Category Archive : राजनीति

Farmers Protest: MSP पर सरकार का प्रस्ताव या ‘खेल’, क्यों नहीं माने किसान ?

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प्रदर्शन कर रहे किसानों और केंद्र सरकार के बीच गतिरोध खत्म नहीं हो रहा. फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी (MSP) पर नरेंद्र मोदी सरकार ने जो प्रस्ताव रखा था,उसे किसानों ने खारिज कर दिया है और कहा कि वो 21 फरवरी की सुबह अपना ‘दिल्ली चलो’  मार्च फिर से शुरू करेंगे. किसान नेताओं का कहना है कि सरकारी प्रस्ताव में स्पष्टता नहीं है और वो उनके हित में भी नहीं है.

किसानों की दो प्रमुख मांगें हैं पहली कि सरकार MSP गारंटी पर कानून बनाए. भले ही सरकार उनकी पूरी फसल न ख़रीदे, पर अगर किसान खुले बाजार में भी अपनी उपज बेचता है, तो उसे न्यूनतम कीमत की गारंटी मिले. क़ानून बन जाने से सरकार, प्राइवेट कंपनियां या पब्लिक सेक्टर एजेंसियां, कोई भी मनमाने दाम पर फसल नहीं खरीद पाएगा.

दूसरी मांग- MSP गारंटी के साथ किसान स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करवाना चाहते हैं,, इसके अलावा किसानों और खेतिहर मजदूरों को पेंशन मिले, बिजली दरों में बढ़ोतरी न हो, किसानों का कर्ज माफ हो, भूमि अधिग्रहण अधिनियम (2013) बहाल किया जाए, लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में न्याय मिले 2020-21 में हुए आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के परिवारों को मुआवजा दिया जाए और पुलिस ने जो मामले दर्ज किए थे, वो भी वापस लिए जाएं.

कृषि केंद्रीय मंत्रियों ने रखा सरकार की ओर से ये प्रस्ताव- 

वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, कृषि व किसान कल्याण मंत्री अर्जुन मुंडा और गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने चंडीगढ़ में किसान नेताओं के साथ चौथे दौर की बातचीत की केंद्रीय मंत्रियों के पैनल ने सरकार की ओर से प्रस्ताव रखा. सरकार का कहना है कि मसूर, उड़द, तुअर, मक्का और कपास उगाने वाले किसानों के साथ दो सहकारी एजेंसियां राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ और  भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ 5 साल का एग्रीमेंट करेंगी और इस एग्रीमेंट के ज़रिए सीधे किसानों से ये फसलें MSP पर खरीदा जाएंगी ख़रीद की मात्रा पर कोई सीमा नहीं होगी, और इसके लिए एक पोर्टल बनाया जाएगा.

इससे पहले, 18 फरवरी की रात केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि साल 2004 से 2014 के बीच UPA सरकार ने केवल साढ़े 5 लाख करोड़ रुपये की फसलों की ख़रीद MSP पर की थी और मोदी सरकार ने बीते दस सालों में 18 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा की ख़रीद की है बैठक के बाद किसान नेताओं ने कहा था कि वो अपने संगठन के साथ सरकार के प्रस्ताव पर चर्चा करेंगे और दो दिनों में आगे की रणनीति तय करेंगे.

केंद्रीय मंत्री ने तो दावा कर दिया. मगर किसान इससे खुश नहीं हैं. उनका सीधा कहना है कि केवल पांच नहीं, सभी 23 फसलों पर MSP की गारंटी चाहिए किसान मजदूर मोर्चा के नेता सरवन सिंह ने शंभू सीमा पर मीडिया से कहा, कि हम सरकार से अपील करते हैं कि या तो हमारे मुद्दों का समाधान करें या बैरिकेड हटा दें और हमें शांतिपूर्वक विरोध करने के लिए दिल्ली जाने की अनुमति दें.

