Category Archive : देहरादून

निकाय चुनाव में मंत्री-विधायकों के ‘दमखम’ पर टिका कैबिनेट फेरबदल

131 Minutes Read -

प्रदेश के 11 नगर निगमों में  मेयर के 10 पद जीतने वाली भाजपा के कई मंत्रियों व विधायकों के क्षेत्र में कमजोर प्रदर्शन से कैबिनेट फेरबदल की सुगबुगाहट एक बार फिर तेज हो गयी है।

क्षेत्र में जनता की नाराजगी और 2027 के विधानसभा चुनाव में पड़ने वाले असर को देखते हुए भाजपा में नये चेहरों को कैबिनेट में शुमार किये जाने की संभावना बनती नजर आ रही है।

नगर निकाय में निर्दलीयों व बागियों की जोरदार जीत से भाजपा के साथ कांग्रेस के टिकट वितरण फार्मूले को कई निकाय में गहरा धक्का लगा है।

निकाय चुनाव परिणाम में गढ़वाल क्षेत्र के मंत्री धन सिंह रावत,सतपाल महाराज व सुबोध उनियाल के इलाके में भाजपा उम्मीदवार कांग्रेस व निर्दलीय उम्मीदवार से हार गए।

हालांकि, विवादों व चर्चाओं में रहे मंत्री गणेश जोशी मसूरी व प्रेम अग्रवाल ऋषिकेश सीट पर भाजपा जीत गयी। बेहद कम अंतर से जीत के बाद ऋषिकेश और पिथौरागढ़ नगर निगम सीट पर 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को एक दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक भाजपा हाईकमान कुछ समय बाद धामी मन्त्रिमण्डल के विस्तार को हरी झंडी दे सकता है। मंत्रियों और विधायकों की चुनावी परफार्मेंस की इस नये विस्तार में अहम भूमिका रहेगी।

सूत्रों का कहना है कि 2027 के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कुछ नये चेहरे मंत्रिमंडल का हिस्सा बनेंगे। बीते कुछ सालों में विभिन्न कारणों से जिन मंत्रियों की साख कम हुई या जनता जिन प्रतिनिधियों को लेकर खासी मुखर रही हो। ऐसे मंत्रियों को किनारे बैठाया जाएगा। कुछ नये व कुछ अनुभवी चेहरों को भी जगह मिलेगी।

देखें निकाय चुनाव में दलीय प्रदर्शन

हालिया सम्पन्न निकाय चुनावों में निर्दलीय व बागियों ने बेहतर प्रदर्शन किया है।

यही कारण रहा कि सात निगमों में सत्तारूढ़ भाजपा को सभासद वार्ड में बहुमत नहीं मिला। राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध विवरण के अनुसार नगर प्रमुख/अध्यक्ष के कुल 100 पदों में से भाजपा 42, निर्दलीय 29, कांग्रेस 27 व बहुजन समाज पार्टी 2 सीट जीतने में सफल रही। इनमें से नगर निगम के नगर प्रमुखों (मेयर) के 11 पदों में से 10 पर भाजपा को जीत मिली हैं जबकि श्रीनगर की सीट निर्दलीय द्वारा जीती गयी है।

नगर पालिका अध्यक्ष के 43 पदों में से भाजपा केवल 17, निर्दलीय 13, कांग्रेस 12 व 1 सीट बहुजन समाज पार्टी ने जीती।

नगर पंचायत अध्यक्ष की 46 सीट पर भाजपा, कांग्रेस व निर्दलीय क्रमशः 15-15-15 सीट जीती। जबकि 1 पर बहुजन सामज पार्टी को जीत मिली है।

11 में से 7 निगमों में भाजपा के पार्षदों का बहुमत न होने के चलते वहां वह अपने तरीके से नगर की सरकार नहीं चला सकेगी। 11 में से केवल 4 नगर निगमों में ही भाजपा को पार्षदों की आधे से अधिक सीटें मिली हैं। जिसमें रूद्रपुर में 40 में से 21, रूड़की में 24, देहरादून में 100 में से 63 तथा हरिद्वार में 60 में से 40 पार्षद शामिल हैं।

अन्य 40 पार्षदों वाले निगमों में काशीपुर में 19, अल्मोड़ा में 15, ऋषिकेश में 18, श्रीनगर में 16 तथा कोटद्वार में 18 पार्षद ही भाजपा के जीते हैं जबकि 60 पार्षदों वाले हल्द्वानी में भाजपा के एक तिहाई 20 पार्षद ही जीत सके हैं।

