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Uttarakhand: हरिद्वार में दिखेगी नए कानूनों की सरलता, धामी सरकार की सफलता की झलक, गृह मंत्री शाह करेंगे मुआयना.

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सात मार्च को होने वाले हरिद्वार दौरे के दौरान देश के तीन नए आपराधिक कानूनों पर आधारित विशेष प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इसमें युवाओं को इन कानूनों की जानकारी दी जाएगी, साथ ही पुष्कर सिंह धामी सरकार के चार वर्ष पूरे होने पर सरकार की प्रमुख उपलब्धियों की झलक भी प्रस्तुत की जाएगी।

गृह मंत्री शाह के हरिद्वार दौरे की तैयारियां जोरों पर हैं। भाजपा डेढ़ लाख से अधिक कार्यकर्ताओं के पहुंचने का दावा कर रहा है तो वहीं सरकारी विभाग के अधिकारी केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं की झलक दिखाने की तैयारी में हैं। सात से नौ मार्च तक न्याय संहिता विषय पर राज्यस्तरीय प्रदर्शनी बैरागी कैंप में हो रही है। इसमें भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) प्रमुख तौर पर दिखेंगी।

राज्य सरकार के चार वर्ष पूरे होने पर-

प्रदर्शनी में नए कानूनों की प्रमुख विशेषताओं को सरल और प्रभावी माध्यमों से प्रस्तुत किया जाएगा। इसमें समयबद्ध जांच एवं आरोप-पत्र की अनिवार्यता, शून्य प्राथमिकी तथा इलेक्ट्रॉनिक प्राथमिकी की व्यवस्था, सात वर्ष से अधिक दंडनीय अपराधों में अनिवार्य विधि-विज्ञान जांच, इलेक्ट्रॉनिक एवं डिजिटल साक्ष्यों की वैधता, महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध अपराधों के लिए सशक्त प्रावधान, संगठित अपराध, साइबर अपराध एवं आतंकवाद से संबंधित स्पष्ट दंड प्रावधान, पीड़ित प्रतिकर योजना तथा संपत्ति की शीघ्र वापसी की व्यवस्था को प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा।

सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी ने बताया कि कार्यक्रम में राज्य सरकार के चार वर्ष पूरे होने पर उपलिब्धयों की झलक भी नजर आएगी। उन्होंने बताया कि विभिन्न विभागों की सफल योजनाओं की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। प्रदर्शनी में राज्य सरकार की ओर से बुनियादी ढांचे के विकास, सड़क एवं संपर्क मार्गों के सुदृढ़ीकरण, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, शिक्षा क्षेत्र में सुधार, निवेश प्रोत्साहन, पर्यटन विकास, धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण तथा सीमांत क्षेत्रों के विकास के लिए किए गए कार्यों को प्रदर्शित किया जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जनसभा को संबोधित करेंगे।

उत्तराखंड में बदहाल कानून-व्यवस्था को लेकर कांग्रेस की विशाल रैली, एक साथ जुटे पार्टी के दिग्गज नेता.

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कांग्रेस की प्रस्तावित रैली में भारी संख्या में भीड़ उमड़ी। लोकभवन घेराव कूच से पहले प्रदेश प्रभारी शैलजा सहित पार्टी के वरिष्ठ नेता एक साथ मंच पर दिखे। राज्यपाल आवास कूच के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा प्रचार प्रसार सामग्री लगाई गई थी, लेकिन आज सुबह इन्हें हटा दिया गया। कांग्रेस नेताओं ने इसकी निंदा करते हुए कहा कि सरकार आवाज दबाना चाहती है।

 

प्रदेश कांग्रेस कार्यकर्ता आज सोमवार को जन मुद्दों को लेकर लोकभवन का घेराव करने पहुंचे। प्रदर्शन में प्रदेशभर से पार्टी नेता व कार्यकर्ता शामिल हुए। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व में कार्यकर्ता प्रदेश में महिला अपराध, बेरोजगारी, महंगाई, कानून व्यवस्था, भ्रष्टाचार, जंगली जानवरों के हमले, पलायन, आपदा प्रभावितों को राहत व मुआवजा, बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं, किसानों को फसल का नुकसान होने पर मुआवजा न मिलने समेत अन्य मुद्दों पर लोकभवन का घेराव करने पहुंचे।

 

पार्टी के सभी नेता व कार्यकर्ता परेड ग्राउंड में एकत्रित हुए, जहां से लोकभवन घेराव के लिए कूच करने निकले। रैली में प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व सीएम हरीश रावत, कांग्रेस चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ.हरक सिंह रावत, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा समेत पार्टी के सभी वरिष्ठ नेता व कार्यकर्ता भाजपा सरकार के खिलाफ हुंकार भरी।

