Category Archive : राजनीति

Uttarakhand: UCC विधेयक हुआ पेश, शादी और तलाक से लेकर उत्तराधिकार तक बदल जाएंगे नियम, जानिए UCC से उत्तराखंड में क्या कुछ बदलेगा?

356 Minutes Read -

उत्तराखंड देश का पहला वो राज्य बन सकता है जो सबसे पहले समान नागरिक संहिता यानी (यूसीसी) लागू कर सकता है। चार फरवरी को उत्तराखंड कैबिनेट से यूसीसी विधेयक को मंजूरी मिलने के बाद उसे आज विधानसभा में पेश किया गया। अब राज्यपाल से मंजूरी मिलने के बाद विधेयक कानून बन जाएगा।

आज उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य विधानसभा में समान नागरिक संहिता उत्तराखंड 2024 विधेयक पेश किया। समान नागरिक संहिता उत्तराखंड 2024 विधेयक पेश करने के बाद राज्य विधानसभा में विधायकों ने वंदे मातरम और जय श्री राम के खूब नारे लगाए। जानिए उत्तराखंड में UCC लागू होने से क्या कुछ बदलेगा।

मसौदे में 400 से अधिक धाराएं- 
 

समान नागरिक संहिता विधेयक पास होने के बाद ये कानून बन जाएगा। इसके साथ ही उत्तराखंड देश में यूसीसी लागू करने वाला आजादी के बाद पहला राज्य होगा। सूत्रों के अनुसार, मसौदे में 400 से ज्यादा धाराएं हैं, जिसका लक्ष्य पारंपरिक रीति-रिवाजों से पैदा होने वाली विसंगतियों को दूर करना है।

इन समस्याओं के कारण हो रही UCC की वकालत-


समान नागरिक संहिता के प्रबल हिमायती एडवोकेट अश्वनी उपाध्याय के मुताबिक, समान नागरिक संहिता लागू नहीं होने से कई समस्याएं हैं। जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं।

UCC लागू होने के बाद बहुविवाह पर लगेगी रोक-


कुछ कानून में बहुविवाह करने की छूट है। चूंकि हिंदू, ईसाई और पारसी के लिए दूसरा विवाह अपराध है और सात वर्ष की सजा का प्रावधान है। इसलिए कुछ लोग दूसरा विवाह करने के लिए धर्म बदल लेते हैं। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के लागू होने के बाद बहुविवाह पर पूरी तरह से रोक लग जाएगी।

शादी के लिए अब कानूनी उम्र 21 साल होगी तय-


विवाह की न्यूनतम उम्र कहीं तय तो कहीं तय नहीं है। एक धर्म में छोटी उम्र में भी लड़कियों की शादी हो जाती है। वे शारीरिक व मानसिक रूप से परिपक्व नहीं होतीं। जबकि अन्य धर्मों में लड़कियों के 18 और लड़कों के लिए 21 वर्ष की उम्र लागू है। कानून बनने के बाद युवतियों की शादी की कानूनी उम्र 21 साल तय हो जाएगी।

 

बिना रजिस्ट्रेशन के लिव इन रिलेशन में रहने पर अब होगी जेल-


इसके साथ ही लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वालों के लिए रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होगा। समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद उत्तराखंड में लिव इन रिलेशनशिप का वेब पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होगा। रजिस्ट्रेशन न कराने पर युगल को छह महीने का कारावास और 25 हजार का दंड या दोनों हो सकते हैं। रजिस्ट्रेशन के तौर पर जो रसीद युगल को मिलेगी उसी के आधार पर उन्हें किराए पर घर, हॉस्टल या पीजी मिल सकेगा। यूसीसी में लिव इन रिलेशनशिप को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। इसके मुताबिक, सिर्फ एक व्यस्क पुरुष व वयस्क महिला ही लिव इन रिलेशनशिप में रह सकेंगे। वे पहले से विवाहित या किसी अन्य के साथ लिव इन रिलेशनशिप या प्रोहिबिटेड डिग्रीस ऑफ रिलेशनशिप में नहीं होने चाहिए। पंजीकरण कराने वाले युगल की सूचना रजिस्ट्रार को उनके माता-पिता या अभिभावक को देनी होगी।

विवाह पंजीकरण कराना होगा जरूरी-


कानून लागू होने के बाद विवाह पंजीकरण कराना होगा। अगर ऐसा नहीं कराया तो किसी भी सरकारी सुविधा से वंचित होना पड़ सकता है।

UCC लागू होने के बाद उत्तराधिकार की प्रक्रिया होगी सरल-


एक कानून में मौखिक वसीयत व दान मान्य है। जबकि दूसरे कानूनों में शत प्रतिशत संपत्ति का वसीयत किया जा सकता है। यह धार्मिक यह मजहबी विषय नहीं बल्कि सिविल राइट या मानवाधिकार का मामला है। एक कानून में उत्तराधिकार की व्यवस्था अत्यधिक जटिल है। पैतृक संपत्ति में पुत्र व पुत्रियों के मध्य अत्यधिक भेदभाव है। कई धर्मों में विवाहोपरांत अर्जित संपत्ति में पत्नी के अधिकार परिभाषित नहीं हैं। विवाह के बाद बेटियों के पैतृक संपत्ति में अधिकार सुरक्षित रखने की व्यवस्था नहीं है। ये अपरिभाषित हैं। इस कानून के लागू होने के बाद उत्तराधिकार की प्रक्रिया सरल बन जाएगी।

बुजुर्ग मां-बाप के भरण-पोषण की जिम्मेदारी होगी पत्नी पर –


कानून लागू होने के बाद नौकरीपेशा बेटे की मौत की स्थिति में बुजुर्ग मां-बाप के भरण-पोषण की पत्नी पर जिम्मेदारी होगी। उसे मुआवजा भी मिलेगा। पति की मौत की स्थिति में यदि पत्नी दोबारा विवाह करती है तो उसे मिला हुआ मुआवजा मां-बाप के साथ साझा किया जाएगा।

गोद लेने का बदलेगा नियम – 


कानून लागू होने के बाद राज्य में मुस्लिम महिलाओं को भी गोद लेने का अधिकार मिलेगा। गोद लेने की प्रक्रिया आसान होगी। इसके साथ ही अनाथ बच्चों के लिए संरक्षकता की प्रक्रिया सरल होगी। कानून लागू होने के बाद दंपति के बीच झगड़े के मामलों में उनके बच्चों की कस्टडी उनके दादा-दादी को दी जा सकती है।

UCC में होगी तलाक लेने की प्रक्रिया-

पति-पत्नी दोनों को तलाक के समान आधार उपलब्ध होंगे। तलाक का जो ग्राउंड पति के लिए लागू होगा, वही पत्नी के लिए भी लागू होगा। फिलहाल पर्सनल लॉ के तहत पति और पत्नी के पास तलाक के अलग-अलग ग्राउंड हैं।

