Author: Manisha Rana

Amit Shah: ‘सरकार बनने पर समान नागरिक संहिता लागू करेंगे’, तेलंगाना चुनाव के लिए भाजपा ने किया घोषणा पत्र जारी.

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तेलंगाना विधानसभा चुनाव-2023 के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का घोषणा पत्र जारी हो गया है। बड़ा ऐलान करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि अगर बीजेपी तेलंगाना में सत्ता में आई तो समान नागरिक संहिता लागू करेगी। चुनावी घोषणा पत्र में भाजपा ने लोकलुभावन वादे भी किए हैं।
 
क्षिण भारतीय प्रदेश तेलंगाना में पैर जमाने की जद्दोजहद में जुटी भाजपा ने विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने कहा, बीजेपी को बहुमत मिलने के बाद तेलंगाना में उज्वला लाभार्थियों को प्रति वर्ष चार मुफ्त एलपीजी सिलेंडर दिए जाएंगे। लाभार्थियों के लिए कई और वादों के साथ भाजपा ने सत्तारूढ़ भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) को भी कटघरे में खड़ा किया है।
भाजपा के घोषणापत्र में कहा गया है कि बीआरएस सरकार के कथित भ्रष्टाचार की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति नियुक्त करेगी। बता दें कि चुनावी रैलियों में मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव (केसीआर) और उनकी पार्टी पर जमकर निशाना साधने वाली भाजपा ने बड़े पैमाने पर आर्थिक घोटालों के आरोप लगाए हैं। हालांकि, केसीआर ने भाजपा के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा है कि तेलंगाना में भाजपा का कोई जनाधार नहीं है। सीएम केसीआर के बेटे केटी रामा राव ने भी कहा है कि भाजपा बेबुनियाद आरोप लगा रही है।

पश्चिम बंगाल में लगेगा दिग्गजों का जमावड़ा, PM मोदी से पहले आएंगे अमित शाह, जानिये क्या कुछ होगा खास.

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Loksabha Election 2024: लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा के लिए पश्चिम बंगाल खास होता जा रहा है। केंद्रीय मंत्रियों का दौरा लगातार हो रहा है। इस बीच जानकारी मिली है कि इसी महीने 29 तारीख को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह बंगाल के दौरे पर आ सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी 24 दिसंबर को कोलकाता में आ रहे हैं। इसे लेकर आगामी दिनों में एक बार फिर से काफी हलचल देखने को मिल सकती है।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार दिल्ली में हैं और उनकी बातचीत केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से हुई है। सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो 29 को भाजपा की धर्मतल्ला के ब्रिगेड परेड मैदान में होने वाली जनसभा में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह आएंगे।

इस बीच जानकारी मिली है कि कोलकाता में 24 दिसंबर को गीता जयंती के मौके पर एक लाख लोग गीता का पाठ करेंगे। इसके लिए मुख्य अतिथि के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित किया गया है और प्रधानमंत्री ने इसके लिए स्वीकृति भी प्रदान कर दी है।

Rajasthan Election: मायावती के इस खेल से क्यों बेचैन है कांग्रेस !

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पांच चुनावी राज्यों में एक राजस्थान में जंग बेहद दिलचस्प मोड़ की तरफ बढ़ रही है यहां  भाजपा और कांग्रेस दोनों की बेचैनी बढ़ गयी है क्योंकि राजस्थान की सियासत में दलितों और पिछड़ों की सबसे बड़ी पार्टी माने जाने वाली बहुजन समाज पार्टी यानी BSP की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती  की एंट्री होने जा रही है. राजस्थान का इतिहास गवाह है कि जब भी मायावती यहां किसी सीट पर प्रचार के लिए गयी हैं उनमे अधिकतर सीट बसपा जीती है, ऐसे में भाजपा और कांग्रेस के खेमे में सेंध लगने की उम्मीद है, इसका सबसे बड़ा नुकसान कांग्रेस को हो सकता है क्योंकि दलित वोटर राजस्थान में कांग्रेस का मुख्य वोटर भी माना जाता है ऐसे में जिनके दम पर कांग्रेस को सत्ता में वापसी की उम्मीद है,वो वोटर उनसे छिटक सकता है.

