CBSE 10th-12th Result 2024:सीबीएसई बोर्ड 10वीं और 12वीं का रिजल्ट घोषित हो गया है। छात्र आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना रिजल्ट देख सकते हैं।
इस बार कक्षा 12वीं में 87.98% बच्चे पास हुए हैं। छात्र सीबीएसई बोर्ड रिजल्ट्स की आधिकारिक वेबसाइटresults.cbse.nic.in पर जाकर अपना रिजल्ट चेक कर सकतें हैं। 12वीं देशभर के 17 रीजन में देहरादून रीजन 11वें स्थान पर रहा है। देहरादून रीजन का परिणाम 83.83 प्रतिशत रहा जो बीते वर्ष के मुकाबले तीन प्रतिशत तक बढ़ा है।
सीबीएसई के देहरादून रीजन में उत्तराखंड के सभी 13 जिलों के अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आठ जिले बदायूं, बिजनौर, ज्योतिबा फूले नगर, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, रामपुर, सहारनपुर व संभल शामिल हैं। बोर्ड के अधीन कई अटल उत्कृष्ट विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने भी दूसरी बार बोर्ड परीक्षा दी है।
सीबीएसई बोर्ड 12वीं में लड़कियों का पास प्रतिशत 91.52 रहा। जबकि लड़कों का पास प्रतिशत 85.12 फीसदी रहा। लड़कों के मुकाबले 6.40 फीसदी ज्यादा लड़कियां पास हुई हैं। देश भर में त्रिवेंद्रम सबसे आगे है। यहां का पास प्रतिशत 99.91 है।
उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने समूह-ग की नौ भर्तियों का कैलेंडर जारी कर दिया है। इस साल मई से अगस्त के बीच में ये भर्ती परीक्षाएं कराई जाएंगी। आयोग के सचिव सुरेंद्र सिंह रावत की ओर से जारी कैलेंडर में बताया गया है कि वन विभाग स्केलर भर्ती के लिए शारीरिक नाप जोख परीक्षा 15 मई को होगी।
हवलदार प्रशिक्षक की शारीरिक नाप जोख परीक्षा एक जून को, आबकारी सिपाही, परिवहन आरक्षी, उप आबकारी निरीक्षक, हॉस्टल मैनेजर ग्रेड-3, गृह माता भर्ती की परीक्षा नौ जून को, अनुदेशक विद्युतकार, फिटर व अन्य की परीक्षा 26 से 29 जून को, सहायक अध्यापक एलटी भर्ती परीक्षा 30 जून को, वाहन चालक भर्ती परीक्षा सात जुलाई को, सहायक भंडारी भर्ती परीक्षा 14 जुलाई को, स्केलर भर्ती की परीक्षा चार अगस्त को और हवलदार प्रशिक्षक भर्ती की परीक्षा 11 अगस्त को होगी।
उत्तराखंड बोर्ड की 10वीं और 12वीं का परीक्षा परिणाम 30 अप्रैल यानी कल जारी होगा। माध्यमिक शिक्षा निदेशक के मुताबिक, रिजल्ट घोषित किए जाने को लेकर विभाग की ओर से सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
उत्तराखंड बोर्ड की कक्षा 10वीं और 12वीं के दो लाख से अधिक छात्रों का कल परिणाम घोषित हो जाएगा। 30 अप्रैल को उत्तराखंड बोर्ड की कक्षा 10वीं और 12वीं का परिणाम जारी किया जाएगा। इस दिन अंक सुधार द्वितीय का रिजल्ट भी जारी किया जाएगा। सुबह 11:30 रिजल्ट घोषित होगा।
उत्तराखंड बोर्ड 12वीं बोर्ड परीक्षाएं 27 फरवरी से 16 मार्च 2024 तक आयोजित की गयी थी। इस साल UK बोर्ड की 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं में कुल दो लाख 10 हजार 354 छात्र शामिल हुए थे।
जानिए कैसे करें परिणाम डाउनलोड?