UCC से पहले की तलाक लेने की प्रक्रिया-


अगर इस्लाम के तीनों तलाक प्रक्रिया की तुलना करें तो ये काफी अलग हैं। तीन तलाक झटके में किसी भी माध्यम से तीन बार तलाक बोलकर दिया जा सकता है। इसमें तो कई बार लोग फोन पर मैसेज या कॉल के माध्यम से तलाक दे दिया करते थे। तलाक-ए-हसन और तलाक-ए-अहसन में तलाक की एक प्रक्रिया और निश्चित अवधि होती है। इन दोनों प्रक्रियाओं में पति पत्नी को फैसला लेने के लिए वक्त मिलता है। इसके अलावा मुस्लिम समाज में महिलाओं के तलाक लेने के लिए भी विकल्प है। महिलाएं खुला तलाक ले सकती हैं। कोर्ट के हस्तक्षेप के बिना कोई महिला खुला तलाक के तहत पति से तलाक लेने की बात कर सकती है। हालांकि इस तरह के तलाक में महिला को मेहर यानी निकाह के समय पति की तरफ से दिए गए पैसे चुकाने होते हैं। साथ ही खुला तलाक में पति की रजामंदी भी जरूरी होती है।

मई 2022 में UCC पर समिति का हुआ था गठन-


दरअसल, उत्तराखंड सरकार ने मई 2022 में सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश के नेतृत्व में विशेषज्ञों की एक समिति गठित की थी। सरकार ने एक अधिसूचना 27 मई 2022 को जारी की गई थी और शर्तें 10 जून 202 को अधिसूचित की गई थीं। समिति ने बैठकों, परामर्शों, क्षेत्र के दौरे और विशेषज्ञों और जनता के साथ बातचीत के बाद मसौदा तैयार किया। इस प्रक्रिया में 13 महीने से अधिक का समय लगा। जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति ने अपनी पहली बैठक 4 जुलाई 2022 को दिल्ली में की थी। मसौदे के महत्वपूर्ण पहलुओं पर जुलाई 2023 में एक मैराथन बैठक में विचार-विमर्श किया गया और इसे अंतिम रूप दिया गया। कमेटी को समान नागरिक संहिता पर ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से करीब 20 लाख सुझाव मिले हैं। इनमें से कमेटी ने लगभग ढाई लाख लोगों से सीधे मिलकर इस मुद्दे पर उनकी राय जानी है।

जानिए क्या है समान नागरिक संहिता ?

समान नागरिक संहिता का अर्थ होता है भारत में रहने वाले हर नागरिक के लिए एक समान कानून होना, चाहे वह किसी भी धर्म या जाति का क्यों न हो। समान नागरिक संहिता लागू होने से सभी धर्मों का एक कानून होगा। शादी, तलाक, गोद लेने और जमीन-जायदाद के बंटवारे में सभी धर्मों के लिए एक ही कानून लागू होगा।

यह मुद्दा कई दशकों से राजनीतिक बहस के केंद्र में रहा है। UCC केंद्र की मौजूदा सत्ताधारी भाजपा के लिए जनसंघ के जमाने से प्राथमिकता वाला एजेंडा रहा है।  भाजपा सत्ता में आने पर UCC को लागू करने का वादा करने वाली पहली पार्टी थी और यह मुद्दा उसके 2019 के लोकसभा चुनाव घोषणा पत्र का भी हिस्सा था।

ED की रडार पर 17 सीएम और पूर्व CM समेत कई सियासतदान, कई पूर्व मंत्री भी शामिल.

335 Minutes Read -

केंद्रीय जांच एजेंसी ‘ईडी’, के रडार पर विभिन्न राज्यों के 17 मौजूदा एवं पूर्व मुख्यमंत्री हैं। इनमें कुछ मुख्यमंत्रियों से पूछताछ हो चुकी है, तो कई सियासतदानों का नंबर लगना बाकी है। ईडी जांच की रडार, केवल मुख्यमंत्रियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके निशाने पर पूर्व केंद्रीय गृह/वित्त/रेलवे जैसे बड़े मंत्रालयों का कार्यभार संभाल चुके नेता भी रहे हैं। जांच एजेंसी की इस फेहरिस्त में चार मौजूदा एवं पूर्व डिप्टी सीएम भी शामिल हैं। इनके अलावा देश के अन्य सियासतदान व उनके परिजन भी जांच एजेंसी के निशाने पर आ चुके हैं।

सोनिया गांधी से लेकर खरगे तक-

ईडी के निशाने पर आने वाले विपक्षी नेताओं में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, लालू प्रसाद यादव और राकांपा संस्थापक शरद पवार जैसे कई दिग्गज नेता रहे हैं। गत वर्ष केंद्रीय जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाने वाली कई विपक्षी पार्टियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक चिट्ठी लिखी थी। इनमें टीएमसी, आप, आरजेडी, नेशनल कांफ्रेंस, केसीआर की पार्टी, सपा और उद्धव बालासाहेब ठाकरे (यूबीटी) आदि दल शामिल थे। इन सभी दलों के नेता जांच एजेंसियों के निशाने पर रहे हैं। अरविंद केजरीवाल ने कहा था, हमारे देश के प्रधानमंत्री ने ठान लिया है कि अगर भाजपा को वोट नहीं दोगे और किसी दूसरी पार्टी को वोट दोगे, तो उस सरकार को किसी भी हाल में काम नहीं करने दिया जाएगा। किसी राज्य में दूसरी पार्टी की सरकार बनती है, तो उसके नेताओं के पीछे ईडी और सीबीआई छोड़ दी जाती है। अब केजरीवाल ने आरोप लगाया है कि उन पर भाजपा में शामिल होने का दबाव बनाया जा रहा है। आप विधायकों को लालच देने की कोशिश हो रही है।

ईडी के रडार पर आए मौजूदा एवं पूर्व मुख्यमंत्री-

बिहार के पूर्व सीएम एवं केंद्रीय रेल मंत्री रहे लालू प्रसाद यादव एवं उनके परिवार के सदस्यों से जमीन के बदले नौकरी, घोटाले में पूछताछ की जा रही है। यह मामला सीबीआई द्वारा दर्ज किया गया था, लेकिन बाद में ईडी ने भी इस केस की जांच शुरू की। छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल के खिलाफ भी ईडी की जांच चल रही है। इनमें कोयला ट्रांसपोर्टेशन व महादेव गेमिंग एप आदि शामिल हैं। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को मानेसर जमीन मामला और पंचकुला के ‘एजेएल’ केस में ईडी को जांच का सामना करना पड़ रहा है। राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत भी जांच एजेंसियों के निशाने पर रहे हैं। यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के कार्यकाल में लिए गए कई फैसलों और विकास योजनाओं के मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियां कर चुकी हैं। सपा प्रमुख और पूर्व सीएम अखिलेश यादव भी सीबीआई व ईडी के रडार पर रहे हैं। इनमें गोमती रिवर फ्रंट और माइनिंग घोटाला जैसे केस शामिल हैं।

