Category Archive : राज्य

Uttarakhand: हिमालयी राज्यों को पछाड़ उत्तराखंड बना नंबर-1, NCRB की रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला खुलासा.

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उत्तराखंड तरक्की कर रहा है या नहीं ये तो नहीं पता लेकिन कुछ चीजें ऐसी है जिसमें प्रदेश का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है और अब तो उत्तराखंड हिमालयी राज्यों में टॉप पर पहुंच चुका है. पर इसमें खुश होने की नहीं बल्कि शर्म करने की जरूरत है क्योकि जिसमें उत्तराखंड नंबर 1 बना है उसमें कोई भी राज्य नंबर 1 नहीं बनना चाहता। अभी हाल ही NCRB की रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है जिसने कानून व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है और पूरे प्रदेश को शर्मसार कर दिया है।

 

उत्तराखंड में महिलाओं और बच्चों के साथ बलात्कार के सबसे अधिक मामले दर्ज किए गए। इसमें हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम, त्रिपुरा और दो केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर, लद्दाख सहित 9 राज्य शामिल हैं। इसके तहत वर्ष 2022 में प्रदेश में महिला अपराध का ग्राफ वर्ष 2021 के मुकाबले 26 प्रतिशत ऊपर पहुंच गया है ।

NCRB की रिपोर्ट में खुलासा-

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ताजा रिपोर्ट तो यही बता रही है। इसके तहत वर्ष 2022 में प्रदेश में महिला अपराध का ग्राफ वर्ष 2021 के मुकाबले 26 प्रतिशत ऊपर पहुंच गया। एनसीआरबी की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 में महिला अपराध के 3431 मामले सामने आए थे, जबकि वर्ष 2022 में ये संख्या बढ़कर 4 हजार 337 पहुंच गई, यानी एक वर्ष में 906 मामलों की बढ़ोतरी हुई है। इससे पहले वर्ष 2020 में 2 हजार 846 मामले सामने आए थे। इतना ही नहीं महिला अपराध में बढ़ोतरी को लेकर देशभर में स्थिति की बात करें तो उत्तराखंड छठे पायदान पर है। इस मामले में आंध्र प्रदेश सबसे ऊपर है, जहां महिला अपराध में 43.66 प्रतिशत का उछाल आया है।उत्तराखंड प्रदेश में बड़ी संख्या में विवाहित महिलाओं को घर के भीतर प्रताड़ना झेलनी पड़ी है हालांकि, कई राज्य ऐसे भी हैं जहां महिला अपराध में कमी आई है। सबसे अधिक 51 प्रतिशत की कमी असम में आई है।साल दर साल प्रदेश में मामले बढ़ रहे हैं बात करें तो साल  2020 में  2 हजार 446 जबकि साल 2021 में  3 हजार 431 जबकि यही आंकड़ा साल  2022 में बढ़कर 4 हजार 337 हो गयी है।

वर्ष 2022 में पुलिस के समक्ष 956 ऐसे मामले पहुंचे। इनमें महिलाओं को पति या उसके रिश्तेदार ने पीटा या अन्य प्रकार से प्रताड़ित किया। यही नहीं, उत्पीड़न से तंग आकर या अन्य कारणों से वर्षभर में 24 महिलाओं ने आत्महत्या जैसा कदम भी उठाया। तो वहीं अपहरण के मामले भी बढ़े, वर्ष 2022 में प्रदेश में महिला अपहरण के मामलों में भी बढ़ोतरी हुई। वर्ष 2021 में 696 अपहरण के मामले सामने आए थे, जबकि वर्ष 2022 में 778 महिलाओं का अपहरण हुआ वहीं दुष्कर्म की कोशिश के भी 18 मामले सामने आए हैं।

उत्तराखंड जिसे देवभूमि कहा जाता है और अमूमन इसको एक अपराध मुक्त और शांत प्रदेश कहा जाता है,,लेकिन जिस तरह से प्रदेश में अपराध बढ़ रहे हैं उसने कही न कहीं चिंता जरूर पैदा कर दी है,,वो भी खासकर महिला अपराध जिस तरह से प्रदेश में बढ़ा है वो काफी चिंताजनक है जिस तरह अब ये अपराध मैदानों से लेकर पहाड़ की शांत वादियों तक पहुंच चुके हैं उससे प्रदेश की चिंताएं जरूर बढ़ रही है,,,साथ ही एक सवालिया निशान प्रदेश की कानून व्यवस्था पर भी खड़े हो रहे हैं सरकार या उसका क़ानूनी तंत्र पूरी तरह से इन अपराधों के आगे बेबस नजर आ रहा है पिछले साल ही जिस तरह से अंकिता भंडारी केस हुआ था उसके बाद उम्मीद लगाई जा रही थी कि प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम उठाया जायेगा लेकिन ऐसा कुछ होता दिखाई नहीं दे रहा है उल्टा सरकार अंकिता के दोषियों को अभी तक सजा नहीं दिला पाई है।इस तरह की हीलाहवाली भी कहीं  न कहीं अपराधियों का हौसला बढ़ाने जैसा है।

Ram Mandir: राम मंदिर निर्माण के लिए चंदा मांगने के नाम पर हो रहा फर्जीवाड़ा, विश्व हिंदू परिषद ने लोगों को चेताया.