ऐसा पहले भी कई बार हुआ है,,ऐसे में जब मुकाबला कांटे का दिखाई दे रहा है तो एक एक सीट दोनों पार्टियों के लिए बड़ा महत्व रखती है,,,पिछली बार के चुनाव में भी बसपा 6 सीटें जीती थी,जबकि एक दर्जन सीटों पर उसके प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहे थे,,राजस्थान में 39  सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं ऐसे में मायावती का फोकस इन सीटों पर है ऊपर से जिन नेताओं को टिकट नहीं मिल रहे वो बसपा में शामिल हो रहे हैं. इनमें सबसे अधिक कांग्रेस के विधायक हैं मायावती और अशोक गहलोत के बीच की अदावत जग जाहिर है,,सियासी जानकार मानते हैं कि मायावती गहलोत से बहुत नाराज है क्योकि उन्होंने दो बार उनके जीते विधायकों को कांग्रेस में शामिल कराया,ऐसे में इस बार मायावती ने खुद मोर्चा संभाला है.

 40 सीटों पर खुद प्रचार करेंगी मायावती –

मायावती इस बार 40 सीटों पर खुद प्रचार करेंगी,,,इनमें पूर्वी राजस्थान में बसपा का सबसे बड़ा असर है,,यहां बसपा के टिकट पर लड़ने वाला कोई भी उम्मीदवार आसानी से 10 से 15 हजार वोट हासिल कर लेता है, सियासी जानकार ये भी मानते हैं कि बसपा सबसे अधिक डैमेज कांग्रेस को पहुंचाती है,,कुल मिलाकर ये भी कहा जा सकता है कि मायावती अशोक गहलोत की सत्ता वापसी के सपने को तोड़ भी सकती हैं मायावती 5 साल बाद भरतपुर शहर के नदबई कस्बे में आ रही हैं और उनका मकसद 7 विधानसभा सीटों पर 4 लाख एससी वोटो को साधना है. मायावती ने 2018 के विधानसभा चुनावों में नदबई कस्बे में बसपा प्रत्याशी जोगिंदर सिंह अवाना के समर्थन में जनसभा को संबोधित किया था और जोगिंदर सिंह अवाना विजय हुए थे. बसपा पार्टी से विजय होने के बाद जोगिंदर सिंह अवाना कांग्रेस में शामिल हो गए. इस बार 2023 के चुनाव में नदबई विधानसभा से खेमकरण तौली को उम्मीदवार बनाया है. इस जनसभा में जिले की सात विधानसभा क्षेत्रों से बहुजन समाज के कार्यकर्ता व समर्थक बड़ी संख्या में शामिल हुए .

राष्ट्रीय अध्यक्ष सुप्रीमो मायावती की भरतपुर जिले में प्रत्येक विधानसभा चुनाव में जनसभा आयोजित करवाई जाती है, क्योंकि यहां बीएसपी पार्टी को काफी फायदा मिलता है और सात विधानसभा क्षेत्र में से दो या तीन  सीटों पर इन्हें विजय हासिल होती है. 2018 के चुनाव में नगर और नदबई विधानसभा क्षेत्र से बसपा को विजय हासिल हुई थी.भरतपुर की सातों विधानसभा सीटों पर एससी वोट बड़ी संख्या में हैं. यही वजह है कि सुप्रीमो मायावती भरतपुर में जनसभा को संबोधित करने जा रही हैं. जनसभा आयोजित होने से जिले की कई विधानसभा सीटों का गणित बदलेगा.

क्या राजस्थान में किंग मेकर की भूमिका में आ सकती हैं मायावती-

बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती 17 से 20 नवंबर तक राजस्थान के दौरे पर रहेंगी, जहां वे बसपा प्रत्याशियों के समर्थन में आम सभाएं और रैलियां करेंगी. मायावती अपने चार दिवसीय राजस्थान दौरे के दौरान 20 नवंबर को लाडनूं आएंगी. वे यहां बसपा प्रत्याशी नियाज मोहम्मद खान के समर्थन में जनसभा को संबोधित करेंगी. बहुजन समाज पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष भगवान सिंह बाबा के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती राज्य में 17 से 20 नवम्बर तक बसपा प्रत्याशियों के समर्थन में 8 जनसभाओं को सम्बोधित करेंगी.

यूपी के आगरा से राजस्थान के भरतपुर व धौलपुर के 50 से अधिक गांवों की सीमाएं जुड़ीं हैं. इसलिए आगरा के कई बसपा नेता राजस्थान चुनाव में विधानसभा क्षेत्रों के चुनाव प्रबंधन में शामिल हैं. इसका भी फायदा उनको मिल सकता है, बता दें कि राजस्थान में 25 नवंबर को 200 सीटों के लिए मतदान होगा, ऐसे में जब बसपा पहले ही ऐलान कर चुकी है कि इस बार वो सरकार में शामिल होगी तो मतलब साफ़ है अगर बसपा राजस्थान में कुछ सीट जीत जाती है और किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है तो ऐसे में मायावती किंग मेकर की भूमिका में आ सकती हैं और अगर ऐसा हुआ तो निश्चित तौर पर 2024 चुनाव में भी मायावती अहम भूमिका में आ सकती हैं क्योंकि उन्होंने अभी तक अपने पत्ते साफ़ नहीं किये हैं कि 2024 में उनका रुख किस ओर होगा। बहरहाल आने वाला समय साफ़ कर देगा कि मायावती राजस्थान में किसको डेंट मारने जा रही है.