सभासद/सदस्यों के कुल 1282 पदों में से 1280 में चुनाव हुआ हैं जिसमें से आधे से कम 445 में ही भाजपा को जीत मिली हैं जबकि कांग्रेस को 169, निर्दलीय को 651, बसपा व अन्य को 2-2 तथा उक्रांद को 1 सीट पर जीत मिली है। नगर पालिका परिषद के 444 सदस्यों में से 129 पर ही भाजपा जीत सकी हैं, जबकि 269 पर निर्दलीय तथा 46 पर कांग्रेस जीती।

नगर पंचायत सदस्यों के 297 पदों में से 67 पर ही भाजपा को जीत मिली । 37 पर कांग्रेस तथा 190 पर निर्दलीय 2 पर आप तथा 1 पर बसपा को जीत मिली है।जिलावार प्रदर्शन में भी अधिकतर जिलों में भाजपा या किसी भी राजनैतिक दल का प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं कहा जा सकता है। अल्मोड़ा जिले में नगर प्रमुख/अध्यक्ष के 5 पदों में से 3 पर कांग्रेस तथा 2 पर भाजपा ने जीत हासिल कर है। सभासद/सदस्यों में 58 में से 18 पर भाजपा जीती जबकि 40 पर निर्दलीय जीते हैं।

बागेश्वर जिले में अध्यक्ष के 3 पदों में से 2 पर भाजपा 1 पर कांग्रेस जीती जबकि सभासद/सदस्यों के 25 में से 14 पर भाजपा 6 पर कांग्रेस तथा 1 पर निर्दलीय जीते हैं।

चमोली जिले में 10 अध्यक्षों में से 2 पर भाजपा, 6 पर कांग्रेस तथा 5 पर निर्दलीय जीते हैं। 63 सभासदों/सदस्यों में 24 भाजपा, 21 कांग्रेस तथा 18 पर निर्दलीयों को मिले हैं।

चम्पावत के 4 अध्यक्षों में सभी में भाजपा को जीत मिली है जबकि 34 सदस्यों में से 10 पर भाजपा 23 पर निर्दलीय जीते हैं।देहरादून जिले में 7 नगर प्रमुख/अध्यक्ष के पदों में से 5 भाजपा 1-1 कांग्रेस व निर्दलीय जीते हैं। सदस्य/सभासदों के 202 पदों में से 108 भाजपा 40 कांग्रेस तथा 54 निर्दलीय जीते हैं।

हरिद्वार जिले में 14 नगर प्रमुख/अध्यक्ष के पदों में 3 भाजपा 4 कांग्रेस 5 निर्दलीय 2 बसपा ने जीते हैं। जबकि 231 सभासद/सदस्यों के पदों में से 87 भाजपा 27 कांग्रेस 113 निर्दलीय 2 बसपा तथा 2 आप ने जीते हैं।

नैनीताल जिले मंे नगर प्रमुख/अध्यक्ष के 7 पदों में से भाजपा 1, कांग्रेस व निर्दलीय 3-3 पदों पर जीते हैं जबकि सदस्य/सभासद के 125 पदों में से 27 पर भाजपा 3 पर कांग्रेस 94 पर निर्दलीय तथा 1 उक्रंाद ने जीते हैं।

पौड़ी गढ़वाल के 7 प्रमुख/अध्यक्ष में से 1 भाजपा, 3-3 निर्दलीय व कांग्रेस को जीत मिली। जबकि 107 सदस्यों में से 43 भाजपा, 22 कांग्रेस तथा 42 निर्दलीय को मिले है। पिथौरागढ़ जिले के 6 अध्यक्षों मे से 2 भाजपा 3 कांग्रूेस तथा 1 पर निर्दलीय की जीत हुई। जबकि सभासद/सदस्यों के 75 में से 11 भाजपा 3 कांग्रेस 61 निर्दलीय जीतेे है।

रुद्रप्रयाग जिले के अध्यक्षों के 5 पदों में से 2 भाजपा 1 कांग्रेस तथा 2 निर्दलीयों को मिले हैं। जबकि 26 सदस्यों में से 3 भाजपा 1 कांग्रेस 22 निर्दलीय को मिले हैं। टिहरी गढ़वाल के 10 अध्यक्षों में 7 भाजपा, 3 कांग्रेस को मिले है। सदस्यों के 65 पदों में से 25 भाजपा 11 कांग्रेस 29 निर्दलीय जीते हैं।

उधमसिंह नगर के 17 नगर प्रमुख/अध्यक्ष के पदों में से 10 भाजपा 1 कांग्रेस 6 निर्दलीय जीते हैं जबकि 230 सदस्य/सभासदों में से केवल 75 भाजपा 35 कांग्रेस तथा 120 निर्दलीय जीते हैं।

Mahakumbh Stampede: उत्तराखंड के श्रद्धालुओं के लिए धामी सरकार ने जारी किया टोल फ्री नंबर, यहां ऐसे करें संपर्क.