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अयोध्या में बन रहे भगवान राम के मंदिर का उद्घाटन 22 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों होना है। इसे लेकर हर तरह से प्रचार-प्रसार भी हो रहा है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का प्रयास है कि इस कार्यक्रम में अधिक से अधिक लोगों को शामिल कर इसे एक बड़ा कार्यक्रम बनाया जाए। लेकिन इसी के साथ राम मंदिर के नाम पर एक बड़ा फ्रॉड भी सामने आ गया है। कुछ लोग राम मंदिर निर्माण के नाम पर पर्चा छापकर लोगों से चंदा वसूल रहे हैं।

 

विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने कहा है कि राम मंदिर निर्माण के नाम पर कोई चंदा नहीं लिया जा रहा है। यह पूरी तरह फ्रॉड है और लोग इससे सावधान रहें। यदि कोई व्यक्ति राम मंदिर निर्माण के नाम पर चंदा ले रहा है, तो इसकी सूचना पुलिस को दें। बजरंग दल के पदाधिकारियों ने विहिप के नेताओं के संज्ञान में यह विषय लाया जिसके बाद संगठन को इस पर प्रतिक्रिया देनी पड़ी है।

विश्व हिंदू परिषद के शीर्ष पदाधिकारी मिलिंद परांडे ने शुक्रवार को एक प्रेस वक्तव्य जारी कर कहा कि अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के लिए किसी अलग समिति का गठन नहीं किया गया है। किसी समिति को प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के लिए धन एकत्र की जिम्मेदारी भी नहीं दी गई है। उन्होंने कहा है कि समाज को ऐसे किसी भी फ्रॉड के प्रति सचेत रहना चाहिए और ऐसे किसी व्यक्ति को आर्थिक योगदान नहीं देना चाहिए।

Covid19 Cases: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ्तार, सक्रिय मामले बढ़कर 2997 हुए, केरल में 1 की मौत.

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देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की रफ्तार बढ़ रही है। शुक्रवार को देश में कोरोना के 640 नए मामले दर्ज किए गए हैं। जिसके बाद देश में कोरोना के कुल सक्रिय मरीज बढ़कर 2997 हो गए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह आंकड़े जारी किए हैं। वहीं केरल में कोरोना से एक और मरीज की मौत हो गई है। बता दें कि गुरुवार को केरल में तीन, कर्नाटक में दो और पंजाब में एक व्यक्ति की कोरोना संक्रमण से मौत हुई थी। संक्रमण दर अभी देश में 1.19 प्रतिशत है।

केरल में 24 घंटे में 265 मामले सामने आए-

बता दें कि गुरुवार को देशभर में कोरोना के 358 नए सक्रिय मामले सामने आए थे। इनमें से 300 मामले अकेले केरल राज्य में मिले थे। गुरुवार को देशभर में कोरोना के कुल सक्रिय मामले 2669 थे, जो शुक्रवार को बढ़कर 2997 हो गए हैं। बीते 24 घंटे में केरल में 265 नए मामले सामने आए हैं, जिसके बाद राज्य में कुल मामले बढ़कर 2606 हो गए हैं। वहीं कर्नाटक में 13 मामले बढ़कर कुल मामले 105 हो गए हैं।

इन राज्यों में बढ़ रहे कोरोना के मामले-

 महाराष्ट्र में बीते 24 घंटे में कोरोना के 8 नए सक्रिय मामले मिले हैं, जिसके बाद राज्य में कुल सक्रिय मामले बढ़कर 53 हो गए हैं। गुजरात में 32, गोवा में 16, तमिलनाडु में 104, तेलंगाना में 19 कोरोना के सक्रिय मरीज हैं। हालांकि राज्य सरकारों का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं है और स्वास्थ्य सेवाएं हालात से निपटने के लिए तैयार हैं। हालांकि लोगों को सार्वजनिक स्थलों पर मास्क पहनने की अपील की गई है और कहा गया है कि बीमारी के लक्षण दिखते ही डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

देश में कोरोना से संक्रमित मरीजों की कुल संख्या 4,50,07,212 हो गई है। वहीं कोरोना से मरने वालों की संख्या 5,33,328 है। यह आंकड़ा शुक्रवार सुबह 8 बजे तक का है। कोरोना को मात देकर ठीक होने वाले लोगों की संख्या 4,44,70,887 है और रिकवरी दर 98.81 प्रतिशत है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, देश में अब तक 220.67 करोड़ लोगों को कोरोना वैक्सीन लग चुकी है।

Uttarakhand: कूड़ा फेंकने वालों की फोटो खींच कर भेजो और इनाम पाओ, जानिए योजना के पीछे क्या है वजह.

