Category Archive : टिहरी गढ़वाल

कई हाइड्रो प्रोजेक्ट लगाने के बाद भी बिजली के लिए क्यों तरस रहा उत्तराखंड? अब कोर्ट की शरण में लाखों के बोझ तले दबे लोग.

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प्रदेश में लगातार बढ़ती बिजली की मांग के इलाज के तौर पर हाइड्रो व सोलर के अलावा दूसरे इंतजाम भी अभी तक कारगर साबित नहीं हो पाए। आजकल उत्तराखंड प्रदेश में बिजली की समस्या सभी जगह देखने को मिल रही है उत्तराखंड में लगातार बिजली की मांग बढ़ रही है लेकिन आपूर्ति सरकार पूरी नहीं कर पा रही है. हमारे प्रदेश के नेता इस प्रदेश को ऊर्जा प्रदेश कहते हैं और इसी ऊर्जा प्रदेश में जल विद्युत परियोजनाओं की भरमार है लेकिन इस प्रदेश का दुर्भाग्य कहें या सत्ता पर बैठने वाली पार्टियों की सोच कि जिस प्रदेश में नदियों के सीने चीर कर इतने हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट लग रहे हैं लेकिन जब इस प्रदेश में बिजली की आपूर्ति की बात होती है तो इस ऊर्जा प्रदेश के लोगों को ही पूरी बिजली नहीं मिल पाती है.

 

प्रदेश में लगातार बढ़ती बिजली की मांग के इलाज के तौर पर हाइड्रो व सोलर के अलावा दूसरे इंतजाम भी अभी तक कारगर साबित नहीं हो पाए। त्रिवेंद्र सरकार में शुरू हुई पिरूल से बिजली योजना ठप हो चुकी है। प्लांट बंद हो चुके हैं। लाखों के कर्ज तले दबे प्लांट लगाने वाले लोग अब न्याय के लिए हाईकोर्ट पहुंच गए हैं।

दरअसल, त्रिवेंद्र सरकार ने प्रदेश में चीड़ के पिरूल से हर साल लगने वाली आग को ऊर्जा में बदलने की योजना शुरू की। इसके तहत पिरूल से विद्युत उत्पादन के लिए 21 प्लांट उरेडा के माध्यम से आवंटित किए गए। इनमें से केवल 6 प्लांट प्रदेश में गढ़वाल व कुमाऊं मंडल में स्थापित हुए।

अब प्लांट संचालक पहुंचे हाईकोर्ट-

शुरुआत में बिजली उत्पादन होने लगा लेकिन देखते ही देखते ये अटकता चला गया। हालात ये हो गए कि तीन साल के भीतर ही सभी छह प्लांट बंद हो गए। इनसे विद्युत उत्पादन रुक चुका है। प्लांट लगाने वाले लोगों पर लाखों रुपये का कर्ज था, जिसकी भरपाई के लिए बैंक नोटिस भेज रहे हैं।

शासन ने इन प्लांट की व्यावहारिकता देखने को जतन किए, लेकिन कोई उत्साहजनक नतीजा नहीं निकल पाया। अब प्लांट संचालक हाईकोर्ट चले गए हैं। उनका आरोप है कि सरकार ने आधी-अधूरी तैयारियों के साथ योजना लांच की थी, जिसका नुकसान उन्हें उठाना पड़ रहा है।

पवन ऊर्जा भी कारगर नहीं-

प्रदेश में वैसे तो पवन की उपलब्धता भरपूर है, लेकिन अभी तक वायु ऊर्जा कारगर नहीं हो पाई। इसके पीछे एक वजह ये भी है कि पवन ऊर्जा से जुड़े उपकरणों को पर्वतीय क्षेत्रों तक पहुंचाना मुश्किल है। वहां कई बार तेज हवाओं में ज्यादा नुकसान की आशंका भी रहती है। लिहाजा, पवन ऊर्जा के क्षेत्र में राज्य कोई काम नहीं कर पाया।

अब इन योजनाओं से बांधी जा रही उम्मीद-

भू-तापीय ऊर्जा-  प्रदेश में अब भू-तापीय ऊर्जा पर फोकस किया जा रहा है। अगर ये प्रयोग सफल होता है तो इससे ऊर्जा जरूरतें पूरी होने में बड़ी मदद मिल सकती है।

पंप स्टोरेज-  इस योजना के तहत टीएचडीसी का 1000 मेगावाट का प्लांट नए साल से शुरू होने जा रहा है। प्रदेश में अन्य जगहों पर भी पंप स्टोरेज प्लांट लगाने के लिए सरकार नीति लेकर आई है। सफल रहा तो कुछ नतीजा निकल सकता है।

