Author: Manisha Rana

Kedarnath By-Election 2024- किसे मिलेगी केदारनाथ की कमान ?

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Kedarnath By-Poll: भाजपा ने पूर्व विधायक आशा नौटियाल पर फिर जताया भरोसा, जानिए कैसी रही इनकी सियासी पारी।

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भाजपा की प्रतिष्ठा से जुड़ी विधानसभा की केदारनाथ सीट के उपचुनाव के लिए प्रत्याशी को लेकर लंबे मंथन के बाद पार्टी ने आखिरकार देर रात तस्वीर साफ कर दी। केदारनाथ से दो बार विधायक रह चुकीं आशा नौटियाल पर पार्टी ने भरोसा जताया है। लंबे राजनीतिक अनुभव व धरातल पर मजबूत पकड़ के साथ ही पार्टी की ओर से कराए गए सर्वे ने उनकी राह को आसान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 

विधानसभा की केदारनाथ सीट भाजपा विधायक शैलारानी रावत के निधन के कारण रिक्त हुई है। हाल में संपन्न मंगलौर व बदरीनाथ सीटों के उपचुनाव में भाजपा को सफलता नहीं मिली थी। यद्यपि, यह पहले भी भाजपा के पास नहीं थीं, लेकिन केदारनाथ के मामले में ऐसा नहीं है। यही नहीं, बदरीनाथ सीट पर प्रत्याशी चयन को लेकर पार्टी कैडर के बीच से असंतोष के सुर भी उभरे थे। इस सबके मद्देनजर पार्टी ने केदारनाथ उपचुनाव के लिए सभी पहलुओं पर गंभीरता से मंथन किया। 

लंबे राजनीतिक अनुभव का मिला लाभ-

रविवार को दिल्ली में केंद्रीय नेतृत्व ने सभी समीकरणों पर विमर्श के साथ ही प्रांतीय नेतृत्व से बातचीत के बाद केदारनाथ सीट से पूर्व विधायक आशा नौटियाल को प्रत्याशी बनाने पर मुहर लगाई। यद्यपि, दिवंगत विधायक शैलारानी रावत की पुत्री ऐश्वर्य रावत के अलावा वर्ष 2017 व 2022 में निर्दलीय चुनाव लड़ चुके कुलदीप सिंह रावत भी दौड़ में थे, लेकिन पार्टी ने पूर्व विधायक आशा नौटियाल के लंबे राजनीतिक अनुभव, क्षेत्र में मजबूत पकड़ के अलावा चार बार कराए सर्वे रिपोर्ट को देखते हुए उन पर भरोसा जताया।

ये रहा है राजनीतिक जीवन-

  • भाजपा प्रत्याशी आशा नौटियाल ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत वर्ष 1990 में भाजपा की सदस्यता लेकर की।
  • वह वर्ष 1996 में रुद्रप्रयाग जिला पंचायत की सदस्य चुनी गईं।
  • उन्होंने भाजपा व महिला मोर्चा में विभिन्न पदों पर कार्य किया।
  • वर्ष 2002 में राज्य के पहले विधानसभा चुनाव में वह केदारनाथ सीट से विजयी रहीं और विधानसभा पहुंची।
  • वर्ष 2007 में दोबारा विधायक चुनीं गई, लेकिन वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में वह मात्र 1900 मतों से हार गईं।
  • वर्ष 2017 में पार्टी टिकट कटने से नाराज होकर उन्होंने केदारनाथ सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा, लेकिन सफल नहीं हो पाईं।
  • यद्यपि, भाजपा के संपर्क में वह बराबर बनी रहीं। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले उनकी भाजपा में घर वापसी हुई।

Uttarakhand: शिक्षक भर्ती में 70 से अधिक चयनित महिला अभ्यर्थियों का चयन होगा रद्द, नहीं मिलेगा आरक्षण का लाभ.

