आगामी केदारनाथ यात्रा को लेकर प्रशासन इस बार नई गाइडलाइन लाने की कवायद में जुटा है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत केदारनाथ धाम के मंदिर परिसर में मोबाइल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जा सकता है, वहीं नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भी भारी जुर्माना लगाए जाने की संभावना है।
चमोली जिले के नारायणबगड़ ब्लॉक के ग्राम पंचायत किमोली का बारकोट तोक राज्य बनने के 25 साल बाद भी सड़क सुविधा से नहीं जुड़ पाया है। सड़क की असुविधा युवाओं के रिश्ते में रुकावट बन रही है। गांव के सात से आठ युवा कुंवारे है। रिश्ते के लिए यदि बात हो भी जाए तो सड़क असुविधा की बात किए कराए पर पानी फेर दे रही है।
ऐसे में युवाओं को सड़क और रिश्ते का इंतजार बरकरार है।बारकोट गांव में वर्तमान में 25 परिवार निवास करते है। ग्रामीण पिछले कई वर्षों से लगातार सड़क की मांग करते आ रहे हैं लेकिन ग्रामीणों को सड़क सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में ग्रामीणों को गांव से मुख्य सड़क आगर तक पहुंचने के लिए चार से पांच किमी की पैदल खड़ी चढ़ाई पार करनी पड़ती हैं।

जिला पंचायत सदस्य सुरेंद्र सिंह कनेरी ने कहा कि सड़क के मामले को जिले के सर्वाेच्च सदन में भी उठाया गया है। ग्रामीण पंचम सिंह भंडारी बताते हैं कि उनके बेटे के लिए कई रिश्ते ढूंढ़ लिए हैं लेकिन लड़की पक्ष को सड़क न होने का पता लगने पर वे शादी से इन्कार कर रहे हैं। ऐसे में सड़क के साथ-साथ बेटे की शादी का इंतजार भी करना पड़ रहा है।

गुड़गांव में नौकरी करने वाले 26 वर्षीय युवक अनिल सिंह के अनुसार पिछले दो साल से लगातार परिवार वाले रिश्ते देख रहे हैं। थराली, नौटी आदि जगह रिश्ता देखने भी गए थे। लड़की पक्ष के लोग पूछते है कि गांव से कितनी दूर है सड़क, जब उनको गांव तक सड़क न होने का पता लगता है। तो वे रिश्ता करने से मुकर जाते हैं।

27 वर्षीय राकेश सिंह दिल्ली में जॉब करते हैं। वह बताते हैं कि गौचर, कर्णप्रयाग, गैरसैंण कई जगह लड़की देखने गया हूं लेकिन हर बार सड़क न होने की वजह से रिश्ता नहीं हो पाता है। पिछले दो साल से परिवार वाले कई रिश्ते ढूंढ़ते थक गए हैं। पता नहीं कब सड़क बनेगी और कब रिश्ता होगा।

