

Loksabha Election 2024: लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा के लिए पश्चिम बंगाल खास होता जा रहा है। केंद्रीय मंत्रियों का दौरा लगातार हो रहा है। इस बीच जानकारी मिली है कि इसी महीने 29 तारीख को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह बंगाल के दौरे पर आ सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी 24 दिसंबर को कोलकाता में आ रहे हैं। इसे लेकर आगामी दिनों में एक बार फिर से काफी हलचल देखने को मिल सकती है।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार दिल्ली में हैं और उनकी बातचीत केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से हुई है। सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो 29 को भाजपा की धर्मतल्ला के ब्रिगेड परेड मैदान में होने वाली जनसभा में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह आएंगे।
पांच चुनावी राज्यों में एक राजस्थान में जंग बेहद दिलचस्प मोड़ की तरफ बढ़ रही है यहां भाजपा और कांग्रेस दोनों की बेचैनी बढ़ गयी है क्योंकि राजस्थान की सियासत में दलितों और पिछड़ों की सबसे बड़ी पार्टी माने जाने वाली बहुजन समाज पार्टी यानी BSP की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती की एंट्री होने जा रही है. राजस्थान का इतिहास गवाह है कि जब भी मायावती यहां किसी सीट पर प्रचार के लिए गयी हैं उनमे अधिकतर सीट बसपा जीती है, ऐसे में भाजपा और कांग्रेस के खेमे में सेंध लगने की उम्मीद है, इसका सबसे बड़ा नुकसान कांग्रेस को हो सकता है क्योंकि दलित वोटर राजस्थान में कांग्रेस का मुख्य वोटर भी माना जाता है ऐसे में जिनके दम पर कांग्रेस को सत्ता में वापसी की उम्मीद है,वो वोटर उनसे छिटक सकता है.
ऐसा पहले भी कई बार हुआ है,,ऐसे में जब मुकाबला कांटे का दिखाई दे रहा है तो एक एक सीट दोनों पार्टियों के लिए बड़ा महत्व रखती है,,,पिछली बार के चुनाव में भी बसपा 6 सीटें जीती थी,जबकि एक दर्जन सीटों पर उसके प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहे थे,,राजस्थान में 39 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं ऐसे में मायावती का फोकस इन सीटों पर है ऊपर से जिन नेताओं को टिकट नहीं मिल रहे वो बसपा में शामिल हो रहे हैं. इनमें सबसे अधिक कांग्रेस के विधायक हैं मायावती और अशोक गहलोत के बीच की अदावत जग जाहिर है,,सियासी जानकार मानते हैं कि मायावती गहलोत से बहुत नाराज है क्योकि उन्होंने दो बार उनके जीते विधायकों को कांग्रेस में शामिल कराया,ऐसे में इस बार मायावती ने खुद मोर्चा संभाला है.
मायावती इस बार 40 सीटों पर खुद प्रचार करेंगी,,,इनमें पूर्वी राजस्थान में बसपा का सबसे बड़ा असर है,,यहां बसपा के टिकट पर लड़ने वाला कोई भी उम्मीदवार आसानी से 10 से 15 हजार वोट हासिल कर लेता है, सियासी जानकार ये भी मानते हैं कि बसपा सबसे अधिक डैमेज कांग्रेस को पहुंचाती है,,कुल मिलाकर ये भी कहा जा सकता है कि मायावती अशोक गहलोत की सत्ता वापसी के सपने को तोड़ भी सकती हैं मायावती 5 साल बाद भरतपुर शहर के नदबई कस्बे में आ रही हैं और उनका मकसद 7 विधानसभा सीटों पर 4 लाख एससी वोटो को साधना है. मायावती ने 2018 के विधानसभा चुनावों में नदबई कस्बे में बसपा प्रत्याशी जोगिंदर सिंह अवाना के समर्थन में जनसभा को संबोधित किया था और जोगिंदर सिंह अवाना विजय हुए थे. बसपा पार्टी से विजय होने के बाद जोगिंदर सिंह अवाना कांग्रेस में शामिल हो गए. इस बार 2023 के चुनाव में नदबई विधानसभा से खेमकरण तौली को उम्मीदवार बनाया है. इस जनसभा में जिले की सात विधानसभा क्षेत्रों से बहुजन समाज के कार्यकर्ता व समर्थक बड़ी संख्या में शामिल हुए .