ये मुख्यमंत्री/पूर्व सीएम भी जांच से अछूते नहीं-

पंजाब के पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी से अवैध रेत खनन मामले में ईडी पूछताछ कर चुकी है। जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती भी ईडी जांच का सामना कर रहे हैं। इन केसों में जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन और जम्मू कश्मीर बैंक से जुड़ा मामला शामिल हैं। अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नेबाम टुकी के खिलाफ 2019 में सीबीआई ने जांच शुरू की थी। उसी आधार पर ईडी ने भी मामले की जांच प्रारंभ की। मणिपुर के पूर्व सीएम ओकराम इबोबी पर भ्रष्टाचार के आरोप में पहले सीबीआई ने केस दर्ज किया था। उसके बाद ईडी ने पीएमएलए के तहत मामला दर्ज किया। गुजरात के पूर्व सीएम शंकर सिंह वाघेला भी सीबीआई व ईडी के रडार पर आ चुके हैं। उन पर केंद्रीय मंत्री रहते हुए मुंबई में जमीन घोटाले का आरोप लगा था। तत्कालीन केंद्रीय टेक्सटाइल मंत्री रहे वघेला पर जमीन की खरीद फरोख्त में सरकारी खजाने को 709 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने का आरोप था। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री रहे शरद पवार भी ईडी जांच के दायरे में आ चुके हैं।

ईडी की हिरासत में सोरेन तो केजरीवाल को समन-

तेलंगाना के मुख्यमंत्री सीएम रेवंथ रेड्डी भी ईडी के रडार पर रहे हैं। उन पर आरोप था कि उन्होंने 2015 में एमएलसी इलेक्शन में पचास लाख रुपये की रिश्वत दी थी। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पिछले दिनों मुख्यमंत्री का पद छोड़ा है। उन्हें जमीन घोटाले में ईडी ने गिरफ्तार कर लिया है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को कथित शराब घोटाले में ईडी की तरफ से पांच समन जारी हो चुके हैं। केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन भी जांच एजेंसी के निशाने पर रहे हैं। गोल्ड स्मगलिंग केस सहित दूसरे मामलों में वे ईडी जांच का सामना कर रहे हैं। हाल ही में उनकी बेटी वीणा विजयन की कंपनी के खिलाफ केंद्र सरकार ने जांच का आदेश दिया है। एसएनसी-लवलीन केरल जलविद्युत घोटाला, इस केस में भी पिनाराई विजयन को जांच का सामना करना पड़ा है। आंध्रप्रदेश के पूर्व सीएम वाईएस जगन मोहन रेड्डी भी कई तरह के वित्तीय मामलों को लेकर ईडी जांच का सामना कर रहे हैं।

ईडी के निशाने पर पूर्व केंद्रीय मंत्री व डिप्टी सीएम भी-

पूर्व केंद्रीय गृह/वित्त मंत्री पी. चिदंबरम, पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री पवन बंसल और पूर्व केंद्रीय रेल एवं श्रम और रोजगार मंत्री मल्लिकार्जुन खरगे को भी ईडी जांच का सामना करना पड़ा है। महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख, ईडी के मामले में जेल जा चुके हैं। कर्नाटक के मौजूदा डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार को भी ईडी जांच का सामना करना पड़ा है। बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव से भी ईडी द्वारा पूछताछ की जा रही है। दिल्ली के पूर्व सीएम मनीष सिसोदिया, ईडी के केस में जेल में हैं। महाराष्ट्र के मौजूदा डिप्टी सीएम अजित पवार के खिलाफ भी ईडी का मामला रहा है।

इन नेताओं को करना पड़ा जांच का सामना-

महाराष्ट्र में पूर्व मंत्री नवाब मलिक, ईडी केस में जेल जा चुके हैं। पश्चिम बंगाल के शारदा चिटफंड घोटाले में सीबीआई व ईडी की जांच के दायरे की आंच, कई नेताओं तक पहुंच चुकी है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबियों को जांच का सामना करना पड़ा है। पश्चिम बंगाल पुलिस और ईडी की जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि 80 फीसदी जमाकर्ताओं के पैसे का भुगतान किया जाना बाकी है। जब सीबीआई टीम ने पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के खिलाफ कार्रवाई की, तो जांच एजेंसी के अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया। इस मामले में सीएम ममता बनर्जी धरने पर भी बैठी थीं। तेलंगाना के सीएम की बेटी के. कविता, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में शरद पवार के पोते रोहित, पश्चिम बंगाल सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे पार्थ चटर्जी, शिवसेना के सांसद संजय राउत, टीएमसी सांसद अभिषेक, आरजेडी के एमएलसी सुनील सिंह, सांसद अशफाक करीम, फैयाज अहमद और पूर्व एमएलसी सुबोध राय भी जांच एजेंसी की रडार पर रहे हैं।

जांच एजेंसी के निशाने पर 95 फीसदी विपक्षी नेता-

कांग्रेस नेता अजय माकन के मुताबिक, विपक्षी नेताओं के पीछे जांच एजेंसी लगी रहती है। नतीजा, कई नेता, भाजपा की शरण में चले गए। आज उनसे जांच एजेंसी पूछताछ नहीं कर रही। एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की रिपोर्ट बताती है कि गत आठ वर्ष में लगभग 225 चुनावी उम्मीदवारों ने कांग्रेस पार्टी छोड़ दी थी। 45 फीसदी नेताओं ने भाजपा ज्वाइन की है। पार्टी छोड़ने वालों में हार्दिक पटेल, अश्विनी कुमार, आरपीएन सिंह, गुलाम नबी आजाद, जयवीर शेरगिल, ज्योतिरादित्य सिंधिया, सुनील जाखड़, जितिन प्रसाद, सुष्मिता देव, कीर्ति आजाद, अदिति सिंह, कैप्टन अमरिंदर सिंह, उर्मिला मातोंडकर, हिमंत बिस्व सरमा, हरक सिंह रावत, जयंती नटराजन, एन बीरेन सिंह और दिवंगत अजीत जोगी आदि शामिल हैं। माकन का कहना था कि मोदी सरकार में ईडी ने जिन राजनेताओं के यहां पर रेड की है या उनसे पूछताछ की है, उनमें 95 फीसदी विपक्ष के नेता हैं। इसमें सबसे ज्यादा रेड तो कांग्रेस पार्टी के नेताओं के घरों और दफ्तरों पर की गई हैं। पार्टी ने आशंका जताई है कि 2024 के लोकसभा चुनाव तक, विपक्ष के अनेक नेता, केंद्रीय जांच एजेंसियों के जाल में फंस सकते हैं। असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा, कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री येदियुरप्पा, नारायण राणे, रमन सिंह, मुकुल रॉय और सुवेंदु अधिकारी, आदि नेताओं के पीछे अब ईडी नहीं है। जनता सब समझती है कि ये नेता, अब ईडी की जांच से क्यों बच हुए हैं।

अब झारखंड में चंपई सरकार, विधानसभा में हासिल किया बहुमत, जानिए किसके साथ कितने विधायक?