बारकोट गांव की सड़क को पीजीएजीएसवाई के चौथे चरण के लिए भेजा गया है। जिसकी स्वीकृति प्राप्त हो गई है। सड़क के लिए डीपीआर बनने के बाद आगे की कार्यवाही शुरू की जाएगी। जल्द ही अन्य सड़कों के लिए भी तेजी से काम हो रहा है। -भूपाल राम टम्टा, विधायक थराली।
केदारनाथ धाम में गर्भगृह को स्वर्ण मंडित करने के मामले में फिर से कांग्रेस व भाजपा के बीच आरोप प्रत्यारोप शुरू हो गया है। पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सोना गायब होने के मामले की गढ़वाल आयुक्त की रिपोर्ट को सिरे से खारिज किया।
बीकेटीसी के पूर्व अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने कहा, विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोपों में मैंने सरकार से स्वयं मामले की जांच कराने का आग्रह किया था। इस पर सरकार ने गढ़व़ाल आयुक्त को जांच सौंपी। केदारनाथ मंदिर के गर्भ गृह को स्वर्ण मंडित करने में बीकेटीसी कोई भूमिका नहीं है। एक दानदाता ने शासन को पत्र लिख कर गर्भग्रह को स्वर्ण मंडित करने का आग्रह किया था। एएसआई की रिपोर्ट के बाद सरकार ने इसकी अनुमति दी।कांग्रेस नेता गोदियाल आरोप लगा कर भाग गए। यदि उनके पास कोई तथ्य है तो सक्षम अथाॅरिटी के सामने शिकायत करते या न्यायालय में जाते। कहा, गोदियाल सिर्फ सनसनी फैलाने के लिए केदारनाथ धाम की छवि को धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं।
नंदानगर में नंदाकिनी और चुफला नदी के संगम पर यह प्रक्रिया पूरी की गई जहां सुबह से एक के बाद एक जलती चिताएं देखकर हर किसी की आंखें भर आईं।
नंदानगर में आई भीषण आपदा के बाद राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है। शुक्रवार को फाली लगा कुंतरी क्षेत्र से मलबे से पांच शव और बरामद हुए हैं। अब तक इस आपदा में लापता हुए 10 लोगों में से एक व्यक्ति को सुरक्षित निकाल लिया गया है जबकि सात लोगों के शव बरामद हो चुके हैं। धुर्मा गांव में अभी भी दो लोग लापता हैं जिनकी तलाश जारी है। बरामद किए गए सभी सात शव उनके परिजनों को सौंप दिए गए हैं।
आपदा में जान गंवाने वाले लोगों का शुक्रवार को नम आंखों से अंतिम संस्कार किया गया। नंदानगर में नंदाकिनी और चुफला नदी के संगम पर यह प्रक्रिया पूरी की गई जहां सुबह से एक के बाद एक जलती चिताएं देखकर हर किसी की आंखें भर आईं। पूरा क्षेत्र शोक में डूबा हुआ है।

बृहस्पतिवार को नरेंद्र सिंह और जगदंबा प्रसाद के शव बरामद हुए थे। सुबह सबसे पहले नरेंद्र सिंह का अंतिम संस्कार किया गया। जगदंबा प्रसाद के रिश्तेदार के न आने के कारण उनके शव को सुरक्षित रखा गया था। बाद में जब उनकी पत्नी भागा देवी का शव भी बरामद हो गया और रिश्तेदार पहुंचे तो दोनों पति-पत्नी का एक साथ अंतिम संस्कार किया गया। इसके बाद आपदा में मारे गए अन्य लोगों के शवों का भी संगम स्थल पर अंतिम संस्कार किया गया।

जिलाधिकारी संदीप तिवारी और पुलिस अधीक्षक सर्वेश पंवार लगातार प्रभावित परिवारों से मिल रहे हैं और उन्हें सांत्वना दे रहे हैं। उन्होंने पीड़ितों को हर संभव मदद का भरोसा दिलाया है। जिलाधिकारी ने बताया कि सेरा-धुर्मा सड़क कई जगहों से बह गई है जिसे ठीक करने का काम चल रहा है। साथ ही पैदल मार्गों को भी बहाल किया जा रहा है ताकि प्रभावितों तक राहत सामग्री जल्दी पहुंच सके। धुर्मा गांव में हेलिकॉप्टर से फूड पैकेट और राशन किट भेजे जा रहे हैं ताकि किसी भी परिवार को भोजन या जरूरी सामान की कमी न हो।

जिलाधिकारी और एसपी ने मरिया आश्रम में बनाए गए राहत शिविर का भी निरीक्षण किया। उन्होंने वहां ठहरे लोगों के लिए भोजन और अन्य सुविधाओं की जानकारी ली और उन्हें भरोसा दिलाया कि हर जरूरी सुविधा मुहैया कराई जाएगी। जिलाधिकारी ने बताया कि सभी विभाग आपसी तालमेल से काम कर रहे हैं और सड़कों को खोलने का काम तेजी से चल रहा है। इस दौरान, एसडीएम आरके पांडे, एसडीएम सोहन सिंह रांगड, पुलिस उपाधीक्षक अमित सैनी, तहसीलदार दीप्ति शिखा और अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।