राष्ट्रीय अध्यक्ष सुप्रीमो मायावती की भरतपुर जिले में प्रत्येक विधानसभा चुनाव में जनसभा आयोजित करवाई जाती है, क्योंकि यहां बीएसपी पार्टी को काफी फायदा मिलता है और सात विधानसभा क्षेत्र में से दो या तीन सीटों पर इन्हें विजय हासिल होती है. 2018 के चुनाव में नगर और नदबई विधानसभा क्षेत्र से बसपा को विजय हासिल हुई थी.भरतपुर की सातों विधानसभा सीटों पर एससी वोट बड़ी संख्या में हैं. यही वजह है कि सुप्रीमो मायावती भरतपुर में जनसभा को संबोधित करने जा रही हैं. जनसभा आयोजित होने से जिले की कई विधानसभा सीटों का गणित बदलेगा.
क्या राजस्थान में किंग मेकर की भूमिका में आ सकती हैं मायावती-
बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती 17 से 20 नवंबर तक राजस्थान के दौरे पर रहेंगी, जहां वे बसपा प्रत्याशियों के समर्थन में आम सभाएं और रैलियां करेंगी. मायावती अपने चार दिवसीय राजस्थान दौरे के दौरान 20 नवंबर को लाडनूं आएंगी. वे यहां बसपा प्रत्याशी नियाज मोहम्मद खान के समर्थन में जनसभा को संबोधित करेंगी. बहुजन समाज पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष भगवान सिंह बाबा के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती राज्य में 17 से 20 नवम्बर तक बसपा प्रत्याशियों के समर्थन में 8 जनसभाओं को सम्बोधित करेंगी.
यूपी के आगरा से राजस्थान के भरतपुर व धौलपुर के 50 से अधिक गांवों की सीमाएं जुड़ीं हैं. इसलिए आगरा के कई बसपा नेता राजस्थान चुनाव में विधानसभा क्षेत्रों के चुनाव प्रबंधन में शामिल हैं. इसका भी फायदा उनको मिल सकता है, बता दें कि राजस्थान में 25 नवंबर को 200 सीटों के लिए मतदान होगा, ऐसे में जब बसपा पहले ही ऐलान कर चुकी है कि इस बार वो सरकार में शामिल होगी तो मतलब साफ़ है अगर बसपा राजस्थान में कुछ सीट जीत जाती है और किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है तो ऐसे में मायावती किंग मेकर की भूमिका में आ सकती हैं और अगर ऐसा हुआ तो निश्चित तौर पर 2024 चुनाव में भी मायावती अहम भूमिका में आ सकती हैं क्योंकि उन्होंने अभी तक अपने पत्ते साफ़ नहीं किये हैं कि 2024 में उनका रुख किस ओर होगा। बहरहाल आने वाला समय साफ़ कर देगा कि मायावती राजस्थान में किसको डेंट मारने जा रही है.
