Category Archive : शिक्षा

Uttarakhand: 58 जगह मारे गए छापे, अवैध भंडारण पर 74 सिलिंडर हुए जब्त, विभाग ने अनियमितताओं पर वसूला अर्थदंड.

33 Minutes Read -

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता विभाग ने राज्य में एलपीजी एवं ईंधन की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था के दृष्टिगत राज्य में 280 जगहों का निरीक्षण किया। 58 जगहों पर छापा मारा। इस दौरान 74 सिलिंडर जब्त किए गए और चार प्राथमिकी दर्ज की गई हैं।

आयुक्त खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता रुचि मोहन रयाल ने बताया, प्रदेश में 10 से 12 मार्च तक विभिन्न जिलों में निरीक्षण किया गया। कार्रवाई के दौरान एक कांटा (वजन माप उपकरण) और दो रिफिलिंग किट भी जब्त की गई हैं। विभाग ने अनियमितताओं पर 4600 का अर्थदंड भी वसूला है।

आयुक्त ने कहा कि राज्य सरकार उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर गैस एवं ईंधन उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी प्रकार की कालाबाजारी, जमाखोरी या अवैध रिफिलिंग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

Uttarakhand: अब शिक्षकों के खाली पदों पर भर्ती से पहले वित्त और कार्मिक विभाग की सहमति जरूरी, आदेश हुए जारी.

23 Minutes Read -

सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के खाली पदों पर भर्ती करने से पहले अब वित्त और कार्मिक विभाग की सहमति लेना अनिवार्य होगा। शासन ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। आदेश में कहा गया है कि छात्र-छात्राओं की संख्या में कमी की वजह से यह संभव है कि स्कूलों में शिक्षकों के पद जरूरत से अधिक हों। बजट की समीक्षा बैठक में यह बात सामने आई है।

शासन ने शिक्षा महानिदेशक को जारी आदेश में कहा, पूर्व में राज्य सरकार के विभिन्न शासनादेशों के माध्यम से छात्र संख्या के आधार पर माध्यमिक और प्रांरभिक शिक्षा विभाग के तहत शिक्षकों के पद सृजित किए गए हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट की समीक्षा में संज्ञान में आया कि स्कूलों में छात्र-छात्राओं की संख्या में लगातार कमी की वजह से संभव है कि शिक्षकों के पद जरूरत से ज्यादा हो रहे हैं।

ऐसे में शिक्षकों की भर्ती से पहले वित्त और कार्मिक विभाग को भर्ती के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा। प्रस्ताव में यह बताया जाएगा कि वर्तमान में स्कूलों में शिक्षकों के स्वीकृत पद और छात्रों की संख्या कितनी है। प्रस्तावित भर्ती का औचित्य और वित्तीय व्ययभार का विवरण भी देना होगा। वहीं, इस मामले में अपर निदेशक शिक्षा महानिदेशालय पदमेंद्र सकलानी ने निदेशक माध्यमिक शिक्षा को पत्र लिखा है।

बंदी की कगार पर हैं तीन हजार से ज्यादा स्कूल-

प्रदेश के सरकारी स्कूलों में छात्र-छात्राओं की संख्या तेजी से घट रही है। यही वजह है कि तीन हजार से ज्यादा स्कूल बंदी की कगार पर हैं। इसमें छात्र-छात्राओं की संख्या दस या फिर इससे भी कम रह गई है।

 

शिक्षा विभाग में पहले शिक्षकों के 2600 पद खत्म कर दिए गए थे, अब कुछ अन्य पद समाप्त किए जाने की तैयारी है। यह सार्वजनिक शिक्षा को समाप्त करने की साजिश है। -डॉ सोहन माजिला, पूर्व प्रांतीय महामंत्री राजकीय शिक्षक संघ

उत्तराखंड में धामी सरकार का छात्रों को बड़ा तोहफा, 21 हजार से अधिक को मिली छात्रवृत्ति

22 Minutes Read -

प्रदेश के मेधावी छात्रों को प्रोत्साहित करने के लिए धामी सरकार संवेदनशीलता से काम कर रही है। यही वजह है कि अभी तक प्रदेश के 21 हजार 743 बच्चों को विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत छात्रवृत्ति प्रदान की जा चुकी है। इसमें मुख्यमंत्री मेधावी छात्र प्रोत्साहन छात्रवृत्ति योजना में सबसे ज्यादा 17 हजार 852 मेधावी बच्चे लाभान्वित हुए हैं।

 