World Cup: राहुल द्रविड़ फाइनल मैच के बाद टीम इंडिया से हो जाएंगे अलग ? BCCI ने नहीं दिया नया ऑफर.

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भारतीय क्रिकेट टीम विश्व कप के फाइनल में पहुंच गई है। उसने बुधवार (15 नवंबर) को खेले गए सेमीफाइनल मुकाबले में न्यूजीलैंड को 70 रन से हरा दिया। मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में मिली जीत के बाद भारतीय टीम फाइनल में पहुंच गई है। 19 नवंबर को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में उसका मुकाबला ऑस्ट्रेलिया या दक्षिण अफ्रीका से होगा। वह भारत के मौजूदा कोच राहुल द्रविड़ का आखिरी मैच हो सकता है।

 
विश्व कप के बाद राहुल द्रविड़ का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा। वह 2021 में टी20 विश्व कप के बाद टीम के कोच बने थे। रवि शास्त्री की जगह उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी। बीसीसीआई ने द्रविड़ के साथ दो साल का अनुबंध किया था, जो विश्व कप के बाद समाप्त हो जाएगा। ऐसे में अगर उन्हें नया अनुबंध नहीं मिलता है तो बतौर भारतीय कोच यह उनका आखिरी मुकाबला होगा। वह ट्रॉफी के साथ विदा होना चाहेंगे।

राहुल ने बदली बोर्ड के अधिकारियों की धारणा-
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीसीसीआई ने द्रविड़ के साथ अब तक नए अनुबंध को लेकर कोई बात नहीं की है। भारत के पूर्व कप्तान और उनके सहयोगी स्टाफ के पास विश्व कप तक का अनुबंध था और कोचिंग टीम के भविष्य को लेकर बीसीसीआई के भीतर अलग-अलग दृष्टिकोण थे। शुरुआत में द्रविड़ की कोचिंग शैली को लेकर बीसीसीआई के वरिष्ठ अधिकारियों को आपत्ति थी, लेकिन भारतीय टीम के हालिया प्रदर्शन ने उन धारणाओं को बदल दिया है। 

क्या द्रविड़ कोच पद पर बने रहना चाहते हैं? 
भारत विश्व कप में अच्छा प्रदर्शन कर रहा है और पूरे टूर्नामेंट में अब तक एक भी मैच नहीं हारा है। ऐसे में अनुबंध नवीनीकरण या विस्तार की संभावना प्रबल हो सकती है। हालांकि, अहम सवाल यह है कि क्या द्रविड़ खुद भी पद पर बने रहने के इच्छुक हैं। जब उन्होंने 2021 में पदभार संभाला तो शुरुआती धारणा यह थी कि वह एक अनिच्छुक कोच थे। उनके कुछ करीबी लोगों ने सुझाव दिया था कि टीम के प्रदर्शन की परवाह किए बिना वह विश्व कप के बाद स्वेच्छा से पद छोड़ सकते हैं। हालांकि, संभावित विस्तार पर द्रविड़ का वर्तमान रुख किसी को पता नहीं है। पिछले महीने या उससे पहले द्रविड़ से उनके भविष्य को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई है। उन्होंने अपने काम पर ध्यान केंद्रित किया है। 

द्रविड़ कोच पद पर रहे या नहीं, यह अनुमान है कि उनके सहयोगी स्टाफ के सदस्यों का अनुबंध बढ़ाया जा सकता है। बल्लेबाजी कोच विक्रम राठौड़, गेंदबाजी कोच पारस म्हाम्ब्रे और क्षेत्ररक्षण कोच टी दिलीप को आगे टीम के साथ जोड़े रखा जा सकता है।  

ऑस्ट्रेलिया सीरीज में लक्ष्मण हो सकते हैं कोच –
वीवीएस लक्ष्मण के नेतृत्व में राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (एनसीए) के कोच ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 23 नवंबर से शुरू होने वाली टी20 सीरीज के दौरान टीम इंडिया के साथ रहेंगे। यह व्यवस्था बीसीसीआई को द्रविड़ के भविष्य पर निर्णय को अंतिम रूप देने के लिए कुछ समय देती है। बीसीसीआई ने अभी तक टी20 सीरीज के लिए टीम के चयन की तारीख की पुष्टि नहीं की है। अनुमान है कि टीम की घोषणा फाइनल के अगले दिन यानी 20 नवंबर को हो सकती है। इसके दो दिन बाद विशाखापत्तनम में पहला मैच होगा।

MP Election: पत्रकार ने किया ऐसा सवाल कि अखिलेश यादव ने कह दिया बीजेपी का एजेंट ?