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प्रदेश में जहां-तहां कूड़ा फेंकने वालों से निपटने के लिए अब सरकार सीसीटीवी कैमरों से नजर रखेगी। साथ ही जो लोग कूड़ा फेंकने वालों की फोटो या वीडियो खींच कर भेजेंगे, उन्हें चालान की रकम का 50 प्रतिशत इनाम के रूप में दिया जाएगा। मुख्य सचिव डॉ. एसएस संधु शहरी विकास को इसे योजना में शामिल करने के निर्देश दिए।

उन्होंने विभाग से 15 दिन के अंदर पूरे प्रदेश में कूड़ा उठान की प्रभावी योजना के लिए ठोस कूड़ा प्रबंधन प्रणाली का एक आदर्श कार्य योजना भी तलब की। उन्होंने ताकीद किया कि अगले 15 दिन के भीतर पूरे प्रदेश को डस्टबिन फ्री बनाया जाए। उन्होंने कहा कि इस योजना के लिए बजट की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी।

मुख्य सचिव मंगलवार को सचिवालय में प्रदेश में ठोस कूड़ा प्रबंधन के तहत कार्यों की प्रगति की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ठोस कूड़ा के 100 प्रतिशत निपटारे का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए डोर टू डोर कूड़ा एकत्रीकरण, सोर्स सेग्रीगेशन एवं डस्टबिन फ्री सिटी की दिशा में कार्य होना चाहिए। उन्होंने प्रदेश में विश्वस्तरीय ठोस कूड़ा प्रबंधन प्रणाली विकसित करने के लिए एक आदर्श योजना बनाने के निर्देश दिए।

लेगेसी वेस्ट को भी शीघ्र हटाए जाने के निर्देश-

मुख्य सचिव ने कहा कि विभिन्न योजनाओं से योजना पर कार्य करने के बाद गैप फंडिंग के लिए स्टेट बजट से प्रावधान किया जाएगा। उन्होंने प्रदेशभर में विभिन्न स्थानों से लेगेसी वेस्ट को भी शीघ्र हटाए जाने के निर्देश दिए। कहा कि लेगेसी वेस्ट हटाए जाने के बाद ख़ाली पड़ी भूमि का अधिकतम उपयोग हो सके इसके लिए स्थानीय आवश्यकताओं एवं परिस्थितियों के अनुरूप भूमि उपयोग की योजना तैयार की जाए। बैठक में अपर सचिव नितिन भदौरिया एवं सदस्य सचिव उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सुशांत पटनाईक सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

पूरे प्रदेश को डस्टबिन फ्री किया जाए-

उन्होंने कहा कि 100 प्रतिशत डोर टू डोर कूड़ा उठान तभी संभव होगा, जब पूरे प्रदेश को डस्टबिन फ्री किया जाएगा। इसके लिए कूड़ा उठाने वाले वाहनों की जितनी भी आवश्यकता होगी उसके लिए बजट उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही मैन पावर भी बढ़ाई जाएगी। उन्होंने लोगों में जागरूकता के लिए भी योजना संचालित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने लोगों को डोर टू डोर कूड़ा उठान के लिए प्रेरित करने को कहा। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर की सड़कों के किनारे से डस्टबिन हटाए जाने के बाद डस्टबिन उठाने के अनुकूल बनी गाड़ियां जब तक चल रही हैं, उनसे कार्य लिया जाता रहे। इसका ध्यान रखते हुए उन वाहनों का मॉडिफिकेशन प्लान भी तैयार कर किया जाए।

ठोस कचरा प्रबंधन सयंत्र बनाने पर भी दिया जोर-

मुख्य सचिव ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट्स के निर्माण में भी तेज़ी लाए जाने के निर्देश दिए। कहा कि सभी प्लांट्स के प्रत्येक स्तर के पूर्ण होने तिथि सहित पूरा प्लान प्रस्तुत किया जाए. उन्होंने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट का थर्ड पार्टी ऑडिट कराए जाने के भी निर्देश दिए।

कई हाइड्रो प्रोजेक्ट लगाने के बाद भी बिजली के लिए क्यों तरस रहा उत्तराखंड? अब कोर्ट की शरण में लाखों के बोझ तले दबे लोग.

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प्रदेश में लगातार बढ़ती बिजली की मांग के इलाज के तौर पर हाइड्रो व सोलर के अलावा दूसरे इंतजाम भी अभी तक कारगर साबित नहीं हो पाए। आजकल उत्तराखंड प्रदेश में बिजली की समस्या सभी जगह देखने को मिल रही है उत्तराखंड में लगातार बिजली की मांग बढ़ रही है लेकिन आपूर्ति सरकार पूरी नहीं कर पा रही है. हमारे प्रदेश के नेता इस प्रदेश को ऊर्जा प्रदेश कहते हैं और इसी ऊर्जा प्रदेश में जल विद्युत परियोजनाओं की भरमार है लेकिन इस प्रदेश का दुर्भाग्य कहें या सत्ता पर बैठने वाली पार्टियों की सोच कि जिस प्रदेश में नदियों के सीने चीर कर इतने हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट लग रहे हैं लेकिन जब इस प्रदेश में बिजली की आपूर्ति की बात होती है तो इस ऊर्जा प्रदेश के लोगों को ही पूरी बिजली नहीं मिल पाती है.

