Category Archive : चमोली

चमोली में नाबालिग से छेड़छाड़ का मामला, नंदानगर में धारा 163 लागू, गोपेश्वर में रैली, 500 लोगों पर हुआ मुकदमा दर्ज।

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उत्तराखंड के चमोली में दूसरे समुदाय के युवक द्वारा नाबालिग से छेड़छाड़ का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। आज नंदानगर बाजार क्षेत्र के 200 मीटर की परिधि में प्रशासन ने धारा 163 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023) लागू कर दी है।

 

साथ ही एक विवादित स्थल पर तोड़फोड़ करने पर 200 अज्ञात लोगों के खिलाफ नंदानगर पुलिस थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जबकि सोमवार को 300 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए थे। अभी तक 500 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए हैं।

 

उधर, गोपेश्वर में रैली निकाली गई। रामलीला मैदान से मंदिर मार्ग होते हुए रैली बस अड्ड पहुंची। यहां  हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। मामला बढ़ता देख यहां भारी पुलिस फोर्स तैनात तैनात की गई है। एसपी सर्वेश पंवार भी मौके पर पहुंचे हैं। लोगों ने डीएम से एक सप्ताह में सभी बाहरी लोगों का सत्यापन करने और आपराधिक परवर्ती वाले लोगों को बाहर करने की मांग।
लोगों ने आज भी नंदानगर में चक्काजाम  किया है। साथ ही बाजार पूर्ण रूप से बंद किया है। पुलिस की ओर से भी लाउडस्पीकर से लोगों को धारा 163 के तहत कहीं भी समूह में खड़े नहीं होने की हिदायत दी जा रही है।
जगह-जगह पर पुलिस के जवान तैनात किए गए हैं। पुलिस अधीक्षक सर्वेश पंवार सहित जनपद के अन्य पुलिस अधिकारी नंदानगर में कैंप लगाए हैं। हालांकि पुलिस ने पुलिस ने आरोपी आरिफ खान (26) निवासी ग्राम सोफतपुर थाना नांगल जिला बिजनौर को रविवार रात को बिजनौर से गिरफ्तार कर लिया है। लेकिन लोग आरोपी युवक के सहयोगी साहिद, अहमद हसन और अयूब की गिरफ्तारी की मांग उठा रहे हैं।
बता दें कि नंदानगर में सैलून चलाने वाले युवक आरिफ ने क्षेत्र की एक नाबालिग को अश्लील इशारे किए थे। इसकी जानकारी लगने पर रविवार को नंदानगर में खूब बवाल हुआ था। गुस्साई भीड़ ने आरोपी समेत विशेष समुदाय के लोगों की सात दुकानों में तोड़फोड़ कर पूरे दिन बाजार बंद रहा।
सोमवार को भी नंदानगर बाजार बंद रहा और वाहनों का भी चक्का जाम किया गया। बारिश के बावजूद गांवों से महिलाएं व पुरुष नंदानगर पहुंचे और धरना प्रदर्शन किया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नगर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

Kedarnath Rescue: पांचवें दिन भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, सेना ने संभाला मोर्चा; चिनूक से यात्रियों को किया जा रहा एयरलिफ्ट।

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केदारनाथ धाम व पैदल मार्ग से अब तक दस हजार से अधिक तीर्थयात्रियों व स्थानीय लोगों का रेस्क्यू किया जा चुका है। सोमवार को केदार घाटी का मौसम साफ होने के साथ ही एमआई 17 और चिनूक से एयर लिफ्ट रेस्क्यू का कार्य शुरू हो गया है। एमआई चारधाम हेलीपैड पर यात्रियों को उतार रहा है। जबकि चिनूक गौचर हवाई पट्टी पर यात्रियों को उतरेगा। सुबह 9 बजे तक 133 लोगों को केदारनाथ से एमआई एवं चिनूक एवं छोटे हेलिकॉप्टर की मदद से सुरक्षित एयर लिफ्ट कर रेस्क्यू किए जा चुके हैं।