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मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव में ताल ठोक रही सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव् इन दिनों अपने एक वीडियो को लेकर चर्चाओं में है वीडियो भी कुछ ऐसा है कि जमकर वायरल हो रहा है और इस पर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही है. आएं भी क्यों नहीं क्योंकि वीडियो है ही कुछ ऐसा,, दरअसल सपा प्रमुख अखिलेश यादव मध्य प्रदेश में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे, इस दौरान उनसे एक पत्रकार ने एक अजीब सा सवाल पूछ दिया. सवाल सुनकर अखिलेश यादव तमतमा गए.
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें वह एक सवाल पूछे जाने पर बुरी तरह भड़कते दिखाई दे रहे हैं। इतना ही नहीं, सवाल सुनकर अखिलेश यादव इतने भड़क गए कि उन्होंने भाषा की मर्यादा का भी ख्याल नहीं रखा. चुनावी सभा को संबोधित करने मध्य प्रदेश के पन्ना पहुंचे अखिलेश यादव से एक पत्रकार ने ये सवाल पूछ लिया  कि ‘योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आप टोंटी चोर हैं। बस फिर क्या था अखिलेश का पारा चढ़ गया और अखिलेश यादव ने इस पर जवाब देते हुए कहा, ‘तुम पत्रकार नहीं हो,, तुम ये महंगा चश्मा लगाए बीजेपी के एजेंट हो बेटा ‘ अखिलेश यादव ने पत्रकार का नाम पूछा तो उसने बताया कि ‘मेरा नाम नूर काजी है।’ अखिलेश ने इस पर अपने सहयोगियों से पत्रकार की तस्वीर खींचने के लिए कहा। अखिलेश ने कहा, ‘मुस्लिम हो आप, ऐसी भाषा होती है मुसलमानों की क्या? तुम तो बिके हुए हो.. पता नहीं तुम पत्रकार हो भी या नहीं.. जब मैंने सीएम आवास छोड़ा था तो बीजेपी ने इसे धुलवाया था।’ इतना ही नहीं, समाजवादी पार्टी के ट्विटर हैंडल से पत्रकार की तस्वीर को शेयर कर मध्य प्रदेश पुलिस से कार्रवाई की मांग की गई है ।
पत्रकार का कहना है कि वह पत्रकारिता कर रहे हैं,, साथ ही कहा कि मेरा शौक है पत्रकारिता और मैं कोई भी चश्मा पहन सकता हूं। अब सोशल मीडिया पर अखिलेश यादव का वीडियो खूब वायरल हो रहा है, जिस पर लोगों की खूब प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं, कोई कह रहा है कि ‘अखिलेश यादव कितने बड़े जातिवादी नेता हो सकते हैं इसका पता चलता है पत्रकार का पूरा नाम जानने की इच्छा से.. कुछ लोग कह रहे हैं कि अखिलेश यादव को लगा कि सवाल पूछने वाला ये पत्रकार ब्राह्मण होगा लेकिन इस बार दांव उल्टा पड़ गया,  ये पत्रकार मुस्लिम निकला, साथ ही कुछ लोग तर्क दे रहे हैं कि युवा पत्रकार ने अतिउत्साह में यूपी के सीएम की टिप्पणी बताओ जो सवाल किया, वो आरोप योगी आदित्यनाथ ने कभी लगाया ही नहीं। सवाल से पहले पत्रकार को तथ्य जांचना चाहिए था. अधूरी जानकारी वाले सवाल से पूर्व CM अखिलेश यादव भड़के जो स्वाभाविक था, इससे पूरी पत्रकार बिरादरी असहज हुई!”
हालांकि मध्य प्रदेश चुनाव में अखिलेश यादव द्वारा पत्रकार के साथ किए गए इस बर्ताव की खूब चर्चा हो रही है। कुछ लोग अखिलेश यादव के व्यवहार की निंदा कर रहे हैं तो कुछ कह रहे हैं कि उल्टा-सीधा सवाल पूछे जाने पर इस तरह की प्रतिक्रिया स्वाभाविक है.

Old Pension: केंद्र सरकार में ये कर्मी NPS से OPS में होंगे शामिल, जानिए कब तक जारी होगा फाइनल ऑर्डर.