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प्रदेश के सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक के पदों पर चयनित 70 से अधिक महिला अभ्यर्थियों का चयन रद्द होगा। उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा समेत अन्य राज्यों की इन महिला अभ्यर्थियों का विवाह उत्तराखंड में हुआ है।

शिक्षा निदेशालय ने आरक्षित वर्ग की इन महिला अभ्यर्थियों के मामले में शासन से दो महीने पहले दिशा-निर्देश मांगा था कि इन्हें नियुक्ति में आरक्षण का लाभ दिया जाए या नहीं। शासन के अधिकारियों के मुताबिक कार्मिक विभाग के 10 अक्तूबर 2002 के शासनादेश के मुताबिक इन्हें आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता।

2906 पदों पर चल रही शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया-
प्रदेश में इन दिनों 2906 पदों पर शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। शिक्षा निदेशालय के मुताबिक भर्ती में ऐसे द्विवर्षीय डीएलएड अभ्यर्थियों ने भी आवेदन किया। जिनका विवाह अन्य राज्य से उत्तराखंड में हुआ है।

इन अभ्यर्थियों की अन्य राज्य के आरक्षण एवं उत्तराखंड राज्य के आरक्षण की स्थिति समान है। शिक्षा निदेशालय ने 27 अगस्त 2024 को शासन को लिखे पत्र में कहा कि समान जाति के आधार पर अन्य राज्य के अभ्यर्थियों को उत्तराखंड राज्य में आरक्षण का लाभ दिया जाना है या नहीं इस संबंध में दिशा-निर्देश दिया जाए।

आरक्षण की सुविधा अपने पैतृक राज्य में ही मिलेगी-
शासन के अधिकारियों के मुताबिक शिक्षा निदेशालय से दिशा-निर्देश मांगे जाने के बाद शासन ने समाज कल्याण, कार्मिक और न्याय विभाग से इस संबंध में सुझाव मांगा था। जिस पर कार्मिक विभाग के 10 अक्तूबर 2002 के शासनादेश का हवाला दिया गया कि उत्तराखंड राज्य के अलावा उत्तर प्रदेश एवं अन्य किसी राज्य का कोई व्यक्ति उत्तराखंड राज्य की राज्याधीन सेवाओं में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के लिए अनुमन्य आरक्षण का लाभ नहीं पा सकेगा।

इसके अलावा समाज कल्याण विभाग के 29 दिसंबर 2008 का वह शासनादेश जो डीएम देहरादून को संबोधित है। उसके बिंदु संख्या तीन में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा 74 में संरक्षण केवल सेवा शर्तों के लिए है। ऐसे संरक्षण में ऐसे कर्मचारियों की संतान को अपने पैतृक राज्य के अलावा दूसरे राज्य में आरक्षण की कोई सुविधा नहीं मिलेगी न ही उन्हें दूसरे राज्य के लिए अनुसूचित जाति, जनजाति व अन्य पिछड़ा वर्ग का समझा जाएगा। उन्हें आरक्षण की सुविधा अपने पैतृक राज्य में ही मिलेगी।

नियुक्ति के लिए उत्तराखंड की बहुओं ने किया था आंदोलन-

नियुक्ति की मांग को लेकर उत्तराखंड की बहुओं ने पिछले दिनों शिक्षा निदेशालय में प्रदर्शन कर धरना दिया था। उनका कहना था कि उत्तराखंड में उनका विवाह हुआ है। उन्हें नौकरी में आरक्षण का लाभ देते हुए नियुक्ति दी जाए।

ये शिक्षक हो सकते हैं बर्खास्त-

शिक्षक भर्ती में कुछ ऐसे अभ्यर्थी भी शामिल हैं। जिसने अन्य राज्यों से डीएलएड के लिए स्थायी निवास की बाध्यता के बावजूद डीएलएड करने के बाद उत्तराखंड में नियुक्ति पा ली। जबकि नियुक्ति के लिए उत्तराखंड का स्थायी या मूल निवासी होना जरूरी है।

कुछ अभ्यर्थियों ने यूपी का जाति प्रमाण पत्र रद्द करवाने के बाद उत्तराखंड से जाति एवं निवास प्रमाण पत्र बनवाया है। उनके पति के आधार पर यह प्रमाण पत्र बना है। जिसे डीएम ने जारी किया है। इनके आरक्षण के मामले में समाज कल्याण, कार्मिक और न्याय से परामर्श शासन को मिल चुका है, लेकिन अभी निदेशालय को कोई निर्देश जारी नहीं हुआ। -आरएल आर्य, अपर निदेशक प्रारंभिक शिक्षा