सबसे पहले उम्मीदवारों को आधिकारिक वेबसाइट यानी ubse.uk.gov.in पर जाएं।
इसके बाद होम पेज पर उपलब्ध यूके बोर्ड 12वीं रिजल्ट 2024 लिंक पर क्लिक करें।
अपना रोल नंबर डालें और सबमिट बटन पर क्लिक करें।
अब रिजल्ट स्क्रीन पर दिखाई देगा।
छात्र अपना परिणाम डाउनलोड कर सकते हैं और आगे की आवश्यकता के लिए प्रिंटआउट ले लें।
उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद का परीक्षा फल 30 अप्रैल को जारी किया जाएगा। इस दिन अंक सुधार द्वितीय का परीक्षा फल भी जारी किया जाएगा।
उत्तराखंड बोर्ड के सभागार में परीक्षाफल समिति की सुबह 10 बजे बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता बोर्ड के सभापति महावीर सिंह बिष्ट ने की। सभापति ने बताया 30 अप्रैल को उत्तराखंड बोर्ड की हाईस्कूल व इंटर परीक्षा फल जारी किया जाएगा। इस दिन अंक सुधार द्वितीय का परीक्षा फल भी जारी किया जाएगा। परीक्षाफल सुबह 11:30 बजे घोषित होगा। बैठक में सचिव वीपी सिमल्टी, अपर सचिव बीएम रावत आदि मौजूद रहे।
उत्तराखंड बोर्ड का 10वीं और 12वीं का परीक्षा का परिणाम अभी घोषित नहीं हुआ, लेकिन 10वीं की परीक्षा दे चुके हजारों छात्र-छात्राओं को परीक्षा परिणाम घोषित होने से पहले 11वीं कक्षा में दाखिला मिलेगा।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक महावीर सिंह बिष्ट ने इस संबंध में सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किया है। उत्तराखंड बोर्ड की परीक्षा के बाद इन दिनों छात्र-छात्राओं की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन का काम चल रहा है। विभाग की ओर से इसके लिए 29 मूल्यांकन केंद्र बनाए गए हैं। जिसमें 16 मूल्यांकन केंद्र गढ़वाल और 13 कुमाऊं मंडल में हैं।
30 अप्रैलकोहोगाबोर्डपरीक्षापरिणामघोषित-
विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, 27 मार्च से शुरू हुआ मूल्यांकन का काम 10 अप्रैल तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके लिए 3574 शिक्षकों की डयूटी लगाई गई है। उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के बाद 30 अप्रैल को बोर्ड परीक्षा परिणाम घोषित किया जाना है, जिसे घोषित होने में अभी समय है।
इस बीच छात्र-छात्राओं की पढ़ाई का नुकसान न हो, इसके लिए 10वीं की परीक्षा दे चुके छात्र-छात्राओं को परीक्षा परिणाम घोषित होने से पहले 11वीं में दाखिला दिया जाएगा। शिक्षा निदेशक महावीर सिंह बिष्ट के मुताबिक, 11वीं में दाखिले के बाद यदि कोई छात्र 10वीं में अधिकतम दो विषय में फेल होता है तो अंक सुधार परीक्षा के माध्यम से उसे पास होने का मौका दिया जाएगा। पिछले साल 47 हजार से अधिक छात्र हुए थे फेल-
उत्तराखंड बोर्ड की 10वीं और 12वीं की परीक्षा में पिछले साल 47 हजार से अधिक छात्र फेल हो गए थे। इसमें 12वीं में 19 हजार और 10वीं में 28 हजार छात्र-छात्राएं शामिल थे।
छात्र-छात्राओं की पढ़ाई का नुकसान न हो, इसके लिए छात्रहित में निर्णय लिया गया कि 10वीं के छात्र-छात्राओं का रिजल्ट आने से पहले उन्हें 11वीं कक्षा में दाखिला दिया जाए। इस संबंध में सभी सीईओ को निर्देश जारी कर दिया गया है। –महावीर सिंह बिष्ट, निदेशक माध्यमिक शिक्षा
उत्तराखंड में पटरी से उतर रही शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के भले हमेशा से दावे किए जाते रहे हो, लेकिन हालात सुधरने के बजाए बिगड़ते जा रहे हैं। विभाग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के सरकारी स्कूल लगातार छात्रविहीन हो रहे हैं। हाल यह है कि 1,671 सरकारी विद्यालयों में ताला लटक गया है, जबकि अन्य 3573 बंद होने की कगार पर हैं।
हैरानी की बात यह है कि 102 स्कूल ऐसे हैं, जिनमें हर स्कूल में मात्र एक-एक छात्र अध्ययनरत हैं। प्रदेश में एक अप्रैल 2024 से नया शिक्षा सत्र शुरू हो रहा है, लेकिन इस सत्र के शुरू होने से पहले राज्य के कई विद्यालयों में ताला लटक गया है। शिक्षा महानिदेशालय ने हाल ही में राज्य के सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों से जिलों में बंद हो चुके विद्यालयों की रिपोर्ट मांगी थी।
