गुजरात सरकार द्वारा बिलकिस बानो मामले में 11 दोषियों की सजा में छूट देने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया हैं। मामले में एक गवाह ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि बानो को वास्तव में आज न्याय मिला है। मैं इस मामले में गवाहों में से एक हूं। इन 11 दोषियों को महाराष्ट्र की एक अदालत ने सजा सुनाई थी। गुजरात सरकार का उन्हें रिहा करने का फैसला गलत था, इसलिए हमने इसे अदालत में चुनौती दी थी। फैसले के बाद दाहोद जिले के देवगढ़ बारिया में बिलकिस बानो के रिश्तेदारों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद खुशी जाहिर करते हुए जमकर आतिशबाजी की हैं।
वास्तव में आज मिला पूर्ण न्याय-अब्दुल रजाक-
देवगढ़ बारिया शहर के रहने वाले मामले के गवाहों में से एक अब्दुल रजाक मंसूरी ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि मुझे खुशी है कि सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार के फैसले को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने दोषियों को आत्मसमर्पण करने के लिए कहा हैं। मुझे लगता है कि आज हमें न्याय मिला हैं। गौरतलब है कि गोधरा में 2002 में हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान बिलकिस बानो 21 साल की थीं औ पांच माह की गर्भवती भी थी। उस दौरान आरोपियों द्वारा उनके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया था। इस दौरान आरोपियों ने उनकी तीन साल की बेटी और परिवार के सात लोगों की हत्या कर दी गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने पलटा गुजरात सरकार का फैसला-दरअसल, गुजरात सरकार ने 11 दोषियों को सजा में छूट देकर 15 अगस्त 2022 को रिहा कर दिया था। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने सजा में दी गई छूट को सोमवार को रद्द कर दिया और दोषियों को दो सप्ताह के भीतर जेल अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया। न्यायालय ने कहा कि गुजरात सरकार को छूट का आदेश पारित करने का अधिकार नहीं था।
राहुल गांधी बोले- फैसले ने बताया कौन देता है अपराधियों को पनाह-
इसी बीच, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने एक बार फिर दिखा दिया कि अपराधियों को पनाह कौन देता हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखते हुए राहुल गांधी ने कहा कि बिलकिस बानो का अथक संघर्ष अहंकारी भाजपा सरकार के खिलाफ न्याय की जीत का प्रतीक है। चुनावी लाभ के लिए न्याय की हत्या करने की प्रवृत्ति लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरनाक हैं।
केंद्र एवं राज्य सरकारों के कर्मचारी संगठन, पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की तैयारी कर रहे हैं। इससे पहले सरकार को चेताने के लिए देशभर के सरकारी कर्मचारियों ने आठ जनवरी से 11 जनवरी तक ‘रिले हंगर स्ट्राइक’ शुरू की है। ओपीएस के लिए गठित नेशनल ज्वाइंट काउंसिल ऑफ एक्शन (एनजेसीए) के संयोजक शिव गोपाल मिश्रा सहित कई एसोसिएशनों के पदाधिकारियों ने सोमवार को दिल्ली के जंतर मंतर पर रिले हंगर स्ट्राइक में हिस्सा लिया। एआईपीईएफ और कन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एंप्लाइज एंड वर्कर्स सहित विभिन्न फेडरेशन और एसोसिएशन इस हंगर स्ट्राइक में भाग ले रही हैं।
इन विभागों में हुआ था स्ट्राइक बैलेट-