धामी सरकार ने समस्त छात्रवृत्ति योजनाओं के पात्र मेधावी बच्चों में अभी तक 17 करोड़ 67 लाख 77 हजार तीन सौ की धनराशि वितरित की है।

 

प्रदेश में मुख्यमंत्री मेधावी छात्र प्रोत्साहन छात्रवृत्ति योजना के साथ ही डॉ शिवानंद नौटियाल स्मृति छात्रवृत्ति योजना, श्रीदेव सुमन राज्य योग्यता छात्रवृत्ति योजना, राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कोर छात्रवृत्ति योजना संचालित की जा रही है। इसके अलावा, प्रदेश से बाहर के सैनिक स्कूल में पढ़ रहे मेधावी छात्रों को भी धामी सरकार छात्रवृत्ति का लाभ प्रदान कर रही है।

 

विधानसभा के बजट सत्र के चौथे दिन शिक्षा मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने सदन में बताया कि मुख्यमंत्री मेधावी छात्र प्रोत्साहन छात्रवृत्ति योजना में छह से 12 वीं तक के मेधावी बच्चों को 600 से लेकर 1200 रुपये तक की छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है

श्रीदेव सुमन राज्य योग्यता छात्रवृत्ति योजना में अभी तक 3289 मेधावी बच्चें लाभान्वित हुए हैं, जबकि डॉ शिवानंद नौटियाल स्मृति छात्रवृत्ति योजना में अभी तक 527 बच्चों को छात्रवृत्ति मिली हैं।

EXAM: उत्तराखंड बोर्ड की 10 वीं और 12 वीं की परीक्षाएं होंगी कल से शुरु,परीक्षा केंद्रों के आधार पर सेक्टर बनाने के आदेश.

37 Minutes Read -

उत्तराखंड बोर्ड की 10 वीं और 12 वीं की परीक्षाएं कल से शुरू हो रही है। परीक्षा में सुरक्षा और नकल रोकने के लिए कड़े इंतजाम किए गए हैं। शासन ने राजस्व अधिकारियों को सेक्टर मजिस्ट्रेट बनाने का आदेश किया है। 21 फरवरी से शुरू हो रही परीक्षा 20 मार्च 2026 तक चलेगी। इसके लिए प्रदेश भर में 1261 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। इसमें 156 संवेदनशील और छह अति संवेदनशील घोषित किए गए हैं।

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सभी जिलाधिकारियों को आदेश जारी किया है कि परीक्षा केंद्रों पर केंद्र व्यस्थापक और कक्ष निरीक्षकों को पूरी सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए ताकि वे अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूर्ण उत्तरदायित्व के साथ करते हुए परीक्षाओं की पवित्रता को अक्षुण्ण रख सकें। इसके अलावा यह भी जरूरी है कि परीक्षा के लिए तैयार कराए गए प्रश्नपत्रों की गोपनीयता किसी भी स्थिति में भंग न हो। मुख्य सचिव ने आदेश में यह भी कहा कि अनुचित साधनों, प्रश्न पत्र की गोपनीयता भंग करने और हिंसक कृत्य जैसे अपराधों के खिलाफ कड़ी एवं प्रभावी कार्रवाई की जाए।

परीक्षा केंद्रों के आधार पर सेक्टर बनाने के आदेश-

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सभी जिलाधिकारियों को परीक्षा केंद्रों के आधार पर सेक्टर बनाने का आदेश जारी किया है। आदेश में कहा गया है कि परीक्षाएं सुचारु रूप से संपंन कराने के लिए परीक्षा केंद्रों को संख्या के आधार पर सेक्टरों में विभाजित करें। हर सेक्टर में परगानधिकारी, सिटी मजिस्ट्रेट व डिप्टी कलेक्टरों व अन्य समकक्ष अधिकारियों को सेक्टर मजिस्ट्रेट बनाकर यह सुनिश्चित करें कि परीक्षा के दौरान परीक्षा केंद्रों का सेक्टर मजिस्ट्रेट प्रभावी निरीक्षण करें। यह प्रयास किया जाए कि एक सेक्टर में 10-12 से अधिक केंद्र न हों। प्रत्येक सेक्टर मजिस्ट्रेट अपने सेक्टर के लिए उत्तरदायी होंगे। बोर्ड परीक्षा में किसी भी दशा में नकल और अनुचित साधन का प्रयोग न हो।

