Day: February 28, 2024

Uttarakhand: गरीबों को साल में 3 गैस सिलेंडर मुफ्त, सस्ती दरों पर मिलेगा नमक, जानिए बजट में और क्या है खास.

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गरीबों को साल में तीन गैस सिलेंडर मुफ्त मिलते रहेंगे तो सस्ती दरों पर नमक भी मिलेगा। बजट में गरीबों के कल्याण से जुड़ी इन योजनाओं के लिए सरकार ने 5658 करोड़ का प्रावधान किया है। इसमें से समाज कल्याण के लिए 2756 करोड़, अनुसूचित जाति कल्याण के लिए 2184 करोड़ और जनजाति कल्याण के लिए 718 करोड़ का प्रावधान शामिल है।

समाज कल्याण के अंतर्गत आठ लाख वृद्धजन, निराश्रित विधवा, दिव्यांग, परित्यक्त निराश्रित महिलाओं आदि की विभिन्न पेंशन योजनाओं के लिए 1783 करोड़ 28 लाख, अन्नपूर्णा योजना के लिए 600 करोड़, ईडब्ल्यूएस आवासों के लिए 93 करोड़, 1,83,419 अंत्योदय कार्डधारकों को साल में तीन गैस सिलेंडर निशुल्क देने के लिए सरकार 55 करोड़ खर्च करेगी।

राज्य आंदोलनकारियों की पेंशन के लिए कार्पस फंड की स्थापना की गई है, जिसके लिए 48 करोड़ का प्रावधान किया गया है। खाद्य सुरक्षा योजना के तहत प्राथमिक व अंत्योदय राशन कार्ड धारकों को सस्ती दरों पर नमक उपलब्ध कराने के लिए सरकार 34 करोड़ 36 लाख खर्च करेगी। राज्य खाद्यान्न योजना के लिए 20 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

स्मार्ट सिटी को 46 करोड़-

स्मार्ट सिटी योजना में 50 प्रतिशत बजट केंद्र और 50 प्रतिशत राज्य खर्च कर रहा है। सरकार ने बजट में स्मार्ट सिटी के लिए 46 करोड़ पांच लाख रुपये का प्रावधान किया है।

योजनाओं की सब्सिडी के लिए 679 करोड़-

सरकार ने विभिन्न विभागों की उन योजनाओं के लिए भी बजट प्रावधान किए हैं, जिन पर सब्सिडी दी जा रही है। सब्सिडी के इस खर्च पर सरकार ने 679 करोड़ 34 लाख का प्रावधान किया है।

 

संकट में हिमाचल की कांग्रेस सरकार, क्या महाराष्ट्र की तरह अब हिमाचल में भी गिरेगी सुक्खू सरकार !

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तीन राज्यों की 15 राज्यसभा सीटों के लिए मंगलवार को मतदान कराए गए जिसमें हिमाचल प्रदेश भी शामिल हैं। प्रदेश की एक सीट के लिए दो उम्मीदवार थे। इसके कारण यहां मतदान कराना पड़ा। कांग्रेस ने अभिषेक मनु सिंघवी को उम्मीदवार बनाया तो भाजपा ने हर्ष महाजन को टिकट दिया। नामांकन के साथ ही राज्य में क्रॉस वोटिंग की आशंकाएं जाहिर की जाने लगी थीं जो सच हुईं। 

इस दौरान सत्ताधारी कांग्रेस के कम से कम कम छह विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की। दोनों उम्मीदवारों को 34-34 वोट मिले। इसके बाद फैसला पर्ची से हुआ। इसमें हर्ष महाजन जीत गए। तीन निर्दलीय विधायकों ने भी भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के इस्तीफे के मांग की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अल्पमत में है। ऐसे में अब राज्य में सियासी संकट खड़ा हो गया है। जून 2022 में महाराष्ट्र में भी ऐसे ही कुछ स्थितियां उत्पन्न हुई थीं जब एमएलसी चुनाव में क्रॉस वोटिंग के बाद उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास आघाडी सरकार गिर गई थी।

हिमाचल प्रदेश में कितनी सीट के लिए मतदान हुए और क्यों? 

दरअसल, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल खत्म हो रहा है। नड्डा इस बार गुजरात से निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। हिमाचल में इस वक्त कांग्रेस सत्ता में है। कांग्रेस ने अभिषेक मनु सिंघवी को अपना उम्मीदवार बनाया। सिंघवी के सामने भाजपा ने हर्ष महाजन को उतारा। हर्ष कांग्रेस से ही भाजपा में आए हैं। 68 सदस्यों वाली राज्य विधानसभा में कांग्रेस के 40 विधायक हैं। भाजपा के 25 विधायक हैं। वहीं, तीन निर्दलीय विधायकों का भी सरकार को समर्थन दे रखा है।राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार की जीत के लिए 35 वोट की जरूरत थी। संख्या बल के हिसाब से कांग्रेस के लिए यह लड़ाई बहुत आसान दिख रही थी। इसके बाद भी भाजपा ने यहां पास पलट दिया। मतदान के नतीजे आए तो दोनों उम्मीदवारों को 34-34 वोट मिले हैं। यानी कांग्रेस और निर्दलीय समेत कुल नौ विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की है।

क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायकों का क्या होगा?