क्या कहते हैं इस पर विशेषज्ञ-
 

अब सवाल ये है कि आगे का रास्ता क्या हो सकता है विशेषज्ञ मानते हैं अब इसके दो तरीके हैं. पहला कि खरीदारों को MSP पर फसल खरीदने के लिए फोर्स किया जाए मसलन, क़ानून कहता है कि गन्ना उत्पादकों को चीनी मिलों की तरफ से खरीद के 14 दिनों के अंदर ‘उचित और लाभकारी’ या राज्य-सलाहित मूल्य मिलेगा लेकिन ये व्यावहारिक नजरिए से मुश्किल है हो सकता है MSP देने के ‘डर’ से फसल खरीदी ही न जाए दूसरा तरीका ये है कि सरकार ही किसानों की पूरी फसल MSP पर खरीद ले  मगर ये भी वित्तीय लिहाज़ से टिकाऊ प्लान नहीं है.

इन दोनों तरीकों के अलावा कृषि विशेषज्ञ एक तीसरे तरक़े की ओर इशारा करते हैं मूल्य कमी भुगतान यानी PDP इसमें सरकार को किसी भी फसल को खरीदने या स्टॉक करने की ज़रूरत नहीं है बस अगर बाजार मूल्य और MSP कम है, तो सरकार सुनिश्चित कर दे कि किसानों को इन दोनों के बीच का अंतर मिल जाए मगर राष्ट्र के स्तर पर इसे लागू करने के लिए बहुत सोचा-समझा एक  प्लान चाहिए. अब सरकार और किसानों के अगले रुख पर अब सबकी नजरें टिकी हुई हैं.

ये हैं किसानों की प्रमुख मांगें
  • स्वामीनाथन रिपोर्ट के अनुसार सभी फसलों की एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांग
  • किसानों और खेत मजदूरों की कर्ज माफी की मांग
  • लखीमपुर खीरी में जान गंवाने वाले किसानों को इंसाफ और आशीष मिश्रा की जमानत रद्द कर सभी दोषियों को सजा की मांग
  • लखीमपुर खीरी कांड में घायल सभी किसानों को वादे के मुताबिक 10 लाख रुपये मुआवजे की मांग
  • किसान आंदोलन के दौरान दर्ज केस रद्द करने की मांग
  • पिछले आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों के आश्रितों को नौकरी
  • 200 दिन मनरेगा की दिहाड़ी मिले
  • 700 रुपये प्रतिदिन मजदूरी की मांग
  • फसल बीमा सरकार खुद करे
  • किसान और मजदूर को 60 साल होने पर 10 हजार रुपये महीना मिले
  • विश्व व्यापार संगठन से खेती को बाहर किया जाए

MP Politics: कमलनाथ के साथ उनके बेटे नकुलनाथ भी होंगे बीजेपी में शामिल? सोशल मीडिया प्रोफाइल से हटाया कांग्रेस का नाम और लोगो।

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अब मध्यप्रदेश में कांग्रेस पार्टी को एक बड़ा झटका लग सकता है। पार्टी के दिग्गज नेता कमलनाथ और उनके बेटे नकुलनाथ की भाजपा में शामिल होने की अटकलें अब तेज हो गई है। इस बीच नकुलनाथ के एक्स हैंडल पर उनकी पुरानी पार्टी का नाम और लोगो भी हट गया है।

नकुलनाथ ने अपने बायो से कांग्रेस का लोगो हटाया-

छिंदवाड़ा सांसद नकुलनाथ ने अपने तीनों सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स में अपने बायो से कांग्रेस का नाम हटा दिया है और अब केवल उनके नाम के आगे सिर्फ छिंदवाड़ा सांसद लिखा है।

कमलनाथ के कांग्रेस में शामिल होने की अटकलों के बीच अब सोशल मीडिया मीडिया एक्‍स पर भी कमलनाथ खूब ट्रेंड कर रहा है, जिसमें कमलनाथ के भाजपा में शामिल होने के बड़े-बड़े दावे किये जा रहे है। हालांकि, पिछले कई दिनों से जब कमल नाथ से उनके भाजपा में जाने पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया था।

