Category Archive : देहरादून

आनन्द वर्धन उत्तराखंड के नये मुख्य सचिव बने

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वरिष्ठ आईएएस आनन्द वर्धन उत्तराखण्ड के नये मुख्य सचिव होंगे। 1992 बैच के आईएएस वर्द्धन मौजूदा मुख्य सचिव राधा रतूड़ी की जगह लेंगे।

 

प्रदेश के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी आनंद बर्द्धन को उत्तराखंड का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है। राज्य सरकार ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। आनंद बर्द्धन एक अप्रैल को पदभार ग्रहण करेंगे।राधा रतूड़ी का सेवा विस्तार 31 मार्च को समाप्त हो रहा है। आईएएस आनन्द वर्द्धन ही राज्य में सबसे वरिष्ठ नौकरशाह हैं।

Uttarakhand: ‘चारधाम यात्रा की परंपराओं को मानना होगा, रील पर रोक’, लिव इन सहित इन मुद्दों पर CM धामी का बड़ा बयान.

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राज्य में लागू समान नागरिक संहिता के तहत लिव इन रिलेशनशिप के विरोध पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उनकी सरकार इस पर पीछे नहीं हटेगी। अलबत्ता जो भी सुझाव आएंगे, उनका स्वागत करेंगे। मुख्यमंत्री नई दिल्ली में एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में बोल रहे थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2022 के चुनाव में हमने प्रदेश की जनता को वचन दिया था कि भाजपा की सरकार बनेगी तो राज्य में समान नागरिक संहिता कानून लागू करेंगे। हमने अपना वचन पूरा किया। लिव इन रिलेशनशिप के विरोध पर उन्होंने कहा कि बेशक यह हमारी संस्कृति का हिस्सा नहीं है। लेकिन उच्चतम न्यायालय में यह विषय कई बार आया है।

हम लोकतांत्रिक मान्यताओं को मानने वाले लोग हैं। लिव इन रिलेशनशिप पर यदि कोई सुझाव आएगा तो उसका स्वागत करेंगे। लेकिन सरकार इस पर अब पीछे नहीं हटेगी।चारधाम यात्रा के दौरान रील कल्चर पर रोक से जुड़े प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने कहा कि तीर्थांटन और पर्यटन के फर्क को समझना होगा।
बैकफुट में नहीं जाएंगे: धामी

चारधाम यात्रा विशुद्ध रूप से यात्रा होनी चाहिए। हमारे पूर्वजों के समय से यात्रा के नियम बने हैं। ये यात्रा धर्म के लिए है। पुराने रील चलाने से देश और दुनिया में गलत संदेश जाता है। सीएम ने कहा कि 2013 की आपदा के बाद केदारनाथ में पीएम मोदी के नेतृत्व व मार्गदर्शन में पुनर्निर्माण कार्य हुए।

केदारनाथ को भव्य और दिव्य बनाने के लिए इकोलॉजी का पूरा ध्यान रखा गया। इकोलॉजी और इकॉनमी में संतुलन हमारी सरकार के विकास का मॉडल है। धामों की अपनी एक धारण क्षमता है। इसलिए हम भीड़ के दबाव को नियंत्रित करने के लिए आसपास के क्षेत्रों में नए स्थान विकसित कर रहे हैं। इन रिलेशनशिप का अब रिकॉर्ड है। कोई चेंज नहीं होगा। बैकफुट में नहीं जाएंगे। सुझावों को शामिल करेंगे।

 

 

आपदाएं राज्य के सामने सबसे बड़ी चुनौती- धामी

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड राज्य के सामने सबसे बड़ी चुनौती आपदाएं हैं। यहां बादल फटने, भूस्खलन, हिमस्खलन की घटनाएं अकसर होती हैं। सिलक्यारा टनल हादसे पर उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के मार्गदर्शन, संवेदनशीलता और सहयोग से यह ऑपरेशन सफल रहा। आज वैज्ञानिक इस पर शोध कर रहे हैं।