 

प्रदेश में लगातार बढ़ती बिजली की मांग के इलाज के तौर पर हाइड्रो व सोलर के अलावा दूसरे इंतजाम भी अभी तक कारगर साबित नहीं हो पाए। त्रिवेंद्र सरकार में शुरू हुई पिरूल से बिजली योजना ठप हो चुकी है। प्लांट बंद हो चुके हैं। लाखों के कर्ज तले दबे प्लांट लगाने वाले लोग अब न्याय के लिए हाईकोर्ट पहुंच गए हैं।

दरअसल, त्रिवेंद्र सरकार ने प्रदेश में चीड़ के पिरूल से हर साल लगने वाली आग को ऊर्जा में बदलने की योजना शुरू की। इसके तहत पिरूल से विद्युत उत्पादन के लिए 21 प्लांट उरेडा के माध्यम से आवंटित किए गए। इनमें से केवल 6 प्लांट प्रदेश में गढ़वाल व कुमाऊं मंडल में स्थापित हुए।

अब प्लांट संचालक पहुंचे हाईकोर्ट-

शुरुआत में बिजली उत्पादन होने लगा लेकिन देखते ही देखते ये अटकता चला गया। हालात ये हो गए कि तीन साल के भीतर ही सभी छह प्लांट बंद हो गए। इनसे विद्युत उत्पादन रुक चुका है। प्लांट लगाने वाले लोगों पर लाखों रुपये का कर्ज था, जिसकी भरपाई के लिए बैंक नोटिस भेज रहे हैं।

शासन ने इन प्लांट की व्यावहारिकता देखने को जतन किए, लेकिन कोई उत्साहजनक नतीजा नहीं निकल पाया। अब प्लांट संचालक हाईकोर्ट चले गए हैं। उनका आरोप है कि सरकार ने आधी-अधूरी तैयारियों के साथ योजना लांच की थी, जिसका नुकसान उन्हें उठाना पड़ रहा है।

पवन ऊर्जा भी कारगर नहीं-

प्रदेश में वैसे तो पवन की उपलब्धता भरपूर है, लेकिन अभी तक वायु ऊर्जा कारगर नहीं हो पाई। इसके पीछे एक वजह ये भी है कि पवन ऊर्जा से जुड़े उपकरणों को पर्वतीय क्षेत्रों तक पहुंचाना मुश्किल है। वहां कई बार तेज हवाओं में ज्यादा नुकसान की आशंका भी रहती है। लिहाजा, पवन ऊर्जा के क्षेत्र में राज्य कोई काम नहीं कर पाया।

अब इन योजनाओं से बांधी जा रही उम्मीद-

भू-तापीय ऊर्जा-  प्रदेश में अब भू-तापीय ऊर्जा पर फोकस किया जा रहा है। अगर ये प्रयोग सफल होता है तो इससे ऊर्जा जरूरतें पूरी होने में बड़ी मदद मिल सकती है।

पंप स्टोरेज-  इस योजना के तहत टीएचडीसी का 1000 मेगावाट का प्लांट नए साल से शुरू होने जा रहा है। प्रदेश में अन्य जगहों पर भी पंप स्टोरेज प्लांट लगाने के लिए सरकार नीति लेकर आई है। सफल रहा तो कुछ नतीजा निकल सकता है।

 

 

राज्य की सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता 20 हजार मेगावाट आंकी जा चुकी है लेकिन 23 साल में यह 350 मेगावाट से ऊपर नहीं जा पाए. ऐसे में हाइड्रो, गैस या कोयला से बिजली उत्पादन का विकल्प बनने की बात बेमानी ही नजर आ रही है. परियोजनाओं के विफल होने का एक सबसे बड़ा कारण सरकारी सुस्ती है जिन लोगों ने छोटे सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट लगाए हैं, वे या तो समय से ग्रिड से नहीं जोड़े जाते या फिर उनकी मीटरिंग समय से नहीं होती इस वजह से लोग हतोत्साहित होते हैं. देखिये किस तरह से कुछ शानदार और प्रदेश हितकारी योजनाएं सरकारी सुस्ती या राजनीति के चलते प्रदेश में दम तोड़ देती है और इसका खामियाजा भुगतती है प्रदेश की जनता।

Corona New Variant: देश में फिर कोरोना की लहर, आंकड़ों से डरी सरकार, उत्तराखंड भी सतर्क.

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भारत में एक बार फिर से कोरोना ने दस्तक दे दी है, हैं, अचानक से आये इन मामलों ने सबको चौंका दिया है राज्य सरकारें एक बार फिर अलर्ट हो गई है,, पूरे देश में बीते दिन 300 से ज्यादा कोविड-19 के मामले सामने आये हैं इतना ही नहीं इससे 4 लोगों ने अपनी जान भी गंवाई है जिसके चलते कई राज्यों में सख्ती शुरू कर दी गयी है.