क्रॉस वोटिंग के दावे को लेकर राज्य में सियासी उठापटक शुरू हो चुकी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार के अल्पमत में होने का दावा करने वाली भाजपा क्या सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाएगी। दूसरी ओर नजर कांग्रेस पर भी होगी जिसने कहा है कि राज्यसभा चुनाव से पहले उसने व्हिप जारी किया था।हिमाचल सरकार का सियासी भविष्य क्या है? इस पर हमने लोकसभा के पूर्व महासचिव पीटीडी अचारी से बात की। अचारी ने कहा, ‘राज्यसभा चुनाव के लिए कोई व्हिप नहीं होती है। व्हिप से कोई फायदा नहीं होता। कांग्रेस के विधायकों ने भाजपा के लिए मतदान किया है तो यह मुसीबत है। यदि कांग्रेस के विधायक भाजपा की तरफ चले गए और उसके लिए मतदान किया है तो कांग्रेस का बहुमत कम हो रहा है। यदि ये विधायक भाजपा में शामिल होते हैं तो अयोग्य हो जाएंगे। ऐसे में अभी तो स्थिति अस्थिर है।’

 

क्या क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायक अयोग्य हो सकते हैं?

अचारी ने कहा, ‘यदि नमूने के तौर पर दो-तीन विधायकों को अयोग्य करते हैं तो उसके लिए आधार अलग होता है। जैसे कि विधायक ने अपनी इच्छा से पार्टी छोड़ दी है। इस आधार पर विधायकों को अयोग्य घोषित किया जा सकता है। दूसरी स्थिति में यदि सभी विधायकों के खिलाफ याचिका दाखिल करें तो ऐसा होगा कि कांग्रेस खुद कह रही है कि उसका बहुमत नहीं है। ऐसा कोई भी दल नहीं करेगा। लेकिन अभी मुसीबत है। उप-चुनाव बाद की बात है।’

 

 क्या हिमाचल में सरकार गिर सकती है?

2022 में हुए एमएलसी चुनाव के दौरान कुछ इसी तरह की स्थिति महाराष्ट्र में बनी थी। दरअसल, जून 2022 में महाराष्ट्र में एमएलसी की 10 सीटों पर चुनाव हुए। इसके लिए 11 उम्मीदवार मैदान में थे। महाराष्ट्र विकास अघाड़ी (एमवीए) यानी शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी के गठबंधन ने छह उम्मीदवार उतारे थे तो भाजपा ने पांच। खास बात ये है कि शिवसेना गठबंधन के पास सभी छह उम्मीदवारों को जिताने के लिए पर्याप्त संख्या बल था, लेकिन वह एक सीट हार गई। इन पांच में कांग्रेस को केवल एक सीट मिली और एनसीपी-शिवसेना के खाते में दो-दो सीटें आईं।वहीं, भाजपा के पास केवल चार सीटें जीतने भर की संख्या बल थी, लेकिन पांचवीं सीट भी निकालने में पार्टी सफल रही। एमएलसी चुनाव में बड़े पैमाने पर क्रॉस वोटिंग हुई है। इसके बाद महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री एकनाथ शिंदे के साथ कई विधायक पहले गुजरात फिर असम चले गए। कई दिन चले सियासी ड्रामे के बाद उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। बागी विधायकों के नेता एकनाथ शिंदे भाजपा के समर्थन से मुख्यमंत्री बन गए। अब यह देखना होगा कि हिमाचल के बागी विधायक क्या करते हैं।

 

Uttarakhand: अब जेल में मृतक बंदियों के आश्रितों को मिलेगा मुआवजा, 1 करोड़ रुपये का बजट हुआ मंजूर। 

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जेल में बंदियों की मौत के बाद उनके आश्रितों को अब मुआवजा दिया जाएगा। इसके लिए बजट में नए मद के तहत एक करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रदेश में यह व्यवस्था पहली बार की गई है। पिछले दिनों इस संबंध में नीति बनाई गई थी। मृतक बंदियों के आश्रितों को नियमानुसार श्रेणीवार मुआवजे की धनराशि दी जाएगी।

बता दें कि जेल में तमाम कारणों से हर साल बंदियों की मौत हो जाती है। इसमें कुछ आपराधिक घटनाओं के कारण और कुछ सामान्य व बीमारियों के कारण होने वाली मौतें शामिल हैं। लेकिन, अभी तक प्रदेश में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं थी कि इन बंदियों के आश्रितों को किसी प्रकार का मुआवजा दिया जाए। मसलन, यदि जेल में बंद कैदी घर में अकेला कमाने वाला था और उसकी जेल में मौत हो जाती है तो उसके आश्रितों के प्रतिपूर्ति की व्यवस्था नहीं थी। ऐसे में पिछले दिनों सरकार ने इसके लिए नई नीति बनाई थी।

अब बजट में नई मदों में इस मद को भी शामिल किया गया है। जेलों में इस प्रकार की मौत होने पर उनके आश्रितों को मुआवजे के लिए एक करोड़ रुपये का बजट दिया गया है। इस बजट को कैदी की श्रेणी के आधार पर नियमानुसार दिया जाएगा। यानी विचाराधीन कैदी, सजायाफ्ता कैदी, आपराधिक मौत, सामान्य मौत, बीमारी के कारण हुई मौत आदि को अलग-अलग श्रेणियों में रखा जाएगा। इसके आधार पर ही उन्हें एक लाख रुपये से लेकर पांच या उससे अधिक दिया जाएगा। हालांकि, इससे पहले मौत किस कारण से और किन परिस्थितियों में हुई इस बात की जांच की जाएगी।