 

 

हम कानून पर चलने वाले, इसलिए विरोध नहीं होता- धामी

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश और दुनिया के लोग देवभूमि को आस्था व श्रद्धा से देखते हैं। इसलिए राज्य में अतिक्रमण किसी भी कीमत पर सही नहीं है। अतिक्रमण हटाने का अभियान रुकने वाला नहीं है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अवैध मदरसों और मजारों के खिलाफ छेड़े गए अभियान का इसलिए विरोध नहीं होता क्योंकि हम कानून पर चलने वाले लोग हैं। राज्य में हर कार्रवाई और अभियान कानून के तहत हो रहे हैं। अनेक स्थानों में सरकारी भूमि पर अवैध मजारें बनीं थीं। इस लैंड जिहाद के खिलाफ हमने अभियान चलाया। करीब 6000 एकड़ सरकारी जमीन अतिक्रमण से मुक्त कराई गई। राज्य में मदरसों में पढ़ने वालों की पहचान छुपाई जा रही थी। जहां भी मदरसे अवैध पाए गए, उन्हें सील किया गया। हमारा मानना है कि देवभूमि की पवित्रता बनीं रहनी चाहिए।

 

वक्फ कानून भी राज्य में लागू कराएंगे-

मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण और डेमोग्राफी में बदलाव रोकने के लिए हमने सत्यापन अभियान चलाया। यूसीसी लागू किया। लैंड जिहाद रोकने के लिए अतिक्रमण हटाए। जबरन धर्मांतरण रोकने के लिए सख्त कानून बनाया। उत्तराखंड में वक्फ कानून भी लागू कराएंगे।

 

पीएम मोदी आधुनिक भारत के शिल्पकार- धामी

प्रधानमंत्री के साथ काम करने के अनुभव को भी सीएम धामी ने साझा किय। उन्होंने पीएम को आधुनिक भारत का शिल्पकार बताया। उन्होंने पीएम के साथ अपनी पहली मुलाकात के अनुभव को भी साझा किया। उन्होंने कहा कि पीएम हर छोटी चीज पर ध्यान देते हैं। सामान्य व्यक्ति की चिंता करते हैं।

उत्तराखंड में मदरसों की मान्यता प्रक्रिया में हुआ बड़ा बदलाव, अब लेनी होगी इनकी इजाजत.

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उत्तराखंड में संचालित अवैध मदरसों पर सख्त रुख अपनाने के बाद सरकार अब मदरसों को मान्यता देने की व्यवस्था में बदलाव करने जा रही है। मान्यता के लिए जिलाधिकारी की अनुमति जरूरी होगी। इसके साथ ही कुछ नए प्रविधान भी किए जाएंगे। 

उत्तराखंड मदरसा शिक्षा परिषद की ओर से इस सिलसिले में भेजे गए प्रस्ताव पर शासन मंथन में जुटा है। इसे वित्त, न्याय व कार्मिक विभाग को भेजा गया है।
मदरसा शिक्षा परिषद के अंतर्गत राज्य में लगभग 450 मदरसे पंजीकृत हैं, जो अपने सभी दस्तावेजों के साथ ही आय-व्यय का ब्योरा शासन को देते हैं।  यही नहीं, राज्य में 500 से अधिक मदरसे बिना किसी मान्यता के चल रहे हैं। इन अवैध मदरसों पर पिछले एक माह से कार्रवाई चल रही है और अभी तक 159 मदरसे सील किए जा चुके हैं। यही नहीं, सरकार ने अवैध मदरसों को मिलने वाली फंडिंग की जांच के आदेश भी दिए हैं। 

इसी क्रम में अब मदरसों को मान्यता देने की व्यवस्था को सख्त किया जा रहा है। इसके लिए नियमावली में बदलाव किया जाएगा। मदरसा शिक्षा परिषद की ओर से इसका प्रस्ताव भी शासन को भेजा गया है। इसमें मदरसों की मान्यता के लिए जिला प्रशासन की भूमिका तय करने पर जोर दिया गया है।