287 Minutes Read -
 हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के बाद से झारखंड में चल रहे सियासी उथल-पुथल का दौर आखिरकार थम गया है। सियासी रस्साकशी के बीच चंपई सोरन की सरकार सदन में बहुमत साबित करने में सफल हो गई। उनके पक्ष में कुल 47 वोट पड़े। वहीं, विपक्ष में 29 वोट पड़े।
बता दें कि बहुमत परीक्षण से पहले राजनीति गलियारों में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे थे। विधायकों के टूटने के डर था। इस वजह से सभी विधायकों को हैदराबाद भेजा गया था। हालांकि, फ्लोर टेस्ट से एक दिन पहले यानि रविवार की रात सभी विधायक रांची पहुंचे।

इन विधायकों के टूटने की थी संभावनाएं –

फ्लोर टेस्ट से पहले यह संभावना जताई जा रही थी कि लोबिन हेम्ब्रम, सीता सोरेन और बसंत सोरेन चंपई सोरेन की सरकार को झटका दे सकते हैं और समर्थन करने से इनका कर सकते हैं, लेकिन वैसी नौबत नहीं आई। लोबिन हेम्ब्रम ने चंपई सोरेन सरकार को समर्थन देने का एलान किया।

हालांकि, चंपई सोरेन को फ्लोर टेस्ट से पहले जमशेदपुर पूर्वी के विधायक ने झटका दिया था। जमशेदपुर पर्वी से विधायक रहे और पूर्व सीएम रघुवर दास को हराने वाले विधायक सरयू राय ने चंपई सोरेन की सरकार को समर्थन देने से इनकार कर दिया था।

Budget 2024: बजट से बदल जाएगी 11 करोड़ किसानों की किस्मत, इन कदमों से मिलेगी अन्नदाताओं को मजबूती.

612 Minutes Read -

एक फरवरी को पेश किए गए अंतरिम बजट में कहने के लिए सरकार ने कोई बड़ा कदम नहीं उठाया है, लेकिन इसके बाद भी बजट की तमाम योजनाओं से किसानों को आर्थिक तौर पर मजबूत करने का काम किया गया है। सीधे तौर पर किसानों और ग्रामीण क्षेत्र की अर्थव्यवस्था से जुड़े कई ऐसे कदम इस अंतरिम बजट में उठाए गए हैं, जिससे किसानों को आर्थिक तौर पर सशक्त करने में मदद मिलेगी।

सरकार ने रखी अंतरिम बजट की मर्यादा-

कृषि क्षेत्र के विशेषज्ञ देविंदर शर्मा ने अमर उजाला से कहा कि कोई नई बड़ी घोषणा न करके सरकार ने इस बार अंतरिम बजट की मर्यादा रखी है। यह केवल लोकसभा चुनाव होने तक आवश्यक खर्च के लिए संसद से अनुमति लेने का बजट होता है। सरकार इसमें कोई नई बड़ी घोषणा नहीं कर सकती। चुनावी साल में यह अधिकार आने वाली नई सरकार के पास होता है। हालांकि, 2019 के लोकसभा चुनाव के पहले पीएम किसान सम्मान निधि की बड़ी घोषणा कर सरकार ने यह मर्यादा तोड़ी थी। माना जाता है कि उसे इस चुनावी घोषणा का बड़ा लाभ मिला था।

कोई बड़ी घोषणा न करने से मोदी सरकार का यह आत्मविश्वास भी साफ़ दिखाई पड़ता है कि वह किसी लोकप्रिय घोषणा के बिना भी चुनाव जीत सकती है। पीएम किसान सम्मान निधि, पीएम आवास योजना, उज्ज्वला योजना और राशन योजना जैसी कई योजनाएं हैं जिसका लाभ करोड़ों लोगों को मिल रहा है। सरकार का अनुमान है कि ये लाभार्थी उसे दोबारा सरकार में आने में मदद करेंगे।
हालांकि, कृषि क्षेत्र के लोग यह मान रहे थे कि केंद्र सरकार पीएम किसान निधि के अंतर्गत किसानों को दी जा रही आर्थिक सहायता (6,000 रुपये प्रति वर्ष) की राशि बढ़ा सकती है। फिलहाल आवश्यक खर्चों के दबाव में सरकार ने ऐसी कोई लोकप्रिय घोषणा करने से परहेज बरता है। लेकिन इसके बाद भी बजट में ऐसे कई प्रावधान किये गए हैं जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति बेहतर करने में मदद मिलेगी।

देविंदर शर्मा के अनुसार, बजट में ग्रामीण क्षेत्रों में दो करोड़ पीएम आवास बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इन घरों को बनाने में ग्रामीण लोगों को ही रोजगार मिलेगा। साथ ही गृह निर्माण की वस्तुओं की खपत बढ़ेगी। इससे भी इन क्षेत्रों के उद्योगों और ग्रामीणों को आर्थिक मदद मिलेगी। सरकार ने घर निर्माण में भी सहायता देने की घोषणा की है। इसका असर भी ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति बेहतर करेगी।

स्वयं सहायता समूहों से ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति बेहतर होती है। वे अपने घर को संभालने के साथ-साथ रोजगार के काम कर पाती हैं। इन समूहों में किसानों के घरों की महिलाएं ही काम करती हैं। इसलिए इससे भी किसानों की आर्थिक स्थिति बेहतर होगी।

आशा बहनों को आयुष्मान योजना का लाभ –

सरकार ने सभी आशा बहनों को आयुष्मान योजना का लाभ देने का निर्णय लिया है। इससे ग्रामीण महिलाओं को अपना इलाज कराने में पैसा नहीं खर्च करना पड़ेगा। अब तक इलाज में भारी पैसा खर्च होने से लोगों की आर्थिक स्थिति बिगड़ जाती थी। लेकिन अब आशा बहनों के परिवारों के साथ ऐसा नहीं होगा।

मछली पालन का काम ज्यादातर मामलों में बड़े औद्योगिक घरानों के कारोबारी नहीं करते। यह काम गांव-देहात में बसे छोटे-छोटे किसान ही करते हैं। केंद्र सरकार ने मत्स्य योजना को ज्यादा बढ़ावा देने की रणनीति बनाई है। किसानों को इसका भी लाभ मिलेगा। साथ ही जैविक क्षेत्र को बढ़ावा देकर, नैनो खादों का विकास कर भी किसानों की लागत कम करने की कोशिश की गई है।

सरकार ने एक करोड़ घरों में सौर ऊर्जा संयंत्रों को बढ़ावा देने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यानी, अब किसान अपने घरों या खाली जमीन पर सोलर प्लांट लगाकर न केवल मुफ्त बिजली प्राप्त कर सकते हैं, बल्कि अतिरिक्त बिजली को बेचकर हर महीने 15-20 हजार रुपये की कमाई भी कर सकते हैं। इससे देश के किसानों की तस्वीर बदल सकती है।

ये है चुनौती-

देश की 60 फीसदी आबादी आज भी गांवों में रहती है। इन्हें रोजगार के लिए कृषि क्षेत्र पर ही निर्भर करना पड़ता है। लेकिन कृषि क्षेत्र में केवल 1.8 फीसदी की वृद्धि हो रही है, जबकि आबादी का अनुपात कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है। यानी इसके बाद भी कृषि क्षेत्र में कम तेज वृद्धि के कारण रोजगार की चुनौती बनी रह सकती है।

 

Jharkhand: हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन बनेंगी झारखंड की मुख्यमंत्री !