सुमित्रा महाजन ने दिया था उन्हें न्योता-

पूर्व लोकसभा स्‍पीकर और पूर्व इंदौर सांसद सुमित्रा महाजन ने पिछले दिनों कमलनाथ को जय सियाराम के नारे के साथ भाजपा में आने का निमंत्रण दिया था। उन्होंने कहा था कि यदि विकास पसंद है तो पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ भाजपा में शामिल हो सकते हैं।

भाजपा ने कहा- उनका स्वागत है

कमलनाथ के भाजपा में शामिल होने के सवाल पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने कहा कि अगर वो अपनी पार्टी से परेशान हैं तो उनका भाजपा में स्वागत है। वहीं, भाजपा प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा ने भी कमलनाथ और नकुलनाथ की फोटो के साथ जय श्री राम का नारा लिखा है।

क्या कहा दिग्विजय सिंह ने-

कमलनाथ के भाजपा में शामिल होने के सवाल पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि कल रात मेरी कमलनाथ से बातचीत हुई है। वह छिंदवाड़ा में हैं और वह ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने अपना राजनीतिक करियर नेहरू-गांधी परिवार के साथ शुरू किया था। इसलिए उनके भाजपा में जाने की बात गलत है।https://youtu.be/AWGz5VvxKc0

कांग्रेस के खातों पर लगे प्रतिबंध के खिलाफ IT ट्रिब्यूनल पहुंची कांग्रेस, मिली राहत; आयकर विभाग ने किए थे फ्रीज.

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कांग्रेस को आयकर विभाग की तरफ से खातों पर लगाए प्रतिबंधों के मामले में ट्रिब्यूनल की तरफ से बड़ी राहत मिली है। पार्टी के नेता विवेक तन्खा ने बताया है कि इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल ने कांग्रेस को अंतरिम राहत देते हुए उसे खातों को चलाने की छूट दी है। ट्रिब्यूनल इस मामले में अंतरिम राहत के लिए बुधवार को सुनवाई करेगा।

गौरतलब है कि इससे पहले पार्टी के प्रवक्ता अजय माकन ने शुक्रवार को ही प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि आयकर विभाग ने 2018-19 के आयकर रिटर्न के आधार पर कांग्रेस और यूथ कांग्रेस के खातों को फ्रीज कर दिया है। उन्होंने कहा कि आयकर विभाग ने इन दोनों खातों से 210 करोड़ रुपये की रिकवरी का भी आदेश दिया है। उन्होंने कहा कि हमारे अकाउंट में जो भी क्राउडफंडिंग से जुटाई गई राशि है, उसे हमारी पहुंच से दूर कर दिया गया है
माकन ने कहा कि चुनाव के एलान से महज दो हफ्ते पहले ही विपक्षी पार्टी का अकाउंट फ्रीज कर दिया गया। यह लोकतंत्र को फ्रीज करने जैसा है। माकन ने बताया कि इस खाते में एक महीने की सैलरी भी दी है। हमने आयकर विभाग को उन दानकर्ताओं के नाम भी दिए हैं।

माकन ने कहा, “हमें एक दिन पहले ही जानकारी मिली थी कि बैंकों को हम जो चेक भेज रहे थे, उनका निपटारा नहीं हो पा रहा था। जांच पर पता चला कि यूथ कांग्रेस का बैंक अकाउंट फ्रीज कर दिया गया है। इसके साथ ही कांग्रेस पार्टी के खाते भी बंद होने की बात सामने आई। कुल चार अकाउंट फ्रीज किए गए हैं। आयकर विभाग की तरफ से बैंकों को यह निर्देश दिया गया है कि हमारे कोई भी चेक स्वीकार न करें और हमारे खातों में जो भी राशि है उसे रिकवरी के लिए रखा जाए।”

भाजपा पर लगाए आरोप-
माकन ने कहा कि कांग्रेस ने इस मामले को लेकर आयकर अपीलीय अधिकरण का रुख किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि न्यायपालिका लोकतंत्र की रक्षा करेगी। कांग्रेस नेता ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि क्या वे यही चाहते हैं कि देश में सिर्फ एक ही पार्टी रहे। उन्होंने कहा कि अगर किसी के खाते सील होने चाहिए तो भारतीय जनता पार्टी के होने चाहिए क्योंकि उन्होंने ‘असंवैधानिक’ चुनावी बॉन्ड के जरिए कॉर्पोरेट जगत से पैसे लिए हैं।