1261 केंद्रों पर दो लाख से ज्यादा परीक्षार्थी देंगे परीक्षा-

उत्तराखंड बोर्ड की परीक्षाओं को लेकर बनाए गए 1261 केंद्रों पर दो लाख से ज्यादा परीक्षार्थी परीक्षा देंगे। इसमें हाईस्कूल में 112679 छात्र-छात्राओं में से 110573 संस्थागत और 2106 व्यक्तिगत परीक्षार्थी हैं। जबकि इंटरमीडिएट में 103442 परीक्षार्थियों में से 99345 संस्थागत और 4097 व्यक्तिगत परीक्षार्थी हैं।

 

हरिद्वार जिले में सबसे अधिक चार अतिसंवेदनशील केंद्र-

प्रदेश में कुल छह अतिसंवेदनशील केंद्रों में से हरिद्वार जिले में सबसे अधिक चार अतिसंवेदनशील केंद्र हैं। जबकि एक केंद्र पिथौरागढ़ और एक अल्मोड़ा जिले में है। इसके अलावा इस बार 24 नए केंद्र बनाए गए हैं। वहीं, 50 एकल केंद्र हैं।

सामूहिक नकल की सूचना पर उस पाली की परीक्षा होगी रद्द-

शिक्षा सचिव रविनाथ रामन ने जारी आदेश में कहा है कि किसी परीक्षा केंद्र में सामूहिक नकल की सूचना मिलने पर या संदेह होने पर प्रश्न पत्र बदल दिए जाएं या उस पाली की परीक्षा को रद्द कर दिया जाए। वहीं, परीक्षा को दूसरे केंद्र पर करवाया जाए। परीक्षा केंद्र में किसी भी तरह के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, सेलुलर फोन, डिजिटल घड़ी, ब्लूटूथ डिवाइस, इयर फोन, स्मार्ट फोन, पेजर या किस किसी तरह के संचार उपकरण ले जाने की अनुमति नहीं होगी।

परीक्षा केंद्रों की 100 गज की दूरी पर धारा 163 लागू-

परीक्षा केंद्रों की 100 गज की दूरी पर धारा 163 लागू की गई है। इस दायरे में पांच या अधिक लोग नहीं जुट सकेंगे। वहीं, हथियार लाने व लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर रोक रहेगी।

प्रवेश पत्र भूल गए तो घबराएं नहीं, दूसरा मिलेगा-

बोर्ड परीक्षा के दौरान कोई परीक्षार्थी प्रवेश पत्र भूल गया या उसका प्रवेश पत्र खो गया तो घबराएं नहीं, केंद्र व्यवस्थापक को आदेश दिए गए हैं कि वे अनुक्रमांक सूची देकर एक प्रश्न पत्र या अधिकतम एक विषय में परीक्षा के लिए प्रवेश देंगे। अन्य विषयों की परीक्षा में शामिल होने के लिए स्कूल प्रधानाचार्य छात्र के लिए दूसरा प्रवेश पत्र जारी करेंगे।

 

रामनगर बोर्ड ने जारी किए परीक्षार्थियों के लिए आदेश-

उत्तराखंड बोर्ड की 21 फरवरी से शुरू हो रही परीक्षा को लेकर रामनगर बोर्ड की ओर से परीक्षार्थियों के लिए आदेश जारी किया गया है। परीक्षार्थी अपना प्रवेश पत्र साथ लेकर आए, देर से आने या अनुपस्थित होने पर प्रश्न पत्र की तिथि और समय का पता न होने का बहाना नहीं चलेगा। प्रश्न पत्र मिलने से पहले उत्तर पुस्तिका के आवरण पृष्ठ में दिए खाने भरने के अलावा उस पृष्ठ के ऊपर या उत्तर पुस्तिका के भीतर कुछ न लिखें। ऐसा करने पर अनुचित साधन का प्रयोग किया जाना माना जाएगा। इसके अलावा उत्तर पुस्तिका के ऊपर या भीतर ओम या 786 न लिखा जाए। कोई ऐसी बात जिससे उसका नाम या धर्म प्रकट हो। परीक्षा केंद्र या उसके बाहर निरीक्षक, केंद्र व्यवस्थापक या परीक्षा से संबंधित किसी अन्य व्यक्ति के साथ गलत व्यवहार पर परिषद परीक्षार्थी को परीक्षा से या आगामी परीक्षाओं से वंचित कर देगी।

 