जिला प्रशासन की भूमिका तय करने पर बल

प्रस्ताव किया गया है कि मान्यता से संबंधित प्रत्येक आवेदन की डीएम की अध्यक्षता में गठित कमेटी सभी पहलुओं से जांच पड़ताल करेगी। फिर डीएम की संस्तुति के बाद आवेदन को मदरसा शिक्षा परिषद को भेजा जाएगा। 

अभी तक जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के माध्यम से प्राप्त होने वाले आवेदन मदरसा शिक्षा परिषद को भेजे जाने की व्यवस्था है। इसके अलावा मदरसों की मान्यता के नवीनीकरण में भी जिला प्रशासन की भूमिका तय करने पर बल दिया गया है।

Uttarakhand: त्रिस्तरीय पंचायतों में अब नहीं बढ़ेगा प्रशासकों का कार्यकाल, 2 महीने के अंदर होंगे चुनाव.

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प्रदेश की त्रिस्तरीय पंचायतों में प्रशासकों का अब कार्यकाल नहीं बढ़ेगा। सहकारिता सचिव चंद्रेश कुमार के मुताबिक विभाग चुनाव के लिए पूरी तरह से तैयार है। राज्य निर्वाचन आयोग से भी वार्ता हुई है, हालांकि अभी तिथि तय नहीं हुई, लेकिन अगले महीने के भीतर पंचायतों के चुनाव करा लिए जाएंगे।

राज्य में करीब 7832 ग्राम पंचायतें और 3162 क्षेत्र एवं 385 जिला पंचायतें हैं। जिनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद शासन ने ग्राम पंचायतों, क्षेत्र पंचायत प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष के पद पर प्रशासन नियुक्त किए थे। निवर्तमान पंचायत प्रतिनिधियों को ही पंचायतों में प्रशासक नियुक्त किया गया था। छह महीने के लिए नियुक्त प्रशासकों में जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल एक जून को और ग्राम प्रधानों का 10 जून को खत्म हो रहा है।

विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पंचायतों के परिसीमन के बाद चुनाव के लिए आरक्षण और अन्य सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। जल्द ही चुनाव को लेकर अधिसूचना जारी की जा सकती है। हरिद्वार को छोड़कर अन्य सभी जिलों में पंचायत चुनाव कराए जाएंगे।

यह बनी है दुविधा-

प्रदेश में अगले दो महीने के भीतर यदि पंचायत के चुनाव नहीं हुए तो बरसात में चुनाव करा पाना संभव नहीं होगा। यदि वजह है कि पंचायतों में प्रशासकों का कार्यकाल नहीं बढ़ाया जाएगा।

Uttarakhand: 6 पत्रकारों को मिलेगी 30 लाख की आर्थिक सहायता, पत्रकार कल्याण कोष समिति ने की सिफारिश.

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पत्रकार कल्याण कोष समिति ने छह पत्रकारों को 30 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की सिफारिश की है। इस सिफारिश पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जो समिति के अध्यक्ष भी हैं, अनुमोदन करेंगे। पत्रकार कल्याण कोष के लिए समिति के सामने 11 प्रकरण विचार के लिए आए थे।

आर्थिक सहायता वाले प्रकरणों में एक प्रकरण पिछले माह दिवंगत हुए पत्रकार मंजुल सिंह माजिला के परिवार को भी आर्थिक सहायता की सिफारिश की गई है। सोमवार को सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी की अध्यक्षता में हुई समिति की बैठक में शेष पांच प्रकरणों में अभिलेख अपूर्ण पाए गए।

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डीजी सूचना ने निर्देश दिए कि शेष रह गए प्रकरणों में एक मौका और देते हुए जिला सूचना अधिकारी आवेदन से संबंधित दस्तावेज पूरे कराएं। मुख्यमंत्री पत्रकार सम्मान पेंशन योजना के लिए समिति की बैठक हुई। बैठक में एक प्रकरण को समिति के समक्ष रखा गया।