 

 

कांग्रेस की प्रस्तावित रैली के चलते पुलिस ने रूट डायवर्जन प्लान लागू किया है। प्रदेश युवा कांग्रेस प्रभारी व राष्ट्रीय महासचिव सुरभि द्विवेदी ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में अराजकता फैलाने व शांति भंग करने वालों के खिलाफ युवा कांग्रेस ढाल बनेगी। युवा कांग्रेस के मोहब्बत के सिपाही अराजक तत्वों से लोगों की सुरक्षा के लिए खड़े रहेंगे।

द्विवेदी ने कहा कि एक समय था जब देश दुनिया में देहरादून को सुरक्षित शहर के रूप में जाना जाता था लेकिन आज प्रदेश में अराजकता फैलाकर भय का माहौल बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बजरंग दल जैसे संगठन धर्म के नाम पर हिंसा फैलाने का प्रयास कर रहे हैं और उन्हें सरकार का संरक्षण मिल रहा है। उन्होंने कहा, बजरंग दल पंजीकृत संगठन नहीं है।

बजरंग बली के नाम पर गुंडागर्दी की जा रही है। उन्होंने सवाल किया कि बजरंग दल वास्तव में हिंदू रक्षक हैं, तो अंकिता भंडारी हत्याकांड मामले में न्याय के लिए आवाज क्यों नहीं उठाई?।

मुख्यमंत्री ने अंकिता भंडारी हत्या की सीबीआई जांच की संस्तुति की

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वर्गीय अंकिता भंडारी के माता–पिता की अनुरोध व उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए अंकिता भंडारी प्रकरण की CBI जांच कराए जाने की संस्तुति प्रदान की है ।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य शुरू से अंत तक निष्पक्ष, पारदर्शी और संवेदनशील तरीके से न्याय सुनिश्चित करना रहा है और आगे भी रहेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वर्गीय बहन अंकिता भंडारी के साथ हुई इस अत्यंत दुखद एवं हृदयविदारक घटना की जानकारी मिलते ही राज्य सरकार ने बिना किसी विलंब के पूर्ण संवेदनशीलता और निष्पक्षता के साथ कार्रवाई की। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल एक महिला आईपीएस अधिकारी के नेतृत्व में विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रकरण से जुड़े सभी अभियुक्तों को शीघ्र गिरफ्तार किया गया तथा राज्य सरकार की ओर से प्रभावी एवं सशक्त पैरवी सुनिश्चित की गई, जिसका परिणाम यह रहा कि विवेचना और ट्रायल के दौरान किसी भी अभियुक्त को जमानत नहीं मिल सकी। SIT द्वारा गहन विवेचना के पश्चात अभियुक्तों के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल की गई और निचली अदालत द्वारा सुनवाई पूर्ण होने पर अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह पूरे प्रकरण में इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि राज्य सरकार ने आरंभ से लेकर अंत तक निष्पक्षता, पारदर्शिता और दृढ़ता के साथ न्याय सुनिश्चित किया है। साथ ही, हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही कुछ ऑडियो क्लिप्स के संबंध में भी अलग–अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं, जिन पर जांच की प्रक्रिया निरंतर जारी है।

मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि सरकार की मंशा पूरी तरह स्पष्ट है और किसी भी तथ्य या साक्ष्य की अनदेखी नहीं की जाएगी। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि अंकिता केवल एक पीड़िता नहीं थी, बल्कि वह हमारी भी बहन और बेटी थी।

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि हाल ही में उन्होंने स्वयं स्वर्गीय अंकिता भंडारी के माता–पिता से मुलाकात की, जिसमें बातचीत के दौरान उन्होंने मामले की CBI जांच कराए जाने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वर्गीय अंकिता के माता–पिता के इस अनुरोध और उनकी भावनाओं का पूर्ण सम्मान करते हुए राज्य सरकार ने इस प्रकरण की CBI से जांच कराने का निर्णय लिया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पुनः दोहराया कि राज्य सरकार पहले भी न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध रही है और आगे भी पूरी दृढ़ता एवं संवेदनशीलता के साथ स्वर्गीय बहन अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए संकल्पबद्ध रहेगी।

Uttarakhand: अंकिता भंडारी के माता-पिता से जल्द मुलाकात करेंगे सीएम धामी, जांच को लेकर करेंगे बात.