प्रश्न पत्र पढ़ने के लिए मिलेगा 15 मिनट का अतिरिक्त समय-

देहरादून। उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा में प्रश्न पत्र पढ़ने के लिए परीक्षार्थियों को 15 मिनट का अतिरिक्त समय दिया जाएगा। बोर्ड ने आदेश जारी किया है कि परीक्षा में प्रश्न पत्र मिलते ही परीक्षार्थी को उसका शीर्षक ध्यान से पढ़कर यह देख लेना चाहिए कि उन्हें सही प्रश्न पत्र मिला है या नहीं। प्रश्न पत्र में कितने पृष्ठ हैं, पूरे हैं या नहीं। यदि पृष्ठ पूरे नहीं हैं तो उसे उसी समय निरीक्षक को वापस कर सही व पूरे प्रश्न वाला प्रश्न पत्र प्राप्त कर लेना चाहिए।

 

परीक्षार्थी यह बरते सावधानी-

रामनगर बोर्ड ने आदेश जारी किया है कि परीक्षार्थी हर दिन परीक्षा भवन में प्रश्न पत्र बंटने से पहले अपने डेस्क व अपनी तलाशी अवश्य ले। यदि कोई कागज या पुस्तक हो तो निरीक्षक को सूचित करते हुए उसे परीक्षा भवन से बाहर भिजवा दें। निरीक्षक को जांच में कोई कागज या पुस्तक मिलने पर यह माना जाएगा की परीक्षार्थी ने अनुचित साधन का प्रयोग का प्रयास किया है। ऐसे में बोर्ड की ओर से नियमानुसार परीक्षार्थी को दंडित किया जाएगा।

 

उत्तराखंड बोर्ड परीक्षाओं को देखते हुए छह महीने के लिए हड़ताल पर रोक-

उत्तराखंड बोर्ड की परीक्षाओं को देखते हुए शासन ने छह महीने के लिए हड़ताल पर रोक लगाई है। शासन की ओर से इसकी अधिसूचना जारी की गई है। इसमें कहा गया है कि विद्यालयी शिक्षा विभाग जिसमें उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद भी शामिल है। इनकी सभी श्रेणी की सेवाओं में तत्काल प्रभाव से हड़ताल पर रोक रहेगी।

 

प्रिय छात्र छात्राओं, उत्तराखंड बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं 21 फरवरी से शुरू हो रही हैं। आप अपनी तैयारियों पर भरोसा रखें, शांत रहें और परिणाम की चिंता करने के बजाए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने पर ध्यान केंद्रित करें। आपके वार्षिक कठिन परिश्रम का सकारात्मक परिणाम अवश्य प्राप्त होगा। मैं इन परीक्षाओं में शामिल होने वाले सभी विद्यार्थियों के उज्जवल भविष्य की कामना करता हूं। -डॉ मुकुल कुमार सती, सभापति उत्तराखंड बोर्ड

Uttarakhand Board: दो लाख से ज्यादा परीक्षार्थी होंगे परीक्षा में शामिल, नकल रोकने के लिए तीन स्तरों पर गठित होंगे सचल दल.

69 Minutes Read -

प्रदेश में 21 फरवरी से शुरू हो रही उत्तराखंड बोर्ड की परीक्षा को नकल विहीन बनाने के लिए तीन स्तरों राज्य, मंडल और जिलास्तर पर सचल दल गठित होंगे। 1261 परीक्षा केंद्रों पर दो लाख से ज्यादा छात्र परीक्षा देंगे।

माध्यमिक शिक्षा निदेशक के मुताबिक उत्तराखंड बोर्ड की परीक्षा को लेकर विभाग की ओर से सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के संस्थागत एवं व्यक्तिगत आवेदन पत्रों को ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से प्राप्त कर लिया गया है।

उत्तर पुस्तिकाओं के संकलन के लिए 39 केंद्र बनाए गए हैं। जबकि मूल्यांकन के लिए 29 केंद्र बनाए गए हैं। इसमें 16 गढ़वाल और 13 कुमाऊं मंडल में हैं। हर मूल्यांकन केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था की जाएगी।

चंपावत जिले में सबसे कम 44 परीक्षा केंद्र-

उत्तराखंड बोर्ड परीक्षाओं के लिए 1261 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। इसमें 50 एकल और 1211 मिश्रित केंद्र हैं। इन केंद्रों में 156 संवेदनशील और छह अति संवेदनशील हैं। जबकि 24 नए केंद्र हैं। इसमें टिहरी जिले में सबसे अधिक 136 और चंपावत जिले में सबसे कम 44 केंद्र बनाए गए हैं। उत्तराखंड बोर्ड की प्रयोगात्मक परीक्षाएं खत्म हो गई हैं। परीक्षाएं 16 जनवरी से शुरू होगा 15 फरवरी 2026 तक चली।

Uttarakhand Cabinet: कैशलैस इलाज के लिए बढ़ेगा अशंदान, कैबिनेट में आए 11 प्रस्ताव, इन पर लगी मुहर.