231 Minutes Read -

प्रयागराज में महाकुंभ के दूसरे अमृत स्नान पर्व मौनी अमावस्या पर संगम में आज भगदड़ मच गई। जिसके बाद वहां विभिन्न प्रदेशों से आए श्रद्धालु फंस गए। धामी सरकार ने प्रयागराज गए उत्तराखंड के श्रद्धालुओं की सहायता के लिए टोल फ्री नंबर जारी किया है।

यहां कर सकते हैं संपर्क-

प्रदेश से महाकुंभ में गए लोग टाेल फ्री नंबर-1070,  8218867005, 90584 41404 पर कॉल कर किसी भी प्रकार की सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

 

Uttarakhand: विधायक उमेश कुमार और पूर्व MLA प्रणव चैंपियन के बीच गोलीबारी का मामला, HC ने लिया मामले का संज्ञान, सख्त कार्रवाई के दिए निर्देश

159 Minutes Read -

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने रुड़की में निर्दलीय विधायक उमेश कुमार व पूर्व विधायक प्रणव सिंह चैंपियन के बीच हुई गोलाबारी,गाली गलौज की घटना का स्वतः संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार से आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करने के निर्देश दिये हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि देवभूमि में बाहुबली प्रदर्शन शर्मनाक व अक्षम्य है ।

 

वर्तमान विधायक व पूर्व विधायक के बीच सरेआम हुई ताबड़तोड़ गोलीबारी, गाली गलौच के वीडियो राष्ट्रीय न्यूज चैनलों व समाचार पत्रों की सुर्खियां बनने से उत्तराखंड की छवि खराब होने से चिंतित हाईकोर्ट के अवकालीन न्यायधीश न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ ने घटना का स्वतः संज्ञान लिया है। मंगलवार की सुबह घटना का संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा अश्विनी कुमार उपाध्याय बनाम यूनियन ऑफ इंडिया में पारित आदेशों का पालन न होने पर चिंता व्यक्त की । इस आदेश में राजनीति का अपराधीकरण रोकने को लेकर दिशा निर्देश जारी हैं ।

 

हाईकोर्ट ने जताई चिंता:

मामले की सुनवाई दोपहर बाद करने का निर्णय लेते हुए हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी हरिद्वार व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये कोर्ट में पेश होने व इस मामले में की गई कार्यवाही की जानकारी देने को कहा । अपरान्ह में जिलाधिकारी और एस.एस.पी हरिद्वार कोर्ट में पेश हुए और उन्होंने कोर्ट को बताया कि वर्तमान विधायक उमेश कुमार व पूर्व विधायक प्रणव चैंपियन गिरफ्तार हो चुके हैं। जिसमें प्रणव सिंह जेल में है और उमेश कुमार जमानत में हैं । जिलाधिकारी ने बताया कि दोनों के शस्त्र लाइसेंस रद्द कर दिए हैं और उनको दी गई सुरक्षा को हटाने के लिये सरकार समीक्षा कर रही है। बताया कि दोनों के खिलाफ विभिन्न न्यायालयों में 19-19 मुकदमे लंबित हैं ।

 

हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई की अगली तिथि 12 फरवरी को निर्धारित करते हुए जिलाधिकारी हरिद्वार व एस एस पी हरिद्वार को आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करने के निर्देश दिए। हाईकोर्ट ने दोनों के खिलाफ चल रहे मुकदमों, आपराधिक रिकॉर्ड, 25-26 जनवरी को हुई घटनाओं वीडियो क्लिप, आरोपियों के खिलाफ की गई कार्यवाही रिपोर्ट आदि शपथ पत्र के साथ कोर्ट में पेश करने को कहा है ।

National Games- उत्तराखंड में आज से खेलों के महाकुंभ का शुभारंभ, 33 खेलों के 45 कॉम्पिटिशन में दांव पर 3674 है मेडल.

313 Minutes Read -

उत्तराखंड में आज (मंगलवार) से 38वें राष्ट्रीय खेल (Uttarakhand National Games) विधिवत शुरू हो जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खेलों के इस महाकुंभ का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ ही केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया, केंद्रीय खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे व भारतीय ओलिंपिक एसोसिएशन की अध्यक्ष पीटी उषा उपस्थित रहेंगे। विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री और देश के कई विशिष्ट अतिथियों को भी उद्घाटन समारोह के लिए आमंत्रित किया गया है।

 

राष्ट्रीय खेलों में कुल 35 खेलों से जुड़ी 45 स्पर्धाओं का आयोजन किया जा रहा है। इनमें दो प्रदर्शनी खेल शामिल हैं। खेल स्पर्धाओं में 9720 खिलाड़ी दांव पर लगे 3674 पदकों के लिए आपस में जोर आजमाइश करेंगे। मंगलवार शाम छह बजे राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के रजत जयंती खेल परिसर में राष्ट्रीय खेलों के शुभारंभ किया जाएगा।