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सीएम पुष्कर सिंह धामी जल्द अंकिता के माता-पिता से मिलेंगे। सीएम उनसे बात कर जांच की दिशा किस तरह की रखी जाए और वह सरकार से क्या चाहते हैं, के बारे में उनके विचार जानेंगे। सूत्रों के मुताबिक यह मुलाकात दून में जल्द होगी। इसके लिए प्रशासनिक अधिकारी सक्रिय कर दिए गए हैं।

सीएम ने कहा कि इस संबंध में अंकिता के माता-पिता से मैं स्वयं बात करूंगा, वह न्याय के लिए जो चाहते हैं, सरकार उनकी भावनाओं के आधार पर आगामी निर्णय लेगी। उन्होंने कहा कि एक ऑडियो से प्रदेश में जिस तरह का माहौल बनाया जा रहा है, उससे सबसे ज्यादा अंकिता का परिवार प्रभावित हुआ है। सोशल मीडिया पर वायरल ऑडियो की सत्यता जानने के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। सबूत होने पर कोई भी दोषी कार्रवाई से बच नहीं पाएगा।

पूरी गंभीरता, संवेदनशीलता व पारदर्शिता के साथ कार्य किया: सीएम धामी

अंकिता भंडारी हत्याकांड मामले में पहली बार मुख्यमंत्री धामी ने प्रेसवार्ता में सरकार की मंशा को स्पष्ट किया। कहा कि उत्तराखंड की बेटी अंकिता को न्याय दिलाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। इस दिशा में सरकार ने पूरी गंभीरता, संवेदनशीलता व पारदर्शिता के साथ कार्य किया है। सरकार की सशक्त और प्रभावी पैरवी के कारण ही तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है।

मुख्यमंत्री ने कहा, इस जघन्य अपराध की निष्पक्ष व गहन जांच के लिए महिला आईपीएस अधिकारी रेणुका देवी की अध्यक्षता में विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया था, जिसने मामले के सभी पहलुओं की गहराई से जांच की। एसआईटी की ओर से जांच के दौरान लोगों से साक्ष्य मांगे गए थे। इसके बाद सरकार ने न्यायालय में भी मामले की सशक्त व प्रभावी पैरवी की। एसआईटी की जांच पर निचली अदालत व उच्च न्यायालय, सर्वोच्च न्यायालय ने भी संतोष व्यक्त किया है, जो जांच की निष्पक्षता और मजबूती को दर्शाता है।

अंकिता हत्याकांड की जरूरत पड़ी तो सीबीआई जांच कराई जाएगी : गणेश जोशी

कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड की जरूरत पड़ी तो सीबीआई से जांच कराई जाएगी। मंत्री सुबोध उनियाल और सांसद नरेश बंसल ने भी यह बात कही है। उन्होंने कहा कि जब एसआईटी जांच हुई थी तो सभी आरोपियों को पकड़ा गया था, उनको सजा भी हुई। अब जब एसआईटी जांच में ऐसा कुछ नहीं मिला कि घटना में कोई और शामिल है तो माहौल को क्यों गर्म किया जा रहा है। यदि कोई सबूत प्रस्तुत करने की बात सामने आई हो तो जरूरत पड़ी तो सीबीआई जांच भी कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि घटना में कोई भी दोषी होगा तो उसको बख्शा नहीं जाएगा। प्रदेश में चल रहे आंदोलन पर कहा कि लोकतंत्र में बोलने की आजादी है। सरकार लगातार जनहित के कार्य कर रही है लेकिन विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं है।

 

मुझे उम्मीद है जनभावना को ध्यान में रखकर सीबीआई जांच का फैसला लेंगे धामी : सौरभ बहुुगुणा 

पशुपालन मंत्री सौरभ बहुुगुणा ने कहा, भाजपा सरकार ने हमेशा जनभावना का सम्मान किया है। मुझे उम्मीद है अंकिता भंडारी हत्याकांड मामले में भी जनभावना को ध्यान में रखकर मुख्यमंत्री धामी सीबीआई जांच का फैसला लेंगे। विधानसभा स्थित सभागार में मीडिया से वार्ता में उन्होंने कहा, अंकिता हम सबकी बेटी और बहन थी, उसके साथ जो हुआ गलत हुआ। न्यायालय से दोषियों को आजीवन कारावास की सजा हो चुकी है। दोषियों को सजा दिलाने में सरकार ने भी मदद की। अब इस प्रकरण में नए तथ्य आए हैं, सरकार ने हमेशा जनभावना को ध्यान रखा। उम्मीद है कि सीएम धामी जो भी फैसला लेंगे, जनभावना का सम्मान करते हुए लेंगे। हाल ही में पेपर लीक मामले को देखें तो जनता का आंदोलन हुआ, सरकार से सीबीआई जांच की मांग की गई। युवाओं का दर्द व जनता की भावना थी प्रकरण की सीबीआई जांच हो। जिस पर सीएम धामी ने बड़ा दिल दिखाया और जनता की मांग को स्वीकार किया। विभागीय मंत्री ने कहा, भाजपा सरकार मातृशक्ति, युवाओं और बुजुर्गों के आशीर्वाद से बनी है। अगर उत्तराखंड की जनता की भावना है अंकिता प्रकरण की सीबीआई जांच हो तो मुझे लगता है सीएम धामी इसकी सीबीआई जांच कराएंगे।