सरकारी कर्मचारी, पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर विभिन्न चरणों में आंदोलन कर रहे हैं। इसी के तहत रामलीला मैदान में रैली और धरने प्रदर्शन हुए हैं। कर्मचारियों ने सरकार को चेताया है कि इस मुद्दे पर देश में अनिश्चितकालीन हड़ताल हो सकती है। इस हड़ताल के लिए देश के दो बड़े कर्मचारी संगठन, रेलवे और रक्षा (सिविल) ने अपनी सहमति दी है। स्ट्राइक बैलेट में रेलवे के 11 लाख कर्मियों में से 96 फीसदी कर्मचारी ओपीएस लागू न करने की स्थिति में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए तैयार हैं। इसके अलावा रक्षा विभाग (सिविल) के चार लाख कर्मियों में से 97 फीसदी कर्मी, हड़ताल के पक्ष में है। कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों का कहना है कि जनवरी में हड़ताल की तिथि की घोषणा की जाएगी। इससे पहले देशभर के सरकार कर्मचारी, ‘रिले हंगर स्ट्राइक’ पर बैठेंगे। यह स्ट्राइक सरकार को चेताने के लिए है।
जल्द शुरू हो सकती है अनिश्चितकालीन हड़ताल-
एनजेसीए के पदाधिकारियों का कहना है, सरकारी कार्यालयों और प्रतिष्ठानों में बहुत जल्द अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू हो सकती है। इस हड़ताल की स्थिति में रेल थम जाएंगी और रक्षा क्षेत्र के उद्योगों में कामकाज बंद हो जाएगा। इसके चलते केंद्र में ही नहीं, बल्कि विभिन्न राज्यों में भी सरकारी कामकाज प्रभावित होगा। केंद्र और राज्य सरकार के विभागों, संगठनों एवं प्रतिष्ठानों के सामने आठ जनवरी से 11 जनवरी तक हो रही ‘रिले हंगर स्ट्राइक’, अनिश्चितकालीन हड़ताल का ही पहला चरण है। विभिन्न कर्मचारी संगठन, भूखे रह कर सरकार से ‘पुरानी पेंशन बहाली’ की मांग करेंगे। रिले हंगर स्ट्राइक में एक निर्धारित अवधि के बाद कर्मियों की दूसरी टोली, भूख हड़ताल स्थल पर पहुंचेगी। कर्मचारी संगठनों की एक ही मांग है, गारंटीकृत पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली। केंद्र सरकार ने इस बाबत एक कमेटी का गठन किया है। हालांकि उसमें ओपीएस का कहीं भी जिक्र नहीं है। कमेटी, केवल एनपीएस में सुधार को लेकर अपनी रिपोर्ट देगी। पिछले संसद सत्र में लोकसभा सदस्य नव कुमार सरनीया, दीपक बैज और कृपाल बालाजी तुमाने द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया था कि ओपीएस बहाली को लेकर केंद्र सरकार के विचाराधीन कोई प्रस्ताव नहीं है।
गारंटी कृत पुरानी पेंशन योजना बहाल करनी होगी-
शिव गोपाल मिश्रा के मुताबिक, ओपीएस पर केंद्र और सरकार के कर्मचारी लगातार अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। कर्मचारी संगठनों ने रामलीला मैदान में रैलियां की हैं। सरकार के समक्ष कई प्लेटफॉर्म के माध्यम से ओपीएस की मांग उठाई गई है। हमने सरकार को स्पष्ट तौर पर बता दिया है कि कर्मचारियों को ओपीएस के अलावा कुछ भी मंजूर नहीं है। सरकार को एनपीएस खत्म करना होगा और गारंटीकृत पुरानी पेंशन योजना बहाल करनी पड़ेगी। ओपीएस एक गैर राजनीतिक मुद्दा है। केंद्र या राज्यों में सरकार चाहे जिस भी दल की हो, हमारा आंदोलन जारी रहेगा। रेलवे के 11 लाख कर्मियों में से 96 फीसदी कर्मचारी ओपीएस लागू न करने की स्थिति में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए तैयार हैं। ज्वाइंट फोरम में केंद्रीय संगठनों के अलावा राज्यों के भी 36 संगठन भी शामिल हैं।
चुनाव में बड़े उलटफेर का दावा-