 

दोपहर साढ़े तीन बजे देहरादून पहुंचेंगे पीएम मोदी-

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए दोपहर साढ़े तीन बजे देहरादून पहुंच जाएंगे। वह चार से छह बजे तक उत्तराखंड की विभिन्न परियोजनाओं के प्रस्तुतिकरण को देखेंगे। शाम छह बजे वह राष्ट्रीय खेलों का उद्घाटन करेंगे। इस कार्यक्रम को भव्य रूप देने के लिए गायक जुबीन नौटियाल, पवनदीप राजन और पांडवाज ग्रुप अपनी प्रस्तुतियां देंगे। इसके अलावा चार हजार से अधिक कलाकार भी अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से समारोह में रंग भरेंगे। समारोह में हरित पटाखों का प्रयोग किया जाएगा।

10 शह‍रों में क‍िया जा रहा आयोजन-

राष्ट्रीय खेलों का आयोजन 10 शहरों में किया जा रहा है। इनमें सीमांत पिथौरागढ़ से लेकर राजधानी देहरादून तक शामिल है। इन खेलों की 45 स्पर्धाओं में 3674 पदक दांव पर रहेंगे। इनमें 1120 स्वर्ण, 1120 रजत और 1434 कांस्य पदक शामिल हैं। सबसे अधिक 198 पदक एथलेटिक्स की विभिन्न स्पर्धाओं में होंगे। वैसे राष्ट्रीय खेलों की ट्रायथलान और बीच हैंडबाल स्पर्धा के मुकाबले शुरू हो चुके हैं।

 

उत्तराखंड इन खेलों में लगभग 750 प्रतिभागियों का दल उतार रहा है। मेजबान राज्य होने के नाते उत्तराखंड को सभी खेलों में भाग लेने का अवसर प्राप्त होगा। ऐसे में उत्तराखंड इन खेलों में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद कर रहा है।

उत्तराखंड की खेल मंत्री रेखा आर्या ने बताया क‍ि  राष्ट्रीय खेलों के लिए उत्तराखंड पूरी तरह तैयार है। मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इन खेलों की भव्य शुरुआत करेंगे। खेलों को ऐतिहासिक और अविस्मरणीय बनाने में कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी।

 

Uniform Civil Code: CM धामी ने कराया पहला पंजीकरण, कहा- उत्तराखंड से निकली UCC की गंगा, आज का दिन ऐतिहासिक.

169 Minutes Read -

उत्तराखंड में आज समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू हो गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सेवक सदन में यूसीसी के पोर्टल और नियमावली का लोकार्पण किया। वहीं, इसकी अधिसूचना भी जारी हो गई है।

सीएम धामी ने कहा कि यह हमारे प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के लिए भी ऐतिहासिक दिन है। यूसीसी रूपी गंगा को निकालने का श्रेय देवभूमि की जानता को जाता है। आज अत्यंत हर्ष की अनुभूति हो रही है। मैं आज भावुक भी हो रहा हूं। इसी क्षण से समान नागरिक संहिता लागू हो रही है। सभी नागरिकों के अधिकार सामान हो रहे हैं। सभी धर्म की महिलाओं के अधिकार भी समान हो रहे हैं। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को भी धन्यवाद देता हूं उन्हीं के सहयोग से यह सब हो रहा है। जस्टिस प्रमोद कोहली और समिति का धन्यवाद करता हूं। विधानसभा के सभी सदस्यों का धन्यवाद है। आईटी विभाग और पुलिस गृह विभाग सबका धन्यवाद। जो हमने संकल्प लिया था। जो वादा किया था वह पूरा किया।

हमने सरकार गठन में यही पहला निर्णय लिया था और आज वह दिन आ गया। लगभग तीन साल होने को हैं। इस दिन का बेसब्री का इंतज़ार था। यूसीसी जाती धर्म लिंग आदि में अंतर के आधार पर कानूनी आधार पर समाप्त करने का उपाय है। महिला सशक्तीकरण के साथ साथ सुरक्षा भी होगी। हलाला, तलाक जैसी कुप्रथा पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी। लिव इन में रजिस्ट्रेशन से दोनों पक्षों को सुरक्षा मिलेगी। उत्तराखंड में 27 जनवरी समान नागरिक संहिता दिवस के रूप में मनाया जाएगा। जिस तरह माँ गंगा यहां से निकलकर पूरे देश को लाभान्वित करती है। ऐसे ही यूसीसी भी काम करेगी।

