिए स्वरोजगार, किसानों के कल्याण, शिक्षा, स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकार नई योजनाओं की घोषणा कर सकती है।
कार्यमंत्रणा बैठक की कोई सूचना नहीं-
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य का कहना है कि पहले ही कार्यमंत्रणा समिति से इस्तीफा दे दिया गया है, जिससे बैठक में जाने का कोई औचित्य नहीं है, लेकिन प्रदेश सरकार की तरफ से भी किसी तरह की कोई पहल नहीं की गई और न ही विधानसभा से बैठक की सूचना मिली है। संसदीय कार्य मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने फोन कर इतना जरूर कहा कि विपक्ष को कार्यमंत्रणा बैठक में आना चाहिए।
पुलिस ने हल्द्वानी हिंसा के मोस्ट वांटेड अब्दुल मलिक को उपद्रव के 81 आरोपियों से अलग रखा है।मलिक को शनिवार देर रात नैनीताल जेल में दाखिल किया गया। मलिक को छोड़कर उपद्रव के सभी आरोपियों को हल्द्वानी उप कारागार में रखा गया है।
लाइन नंबर 8 बनभूलपुरा निवासी अब्दुल मलिक को पुलिस ने शनिवार को दिल्ली से गिरफ्तार किया था। मलिक आठ फरवरी को बनभूलपुरा में हुए उपद्रव के पहले से ही फरार चल रहा था। इसके बाद इस मामले के आरोपी 81 लोगों को गिरफ्तार किया गया और सभी को उप कारागार हल्द्वानी में रखा गया। उम्मीद जताई जा रही थी कि मलिक को भी हल्द्वानी में ही अन्य उपद्रवियों के साथ रखा जाएगा लेकिन ऐसा हुआ नहीं। गिरफ्तारी और कोर्ट में पेश करने के बाद अब्दुल मलिक को पुलिस ने शनिवार रात जिला जेल नैनीताल में दाखिल किया। मलिक को वहां बैरक नंबर एक में रखा गया है।
अब्दुल मलिक को सुरक्षित बैरक में रखा गया है। बैरक में लगे सीसीटीवी से भी लगातार निगरानी की जा रही है। जो भोजन अन्य बंदी व कैदियों को दिया जा रहा है, वही मलिक को भी दिया गया।
-संजीव ह्यांकी, जेल अधीक्षक नैनीताल
बता दें कि, पुलिस अब्दुल मलिक को पूछताछ के लिए जल्द रिमांड पर लेगी। इसके लिए पुलिस जल्द ही कोर्ट में अर्जी दायर कर सकती है। फिलहाल मलिक को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में नैनीताल जेल भेजा गया है।पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद मलिक से शनिवार को पांच से सात घंटे पूछताछ की थी। मलिक से अभी केस में कई चीजें पूछी जानी है। इसमें मलिक की संपत्ति, मलिक घटना के दिन कहां था, क्या उसने उपद्रव के लिए फंडिंग तो नहीं की, लोगों को उसने कैसे भड़काया आदि सवाल के जवाब से पुलिस काफी दूर है।
पुलिस सूत्र बताते हैं कि सोमवार या मंगलवार को पुलिस कोर्ट जा सकती है। कोर्ट से उसे पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया जाएगा। एसएसपी प्रहलाद नारायण मीणा का कहना है कि मलिक से पूछताछ में जो बातें सामने आई थी, पुलिस उस दिशा में काम कर रही है। जरूरत पड़ने पर दोबारा मलिक को पूछताछ के लिए रिमांड में लिया जा सकता है।
पाखरो रेंज घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग प्रकरण से संबंधित पूर्व वन मंत्री हरक सिंह रावत समेत अन्य लोगों को ईडी ने अब समन भेजे हैं। ईडी ने हरक सिंह रावत को 29 फरवरी को पूछताछ के लिए अपने कार्यालय बुलाया है। इसके अलावा अन्य को अलग-अलग तिथियों में उपस्थित होने के लिए कहा गया है।
ईडी के छापे में कई जगहों से एक करोड़ रुपये से अधिक का कैश और 80 लाख रुपये से अधिक के जेवर बरामद हुए थे। ईडी ने पिछले दिनों हरक सिंह रावत, आईएफएस अफसर सुशांत पटनायक आदि के यहां छापे मारे थे। इस छापे में पटनायक के घर पर इतना कैश बरामद हुआ था कि वहां पर नोट गिनने के लिए मशीन भी मंगाई गई थी।