ओपीएस के लिए गठित नेशनल ज्वाइंट काउंसिल ऑफ एक्शन (एनजेसीए) की संचालन समिति के राष्ट्रीय संयोजक एवं स्टाफ साइड की राष्ट्रीय परिषद ‘जेसीएम’ के सचिव शिवगोपाल मिश्रा के मुताबिक, लोकसभा चुनाव से पहले पुरानी पेंशन लागू नहीं होती है, तो भाजपा को उसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। कर्मियों, पेंशनरों और उनके रिश्तेदारों को मिलाकर यह संख्या दस करोड़ के पार चली जाती है। चुनाव में बड़ा उलटफेर करने के लिए यह संख्या निर्णायक है।
पीएफआरडीए में संशोधन के बिना ओपीएस संभव नहीं-
कन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स के महासचिव एसबी यादव ने कहा, केंद्र सरकार को पुरानी पेंशन योजना लागू करनी होगी। एनपीएस का पैसा, ‘पेंशन फंड एंड रेगुलेटरी अथारिटी’ (पीएफआरडीए) के पास जमा है। नई पेंशन योजना ‘एनपीएस’ के अंतर्गत केंद्रीय मद में जमा यह पैसा राज्यों को नहीं दिया जा सकता। वह पैसा केवल उन कर्मचारियों के पास जाएगा, जो इसका योगदान कर रहे हैं। ओपीएस लागू करने से पहले पीएफआरडीए में संशोधन करना पड़ेगा। कन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स ने सरकार के समक्ष बड़े स्तर पर यह मांग उठाई है। इस बाबत नवंबर में रामलीला मैदान में कन्फेडरेशन ने एक विशाल रैली भी आयोजित की थी।
18 साल बाद रिटायर हुए कर्मी को मिली इतनी पेंशन-
शिव गोपाल मिश्रा का कहना है कि एनपीएस में कर्मियों जो पेंशन मिल रही है, उतनी तो बुढ़ापा पेंशन ही है। एनपीएस स्कीम में शामिल कर्मी, 18 साल बाद रिटायर हो रहे हैं, उन्हें क्या मिला है। एक कर्मी को एनपीएस में 2417 रुपये मासिक पेंशन मिली है, दूसरे को 2506 रुपये और तीसरे कर्मी को 4900 रुपये प्रतिमाह की पेंशन मिली है। अगर यही कर्मचारी पुरानी पेंशन व्यवस्था के दायरे में होते तो उन्हें प्रतिमाह क्रमश: 15250 रुपये, 17150 रुपये और 28450 रुपये मिलते। एनपीएस में कर्मियों द्वारा हर माह अपने वेतन का दस फीसदी शेयर डालने के बाद भी उन्हें रिटायरमेंट पर मामूली सी पेंशन मिलती है।
एक तरफ तो राम मंदिर को लेकर लोगों के बीच उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है तो वहीं दूसरी ओर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी को लेकर लगातार संशय बढ़ता जा रहा है दिल्ली की नई शराब नीति के कथित घोटाले में दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी को लेकर संशय बढ़ता जा रहा है। भाजपा से जुड़े नेताओं और जांच एजेंसी के सूत्रों की मानें, तो अयोध्या में राम के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान केजरीवाल की गिरफ्तारी संभव है।
वजह, उस वक्त दिल्ली सहित देश के दूसरे क्षेत्रों में राम मंदिर को लेकर उत्साह का माहौल रहेगा। खासतौर पर उत्तर भारत में भाजपा, इस कार्यक्रम को सियासत में फायदे के तौर पर देख रही है। यही वजह है कि भाजपा ने प्राण प्रतिष्ठा समारोह को देश विदेश तक पहुंचा दिया है। इसी दौरान दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल गिरफ्तार किए जा सकते हैं।
ED ने दिल्ली सीएम केजरीवाल को अब तक भेजे 3 समन-
सूत्रों का कहना है कि राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान केजरीवाल की गिरफ्तारी संभव है। अभी तक केजरीवाल को ईडी ने तीन समन भेजे हैं। केजरीवाल, किसी भी समन पर जांच एजेंसी के समक्ष प्रस्तुत नहीं हुए हैं। अब ऐसी संभावना जताई जा रही है कि जांच एजेंसी, किसी भी वक्त केजरीवाल को गिरफ्तार कर सकती है। अगर अब केजरीवाल की गिरफ्तारी होती है, तो आम आदमी पार्टी, इसका बड़ा पॉलिटिकल माइलेज ले सकती है। खासतौर पर, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब व उत्तर प्रदेश में आप का बड़ा विरोध प्रदर्शन देखने को मिल सकता है। इससे राम मंदिर का प्राण प्रतिष्ठा समारोह प्रभावित हो सकता है। राजनीतिक प्रदर्शन से रोड जाम जैसी स्थिति के पैदा होने के आसार हैं। ट्रेनों की आवाजाही पर भी असर पड़ सकता है। दूसरी तरफ भाजपा, देश एवं विदेश से लोगों को अयोध्या लाने की तैयारी कर रही है। ऐसे में केजरीवाल की गिरफ्तारी 22 जनवरी के आसपास संभव है।