शुक्रवार को इनके मिले शव

बृहस्पतिवार को बरामद शव
– नरेंद्र सिंह पुत्र कुताल सिंह (40)।
– जगदंबा प्रसाद पुत्र ख्याली राम (70)
धुर्मा में लापता दो लोग
– गुमान सिंह पुत्र चंद्र सिंह (75)
– ममता देवी पत्नी विक्रम सिंह (38)
मुख्यमंत्री पुष्कर धामी आज चमोली आपदा प्रभावित क्षेत्र नंदानगर पहुंचे। यहां वह आपदा, राहत बचाव कार्यों का स्थलीय निरीक्षण कर रहे हैं। प्रभावित क्षेत्र फाली, कुंतरी, अन्य में सीएम सर्वे करेंगे। इसके अलावा सीएम आपदा प्रभावित सभी लोगों से भी मिलेंगे।
चमत्कार! 16 घंटे बाद मलबे से जिंदा निकला व्यक्ति।
चमोली के कुन्तरी लगा फाली में रेस्क्यू टीमों का बड़ा अभियान।
एनडीआरएफ-एसडीआरएफ और स्थानीय लोगों ने मिलकर किया रेस्क्यू।
कुंवर सिंह को सुरक्षित बाहर निकाला गया, हालत स्थिर बताई जा रही।
आपदा में दबे अन्य लोगों की खोजबीन तेज, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी।
प्रशासन का दावा राहत-बचाव में कोई ढिलाई नहीं, सभी को निकालने का प्रयास।
उत्तराखंड के चमोली जिले के नंदानगर क्षेत्र में बुधवार देर रात बादल फटने से भारी तबाही मच गई। एक ही रात में तीन गांवों में घर, गौशालाएं, और ज़िंदगियां मलबे में समा गईं। अब तक 12 लोगों के लापता होने की पुष्टि हो चुकी है, जबकि करीब 30 से अधिक भवन क्षतिग्रस्त हुए हैं। रेस्क्यू टीमें मलबे में दबे लोगों की तलाश में जुटी हैं।
200 से अधिक ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। घाट तहसील के नंदानगर क्षेत्र में बुधवार देर रात बादल फटने से भारी नुकसान हुआ है। आपदा में अब तक 12 लोगों के लापता होने की सूचना है। इसमें सबसे अधिक प्रभावित ग्राम कुंतरी लगा फाली है, जहां 8 लोग लापता हैं और 15 से 20 भवन व गौशालाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं। रात तीन बजे के करीब भारी बारिश के बीच लोगों के घरों पर मलबा आ गिरा।
दो महिलाओं और एक बच्चे को मलबे से निकाला
दो महिलाओं और एक बच्चे को पुलिस व डीडीआरएफ की टीमों ने मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला। इन घायलों को नंदानगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है। करीब 200 ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। वहीं, ग्राम कुंतरी लगा सरपाणी में भी दो लोग लापता हैं और दो भवन ध्वस्त हुए हैं। यहां भी रेस्क्यू टीमों ने 100 ग्रामीणों को सुरक्षित निकाला। ग्राम धुर्मा में मोक्ष नदी उफान पर आ गई, जिससे दो लोग लापता हैं और करीब 10 मकानों को नुकसान पहुंचा है।

बचाव कार्यों में एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी (गौचर 8वीं वाहिनी), डीडीआरएफ और राजस्व विभाग की टीमें जुटी हैं। लेकिन सड़कों के जगह-जगह बंद होने और भूस्खलन के कारण टीमों को घटनास्थल पर पहुंचने में देरी हो रही है। अधिकतर टीमें अब पैदल मार्ग से मौके पर पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिव आपदा प्रबंधन से चमोली की स्थिति की जानकारी ली और निर्देश दिए कि लापता लोगों की खोज में कोई कोताही न हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है और सभी राहत शिविरों में रहने, खाने, इलाज और सुरक्षा की व्यवस्था की जाए।

घटना की सूचना मिलते ही सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी डीआईजी राजकुमार नेगी, और यूएसडीएमए के विशेषज्ञों ने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से निगरानी शुरू कर दी है। सभी बचाव टीमें सक्रिय कर मौके पर भेजी गई हैं। कंट्रोल रूम से हर गतिविधि पर निगरानी रखी जा रही है।