इसके अलावा पूर्व डीएफओ किशनचंद व अन्य अफसरों के घर भी कैश व गहने ईडी ने जब्त किए थे। इसी क्रम में ईडी ने रावत की करीबी लक्ष्मी राणा के लॉकर खुलवाकर वहां से 45 लाख रुपये के जेवर बरामद किए थे। इस कार्रवाई में ईडी ने करीब 80 करोड़ रुपये के जमीनों के कागजात जब्त किए। साथ ही छह लॉकर को भी फ्रीज कराया था।
ईडी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत जांच कर रही है। अब ईडी की ओर से इन सभी को समन भेजकर पूछताछ के लिए अपने कार्यालय बुलाया है। ईडी इस कैश और जमीन व सोने के जेवरों के संबंध में पूछताछ करेगी। सूत्रों के मुताबिक, ईडी को पटनायक के घर से कई लिफाफे भी अफसरों के नाम के मिले थे।
उन्हें भी ईडी जल्द समन भेजकर पूछताछ के लिए बुला सकती है। ईडी की इस कार्रवाई से घपले के वक्त तैनात रहे सभी अधिकारियों और नेताओं के खेमे में खलबली मची हुई है। सभी अपने-अपने हिसाब से ईडी की इस कार्रवाई से पार पाने का प्रयास कर रहे हैं।
पांच जिलों में नए साल से नई मेट्रो शराब बिकेगी। इस नई शराब को विदेशी मदिरा की दुकानों से बेचा जा सकेगा। उत्तराखंड गढ़वाल के इन पांचों जिलों में देसी शराब की बिक्री नहीं होती है। ऐसे में 40 प्रतिशत तीव्रता वाली इस शराब को देसी और विदेशी शराब के बीच का उत्पाद माना जा रहा है।
इस शराब का निर्माण प्रदेश की डिस्टीलरियों में ही किया जा सकेगा। इसके लिए 31 मार्च से पहले राजस्व समेत विभिन्न नियम कायदे तय कर दिए जाएंगे। गौरतलब है कि गढ़वाल के उत्तरकाशी, टिहरी, रुद्रप्रयाग, पौड़ी और चमोली में देसी शराब की बिक्री नहीं होती है। इन जगहों के लिए अब नई आबकारी नीति में नई तरह की शराब की बिक्री की व्यवस्था की गई है।
इस शराब का नाम मेट्रो होगा। बता दें कि भारत निर्मित अंग्रेजी शराब की तीव्रता 42.8 होती है। जबकि, देसी शराब 36 और 25 प्रतिशत की तीव्रता की होती है। लेकिन, मेट्रो की तीव्रता 40 प्रतिशत होगी। यानी इसमें एल्कोहल की मात्रा 40 प्रतिशत होगी है। ऐसे में लंबे समय से इन जनपदों में देसी शराब की बिक्री न होने के चलते इसे देसी का ही विकल्प माना जा रहा है। हालांकि, इसके लिए अलग से ठेके नहीं खोले जाएंगे। इसे विदेशी मदिरा दुकानों से ही खरीदा जा सकेगा।
देसी शराब की दुकानों पर समुद्र आयातित बीयर की बिक्री की अनुमति नहीं-
आगामी 31 मार्च मेट्रो शराब की आपूर्ति दर, देय एमजीडी, एक्साइज ड्यूटी, थोक लाइसेंस संबंधी नियम काय तय कर दिए जाएंगे। मेट्रो शराब फलों और वनस्पतियों के स्वाद से युक्त उच्च गुणवत्ता युक्त स्प्रिट से प्रदेश की डिस्टीलरियों में ही बनेगी। इसके अलावा भी नई आबकारी नीति में कई तरह की नई व्यवस्थाएं की गई हैं। देसी शराब की दुकानों पर समुद्र आयातित बीयर की बिक्री की अनुमति नहीं होगी। हालांकि, इन दुकानों से देश में निर्मित बीयर को बेचा जा सकेगा।
बीयर हो जाएगी महंगी-
नए वित्तीय वर्ष से बीयर महंगी होने जा रही है। इस बार बीयर को अधिभार की परिधि में लाया गया है। इसके साथ ही इस पर हैंडलिंग चार्ज भी लगाया गया है। इससे माना जा रहा है कि सभी तरह की बीयर पहले से काफी महंगी हो जाएगी। इसके साथ ही शराब के दामों पर भी इस बार असर पड़ेगा। बताया जा रहा है कि नई व्यवस्थाओं से प्रदेश में शराब पहले से अधिक महंगी हो जाएगी। नशा विरोधी प्रचार प्रसार के लिए इस बार एक करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है।
कहीं भी हो सकेगा शराब का परिवहन-