गुरुवार को दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा, देश में खुलेआम गुंडागर्दी चल रही है। किसी को भी पकड़कर जेल डाल दो। बतौर केजरीवाल, मेरी सबसे बड़ी ताकत ईमानदारी है। ये झूठे केस लगाकर मेरी ईमानदारी पर चोट करना चाहते हैं। मेरे वकील ने बताया कि ये सभी समन गैरकानूनी हैं, ये गैरकानूनी क्यों हैं, इनका जवाब मैंने ईडी को दिया है। अगर ये सही समन भेजते हैं, तो मैं जांच में सहयोग करूंगा। पहले भी सीबीआई जांच में सहयोग दिया है। भाजपा का मकसद सही जांच करना नहीं है। इसके पीछे मुझे, लोकसभा चुनाव में प्रचार करने से रोकना है। अरविंद केजरीवाल लोकसभा चुनाव के मद्देनजर 6, 7 व 8 जनवरी को गुजरात दौरे पर रहेंगे। वे आप कार्यकर्ता सम्मलेन और जनसभा को संबोधित करेंगे। जेल में बंद आप विधायक चैतर बसावा से भी केजरीवाल से मिलने का कार्यक्रम है।
क्या कहा अरविंद केजरीवाल ने ?
केजरीवाल ने कहा, ईडी के समन गैरकानूनी हैं। जो भी नेता भाजपा में शामिल नहीं होता, उसे ये लोग ‘भाजपा’ जेल में भेज देते हैं। मनीष सिसोदिया और संजय सिंह को भी इन्होंने इसलिए जेल में डाला है। अगर वे भाजपा से हाथ मिला लेते, तो जेल से बाहर होते। जो भी व्यक्ति इनसे हाथ मिला लेता है, वह ईमानदार हो जाता है। देश में बहुत खतरनाक खेल चल रहा है। मेरे खून का हर कतरा देश के लिए है। अरविंद केजरीवाल ने कहा, आप लोग दो साल से शराब घोटाले का नाम सुन रहे हैं। जांच एजेंसियों को इस घोटाले में एक भी पैसा नहीं मिला है। वजह, ऐसा कोई घोटाला
एक लंबे इंतजार के बाद सीएम भजनलाल शर्मा के कैबिनेट का विस्तार हो गया है। इस मंत्रिमंडल में 22 भाजपा विधायकों ने राजस्थान सरकार के मंत्री के रूप में शपथ ली। 15 दिसंबर को भजनलाल शर्मा ने बतौर मुख्यमंत्री और दीया कुमारी और प्रेमचंद बैरवा ने बतौर उपमुख्यमंत्री शपथ ग्रहण की थी। उसके बाद से ही राजस्थान में मंत्रिमंडल विस्तार का इंतजार किया जा रहा था।
राजस्थान में सीएम भजनलाल शर्मा के मंत्रिमंडल का विस्तार हो गया है। मंत्रिमंडल में पहली बार और दूसरी बार चुने गए विधायकों को शामिल किया गया है।
22 विधायकों ने ली शपथ-
शनिवार को यहां राजभवन में एक समारोह के दौरान 22 भाजपा विधायकों ने राजस्थान सरकार के मंत्री के रूप में शपथ ली। इस दौरान 12 ने कैबिनेट मंत्री, पांच ने राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और पांच ने राज्य मंत्री के रूप में शपथ ली। समारोह के दौरान राज्यपाल कलराज मिश्र ने विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई।
किरोड़ी लाल मीणा समेत 12 मंत्रियों ने ली शपथ-
राजस्थान मंत्रिमंडल में किरोड़ी लाल मीणा, मदन दिलावर, राज्यवर्धन सिंह राठौड़, गजेंद्र सिंह खींवसर, बाबूलाल खराड़ी, जोगाराम पटेल, सुरेश सिंह रावत, अविनाश गहलोत, जोराराम कुमावत, हेमंत मीना, कन्हैया लाल चौधरी और सुमित गोदारा को कैबिनेट का हिस्सा बनाया गया है। वहीं, श्रीकरणपुर से बीजेपी प्रत्याशी रहे सुरेंद्रपाल टीटी विधायक बनने से पहले मंत्री बनाए गए हैं।