31 जुलाई को हुई अतिवृष्टि से केदारनाथ मार्ग को भारी नुकसान पहुंचा है। गौरीकुंड से केदारनाथ मंदिर तक 16 किमी का मार्ग है, इसमें 10 जगह मार्ग पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। लोक निर्माण विभाग की टीम मार्ग को खोलने में जुटी है। लोनिवि की रिपोर्ट के अनुसार जो स्थितियां हैं उनमें मार्ग को पूर्व की दशा में लाने में करीब एक महीने का समय लग सकता है।

वहीं, सेना ने मोर्चा संभालते हुए मंदाकिनी नदी पर अस्थायी ट्राली स्थापित कर दी है। साथ ही वैकल्पिक पुल का निर्माण भी शुरू कर दिया है। गौरीकुंड में घोड़ा पड़ाव के पास लगभग 15 मीटर लंबाई में रास्ता पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। यहां पर लो.नि.वि श्रमिक वैकल्पिक मार्ग स्थापित करने में जुटे हैं।

सोमवार सुबह 100 लोगों को सुरक्षा बलों की देखरेख में श्री केदारनाथ धाम से लिनचोली हेलीपैड के लिए रवाना कर दिया गया है। इन यात्रियों को लिनचोली से एयर लिफ्ट कर शेरसी हैलीपैड पर उतारा जाएगा। इसके अलावा एनडीआरएफ की टीमें जंगल एव मंदाकिनी नदी के आसपास भी लगातार सर्च अभियान चला रहे हैं।

रविवार को लगभग 1100 लोगों का सफलता पूर्वक रेस्क्यू किया गया। वहीं सेना ने भी अब कमान संभाल ली है। पैदल मार्ग पर आम लोगों को खोजने के लिए स्निफर डाँग भेजे गए हैं, सेना क्षतिग्रस्त् पैदल मार्ग को आवाजाही के लिए खोजे जाने में भी मदद करेगी।

वहीं गौरीकुंड व सोनप्रयाग के बीच वाशआउट हुए हाइवे कपर ट्राली लाकर बुजर्ग व घायलों को निकालने का कार्य भी सेना ने शुरू कर दिया है। रेस्क्यू आपरेशन के चौथे दिन रविवार को कुल 1155 का रेस्क्यू किया गया, जिसमें हेलीकाप्टर से 628 व पैदल मार्ग से 527 लोगों को रेस्क्यू किया गया।

हेली से लिनचोली, चीरबासा व केदारनाथ से रेस्क्यू किया गया, वहीं चौमास पैदल मार्ग से भी रविवार को 210 लोगों को रेस्क्यू किया गया। केदारनाथ पैदल मार्ग में फंसे यात्रियों का रेस्क्यू भी जारी है। सोनप्रयाग में मैन्युल रेस्क्यू के लिए अब सेना, डीडीआरएफ, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस के जवानों संयुक्त रूप से कार्य कर रहे हैं।

रविवार को चलने में असमर्थ लोगों के 25 बुजर्ग व घायलों का रेस्क्यू किया गया। वहीं स्निफर डाँग की टीम भी भेजी गई है, जो जंगल में भटक गए लोगों की खोजबीन करेगी, साथ ही भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में भी सर्च अभियान करेगी।

 

 

 

 

Election: चुनाव प्रचार को धार देने पहुंचे राजनाथ सिंह, जानिये गौचर में जनसभा के दौरान क्या बोले रक्षा मंत्री।

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Uttarakhand: जोशीमठ पुनर्वास को लेकर इन अहम बिंदुओं पर बनी सहमति, मुख्य सचिव ने दिया कार्रवाई का भरोसा।

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Kedarnath Dham: 10 मई को खुलेंगे केदारनाथ धाम के कपाट, महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर घोषित हुई तिथि।

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महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर आज शुक्रवार को पंचकेदार गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर में केदारनाथ धाम के कपाट खोलने की तिथि पंचांग गणना से तय कर घोषित की गई। 10 मई को बाबा केदार के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे।

बाबा केदार के कपाट खुलने की तिथि तय होने के साथ ही बाबा केदार की पंचमुखी भोग मूर्ति के चल उत्सव विग्रह डोली में विराजमान होकर शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर से अपने धाम के लिए प्रस्थान का दिन भी तय हुआ।

बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के मीडिया प्रभारी डां. हरीश चंद्र गौड़ ने बताया, आठ मार्च को महाशिवरात्रि पर्व पर ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में सुबह नौ बजे से धार्मिक अनुष्ठान शुरू हुए।

बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष अजेंद्र अजय की मौजूदगी में केदारनाथ के रावल भीमाशंकर के मार्गदर्शन में केदारनाथ धाम के कपाट खोलने की तिथि घोषित की।

उत्तराखंड में बिजली दरों में बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर 19 फरवरी से होगी जनसुनवाई, 1 अप्रैल से लागू होंगी बिजली की नई दरें।

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उत्तराखंड प्रदेश में बिजली दरों में बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर अब उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग यानी UPCL 19 फरवरी से जनसुनवाई शुरू करने जा रहा है। गढ़वाल मंडल में दो और कुमाऊं मंडल में दो शहरों में सुनवाई के बाद आयोग अपना निर्णय लेगा और जल्द ही नई विद्युत दरें 1 अप्रैल से लागू हो जाएंगी।

आयोग सचिव नीरज सती ने बताया कि देहरादून के अलावा अल्मोड़ा, टिहरी गढ़वाल और रुद्रपुर में जनसुनवाई होगी। इसमें कोई भी उपभोक्ता शामिल होकर अपना पक्ष रख सकता है। हितधारकों को भी यहां सुनवाई का मौका दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि जनसुनवाई के बाद आयोग बैठक करेगा और विद्युत दरों पर अपना अंतिम निर्णय लेगा।

कहां और कब होगी जनसुनवाई-

19 फरवरी की सुबह 10:30 से दोपहर एक बजे तक – सभागार, नगर पालिका, माल रोड, अल्मोड़ा

20 फरवरी को , सुबह 10 से दोपहर 1 बजे तक – सभागार, विकास भवन, नैनीताल रोड, रुद्रपुर, ऊधमसिंह नगर

24 फरवरी को , सुबह 11 से दोपहर 1:30 बजे तक – सभागार, जिला पंचायत परिसर, बौराड़ी, नई टिहरी

26 फरवरी को , सुबह 10:30 से दोपहर 1:30 बजे तक- सुनवाई कक्ष, विद्युत नियामक आयोग, निकट आईएसबीटी, माजरा, देहरादून में होगी

तीनों ऊर्जा निगमों से है 30 फीसदी बढ़ोतरी का प्रस्ताव-

प्रदेश के तीनों ऊर्जा निगमों ने नियामक आयोग को अगले वित्तीय वर्ष के लिए जो याचिका भेजी हैं, उसके हिसाब से बिजली उपभोक्ताओं पर 30 प्रतिशत तक बोझ बढ़ सकता है। यूपीसीएल ने विद्युत दरों में 23 से 27 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है। यूजेवीएनएल ने पिछले साल के मुकाबले अपने टैरिफ (जिस दर पर वह यूपीसीएल को बिजली देता है) में करीब 23 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है।

इस प्रस्ताव के हिसाब से यूपीसीएल के टैरिफ पर 1.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो जाएगी। यानी इसे जोड़कर यूपीसीएल के टैरिफ में 24.5 से 28.5 प्रतिशत बढ़ोतरी हो जाएगी। पिटकुल ने ट्रांसमिशन चार्जेज और अन्य रखरखाव के मद्देनजर पिछले साल के मुकाबले इस साल करीब 48 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है। अगर आयोग इस प्रस्ताव को मानता है तो यूपीसीएल के टैरिफ में इससे करीब 1.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो जाएगी। यानी तीनों निगमों का कुल मिलाकर प्रस्ताव 26 से 30 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा। इस प्रस्ताव पर ही नियामक आयोग को इस बार निर्णय लेना होगा।

Badrinath Dham: 12 मई को खुलेंगे बद्रीनाथ धाम के कपाट, बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर घोषित की गई तिथि

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बदरीनाथ धाम के कपाट 12 मई को ब्रह्ममुहुर्त में सुबह 6 बजे खुलेंगे। आज बसंत पंचमी के अवसर पर नरेंद्रनगर (टिहरी) स्थित राजदरबार में कपाट खुलने की तिथि घोषित की गई।

बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि तय करने की प्रक्रिया के लिए गाडूघड़ा (तेल-कलश) श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर डिम्मर से मंगलवार शाम श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के चंद्रभागा स्थित विश्राम गृह पहुंच गया था। जहां श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति सहित श्रद्धालुओं ने तेल-कलश का स्वागत किया।

बीकेटीसी के अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने बताया कि श्री डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत की ओर से गाडूघड़ा राजमहल को सौंपा गया। इसके बाद राजमहल से गाडूघड़ा में तिल का तेल पिरोया गया।

श्री बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने से पूर्व तिल का तेल पिरोने के बाद गाडूघड़ा नरेंद्रनगर राजदरबार से डिम्मर होते हुए श्री नृसिंह मंदिर, योग बदरी पांडुकेश्वर से श्री बदरीनाथ धाम पहुंचाया जाएगा। कपाट खुलने के बाद यह तेल-कलश भगवान बदरी विशाल के नित्य अभिषेक के लिए प्रयोग में लाया जाएगा।

जोशीमठ के बाद अब नैनीताल शहर पर मंडराया खतरा, जानिए क्यों जोशीमठ बनने की राह पर है नैनीताल।

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जोशीमठ भू-धंसाव के बाद खतरे की जद में नजर आ रहे नैनीताल शहर को बचाने और भविष्य की निर्माण योजनाओं को तैयार करने के लिए इसका भू-तकनीकी एवं भू-भौतिकीय सर्वेक्षण होगा। इसके अलावा नैनीताल में स्लोप स्थायित्व का भी सर्वेक्षण होगा। इसके लिए भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही शहर का लाइडर मैप भी तैयार किया जाएगा।

 

दरअसल, जोशीमठ भू-धंसाव के बाद सरकार ने तय किया था कि सभी पर्वतीय शहरों की धारण क्षमता का आकलन कराया जाएगा। इस कड़ी में पहले चरण में 15 शहरों का चयन किया गया था। सबसे पहले नैनीताल की धारण क्षमता के आकलन के साथ ही इसे भू-धंसाव से बचाने के लिए सर्वेक्षण होगा। इसके तहत नैनीताल का लाइडर (लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग) मैप तैयार किया जाएगा। इस तकनीक का उपयोग उच्च-रिजॉल्यूशन वाले मानचित्र बनाने में किया जाता है।

यहां पैदा हो रहा है खतरा-

नैनीताल की बुनियाद समझा जाने वाला बलिया नाला लगातार भू-स्खलन की जद में आ रहा है, इसका ट्रीटमेंट भी शुरू किया गया है। वहीं, नैनीताल का शीर्ष नैना पीक, भुजा टिफ्फन टॉप व स्नो व्यू की रमणीक पहाड़ी में भूस्खलन सक्रिय है।

यह होगा फायदा-

भू-सर्वेक्षण के बाद लाइडर मैप बनने से यह स्पष्ट हो सकेगा कि शहर में कितनी ऊंचाई तक के भवन सुरक्षित हैं। पहले से जो भवन बने हुए हैं, उनका शहर पर कितना बोझ है। कितने ढलान पर कितनी मंजिल के ऐसे भवन हैं, जो आपदा के लिहाज से खतरे में हैं। कितने डिग्री ढलान पर कितनी मंजिल के भवन बनाए जाने चाहिए। पर्वतीय शहरों में वह कौन सी भूमि व स्थान हैं, जहां भवन बनाना खतरनाक हो सकता है। भविष्य में नए निर्माण से लेकर सीवर, पेयजल तक का पूरा काम उसी मैप के हिसाब से होगा। इसके लिए मास्टर प्लान भी उसी के अनुसार बनाया जाएगा।

पहले चरण में इन 15 शहरों का होगा अध्ययन-

गोपेश्वर, पौड़ी, श्रीनगर, कर्णप्रयाग, नई टिहरी, उत्तरकाशी, लैंसडौन, रानीखेत, नैनीताल, कपकोट, धारचूला, चंपावत, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, भवाली।

हमने नैनीताल के भू-सर्वेक्षण व लाइडर मैपिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए जल्द एजेंसी का चयन कर लिया जाएगा। इसके बाद बाकी अन्य शहरों के लिए भी यह प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
-डॉ. रंजीत सिन्हा, सचिव, आपदा प्रबंधन 

 

Uttarakhand: जानिए उत्तराखंड के इन 4 गांवों में अचानक क्यों लगा लॉकडाउन।

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क्यों एक 100 साल की बुजुर्ग महिला कड़ाके की ठंड में 15 दिनों से दे रही है धरना, जानिए क्या है इसकी वजह.