जाति धर्म का भेद नहीं-

मुझसे पूछा गया था कि जनजातियों को अलग कर दिया फिर यह यूसीसी कैसी है ? संविधान के अनुच्छेद के आधार पर जनजातियों को अलग रखा है। यूसीसी किसी धर्म या सम्प्रदाय के ख़िलाफ़ नहीं है। यहां किसी को टारगेट करने के लिए नहीं है। यह समानता से समरास्ता का मार्ग है।

सीएम धामी ने कराया पहला रजिस्ट्रेशन-

मुख्यमंत्री ने पोर्टल पर पहला पंजीकरण कराया। इस दौरान पंजीकरण प्रमाणपत्र भी सौंपा गया। निकिता नेगी रावत, मनोज रावत,  अंजना रावत,  मीनाक्षी, अंजली ने भी सबसे पहले पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराया। इन्हें भी पंजीकरण प्रमाण पत्र दिए गए हैं। यूसीसी लागू होने से छह महीने तक कोई शुल्क नहीं लगेगा।

UCC: यूनिफार्म सिविल कोड़ हुआ लागू, ये हैं विशेषताएं..जानिए UCC के दायरे में कौन-कौन।

143 Minutes Read -

यूसीसी नियमावली हाईलाइट-

दायरा – अनुसूचित जनजातियों को छोड़कर, सम्पूर्ण उत्तराखंड राज्य, साथ ही राज्य से बाहर रहने वाले उत्तराखंड के निवासियों पर लागू।

प्राधिकार – यूसीसी लागू करने के लिए ग्रामीण क्षेत्र में एसडीएम रजिस्ट्रार और ग्राम पंचायत विकास अधिकारी सब रजिस्ट्रार होंगे। जबकि नगर पंचायत – नगर पालिकाओं में संबंधित एसडीएम रजिस्ट्रार और कार्यकारी अधिकारी सब रजिस्ट्रार होंगे।
इसी तरह नगर निगम क्षेत्र में नगर आयुक्त रजिस्ट्रार और कर निरीक्षक सब रजिस्ट्रार होंगे। छावनी क्षेत्र में संबंधित CEO रजिस्ट्रार और रेजिडेंट मेडिकल ऑफिसर या सीईओ द्वारा अधिकृत अधिकारी सब रजिस्ट्रार होंगे। इन सबके उपर रजिस्ट्रार जनरल होंगे, जो सचिव स्तर के अधिकारी एवं इंस्पेक्टर जनरल ऑफ रजिस्ट्रेशन होंगे।

रजिस्ट्रार जनरल के कर्तव्य
– यदि रजिस्ट्रार तय समय में कार्रवाई नहीं कर पाते हैं तो मामला ऑटो फारवर्ड से रजिस्ट्रार जनरल के पास जाएगा। इसी तरह रजिस्ट्रार या सब रजिस्ट्रार के आदेश के खिलाफ रजिस्ट्रार जनरल के पास अपील की जा सकेगी, जो 60 दिन के भीतर अपील का निपटारा कर आदेश जारी करेंगे।

 

रजिस्ट्रार के कर्तव्य-

सब रजिस्ट्रार के आदेश के खिलाफ अपील पर 60 दिन में फैसला करना। लिव इन नियमों का उल्लंघन या विवाह कानूनों का उल्लंघन करने वालों की सूचना पुलिस को देंगे।

सब रजिस्ट्रार के कर्तव्य
सामान्य तौर पर 15 दिन और तत्काल में तीन दिन के भीतर सभी दस्तावेजों और सूचना की जांच, आवेदक से स्पष्टीकरण मांगते हुए निर्णय लेना
समय पर आवेदन न देने या नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना लगाने के साथ ही पुलिस को सूचना देना, साथ ही विवाह जानकारी सत्यापित नहीं होने पर इसकी सूचना माता- पिता या अभिभावकों को देना।

विवाह पंजीकरण
26 मार्च 2010, से संहिता लागू होने की तिथि बीच हुए विवाह का पंजीकरण अगले छह महीने में करवाना होगा

संहिता लागू होने के बाद होने वाले विवाह का पंजीकरण विवाह तिथि से 60 दिन के भीतर कराना होगा

आवेदकों के अधिकार
यदि सब रजिस्ट्रार- रजिस्ट्रार समय पर कार्रवाई नहीं करता है तो ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा सकती है।

सब रजिस्ट्रार के अस्वीकृति आदेश के खिलाफ 30 दिन के भीतर रजिस्ट्रार के पास अपील की जा सकती है।

रजिस्ट्रार के अस्वीकृति आदेश के खिलाफ 30 दिन के भीतर रजिस्ट्रार जनरल के पास अपील की जा सकती है।

अपीलें ऑनलाइन पोर्टल या ऐप के माध्यम से दायर हो सकेंगी।

(लिव इन)