इन विधायकों ने ली शपथ-
सिरोही विधानसभा सीट से जीत दर्ज करने वाले ओटाराम देवासी ने राज्यमंत्री के रूप में शपथ ली। इनके साथ, मंजू बाघमार, विजय सिंह चौधरी, केके विश्नोई और जवाहर सिंह बेढम ने राज्यमंत्री के तौर पर ली शपथ।
संजय शर्मा, गौतम कुमार, झाबर सिंह खर्रा, सुरेंद्र पाल सिंह और हीरालाल नागर ने राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में शपथ ली।
Priyanka Gandhi ED Case- कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी बड़ी मुसीबत में फंसती दिख रहीं है। दरअसल, ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में प्रियंका गांधी का नाम पहली बार चार्जशीट में दाखिल किया है। हालांकि, प्रियंका को आरोपी नहीं बनाया गया है। उनका नाम आरोपी से जुड़े होने के तौर पर शामिल किया गया है।
जिससे जमीन खरीदी, उसी को बेच दी-
ईडी की चार्जशीट के अनुसार, ये मामला जमीन खरीदने और बेचने से जुड़ा है। मामले में भगोड़े हथियार डीलर संजय भंडारी के सहयोगी सीसी थम्पी ने हरियाणा के फरीदाबाद में रियल एस्टेट एजेंट एचएल पाहवा से 2005 से 2008 तक कई बार जमीनें खरीदीं।उसके बाद प्रियंका और रॉबर्ट वाड्रा ने 2006 में पाहवा से अमीरपुर गांव में 5 एकड़ (40 कनाल) कृषि जमीन खरीदी और उसी को पाहवा को फरवरी 2010 में बेच दिया। आरोप है कि ये सब पैसे को इधर-उधर और मनी लॉन्ड्रिंग करने के लिए किया गया।
ये भी लगे आरोप-
आरोप यह भी लगे हैं कि इस दौरान एचएल पाहवा को भूमि अधिग्रहण के लिए पैसे भी मिलते रहे। ये भी आरोप है कि रॉबर्ट ने पाहवा को पूरे पैसे भी नहीं दिए।
ईडी का कहना है कि थम्पी के रिश्ते काफी लंबे समय से वाड्रा से है और दोनों कई काम मिलकर करते हैं।
सीसी थम्पी पर संजय भंडारी का साथ देने का आरोप-
सीसी थम्पी पर हथियार डीलर संजय भंडारी का साथ देने और ब्रिटेन में कालाधन छिपाने में मदद करने का आरोप है।
राजस्थान में भजनलाल शर्मा सरकार ने गरीब परिवारों को 450 रुपये में गैस सिलेंडर देने की घोषणा की है। चुनाव में बीजेपी की ओर से यह वादा किया गया था, जिसे अब सरकार एक जनवरी 2024 से लागू करने की घोषणा की है।
आप को बता दें कि इन परिवारों को गहलोत सरकार 500 रुपये में सिलेंडर दे रही थी। बीजेपी सरकार की नई योजना लागू होने के बाद उन्हें 50 रुपये की और बचत होगी। अन्य परिवारों को सिलेंडर पहले की तरह बाजार मूल्य पर मिलता रहेगा।
बताते चलें, टोंक जिले में बुधवार को विकसित भारत संकल्प यात्रा को संबोधित करते हुए सीएम भजनलाल शर्मा ने सस्ते सिलेंडर वाला वादा पूरा करने का एलान किया। उन्होंने कहा, राजस्थान की जनता ने पीएम नरेंद्र मोदी की ओर से महिलाओं, युवाओं, किसानों और गरीबों के लिए दी गई गारंटी में अपना विश्वास जाहिर किया है।
सीएम भजनलाल ने कहा कि उनकी सरकार पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों के अनुरूप अंत्योदय के लिए प्रतिबद्ध है और जनता से घोषण पत्र में किए गए सभी वादों को पूरा किया जाएगा, जिसकी प्रक्रिया शुरू हो गई है। आइए हम आपको बताते हैं कि 450 रुपये में सिलेंडर किसे और कैसे मिलेगा।
रसोई गैस सिलेंडर सब्सिडी योजना के तहत उन लोगों को 450 रुपये में सिलेंडर मिलेगा, जिन्होंने प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के तहत कनेक्शन लिया है।
इसके अलावा चुनिंदा बीपीएल परिवारों को भी इसका लाभ मिलेगा।
एक पात्र परिवार को साल में 12 सिलेंडर पर सब्सिडी मिलेगी।