आवश्यक अभिलेख न होने के कारण प्रकरण के मामले में निर्णय नहीं लिया गया। बैठक में पत्रकार कल्याण कोष समिति के गैर सरकारी सदस्य पत्रकार प्रतिनिधि बीडी शर्मा, डॉ. डीडी मित्तल, निशा रस्तोगी, दिनेश जोशी सहित सूचना विभाग के अपर निदेशक, आशिष कुमार त्रिपाठी तथा संयुक्त निदेशक केएस चौहान उपस्थित थे।

Uttarakhand News: सीएम धामी बोले- सतत विकास लक्ष्यों को 2030 तक प्राप्त करने के लिए उत्तराखंड सरकार प्रतिबद्ध.

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 मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वर्ष 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। इकोनॉमी और इकोलॉजी के संतुलन के लिए त्रिस्तरीय एवं नौ सूत्रीय नीति की शुरुआत की गई है, जो सतत विकास लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में एसडीजी एचीवर अवार्ड समारोह में तीन व्यक्तियों, नौ संस्थानों और चार औद्योगिक प्रतिष्ठानों को सम्मानित किया।

 

इस अवसर पर उन्होंने गत वर्ष एसडीजी अवार्ड से पुरस्कृत व्यक्तियों और संस्थानों द्वारा की गई अभिनव पहल की पुस्तक अग्रगामी 2.0 और एसडीजी इंडेक्स उत्तराखंड 2023-24 का लोकार्पण भी किया।

एसडीजी इंडिया इंडेक्स में प्रथम स्थान पर राज्य-

मुख्यमंत्री ने कहा कि तीन साल पहले एसडीजी इंडिया इंडेक्स में राज्य नौवें स्थान पर था। आज राज्य देश में प्रथम स्थान पर है। गरीबी उन्मूलन, खाद्य सुरक्षा, पेयजल एवं स्वच्छता, जन्म के समय लिंगानुपात, स्वच्छ ऊर्जा, शहरी विकास, वित्तीय समावेशन और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में राज्य ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं।

 

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मुख्यमंत्री उद्यमिता प्रोत्साहन योजना, सौर ऊर्जा क्रांति, स्मार्ट सिटी मिशन और मुख्यमंत्री शहरी आजीविका योजना जैसी योजनाओं के माध्यम से इन क्षेत्रों को सशक्त बनाने का कार्य कर रही है। राज्य में जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन जैसी कई चुनौतियां हैं, जहां प्रभावी कार्य करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि सबके सामूहिक प्रयासों से हमे राज्य को और आगे बढ़ाना है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने वर्ष 2023-24 के लिए जारी जिलेवार रैंकिंग में प्रथम स्थान पर आने वाले नैनीताल, दूसरे स्थान पर आने वाले देहरादून और तीसरे स्थान पर आने वाले उत्तरकाशी के मुख्य विकास अधिकारियों को सम्मानित किया।

 

इस अवसर पर विधायक सविता कपूर, दुर्गेश्वर लाल, मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, यूएनडीपी की रेजिडेंट प्रतिनिधि डा एंजेला लुसुगी, पूर्व मुख्य सचिव एन रविशंकर, प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम, ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग के उपाध्यक्ष एसएस नेगी व सीपीपीजीजी के एसीईओ मनोज पंत उपस्थित थे।

 

एसडीजी अवार्ड से इन्हें किया गया सम्मानित-

  • व्यक्ति: गनन त्रिपाठी, गुरजीत सिंह और सुबोध शाह।
  • संस्थाएं: हिमालयन स्टडी सर्कल फार एनवायरमेंट चाइल्ड एजुकेशन हेल्थ एंड रिसर्च, सुविधा एनजीओ, जागृति सेवा समिति, शक्ति फार्म चारा उत्पादक सहकारी समिति, सोसायटी फार हिमालयन एसेंशियल नेचुरल एंड रिसर्च, हिम विकास सेल्फ रिलायंट को-आपरेटिव, भारतीय ग्रामोथान संस्था, दानपुर लोक कला संस्कृति संगम।
  • औद्योगिक प्रतिष्ठान: ब्रिटेनिया इंडस्ट्रीज लिमिटेड, रिलेक्सो फुटवियन लिमिटेड, टीएचडीसीआइएल, टाटा एआइजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड।