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उत्तराखंड में विकास किस तेजी के साथ हो रहा है कि प्रदेश बनने के इतने साल बाद भी लोगों को बुनियादी सुविधाओं के लिए आंदोलन करना पड़ता है सरकार के लिए शर्म की बात तो तब हो जाती है जब  बुनियादी जरूरत के लिए 100 साल की बुजुर्ग महिला को धरने पर बैठना पड़े।

एक तरफ सरकार 2024 की चुनाव की तैयारी में लगी हुई है तो वहीं दूसरी तरफ आजादी के 73 वर्षों बाद भी 100 वर्ष की बुजुर्ग महिला सड़क मार्ग की लड़ाई लड़ रही है।सड़क न होने के कारण ग्रामीणों को परेशानी हो रही है और अब ये ग्रामीण चुनाव बहिष्कार का ऐलान कर पिछले 15 दिनों से धरने पर है. आजादी के 73 साल बाद भी दूरस्थ सीमावर्ती गांव सड़क मार्ग से अछूते हैं ग्रामीण 25 से 50 किलोमीटर प्रतिदिन पैदल चलने के लिए मजबूर हैं आलम यह है कि लगभग 10 साल पहले स्वीकृत हो चुका सड़क मार्ग अब तक बनकर तैयार नहीं हो सका है।

सड़क मार्ग की मांग को लेकर जोशीमठ के  सेंजी डुमक के ग्रामीण लगभग पिछले 15 दिनों से आंदोलन कर रहे है इन लोगों ने चुनाव बहिष्कार की भी चेतावनी दी है आंदोलनकारियों में 100 साल की बुजुर्ग महिला बच्ची देवी भी शामिल हैं, जो लगातार 15 दिनों से कड़कड़ाती सर्दी के बीच इस उम्मीद में धरने पर बैठी हैं कि उनकी गुहार शासन स्तर तक पहुंचेगी और उनके जीते जी गांव सड़क मार्ग से जुड़ सकेगा लेकिन सरकार शायद 2024 चुनाव की तैयारी में इतना व्यस्त है कि उसको इन ग्रामीणों की सुध लेने का भी समय नहीं है।

ग्रामीणों और अपने बड़े बुजुर्गों की परेशानी को देख विद्यालय में पढ़ने वाले छोटे-छोटे बच्चों को भी तरस आ गया लेकिन सरकार को नहीं छोटे स्कूली बच्चों  ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी है इसमें बच्चों ने लिखा है कि उनके गांव को सड़क मार्ग से जोड़ा जाए गांव में सड़क न होने के कारण उन्हें प्रतिदिन 25 से 50 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता है विद्यालय बहुत दूर है और बर्फबारी और बरसात के दिनों में यहां पहुंचना कठिन होता है।

 इस आंदोलन में 100 साल की बच्ची देवी ही नहीं बल्कि 5 और 7 साल के  कई छोटे बच्चे भी शामिल हैं सिर्फ 100 साल की महिला ही नहीं इस आंदोलन में  90 साल के बुजुर्ग  भी कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं जिस उम्र में पीठ पर स्कूल  बैग  और हाथों में कलम थामना था उस उम्र में नैनिहाल हाथ में माइक और पीठ पर इस आंदोलन को ढो रहे हैं और हमारी सरकार सिर्फ नारों में ही विकास समझ रही है। एक ओर देश के सीमांत गांवों को विकसित करने के लिए केंद्र सरकार ने वाइब्रेंट विलेज योजना चला रही है जिसमें   उत्तराखंड के तीन जिलों के 51 गांवों को भी शामिल किया है लेकिन ये गांव आज भी भगवान भरोसे चल रहे हैं।