सिलेंडर की संख्या ज्यादा हुई तो बाजार मूल्य चुकाना होगा।
सिलेंडर लेते समय बाजार मूल्य चुकाना होगा, बाद में सब्सिडी अकाउंट में आएगी।
मान लीजिए बाजार मूल्य 900 रुपये है तो आपको सिलेंडर लेते समय पूरे पैसे देने होंगे, बाद में आपके अकाउंट में 450 रुपये सब्सिडी के रूप में जमा कर दिए जाएंगे।
मराठा आरक्षण को लेकर महाराष्ट्र में रार थमने का नाम नहीं ले रही है। सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जरांगे लगातार मराठा आरक्षण की मांग को लेकर लड़ाई लड़ रहे हैं। महाराष्ट्र सरकार को 24 दिसंबर तक का अल्टीमेटम दिए जाने के बाद मनोज जरांगे ने अपने अगले कदम को सार्वजनिक कर दिया है। उन्होंने कहा कि 20 जनवरी से मुंबई के आजाद मैदान में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करेंगे।
पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि मनोज जरांगे ने कहा कि आंदोलनकारियों के लिए जरूरी सामान लेकर करीब दस लाख वाहन 20 जनवरी को मुंबई के लिए रवाना होंगे। जरांगे ने घोषणा कि 20 जनवरी से मुंबई में मराठा समुदाय के लिए आरक्षण को लेकर फिर से भूख हड़ताल शुरू करेंगे। उन्होंने कहा कि लगभग दस लाख वाहन मुंबई के लिए रवाना होंगे। आसपास के जिलों के लोग अंतरवाली सरती आएंगे। जिसके बाद लोगों मुंबई की ओर पैदल चलना शुरू करेंगे।
आजाद मैदान में शुरू करूंगा भूख हड़ताल: जरांगे
जरांगे ने कहा, मैं 20 जनवरी से मुंबई के आजाद मैदान में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करूंगा। मराठों को दबाना मुश्किल है। हम समुदाय के लिए आरक्षण हासिल किए बिना वापस नहीं लौटेंगे। आरक्षण कार्यकर्ता ने कहा कि वह जालना जिले के अंतरवाली स्थित अपने गांव से पैदल ही रवाना होंगे और मुंबई पहुंचेंगे, इस दौरान समुदाय के सदस्य भी उनके साथ शामिल होंगे। जरांगे ने मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की अपनी मांग को पूरा करने के लिए राज्य सरकार को 24 दिसंबर तक का समय दिया था।
बता दें कुछ दिनों पहले विधानसभा सत्र के दौरान सदन में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा था कि जरूरत पड़ी तो फरवरी में विशेष सत्र बुलाएंगे। मैं सभी मराठा समुदाय को आश्वासन देता हूं कि उनके साथ कोई अन्याय नहीं किया जाएगा। हम उनके लिए हरसंभव सहायता के लिए आगे हैं। जिसके बाद मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने कहा था कि हम फरवरी तक का इतंजार नहीं करेंगे। अगर राज्य सरकार इस मुद्दे पर विफल रहती है तो निश्चित ही हमारा विरोध प्रदर्शन फिर से शुरू हो जाएगा।
कर्नाटक में स्कूलों में हिजाब पहनने को लेकर एक बार फिर राजनीति शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शुक्रवार को स्कूलों में हिजाब पहनने पर लगे प्रतिबंध को हटाने का ऐलान किया। इस कदम की जहां एक तरफ भाजपा ने आलोचना की, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने सही कदम बताया। आइए जानते हैं कि कांग्रेस और विपक्षी दलों के नेताओं की इस फैसले पर क्या राय है।
राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए-
कर्नाटक में स्कूलों में हिजाब पहनने पर लगे प्रतिबंध हटाए जाने पर राज्य के प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा मंत्री मधु बंगारप्पा ने पत्रकारों से बात की। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। राज्य की शिक्षा नीति में संस्कृति, अध्ययन और अन्य चीजें शामिल हैं।
जानिये क्या कहा प्रियांक खरगे ने ?