आपदा से पहले से कराह रहे जिले के नंदानगर प्रखंड में 17 सितम्बर की रात फिर कहर बन कर टूटी। नंदानगर में पांच लोगों के लापता होने की सूचना मिली है जबकि दो लोग घायल बताए जा रहे हैं।
आपदा परिचालन केंद्र से गुरुवार की सुबह 6 बजे से 6 बजकर 18 मिनट पर जारी प्रारंभिक सूचना के अनुसार नगर पंचायत नंदानगर के वार्ड कुन्तरि लगाफाली में भारी वर्षा के कारण मलबा आने से 06 भवन क्षतिग्रस्त हुए हैं। घटना में 05 लोगों के लापता होने की सूचना है। 02 को बचा लिया गया है।
नंदानगर तहसील के धुर्मा गांव में भी भारी वर्षा के कारण 4-5 भवनों की क्षति की सूचना प्राप्त हुई है। प्रारंभिक सूचना के अनुसार जनहानि नहीं है। मोक्ष नदी का जलस्तर बढ़ा है।
प्रशासनिक स्तर पर इन खबरों की पुष्टि के प्रयास किए जा रहे हैं।
दूसरी ओर बांजबगड़, मोख धुर्मा आदि क्षेत्रों में बादल फटने से हर तरह तबाही का खौफनाक मंजर पसरा हुआ है। पीड़ित ग्रामीणों ने जिलाधिकारी संदीप तिवारी तक किसी तरह सूचना पहुंचा कर अपने स्तर से स्थिति का आकलन कर राहत पहुंचाने की अपील की है।
प्रारंभिक खबरों में बताया गया है कि पूरे इलाके में भारी तबाही हुई है।
मोक्ष नदी के किनारे बसे सेरा गांव में सर्वाधिक नुकसान की खबर है। सेरा गांव में बीती 8 जुलाई को भी भारी तबाही हुई थी। तब से किसी तरह जीवन पटरी पर लौट रहा था लेकिन 17 सितम्बर को दोबारा आई भीषण आपदा ने सब कुछ तबाह कर दिया। सेरा के लोगों पर प्रकृति की मार के बाद यह महामार पड़ी है
लापता ग्रामीणों का विवरण

उधर, नंदानगर में बादल फटने से पांच लोगों के लापता होने की खबर है। इस आपदा में वहां दो लोगों के घायल होने की जानकारी मिली है।
शुरुआती खबरों के मुताबिक सेरा में महिपाल सिंह, अवतार सिंह, पुष्कर के आवासीय भवन खतरे की जद में हैं। खेत खलिहान को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
सेरा में सबसे पहले महिपाल सिंह का बाथरूम बहा। यह घर के कोने में बना था। उसके बाद मोक्ष नदी का जल घर में घुस गया। इस कारण घर पूरी तरह खतरे की जद में है। उसके बगल के अवतार सिंह और पुष्कर सिंह के घर भी खतरे में आ गए। रात को किसी तरह भाग कर लोगों ने जान बचाई। सेरा से ऊपर पहाड़ी पर बसे धुर्मा गांव में भी बादल फटने से की आवासीय भवन असुरक्षित हो गए हैं जबकि गांव के ही बागड़ टॉप में कई दुकानें और मकान बह गए हैं।
बताया जा रहा है कि बागड़ बस्ती के ऊपर से बादल पटने के कारण भारी मलबा आने से नदी ने रास्ता बदला से सेरा गांव में घरों को नुकसान पहुंचाया। उधर नंदानगर के कुंतरी, फफाली बांजबगड़ में भी भारी तबाही की खबर है। वहां कई घर मलबा आने से दब से गए हैं। बादल फटते ही लोग जंगलों की ओर भागे। अभी तक जनहानि के बारे में कोई जानकारी नहीं है किंतु तबाही के मंजर ने लोगों को बदहवास कर दिया है। नंदानगर की शुरुआती खबरों में बताया जा रहा है कि बलबीर सिंह, विनोद सिंह, प्रकाश सिंह, अवतार सिंह, सिबर सिंह, महिपाल सिंह बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
आपदा के बाद पूरे इलाके का संपर्क कट गया है। बादल फटने के साथ ही इलाके में बिजली आपूर्ति ठप हो गई थी। सड़कों को भी भारी नुकसान पहुंचा है, इस कारण आवाजाही भी ठप है। सेरा में सड़क पर बने पेट्रोल पंप में भी मलबा भर गया है। बिजली न होने से मोबाइल भी वहां काम नहीं कर पा रहे हैं।