 

Kedarnath By-Election: प्रत्याशियों को लेकर 24 तारीख को कांग्रेस की दिल्ली में होगी बैठक, चुनावी रणनीति पर भी चर्चा संभव।

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केदारनाथ उपचुनाव की रणनीति और प्रत्याशी को लेकर कांग्रेस की 24 अक्तूबर को दिल्ली में बैठक होगी। मंगलवार को प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा ने वर्चुअल बैठक में प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं से चुनावी तैयारियों पर चर्चा कर सुझाव भी लिए।

प्रदेश प्रभारी ने कहा, केदारनाथ उपचुनाव में सभी नेताओं को एकजुट होकर काम करना है। इसके लिए बूथ स्तर पर चुनाव की रणनीति बना कर चलना है। बैठक में प्रदेश सहप्रभारी परगट सिंह, सुरेंद्र शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा, पूर्व सीएम हरीश रावत, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व मंत्री नवप्रभात, विधायक प्रीतम सिंह, भुवन कापड़ी, वीरेंद्र जाती, लखपत बुटोला, प्रदेश उपाध्यक्ष संगठन मथुरादत्त जोशी शामिल हुए।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा ने कहा, 24 अक्तूबर को दिल्ली में प्रदेश प्रभारी ने बैठक रखी है, जिसमें नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, विधायक प्रीतम सिंह के अलावा चारों पर्यवेक्षक भी मौजूद रहेंगे। बैठक में चुनावी रणनीति के साथ प्रत्याशी को लेकर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

Uttarakhand: कुमाऊं को मिला तोहफा, लालकुआं-बांद्रा सुपरफास्ट ट्रेन हुई शुरू, सीएम ने वर्चुअली दिखाई हरी झंडी।

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को वर्चुअल माध्यम से लालकुआं-बांद्रा सुपरफास्ट ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। सीएम ने कहा कि बाबा कैंची धाम के आशीर्वाद से लालकुआं से बांद्रा (मुंबई) के लिए ट्रेन संचालन का सपना पूरा हो गया है। इस ट्रेन के चलने से बाबा कैंची धाम, जागेश्वर और अन्य धार्मिक स्थलों के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर विकल्प मिलेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त किया।

सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हम भारतीय रेल के स्वर्णिम युग की ओर आगे बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन और केंद्र सरकार के सहयोग से पहाड़ तक ट्रेन पहुंचने का सपना ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन बनने के साथ पूरा हो जाएगा। टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन पर भी सर्वे का काम पूरा हो चुका है, जल्द ही इस रूट पर भी कार्य शुरू कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड से काशी, अयोध्या और अन्य प्रमुख शहरों के लिए रेल सेवा के और विस्तार के लिए प्रयास किए जाएंगे। सीएम ने कहा कि जनता के सहयोग से उत्तराखंड को को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के लिए राज्य सरकार हर क्षेत्र में तेजी से कार्य कर रही है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद अजय भट्ट ने कहा कि मुंबई के लिए रेल सेवा शुरू होने से कुमाऊं की जनता के साथ ही यहां आने वाले पर्यटकों को भी काफी सहूलियत मिलेगी। वहां विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट, पूर्व विधायक नवीन दुमका, जिलाध्यक्ष प्रदीप बिष्ट, डीआरएम रेखा यादव समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।

 

माया नगरी के लिए पहले दिन ही पैक होकर रवाना हुई ट्रेन-

लालकुआं-बांद्रा सुपरफास्ट ट्रेन पहले दिन पैक होकर रवाना हुई। इसकी वजह ट्रेन का रूट दिल्ली-हजरत निजामुद्दीन स्टेशन होकर जाना भी माना जा रहा है। सोमवार को ट्रेन के स्लीपर क्लास की सभी 456 बर्थ और थर्ड एसी इकोनॉमी की सभी 141 बर्थ फुल रहीं। इसके अलावा सेकंड ऐसी की 47 बर्थ में 27 जबकि थर्ड एसी की 204 बर्थ में से 189 बर्थ बुक रहीं। इसके अलावा लालकुआं जंक्शन से जनरल कोच के 1235 रुपये के 12 लोकल टिकट बुक हुए।