वहीं, कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने कहा कि राज्य सरकार जो कुछ भी कर रही है वह कानून और संविधान के ढांचे के अनुसार है। उन्होंने कहा कि भाजपा के पास करने के लिए कोई काम नहीं है, उन्हें पहले अपने घर को संभालना चाहिए।
लोगों को दी गई है आजादी-
इसके अलावा, आरएलडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी ने कहा, ‘संवैधानिक दृष्टिकोण से यह सही फैसला है। लोगों को आजादी दी गई है। अगर भोजन और पहनावे पर इस तरह के प्रतिबंध हैं, तो इससे आपातकाल जैसी स्थिति पैदा हो जाएगी।’
भाजपा का हमला-
गौरतलब है, कर्नाटक भाजपा के अध्यक्ष बी वाई विजयेंद्र ने शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब की अनुमति देने के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कम से कम शिक्षण संस्थानों को गंदी राजनीति से बचा सकते थे। अल्पसंख्यक या मुस्लिम समुदाय के किसी भी बच्चे ने हिजाब की मांग नहीं की है, लेकिन सीएम का दावा है कि वह स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में हिजाब की अनुमति देंगे। यह सीएम की मंशा को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। यह सिर्फ तुष्टिकरण की राजनीति है और यह पूरी तरह से फूट डालो और राज करो की प्रथा है जिसका पालन कांग्रेस पार्टी करती है। हम इस कदम की कड़ी निंदा करते हैं।’
अयोध्या में बन रहे भगवान राम के मंदिर का उद्घाटन 22 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों होना है। इसे लेकर हर तरह से प्रचार-प्रसार भी हो रहा है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का प्रयास है कि इस कार्यक्रम में अधिक से अधिक लोगों को शामिल कर इसे एक बड़ा कार्यक्रम बनाया जाए। लेकिन इसी के साथ राम मंदिर के नाम पर एक बड़ा फ्रॉड भी सामने आ गया है। कुछ लोग राम मंदिर निर्माण के नाम पर पर्चा छापकर लोगों से चंदा वसूल रहे हैं।
विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने कहा है कि राम मंदिर निर्माण के नाम पर कोई चंदा नहीं लिया जा रहा है। यह पूरी तरह फ्रॉड है और लोग इससे सावधान रहें। यदि कोई व्यक्ति राम मंदिर निर्माण के नाम पर चंदा ले रहा है, तो इसकी सूचना पुलिस को दें। बजरंग दल के पदाधिकारियों ने विहिप के नेताओं के संज्ञान में यह विषय लाया जिसके बाद संगठन को इस पर प्रतिक्रिया देनी पड़ी है।
विश्व हिंदू परिषद के शीर्ष पदाधिकारी मिलिंद परांडे ने शुक्रवार को एक प्रेस वक्तव्य जारी कर कहा कि अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के लिए किसी अलग समिति का गठन नहीं किया गया है। किसी समिति को प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के लिए धन एकत्र की जिम्मेदारी भी नहीं दी गई है। उन्होंने कहा है कि समाज को ऐसे किसी भी फ्रॉड के प्रति सचेत रहना चाहिए और ऐसे किसी व्यक्ति को आर्थिक योगदान नहीं देना चाहिए।
प्रदेश में लगातार बढ़ती बिजली की मांग के इलाज के तौर पर हाइड्रो व सोलर के अलावा दूसरे इंतजाम भी अभी तक कारगर साबित नहीं हो पाए।आजकल उत्तराखंड प्रदेश में बिजली की समस्या सभी जगह देखने को मिल रही है उत्तराखंड में लगातार बिजली की मांग बढ़ रही है लेकिन आपूर्ति सरकार पूरी नहीं कर पा रही है. हमारे प्रदेश के नेता इस प्रदेश को ऊर्जा प्रदेश कहते हैं और इसी ऊर्जा प्रदेश में जल विद्युत परियोजनाओं की भरमार है लेकिन इस प्रदेश का दुर्भाग्य कहें या सत्ता पर बैठने वाली पार्टियों की सोच कि जिस प्रदेश में नदियों के सीने चीर कर इतने हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट लग रहे हैं लेकिन जब इस प्रदेश में बिजली की आपूर्ति की बात होती है तो इस ऊर्जा प्रदेश के लोगों को ही पूरी बिजली नहीं मिल पाती है.