97 Minutes Read -

उत्तराखंड कैबिनेट की बैठक आज संपन्न हुई। इस दौरान बैठक में 11 प्रस्ताव पर मुहर लगी। वहीं, उपनल कर्मचारियों को समान कार्य के लिए समान वेतन का मामला मंत्रिमंडल उपसमिति को सौंपा गया है।

ये फैसले हुए-

वित्त: नेचुरल गैस पर वैट की दर 20 से घटाकर 5% करने पर के प्रस्ताव पर मुहर।

कृषि:धराली व आसपास के आपदाग्रस्त क्षेत्र में रॉयल डिलिशियस सेब का 51रुपये, दूसरे रेड डेलिशियस सेब का 45 रुपये प्रति किलो मुल्य।

संस्कृति:  कलाकार व लेखकों को मासिक पेंशन 3000 से बढ़ाकर 6000 रुपये करने का निर्णय लिया गया।

आवास: इज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत केंद्र के निर्देश के तहत निम्न जोखिम वाले भवन या छोटे व्यावसायिक भवन को एम्पनल्ड आर्किटेक्ट द्वारा नक्शा पास करा सकते हैं। पहले ये विचलन से आया था, आज कैबिनेट ने मुहर लगाई है।

औद्योगिक विकास: ग्राउंड कवरेज एमएसएमई यूनिट और इंडस्ट्री यूनिट का बढ़ाया गया। बांस एवं रेशा विकास परिषद के ढांचे में परिवर्तन किया गया है। तकनीकी प्रकृति के स्टाफ को उपनल के बजाय आउटसोर्सिंग से रखने की व्यवस्था। 13 पदों को कॉन्ट्रैक्ट या आउटसोर्सिंग से होंगे।

  • आयुष्मान और अटल आयुष्मान 100% इन्श्योरेंस मोड में संचालित होगा। गोल्डन कार्ड हाइब्रिड मोङ में चलेगा। पांच लाख से कम के क्लेम इन्श्योरेंस से भुगतान होगा। पांच लाख से यूजर वाले क्लेम ट्रस्ट मोड से मिलेंगे। महंगाई दर के हिसाब से कर्मचारियों से लिये जाने वाला अंशदान करीब 250 रुपये से 450 रुपये तक बढ़ेगा।
  • सिंचाई व लोक निर्माण विभाग के वर्क चार्ज एम्प्लाइज को पेंशन मिलेगी।
  • उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा सेवा संशोधन नियमावली को मंजूरी। प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर की उम्र 50 से बढ़ाकर 62 वर्ष, सुपर स्पेशलिटी सर्विसेज के लिए भी विभाग बनाये गए हैं। स्वामी राम कैंसर इंस्टीट्यूट हल्द्वानी के लिए 4 पदों के सृजन को मंजूरी।
  • श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में समान कार्य, समान वेतन मामला…277 कर्मचारियों को मिलना है लाभ। कैबिनेट उपसमिति को भेजा गया।
  •  दुर्गम व अति दुर्गम इलाकों में काम करने वाले विशेषज्ञ डॉक्टरों को 50% अतिरिक्त भत्ता मिलेगा। करीब 300 डॉक्टरों को मिलेगा लाभ।

Uttarakhand: प्रदेश में पहली बार जनजातीय स्कूल के छात्र पढ़ेंगे गीता का पाठ, पाठ्यक्रम में किया गया शामिल.

84 Minutes Read -

प्रदेश में पहली बार जनजातीय स्कूल के छात्र गीता का पाठ पढ़ेंगे। झाझरा स्थित जनजातीय स्कूल में श्रीमद्भागवत गीता के पाठ्यक्रम को शामिल किया गया है। यह प्रदेश का पहला विद्यालय बना है जिसमें यह पाठ्यक्रम का हिस्सा बना है।

झाझरा स्थित जनजातीय विद्यालय दून संस्कृति स्कूल में गणित, हिंदी, अंग्रेजी के साथ अब गीता के पाठ्यक्रम को भी पढ़ाया जाएगा। इसके लिए पौंधा गुरुकुल के आचार्य अंकित आर्य की नियुक्ति की गई है। पूर्व सांसद तरुण विजय ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान और रूस के राष्ट्रपति पुतिन को गीता भेंट करने से प्रेरित होकर विद्यालय ने गीता के पाठ को अनिवार्य करने का निर्णय लिया है।