कुमाऊं से मुंबई के लिए तीसरी ट्रेन-

पूर्वोत्तर रेलवे ने कुमाऊं मंडल के नैनीताल जिले को मुंबई के लिए तीन सुपरफास्ट ट्रेनों की सौगात दी है। इसकी वजह कुमाऊं की वादियों में पर्यटकों और रेल ट्रैफिक को बढ़ावा देना है। रेलवे के आलाधिकारियों की मानें तो निकट भविष्य में कुमाऊं से दक्षिण भारत के लिए भी ट्रेन चलाने की योजना प्रस्तावित है।

24 घंटे 45 मिनट में मुंबई पहुंचा देगी बांद्रा सुपरफास्ट ट्रेन-

लालकुआं, काठगोदाम और रामनगर से मुंबई के लिए चलने वाली तीन ट्रेनों में काठगोदाम और रामनगर का रूट मथुरा रेल ट्रैक से होते हुए है। वहीं, लालकुआं से चलने वाली ट्रेन दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन रूट से होकर गुजरेगी। रेल अधिकारियों के मुताबिक काठगोदाम और रामनगर से मुंबई को जाने वाली ट्रेन का सफर लालकुआं से 26 घंटे 30 मिनट का है। वहीं लालकुआं से ही चलने वाली बांद्रा सुपरफास्ट ट्रेन 24 घंटे 45 मिनट में यात्रियों को माया नगरी पहुंचा देगी।

लालकुआं-बांद्रा टर्मिनस के मध्य नई ट्रेन (22544) सोमवार को लालकुआं से सुबह 7:45 बजे प्रस्थान कर रुद्रपुर सिटी, रामपुर, मुरादाबाद, गाजियाबाद, हजरत निजामुद्दीन, मथुरा, कोटा, वडोदरा, सूरत होते हुए हुए अगले दिन मंगलवार को सुबह 8:30 बजेबांद्रा टर्मिनस पहुंचेगी। वापसी में बांद्रा टर्मिनस से मंगलवार सुबह 11 बजे प्रस्थान कर अगले दिन बुधवार को दोपहर 13:15 बजे लालकुआं पहुंचेगी। इस ट्रेन में सेकेंड एसी का 1 कोच, थर्ड एसी के 2 कोच, एसी इकोनॉमी श्रेणी के 3 कोच, स्लीपर श्रेणी के 6 कोच और सामान्य श्रेणी के 4 कोच लगे हैं। सभी कोच एलएचबी श्रेणी के लगाए गए हैं, जो कि सुविधाजनक और सुरक्षा की दृष्टि से काफी मजबूत होते हैं।

उत्तराखंड में जल्द लागू होगा यूनिफार्म सिविल कोड, समिति ने CM धामी को सौंपा नियमावली का फाइनल ड्राफ्ट।

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उत्तराखंड में अब जल्द ही  समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू होने जा रहा है। आज शुक्रवार(18 अक्तूबर) को विशेषज्ञ समिति ने यूसीसी नियमावली का ड्राफ्ट मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सौंप दिया है। सीएम धामी ने कहा कि सभी को समान न्याय और  समान अवसर मिले इसके लिए यूसीसी लागू किया जा रहा है।

9 नवंबर को यूसीसी लागू करने की तैयारी-

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में घोषणा की थी कि सरकार नौ नवंबर को उत्तराखंड स्थापना दिवस पर यूसीसी लागू करना चाहती है। ऐसे में अब समीति के फाइनल नियमावली का ड्राफ्ट साैंपने के बाद पूरी उम्मीद जताई जा रही है कि यूसीसी उत्तराखंड में 9 नवंबर को लागू हो जाएगा।

 

यूसीसी में ये है खास-

नियमावली में मुख्य रूप से चार भाग हैं। जिसमें विवाह एवं विवाह-विच्छेद लिव-इन रिलेशनशिप, जन्म एवं मृत्य पंजीकरण तथा उत्तराधिकार संबंधी नियमों के पंजीकरण संबंधी प्रक्रियाएं हैं।

ऑनलाइन मिल सकेगी सारी जानकारी-

जन सामान्य की सुलभता को देखते हुए यूसीसी के लिए एक पोर्टल और मोबाइल एप भी तैयार की गई है, इसमें पंजीकरण और अपील आदि की समस्त सुविधाएं जन सामान्य को ऑनलाईन माध्यम से सुलभ हो सके।