‘हमारे पास बिजली का बिल भरने के पैसे भी नहीं’-
कांग्रेस के ट्रेजरर माकन ने कहा कि अभी कांग्रेस के पास खर्च करने के लिए पैसे तक नहीं हैं। उन्होंने कहा कि हमारे पास बिजली के बिल देने के लिए, अपने कर्मचारियों को सैलरी देने के लिए तक राशि नहीं बची है। उन्होंने कहा कि इससे हर चीज पर प्रभाव पड़ेगा। न सिर्फ न्याय यात्रा, बल्कि सभी तरह की राजनीतिक गतिविधियां प्रभावित होंगी।

Uttarakhand: भाजपा में टिकट दावेदारों की है लंबी कतार, कई युवा भी हैं चुनाव में ताल ठोकने को बेताब

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लोकसभा चुनाव के टिकट के लिए  भाजपा में टिकट के दावेदारों की लंबी लाइन लगी हुई है। दिग्गज नेताओं से लेकर पार्टी के युवा तक सभी चुनाव में ताल ठोकने को बेताब हैं। जब से भाजपा के हलकों में कुछ सीटों पर प्रत्याशी बदलने की अटकलों ने जोर पकड़ा है, तभी से उनकी कोशिशें तेज हो रही हैं।

जैसे-जैसे लोकसभा चुनावों का समय नजदीक आ रहा है वैसे-वैसे टिकट की दावेदारी पूरी तरह से खुलकर सामने आने लगेगी। चर्चाएं ये भी हैं कि भाजपा केंद्रीय नेतृत्व लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी चयन के मामले में भी पार्टी को एक बड़ा सरप्राइज कर सकता है। वर्तमान में राज्य की सभी पांचों लोकसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा है। 2014 और 2019 लोक सभा चुनावों में भाजपा ने पांचों सीटों पर लगातार जीत दर्ज की है ।

अल्मोड़ा-पिथौरागढ़, टिहरी गढ़वाल और हरिद्वार लोकसभा सीट पर भाजपा ने अपने तीनों प्रत्याशियों को  रिपीट किया था। टिहरी गढ़वाल संसदीय सीट पर माला राज्य लक्ष्मी शाह, हरिद्वार में डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक और अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ लोस सीट पर अजय टम्टा सांसद हैं। 2014 में गढ़वाल लोस सीट पर मेजर जनरल बीसी खंडूरी  सांसद थे।

प्रत्याशियों में हो सकता है फेरबदल-


2019 में पार्टी ने खंडूड़ी के शिष्य तीरथ सिंह रावत को टिकट दिया और वह चुनाव जीते। नैनीताल-ऊधमसिंह नगर में 2014 में भगत सिंह कोश्यारी सांसद चुने गए थे। 2019 में उनकी इस सीट पर अजय भट्ट को उम्मीदवार बनाया गया, वह भी चुनाव जीते। अब भाजपा के राजनीतिक हलकों में यह कयास हैं कि पार्टी नेतृत्व प्रत्याशी चयन को लेकर चौंका सकता है।

ऐसे में पार्टी में यह सवाल गरमा रहा कि पार्टी नेतृत्व पांचों सीटों पर प्रत्याशी रिपीट करेगा या सभी को बदलेगा, या कुछ सीटों पर नए चेहरों को मैदान में उतारेगा। पांच में से तीन लोस सीटों पर वर्तमान सांसदों का टिकट काटे जाने की ज्यादा चर्चाएं हैं। इन चर्चाओं ने पार्टी के उन चेहरों के उम्मीदों को पंख लगाते हैं जो लोस चुनाव की दावेदारी कर रहे हैं। इनमें पार्टी के कुछ विधायक, पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व सांसद व पार्टी पदाधिकारी, युवा और महिला मोर्चा के पदाधिकारी भी शामिल हैं। टिहरी, अल्मोड़ा और हरिद्वार सीटों से तो प्रदेश संगठन को टिकट के लिए आवेदन तक मिल चुके हैं।
लोकसभा चुनाव में भाजपा जीत की हैट्रिक लगाएगी। पार्टी में उम्मीदवारों का निर्णय केंद्रीय संसदीय बोर्ड करता है। यह बात सही है कि कुछ कार्यकर्ताओं ने विभिन्न सीटों पर टिकट की दावेदारी के आवेदन दिए हैं। महेंद्र भट्ट, प्रदेश अध्यक्ष- भाजपा