266 Minutes Read -

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कि कथित लैंड स्कैम से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं जमीन घोटाले में पूछताछ के लिए ईडी हेमंत सोरेन को कई बार समन जारी कर चुकी है हालांकि कई समन जारी होने के बाद भी हेमंत सोरेन ईडी के सामने पेश नहीं हुए बीते दिनों ईडी की टीम ने हेमंत सोरेन से रांची स्थित उनके सरकारी आवास पर कई घंटे पूछताछ की थी इसके बाद ईडी ने फिर से समन जारी कर 29 या 30 जनवरी को पूछताछ के लिए पेश होने को कहा था शनिवार को हेमंत सोरेन के दिल्ली पहुंचने की जानकारी सामने आयी जिसके बाद ईडी की टीम दिल्ली स्थित हेमंत सोरेन के आवास पर उनसे पूछताछ के लिए पहुंची थी लेकिन हेमंत सोरेन वहां भी नहीं मिले लेकिन ईडी की टीम ने उनके दिल्ली आवास को पूरा खंगाला इतना ही नहीं प्रवर्तन निदेशालय  की टीम ने सोमवार को सोरेन के दिल्ली के शांति निकेतन में स्थित घर सहित 3 ठिकानों पर छापेमारी की टीम ने तलाशी के दौरान दो BMW कार से कुछ आपत्तिजनक दस्तावेज और 36 लाख रुपये नगद जब्त किए हैं मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हेमंत सोरेन ने ईडी को बताया है कि वह बुधवार को रांची स्थित आवास पर मिलेंगे।

सीएम सोरेन के बारे में जानकारी देने वाले को बीजेपी देगी 11 हजार रुपये-

अब माना जा रहा है कि मुख़्यमंत्री हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी कभी भी हो सकती है इसके लिए उनकी पार्टी में भी सरगर्मी बढ़ गयी है पार्टी  ने अपने सभी विधायकों को रांची नहीं छोड़ने को कहा है साथ ही JMM ने राज्य के मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य पर चर्चा के लिए  रांची में अहम बैठक भी बुलाई है,,झारखंड के राज्यपाल CP राधा कृष्ण का कहना है कि वह भी दूसरों की तरह सीएम का इंतजार कर रहे हैं. साथ ही जानकारी आ रही है कि डीजीपी, सेक्रेटरी और गृह सचिव को राज्यपाल में राजभवन बुलाया गया है साथ ही बीजेपी ने दावा किया है कि सीएम हेमंत सोरेन 30 घंटों से ज्यादा वक्त से लापता हैं ।

भाजपा ने झारखंड सीएम हेमंत सोरेन को भगोड़ा बता दिया है और सीएम के बारे में जानकारी देने वाले को 11 हजार रुपये इनाम देने का भी ऐलान कर दिया है भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर एक पोस्टर शेयर किया हैं, जिसमें उन्होंने सीएम के लापता होने का दावा किया है बता दें कि कुछ दिनों पहले ईडी ने उन्हें 10वां समन भेजा था और 29 जनवरी से 31 जनवरी के बीच पेश होने के लिए कहा था. अगर वह ED के सामने पेश नहीं होते हैं तो एजेंसी उनके आवास पर जाकर पूछताछ करेगी।

क्या कल्पना सोरेन बनेंगी झारखण्ड की नयी मुख्यमंत्री-

मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगने और ईडी के शिकंजे के बाद  हेमंत के सियासी भविष्य को लेकर कयासबाजी चल रही है दावा किया जा रहा है कि हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन को झारखंड का नया मुख्यमंत्री बनाए जाने की तैयारी चल रही है  बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने सोमवार को दावा किया कि हेमंत ने अपने सभी सहयोगी विधायकों को सामान और बैग के साथ रांची बुलाया है हेमंत सड़क मार्ग के जरिए रांची पहुंचेंगे और कल्पना के नाम की घोषणा करेंगे बीजेपी के इस दावे के बाद झारखंड की सियासत गरमा गई है इन दावों ने 27 साल पुराने बिहार की राजनीतिक ताजपोशी को याद दिला दिया है तब आरजेडी प्रमुख लालू यादव की गिरफ्तारी पर तलवार लटकी थी और उन्होंने सीएम की कुर्सी बचाने के लिए अपनी पत्नी राबड़ी देवी को नया सीएम बनाकर चौंका दिया था बीजेपी लगातार हेमंत सोरेन को घेर रही है और गिरफ्तारी की आशंका के चलते अपनी पत्नी कल्पना सोरेन को राज्य की कमान सौंपने की तैयारी का दावा कर रही है।

हालांकि, कल्पना सोरेन को झारखंड का नया सीएम बनाने के दावे काफी समय से किए जा रहे हैं लेकिन हेमंत की पत्नी और झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रमुख शिबू सोरेन की बहू कल्पना सोरेन राजनीतिक सुर्खियों से दूर रहती हैं वे एक स्कूल का संचालन करती है कई लोगों का मानना है कि राजनीतिक परिवार में शादी होने के कारण अगर उन्हें नेतृत्व करने का मौका मिलता है तो वे झारखंड के राजनीतिक हालात को संभालने में सक्षम हो सकती हैं एक व्यवसायी महिला के रूप में कल्पना तब सुर्खियों में आईं थीं, जब पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता रघुवर दास ने आरोप लगाया था कि हेमंत सोरेन ने अपनी पत्नी के व्यवसाय के लिए एक प्लॉट आवंटित करने के लिए अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया है ।

सीएम सोरेन को लेकर एयरपोर्ट पर भी अलर्ट- 

सवाल उठता है कि आखिर हेमंत सोरेन कहां हैं और क्यों सामने नहीं आ रहे मनी लॉन्ड्रिंग और खनन घोटाले में हेमंत सोरेन से पूछताछ के लिए ईडी की टीम समन कर रही है लेकिन सोरेन पेश नहीं हो रहे हैं वैसे जानकारी मिली है कि हेमंत सोरेन के दफ्तर से ईडी को मेल किया गया है कि वो 31 जनवरी को रांची में अपने आवास पर ईडी के सवालों का जवाब देंगे एहतियात बरतते हुए ED की टीम ने हेमंत सोरेन को लेकर एयरपोर्ट पर भी अलर्ट भेज दिया है।

बिहार में तेज हुई सियासी हलचल, BJP के साथ सरकार बना सकते हैं नीतीश कुमार, सुशील मोदी बनेंगे डिप्टी CM?