यूसीसी लागू होगा तो यह आएंगे बदलाव-

  • सभी धर्म-समुदायों में विवाह, तलाक, गुजारा भत्ता और विरासत के लिए एक ही कानून।
  • 26 मार्च 2010 के बाद से हर दंपती के लिए तलाक व शादी का पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।
  • ग्राम पंचायत, नगर पंचायत, नगर पालिका, नगर निगम, महानगर पालिका स्तर पर पंजीकरण की सुविधा।
  • पंजीकरण न कराने पर अधिकतम 25,000 रुपये का जुर्माना।
  • पंजीकरण नहीं कराने वाले सरकारी सुविधाओं के लाभ से भी वंचित रहेंगे।
  • विवाह के लिए लड़के की न्यूनतम आयु 21 और लड़की की 18 वर्ष होगी।
  • महिलाएं भी पुरुषों के समान कारणों और अधिकारों को तलाक का आधार बना सकती हैं।
  • हलाला और इद्दत जैसी प्रथा खत्म होगी। महिला का दोबारा विवाह करने की किसी भी तरह की शर्तों पर रोक होगी।
  • कोई बिना सहमति के धर्म परिवर्तन करता है तो दूसरे व्यक्ति को उस व्यक्ति से तलाक लेने व गुजारा भत्ता लेने का अधिकार होगा।
  • एक पति और पत्नी के जीवित होने पर दूसरा विवाह करना पूरी तरह से प्रतिबंधित होगा।
  • पति-पत्नी के तलाक या घरेलू झगड़े के समय पांच वर्ष तक के बच्चे की कस्टडी उसकी माता के पास रहेगी।
  • संपत्ति में बेटा और बेटी को बराबर अधिकार होंगे।
  • जायज और नाजायज बच्चों में कोई भेद नहीं होगा।
  • नाजायज बच्चों को भी उस दंपती की जैविक संतान माना जाएगा।
  • गोद लिए, सरगोसी से असिस्टेड री प्रोडेक्टिव टेक्नोलॉजी से जन्मे बच्चे जैविक संतान होंगे।
  • किसी महिला के गर्भ में पल रहे बच्चे के संपत्ति में अधिकार संरक्षित रहेंगे।
  • कोई व्यक्ति किसी भी व्यक्ति को वसीयत से अपनी संपत्ति दे सकता है।
  • लिव इन में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए वेब पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य होगा।
  • युगल पंजीकरण रसीद से ही किराया पर घर, हॉस्टल या पीजी ले सकेंगे।
  • लिव इन में पैदा होने वाले बच्चों को जायज संतान माना जाएगा और जैविक संतान के सभी अधिकार मिलेंगे।
  • लिव इन में रहने वालों के लिए संबंध विच्छेद का भी पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।
  • अनिवार्य पंजीकरण न कराने पर छह माह के कारावास या 25 हजार जुर्माना या दोनों का प्रावधान होंगे।

Uttarakhand: अब बुजुर्ग और बच्चे भी कर सकेंगे आदि कैलाश और ओम पर्वत के दर्शन, जानिए किस दिन से शुरू होगी हेली सेवा।

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15 नवंबर से पिथौरागढ़ के नैनी सैनी एयरपोर्ट से प्रस्तावित हेलिकॉप्टर सेवा में बुजुर्ग और बच्चे भी आदि कैलाश और ओम पर्वत के दर्शन कर सकेंगे। इसके लिए कंपनी ने लगभग एक हफ्ते का सफल ट्रायल पूरा कर लिया है।

जौलीग्रांट हेलिपैड से बदरी-केदार दो धामों के लिए उड़ान भरने वाली हेली कंपनी रुद्राक्ष एविएशन 15 नवंबर से पिथौरागढ़ के नैनी सैनी हवाई अड्डे से भगवान शिव के निवास स्थान आदि कैलाश और ओम पर्वत के लिए हवाई दर्शन सेवा शुरू करने जा रही है। यात्रा में बुजुर्गों के अलावा बच्चे भी भगवान शिव के निवास स्थान के दर्शन कर सकेंगे।