उत्तराखंड में अवैध मदरसों पर धामी सरकार का एक्शन जारी, कालाढूंगी में 3 मदरसे हुए सील.

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प्रदेश में अवैध मदरसे व अतिक्रमण पर कार्रवाई जारी है। सोमवार को प्रशासन ने नगर में संचालित तीन अवैध मदरसों को सील कर दिया है। इससे अवैध मदरसा संचालकों में हड़कंप मचा है। प्रशासन की टीम और शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने पंजीकरण न कराने वाले तीन मदरसों के खिलाफ कार्रवाई की।

 

बता दें की बीते दो मार्च को खाटू श्याम बाबा के संकीर्तन में विशेष समुदाय के बच्चों ने पथराव किया था। इसके बाद पथराव करने वाले बच्चों को जुबेर आलम नामक व्यक्ति ने मदरसे में छिपा दिया। इसके बाद से हिन्दूवादी संगठनों व भाजपा कार्यकर्ताओं ने सीएम धामी को अवैध मदरसों व अतिक्रमण को लेकर कार्रवाई की मांग की।

 

हाल में ही विधायक प्रतिनिधि विकास भगत ने कार्यकर्ताओं के साथ एसडीएम रेखा कोहली व ईओ अभिनव कुमार के साथ बैठक कर अवैध मदरसों व अतिक्रमण पर कार्रवाई की मांग की, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया और फैज ए उल उलूम एहले सुन्नत वार्ड नं 7 (जामा मस्जिद), मदरसा इस्लामिया अरविया तालीमुल कुरान सोसाइटी वार्ड नंबर 04 (मोती मस्जिद) व रजा मदरसा अरबिया वार्ड नंबर 2 नौदिया फार्म एवं मदरसा जामिया हबीबिया दरगाह शरीफ का संयुक्त निरीक्षण किया गया।

 

निरीक्षण के दौरान मदरसों का पंजीकरण व अन्य ठोस दस्तावेज न पाये जाने के कारण मदरसों के संरक्षकों के समक्ष शांतिपूर्ण तरीके से तीन मदरसों को अग्रिम आदेशों तक सील बंद किया गया। वहीं, जामिया हबीबिया दरगाह शरीफ वार्ड नंबर र 4 (मदीना मस्जिद) में मदरसा न चलाए जाने के संबंध में प्रबंधक मो. मेहताब द्वारा दिए गए एक प्रार्थना पत्र के माध्यम से बताया गया कि मदीना मस्जिद के निकट मदरसा पूर्व से ही बंद है और वहां किसी भी प्रकार की कोई तालीम नहीं दी जाती है।

 

मदरसों का अबतक नहीं कराया गया था रज‍िस्‍ट्रेशन-

एसडीएम रेखा कोहली ने बताया की मदरसों का विभाग में या मदरसा बोर्ड से कोई पंजीकरण अब तक नहीं कराया गया है। इस दौरान उपजिलाधिकारी रेखा कोहली, अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी जसविंदर सिंह, तहसीलदार मनीषा बिष्ट, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका अभिनव कुमार, थानाध्यक्ष पंकज जोशी तथा खंड शिक्षा अधिकारी के प्रतिनिधि प्रधानाचार्या बंसती मौजू रहीं।

Uttarakhand: धामी सरकार के 3 साल बेमिसाल ने सोशल मीडिया पर मचाया धमाल.. धामी के 3 वर्षों के कार्यकाल को जनता ने सराहा.