उर्मिला सनावर के मामलों की जांच के लिए एसआईटी गठित,जनता आगे आये- उर्मिला

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उर्मिला सनावर के खिलाफ जनपद के विभिन्न थानों में दर्ज मुकदमों की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने एसआईटी गठन का निर्णय लिया है।
एसएसपी के आदेश पर सभी मामलों की जांच के लिए विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया गया है।

उधर, उर्मिला सनावर ने वीडियो बयान जारी कर कहा कि वपुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए छापे मार रही है। जबकि वो सबूत दे चुकी है। उर्मिला ने प्रदेश की जनता से अंकिता को न्याय दिलवाने के लिए आगे आने को कहा है।इस बीच, पुलिस प्रशासन का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य जांच प्रक्रिया को प्रभावी बनाते हुए किसी भी प्रकार के संदेह या पक्षपात की संभावना को समाप्त करना है। एसएसपी ने स्पष्ट किया है कि सभी मामलों की गहन जांच साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी और कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, ताकि मामलों का जल्द एवं न्यायसंगत निस्तारण हो सके।

 

एसपी सिटी को सौंपी गई एसआईटी की कमान

गठित एसआईटी की जिम्मेदारी पुलिस अधीक्षक नगर (एसपी सिटी) अभय कुमार सिंह को सौंपी गई है। टीम को निर्देश दिए हैं कि उर्मिला सनावर से जुड़े सभी प्रकरणों की बारीकी से जांच की जाए और प्रत्येक बिंदु पर निष्पक्ष आकलन के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाए। एसएसपी ने यह भी कहा है कि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

चार थानों में दर्ज हैं कुल चार मुकदमे

जानकारी के अनुसार उर्मिला सनावर के खिलाफ कोतवाली ज्वालापुर, कोतवाली रानीपुर, थाना बहादराबाद और थाना झबरेड़ा में कुल चार मुकदमे दर्ज हैं। अब इन सभी मामलों की जांच एक ही विशेष जांच टीम द्वारा की जाएगी। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि एकीकृत जांच से मामलों में पारदर्शिता बनी रहेगी और जांच की दिशा स्पष्ट रहेगी, जिससे भ्रम या विरोधाभास की स्थिति उत्पन्न नहीं होगी।

एसआईटी में शामिल अधिकारी
गठित विशेष जांच टीम में कुल सात सदस्य शामिल किए गए हैं। टीम में निरीक्षक शांति कुमार गंगवार (प्रभारी कोतवाली रानीपुर), निरीक्षक कुंदन सिंह राणा (प्रभारी कोतवाली ज्वालापुर), उप निरीक्षक अंकुर शर्मा (प्रभारी थाना बहादराबाद), उप निरीक्षक रविन्द्र सिंह (थाना झबरेड़ा), अपर उप निरीक्षक रणजीत सिंह बिष्ट (कार्यालय पुलिस अधीक्षक नगर), कांस्टेबल विनय (कार्यालय पुलिस अधीक्षक नगर) और कांस्टेबल वसीम (सीआईयू हरिद्वार) शामिल हैं।

 

कई स्थानों पर प्रदर्शन

वीआईपी के मुद्दे पर प्रदेश के हल्द्वानी में ज्योति अधिकारी के समर्थन में विरोध-प्रदर्शन जारी है।
देहरादून में महिला कांग्रेस ने स्पीकर के आवास का घेराव कर आंदोलन को धार दी।

प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी सीबीआई जॉच व वीआईपी के खुलासे को लेकर भाजपा के विरोध में आंदोलन जोर पकड़ता जा रहा है।

प्रदेश भाजपा संगठन के लचर व आत्मघाती बयानों से स्थिति और भी बिगड़ गयी है। प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के जातिगत बयान का आम जनता ने भारी विरोध कर दिया है।

अंकिता मर्डर केस में पहली बार बोले दो भाजपा नेता,  कहा, सीबीआई जांच जरूरी,

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र्मिला-सुरेश-आरती के अंदरूनी विवाद से जनित कथित वीआईपी विवाद में पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत और पूर्व विधायक विजया बड़थ्वाल ने भी चुप्पी तोड़ दी है।इन दोनों भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के बयान के बाद इस मुद्दे पर पार्टी के मतभेद भी सामने आ गए हैं। उधर, वीआईपी कांड को लेकर भाजपा हाईकमान में भी गम्भीर हलचल देखी जा रही है। निकट भविष्य में प्रदेश संगठन में बड़े बदलाव की उम्मीद भी बनने लगी है।