दुकानदार अपनी शराब को जिले और प्रदेश में कहीं भी ले जा सकते हैं। इसके लिए जिले में यदि किसी दूसरी दुकान पर ले जाना है तो 50 रुपये प्रति पेटी शुल्क देना होगा। जबकि, जिले से बाहर ले जाने के लिए इस शुल्क को 100 रुपये किया गया है। परिवहन के लिए आबकारी आयुक्त से अनुमति ली जाएगी। हालांकि, इस परिवहन की ओर से इसको तभी किया जा सकेगा जब राजस्व की हानि न होने की गारंटी दी जाए।
दूसरा विभाग नहीं करेगा दुकानों की चेकिंग
दरअसल, विभिन्न तरह की शिकायतों पर अन्य विभाग भी शराब के ठेकों पर चेकिंग कर सकते हैं। मसलन टैक्स, पुलिस आदि। लेकिन, अब इसकी अनुमति शर्तों के साथ दी जाएगी। इसके लिए 48 घंटे पहले जिलाधिकारी से अनुमति ली जाएगी। इसके बाद ही चेकिंग की जा सकती है। ऐसे में माना यह भी जा रहा है कि यदि अनियमितताओं की शिकायत आज है तो दो दिन बाद वह रहेंगी या नहीं इसकी कोई गारंटी नहीं।
Uttarakhand Weather: उत्तराखंड में मौसम का मिजाज बदला रहेगा डीआरडीओ के रक्षा भू-सूचना विज्ञान अनुसंधान प्रतिष्ठान ने प्रदेश के कई जिलों उत्तरकाशी सहित रुद्रप्रयाग, चमोली, पिथौरागढ़ और बागेश्वर में हिमस्खलन की भी चेतावनी दी है।
हालांकि देहरादून में आज हलकी धूप खिली हुई है लेकिन ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम विभाग ने आज बर्फ़बारी के आसार बताये हैं, वहीँ मैदानी इलाकों में भी मौसम शुष्क बना रहेगा।
जानिए आज कहां कैसा रहेगा मौसम-
मसूरी, धनोल्टी और कैम्पटी में मौसम साफ, चटक धूप खिली।
उत्तराखंड में आज सोमवार शाम को मौसम ने फिर करवट ली। पहाड़ में दूसरे दिन भी मौसम खराब रहा और चारों धामों में बर्फबारी हुई। वहीं हेमकुंड साहिब, फूलों की घाटी, औली, नंदा घुंघटी, रुद्रनाथ, लाल माटी, नीती व माणा घाटी में बर्फ गिरी जबकि निचले क्षेत्रों में बारिश हुई। बदरीनाथ में आधा फीट, केदारनाथ में एक फीट, औली में दो इंच, गंगोत्री-यमुनोत्री में छह इंच ताजी बर्फ जमी। जबकि निचले क्षेत्रों में बारिश हुई जिससे ठंड लौट आई है।
बदरीनाथ धाम में भी हुई बर्फबारी-
बदरीनाथ धाम में दिनभर रुक-रुककर बर्फबारी हुई जो देर शाम तक जारी रही। बर्फबारी से हनुमान चट्टी से बदरीनाथ धाम तक हाईवे फिसलन भरा हो गया है। हाईवे पर करीब आधा फीट तक बर्फ जम गई है। गोपेश्वर-मंडल-चोपता और जोशीमठ-मलारी हाईवे पर भी बर्फ जम गई है।
वहीं जिले के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पर्यटन ग्राम रामणी, घूनी, पडेरगांव, ईराणी, पाणा, झींझी आदि गांवों में भी बर्फबारी हुई लेकिन बर्फ जल्दी पिघल गई। बाजारों में ठंड से बचने के लिए दुकानदारों व राहगीरों ने अलाव का सहारा लिया। पोखरी, नंदानगर, पीपलकोटी, नंदप्रयाग आदि क्षेत्रों में भी दिनभर रुक-रुक कर बारिश हुई।
हर्षिल घाटी में भी खूब बर्फबारी-
गंगोत्री और यमुनोत्री धाम, हर्षिल घाटी और अन्य ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी हुई। हालांकि अभी तक सभी सड़कों पर आवाजाही सुचारु है। पिछले दो दिन से जिले में गर्मी का अहसास होने लगा था।
अब बर्फबारी हुई तो ठंड लौट आई। वहीं आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल ने बताया कि बर्फबारी को देखते हुए सभी विभाग अलर्ट मोड पर हैं। सभी बर्फीले इलाकों में विभागों से सड़क, बिजली, पानी और राशन की आपूर्ति की जानकारी ली जा रही है।
सोमवार को केदारनाथ धाम सहित मद्महेश्वर, तुंगनाथ, चंद्रशिला आदि क्षेत्रों में बर्फबारी हुई जबकि पर्यटक स्थल चोपता दुगलविट्टा में भी हल्की बर्फ गिरी।