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Uttarakhand: 23 साल बाद भी 75 स्कूलों और 12 कॉलेजों को नहीं मिली अपनी छत, बुनियादी सुविधाओं को तरसे छात्र.

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उत्तराखंड राज्य गठन के 23 साल बीत चुके हैं लेकिन इसके बाद भी प्रदेश के विद्यालयों और महाविद्यालयों के हजारों छात्र बुनियादी सुविधाओं को तरस रहे हैं। आज भी ऐसे कई स्कूल- कॉलेज हैं जहाँ पर पढ़ने वाले छात्रों के पास अपनी छत नहीं है. 1056 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बिजली नहीं है। पेयजल, भवन और फर्नीचर की भी पिछले कई वर्षों से समस्या बनी हुई है। 75 विद्यालयों और 12 कॉलेजों के पास तो अभी तक अपनी छत भी नहीं है।

इन सुविधाओं के लिए छात्र-छात्राओं को अभी 2025-26 तक इंतजार करना होगा। शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत के मुताबिक, अगले दो वर्षों के भीतर शत प्रतिशत सुविधाएं उपलब्ध करा दी जाएंगी। प्रदेश के विद्यालयों और महाविद्यालयों में शिक्षा गुणवत्ता में सुधार के दावों के बीच 114 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय में पेयजल सुविधा नहीं है।

1 स्कूल को लेकर न्यायालय में चल रहा वाद-

 21,528 छात्र-छात्राओं के लिए फर्नीचर नहीं है। 1,693 के पास कंप्यूटर और 75 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के पास अपना भवन नहीं है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, जिन विद्यालयों के पास अपना भवन नहीं हैं, उसमें 69 स्कूल वन भूमि क्षेत्र में हैं। एक स्कूल को लेकर न्यायालय में वाद चल रहा है। 

तीन स्कूलों की भूमि को लेकर विवाद है।एक स्कूल डूब क्षेत्र में है, जबकि एक स्कूल छात्र संख्या शून्य होने से उसका निर्माण नहीं हो पा रहा है। शिक्षा निदेशक आरके उनियाल के मुताबिक, राज्य के कुछ स्कूल भूमि मुहैया न होने से किराये के भवन में चल रहे हैं। खासकर हरिद्वार एवं कुछ अन्य जिलों में यह स्थिति है। इसके अलावा पेयजल स्रोत दूर होने से पेयजल और बिजली की लाइन न होने से बिजली की भी समस्या बनी है। धीरे-धीरे समस्याओं को दूर किया जा रहा है।

इन सभी कॉलेजों के पास नहीं है अपना भवन-

प्रदेश के 12 राजकीय महाविद्यालयों के पास अपना भवन नहीं है। इनमें राजकीय महाविद्यालय शीतलाखेत जिला अल्मोड़ा, मासी अल्मोड़ा, रामगढ़ नैनीताल, हल्द्वानी नैनीताल, नानकमत्ता उधम सिंह नगर, गदरपुर उधम सिंह नगर, मोरी उत्तरकाशी, खाड़ी टिहरी, पावकी देवी नई टिहरी, भूपतवाला हरिद्वार व सुद्धोवाला देहरादून के पास अपना भवन नहीं है।

इतने छात्रों के लिए नहीं है फर्नीचर-

प्रदेश में अल्मोड़ा जिले के 2,135, बागेश्वर के 848, चमोली के 2,891, चंपावत के 788, देहरादून के 2,432, हरिद्वार के 730, नैनीताल के 1,805, पौड़ी के 1,382, पिथौरागढ़ के 1,937, रुद्रप्रयाग के 1,236, टिहरी के 2,349, ऊधमसिंह नगर के 1,341 एवं उत्तरकाशी के 1,654 छात्र-छात्राओं के लिए फर्नीचर नहीं हैं।वहीँ शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत का कहना है कि प्रदेश के शत प्रतिशत विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं के लिए 2025-26 तक का लक्ष्य रखा गया है। धीरे-धीरे सभी विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

 

Elvish Yadav: कैसे होती है ये स्नेक बाइट वाली रेव पार्टी, जानिये इन पार्टियों में और क्या होता है.

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बिगबॉस विनर एल्विश यादव (Elvish Yadav) पर रेव पार्टियों में स्नेक बाइट प्रोवाइड कराने को लेकर नोएडा सेक्टर 49 में एफआईआर दर्ज हुई है. अब कई लोगों के मन में ये सवाल उठ रहा होगा कि आखिर ये रेव पार्टी होती कैसी है. क्या ये भी आम पार्टियों की तरह होती है या इसमें कुछ अलग होता है. इससे भी बड़ा सवाल कि क्या ये पार्टियां भारत में लीगल हैं? चलिए इस आर्टिकल में आपके इन्हीं सवालों का जवाब देते हैं.