 

क्या कहा पूर्व सीएम त्रिवेंद्र ने

विजया बड़थ्वाल के बाद पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पत्रकारों से बातचीत में मामले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि यह महिलाओं से जुड़ा हुआ विषय है, जो समाज के 50 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करती हैं। त्रिवेंद्र रावत ने कहा कि यह मामला इस समय न्यायालय के विचाराधीन है । इसलिए सरकार कोई निर्णय नहीं ले सकती ।साथ ही यह भी जोड़ा कि इसकी गहराई से जांच की आवश्यकता है। पूर्व सीएम ने कहा कि इस तरह के गलत काम करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाना चाहिए। चाहे वह उनका अपना बच्चा हो या भाई, कानून सभी के लिए समान होना चाहिए और दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं समाज की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं और समाज पर धब्बा लगाने का काम करती हैं। त्रिवेंद्र सिंह रावत ने यह भी कहा कि जब यह घटना हुई थी, तब उन्हें व्यक्तिगत रूप से भी गहरा दुख और तकलीफ हुई.

 

इधऱ, यमकेश्वर से पूर्व विधायक विजया बड़थ्वाल ने तो तीखा लिखित बयान जारी कर कांग्रेस की तर्ज पर सीबीआई जांच की मांग कर डाली। यही नहीं, उन्होंने यह भी कह दिया कि न्याय होना ही पर्याप्त नहीं है। न्याय दिखना भी चाहिए।
उन्होंने कहा कि हम किसी भी पार्टी के हो सकते हैं, परंतु हमारी बेटियों की प्रतिष्ठा, सम्मान और अस्मिता की रक्षा हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। महादेव की इस पवित्र भूमि पर यदि हमारी बेटियाँ सुरक्षित नहीं हैं, तो इस राज्य को संभालने का क्या अर्थ बचता है?

हम अपनी बेटियों की सुरक्षा के लिए किसी भी समझौते को स्वीकार नहीं कर सकते। यह सिर्फ एक मामला नहीं, बल्कि हमारी सामाजिक ज़िम्मेदारियों और नैतिक मूल्यों का प्रश्न है। गौरतलब है कि जिस वनन्तरा रिसॉर्ट में अंकिता  नौकरी करती थी। वह यमकेश्वर विधानसभा में आता है। और यहां से मौजूदा भाजपा विधायक रेनू बिष्ट और उमरेला कि पूर्व जिला पंचायत सदस्य आरती गौड़ पर वनन्तरा रिसॉर्ट में बुलडोजर चलाने का आरोप सुर्खियों में है। इस बीच, सालों से मौन साधे रही पूर्व विधायक विजया बड़थ्वाल के झकझोरने वाले बयान के बाद भाजपा की चिंता की लकीरें बढ़ गयी है।

विजया बड़थ्वाल व त्रिवेंद्र के बयान के बाद भाजपा के अंदर राजनीतिक हलचल तेज हो गयी है। प्रदेश भाजपाध्यक्ष महेंद्र भट्ट उर्मिला सनावर पर दिए गए बयान के बाद स्वंय घिर गए है।

 

उर्मिला मेरी पत्नी नहीं

इस मुद्दे पर भाजपा से निष्कासित सुरेश राठौर ने एक बार फिर प्रेस कांफ्रेंस कर उर्मिला सनावर की नीयत पर सवाल उठाए। कहा कि वो मेरे परिवार को बर्बाद कर रही है। चारित्रिक हनन कर रही है। मैंने फैक्ट्री बेच उर्मिला को 50 लाख रुपए दिए । वह ब्लैकमेल कर रही है। मुझे पति भी कहती है और कालनेमि भी।
राठौर यह कहने से भी नहीं चूके कि उन्होंने भाजपा को खून पसीने से सींचा।
राठौर ने कहा कि उर्मिला मेरी पत्नी नहीं है। सोशल मीडिया में कहने के बजाय उर्मिला को फैमिली कोर्ट जाना चाहिए।

उर्मिला -सुरेश

इस मामले में उक्रांद, महिला मंच, मूल निवास भू कानून समिति समेत अन्य संगठनों ने भी मोर्चा खोल दिया है। हरिद्वार जिले में ही भाजपा से जुड़े मोर्चा के नेता अंकित बहुखंडी के नेतृत्व में वीआईपी का पुतला दहन भी किया गया। बहुखंडी ने कहा कि अंकिता हत्याकांड के दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। इससे पूर्व,मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस प्रदेशव्यापी प्रदर्शन के तहत पुतला दहन कर चुकी है। सोशल मीडिया में कई आम लोग भी बयान जारी कर सुरेश-उर्मिला-आरती के ऑडियो की जांच की मांग कर रहे हैं।

 

वीडियो-ऑडियो विस्फोट से खुलने लगे हैं अंकिता मर्डर फ़ाइल के नाज़ुक पन्ने,पूर्व भाजपा विधायक के ऑडियो से बड़ा भाजपा नेता कठघरे में !