Haldwani Violence: बनभूलपुरा मामले में घायल एक और व्यक्ति की मौत, सिर के आर-पार हो गई थी गोली, 2 की हालत गंभीर।

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हल्द्वानी के बनभूलपुरा में गुरुवार शाम को अतिक्रमण हटाने को लेकर हुए बवाल के बाद प्रशासन ने उपद्रवियों के पैर में गोली मारने के आदेश जारी किए थे। हल्द्वानी हिंसा में पांच लोगों की गोली लगने से मौत हो गई थी, जबकि तीन लोगों का एसटीएच में इलाज चल रहा है। इनमें दो की हालत गंभीर बनी हुई है। आज एक की मौत हो गई है। इशरार के सिर में गोली लगी थी जो आर-पार हो गई थी। वहीं एसएसपी ने कहा कि मास्टरमाइंड अब्दुल मलिक को जल्द अरेस्ट किया जाएगा।

मिली जानकारी के अनुसार, आठ फरवरी को हिंसा के दौरान घायल हुए बनभूलपुरा निवासी अलबसर, इसरार और शाहनवाज को इलाज के लिए अस्पताल लाया गया था। तीनों की हालत गंभीर थी। इसरार के सिर में गोली लगी थी जो आर-पार हो गई थी और इलाज के दौरान आज उसकी मौत हो गई है।

एसएसपी प्रहलाद नारायण मीणा ने कहा कि बनभूलपुरा दंगे में अब तक कुल छह लोगों की मौत हुई है। वहीं, कर्फ्यू क्षेत्र में आवश्यक सेवाएं सुचारू की गई है। आगजनी करने वालों को चिन्हित किया जा रहा। पुलिस दंगाइयों को पकड़ने का काम कर रही है।

Farmers Protest: शंभू बॉर्डर पर बवाल, दागे गए आंसू गैस के गोले; जानिये नेताओं की प्रतिक्रियाएं.

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शंभू बॉर्डर पर हो रहे किसानों के प्रदर्शन को लेकर तमाम तरह की राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आने लगी है। पुलिस लगातार किसानों को रोकने का प्रयास कर रही है। किसान प्रदर्शनकारियों ने पुल पर लगे सभी बैरिकेड को तोड़ दिया। किसानों का प्रदर्शन लगातार बढ़ता जा रहा है। किसानों पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे । पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इसको लेकर निंदा की है।

किसानों पर हो रहा है अत्याचार- ममता बनर्जी 

ममता बनर्जी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट पर साझा करते हुए कहा कि हमारा देश कैसे प्रगति कर सकता है, जब बुनियादी अधिकारों के लिए लड़ने वाले किसानों पर आंसू गैस के गोलों से हमला किया जाता है। मैं इस तरह के कृत्य को लेकर भाजपा की कड़ी निंदा करती हूं। उन्होंने कहा कि किसानों के विरोध को दबाने के बजाए, भाजपा को अपने बढ़े हुए अहंकार, सत्ता की भूखी महत्वाकांक्षाओं और अपर्याप्त शासन को कम करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

गौरतलब है कि हरियाणा पुलिस ने किसान प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले दागे। अंबाला के पास शंभू में पंजाब के साथ राज्य की सीमा पर लगाए गए बैरिकेड्स को तोड़ने की कोशिश की गयी। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानून की मांग कर रहे किसानों ने दिल्ली की ओर मार्च किया। संयुक्त किसान मोर्चा और किसान मजदूर मोर्चा ने घोषणा की थी कि किसान फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी (एमएसपी) की गारंटी के लिए कानून बनाने समेत अपनी मांगों पर जोर देने के लिए मंगलवार को दिल्ली जाएंगे।