कैसी होती है रेव पार्टी-

रेव पार्टियां पूरी दुनिया में लोकप्रिय हैं. ज्यादातर इन पार्टियों में समाज का अमीर तबका ही पहुंचता है. दरअसल, इन पार्टियों में जाने के लिए इतना ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ता है कि आम लोग इसके बारे में सोच भी नहीं सकते. इसके साथ ही ये पार्टियां आम पार्टियों के मुकाबले काफी अलग होती हैं. इन पार्टियों में पहुंचने वाले युवा तरह तरह का नशा करते हैं जो कई देशों में बैन भी है. यही वजह है कि भारत में भी इस तरह की रेव पार्टियां बैन हैं. लेकिन इसके बाद भी कुछ लोग ऐसी पार्टियां आयोजित कराते हैं और एल्विश यादव पर ऐसी ही पार्टियों में स्नेक बाइट प्रोवाइड कराने का आरोप है.

इस तरह की रेव पार्टियों में लोग सिर्फ आम पार्टियों की तरह नाचते, गाते और फूड एन्जॉय नहीं करते हैं. बल्कि, लोग इन पार्टियों में जम कर नशा करते हैं. ये नशा ड्रग्स से लेकर चरस, अफीम और स्नेक बाइट तक का होता है. इन पार्टियों में ऐसा माहौल बनाया जाता है कि लोग लंबे समय तक नशे में झूमते रहें. आपने फिल्मों में देखा ही होगा कि इन पार्टियों में किस तरह युवा नशे में डूबे रहते हैं.

भारत में बैन है रेव पार्टी-

भारत में इस तरह की रेव पार्टियां बैन हैं जहां अवैध तरीके के नशे कराए जाते हैं. अगर कोई व्यक्ति इस तरह की पार्टी में जाता है या इसे ऑर्गेनाइज कराता है तो पकड़े जाने पर सजा का भी प्रावधान है. यही वजह है कि देश के अलग-अलग इलाकों में इस तरह की पार्टियों पर नार्कोटिक्स विभाग अक्सर छापे मारी करता रहता है.

Elvish Yadav: एल्विश यादव समेत 6 पर FIR, सांपों की तस्करी और रेव पार्टी के आरोप पर क्या होगी एल्विश की गिरफ्तारी !

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नोएडा सहित एनसीआर के अन्य शहरों में रेव पार्टी करने और उसमें विदेशी युवतियों को बुलाने के मामले में फेमस यूट्यूबर और बिग बॉस विजेता एल्विश यादव समेत छह नामजद और कुछ अज्ञात के खिलाफ सेक्टर-49 थाने में केस दर्ज किया गया है। सभी के खिलाफ वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत केस दर्ज हुआ है। 

भाजपा नेता मेनका गांधी द्वारा संचालित पीएफए ऑर्गेनाइजेशन में एनिमल ऑफिसर गौरव गुप्ता ने सेक्टर-49 थाने में दी शिकायत में बताया कि उन्हें सूचना मिली कि एल्विश यादव नाम का यूट्यूबर स्नेक वेनम व जिंदा सांपों के साथ नोएडा सहित समूचे एनसीआर के फार्म हाउस में अपने गिरोह के अन्य सदस्यों के साथ वीडियो शूट कराता है और गैर कानूनी रूप से रेव पार्टियों को अंजाम दिया देता है। जिसमें बाकायदा विदेशी युवतियों को बुलाकर स्नेक वैनम व नशीले पदार्थों का लोग सेवन करते हैं। इसके बाद यूट्यूबर से मुखबिर ने संपर्क किया और उससे नोएडा में रेव पार्टी करने व सांपों और कोबरा वैनम का प्रबंध करने को कहा। इसके बाद यूट्यूबर ने अपने एजेंट राहुल का नंबर दिया और एल्विश का नाम लेकर बात करने के लिए कहा।

पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया- 

एजेंट से बात करने के बाद रेव पार्टी सहित हर मांग पूरी करने का आश्वासन दिया गया। एजेंट ने बताए गए स्थान पर सांप और साथी सहित आने की बात कही। टीम के साथियों ने उसे सेक्टर-51 स्थित सेवरोन बैंक्विट हॉल बुलाया। इसकी सूचना डीएफओ नोएडा को दी गई। बताए गए स्थान पर पहुंचने के बाद टीम ने जिस भी सांप को देखने की इच्छा जाहिर की गिरोह के लोगों ने दिखाया। इसके बाद एक तरह से मुखबिर से मिली सूचना पर मुहर लग गई। फिर मामले की सूचना नोएडा पुलिस और वन विभाग को दी गई।  