कई न्यूज रिपोर्ट्स के मुताबिक केरल में कोविड का नया सब वैरिएंट JN.1 मिला है इससे 17 दिसंबर को चार लोगों की मौत हो गई, वहीं UP में भी कोविड पॉजिटिव शख्स की जान चली गई हालांकि ये पता नहीं चला है कि ये मरीज JN.1 वैरिएंट से संक्रमित था या नहीं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार भारत में रविवार को 335 नए कोविड-19 मामले दर्ज किए गए और एक्टिव केस की संख्या बढ़कर 1,701 हो गई. केरल ही नहीं इसको लेकर अब कई राज्यों की सरकारें अलर्ट हो गयी है.  ICMR  के मुताबिक मामला 8 दिसंबर को केरल के तिरुवनंतपुरम में सामने आया था जहां एक महिला में इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारी के हल्के लक्षण थे जब जांच हुई तो 79 साल की महिला की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी.


केरल में पिछले कुछ दिनों में लोगों ने कोविड की वजह से जान गंवाई है, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने राज्यभर में वायरस को लेकर अलर्ट जारी कर दिया है. केरल के सभी हेल्थ फैसिलिटी में मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया ताकि अस्पतालों की तैयारियों का जायजा लिया जा सके.  स्वास्थ्य मंत्रालय राज्य स्वास्थ्य अधिकारियों के संपर्क में है और स्थिति की निगरानी की जा रही है.  केरल के विभिन्न एंट्री प्वाइंट्स पर भी नजर रखी जा रही है. स्वास्थ्य अधिकारियों ने सभी सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में कड़ी निगरानी रखने को कहा है. केरल में बुखार के मरीजों की बढ़ रही संख्या के मद्देनजर जिन लोगों को सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, लो ब्लड प्रेशर और भोजन करने में परेशानी है उन्हें तुरंत डॉक्टर से सलाह लेने को कहा गया है. कोविड-19 के लक्षण वाले लोगों को टेस्ट करवाने की सलाह दी गई है. ऐसे लोग जिन्हें लगता है कि वे कोविड की चपेट में आसानी से आ सकते हैं उन्हें कहा गया है कि वे सार्वजनिक जगहों पर भी मास्क अवश्य लगाएं, सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे पड़ोसी राज्यों में भी स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया है और अस्पतालों को अलर्ट मोड में रखा गया है. 

 
उत्तराखंड के सभी अस्पतालों में अलर्ट- 
केरल में कोरोना का नया वैरिएंट जेएन.1 मिलने के बाद अब उत्तराखंड भी सतर्क हो गया है। संदिग्ध लक्षणों वाले व्यक्ति की जांच और निगरानी को लेकर प्रदेश सरकार ने मंगलवार को एसओपी जारी कर एहतियात के तौर पर सभी अस्पतालों को अलर्ट किया हैं। केंद्र सरकार ने केरल में कोरोना का नया मामला सामने आने के बाद सभी राज्यों को जांच और निगरानी बढ़ाने के दिशानिर्देश जारी किए हैं।

केंद्र की गाइडलाइन पर प्रदेश सरकार भी सभी जिलों को कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए दिशानिर्देश जारी कर सकती है। डॉ. पंकज सिंह ने बताया कि केरल में कोरोना का नया वैरिएंट मिला है। इसे लेकर केंद्र सरकार ने दिशानिर्देश जारी किए हैं। हालांकि प्रदेश में अभी तक कोरोना के नए वेरिएंट से संबंधित कोई मामला नहीं है। एहतियात के तौर पर जिलों को निगरानी और जांच के संबंध में पूर्व की भांति दिशानिर्देश दिए जाएंगे।

 

तमिलनाडु में भी कोविड से बचाव के सभी एहतियाती कदम उठाए जाने लगे हैं सरकार द्वारा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा गया है और अगर किसी विशिष्ट इलाके में मामलों में वृद्धि दिखाई देती है या बुखार के मामले सामने आते हैं तो सभी की RTPCR  जांच कराने के निर्देश दिए गए है. बता दें कि तमिलनाडु में भी 15 दिसंबर तक संक्रमण के 36 मामले सामने आए थे. कर्नाटक सरकार की तरफ से टेस्टिंग किट खरीदने के निर्देश भी जारी किये गए है. मॉक ड्रिल के जरिए ये पता लगाया जा रहा है कि ICU बेड, ऑक्सीजन की उपलब्धता और दवाओं सहित कितने बेड हैं. 

देश में कोरोना के एक्टिव केस की संख्या 1700 के पार- 


केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के शनिवार तक अपडेट किए गए डाटा के मुताबिक, भारत में कोविड-19 मामलों की कुल संख्या में 339 नए मामलों का इजाफा हुआ है. इस तरह देश में एक्टिव केस की संख्या 1,701 तक पहुंच गई है. मरने वालों का आंकड़ा 5 लाख 33 हजार  पर पहुंच गया है जबकि  भारत में अब तक कोरोना वायरस से 4 करोड़ 50 लाख से अधिक लोग संक्रमित हुए हैं, जिसमें से 4 करोड़ 44 लाख से ज्यादा लोग इससे रिकवर हुए हैं. निश्चित ही ये आंकड़े डराने वाले हैं.  जिस तरह से कोरोना ने फिर से देश में दस्तक दे दी है उससे सभी की चिंताए बढ़ गयी हैं. यदि कोई भी लक्षण दिखाई दें तो जांच जरूर करवाएं

राज्य सभा में विपक्ष के आधे सांसद सस्पेंड, लोकसभा में एक तिहाई, अब तक 140 सांसदों को किया जा चुका है आउट.