भारतीय क्रिकेट टीम विश्व कप के फाइनल में पहुंच गई है। उसने बुधवार (15 नवंबर) को खेले गए सेमीफाइनल मुकाबले में न्यूजीलैंड को 70 रन से हरा दिया। मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में मिली जीत के बाद भारतीय टीम फाइनल में पहुंच गई है। 19 नवंबर को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में उसका मुकाबला ऑस्ट्रेलिया या दक्षिण अफ्रीका से होगा। वह भारत के मौजूदा कोच राहुल द्रविड़ का आखिरी मैच हो सकता है।

कट ऑफ डेट क्यों बढ़ाई गयी –
‘पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग के पास संबंधित अथॉरिटी या नियुक्ति अथॉरिटी द्वारा इस संबंध में तय अंतिम तिथि को बढ़ाने का आग्रह किया गया था। विभिन्न विभागों की तरफ से मिले आग्रह पत्रों पर विचार करने के बाद ‘पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग’ द्वारा अब इस संबंध में फाइनल निर्णय लेने की कट ऑफ डेट को बढ़ाकर 30 नवंबर कर दिया गया है। केंद्र सरकार ने केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1972 (अब 2021) के तहत ऐसे कर्मचारियों को एनपीएस से ओपीएस में आने का विकल्प प्रदान किया था, जो 22 दिसंबर, 2003 से पहले विज्ञापित या अधिसूचित पदों के लिए केंद्र सरकार की सेवाओं में शामिल हुए थे। ऐसे कर्मियों को 31 अगस्त तक किसी एक विकल्प का चयन करने की मोहलत दी गई थी। ये आदेश मार्च 2023 में जारी किए गए थे। कुछ कर्मचारी ऐसे भी थे जो उक्त आदेश से पहले रिटायर हो गए। पिछले दिनों उन्होंने पूछा था कि क्या उन्हें भी अपनी सेवानिवृत्ति के पश्चात एनपीएस से ओपीएस में शामिल होने का विकल्प मिलेगा। सरकार ने कहा, वे भी ओपीएस में आ सकते हैं। बशर्ते उन्हें कुछ शर्तें पूरी करनी होंगी।
2003 से पहले पूरी हुई थी भर्ती प्रक्रिया-
केंद्र सरकार के उन कर्मियों को, जो एक जनवरी 2004 को या उसके बाद सरकारी सेवा में आए थे, लेकिन उनकी भर्ती प्रक्रिया उक्त तिथि से पहले ही पूरी हो चुकी थी। इसमें पदों के विज्ञापन से लेकर भर्ती की सभी औपचारिकताएं शामिल थी। किन्हीं कारणों से ऐसे कर्मचारी, जनवरी 2004 के बाद सेवा में आए थे। 22 दिसंबर 2003 को एनपीएस लागू होने से पहले उन कर्मियों का फाइनल रिजल्ट आ चुका था, लेकिन उन्हें ज्वाइनिंग पहली जनवरी 2004 के बाद मिली थी। ऐसे में उन्हें पुरानी पेंशन का लाभ नहीं मिल सका। उन्हें एनपीएस में शामिल कर दिया गया। केंद्रीय कर्मचारियों से बड़ी संख्या में, केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1972 (अब 2021) के तहत पेंशन योजना के लाभ का विस्तार करने के अनुरोध प्राप्त हुए। कर्मियों ने उच्च न्यायालयों और केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरणों की शरण ली। वहां से जब उनके पक्ष में फैसले हुए तो केंद्र सरकार ने 3 मार्च 2023 को उन सभी कर्मियों को ओपीएस में शामिल होने का विकल्प प्रदान किया था। इसके लिए कर्मचारियों को 31 अगस्त तक अपना विकल्प देना था।
उत्तराखंड राज्य गठन के 23 साल बीत चुके हैं लेकिन इसके बाद भी प्रदेश के विद्यालयों और महाविद्यालयों के हजारों छात्र बुनियादी सुविधाओं को तरस रहे हैं। आज भी ऐसे कई स्कूल- कॉलेज हैं जहाँ पर पढ़ने वाले छात्रों के पास अपनी छत नहीं है. 1056 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बिजली नहीं है। पेयजल, भवन और फर्नीचर की भी पिछले कई वर्षों से समस्या बनी हुई है। 75 विद्यालयों और 12 कॉलेजों के पास तो अभी तक अपनी छत भी नहीं है।