संहिता लागू होने से पहले से स्थापित लिव इन रिलेशनशिप का, संहिता लागू होने की तिथि से एक महीने के भीतर पंजीकरण कराना होगा। जबकि संहिता लागू होने के बाद स्थापित लिव इन रिलेशनशिप का पंजीकरण, लिवइन रिलेशनशिप में प्रवेश की तिथि से एक महीने के भीतर पंजीकरण कराना होगा।

लिव इन समाप्ति – एक या दोनों साथी आनलाइन या ऑफलाइन तरीके से लिव इन समाप्त करने कर सकते हैं। यदि एक ही साथी आवेदन करता है तो रजिस्ट्रार दूसरे की पुष्टि के आधार पर ही इसे स्वीकार करेगा।

यदि लिव इन से महिला गर्भवती हो जाती है तो रजिस्ट्रार को अनिवार्य तौर पर सूचना देनी होगी। बच्चे के जन्म के 30 दिन के भीतर इसे अपडेट करना होगा।

विवाह विच्छेद –
तलाक या विवाह शून्यता के लिए आवेदन करते समय, विवाह पंजीकरण, तलाक या विवाह शून्यता की डिक्री का विवरण अदालत केस नंबर, अंतिम आदेश की तिथि, बच्चों का विवरण कोर्ट के अंतिम आदेश की कॉपी।

वसीयत आधारित उत्तराधिकार
वसीयत तीन तरह से हो सकेगी। पोर्टल पर फार्म भरके, हस्तलिखित या टाइप्ड वसीयड अपलोड करके या तीन मिनट की विडियो में वसीयत बोलकर अपलोड करने के जरिए।

 

यूसीसी की यात्रा-

27 मई 2022 – यूसीसी पर विशेषज्ञ समिति का गठन

02 फरवरी 2024 – यूसीसी पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत

08 फरवरी 2024 – राज्य विधानसभा द्वारा अधिनियम अनुमोदित

08 मार्च 2024 – भारत के राष्ट्रपति द्वारा अधिनियम अनुमोदित

12 मार्च 2024 – यूसीसी उत्तराखंड अधिनियम 2024 जारी

18 अक्टूबर 2024 – यूसीसी नियमावली प्रस्तुत

27 जनवरी 2025 – यूसीसी लागू

 

यूसीसी के क्रियान्वयन की कार्ययोजना-

– ऑनलाइन आवेदन के लिए पोर्टल (ucc.uk.gov.in) विकसित

– कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) Training Partner के रूप में नामित

– क्रियान्वयन व प्रशिक्षण के लिए ज़िलों में नोडल अधिकारी नामित

– सहायता और तकनीकी परामर्श के लिए हेल्पडेस्क (1800-180-2525) स्थापित

– विधिक प्रश्नों के समाधान के लिए जिला स्तरीय अधिकारी नियुक्त

– नागरिक जागरूकता और अधिकारियों की सुविधा के लिए Short Video एवं Booklets

Dehradun Nikay Chunav: बीजेपी ने बनाई बढ़त, कांग्रेस चल रही पीछे, कई सीटों पर निर्दलीयों की बल्ले-बल्ले.

162 Minutes Read -

उत्तराखंड में निकाय चुनाव की मतगणना के बीच पहले रुझान में निर्दलीय प्रत्याशी दोनों ही राष्ट्रीय दल बीजेपी और कांग्रेस को कड़ी टक्कर देते हुए नजर आ रहे हैं. राज्य निर्वाचन आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में निर्दलीयों ने भी कई सीटों पर बढ़त बनाई हुई है. उधर भारतीय जनता पार्टी फिलहाल सबसे आगे नजर आ रही है.

उत्तराखंड में निकाय चुनाव के परिणाम कुछ सीटों पर दिखने लगे हैं. खास बात यह है कि राज्य भर में तमाम सीटों पर निर्दलीयों ने दोनों ही राष्ट्रीय दलों को कड़ा मुकाबला दिया हुआ है. राज्य निर्वाचन आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अध्यक्ष /मेयर समेत पार्षद और सदस्यों के लिए हो रही मतगणना में निर्दलीय भी कई सीटों पर बाजी मारते दिख रहे हैं. हालांकि राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा दिया गया यह आंकड़ा शुरुआती रुझान है. परिणाम आने में अभी समय लगेगा.

उत्तराखंड में 100 निकायों पर अध्यक्ष /मेयर पद के लिए चुनाव हुए हैं. इसी तरह सभासद/ सदस्य पद कुल 1282 पद हैं. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार भारतीय जनता पार्टी अब तक अध्यक्ष पद पर तीन सीटें जीत चुकी है जबकि 9 सीटों पर आगे चल रही है. इसी तरह निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ रहे चार प्रत्याशी अध्यक्ष/मेयर पद पर आगे चल रहे हैं. जबकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष/मेयर पद पर 4 प्रत्याशी आगे चल रहे हैं.