प्रदेश में लगातार बढ़ती बिजली की मांग के इलाज के तौर पर हाइड्रो व सोलर के अलावा दूसरे इंतजाम भी अभी तक कारगर साबित नहीं हो पाए। त्रिवेंद्र सरकार में शुरू हुई पिरूल से बिजली योजना ठप हो चुकी है। प्लांट बंद हो चुके हैं। लाखों के कर्ज तले दबे प्लांट लगाने वाले लोग अब न्याय के लिए हाईकोर्ट पहुंच गए हैं।
दरअसल, त्रिवेंद्र सरकार ने प्रदेश में चीड़ के पिरूल से हर साल लगने वाली आग को ऊर्जा में बदलने की योजना शुरू की। इसके तहत पिरूल से विद्युत उत्पादन के लिए 21 प्लांट उरेडा के माध्यम से आवंटित किए गए। इनमें से केवल 6 प्लांट प्रदेश में गढ़वाल व कुमाऊं मंडल में स्थापित हुए।
अब प्लांट संचालक पहुंचे हाईकोर्ट-
शुरुआत में बिजली उत्पादन होने लगा लेकिन देखते ही देखते ये अटकता चला गया। हालात ये हो गए कि तीन साल के भीतर ही सभी छह प्लांट बंद हो गए। इनसे विद्युत उत्पादन रुक चुका है। प्लांट लगाने वाले लोगों पर लाखों रुपये का कर्ज था, जिसकी भरपाई के लिए बैंक नोटिस भेज रहे हैं।
शासन ने इन प्लांट की व्यावहारिकता देखने को जतन किए, लेकिन कोई उत्साहजनक नतीजा नहीं निकल पाया। अब प्लांट संचालक हाईकोर्ट चले गए हैं। उनका आरोप है कि सरकार ने आधी-अधूरी तैयारियों के साथ योजना लांच की थी, जिसका नुकसान उन्हें उठाना पड़ रहा है।
पवन ऊर्जा भी कारगर नहीं-
प्रदेश में वैसे तो पवन की उपलब्धता भरपूर है, लेकिन अभी तक वायु ऊर्जा कारगर नहीं हो पाई। इसके पीछे एक वजह ये भी है कि पवन ऊर्जा से जुड़े उपकरणों को पर्वतीय क्षेत्रों तक पहुंचाना मुश्किल है। वहां कई बार तेज हवाओं में ज्यादा नुकसान की आशंका भी रहती है। लिहाजा, पवन ऊर्जा के क्षेत्र में राज्य कोई काम नहीं कर पाया।
अब इन योजनाओं से बांधी जा रही उम्मीद-
भू-तापीय ऊर्जा- प्रदेश में अब भू-तापीय ऊर्जा पर फोकस किया जा रहा है। अगर ये प्रयोग सफल होता है तो इससे ऊर्जा जरूरतें पूरी होने में बड़ी मदद मिल सकती है।
पंप स्टोरेज- इस योजना के तहत टीएचडीसी का 1000 मेगावाट का प्लांट नए साल से शुरू होने जा रहा है। प्रदेश में अन्य जगहों पर भी पंप स्टोरेज प्लांट लगाने के लिए सरकार नीति लेकर आई है। सफल रहा तो कुछ नतीजा निकल सकता है।
राज्य की सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता 20 हजार मेगावाट आंकी जा चुकी है लेकिन 23 साल में यह 350 मेगावाट से ऊपर नहीं जा पाए. ऐसे में हाइड्रो, गैस या कोयला से बिजली उत्पादन का विकल्प बनने की बात बेमानी ही नजर आ रही है. परियोजनाओं के विफल होने का एक सबसे बड़ा कारण सरकारी सुस्ती है जिन लोगों ने छोटे सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट लगाए हैं, वे या तो समय से ग्रिड से नहीं जोड़े जाते या फिर उनकी मीटरिंग समय से नहीं होती इस वजह से लोग हतोत्साहित होते हैं. देखिये किस तरह से कुछ शानदार और प्रदेश हितकारी योजनाएं सरकारी सुस्ती या राजनीति के चलते प्रदेश में दम तोड़ देती है और इसका खामियाजा भुगतती है प्रदेश की जनता।