थोड़ी ही देर बाद सेक्टर-49 थाने की पुलिस और क्षेत्रीय वन अधिकारी टीम के साथ मौके पर पहुंच गए। पांच लोगों को मौके पर ही पुलिस ने हिरासत में ले लिया। जिन लोगों को हिरासत में लिया गया है उनमें बदरपुर निवासी राहुल, टीटूनाथ, जयकरण, नारायण और रविनाथ शामिल हैं। तलाशी के दौरान राहुल की कमर पर टंगे पिट्ठू बैग से एक प्लास्टिक की बोतल में भरा स्नेक वेनम मिला। सभी के पास नौ जिंदा सांप मिले। जिसमें पांच कोबरा, एक अजगर, एक घोड़ा पछाड़, और दो दोमुहे सांप शामिल हैं।

डीएफओ प्रमोद कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि कल शाम हमे जानकारी मिली थी कि सांपों और उनके जहर को लेकर कुछ व्यापार की संभावना है। इसके लिए तैयारी की गई थी। वन विभाग, पुलिस विभाग और पीएफए द्वारा ज्वाइंट ऑपरेशन किया गया जिसमें पांच लोगों की गिरफ्तारी हुई है। कई सांप बरामद किए गए हैं। एक बोतल में जहर भी मिला है, जांच के बाद पता चलेगा कि वास्तव में उसमें क्या है।

एल्विश यादव की प्रतिक्रिया आई सामने
सांप का जहर सप्लाई कराने और तस्करी के आरोप लगने के बाद पहली बार सामने आए एल्विश यादव ने बताया आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उन्होंने कहा कि सभी आरोप झूठे हैं और वह जांच में सहयोग के लिए तैयार हैं। इस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर कर एल्विश ने यह बात कही है। एल्विश ने आगे कहा कि मैं सीएम योगी और पुलिस से कहना चाहता हूं कि मेरी एक पर्सेंट भी इन्वॉल्मेंट मिल जाती है तो जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार हूं। मीडिया मेरा नाम खराब ना करे। जो भी आरोप लग रहे हैं कि उनसे मेरा कोई लेना देना नहीं।

OPS: रामलीला मैदान की तीसरी रैली, 18 फीसदी डीए और 8वें वेतन आयोग के गठन को लेकर हुंकार भरेंगे कर्मचारी .

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पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर दिल्ली के रामलीला मैदान में सरकारी कर्मियों की दो रैलियां हो चुकी हैं। अब 3 नवंबर को तीसरी बड़ी रैली होने जा रही है। इस रैली में सात सूत्री एजेंडे पर हुंकार भरी जाएगी, जिसमें पहले नंबर पर एनपीएस की समाप्ति और ओपीएस की बहाली है। इसके बाद केंद्र सरकार में रिक्त पदों को नियमित भर्ती के जरिए भरना, निजीकरण पर रोक, आठवें वेतन आयोग का गठन और कोरोनाकाल में रोके गए 18 महीने के डीए का एरियर जारी करना, ये बातें भी कर्मचारियों की मुख्य मांगों में शामिल हैं। यह रैली कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स के बैनर तले होगी। इसमें ऑल इंडिया स्टेट गवर्नमेंट एम्प्लाइज फेडरेशन सहित करीब 50 कर्मी संगठन हिस्सा लेंगे। 

निर्णायक लड़ाई की तरफ बढ़ने लगे कर्मचारी 
बता दें कि केंद्र एवं राज्य सरकारों के कर्मचारी संगठन, ‘पुरानी पेंशन’ पर निर्णायक लड़ाई की तरफ बढ़ने लगे हैं। केंद्रीय कर्मियों की दो विशाल रैलियों के बाद अब तीन नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में ही तीसरी बड़ी रैली होने जा रही है। हालांकि इस रैली में ओपीएस के साथ कई दूसरे मुद्दे भी उठाए जाएंगे।

कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स के महासचिव एसबी यादव ने बताया कि केंद्र सरकार में रिक्त पदों को नियमित भर्ती के जरिए भरना, निजीकरण पर रोक लगाना, आठवें वेतन आयोग का गठन करना और कोरोना काल में रोके गए 18 महीने के डीए का एरियर जारी करना, ये बातें भी कर्मचारियों की मुख्य मांगों में शामिल हैं। सरकारी कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर पिछले साल से ही चरणबद्ध तरीके से प्रदर्शन किए जा रहे हैं। दिसंबर 2022 को दिल्ली के तालकटोरा इंडोर स्टेडियम में कर्मियों के ज्वाइंट नेशनल कन्वेंशन के घोषणा पत्र के मुताबिक, कर्मचारियों की मुहिम आगे बढ़ाई जा रही है। राज्यों में भी कर्मियों की मांगों के लिए सम्मेलन/सेमिनार और प्रदर्शन आयोजित किए गए हैं। अब इस कड़ी में तीन नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली आयोजित की जाएगी। 