जिलों से मिली रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी विद्यालय छात्र विहीन होने से लगातार बंद हो रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 3,573 विद्यालयों में छात्र संख्या 10 या फिर इससे भी कम रह गई है। इसमें सबसे अधिक 785 स्कूल पौड़ी जिले के हैं, जबकि सबसे कम तीन स्कूल हरिद्वार जिले के हैं।
पौड़ी जिले में सबसे अधिक 315 स्कूल बंद-
राज्य में पौड़ी एकमात्र ऐसा जिला है, जिसमें सबसे अधिक 315 स्कूलों में ताला लटक चुका है, जबकि ऊधमसिंह नगर जिले में सबसे कम मात्र 21 स्कूल बंद हुए हैं। छात्र न होने की वजह से राज्यभर में 1,671 स्कूल बंद हो चुके हैं।
इतने सरकारी स्कूलों में लटका ताला
राज्य में अल्मोड़ा जिले में 197, बागेश्वर में 53, चमोली में 133, चंपावत में 55, देहरादून में 124, हरिद्वार में 24, नैनीताल में 82, पौड़ी में 315, पिथौरागढ़ में 224, रुद्रप्रयाग में 53, टिहरी गढ़वाल में 268, ऊधमसिंह नगर में 21 और उत्तरकाशी जिले में 122 स्कूलों में ताला लटक चुका है।
शिक्षा में फिनलैंड मॉडल अपनाने के दावे
प्रदेश की बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के लिए प्रयोगशाला बनी हैं। पूर्व में अटल उत्कृष्ट विद्यालय, मॉडल विद्यालय, क्लस्टर विद्यालय आदि के रूप में कई प्रयोग किए जा चुके हैं, जबकि अब शिक्षा में फिनलैंड मॉडल अपनाने का दावा किया जा रहा है। इसे लेकर मंत्री के साथ विभागीय अधिकारियों की एक टीम चार दिन फिनलैंड और स्विट्जरलैंड का दौरा कर चुकी है।
राज्य के सभी जिलों से बंद हो चुके सरकारी विद्यालयों की रिपोर्ट मांगी गई थी। बंद हो चुके विद्यालयों का इस्तेमाल आंगनबाड़ी केंद्र, होम स्टे, एएनएम सेंटर एवं पंचायतघर के रूप में किया जाएगा, जिससे उपलब्ध भवन का इस्तेमाल होने से जनता को फायदा हो।
प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में छात्र संख्या तेजी से घट रही है। यही वजह है कि 640 से अधिक स्कूल बंद हो चुके हैं और कई बंदी की कगार पर हैं। शिक्षा महानिदेशक बंधीधर तिवारी के मुताबिक वर्तमान में कितने स्कूल बंद हैं और किस स्थिति में हैं। इस संबंध में सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों से 12 मार्च तक सूचना मांगी गई है।
इन विद्यालयों का होम स्टे एवं आंगनबाड़ी केंद्र के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। समग्र शिक्षा कार्यालय से अपर निदेशक माध्यमिक शिक्षा, गढ़वाल और कुमाऊं के साथ ही सभी सीईओ, डीईओ और खंड शिक्षा अधिकारियों को बंद विद्यालयों के संबंध में निर्देश जारी किया गया है। निर्देश में कहा है कि छात्र संख्या शून्य होने से बंद हुए विद्यालयों की सूचना उपलब्ध कराई जाए।
विभागीय अधिकारियों से यह भी कहा गया है कि पूर्व में राजकीय प्राथमिक विद्यालय, राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय एवं राजकीय इंटरमीडिएट कॉलेज जो छात्र संख्या शून्य होने के कारण बंद हो चुके हैं। उनके भवन और भूमि की स्थिति से अवगत कराया जाए। इस संबंध में सूचना ई मेल के माध्यम से भी उपलब्ध कराई जा सकती है।
उत्तराखंड प्रदेश के भाग्य निर्माण की जिम्मेदारी सबसे अधिक इस प्रदेश की सरकार की होती है सरकार की नीति ही प्रदेश का भविष्य तय करती है लेकिन जब इस पहाडी प्रदेश की दो मूलभूत सुविधाएं ही यहां से गायब दिखाई दें तो फिर किस विकास की आशा हम रख सकते हैं. प्रदेश के पर्वतीय जिलों में स्थायी शिक्षकों के 10,946 पद खाली हैं। इसमें 6,632 पद माध्यमिक और 4,314 बेसिक शिक्षा के हैं। पारदर्शी तबादलों के लिए तबादला एक्ट बनने के बाद भी शिक्षकों के पहाड़ न चढ़ने और राज्य लोक सेवा एवं अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से भर्ती में देरी इसकी वजह बताई जा रही है।