अब श्रीमद्भागवत गीता को दैनिक पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है। कक्षा चार से 10 तक के विद्यार्थियों के लिए इस पाठ्यक्रम को अनिवार्य किया गया है। पूर्व सांसद तरुण विजय ने इसे राष्ट्रव्यापी आंदोलन बनाने के साथ ही सभी विद्यालयों में नियमित रूप से इसे पढ़ाने की अपील की है। इसमें आर्य समाज मंदिर धामावाला के प्रधान सुधीर गुलाटी का सहयोग रहा।

गणित, हिंदी की तरह लगेगी गीता की क्लास-

जनजातीय स्कूल में अब हिंदी, गणित की तरह गीता के पाठ की भी क्लास लगेगी। हर दिन गीता के पाठ का लेक्चर चलेगा। शनिवार से इस पाठ्यक्रम की शुरुआत हो गई। इस विद्यालय में नागालैंड, मणिपुर समेत उत्तर पूर्वांचल के छात्र-छात्राएं भी पढ़ाई करते हैं।

 

राज्य के 25 साल – विकास की रफ्तार या व्यवस्था की विकृति

181 Minutes Read -
लेखक-  स्वतंत्र पत्रकार हरीश खखरियाल की कलम से….. 

“9 नवम्बर  2000…जब उत्तराखंड ने अलग राज्य बनने का सपना देखा था,तो उस सपने में शामिल  था – विकास, पारदर्शिता, रोजगार और ईमानदारी। आज, जब राज्य अपनी रजत जयंती मना रहा है,सवाल  उठता है —इन 25 सालों में उत्तराखंड ने क्या पाया, और क्या खो दिया ?”
सपना और सच्चाई का अंतर

“राज्य आंदोलन के दौरान नारा था —‘अपना राज, अपने लोग, अपनी पहचान।उम्मीद थी कि  शासन गावों तक पहुंचेगा और भ्रष्टाचार से मुक्त व्यवस्था  बनेगी, लेकिन  दो दशक बाद हकीकत कुछ  और ही बयान कर रही है।बेरोज़गारी, पलायन और भ्रष्टाचार की जडें अब हर विभाग में फैल चुकी हैं।
Claim Thousands of unemployed will be seen on the streets today, walking march up to 7 km | “बेरोजगार युवा बोले - GO बेरोजगारी GO”: सड़क पर उतरे सैकड़ों बेरोजगार, 7 Km

Uttarakhand News: 22 वर्ष के उत्तराखंड में पलायन ऐसा विषय, जिसका अभी तक नहीं हो पाया है समाधान - uttarakhand foundation day migration problem not solved in 22 years at uttarakhand

बढ़ता भ्रष्टाचार – सिस्टम में सडांध
 
राज्य गठन के साथ उम्मीद थी कि ‘छोटा राज्य, पारदर्शी शासन’ का सपना साकार होगा,मगर 25 साल बाद भ्रष्टाचार की जडें इतनी गहरी हैं कि  अब न्यायालयों को बार-बार दखल देना पड रहा है।​
Uttarakhand High Court Recruitment 2025 (eCourts.gov.in) New Notification
 
 विभागीय भ्रष्टाचार हो या भर्तियों  में धांधली —हाईकोर्ट  तक को कई बार CBI जााँच के आदेश देने पडे। बागवानी विभाग को किसानों  की आत्मा कहा जाता है,वहां तक भ्र्ष्टाचार की गंध पहुंच चुकी है,किसानों  के लिए  बनी योजनाएं , सब्सिडी  और ग्रांट्स फाइलों में अटककर अफसरशाही की भेंट चढ़ गईं।हालात इतने बिगड़े कि हाईकोर्ट को खुद  बागवानी  विभाग के भ्रष्टाचार की जााँच CBI से कराने के आदेश देने पडे।
CBI to question bank officials under scanner in 8.5 lakh mule accounts case - The Economic Times
और यह कहानी सिर्फ  एक विभाग की नहीं —सडक निर्माण  से लेकर खनन, शिक्षा और भर्ती परीक्षाओं तक,हर जगह ‘सिस्टम सवालों  के घेरे में है।

पेपर लीक और बेरोज़गारों की हताशा

पेपर लीक कांड ने युवाओं के भरोसे को तोड़ दिया  है। जिस युवा शक्ति को राज्य की रीड बनना था,,वही  आज  आज सडकों पर है,अपने हक़ और मेहनत की कीमत मांगते  हुए हर कुछ  महीनों में भर्ती  परीक्षाओं की जााँच, रद्दीकरण,और आंदोलनों की आवाज बनकर  सुनाई  देती है।
उत्तराखंड बेरोजगार संघ ने 10 फरवरी को उत्तराखंड बंद का आह्वान किया है – दिप्रिंट – एएनआईफ़ीड
पलायन रुकने के बजाय और बढ़ा है —आज पहाडों से हर रोज़ सैकडों युवा  रोज़गार की तलाश में मैदान की ओर उतर रहे हैं।​
अपराध और असुरक्षा – बदलता उत्तराखंड