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संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा में विपक्ष का हंगामा देखने को मिला। सदन की कार्यवाही में बाधा डालने पर सांसदों के खिलाफ एक्शन लिया गया है। आपको बता दें कि अब तक 140 सांसदों को निलंबित कर दिया गया है। इनमें कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी, सौगत रॉय समेत 138 सदस्य शामिल हैं।
33 सांसदों को कल किया गया लोकसभा से निलंबित-
 समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी, DMK सांसद टी.आर. बालू, दयानिधि मारन और तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय सहित 33 विपक्षी सदस्यों को सोमवार को लोकसभा से निलंबित कर दिया गया है।

कई सांसदों को पूरे सत्र के लिए किया निलंबित-


बताया जा रहा है कि कई सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित किया गया है, जबकि तीन को विशेषाधिकार समिति की रिपोर्ट लंबित रहने तक निलंबित कर दिया गया है। इनमें के. जयकुमार, विजय वसंत और अब्दुल खालिक शामिल हैं।

संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने रखा था प्रस्ताव-

बता दें कि संसदीय कार्य मंत्री प्रल्हाद जोशी ने लोकसभा स्पीकर के सामने निलंबन के संबंध में एक प्रस्ताव पेश किया था, जो ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। इसके बाद सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई है।

47 सांसदों पर कल हुई थी कार्रवाई-

उल्लेखनीय है कि संसद की सुरक्षा में चूक को लेकर सदन में हंगामा करने वाले 14 सांसदों पर कार्रवाई की गई थी। 13 लोकसभा और एक राज्यसभा सांसद को सदन कार्यवाही में बाधा डालने पर निलंबित किया गया था। सोमवार को लोकसभा में 33 सांसदों पर और कार्रवाई हुई है। इनमें कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी भी शामिल हैं।

अब तक 140 सांसद निलंबित-
अब तक कुल 228 (दोनों सदनों के सदस्य) में से 140 सांसदों पर एक्शन हुआ है. दरअसल, 13 दिसंबर को लोकसभा से 33 सदस्यों को निलंबित किया गया था. उसके बाद राज्यसभा से 45 नेताओं को निलंबित कर दिया गया. पिछले गुरुवार से दोनों सदनों से निलंबित विपक्षी सांसदों की कुल संख्या 92 हो गई थी. यानी विपक्षी दलों के अब तक 94 लोकसभा से और 46 राज्य सभा से सांसद सस्पेंड हुए हैं. संसद के शीतकालीन सत्र से रिकॉर्ड 140 सांसद निलंबित किए गए हैं.

Tamil Nadu: भारी बारिश के बीच तमिलनाडु के कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात, मौसम विभाग ने जारी की चेतावनी.

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तमिलनाडु अब तक चक्रवाती तूफान मिचौंग के प्रभाव से उबर भी नहीं पाया है कि इस बीच राज्य में एक बार फिर से भीषण बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। कल देर रात और आज सुबह यहां हुई बारिश से कई इलाकों में बाढ़ के हालात पैदा हो गए हैं। खासकर कई जगहों में सड़कों से लेकर लोगों के घरों में भी पानी भरा देखा गया।

तमिलनाडु के जिन-जिन जिलों में बारिश की वजह से बाढ़ जैसे हालात हैं, उनमें तिरुनेलवेली, तूतीकोरिन, तेनकासी और कन्याकुमारी जिला शामिल है। तूतीकोरिन के तिरुचेंदुर में रात 1.30 बजे तक सिर्फ 15 घंटे के अंदर ही 60 सेंटीमीटर तक बारिश हुई है। वहीं, इस दौरान तिरुनेलवेली के पलयमकोट्टई में 26 सेमी पानी गिरा। कन्याकुमारी में इन 15 घंटों में 17.3 सेंटीमीटर बारिश हुई है।

इन जिलों में भारी बारिश की वजह से बांधों का पानी भी छोड़ा गया है, जिसकी वजह से कई इलाकों में सड़कें पूरी तरह से लबालब भर गई हैं। इससे जुड़े कई वीडियो वायरल भी हुए हैं, जिनमें घरों में पानी भरा देखा जा सकता है। इस बीच जिलाधिकारियों को बांधों से पानी छोड़ने और जनजीवन का ध्यान रखने को लेकर अलर्ट किया गया है।

मौसम विभाग ने जारी की भारी बारिश की चेतावनी-

मौसम विज्ञान विभाग ने रविवार को तमिलनाडु में बारिश से जुड़ी चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग ने कहा कि अगले सात दिनों तक तमिलनाडु के कई शहरों में भारी बारिश होने के आसार हैं। इससे पहले चक्रवाती परिसंचरण के कारण रविवार को दक्षिणी तमिलनाडु में भारी बारिश हुई। कई इलाके और घर जलमग्न हो गए। वहीं थमिराबरानी नदी उफान पर है, जिसको लेकर मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने अधिकारियों को दक्षिणी तमिलनाडु में नदी जोड़ो परियोजना के तहत ड्राई रन को चिन्हित करते हुए अतिरिक्त जल को कन्नाडियन चैनल में छोड़ने के निर्देश दिए हैं। शनिवार को चक्रवाती परिसंचरण भूमध्यरेखीय हिंद महासागर और दक्षिण श्रीलंका तट से सटे दक्षिण पश्चिम बंगाल की खाड़ी के निचले क्षोभमंडल स्तर पर था।  