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सरकार के तीन साल X पर टॉप ट्रेंड बना

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के 3 वर्षों के कार्यकाल को जनता ने सराहा

धामी सरकार के ऐतिहासिक निर्णयों पर जनता की मुहर

 

उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार के सफल तीन वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में सोशल मीडिया पर जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। #DhamiKe3SaalBemisaal हैशटैग के साथ हजारों लोगों ने ट्वीट किए और धामी सरकार को सेवा, सुशासन और विकास के इन तीन वर्षों के लिए शुभकामनाएँ दीं।

आज दोपहर #DhamiKe3SaalBemisaal हैशटैग तेजी से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ट्रेंड करने लगा। देखते ही देखते अनेक ट्वीट्स और पोस्ट्स के साथ यह हैशटैग टॉप ट्रेंडिंग में आ गया। लोग उत्तराखंड सरकार की विभिन्न उपलब्धियों—इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार, धार्मिक पर्यटन, निवेश, रोजगार, महिला सशक्तिकरण और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन—को लेकर अपने विचार साझा कर रहे थे।

 

जनता का अभूतपूर्व समर्थन-

उत्तराखंड के आम नागरिकों के अलावा, राजनीतिक हस्तियों, युवा वर्ग, सामाजिक संगठनों और विभिन्न क्षेत्रों के लोगों ने इस अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लिया। लोगों ने धामी सरकार की नीतियों और प्रदेश के विकास में उनके योगदान की सराहना करते हुए पोस्ट किए।

X पर टॉप ट्रेंड बना #DhamiKe3SaalBemisaal-

लगातार बढ़ते समर्थन और जनता की भागीदारी के कारण #DhamiKe3SaalBemisaal X पर ट्रेंड करता रहा और टॉप पोजिशन पर बना रहा। यह उत्तराखंड सरकार की नीतियों और जनता के विश्वास का प्रमाण है। यह न केवल सरकार की उपलब्धियों को उजागर करता है, बल्कि जनता के विश्वास और समर्थन को भी दर्शाता है।

Uttarakhand: समर्पित शिक्षकों को बिना आवेदन भी मिलेगा शैलेश मटियानी पुरस्कार, कैबिनेट में लाया जाएगा प्रस्ताव.

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प्रदेश में शिक्षा के प्रति समर्पित और उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को सरकार अब बिना आवेदन भी राज्य शैक्षिक शैलेश मटियानी पुरस्कार देगी। शिक्षा मंत्री डाॅ.धन सिंह रावत के मुताबिक इसके लिए कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जाएगा। मंत्री के मुताबिक कुछ शिक्षक, शिक्षा के प्रति पूरी तरह से समर्पित हैं। इनमें से एक हैं, बागेश्वर के कपकोट स्थित राजकीय आदर्श प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक ख्याली दत्त शर्मा।

उनके व विद्यालय के अन्य शिक्षकों के प्रयासों से विद्यालय में न सिर्फ छात्र-छात्राओं की संख्या कई गुना बढ़ी है, बल्कि विद्यालय के कई छात्रों का सैनिक स्कूल घोड़ाखाल में चयन हुआ है। शिक्षा मंत्री के मुताबिक इस स्कूल में पूर्व में मात्र नौ छात्र-छात्राएं थे, लेकिन विद्यालय के शिक्षकों के प्रयास से स्कूल में वर्तमान में 282 बच्चे अध्ययनरत हैं। जबकि 200 अन्य बच्चे इस स्कूल में दाखिला चाहते हैं।

स्कूल के प्रधानाध्यापक ने उन्हें बताया कि स्कूल में पर्याप्त भवन हो तो छात्र-छात्राओं की संख्या और बढ़ सकती है। उन्होंने जब स्कूल के प्रधानाध्यापक को शैलेश मटियानी पुरस्कार के लिए आवेदन करने के लिए कहा तो उन्होंने इससे इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, यदि वह इसके योग्य हैं तो उन्हें खुद इसके लिए चयनित किया जाना चाहिए।