विधानसभा में प्रश्नकाल में विधायक संजय डोभाल के प्रदेश के पर्वतीय जिलों में शिक्षकों की कमी के सवाल पर शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने बताया, पर्वतीय जिलों में प्रवक्ताओं के 4,253 और सहायक अध्यापक एलटी के 2,379 पद खाली हैं। इन खाली पदों के विपरीत प्रवक्ता पद पर 2,594 और सहायक अध्यापक एलटी के पद पर 1,123 अतिथि शिक्षक कार्यरत हैं।
45 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापक ही नहीं-
बेसिक शिक्षा में 516 प्राथमिक विद्यालयों और 45 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापक नहीं हैं। प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक के 3,253 और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक के 500 पद खाली हैं। शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने कहा, जिलों में शिक्षकों की समय-समय पर सेवानिवृत्ति, पदोन्नति, तबादले आदि से शिक्षकों के खाली पदों की संख्या बदलती रहती है।
कहा, सभी खाली पदों पर शिक्षकों की उपलब्धता की आदर्श स्थिति कभी संभव नहीं है। खाली पदों को स्थानांतरण, समायोजन, पदोन्नति और सीधी भर्ती आदि के माध्यम से भरे जाने का यथासंभव लगातार प्रयास किया जाता रहा, ताकि छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित न हो।
सीआरपी, बीआरपी भर्ती में एससी को मिलेगा 19 प्रतिशत आरक्षण-
विधानसभा में विधायक ममता राकेश की ओर से पूछे गए प्रश्न के जवाब में शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने कहा, सीआरपी, बीआरपी के पदों पर आउटसोर्स के माध्यम से तैनाती की जाएगी। अनुसूचित जाति के लिए 19, अनुसूचित जनजाति के लिए चार और अन्य पिछड़ा वर्ग में 14 प्रतिशत के आरक्षण की व्यवस्था है। मंत्री ने यह भी बताया कि इन पदों को भरने के लिए आउटसोर्सिंग एजेंसी का चयन कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग के शासनादेश के अनुसार किया जाएगा।
डायटों के लिए अलग से होगी शिक्षकों की भर्ती-
प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की कमी की एक वजह राज्य के जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों में विद्यालयों से शिक्षकों को तैनात किया जाना है। शिक्षा मंत्री ने अमर उजाला से बातचीत में बताया, प्रदेश में जो डायट हैं, उनका अलग कैडर व नियमावली नहीं है। सरकार इसके लिए अलग कैडर व नियमावली बनाने जा रही है। वर्तमान में विद्यालयों से डायटों में शिक्षकों की तैनाती की जा रही, जिससे स्कूल खाली हो रहे हैं। इनके लिए कैडर व नियमावली बनने से इनमें अलग से नए शिक्षकों की भर्ती की जाएगी, जबकि इनमें तैनात शिक्षक मूल तैनाती पर जाएंगे।
युवाओं के हित में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बड़ा निर्णय लिया है। यूपी पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा-2023 को मुख्यमंत्री ने निरस्त कर दिया है। सीएम ने कहा कि 6 माह के भीतर ही पूर्ण शुचिता के साथ परीक्षा आयोजित की जाएगी । कहा, परीक्षा की गोपनीयता भंग करने वाले एसटीएफ की रडार में हैं कई बड़ी गिरफ्तारियां हो भी चुकी हैं।
परीक्षा के बाद हुआ था खूब प्रदर्शन-
यूपी आरक्षी भर्ती परीक्षा को निरस्त कर दिया गया। परीक्षा निरस्त करने की मांग को लेकर प्रदेश के कई जिलों के अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन किया। आरोप लगाया कि प्रश्न पत्र लीक होने के साथ ही परीक्षा में बड़े पैमाने पर धांधली की गई है। हाल ही में प्रयागराज में सैकड़ों की संख्या में सिपाही भर्ती परीक्षा देने वाले अभ्यर्थी हाथ में तख्तियां लेकर परीक्षा निरस्त कराने की मांग को लेकर सड़क पर उतरे थे।
RO/ARO परीक्षा की शिकायतों की होगी जांच, शासन ने मांगे साक्ष्य-
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा बीते 11 फरवरी को आयोजित की गई समीक्षा अधिकारी/ सहायक समीक्षा अधिकारी (प्रारम्भिक) परीक्षा – 2023 से जुड़ी शिकायतों की भी जांच कराने का निर्णय लिया है।
अपर मुख्य सचिव, नियुक्ति एवं कार्मिक ने आदेश जारी किया।