इन सुविधाओं के लिए छात्र-छात्राओं को अभी 2025-26 तक इंतजार करना होगा। शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत के मुताबिक, अगले दो वर्षों के भीतर शत प्रतिशत सुविधाएं उपलब्ध करा दी जाएंगी। प्रदेश के विद्यालयों और महाविद्यालयों में शिक्षा गुणवत्ता में सुधार के दावों के बीच 114 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय में पेयजल सुविधा नहीं है।
1 स्कूल को लेकर न्यायालय में चल रहा वाद-
21,528 छात्र-छात्राओं के लिए फर्नीचर नहीं है। 1,693 के पास कंप्यूटर और 75 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के पास अपना भवन नहीं है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, जिन विद्यालयों के पास अपना भवन नहीं हैं, उसमें 69 स्कूल वन भूमि क्षेत्र में हैं। एक स्कूल को लेकर न्यायालय में वाद चल रहा है।
तीन स्कूलों की भूमि को लेकर विवाद है।एक स्कूल डूब क्षेत्र में है, जबकि एक स्कूल छात्र संख्या शून्य होने से उसका निर्माण नहीं हो पा रहा है। शिक्षा निदेशक आरके उनियाल के मुताबिक, राज्य के कुछ स्कूल भूमि मुहैया न होने से किराये के भवन में चल रहे हैं। खासकर हरिद्वार एवं कुछ अन्य जिलों में यह स्थिति है। इसके अलावा पेयजल स्रोत दूर होने से पेयजल और बिजली की लाइन न होने से बिजली की भी समस्या बनी है। धीरे-धीरे समस्याओं को दूर किया जा रहा है।
इन सभी कॉलेजों के पास नहीं है अपना भवन-
कैसी होती है रेव पार्टी-
रेव पार्टियां पूरी दुनिया में लोकप्रिय हैं. ज्यादातर इन पार्टियों में समाज का अमीर तबका ही पहुंचता है. दरअसल, इन पार्टियों में जाने के लिए इतना ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ता है कि आम लोग इसके बारे में सोच भी नहीं सकते. इसके साथ ही ये पार्टियां आम पार्टियों के मुकाबले काफी अलग होती हैं. इन पार्टियों में पहुंचने वाले युवा तरह तरह का नशा करते हैं जो कई देशों में बैन भी है. यही वजह है कि भारत में भी इस तरह की रेव पार्टियां बैन हैं. लेकिन इसके बाद भी कुछ लोग ऐसी पार्टियां आयोजित कराते हैं और एल्विश यादव पर ऐसी ही पार्टियों में स्नेक बाइट प्रोवाइड कराने का आरोप है.
इस तरह की रेव पार्टियों में लोग सिर्फ आम पार्टियों की तरह नाचते, गाते और फूड एन्जॉय नहीं करते हैं. बल्कि, लोग इन पार्टियों में जम कर नशा करते हैं. ये नशा ड्रग्स से लेकर चरस, अफीम और स्नेक बाइट तक का होता है. इन पार्टियों में ऐसा माहौल बनाया जाता है कि लोग लंबे समय तक नशे में झूमते रहें. आपने फिल्मों में देखा ही होगा कि इन पार्टियों में किस तरह युवा नशे में डूबे रहते हैं.
भारत में बैन है रेव पार्टी-
भारत में इस तरह की रेव पार्टियां बैन हैं जहां अवैध तरीके के नशे कराए जाते हैं. अगर कोई व्यक्ति इस तरह की पार्टी में जाता है या इसे ऑर्गेनाइज कराता है तो पकड़े जाने पर सजा का भी प्रावधान है. यही वजह है कि देश के अलग-अलग इलाकों में इस तरह की पार्टियों पर नार्कोटिक्स विभाग अक्सर छापे मारी करता रहता है.