हवाई यात्रा लगभग दो घंटे की होगी। नैनी सैनी एयरपोर्ट से एमआई 17 हेलिकॉप्टर सुबह करीब साढ़े आठ बजे 18 यात्रियों को लेकर उड़ान भरेगा और यह दिन में एक ही फेरा लगाएगा। हेलिकॉप्टर सेवा 15 नवंबर से फरवरी तक संचालित की जाएगी। हेलिकॉप्टर में यात्रा करने वाले सभी यात्रियों को ऑक्सीजन मास्क लगाना होगा।

साथ ही मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट देना अनिवार्य होगा। यात्रा की बुकिंग ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से होगी। फिलहाल संबंधित कंपनी ने पर्यटन विभाग और सरकार को यात्रा के संबंध में पूरा शेड्यूल बनाकर दे दिया है।

ऊपर से ही कराए जाएंगे दर्शन-
रुद्राक्ष एविएशन का हेलिकॉप्टर श्रद्धालुओं को दोनों पर्वतों के दर्शन ऊपर से ही कराएगा। ओम पर्वत की ऊंचाई करीब 5,590 मीटर और आदि कैलाश की ऊंचाई करीब 6,638 मीटर है। इस अति दुर्गम पहाड़ में कई मैगनेटिक फील्ड बताए जाते हैं, जिससे यहां चढ़ाई कर यात्रा को काफी कठिन माना जाता है।

आदि कैलाश और ओम पर्वत की यात्रा ऊपर से ही कराई जाएगी, जिसमें बुजुर्ग भी जा सकेंगे। सभी श्रद्धालुओं को मेडिकल फिटनेस देना होगा। यात्रा में करीब सवा दो घंटे का समय लगेगा।

 

Chamoli: 56 साल बाद सैनिक की पार्थिव देह पहुंचेगी गांव, बर्फ में था शव सुरक्षित, कई साल राह देखती रहीं पत्नी।

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चमोली जिले के थराली तहसील के गांव कोलपुड़ी के लापता सैनिक की पार्थिव देह 56 साल बाद अपने गांव पहुंचेगी। गांव के नारायण सिंह वर्ष 1968 में हिमाचल प्रदेश के रोहतांग दर्रे में वायुसेना के एएन-12 विमान दुर्घटनाग्रस्त होने पर लापता हो गए थे। 56 साल बाद जिन चार सैनिकों के अवशेष मिले हैं उनमें एक कोलपुड़ी गांव के नारायण सिंह का शव भी शामिल है।

कोलपुड़ी गांव के प्रधान और नारायण सिंह के भतीजे जयवीर सिंह ने बताया कि सोमवार को सेना के अधिकारियों ने सूचना दी उनकी पहचान हो जाने की सूचना दी। उन्होंने बताया कि जेब में मिले पर्स में एक कागज में नारायण सिंह ग्राम कोलपुड़ी और बसंती देवी नाम दर्ज था। साथ ही उनकी वर्दी के नेम प्लेट पर भी उनका नाम लिखा था।

 

सेना के अधिकारियों ने जयवीर सिंह को बताया कि बर्फ में शव सुरक्षित था, लेकिन बर्फ से बाहर निकालने के बाद शव गलने लगा है, जिससे उसे सुरक्षित किया जा रहा है। साथ ही उनका डीएनए सैंपल लिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि रिकार्ड के अनुसार नारायण सिंह सेना के मेडिकल कोर में तैनात थे। उनका पार्थिव शरीर बृहस्पतिवार तक गांव पहुंचने की संभावना जताई जा रही है

42 साल राह देखते रहीं पत्नी-

पुरानी यादों में खोये जयवीर सिंह बोले कि माता बसंती देवी ने बताया था कि पति नारायण सिंह सेना में तैनात थे। वह साल में एक बार घर आते थे, अक्सर पत्रों से ही हाल पता लगता था। एक बार एक टेलीग्राम आया जिसमें अंग्रेजी में विमान के लापता होने और उसमें नारायण सिंह के लापता होने की बात लिखी थी। उसके बाद परिवारीजन इंतजार करते रहे लेकिन कोई खबर नहीं आई। मां जब तक जिंदा थी नारायण सिंह का इंतजार करती रहीं। वर्ष 2011 में बसंती देवी की मृत्यु हो गई।