 

मौसम विभाग ने जारी की चेतावनी-

दक्षिण तमिलनाडु के कई इलाकों में सोमवार को हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावनाएं है। वहीं कन्याकुमारी, तिरुनेलवेली, थूथुकुडी और तेनकासी के स्थानों में भारी बारिश के आसार है। मंगलवार को दक्षिण तमिलनाडु में कुछ स्थानों, उत्तरी तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में एक या दो स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश, एक या दो स्थानों पर गरज और बिजली गिरने की संभावना हैं। बुधवार से शनिवार तक तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में एक या दो स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना हैं। 

सरकार ने की कई स्कूलों और संस्थानों में छुट्टी-
तमिलनाडु सरकार ने भारी बारिश के कारण कई स्कूलों में अवकाश घोषित किया है. 18 दिसंबर को तिरुनेलवेली, थूथुकुडी, कन्याकुमारी और तेनकासी जिलों में सभी स्कूलों, कॉलेजों, निजी संस्थानों, बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए छुट्टी की घोषणा की गयी है।

Rishikesh: हाईवे से लगे जंगल में मिला 13 दिन से लापता युवती का जला हुआ शव, पुलिस ने प्रेमी को किया गिरफ्तार.

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करीब 13 दिनों से घर से लापता चल रही युवती का जंगल में जला हुआ शव मिला है। पुलिस ने युवती के प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया है। उस पर आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज किया गया है। ढालवाला निवासी विनीता भंडारी (21) चार दिसंबर से लापता थी।

पिता ने थाना मुनि की रेती में गुमशुदगी दर्ज कराई थी। सीसीटीवी फुटेज की जांच के दौरान विनीता चार दिसंबर को 11 बजकर आठ मिनट पर नटराज चौक के पास अकेले देहरादून की ओर जाती देखी गई थी। उसके हाथ में थैला भी था। उसके बाद करीब 11 बजकर 32 मिनट पर विनीता का मोबाइल बंद हो गया था। अंतिम लोकेशन और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस विनीता को इसी क्षेत्र में ढूंढ रही थी। 

पुलिस को नटराज चौक से करीब एक किमी आगे देहरादून रोड पर हाईवे से लगे जंगल में 200 मीटर अंदर अधजला शव मिला। उसकी शिनाख्त के बाद उसके प्रेमी मानीवाला निवासी अर्जुन रावत को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। मामले की जांच की जा रही है।

बीजेपी की तीन राज्यों में जीत के बाद यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ क्यों चर्चा में, जानिए वजह.

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उत्तर प्रदेश का ‘योगी मॉडल’ मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ को अब बूस्टर देने की तैयारी में है। योगी आदित्यनाथ के इसी मॉडल की तर्ज पर अब इन राज्यों में आगे की सियासत का पूरा ताना-बाना बुना जा रहा है। मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार ने तो बाकायदा योगी मॉडल के तर्ज पर ही फैसले लेने शुरू भी कर दिए हैं। पहला फैसला धार्मिक स्थलों पर बजाए जाने वाले लाउडस्पीकर और उससे होने वाले ध्वनि प्रदूषण पर सख्ती के साथ लिया गया है। मध्य प्रदेश में भी बुलडोजर एक्शन शुरू हो गया है तो कहीं खुले में मांस बेचने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. इसके अलावा कई और मॉडल को आगे किए जाने की योजनाएं बनाई जा रही हैं। कहा ये भी जा रहा है कि इन सभी राज्यों में कानून व्यवस्था के लिहाज से उत्तर प्रदेश सरकार में अपनाए जाने वाले सख्त मॉडल को भी आगे किया जाएगा।

भाजपा के तीन राज्यों में बनी सरकार अब अपने नए मॉडल के साथ जनता से कनेक्ट करने  के लिए तैयार हो चुकी है। राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकारें वैसे तो डबल इंजन की सरकार के बूते आगे का अपना पूरा सफर तय करने का दावा कर रही हैं, लेकिन इन सब के बीच चर्चा इस बात की भी सबसे ज्यादा हो रही है कि इसमें योगी मॉडल को भी शामिल किया जाएगा। हालांकि उसकी शुरुआत मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कर भी दी है। मध्यप्रदेश में कुछ दिनों के भीतर धार्मिक स्थलों से बजने वाले लाउडस्पीकर की संख्या कम हो जाएगी। यही नहीं मध्यप्रदेश सरकार के आदेश के मुताबिक एक लाउडस्पीकर के साथ तय मानकों में ही धार्मिक स्थलों से आवाज की जा सकेगी। राजनीतिक जानकार बृजेंद्र शुक्ला कहते हैं कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अपने राज्य में यह मॉडल सबसे पहले शुरू किया था।