 

 

राज्य की सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता 20 हजार मेगावाट आंकी जा चुकी है लेकिन 23 साल में यह 350 मेगावाट से ऊपर नहीं जा पाए. ऐसे में हाइड्रो, गैस या कोयला से बिजली उत्पादन का विकल्प बनने की बात बेमानी ही नजर आ रही है. परियोजनाओं के विफल होने का एक सबसे बड़ा कारण सरकारी सुस्ती है जिन लोगों ने छोटे सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट लगाए हैं, वे या तो समय से ग्रिड से नहीं जोड़े जाते या फिर उनकी मीटरिंग समय से नहीं होती इस वजह से लोग हतोत्साहित होते हैं. देखिये किस तरह से कुछ शानदार और प्रदेश हितकारी योजनाएं सरकारी सुस्ती या राजनीति के चलते प्रदेश में दम तोड़ देती है और इसका खामियाजा भुगतती है प्रदेश की जनता।

Rishikesh: हाईवे से लगे जंगल में मिला 13 दिन से लापता युवती का जला हुआ शव, पुलिस ने प्रेमी को किया गिरफ्तार.

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करीब 13 दिनों से घर से लापता चल रही युवती का जंगल में जला हुआ शव मिला है। पुलिस ने युवती के प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया है। उस पर आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज किया गया है। ढालवाला निवासी विनीता भंडारी (21) चार दिसंबर से लापता थी।

पिता ने थाना मुनि की रेती में गुमशुदगी दर्ज कराई थी। सीसीटीवी फुटेज की जांच के दौरान विनीता चार दिसंबर को 11 बजकर आठ मिनट पर नटराज चौक के पास अकेले देहरादून की ओर जाती देखी गई थी। उसके हाथ में थैला भी था। उसके बाद करीब 11 बजकर 32 मिनट पर विनीता का मोबाइल बंद हो गया था। अंतिम लोकेशन और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस विनीता को इसी क्षेत्र में ढूंढ रही थी। 

पुलिस को नटराज चौक से करीब एक किमी आगे देहरादून रोड पर हाईवे से लगे जंगल में 200 मीटर अंदर अधजला शव मिला। उसकी शिनाख्त के बाद उसके प्रेमी मानीवाला निवासी अर्जुन रावत को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। मामले की जांच की जा रही है।

कलर्स टीवी के सबसे बड़े शो बिग बॉस-17 में सलमान खान के साथ नजर आएंगे उत्तराखंड के ये फेमस यूट्यूबर.

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कलर टीवी पर प्रसारित होने वाले बड़े शो बिग बॉस के 17वें संस्करण में बॉलीवुड स्टार सलमान खान के साथ इस बार देवभूमि उत्तराखंड के युवा बाबू भैया भी दिखाई देंगे. अठूरवाला निवासी अनुराग डोभाल उर्फ बाबू भैया एक मोटो-ब्लॉगर है।

 

बाबू भैया ने मोटो ब्लॉगिंग के क्षेत्र में करिअर वर्ष 2018 में शुरू किया था। उनके यूट्यूब चैनल द यू-के-07 राइडर में 71 लाख से अधिक सब्सक्राइबर हैं, जबकि इंस्टाग्राम में 51 लाख से अधिक फॉलोअर हैं। कलर टीवी पर प्रसारित होने वाले चर्चित रियलिटी शो बिग बॉस से बाबू भैया को काफी समय पहले ऑफर आया था।

इसके बाद वह काफी समय से तैयारी कर रहे थे।बाबू भैया ने बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान के साथ 15 अक्टूबर को बिग बॉस के शो में एंट्री ली है। बिग बॉस-17 में बाबू भैया के अलावा 15 अन्य बड़े-बड़े कलाकार प्रतिभाग कर रहे हैं।

बाबू भैया ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा नैनबाग टिहरी गढ़वाल के अलावा दूधली के प्रसिद्ध स्कूल डीडीएच और श्री गुरु राम राय स्कूल भनियावाला से प्राप्त की है।

डीएवी कॉलेज देहरादून से स्नातक करने के बाद बाबू भैया ने 31 दिसंबर, वर्ष 2017 अपना मोटो ब्लॉगिंग के क्षेत्र में अपना करियर केटीएम बाइक से शुरू किया था। बाबू भैया की माता गृहिणी हैं, जबकि पिता सरकारी स्कूल में गणित के शिक्षक हैं।

लॉकडाउन में अनुराग की नौकरी छूट गई थी। इसके बाद यूट्यूबर बन गए। बताया, शौक-शौक में बनाए वीडियो को अपने यूट्यूब चैनल पर पोस्ट करने लगे।