सौम्य स्वभाव के थे नारायण सिंह-

नारायण सिंह के साथी रहे कोलपुड़ी के सूबेदार गोविंद सिंह, सूबेदार हीरा सिंह बिष्ट और भवान सिंह नेगी बताते हैं कि नारायण सिंह बहुत सौम्य स्वभाव के थे। बचपन से ही सेना के प्रति उनका जुनून था। 1965 के भारत-पाक युद्ध में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वे एएमसी में नियुक्त थे।

Uttarakhand News: पिथौरागढ़ का अंतिम गांव नामिक अब होगा रोशन, 340 परिवारों को अब 24 घंटे मिलेगी बिजली।

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पिथौरागढ़ जिले का अंतिम गांव जल्द ही बिजली की रोशनी से जगमगाएगा। यहां पहली बार ग्रिड से बिजली पहुंचेगी। 340 परिवारों के घर रोशन होंगे। यूपीसीएल ने इसकी कवायद शुरू कर दी है। मुनस्यारी विकासखंड मुख्यालय से 50 किमी दूर नामिक जिले का अंतिम गांव है। इस दुर्गम गांव में पहुंचने के लिए 24 किमी पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। अब तक नामिक बिजली से रोशन नहीं हो सका है, इस गांव के 340 परिवारों की एक हजार से अधिक की आबादी दुश्वारियां झेल रही हैं।

अब पहली बार नामिक में बिजली पहुंचेगी इसकी पहल यूपीसीएल ने की है। गांव को रोशन करने के लिए 3.46 करोड़ रुपये खर्च होंगे जिसकी स्वीकृति मिल चुकी है। यूपीसीएल का दावा है कि जल्द ही यहां ग्रिड से बिजली पहुंचाई जाएगी।

15 किमी लंबी बिछेगी लाइन, लगेंगे 12 ट्रांसफार्मर
धारचूला यूपीसीएल के ईई बीके बिष्ट ने बताया कि गोला गांव तक ग्रिड से बिजली पहुंचाई गई है। यहां से नामिक तक बिजली पहुंचाने के लिए 11 केवीए की 15 किमी लंबी लाइन बिछाई जाएगी। वहीं नामिक को रोशन करने के लिए 12 ट्रांसफार्मर स्थापित होंगे।

 

उरेडा की योजना से सिर्फ चार घंटे मिलती है बिजली-
नामिक गांव में अब तक ग्रिड से बिजली नहीं पहुंची है। उरेडा की बिजली परियोजना से भी ग्रामीणों को राहत नहीं मिल रही है। ऐसा इसलिए कि इस छोटी परियोजना से ग्रामीण सिर्फ दो घंटे सुबह और दो घंटे शाम को ही घरों को रोशन कर सकते हैं। बल्ब के अलावा कोई अन्य उपकरणों का प्रयोग नहीं किया जा सकता।

नामिक गांव को प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना के तहत चयनित किया गया है। यहां ग्रिड से बिजली पहुंचेगी। ग्रामीणों को पर्याप्त बिजली मिलेगी। योजना को धरातल पर उतारने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई है। जल्द काम शुरू होगा।
– डीएस बिष्ट, अधीक्षण अभियंता, यूपीसीएल, पिथौरागढ़।

उत्तराखंड में 6.55 लाख लोगों के घर लगाए जाएंगे स्मार्ट मीटर, अब फोन से कर सकेंगे रिचार्ज।

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र्जा निगम ने प्रदेश में बिजली के पुराने मीटरों को बदलकर स्मार्ट मीटर लगाने की कवायद प्रारंभ कर दी है। कुमाऊं में 6.55 लाख उपभोक्ताओं को नए मीटरों से जोड़ा जाना है। इसके लिए निगम ने अडानी समूह की कंपनी से अनुबंध किया है।

अनुबंध होने के बाद कंपनी ने उपभोक्ताओं के स्तर पर सर्वे शुरू कर दिया है। मैदानी में नगर व ग्रामीण दोनों इलाकों में स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे, जबकि पर्वतीय क्षेत्रों में सिर्फ नगर की परिधि में आने वाले घरों व प्रतिष्ठानों में मीटर बदले जाएंगे।   केंद्र सरकार की पुनर्निर्मित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) के अंतर्गत स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाया जा रहा है।