मध्य प्रदेश में भी यूपी मॉडल की तैयारी-

इसके अलावा मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में धार्मिक स्थलों के तय दायरे के भीतर मांस की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की योजना बनाई है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में योगी मॉडल के भीतर भी इसी का प्रावधान है। उत्तर प्रदेश में भाजपा नेता मानते  हैं कि राज्य में योगी सरकार ने मांस की बिक्री के लिए जो कानून लागू किए हैं, वह बेहतर हैं। जैसे कि बगैर लाइसेंस और स्क्रीनिंग के कोई भी मांस की दुकान खुले में नहीं लगाई जा सकती है। मिश्रा कहते हैं कि मध्य प्रदेश की सरकार ने भी इसी आदेश को पूरे राज्य में लगाने की योजना बनाई है। शुरुआत में भोपाल में इसे लेकर सख्ती भी बढ़ाई गई और जुर्माना भी लगाया गया। वे कहते हैं कि मिशन शक्ति के माध्यम से जिस तरीके से उत्तर प्रदेश में महिलाओं को मजबूत करने की शुरुआत की गई, वह पूरे देश में आज मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है। उनका मानना है कि भाजपा शासित राज्यों में तो कम से कम इन मॉडल को अपनाया ही जाना चाहिए।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के कई ऐसे मॉडल हैं, जिसे लेकर देश के अलग-अलग राज्यों में भाजपा की सरकारें उन्हें गाहे बगाहे अपनाती ही रहती हैं। भारतीय जनता पार्टी पिछड़ा वर्ग के सचिव मनोज कनौजिया कहते हैं कि भाजपा शासित राज्यों में कानून व्यवस्था एक महत्वपूर्ण और भरोसेमंद व्यवस्था बनकर उभरी है। वे कहते हैं कि जिस तरीके से कानून की धज्जियां उड़ाने वालों पर योगी का बुलडोजर चला है इसी तर्ज पर मध्यप्रदेश में भी अब मोहन यादव का बुलडोजर गरज रहा है। उन्होंने बताया कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए उत्तर प्रदेश में जो मॉडल तैयार हुआ, उसे अलग-अलग राज्यों के साथ देश में तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके अलावा 2022 में भाजपा की यूपी में वापसी, महिला सुरक्षा और कानून व्यवस्था के नाम पर ही हुई थी। इसलिए इस मॉडल की सब जगह प्रशंसा भी हो रही है। हालांकि उनका तर्क है कि योगी और मोदी सरकार के कामकाज की योजनाओं को जनता ने पसंद किया था।

सियासी जानकार भी मानते हैं कि मोदी और योगी मॉडल भाजपा की सरकारों को और आगे ले जाने में बेहतर साबित होगा। जानकारों का मानना है  कि तीनों राज्यों में चुनावों के दौरान योगी सरकार की कानून व्यवस्था को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा सुनने को मिली थी। वह कहते हैं कि निश्चित तौर पर सभी राज्यों में अब कानून व्यवस्था के उसी मॉडल पर लागू करने की उम्मीदें तो राज्य की जनता में होगी। शर्मा कहते हैं कि जिस तरीके से खुले में मांस बेचे जाने से लेकर धार्मिक स्थलों पर ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने की व्यवस्था मध्यप्रदेश सरकार ने की है उससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि योगी मॉडल के ऐसे और भी कई महत्वपूर्ण पहलू होंगे  जिन्हें सभी राज्यों में आगे बढ़ाया जाएगा।

क्या राजस्थान भी यूपी मॉडल की तर्ज पर ?

राजस्थान में भी कई सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग मानते हैं कि राज्य में कानून व्यवस्था को लेकर योगी मॉडल को अपनाना चाहिए। उनका कहना है कि कानून व्यवस्था के लिहाज से राजस्थान में सख्त कदम उठाए जाने जरूरी है। मध्यप्रदेश में जिस तरीके से उत्तर प्रदेश की तरह खुले में मांस पर प्रतिबंध लगाया गया है, उसी तरीके से राजस्थान में भी यह शुरू किया जाना चाहिए। जबकि धार्मिक स्थलों पर आवाज नियंत्रित किए जाने की बेहद आवश्यकता है। इसी तरह कानून व्यवस्था के लिहाज से मध्यप्रदेश में भी योगी मॉडल की चर्चा शुरुआत से हो रही है। इसी तरह एमपी के नर्मदा पुरम के होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन का कहना है  कि मध्यप्रदेश में पहले से यह मांग की जा रही थी कि कानून व्यवस्था के लिहाज से योगी मॉडल को अपनाया जाना चाहिए। वह कहते हैं कि अब उम्मीद लग रही है कि उसी तर्ज पर राज्य की व्यवस्थाएं आगे बढ़ेंगी।

इन सभी से यही लगता है कि भले भाजपा मोदी के नाम पर जीत कर आयी हो लेकिन लोगों को सरकार चलाने का अंदाज योगी का अधिक पसंद है. मतलब भले ही मुख्यमंत्री मोदी ने बनाए हों लेकिन वो काम योगी स्टाइल में करने की अपनी मंशा जता चुके हैं मतलब साफ है कि योगी मॉडल का डंका सब जगह बजना शुरू हो गया है।