नोएडा सहित एनसीआर के अन्य शहरों में रेव पार्टी करने और उसमें विदेशी युवतियों को बुलाने के मामले में फेमस यूट्यूबर और बिग बॉस विजेता एल्विश यादव समेत छह नामजद और कुछ अज्ञात के खिलाफ सेक्टर-49 थाने में केस दर्ज किया गया है। सभी के खिलाफ वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत केस दर्ज हुआ है।
एजेंट से बात करने के बाद रेव पार्टी सहित हर मांग पूरी करने का आश्वासन दिया गया। एजेंट ने बताए गए स्थान पर सांप और साथी सहित आने की बात कही। टीम के साथियों ने उसे सेक्टर-51 स्थित सेवरोन बैंक्विट हॉल बुलाया। इसकी सूचना डीएफओ नोएडा को दी गई। बताए गए स्थान पर पहुंचने के बाद टीम ने जिस भी सांप को देखने की इच्छा जाहिर की गिरोह के लोगों ने दिखाया। इसके बाद एक तरह से मुखबिर से मिली सूचना पर मुहर लग गई। फिर मामले की सूचना नोएडा पुलिस और वन विभाग को दी गई।

थोड़ी ही देर बाद सेक्टर-49 थाने की पुलिस और क्षेत्रीय वन अधिकारी टीम के साथ मौके पर पहुंच गए। पांच लोगों को मौके पर ही पुलिस ने हिरासत में ले लिया। जिन लोगों को हिरासत में लिया गया है उनमें बदरपुर निवासी राहुल, टीटूनाथ, जयकरण, नारायण और रविनाथ शामिल हैं। तलाशी के दौरान राहुल की कमर पर टंगे पिट्ठू बैग से एक प्लास्टिक की बोतल में भरा स्नेक वेनम मिला। सभी के पास नौ जिंदा सांप मिले। जिसमें पांच कोबरा, एक अजगर, एक घोड़ा पछाड़, और दो दोमुहे सांप शामिल हैं।
पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर दिल्ली के रामलीला मैदान में सरकारी कर्मियों की दो रैलियां हो चुकी हैं। अब 3 नवंबर को तीसरी बड़ी रैली होने जा रही है। इस रैली में सात सूत्री एजेंडे पर हुंकार भरी जाएगी, जिसमें पहले नंबर पर एनपीएस की समाप्ति और ओपीएस की बहाली है। इसके बाद केंद्र सरकार में रिक्त पदों को नियमित भर्ती के जरिए भरना, निजीकरण पर रोक, आठवें वेतन आयोग का गठन और कोरोनाकाल में रोके गए 18 महीने के डीए का एरियर जारी करना, ये बातें भी कर्मचारियों की मुख्य मांगों में शामिल हैं। यह रैली कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स के बैनर तले होगी। इसमें ऑल इंडिया स्टेट गवर्नमेंट एम्प्लाइज फेडरेशन सहित करीब 50 कर्मी संगठन हिस्सा लेंगे।
कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स के महासचिव एसबी यादव ने बताया कि केंद्र सरकार में रिक्त पदों को नियमित भर्ती के जरिए भरना, निजीकरण पर रोक लगाना, आठवें वेतन आयोग का गठन करना और कोरोना काल में रोके गए 18 महीने के डीए का एरियर जारी करना, ये बातें भी कर्मचारियों की मुख्य मांगों में शामिल हैं। सरकारी कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर पिछले साल से ही चरणबद्ध तरीके से प्रदर्शन किए जा रहे हैं। दिसंबर 2022 को दिल्ली के तालकटोरा इंडोर स्टेडियम में कर्मियों के ज्वाइंट नेशनल कन्वेंशन के घोषणा पत्र के मुताबिक, कर्मचारियों की मुहिम आगे बढ़ाई जा रही है। राज्यों में भी कर्मियों की मांगों के लिए सम्मेलन/सेमिनार और प्रदर्शन आयोजित किए गए हैं। अब इस कड़ी में तीन नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली आयोजित की जाएगी।