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अंकिता भंडारी हत्याकांड के बाद वीआईपी को लेकर जारी चर्चाओं ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है।
इस बीच, भाजपा से निष्कासित पूर्व विधायक सुरेश राठौर व उर्मिला सनावर की एक ऑडियो क्लिप ने भी तहलका मचा दिया है।

इस ऑडियो क्लिप में कथित तौर पर सुरेश राठौर और उर्मिला के बीच बातचीत में एक बड़े भाजपा नेता और महिला का नाम भी सामने आया है। इसमें राठौर कह रहे हैं कि उक्त भाजपा नेता में हरिद्वार की डाम कोठी में महिला को बुलाया था।

उर्मिला ने पूछा कि क्या वो महिला भाजपा नेता से मिलने गयी थी। इस पर पूर्व विधायक ने कहा कि वो गयी या नहीं। उसे पता नहीं। लेकिन उक्त महिला ने मुझे (राठौर)बताया था कि भाजपा नेता के वीडियो व ऑडियो क्लिप उसके पास हैं।

एक मिनट 31 सेकेंड के इस ऑडियो में भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर कहते हैं कि उक्त महिला ने ही वनन्तरा रिसॉर्ट में बुलडोजर चलवाया था। इस रिसॉर्ट इन अंकिता हत्याकांड हुआ था। साफ है कि उक्त महिला ने कथित भाजपा नेता के इशारे पर ही सबूत मिटाने के लिए वनन्तरा रिसॉर्ट में बुलडोजर चलवाया होगा।

इस ऑडियो क्लिप के वॉयरल होने से सुरेश राठौर, गट्टू और एक अन्य महिला के अन्तर्सम्बन्धों के भी राज खुल रहे हैं। यह भी साफ हो रहा है कि ‘गट्टू’ से नजदीकी सम्बंध रखने वाली उक्त महिला वनन्तरा रिसॉर्ट से जुड़े क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय रही है। और इस महिला के भाजपा के पूर्व विधायक राठौर से भी नजदीकी सम्बंध रहे हैं।

ऑडियो में राठौर यह भी खुलासा करते हैं कि उक्त महिला के तो अन्य छह सात लोगों से भी सम्बंध हैं। और एक बच्चा भी है।

बहरहाल, भाजपा के बड़े नेता से जुड़े ऑडियो-वीडियो के खेल ने राजनीति में खलबली मचा दी है।
हालांकि, कोटद्वार कोर्ट इसी साल अंकिता मर्डर केस के आरोपी पुलकित आर्य व अन्य दो को सजा सुना चुकी है। तीनों ही जेल में है। लेकिन जांच में वीआईपी के नाम का कोई खुलासा नहीं होने के बाद अब कई महीने बाद कहीं “गट्टू ” और कहीं सीधे नाम का उल्लेख भाजपा के लिए चिंता का सबब बन गया है।

इधऱ, राठौर की दूसरी पत्नी उर्मिला ताजातरीन वीडियो में साफ कह रही है कि अंकिता ने गट्टू के पास जाने से मना कर दिया था। इसलिए उसकी हत्या कर दी गयी।

इसके अलावा वॉयरल ऑडियो से यह भी साफ हो रहा है कि राठौर ने बेहतर रिश्ते के समय उर्मिला सनावर को यह गुप्त बातें बता दी थी। और अब रिश्ते खराब होने पर उर्मिला अपने वॉयरल वीडियो में अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े अनसुलझे तथ्य सामने रख रही है।

अंकिता हत्याकांड को लेकर एक बार फिर सोशल मीडिया में बहस छिड़ गयी है। लोगों का कहना है कि कोर्ट और जांच एजेंसी को वीडियो और ऑडियो क्लिप की जांच कर राठौर, उर्मिला और उक्त महिला से भी पूछताछ करनी चाहिए।

अगर ऐसा हुआ तो लम्बे समय से वीआईपी के चेहरे पर पड़े नकाब के बेनकाब होने की पूरी उम्मीद है।