मोदी सरकार की विफलता का है यह प्रमाण-असदुद्दीन ओवैसी


किसानों के ‘दिल्ली चलो’ मार्च पर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है।  उन्होंने कहा कि यह मोदी सरकार की विफलता है। उन्हें एमएसपी के लिए कानूनी गारंटी की किसानों की मांग पूरी करनी चाहिए थी। दूसरी मांग स्वामीनाथन समिति के फॉर्मूले को लागू करना है। मुझे तो समझ ही नहीं आ रहा कि आखिर सरकार समय क्यों बर्बाद कर रही है। आप उन्हें ऐसे रोक रहे हैं जैसे किसी पड़ोसी देश की सेना आ रही हो। उनकी मांगों को देश के प्रधानमंत्री को तुरंत स्वीकार करना चाहिए।

 

 

Farmers Protest: किसानों के आंदोलन से सब्जियों की कीमतों में आ सकता है भारी उछाल, आम लोगों पर पड़ सकती है महंगाई की मार.

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न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी को लेकर कानून बनाने समेत विभिन्न मांगों के लिए पंजाब-हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसानों ने राष्ट्रव्यापी विरोध-प्रदर्शन की पूरी तैयारी कर ली है। किसान संगठन दिल्ली की सीमाओं पर दिखना शुरू हो गए हैं। वे अपनी मांगों के लिए केंद्र पर दबाव बनाने के लिए सड़कों पर उतर रहे हैं।

किसान आंदोलन (Farmers Protest) के कारण सब्जियों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हो सकती है। किसानों को दिल्ली में प्रवेश करने से रोकने के लिए यूपी गेट सहित सभी मुख्य मार्गों पर बाड़ेबंदी कर दी गई है, जिससे दिल्ली आने-जाने में परेशानी हो गई है। इसका सीधा असर सब्जियों की सप्लाई और इसकी कीमतों पर पड़ सकता है। पिछली बार भी किसान आंदोलन के कारण सब्जियों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई थी।

सब्जी विक्रेता विनोद कुमार ने अमर उजाला को बताया कि वे गाजीपुर सब्जी मंडी से सब्जियां लेकर पूर्वी दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में बेचते हैं। अब तक गाजीपुर से बाजार तक सब्जी ले जाने के लिए दो सौ से तीन सौ रुपये के बीच ऑटो मिल जाते थे, लेकिन आज की स्थिति देखते हुए उन्हें पांच सौ रुपये देने पड़ रहे हैं। पहले तो ऑटो आने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं क्योंकि उन्हें मंडी में आने के लिए और वापसी के समय लंबा इंतजार करना पड़ रहा है, इसलिए वे ज्यादा किराया मांग रहे हैं।

गाजीपुर सब्जी मंडी में मेरठ, मुजफ्फरनगर, हापुड़, गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा से भी सब्जियां बिकने के लिए आती हैं। लेकिन आने-जाने की इस परेशानी के कारण अब उनका किराया भी बढ़ जाएगा। इसका सीधा असर सब्जियों की कीमतों पर पड़ सकता है। इसी तरह हरियाणा से सिंधु बॉर्डर के जरिए सब्जियों की आवक पर असर पड़ सकता है। यहां से गोभी, मिर्च, पालक जैसी हरी सब्जियां दिल्ली में पहुंचती हैं। इसका सीधा असर कीमतों के रूप में देखने को मिल सकता है।

यमुना एक्सप्रेसवे, कालिंदी कुंज बॉर्डर के रास्ते से भी दिल्ली-एनसीआर के आसपास के इलाकों से सब्जियां दिल्ली के आजादपुर सब्जी मंडी, केशोपुर सब्जी मंडी और गाजीपुर सब्जी मंडी में सब्जियां पहुंचती हैं। किसानों के प्रतिबंध का असर इन पर पड़ना तय माना जा रहा है। इसकी असली कीमत आम उपभोक्ताओं को चुकानी पड़ सकती है।