कभी शांत प्रदेश कहा जाने वाला  उत्तराखंड अब अपराध की खबरों से भी अछूता नहीं रहा। हत्या, लूट और दुष्कर्म जैसी वारदातें अब यहां की सुर्ख़ियों में शामिल हैं,सवाल  उठता है — क्या हम वाकई  उस उत्तराखंड में हैं,जिसका  सपना 2000 में देखा गया था?”
 

विकास की रफ्तार – उप्लभ्धियाँ भी कम नहीं 

इन सबके बीच, उत्तराखंड ने विकास की राह पर भी कई कदम बढ़ाए हैं। चारधाम यात्रा के तलए ऑल वेदर  रोड प्रोजेक्ट,हवाई सेवाओं  का विस्तार,और शिक्षा स्वास्थ्य  के नए संस्थान — ये उप्लभ्धियाँ राज्य की प्रगति की तस्वीर दिखाती  हैं। पर्यटन , योग, और जैविक खेती के क्षेत्र में भी उत्तराखंड ने नई पहचान बनाई है। आज राज्य का GDP 3 लाख करोड के करीब पहुंच  रहा है,और प्रति व्यक्ति  आय में भी बढ़ोतरी हुई है।लेकिन सवाल वही  —क्या विकास का लाभ हर पहाडी गावं तक पहुंचा ?जनता का सवाल – जवाबदेहि कहां है?

जब हर कुछ  सालों में एक नया घोटाला सामने आता है,जब हर भर्ती  पर संदेह हो,जब युवाओं  की आाँखों में विश्वास की जगह निराशा  हो —तब रजत जयंती के जश्न पर ताली बजाना मुश्किल  हो जाता है। सवाल है  — क्या ये 25 साल जनता के लिए बदलाव  लाए या सिर्फ कुर्सियों के लिए ?

निष्कर्ष  – उम्मीद अब भी बाकी है

उत्तराखंड की कहानी संघर्ष से शुरू हुई थी,और उम्मीदों पर अटकी हुई है।ये राज्य युवाओं  की मेहनत और पहाडों की ईमानदारी से बना है।अगर राराजनीतिक इइच्छाशक्ति  ईमानदार हो,तो अगला अध्याय भरोसे और पारदर्शिता  का लिखा  जा सकता है। राज्य का सवाल अब भी वही  है —‘क्या खोया, क्या पाया?’ जवाब आने वाले सालों में तय करेगा कि पहाड़ों का सपना अधूरा रहेगा या पूरा होगा।”
“25 साल बाद भी सवाल वही  — भ्रष्टाचार बनाम विकास | उत्तराखंड @ 25”
 
ये लेखक के अपने स्वतंत्र विचार हैं… 

Uttarakhand: प्रदेश में होगा सीमांत क्षेत्र विकास परिषद का गठन, CM धामी बोले-नवाचार केंद्र बनाए जाएंगे.

111 Minutes Read -

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, प्रदेश के सीमांत क्षेत्रों में सुविधाओं व सेवाओं के लिए विस्तार के लिए सीमांत क्षेत्र विकास परिषद का गठन किया जाएगा। इसके अलावा सीमांत जिलों में आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य व शिक्षा क्षेत्र में प्रशिक्षण के लिए नवाचार केंद्र बनाए जाएंगे।

बुधवार को रुद्रप्रयाग जिले के गुप्तकाशी में उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद की ओर से चतुर्थ सीमांत पर्वतीय जनपद बाल विज्ञान महोत्सव के शुभारंभ पर मुख्यमंत्री ने यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की सीमांत क्षेत्रों में बेहतर सुविधाएं व सेवाएं देना प्राथमिकता है।