समीक्षा अधिकारी/ सहायक समीक्षा अधिकारी (प्रारम्भिक) परीक्षा – 2023 की शुचिता व पारदर्शिता के उद्देश्य में निर्णय लिया गया है कि परीक्षा के संबंध में प्राप्त शिकायतों का शासन स्तर पर परीक्षण किया जाए।
इस परीक्षा के संबंध में किसी भी प्रकार की शिकायत अथवा इसकी शुचिता को प्रभावित करने वाले तथ्यों को संज्ञान में लाना चाहे तो वह अपना नाम तथा पूरा पता तथा साक्ष्यों सहित कार्मिक तथा नियुक्ति विभाग के ई-मेल आई.डी. – secyappoint@nic.in पर 27 फरवरी 2024 तक उपलब्ध करा सकते हैं।
इतने थे अभ्यर्थी-
सिपाही भर्ती की लिखित परीक्षा निर्धारित तिथि 17 व 18 फरवरी को सभी जिलों में दो पालियों में हुई थी। प्रदेश में 2,385 परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा के दौरान बायोमैट्रिक वेरिफिकेशन के बाद ही अभ्यर्थी को प्रवेश दिया गया था। आरक्षी नागरिक पुलिस के 60,244 पदों पर भर्ती के लिए कुल 48,17,441 अभ्यर्थियों में 15,48,969 महिला अभ्यर्थी भी थे। प्रत्येक पाली में 12,04,360 अभ्यर्थी शामिल हुए थे।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज यानी एक फरवरी को वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए अंतरिम बजट पेश किया। अप्रैल-मई में लोकसभा चुनाव होने वाले हैं, इसलिए यह अंतरिम बजट है। इस बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने चार जातियों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।
वित्त मंत्री ने संसद में पेश बजट के दौरान कहा कि गरीबों, महिलाओं, युवाओं और किसानों की आवश्यकताएं, आकांक्षाएं और कल्याण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
गरीबों के लिए सरकारी योजनाएं-
वित्त मंत्री ने बजट पेश करते हुए बताया…
हमारी सरकार के 10 साल के कार्यकाल में करीब 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं।
78 लाख स्ट्रीट वेंडर को मदद दी गई है।
मत्स्य संपदा योजना से 55 लाख लोगों को नया रोजगार मिला।
पीएम आवास योजना के तहत तीन करोड़ घर बनाए गए हैं।
प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत अगले 5 साल में ग्रामीण इलाकों में दो करोड़ घर बनाए जाएंगे।
सरकार मध्यमवर्गीय लोगों के लिए भी आवासीय योजना लाएगी।
महिलाओं को बनाया जा रहा आत्मनिर्भर-
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में बताया कि पिछले 10 वर्षों में सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण के लिए बहुत सारे कार्य किए गए हैं। पीएम आवास योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में 70% से अधिक घरों की मालकिन महिलाएं हैं।
उन्होंने बताया कि मुद्रा योजना के अंतर्गत महिलाओं को 30 करोड़ रुपये से अधिक ऋण दिए गए हैं। करीब एक करोड़ महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। अब हमारी सरकार का लक्ष्य तीन करोड़ लखपति दीदी बनाने का है। इस योजना से महिलाओं के जीवन में बदलाव और आत्मनिर्भरता आई है।
वित्त मंत्री के मुताबिक, हमारी सरकार सर्वाइकल कैंसर के टीकाकरण पर ध्यान देगी। मातृ और शिशु देखरेख की योजनाओं को व्यापक कार्यक्रम के अंतर्गत लागू किया जाएगा। 9-14 साल की लड़कियों के टीकाकरण पर ध्यान दिया जाएगा।
सीतारमण ने कहा कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें उनके अधिकार दिलाने के लिए तीन तलाक को गैरकानूनी घोषित किया है। महिलाओं को संसद में आरक्षण देने के लिए कानून लाया गया है।
किसानों को मिली ये सौगात-
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में बजट पेश करते हुए बताया कि चार करोड़ किसानों को पीएम फसल बीमा योजना का लाभ दिया जा रहा है। पीएम किसान योजना से 11.8 करोड़ लोगों को आर्थिक मदद मिली है। आम लोगों के जीवन में बदलाव लाने का प्रयास किया जा रहा है।
युवाओं के लिए भी खुले अवसर-
युवाओं को सशक्त बनाने पर भी काम किया है। 3000 नए आईटीआई खोले गए हैं। 54 लाख युवाओं को कौशल योजना के तहत प्रशिक्षित किया गया है। एशियाई खेलों में भारत के युवाओं को कामयाबी मिली है।