हल्द्वानी हिंसा का आज तीसरा दिन: 8 फरवरी से इंटरनेट सेवाएं बंद, कर्फ्यू जारी, 5 हजार लोगों पर केस दर्ज

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हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में हुए बवाल के बाद सुरक्षा के दृष्टिगत शहर में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई। इससे लोगों का आमजीवन  काफी प्रभावित रहा। कर्फ्यू लगने से घरों में कैद लोग बिना इंटरनेट के काफी परेशान रहे। बता दें कि, बनभूलपुरा हिंसा मामले में पुलिस ने 18 नामजद समेत पांच हजार उपद्रवियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया।

शहर में बृहस्पतिवार रात करीब दस बजे से इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई थी। बीएसएनएल, वोडाफोन, एयरटेल, जियो समेत अन्य नेटवर्क पर इंटरनेट सेवा संचालित नहीं हो पाई। ऐसे में सैकड़ों यूजर्स सूचना न मिल पाने के कारण परेशान रहे। इंटरनेट सेवा बंद होने से वर्क फ्राॅम होम से जुड़े लोगों का काम प्रभावित रहा वहीं परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को भी खासी दिक्कत हुई।

बीएसएनएल के डीजीएम भीम बहादुर ने बताया कि पुलिस प्रशासन की ओर से जब तक अनुमति नहीं दी जाएगी तब तक संचार सेवा सुचारु नहीं होगी। बताया कि शहर के बाहरी क्षेत्र में भी इंटरनेट को बंद किया जा रहा है, जिस कारण सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से शहर में अराजकता का माहौल न बने।

बता दें कि, बनभूलपुरा हिंसा मामले में पुलिस ने 18 नामजद समेत पांच हजार उपद्रवियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। घटनास्थल और आसपास के इलाके से पांच शव बरामद कर लिए गए हैं। एक व्यक्ति की मौत बरेली ले जाते समय हो गई, हालांकि प्रशासन ने इसकी पुष्टि नहीं की है। पुलिस ने चार लोगों को हिरासत में लेकर सीसीटीवी फुटेज और वीडियो रिकॉर्डिंग कब्जे में ले ली है। पुलिस ने कई डीबीआर की हार्ड डिस्क कब्जे में ली है।

MP News: 1 राज्यसभा सीट के लिए कांग्रेस में उठापटक, कमलनाथ ने सोनिया गांधी से मिलकर जताई ये इच्छा।

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मध्यप्रदेश से राज्यसभा की 5 सीटें खाली हो रही हैं। इनमें से 4 भाजपा और एक सीट कांग्रेस को जाएगी। कांग्रेस में इस एक सीट के लिए एक अनार सौ बीमार जैसी स्थिति है। पूर्व सीएम कमलनाथ से लेकर पीसीसी चीफ जीतू पटवारी और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव तक कई दिग्गजों के नाम इस एक सीट के लिए चल रहे हैं.

मध्यप्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता  कमलनाथ ने कल यानी शुक्रवार को दिल्ली में कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की। कमलनाथ ने सोनिया गांधी से खुद के लिए राज्यसभा के टिकट की मांग की है। दरअसल, मध्यप्रदेश से राज्यसभा की 5 सीटें खाली हो रही हैं। इनमें से चार भाजपा और एक सीट कांग्रेस को जाएगी।  पूर्व सीएम कमलनाथ से लेकर पीसीसी चीफ जीतू पटवारी और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव तक कई दिग्गजों के नाम इस एक सीट के लिए चल रहे हैं, हालांकि कांग्रेस के पिछड़ा वर्ग कार्ड के चलते इन नामों में अरुण यादव का दावा सबसे मजबूत माना जा रहा है। इस बीच 13 फरवरी को कमलनाथ ने कांग्रेस विधायकों को डिनर पर बुलाया है।