पर्वतीय राज्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि-
इसके लिए जल्द ही प्रदेश में सीमांत विकास परिषद का गठन किया जाएगा। जो सीमांत क्षेत्रों के विकास व सेवाओं में सुधार के लिए काम करेगा। प्रदेश के सीमांत जिलों में नवाचार केंद्र बनाए जाएंगे। जहां पर आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य व शिक्षा से संबंधित जानकारी हासिल करने व प्रशिक्षण की सुविधा मिलेगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विभिन्न जनपदों से आए बाल वैज्ञानिकों के साथ जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक जल संसाधन एवं संरक्षण, आपदा प्रबंधन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा ऊर्जा संरक्षण आदि विषयों पर चर्चा की। कहा, इस महोत्सव से सीमांत जनपदों के प्रतिभावान बाल वैज्ञानिकों को नई दिशा और अवसर प्राप्त होंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज भारत नवाचार, अनुसंधान और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां छू रहा है। नए भारत की गति और दिशा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के नवाचारों पर निर्भर करेगी। विज्ञान की नई तकनीकों के बल पर आज भारत अंतरिक्ष समेत विभिन्न क्षेत्रों में अपना परचम लहरा रहा है। देहरादून में देश की पांचवीं साइंस सिटी बनाई जा रही है, जो पर्वतीय राज्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।

Uttarakhand: समूह-ग परीक्षाओं का होगा लाइव टेलीकास्ट, गेट पर ही होगी हाजिरी, मास्टर प्लान किया गया तैयार.

135 Minutes Read -

यूकेएसएसएससी अपनी आगामी भर्ती परीक्षाओं में अब किसी स्तर पर कोई कमी नहीं चाहता। लिहाजा, जो मास्टर प्लान तैयार किया गया है, उसमें परीक्षा केंद्र से लेकर आयोग तक के हर पहलू को शामिल किया गया है। इसी कड़ी में जैमर की कमियों को लेकर अहम बैठक इसी महीने होगी।

यूकेएसएसएससी की स्नातक स्तरीय परीक्षा में जैमर के काम न करने का मुद्दा प्रमुखता से उठा था। अमर उजाला ने इसका खुलासा किया था कि परीक्षा केंद्रों पर 4-जी जैमर थे जो 5-जी नेटवर्क को जाम नहीं कर सकते। आयोग ने अपने आगामी प्लान में जैमर को पूरी तवज्जो दी है। इसके लिए इसी महीने की 27-28 तारीख को जैमर सप्लाई करने वाली सरकारी कंपनी ईसीआईएल और बायोमीट्रिक मशीन उपलब्ध कराने वाली कंपनी के अफसरों के साथ आयोग की बैठक होगी। बैठक में सभी कमियों पर चर्चा होगी।

परीक्षा केंद्र पर परीक्षा से एक रात पहले भी सुरक्षाकर्मी होंगे तैनात-

परीक्षा केंद्रों का निर्धारण करने के बाद पुलिस और मजिस्ट्रेट के संयुक्त निरीक्षण में देखा जाएगा कि उस केंद्र की दीवारें कितनी ऊंची हैं। वहां का प्रवेश और निकास द्वार कितना सुरक्षित है। आयोग के अध्यक्ष जीएस मर्तोलिया ने बताया कि परीक्षा केंद्र पर परीक्षा से एक रात पहले भी सुरक्षाकर्मी तैनात होंगे। जैमर का ट्रायल एक दिन पहले होगा। जहां कमी होगी, उस जैमर को तुरंत बदला जाएगा। इसकी जिम्मेदारी सेक्टर मजिस्ट्रेट, परीक्षा केंद्र समन्वयक और पर्यवेक्षक की होगी, जिनकी रिपोर्ट जरूरी होगी।

केंद्र के प्रवेश द्वार पर ही सभी औपचारिकताएं-

अब परीक्षा केंद्र के प्रवेश द्वार पर ही चेकिंग से लेकर बायोमीट्रिक हाजिरी तक की सभी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। अभ्यर्थी और केंद्र पर्यवेक्षक के अलावा कोई अन्य व्यक्ति भीतर नहीं जा सकेगा। अगर किसी को जाने की जरूरत होगी तो आते-जाते उसकी कड़ी चेकिंग होगी।

परीक्षा का लाइव टेलीकास्ट होगा-

समूह-ग भर्ती परीक्षा का आयोग लाइव टेलीकास्ट करेगा। इसका कंट्रोल रूम आयोग कार्यालय में बनाया जाएगा। हर केंद्र की सभी परीक्षा संबंधी गतिविधियों पर आयोग यहां से भी नजर रखेगा।

एक ही पाली में होगी परीक्षाएं-

आयोग ने उन खबरों का भी खंडन किया, जिनमें परीक्षाएं दो पालियों में कराने का दावा किया जा रहा है। आयोग के अध्यक्ष जीएस मर्तोलिया ने कहा कि केवल एक ही पाली में परीक्षाएं होंगी।