राज्य भर में सभासद और सदस्यों के लिए चल रही मतगणना को देख तो यहां भी निर्दलीयों का जोरदार प्रदर्शन देखने को मिल रहा है. पूरे प्रदेश में कुल 1282 सभासद/ सदस्य की सीटें हैं जिनमें से 47 सीटें निर्दलीय जीत चुके हैं, जबकि 67 सीटों पर अभी निर्दलीय बढ़त बनाए हुए हैं. भारतीय जनता पार्टी कुल 21 सीटों पर जीती है जबकि 75 जगहों पर बीजेपी आगे चल रही है. कांग्रेस केवल दो सीट जीती है और 10 सीटों पर आगे चल रही हैं. जबकि आम आदमी पार्टी भी दो सीटों पर फिलहाल आगे चल रही है.

इस तरह से पहले रुझान में अब तक की स्थिति को देखे तो 67% सीटों पर निर्दलीय अब तक की स्थिति में जीत हासिल कर चुके हैं. 21 सीटों के साथ भारतीय जनता पार्टी 21% सीटों को लेती हुई दिखाई दे रही है, जबकि शुरुआती रुझान में कांग्रेस केवल तीन प्रतिशत सीटों को जीतती हुई दिखाई दी है.

 

 

Uttarakhand Nikay Chunav: सबसे कम उम्र की सभासद बनी अंबिका चौहान, महज इतनी है उम्र.

319 Minutes Read -

देहरादून : उत्तराखंड के निकाय चुनाव में चौंकाने वाले रिजल्ट सामने आ रहे हैं अत्यधिक जगहों पर कांग्रेस ने बाजी मारी तो वहीं देहरादून और ऋषिकेश की बात करें तो भाजपा प्रत्याशी आगे चल रहे हैं. वही देहरादून में सबसे कम उम्र की सभासद बनी हैं। जिनका नाम है अंबिका चौहान। सेलाकुई के वार्ड आठ से अंबिका चौहान निर्दलीय सभासद बनी हैं जिनकी उम्र महज 21 वर्ष है।

Uttarakhand Nikay Chunav: नई सूची बनी, 5 लाख मतदाता जुड़े फिर भी वोट देने से वंचित हुए हजारों मतदाता.

186 Minutes Read -

उत्तराखंड के निकाय चुनाव में मतदाताओं की संख्या पांच लाख बढ़ गई। इसके बावजूद हजारों लोग नाम कटने की वजह से मताधिकार से वंचित रह गए। आयोग हर पांच साल में नई मतदाता सूची बनाता है। बावजूद इसके इतने नाम छूटने पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

राज्य में निकायों और विधानसभा-लोकसभा की मतदाता सूची अलग-अलग होती है। भारत निर्वाचन आयोग विधानसभा, लोकसभा की सूची बनाता है, जो कि सालभर अपडेट की जाती है। इसके उलट राज्य निर्वाचन आयोग नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायतों की मतदाता सूची तैयार करता है, जो कि हर पांच साल में नए सिरे से बनाई जाती है। पिछले चुनाव में 84 निकायों में करीब 25 लाख मतदाता थे। इस बार नई सूची में 100 निकायों में 30 लाख से अधिक मतदाता हैं। यह सूची अब अपडेट नहीं होगी। पांच साल के बाद नए सिरे से नई सूची बनेगी।

सवाल उठ रहे हैं कि करीब पांच लाख मतदाता बढ़ने के बावजूद बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से गायब हो गए। इसके पीछे कई कारण माने जा रहे हैं। एक तो राज्य निर्वाचन आयोग का पैटर्न व इंफ्रास्ट्रक्चर भारत निर्वाचन आयोग से कमतर है। यहां वार्डों के हिसाब से बीएलओ होते हैं जबकि भारत निर्वाचन आयोग के बूथवार बीएलओ होते हैं। इस कारण इतने बड़े वार्डों तक पहुंच बनाने में परेशानी होती है। दूसरा, निकायों की वोटर लिस्ट बनाते समय भारत निर्वाचन आयोग की वोटर लिस्ट को आधार नहीं बनाया जाता।