245 Minutes Read -

Bihar Politics: बिहार में इस वक्त सियासी भूकंप आया हुआ है। बिहार में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनता दल और जनता दल (यूनाइटेड) के तनाव के बीच सूत्रों के हवाले से कई ख़बरें निकलकर सामने आ रही है. ख़बर ये निकलकर आ रही है कि नीतीश कुमार (Nitish Kumar) का भाजपा के साथ जाना लगभग पूरी तरह से तय माना जा रहा है. 

अगले 48 घंटे बिहार की राजनीति में काफी अहम माने जा रहे हैं।  सूत्रों के अनुसार, 28 जनवरी नीतीश का शपथ ग्रहण समारोह हो सकता है। सूत्रों से मिली जानकारी की माने तो नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री बने रहेंगे, जबकि उपमुख्यमंत्री बीजेपी से सुशील मोदी होंगे।

ये तो सूत्रों के हवाले से निकलकर सामने आया है. जैसे ही ख़बर मीडिया में आई, बयानबाजी का दौर शुरू हो गया. इस पूरे मसले पर नीतीश कुमार ने कोई बयान नहीं दिया लेकिन लेकिन सुशील मोदी, जिनके कहीं न कहीं फिर से डिप्टी सीएम बनने के योग हैं – उन्होंने कहा, कि  जो दरवाजे बंद हैं, वे खुल सकते हैं. राजनीति संभावनाओं का खेल है. इससे ज्यादा कोई टिप्पणी नहीं कर सकता.दूसरी तरफ,पटना और दिल्ली में बैठकों का दौर जारी है। राजधानी पटना में भाजपा ने अपने सभी विधायकों को मौजूद रहने को कहा है।

कथित तौर पर नीतीश कुमार अपने दोनों सहयोगियों यानी लालू प्रसाद यादव की राजद और इंडिया ब्लॉक की कांग्रेस से नाराज़ हैं. कांग्रेस सीट शेयरिंग लगातार टाल रही थी. सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय हो पाए, इससे पहले ही भारत जोड़ो न्याय यात्रा शुरू कर दी.

नीतीश कुमार INDIA ब्लॉक के पहले नेता नहीं हैं, जो सीट बंटवारे पर नाराज़ हैं. बल्कि हाल ही में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने ये ऐलान किया  कि सीट बंटवारे से असंतुष्ट होकर वो राज्य में अकेले ही चुनाव लड़ेंगी.

लालू कैंप भी हुआ एक्टिव

सूत्रों के अनुसार, नीतीश बीजेपी के साथ जा सकते हैं, इसलिए अब लालू कैंप एक्टिव हो चुका है। नीतीश कुमार को हटाकर महागठबंधन के 114 विधायक हैं। बहुमत के लिए 122 विधायक चाहिए। एआईएमआईएम के इकलौते विधायक और प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान, निर्दलीय विधायक सुमित सिंह (मंत्री) से संपर्क साधे जाने की संभावना है। साथ ही आरजेडी नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू के असंतुष्टों से भी संपर्क कर सकती है।

मराठा आरक्षण की मांग को लेकर मनोज जरांगे का विरोध प्रदर्शन , कहा- CM और उनके विधायक मुद्दे को हल करें.

267 Minutes Read -

महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। गुरुवार को मराठा आरक्षण की मांग कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जरांगे लोनावाला से हजारों समर्थकों के साथ मुंबई की ओर बढ़ गए हैं। मनोज जरांगे ने इस दौरान सूबे के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उनके विधायकों से एक साथ आने और मराठा आरक्षण के मुद्दे को हल करने की अपील की। 

हम अपनी मांग पर अभी भी कायम हैं- जरांगे
मनोज जरांगे ने कहा कि दो आधिकारिक प्रतिनिधिमंडलों ने पहले दिन में उनसे मुलाकात की, लेकिन उनके पास देने के लिए कुछ नया नहीं था। उन्होंने कहा कि उन्हीं पुराने बिंदुओं पर विचार विमर्श कर रहे थे। गौरतलब है कि 20 जनवरी को हजारों समर्थकों के साथ जालना जिले से मुंबई की ओर निकले थे। उनकी मांग है कि राज्य की सरकारी नौकरियों और शिक्षा संस्थानों में ओबीसी समूह के तहत मराठों को कोटा दें।

बड़ा प्रतिनिधिमंडल ने जताई मुलाकात की इच्छा- जरांगे
जरांगे ने बताया कि उन्हें बताया गया कि एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल उनसे मुलाकात करने आएगा। जरांगे ने कहा कि अगर ऐसा होता है तो वे बीच रास्ते में ही प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करेंगे। उन्होंने कहा कि हम यहां मौज मस्ती के लिए नहीं आए हैं। मराठा समुदाय की ओर से मैं अपील करता हूं कि सीएम एकनाथ शिंदे और डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस और अजीत पवार से चर्चा के लिए एक साथ आए और मुद्दे का समाधान करें। वहीं पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि मुंबई के आजाद मैदान में मंच तैयार हो गया है। जहां हम अपनी मांगों को लेकर धरना देंगे।

 समर्थकों से शांति बनाए रखने की अपील- जरांगे 
इससे पहले लोनावाला में अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए जरांगे ने शांत बनाए रखने और उत्तेजित न होने पर जोर दिया था। उन्होंने कहा कि त्रपति संभाजीनगर संभागीय आयुक्त मधुकर अरदाद ने नेतृत्व वाली एक टीम सहित अधिकारियों की दो टीमों ने उनसे पहले मुलाकात की थी, लेकिन उनके पास कोई नया प्रस्ताव नहीं था।

OPS: पुरानी पेंशन बहाल होगी या जारी रहेगा NPS, जल्द ही 6 दिन में साफ होगी तस्वीर ?