पीएफआरडीए एक्ट में संशोधन किया जाए-

यादव के मुताबिक, रैली की मुख्य मांगों में पीएफआरडीए एक्ट में संशोधन करना या उसे पूरी तरह खत्म करना, शामिल है। जब तक इस एक्ट को खत्म नहीं किया जाता, तब तक विभिन्न राज्यों में लागू हो रही ओपीएस की राह मुश्किल ही बनी रहेगी। वजह, एनपीएस के तहत कर्मियों का जो पैसा कटता है, वह पीएफआरडीए के पास जमा है। केंद्र सरकार कह चुकी है कि वह पैसा राज्यों को नहीं लौटाया जाएगा। ऐसे में जहां भी ओपीएस लागू हो रहा है, वहां पर सरकार बदलते ही दोबारा से एनपीएस लागू हो जाए, इस बाबत कुछ कहा नहीं जा सकता। ऐसे में राज्यों द्वारा की जा रही ओपीएस बहाली में कई पेंच फंसे रहेंगे।  

यादव ने बताया कि केंद्र और राज्यों के जिस विभाग में अनुबंध पर या डेली वेजेज पर कर्मचारी हैं, उन्हें अविलंब नियमित किया जाए। निजीकरण पर रोक लगे और सरकारी उपक्रमों को नीचे करने की सरकार की मंशा बंद हो। डेमोक्रेटिक ट्रेड यूनियन के अधिकारों का पालन सुनिश्चित हो। राष्ट्रीय शिक्षा कार्यक्रम का त्याग किया जाए और आठवें वेतन आयोग का गठन हो।  

ओपीएस पर हो चुकी हैं कर्मियों की दो रैलियां  
केंद्र और राज्यों के कर्मचारी संगठनों ने सरकार को स्पष्ट तौर से बता दिया है कि उन्हें बिना गारंटी वाली ‘एनपीएस’ योजना को खत्म करने और परिभाषित एवं गारंटी वाली ‘पुरानी पेंशन योजना’ की बहाली से कम कुछ भी मंजूर नहीं है। नई दिल्ली के रामलीला मैदान में दस अगस्त को कर्मियों की रैली हुई थी। ओपीएस के लिए गठित नेशनल ज्वाइंट काउंसिल ऑफ एक्शन (एनजेसीए) की संचालन समिति के राष्ट्रीय संयोजक एवं स्टाफ साइड की राष्ट्रीय परिषद ‘जेसीएम’ के सचिव शिवगोपाल मिश्रा ने रैली में कहा था कि लोकसभा चुनाव से पहले पुरानी पेंशन लागू नहीं होती है तो भाजपा को उसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। कर्मियों, पेंशनरों और उनके रिश्तेदारों को मिलाकर यह संख्या दस करोड़ के पार चली जाती है। चुनाव में बड़ा उलटफेर करने के लिए यह संख्या निर्णायक है।  

‘पेंशन शंखनाद महारैली’ में जुटे थे लाखों कर्मी-


एक अक्तूबर को रामलीला मैदान में ही ‘पेंशन शंखनाद महारैली’ आयोजित की गई। इसका आयोजन नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम (एनएमओपीएस) के बैनर तले हुआ था। एनएमओपीएस के अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने कहा कि पुरानी पेन्शन कर्मियों का अधिकार है। वे इसे लेकर ही रहेंगे। दोनों ही रैलियों में केंद्र एवं राज्य सरकारों के लाखों कर्मियों ने भाग लिया था। उसके बाद 20 सितंबर को हुई राष्ट्रीय परिषद (जेसीएम) स्टाफ साइड की बैठक के एजेंडे में ‘ओपीएस’ का मुद्दा टॉप पर रहा था। कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करते हुए अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ (एआईडीईएफ) के महासचिव सी. श्रीकुमार ने कहा था कि हमने सरकार के समक्ष एक बार फिर अपनी मांग दोहराई है। एनपीएस को खत्म किया जाए और पुरानी पेंशन योजना’ को जल्द से जल्द बहाल करें। अगर सरकार नहीं मानती है तो देश में कलम छोड़ हड़ताल होगी, रेल के पहिये रोक दिए जाएंगे।