मीटर बदलने का कार्य जारी-

अनुबंधित कंपनी के सर्किल प्रभारी हरीश तिवारी ने बताया कि पहले चरण में ऊर्जा निगम के सभी विद्युत उपकेंद्र को स्मार्ट मीटर के लिए विकसित किया जाना है। इसे लेकर सर्वे हो चुका है और हल्द्वानी क्षेत्र के कुछ उपकेंद्रों में नए स्मार्ट वितरण मीटर लगा दिए गए हैं। साथ ही कुमाऊं के अन्य उपकेंद्रों में भी मीटर बदलने का काम चरणबद्ध तरीके से हो रहा है।

वहीं, उपभोक्ता स्तर का सर्वे प्रारंभ कर दिया गया है। इसमें कंपनी की ओर से नियुक्त सर्वेकर्मी घर-घर जाकर सर्वेक्षण कर रहे हैं। एप्लिकेशन के माध्यम से सर्वे किया जा रहा है और पूरा रिकार्ड आनलाइन दर्ज कर रहे हैं। मंडल में 20 हजार सर्वे पूरा होने पर नए मीटर लगाने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी जाएगी। इसमें सर्वे और मीटर लगाने का काम समानांतर चलेगा।

ऐसे काम करेगा स्मार्ट प्रीपेड मीटर-

घरों में लगे बिजली के मीटर की प्रत्येक माह रीडिंग लेकर मीटर रीडर बिल प्रदान करता है। इसमें महीने में उपयोग की गई बिजली के अनुसार बिल प्राप्त होता है, जबकि स्मार्ट मीटर रिचार्ज आधारित होंगे। जिस तरह से मोबाइल फोन रिचार्ज करने पर संचालित होता है, ठीक उसी प्रकार बिजली के मीटर को भी रीचार्ज करना होगा। ऐसे में रिचार्ज के अनुसार ही बिजली आपूर्ति होगी।

अधिकारियों के अनुसार रिचार्ज खत्म होने के 48 घंटे के भीतर भुगतान करने का मौका मिलेगा। इस अवधि में सप्लाई चालू रहेगी।

मोबाइल एप से कर सकेंगे मीटर रीचार्ज-

स्मार्ट मीटर लगने के बाद उपभोक्ता मोबाइल एप से बिजली खर्च के पल-पल का रिकार्ड देख पाएंगे। इसी से मीटर रिचार्ज भी कर पाएंगे। एप में रिचार्ज खत्म होने को लेकर अलर्ट भी मिलता रहेगा। अनुबंधित कंपनी एप तैयार कर रही है। गूगल प्ले स्टोर और एप स्टोर से इसे डाउनलोड कर पाएंगे।

उपभोक्ता सर्वे में यह पूछा जाएगा-

  • उपभोक्ता संख्या एवं वर्तमान मीटर संख्या
  • उपभोक्ता का मोबाइल नंबर
  • मीटर की वर्तमान रीडिंग
  • बिजली के पुराने बिल

मीटर में लगाया जाएगा एयरटेल का सिम-

स्मार्ट मीटर में मोबाइल की तरह ही सिम कार्ड लगाया जाएगा। मीटर लगा रही कंपनी ने कुमाऊं में निजी दूरसंचार कंपनी एयरटेल के साथ इसके लिए अनुबंध किया है। ऐसे में मंडल के सभी क्षेत्रों में संबंधित कंपनी को अपने नेटवर्क की सुविधा बेहतर तरीके से प्रदान करनी होगी।

सर्वे कर्मियों को बताएं सही मोबाइल नंबर-

स्मार्ट मीटर लगने के बाद उपभोक्ता मोबाइल नंबर काफी अहम हो जाएगा। मीटर रिचार्ज करने के साथ ही उपयोग का विवरण देखने के लिए भी मोबाइल नंबर से ही एप में लागिन करना होगा। ऐसे में घर में सर्वे करने आने वाले कर्मचारी को अपना सही मोबाइल नंबर बताएं। यदि पुराना नंबर या अन्य विवरण परिवर्तित कराना है तो सर्वे के दौरान ही कराया जा सकता है।