प्रशासन को किसी तरह सूचना पहुंचा दी गई है किंतु प्रशासन के लिए भी इस आपदा प्रभावित क्षेत्र तक पहुंच बनाना आसान नहीं है। लोग सहमे हुए हैं और नियति को कोस रहे हैं। पीड़ितों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। हालात इस कदर बिगड़ गए हैं कि उन्हें रोने के अलावा कुछ नहीं सूझ रहा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, उत्तराखंड में रोपवे कनेक्टिविटी नए आयाम स्थापित करने के साथ ही राज्य की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। जल्द ही सोनप्रयाग से केदारनाथ और गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब रोपवे का निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
समझौते के अनुसार रोपवे के निर्माण में एनएचएलएमएल की 51 प्रतिशत व राज्य सरकार की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी। राजस्व साझेदारी में 90 प्रतिशत धनराशि पर्यटन, परिवहन व गतिशीलता के क्षेत्र में व्यय की जाएगी।मुख्यमंत्री ने कहा, यह समझौता प्रदेश की धार्मिक व सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक पटल पर नई पहचान दिलाने के साथ ही पर्यटन, रोजगार, पर्यावरण संरक्षण और बुनियादी ढांचे में नई संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पर्वतमाला परियोजना के तहत सोनप्रयाग से केदारनाथ के बीच लगभग 4100 करोड की लागत से 12.9 किलोमीटर लंबाई का रोपवे व गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब के बीच 2700 करोड़ की लागत की 12.4 किलोमीटर लंबे रोपवे का निर्माण किया जाएगा।
चारधाम ऑलवेदर रोड, दिल्ली-देहरादून एलिवेटेड रोड, सितारगंज से टनकपुर मोटर मार्ग, पौंटा साहिब-देहरादून, बनबसा से कंचनपुर, भानियावाला से ऋषिकेश, काठगोदाम से लालकुंआ, हल्द्वानी बाईपास और सीमांत क्षेत्रों में रोड कनेक्टिविटी विस्तार किया जा रहा है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य में हर क्षेत्र में तेजी से विकास कार्य हो रहे हैं। इन रोपवे के निर्माण के बाद श्रद्धालुओं को केदारनाथ व हेमकुंड साहिब के दर्शन करने में काफी सुगमता होगी। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा, यह समझौता राज्य में पर्यटन के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। रोपवे के निर्माण के बाद स्थानीय स्तर पर लोगों की आर्थिकी व रोजगार में वृद्धि होगी।
चमोली जनपद में पिछले तीन साल में भूधंसाव की घटनाएं बढ़ी हैं। सबसे पहले कर्णप्रयाग के बहुगुणा नगर में भूधंसाव की घटना सामने आई। यह क्षेत्र घाटी में होने के बावजूद भूधंसाव हो रहा है। उसके बाद ज्योतिर्मठ के भूधंसाव ने सबको विचलित कर दिया था। यहां सैकड़ों मकान और होटल भूधंसाव की जद में आ गए थे।

अब नंदानगर के भूधंसाव ने फिर से लोगों को चिंता में डाल दिया है। ज्योतिर्मठ की तरह ही नंदानगर में भी जमीन से पानी का रिसाव हो रहा है। यहां कई घरों से पानी निकलने के बाद लोगों ने मकान छोड़ दिए हैं। भूधंसाव भी लगातार बढ़ रहा है। चमोली जनपद आपदा की दृष्टि से अति संवेदनशील है। यहां बादल फटना, भूस्खलन, भूधंसाव, अतिवृष्टि की आपदाएं चमोलीवासी कई वर्षों से झेल रहे हैं।

पिछले तीन वर्षों में भूधंसाव जैसी आपदा का नया पैटर्न देखने को मिल रहा है। नंदानगर के व्यापार संघ अध्यक्ष नंदन सिंह और कथावाचक शंभू प्रसाद पांडे का कहना है कि भूधंसाव का व्यापार रुप से वैज्ञानिक सर्वे होना चाहिए। नंदानगर क्षेत्र आपदा की दृष्टि से संवेदनशील है। यहां का वैज्ञानिक सर्वेक्षण के बाद यहां की बसावट के लिए योजना तैयार होनी चाहिए।

नंदानगर में हो रहे भूधंसाव से प्रवासी लोग भी चिंतित हैं। वे लगातार अपने परिजनों, रिश्तेदारों और दोस्तों को फोन कर वहां की स्थिति के बारे में जानकारी ले रहे हैं। जो लोग नंदानगर में हैं, वे भी प्रभावित क्षेत्र को देखकर चिंतित हैं। रविवार को बैंड बाजार के अलावा संपूर्ण नंदानगर बाजार बंद रहा। नगर के व्यापारियों ने भी प्रभावितों की दुकानों को खाली करवाने में मदद की।