बहरहाल, इन नये खुलासे के बाद एक बार फिर कोर्ट के  स्वंय संज्ञान लेने और पुलिस की नयी जांच को लेकर भी बहस शुरू हो गयी है। अगर परिजनों की मांग पर या किसी ब्यक्ति की ओर से दायर याचिका पर कोर्ट या पुलिस संज्ञान लेती है तो वीआईपी की अनसुलझी गुत्थी से पर्दा उठने की संभावना जताई जा रही है,,,हलांकि dsruncut इन किसी भी आरोपों की सत्यता की पुष्टि नहीं करता, ये सब जांच का विषय है,,,,बरहाल इस पुरे मामले में भाजपा की तरफ से चुप्पी है,,,बरहाल अंकिता का vip कौन इस मुद्दे ने एक बार फिर चर्चा पकड़ ली है,,,

 

अंकिता भंडारी हत्याकांड- वायरल वीडियो के बाद कांग्रेस का हमला

उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और प्रवक्ता धीरेंद्र प्रताप ने कहा है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को इस बात का खुलासा करना चाहिए की अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े मामले में जिस गटू का जिक्र एक महिला के वायरल हुए वीडियो में किया है वह गट्टू कौन है??

धीरेंद्र प्रताप ने कहा है कि इस महिला के वायरल हुए वीडियो में यह बात भी सामने आई है कि हरिद्वार के पूर्व विधायक सुरेश राठौर का इस गट्टू से कोई संबंध है ।

धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड ने पूरे उत्तराखंड की जनता को झकझोर कर रखा हुआ है । ऐसी स्थिति में इस गट्टू नाम का अचानक सतह पर आना चिंता का विषय है । मुख्यमंत्री को चाहिए कि इस गट्टू का जल्दी पता लगाए और विधायक सुरेश राठौर की गतिविधियों के बारे में भी बताएं कि वह आखिर क्यों इस महिला के निशाने पर बने हुए हैं।

मांस वाहन को रोकने और वाहन चालक से मारपीट के मामले में फरार भाजपा नेता स्कूटी से पहुंचे कोतवाली आत्मसमर्पण करने, कोर्ट में पेश कर भेजा जेल

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मीट प्रकरण में फरार चल रहे भाजपा पूर्व नगर अध्यक्ष मदन जोशी स्कूटी से कोतवाली पहुंचे और आत्म समर्पण कर दिया। उधर पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया है। भाजपा नेता की गिरफ्तारी को लेकर विधायक समेत बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता कोतवाली पहुंचे। 23 अक्तूबर को मांस वाहन को रोकने और वाहन चालक से मारपीट के मामले में पुलिस ने वाहन चालक की पत्नी की तहरीर पर भाजपा नेता मदन जोशी समेत पांच नामजद व 30 अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या के प्रयास में मुकदमा दर्ज किया था। जिसके बाद पुलिस लंबे से भाजपा नेता की गिरफ़्तारी के प्रयास कर रहे थी।

वहीं सोमवार को भाजपा नेता की हाई कोर्ट से ज़मानत याचिका ख़ारिज होने के बाद मंगलवार सुबह मदन जोशी ने समर्पण के लिए सोशल मीडिया पर वीडियो अपलोड की। जिसके कुछ देर बाद बड़ी संख्या भाजपा कार्यकर्ता व समर्थक कोतवाली पहुंच गए।

उधर गिरफ्तारी को लेकर पुलिस भी भारी संख्या में तैनात की गई। इसी बीच भाजपा नेता भीड़ के बीच स्कूटी से कोतवाली पहुंचे और आत्मसमर्पण किया। कोतवाल सुशील कुमार ने बताया कि आरोपी को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया है।

चुनाव आयोग के एसआईआर के नाम पर ठगी शुरू, उत्तराखंड में कई लोगों के पास आ चुके हैं OTP

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चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के नाम पर कई राज्यों में ठगी शुरू हो गई है। उत्तराखंड में भी इसे लेकर सतर्क रहने की अपील की गई है। साइबर पुलिस और चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि एसआईआर के लिए बीएलओ को ओटीपी की जरूरत नहीं होती है।

प्रदेश में जल्द ही एसआईआर शुरू होने वाला है। वर्तमान में पड़ोसी राज्य यूपी समेत देश के 12 राज्यों में एसआईआर की प्रक्रिया चल रही है। इस बीच यूपी में कई ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जब ठग बीएलओ या चुनाव आयोग के नाम पर फोन करके ओटीपी पूछकर खाते खाली कर रहे हैं। इससे एसआईआर को लेकर लोगों के बीच भ्रम भी बढ़ाया जा रहा है।