अपने बेटे नकुलनाथ को छिंदवाड़ा से लड़ाने का एलान कर चुके कमलनाथ खुद के लिए राज्यसभा चाहते हैं। कमलनाथ के करीबी सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस आलाकमान अगर किसी पिछड़ा, ओबीसी या एससी-एटी को राज्यसभा देने की वकालत करता है, तो कमलनाथ आखिरी मौके में अपने करीबी पूर्व सांसद सज्जन (एससी) पर दांव लगा सकते हैं। इसके पहले कमलनाथ ने कहा था कि उनके बेटे नकुल एआईसीसी द्वारा सीट के लिए नामांकित किए जाने के बाद आगामी चुनाव में मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ेंगे। कमलनाथ का बयान नकुल के बयान के एक दिन बाद आया था, जो वर्तमान में छिंदवाड़ा लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं, उन्होंने घोषणा की थी कि वह आगामी चुनावों में इस सीट से फिर से चुनाव लड़ेंगे। हालांकि बाद में कमलनाथ ने इस विषय पर सफाई भी दी थी।

जम्मू-कश्मीर से जुड़े 3 विधेयक राज्यसभा में हुए पारित, जानिए किन कानूनों में क्या बदलाव किया गया.

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राज्यसभा में शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर से जुड़े तीन विधेयकों को पारित किया गया है, जो स्थानीय निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग को आरक्षण देने और केंद्र में अनुसूचित जाति और जनजाति की सूची को संशोधित करने का प्रावधान करते हैं। जम्मू और कश्मीर स्थानीय निकाय कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 और संविधान (जम्मू और कश्मीर) अनुसूचित जाति आदेश (संशोधन) विधेयक, 2024 और संविधान (जम्मू और कश्मीर) अनुसूचित जनजाति आदेश (संशोधन) विधेयक, 2024 इस सप्ताह की शुरुआत में लोकसभा द्वारा पारित किया गया था।
जम्मू-कश्मीर स्थानीय निकाय कानून(संशोधन) विधेयक, 2024 पारित

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने जम्मू और कश्मीर स्थानीय निकाय कानून(संशोधन) विधेयक, 2024 पेश किया गया था। जिसमें केंद्र शासित प्रदेश में स्थानीय निकायों में ओबीसी को आरक्षण देने की बात कही गई थी। शुक्रवार को राज्यसभा ने जम्मू और कश्मीर स्थानीय निकाय कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 पारित किया है। विधेयक जम्मू और कश्मीर पंचायती राज अधिनियम, 1989 (1989 का IX), जम्मू और कश्मीर नगरपालिका अधिनियम, 2000 और जम्मू-कश्मीर नगर निगम अधिनियम, 2000 में संशोधन करता है। लोकसभा में यह विधेयक पहले ही पारित हो चुका है।

संविधान (जम्मू-कश्मीर) अनुसूचित जाति आदेश (संशोधन) विधेयक, 2024 पारित

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार ने संविधान (जम्मू और कश्मीर) अनुसूचित जाति आदेश (संशोधन) विधेयक, 2024 को पेश किया था, जो अनुसूचित जाति की सूची में वाल्मीकि  समुदाय को जोड़ता है। विधेयक 1956 के संविधान (जम्मू और कश्मीर) अनुसूचित जाति आदेश में संशोधन करता है, जो जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में अनुसूचित जाति मानी जाने वाली जातियों को सूचीबद्ध करता है। शुक्रवार को राज्यसभा में विधेयक पारित किया गया। यह विधेयक पहले लोकसभा में पारित हो चुका था।

संविधान (जम्मू-कश्मीर) अनुसूचित जनजाति आदेश (संशोधन) विधेयक, 2024 पारित

केंद्रीय जनजातीय मामलों और कृषि और किसान कल्याण मंत्री ने संविधान (जम्मू-कश्मीर) अनुसूचित जनजाति आदेश (संशोधन) विधेयक, 2024 पेश किया था, जो अनुसूचित जनजातियों के लिए अलग सूची बनाने के लिए संविधान (जम्मू और कश्मीर) अनुसूचित जनजाति आदेश 1989 में संशोधन का प्रावधान करता है। शुक्रवार को राज्यसभा ने इस विधेयक को पारित किया है। यह विधेयक पहले लोकसभा में पारित हो चुका था।