यही वजह है कि सरकार कैबिनेट में प्रस्ताव लाएगी कि इस तरह के शिक्षकों को बिना आवेदन भी शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार के लिए चयनित कर सम्मानित किया जाए। शिक्षा मंत्री ने यह भी बताया कि इस स्कूल के भवन के लिए सरकार ने एक करोड़ 10 लाख रुपये दिए हैं।

Uttarakhand News: धधकते रहे जंगल.. 2 लाख हेक्टेयर में किए इंतजाम फिर भी सैकड़ों हेक्टेयर जंगल हुए राख.

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पिछले साल वन महकमे ने जंगल की आग से वनों को बचाने के लिए दो लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में नियंत्रित फुकान (कंट्रोल बर्निंग) किया। इसके बावजूद प्रदेश के वन धधकते रहे। ऐसे में वन महकमे का किया गया नियंत्रित फुकान सवालों में है।

यही नहीं जंगल की आग के नियंत्रण के लिए एक बड़ी रकम विभाग को तब जारी की गई, जब फायर सीजन खत्म हो रहा था। हालांकि इस बार पहले से अधिक चाकचौबंद इंतजाम होने का दावा किया जा रहा है। वन विभाग जंगल से आग से बचाव के लिए फायर लाइन की सफाई, कंट्रोल बर्निंग, जागरूकता अभियान चलाने जैसे प्रयास करता है। इन कोशिशों के बाद भी जंगल में आग लगने की घटनाएं हो रही हैं।

पिछले साल की बात करें तो जंगल को वनाग्नि से बचाने के लिए 25 वन प्रभागों में नियंत्रित फुकान का काम किया गया, इसमें वन विभाग 201253.94 हेक्टेयर में नियंत्रित फुकान किया था। इसके बाद भी 1273 घटनाएं हुईं, इनमें 1768 हेक्टेयर जंगल में जैव विविधता प्रभावित हुई।

कंट्रोल बर्निंग के प्रभावों को लेकर अध्ययन नहीं-

वन विभाग जंगल से आग से बचाव के लिए सूखी पत्तियां जैसे फ्यूल लोड वनों में होता है, उसको हटाने के लिए उसे नियंत्रित तौर पर जलाया (कंट्रोल बर्निंग) जाता है। पर जिन प्रभागों और स्थानों पर कंट्रोल बर्निंग होती है वहां क्या प्रभाव पड़ा है, शायद ही कभी इसका अध्ययन किया गया हो। जबकि वन विभाग में कर्मियों की टीम से लेकर वन अनुसंधान जैसी शाखा भी है। कंट्रोल बर्निंग के प्रभाव के अध्ययन को लेकर अधिकारियों के पास भी सटीक जवाब नहीं है।

मई, जून में जारी हुआ करोड़ों का बजट-

 

15 फरवरी से 15 जून तक फायर सीजन होता है। वन विभाग ने वनाग्नि नियंत्रण के लिए बजट जारी करने के कई आदेश हुए। इसमें बड़ी रकम मई और जून में जारी हुई। पिछले साल में मार्च में पहले नौ लाख की राशि जारी हुई। जबकि एक करोड़ दस लाख की राशि जारी करने का आदेश 20 जून को किया गया। वहीं, कैंपा से भी 20 मई को सवा पांच करोड़ से अधिक की राशि जारी की गई।जंगल की आग नियंत्रण के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।

इसमें जंगल से फ्यूल लोड हटाने के लिए 10 रुपये प्रति किलो पिरुल देने का आदेश किया गया है। फायर लाइन की सफाई का काम किया जा रहा है। अन्य कदम भी उठाए गए हैं। रही बात कंट्रोल बर्निंग की तो यह जंगल से फ्यूल लोड को कम करने की एक प्रक्रिया है, जिससे बड़े नुकसान को रोका जा सके। -आरके सुधांशु, प्रमुख सचिव वन