कई बार कवायद हुई लेकिन परवान न चढ़ी-

प्रदेश में कई बार भारत और राज्य निर्वाचन की एक जैसी मतदाता सूची बनाने की कवायद हुई लेकिन परवान नहीं चढ़ पाई। एक पूर्व अधिकारी ने बताया कि राज्य निर्वाचन आयोग ने आदेश जारी किया था कि वोटर लिस्ट बनाते समय भारत निर्वाचन आयोग की वोटर लिस्ट को भी आधार बनाया जाए लेकिन ऐसा न हो पाया। एक बार राज्य निर्वाचन आयोग ने भारत निर्वाचन आयोग को वोटर लिस्ट बनाने का प्रस्ताव भेजा था लेकिन भारत निर्वाचन आयोग ने शर्त लगाई थी कि पांच साल में कोई नया निकाय या वार्ड न बने। यह राज्य के स्तर पर संभव नहीं है। दिल्ली, हरियाणा समेत कुछ राज्यों में भारत निर्वाचन आयोग के डाटा को आधार बनाकर वोटर लिस्ट तैयार हुई है लेकिन उसके नतीजे बहुत बेहतर नहीं हैं। आपको बता दें कि इससे पहले विधि आयोग ने वर्ष 2015 में अपनी 255वीं रिपोर्ट में इसकी सिफारिश की थी। भारत निर्वाचन आयोग ने भी वर्ष 1999 और वर्ष 2004 में इस पर विचार किया था।

एक देश, एक चुनाव से हो सकता है समाधान-

प्रधानमंत्री कार्यालय ने बीते दिनों पंचायत, नगरपालिका, राज्य विधानसभा और लोकसभा के चुनावों के लिए एक आम मतदाता सूची की संभावना पर चर्चा के लिए भारत निर्वाचन आयोग और विधि एवं न्याय मंत्रालय के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की थी। एक देश एक चुनाव के कांसेप्ट के तहत एक समान मतदाता सूची बनाने का काम हो सकता है। हालांकि, अभी इस पर कोई निर्णय नहीं हुआ है।

मतदाता सूची में कई के नाम न होने की शिकायत संज्ञान में है। भविष्य में और बेहतर तरीके से इस दिशा में काम होगा।
– सुशील कुमार, आयुक्त, राज्य निर्वाचन आयोग

Uttarakhand Nikay Chunav: मोर्चे पर सीएम धामी, 12 दिन में की 52 चुनावी सभाएं और रोड शो.

154 Minutes Read -

Nikay Chunav: समान नागरिक संहिता की पहल समेत अनेक ऐतिहासिक निर्णय लेकर देशभर में चर्चा में आए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का निकाय चुनाव में भाजपा ने भरपूर उपयोग किया।

पार्टी के स्टार प्रचारक मुख्यमंत्री धामी ने भी चुनाव अभियान की कमान संभाली और 12 दिन में 52 चुनावी सभाएं, रोड शो समेत अन्य कार्यक्रमों के जरिये प्रचार अभियान को धार दी।

इस दौरान उन्होंने जहां विपक्ष को निशाने पर लिया, वहीं अपनी सरकार की उपलब्धियों और निकायों के विकास के लिए रोडमैप भी रखा। साथ ही समान नागरिक संहिता, लैंड व थूक जिहाद जैसे विषयों को प्रचार अभियान के दौरान प्रमुखता से उठाया।

 

गढ़वाल से लेकर कुमाऊं तक ताबड़तोड़ चुनावी कार्यक्रमों में भागीदारी-

चुनाव चाहे लोकसभा के हों अथवा विधानसभा के, भाजपा नेतृत्व मुख्यमंत्री धामी का भरपूर उपयोग करता आया है। अब जबकि राज्य में निकाय चुनाव हो रहे हैं तो पार्टी ने स्वाभाविक रूप से मुख्यमंत्री धामी को मोर्चे पर लगाया। उन्होंने निकाय चुनाव प्रचार अभियान की कमान अपने हाथ में लेने के साथ ही गढ़वाल से लेकर कुमाऊं तक ताबड़तोड़ चुनावी कार्यक्रमों में भागीदारी की।

मुख्यमंत्री ने मुखर होकर अपनी सरकार के निर्णयों और राज्य के खाते में आई उपलब्धियों को जनता के समक्ष रखा।

 

साथ ही वह विपक्ष कांग्रेस पर निरंतर हमलावर रुख अख्तियार किए रहे। उन्होंने विपक्ष पर राज्य की वास्तविक समस्याओं को गंभीरता से न लेने का आक्षेप लगाया तो अपनी सरकार के कार्यकाल में निकायों में हुए कार्यों के साथ ही भविष्य का रोडमैप भी जनता के सामने रखा।

 

पार्टी का तीन सप्ताह का सघन प्रचार अभियान सफल-

उधर, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में पार्टी का तीन सप्ताह का सघन प्रचार अभियान बेहद सफल रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी की सभाओं व रोड शो में उमड़े जनसमूह ने साफ कर दिया है कि राज्य के सभी 100 नगर निकायों में भाजपा परचम फहराएगी।