साइबर पुलिस भी ठगी के इस नए ट्रेंड पर नजर बनाए हुए
उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के मुताबिक, पहली बात तो ये है कि उत्तराखंड में अभी एसआईआर शुरू नहीं हुआ है। दूसरा बीएलओ को मोबाइल ओटीपी की जरूरत नहीं होती। बीएलओ आपको जो एन्म्यूरेशन फॉर्म देंगे, उसे भरकर वापस जमा कराना है। अगर आप ऑनलाइन एसआईआर भर रहे हैं तो इसमें ओटीपी की जरूरत पड़ सकती है लेकिन यह आपको खुद भरना होता है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि एसआईआर के नाम पर किसी तरह के ठगों के जाल में न आएं। उत्तराखंड की साइबर पुलिस भी ठगी के इस नए ट्रेंड पर नजर बनाए हुए हैं।

एसआईआर की जानकारी टोलफ्री नंबर से लें
अगर आपके मन में एसआईआर को लेकर कोई सवाल है। आप सीधे चुनाव आयोग के टोल फ्री नंबर 1950 पर संपर्क कर सकते हैं। आपको यहां सभी तरह की जानकारी, जरूरी दस्तावेज, एसआईआर की प्रक्रिया की पूरी जानकारी मिलेगी।

पेयजल निगम में 2,690 करोड़ के कथित घोटाले का खुलासा

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उत्तराखंड पेयजल निगम में भारी वित्तीय अनियमितताओं का मामला अब बड़े घोटाले का रूप ले चुका है। आरटीआई एक्टिविस्ट और अधिवक्ता विकेश नेगी के अनुसार, भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में 2016 से मई 2025 के बीच निगम की विभिन्न परियोजनाओं में लगभग 2,690 करोड़ 27 लाख की वित्तीय अनियमितताएं सामने आई हैं। नेगी ने दावा किया है कि यह रिपोर्ट न केवल गंभीर वित्तीय भ्रष्टाचार का संकेत देती है, बल्कि इसे वर्षों तक जनता और विधानमंडल से छिपाया गया। उन्होंने इस संबंध में शिकायत और दस्तावेज प्रदेश के मुख्यमंत्री को भेजते हुए उच्च स्तरीय जांच और अभियोजन की मांग की है।

सबसे बड़ा सवाल — रिपोर्ट विधानसभा में क्यों नहीं रखी गई?
अधिवक्ता नेगी के अनुसार, कैग की यह रिपोर्ट तीन साल तक सार्वजनिक नहीं की गई और न विधानसभा में प्रस्तुत हुई। उनका आरोप है कि जनता के हक की सबसे महत्वपूर्ण रिपोर्ट को व्यवस्था ने छिपाए रखा, ताकि भ्रष्टाचार उजागर न हो सके।

रिपोर्ट में दर्ज वित्तीय अनियमितताएं

( करोड़ में)

वित्तीय वर्ष अनियमितता
2016-17 92.41
2017-18 ऑडिट नहीं
2018-19 ऑडिट नहीं
2019-20 656.05
2020-21 829.90 (सबसे अधिक)
2021-22 43.48
2022-23 96.99
2023-24 803.00
2024-25 (मई तक) 38.41

कुल कथित अनियमितता : 2,660 करोड़ 27 लाख

कोरोना काल में सबसे ज्यादा अनियमितताएं
सबसे अधिक अनियमितताएं कोरोना काल (2020-21) में दर्ज की गईं— जब पूरा राज्य स्वास्थ्य संसाधनों के लिए जूझ रहा था, उसी समय पेयजल निगम में 829.90 करोड़ का हिसाब संदिग्ध पाया गया।

शिकायत और रिपोर्ट के अनुसार—

  • बिना गारंटी ठेकेदारों को करोड़ों का भुगतान
  • अधूरे कामों पर बिल पास
  • कई ठेकेदारों ने जीएसटी जमा नहीं किया, फिर भी भुगतान
  • निर्माण गुणवत्ता पर सवाल, जगह-जगह अधूरी परियोजनाएं
  • रॉयल्टी और ब्याज वसूली नहीं
  • अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत का स्पष्ट संकेत

अधिवक्ता नेगी का कहना है—
यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि योजनाबद्ध आर्थिक नुकसान है। दोषियों पर आपराधिक मामला दर्ज होना चाहिए।

घोटाले के मुख्य बिंदु

  • कैग रिपोर्ट 3 साल तक छिपाए जाने का आरोप
  • कई वर्षों में ऑडिट नहीं हुआ
  • कोविड अवधि में सबसे अधिक अनियमितता
  • परियोजनाएं अधूरी, भुगतान पूरा
  • भ्रष्टाचार में विभागीय अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध

जनता और विपक्ष में चर्चा तेज
मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों, जनता और सोशल मीडिया में इसे लेकर बहस शुरू हो गई है। कई लोग इसे राज्य का अब तक का सबसे बड़ा जल-संबंधी वित्तीय घोटाला बता रहे हैं। अब निगाहें सरकार और जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर हैं।