223 Minutes Read -

केंद्र सरकार, पुरानी पेंशन को लेकर बहुत जल्द अंतिम फैसला लेने जा रही है। जानकारों की मानें, तो छह दिन बाद ही यह तस्वीर साफ हो जाएगी कि सरकारी कर्मी, पुरानी पेंशन के दायरे में आएंगे या एनपीएस ही जारी रहेगा। सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार ने कर्मियों के साथ टकराव से बचने का रास्ता निकाल लिया है। एक फरवरी को लोकसभा में पेश होने वाले अंतरिम बजट में ओपीएस/एनपीएस को लेकर, सरकार अपनी स्थिति को स्पष्ट कर सकती है। ये तय है कि केंद्र सरकार, ओपीएस बहाली नहीं करेगी, लेकिन एनपीएस को ज्यादा से ज्यादा आकर्षक बनाने का मसौदा सामने आ सकता है। एनपीएस में जमा हो रहा कर्मियों का दस फीसदी पैसा और सरकार का 14 फीसदी पैसा, इसमें बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। साथ ही पुरानी पेंशन में जिस तरह से ‘गारंटीकृत’ शब्द, कर्मियों को एक भरोसा देता है, कुछ वैसा ही एनपीएस में भी जोड़ा जा सकता है। डीए/डीआर की दरों में बढ़ोतरी होने पर एनपीएस में उसका आंशिक फायदा, कर्मियों को कैसे मिले, इस पर कुछ नया देखने को मिल सकता है।

रिले हंगर स्ट्राइक’ के बाद भी सरकार मौन-

देश में पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर सरकारी कर्मियों ने राष्ट्रव्यापी अनिश्चिकालीन हड़ताल करने की चेतावनी दी है। कर्मचारी संगठनों का धैर्य अब जवाब देता हुआ दिखाई पड़ रहा है। केंद्रीय कर्मचारी संगठनों ने आठ जनवरी से 11 जनवरी तक ‘रिले हंगर स्ट्राइक’ की है। इसका मकसद, सरकार को चेताना था। नेशनल ज्वाइंट काउंसिल ऑफ एक्शन (एनजेसीए) के संयोजक शिवगोपाल मिश्रा ने ‘रिले हंगर स्ट्राइक’ के अंतिम दिन सरकार को चेतावनी दे दी थी कि ओपीएस बहाली के लिए अब कोई धरना प्रदर्शन नहीं होगा। सरकार हमें, अनिश्चिकालीन हड़ताल करने के लिए मजबूर कर रही है। देश में अगर 1974 की रेल हड़ताल जैसा माहौल बना, तो उसके लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार होगी। जल्द ही सभी कर्मचारी संगठनों की बैठक बुलाई जाएगी। उस बैठक में देश भर में होने वाली अनिश्चितकालीन हड़ताल की तिथि तय होगी। हड़ताल की स्थिति में ट्रेनों व बसों का संचालन बंद हो जाएगा। केंद्र एवं राज्य सरकारों के दफ्तरों में कामकाज नहीं होगा।

देश में 1974 के दौरान हुई थी रेल हड़ताल-

1974 में जॉर्ज फर्नांडीस की अगुआई में रेल हड़ताल हुई थी। उस वक्त कहा गया था कि सरकार अगर कर्मचारियों की मांगों को पूरा करती, तो उस पर मुश्किल से दो सौ करोड़ रुपये खर्च होने थे, लेकिन सरकार को हड़ताल तोड़ने के लिए करीब दो हजार करोड़ रुपये खर्च करने पड़े थे। इसके बाद रेल कर्मियों में असंतोष फैल गया था। वह हड़ताल 8 मई 1974 को प्रारंभ होकर 27 मई 1974 तक चली थी। इस दौरान रेलवे में सारा कामकाज ठप हो गया था। हजारों लोगों को जेल जाना पड़ा था। अनेक लोगों को नौकरियों से हाथ धोना पड़ा था। शिवगोपाल मिश्रा का कहना था, हमने सरकार के समक्ष कई बार आग्रह किया है कि पुरानी पेंशन लागू की जाए। सरकारी कर्मियों को बिना गारंटी वाली ‘एनपीएस’ योजना को खत्म करने और परिभाषित एवं गारंटी वाली ‘पुरानी पेंशन योजना’ की बहाली से कम कुछ भी मंजूर नहीं है। इसके लिए समय-समय पर ज्ञापन सौंपे गए हैं। कैबिनेट सचिव के साथ बैठक में यह मुद्दा उठाया गया है।

दिल्ली में सरकारी कर्मियों की कई रैलियां हो चुकी हैं। इनमें केंद्र और राज्यों के लाखों सरकारी कर्मियों ने हिस्सा लिया था। इतना कुछ होने पर भी केंद्र सरकार ने कर्मियों की इस मांग की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। केंद्र सरकार, अड़ियल रवैया अख्तियार कर रही है। कर्मियों को स्ट्राइक करने के लिए मजबूर कर रही है। मिश्रा ने कहा, कोविड में हमने 11 हजार गाड़ियां चलाई थीं। हमारे 3000 कर्मी शहीद हुए थे। हर साल चार सौ से अधिक रेल कर्मी मारे जा रहे हैं। क्या कोविड में कोई मंत्री/एमपी/एमएलए शहीद हुआ। अब धरना खत्म है, हम हड़ताल पर जाएंगे। सरकार को ध्यान रखना चाहिए कि 1974 की रेल हड़ताल के बाद प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी लगाई थी। उसके बाद उन्हें मुंह की खानी पड़ी थी। मौजूदा सरकार, ऐसी नौबत सरकार न लाए।

डस्टबीन है एनपीएस, मंजूर नहीं संशोधन-

नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम (एनएमओपीएस) के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु का कहना है, केंद्र सरकार एनपीएस में संशोधन करने जा रही है। हम ऐसे किसी भी संशोधन के लिए आंदोलन नहीं कर रहे हैं। कर्मियों को गारंटीकृत पुरानी पेंशन ही चाहिए। अगर कोई भी कर्मचारी नेता या संगठन, सरकार के एनपीएस में संशोधन प्रस्ताव पर सहमत होते हैं, तो ‘2004’ वाली गलतियां, ‘2024’ में भी दोहराई जाएंगी। एनपीएस एक डस्टबीन है। करोड़ों कर्मियों का दस फीसदी पैसा और सरकार का 14 फीसदी पैसा, डस्टबीन में जा रहा है। यह स्वीकार्य नहीं है। पुरानी पेंशन बहाली तक, कर्मियों का आंदोलन जारी रहेगा। वित्त मंत्रालय की कमेटी की रिपोर्ट का कोई मतलब नहीं है। यह रिपोर्ट पेश हो या न हो। इससे कर्मियों को कोई मतलब नहीं है। वजह, यह कमेटी ओपीएस लागू करने के लिए नहीं, बल्कि एनपीएस में सुधार के लिए गठित की गई थी।

अनिश्चितकालीन हड़ताल के लिए सहमति-

एआईडीईएफ के महासचिव सी. श्रीकुमार का कहना है, लोकसभा चुनाव से पहले ‘पुरानी पेंशन’ लागू नहीं होती है, तो भाजपा को उसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। कर्मियों, पेंशनरों और उनके रिश्तेदारों को मिलाकर यह संख्या दस करोड़ के पार चली जाती है। चुनाव में बड़ा उलटफेर करने के लिए यह संख्या निर्णायक है। यही वजह है कि कर्मचारी संगठन, अब विभिन्न राजनीतिक दलों से संपर्क कर रहे हैं। अगर वे कर्मचारियों की मांग मान लेते हैं, तो दस करोड़ वोटों का समर्थन संबंधित राजनीतिक दल के पक्ष में जा सकता है। देश के दो बड़े कर्मचारी संगठन, रेलवे और रक्षा (सिविल) ने अनिश्चितकालीन हड़ताल के लिए अपनी सहमति दे दी है। स्ट्राइक बैलेट में रेलवे के 11 लाख कर्मियों में से 96 फीसदी कर्मचारी ओपीएस लागू न करने की स्थिति में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए तैयार हैं। इसके अलावा रक्षा विभाग (सिविल) के चार लाख कर्मियों में से 97 फीसदी कर्मी, हड़ताल के पक्ष में है। केंद्र सरकार एनपीएस में ही ओपीएस जैसे कुछ प्रावधानों को शामिल कर सकती है। जैसे, रिटायरमेंट पर मिली बेसिक सेलरी का, एनपीएस में 40 से 45 फीसदी भुगतान बतौर पेंशन देने पर विचार हो रहा है। ऐसे किसी भी प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया जाएगा। ये बातें केवल ‘ओपीएस’ से ध्यान भटकाने का प्रयास है।

  Lok Sabha Chunav: ममता बनर्जी ने दिया INDIA गठबंधन को बड़ा झटका, बंगाल में अकेले चुनाव लड़ेगी तृणमूल।

319 Minutes Read -

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विपक्षी पार्टियों से मिलकर बने इंडिया गठबंधन को लोकसभा चुनाव से पहले बड़ा झटका दिया है। उन्होंने एलान किया है कि आम चुनाव में सीट साझा करने पर उनका किसी से संपर्क नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के लिए उनकी पार्टी अकेले उतरेगी। इसे राज्य में कांग्रेस और लेफ्ट के टीएमसी के साथ लाने की कोशिशों को बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है।

क्या बोलीं ममता बनर्जी? 

ममता ने कहा कि इंडिया गठबंधन ने मेरा कोई भी प्रस्ताव नहीं माना है। ऐसे में हमारी पार्टी अकेले ही चुनाव लड़ेगी। उन्होंने कहा कि बंगाल में किसी भी पार्टी में तालमेल नहीं है। इतना ही नहीं, उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा के लिए भी उन्हें अब तक न्योता नहीं भेजा गया है।

ममता ने कहा कि हम सेक्युलर पार्टी हैं और भाजपा को हराने के लिए हमें जो करना होगा हम करेंगे। हम इंडिया गठबंधन का हिस्सा हैं, इसके बावजूद भारत जोड़ो यात्रा निकालने को लेकर हमसे बात नहीं की गई। बंगाल से जुड़े किसी भी मामले में हमारा उनसे कोई संपर्क नहीं हुआ है। 
ममता ने एक दिन पहले ही कांग्रेस को दी थी नसीहत-

 
गौरतलब है कि बंगाल सीएम ने एक दिन पहले ही कांग्रेस को नसीहत दी थी। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस लोकसभा की 300 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है, लेकिन उसे कुछ क्षेत्रों को पूरी तरह क्षेत्रीय दलों के लिए छोड़ देना चाहिए। पर कांग्रेस अपनी मनमानी पर अड़ी है। उन्होंने कहा कि कोई भी भाजपा का उतना सीधा मुकाबला नहीं करता, जितना वह करती हैं। उन्होंने साफ कहा था कि अगर इंडिया गठबंधन की पार्टियां उनका साथ नहीं देतीं तो टीएमसी सभी 42 लोकसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं। 

गठबंधन पर माकपा का कब्जा मंजूर नहीं

ममता ने कहा कि गठबंधन की बैठक में वह जब भी शामिल होती हैं तो पाती हैं माकपा विपक्षी एजेंडे को नियंत्रित करने का प्रयास कर रही है। यह मुझे स्वीकार नहीं है। मैं उनसे सहमत नहीं हो सकती जिनसे मैंने 34 साल तक संघर्ष किया।

Bharat Jodo Nyay Yatra: असम के CM हिमंत बिस्वा सरमा का बड़ा बयान, राहुल गांधी होंगे गिरफ्तार!

241 Minutes Read -

कांग्रेस नेता राहुल गांधी इन दिनों भारत जोड़ों न्याय यात्रा पर हैं। राहुल गांधी की यात्रा असम पहुंच चुकी है असम में यह यात्रा 17 जिलों से होकर गुजरेगी वहीं राहुल गांधी की न्याय यात्रा को लेकर राजनीति भी खूब हो रही है राहुल गांधी की यात्रा को लेकर बीजेपी लगातार हमलावर है।

असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा राहुल गांधी के न्याय यात्रा को लेकर बड़ा बयान दिए हैं। उन्होंने कहा है कि,  राहुल गांधी को शहर के अंदर प्रवेश करने की इजाजत नहीं दी जाएगी,, अगर वह फिर भी जिद्द कर शहर में आते हैं तो उनके खिलाफ केस दर्ज होगी औऱ उनकी गिरफ्तारी होगी। 

राहुल गांधी की यात्रा नगालैंड से असम पहुंच चुकी है असम के शिवसागर जिले से शुरू होकर यह यात्रा राज्य के अन्य 17 जिलों से गुजरेगी इसी में गुवाहाटी शहर भी शामिल है जिसको लेकर राजनीतिक भूचाल आया है उन्होंने कहा कि, “हमने कहा है कि शहरों के अंदर से नहीं जाना है जो भी वैकल्पिक रास्ता मांगा जाएगा उसकी अनुमति दे दी जाएगी लेकिन अगर शहर के अंदर से जाने की जिद की जाएगी तो हम पुलिस की व्यवस्था नहीं करेंगे ”मैं केस दर्ज कर लूंगा और चुनाव के बाद गिरफ्तार करूंगा अभी कुछ नहीं करूंगा”।

और अब खबर आ रही है कि राहुल गांधी के खिलाफ असम पुलिस ने FIR भी दर्ज कर दी गयी है न्यूज एजेंसी पीटीआई ने पुलिस अधिकारी के हवाले से यह जानकारी दी है अधिकारी ने कहा, ”जोरहाट सदर पुलिस स्टेशन ने स्वत: संज्ञान लेते हुए यह एफआईआर यात्रा और उसके मुख्य आयोजक के खिलाफ दर्ज की है ” अधिकारी के अनुसार, एफआईआर में उल्लेख किया गया है कि यात्रा ने जिला प्रशासन के मानदंडों का पालन नहीं किया और सड़क सुरक्षा मानदंडों का उल्लंघन किया.

 

इस दौरान कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने  शिवसागर जिले में दावा किया कि देश में शायद सबसे भ्रष्ट सरकार और सबसे भ्रष्ट मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा इस राज्य में है.कुल मिलाकर बीजेपी और कांग्रेस आमने सामने आ चुके हैं ।