उत्तराखंड कांग्रेस के दिग्गज नेता हरक सिंह रावत की पुत्रवधु अनुकृति गुसाईं ने आज भाजपा का दामन थाम लिया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। अनुकृति के साथ उनके कई समर्थकों ने भी भाजपा ज्वाइन की।
बता दें कि उन्होंने लोकसभा चुनाव से पहले ही कांग्रेस से इस्तीफा दिया था। चुनाव प्रचार के दाैरान अनुकृति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों का समर्थन किया था। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा था कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में ही देश विश्व की तीसरी महाशक्ति बन सकता है। मैंने हमेशा उत्तराखंड को विकसित राज्य बनने का सपना देखा। ये सपना मोदीजी के नेतृत्व में साकार हो सकता है। तब से कयास लगाए जा रहे थे कि वह जल्द ही भाजपा में शामि हो सकती हैं। वहीं, आज उन्होंने देहरादून में भाजपा प्रदेश कार्यालय में पार्टी की सदस्यता ली।
अनुकृति गुसाईं मिस इंडिया भी रह चुकी हैं। वह पहाड़ की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लंबे समय से काम कर रही हैं। अनुकृति पिछले विधानसभा चुनाव में लैंसडोन सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ी थीं। उन्हें भाजपा के दिलीप रावत ने हराया था। इसके बाद से अनुकृति कांग्रेस में खास सक्रिय नजर नहीं आ रहीं थीं।
टिहरी लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी माला राज्य लक्ष्मी शाह लक्ष्मी नामांकन कराने पहुंचीं। इस दौरान उनके साथ नामांकन रैली में सीएम धामी, वरिष्ठ नेता सहित भारी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। लोकसभा चुनाव में उतरे भाजपा व कांग्रेस के तीन प्रत्याशी आज 26 मार्च को नामांकन करेंगे।
टिहरी से माला राज्यलक्ष्मी शाह के अलावा गढ़वाल सीट से भाजपा प्रत्याशी अनिल बलूनी और कांग्रेस प्रत्याशी जोत सिंह गुनसोला पर्चा भरेंगे। दोनों दलों से पार्टी प्रत्याशियों के नामांकन की तैयारियां पूरी कर ली हैं। माला राज्यलक्ष्मी शाह के नामांकन में मुख्यमंत्री धामी, प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे जबकि कांग्रेस प्रत्याशी गुनसोला के नामांकन में प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा समेत कई नेता भी रहेंगे।
कांग्रेस के प्रत्याशियों को स्टार प्रचारकों का इंतजार-
लोकसभा चुनाव में उतरे कांग्रेस प्रत्याशियों को स्टार प्रचारकों का इंतजार है। प्रत्याशी अपने स्तर पर चुनाव मैदान में डटे हैं। पार्टी केंद्रीय नेतृत्व की ओर से अभी तक कोई बड़ा नेता उत्तराखंड दौरे पर नहीं आया। भाजपा ने पांचों सीटों पर चुनाव प्रचार के लिए स्टार प्रचारकों की लंबी फेहरिस्त बनाई है। वहीं, कांग्रेस ने अभी तक स्टार प्रचारकों की सूची तैयार नहीं की है।
प्रदेश उपाध्यक्ष संगठन मथुरा दत्त जोशी ने बताया, चुनाव प्रचार में स्टार प्रचारकों की सूची बनाई जा रही है। राहुल गांधी, सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी, राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, मुकुल वासनिक, सलमान खुर्शीद समेत कई बड़े नेताओं की पांचों सीटों पर रैली निकालने की रणनीति तैयार की जा रही है। होली पर्व के बाद स्टार प्रचारकों की सूची केंद्रीय नेतृत्व को भेजी जाएगी।
प्रदेश में आगामी लोकसभा चुनाव के लिए आज अधिसूचना जारी होगी। यह अधिसूचना पांचों लोकसभा सीटों के रिटर्निंग ऑफिसर के स्तर से जारी की जाएगी। इसके साथ ही नामांकन की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगा।
चुनाव आयोग के शेड्यूल के हिसाब से सभी लोकसभा सीटों के लिए बुधवार को अधिसूचना जारी होगी। इसके साथ ही नामांकन पत्रों की बिक्री और जमा करने की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी। चुनाव आयोग ने ऑनलाइन नामांकन का विकल्प भी दिया है। टिहरी लोकसभा के लिए आरओ देहरादून यानी डीएम देहरादून कार्यालय, अल्मोड़ा सीट के लिए डीएम अल्मोड़ा, गढ़वाल सीट के लिए डीएम पौड़ी, नैनीताल-ऊधमसिंह नगर सीट के लिए डीएम उधमसिंह नगर और हरिद्वार सीट के लिए डीएम हरिद्वार अधिसूचना जारी करेंगे।
साथ ही नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी, जो 27 मार्च तक चलेगी। नामांकन पत्रों की जांच 28 मार्च को होगी। नाम वापसी की अंतिम तिथि 30 मार्च होगी। इसके बाद सीधे 19 अप्रैल को मतदान और फिर चार जून को मतगणना होगी। छह जून को आचार संहिता समाप्त हो जाएगी।
सार्वजनिक अवकाश को छोड़कर 27 मार्च तक होंगे नामांकन-
प्रदेश में सार्वजनिक अवकाश को छोड़कर 27 मार्च तक रोजाना सुबह 11 से दोपहर तीन बजे तक नामांकन होंगे। बुधवार को सभी आरओ मुख्यालय में नामांकन के लिए पब्लिक नोटिस चस्पा कर दिया जाएगा। मंगलवार को सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी नमामि बंसल ने बताया, 20 मार्च से नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। सभी संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों में आरओ मुख्यालय में नामांकन के लिए बुधवार को सुबह पब्लिक नोटिस चस्पा कर दिया जाएगा। 27 मार्च तक सार्वजनिक अवकाश को छोड़कर रोजाना 11 से लेकर तीन बजे तक नामांकन की प्रक्रिया होगी।प्रत्याशियों की ओर से उपलब्ध कराए जाने वाले डॉक्यूमेंट्स की एक चेक लिस्ट भी बनाई गई है, जिसमें फॉर्म-ए, फॉर्म-बी, एफिडेविट, सिक्योरिटी डिपॉजिट के प्रूफ आदि शामिल हैं। नामांकन प्रक्रिया को करने के लिए ऑनलाइन पोर्टल suvidha.eci.gov.in की भी व्यवस्था की गई है, जिसमें प्रत्याशी मोबाइल नंबर से रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं।
RO मुख्यालय में सुरक्षा की तैयारियां भी पूरी-
इसका प्रिंट निकाल कर हस्ताक्षर करने के उपरांत आरओ कार्यालय में नामांकन प्रक्रिया को निर्धारित अंतिम तिथि से पूर्व अनिवार्य रूप से जमा कराना जरूरी होगा। प्रत्याशी पोर्टल में ही डॉक्यूमेंट को भी मुख्यालय में जमा करने की समय और तिथि को भी अपनी सुविधानुसार चयन कर सकते हैं। जिस तिथि में प्रत्याशी प्रत्यक्ष रूप से आरओ मुख्यालय में उपस्थित होकर अपने डॉक्यूमेंट को जमा करा सकते हैं। इसके अलावा आरओ मुख्यालय के 100 मीटर की परिधि के दायरे में तीन से अधिक वाहनों की अनुमति नहीं होगी। इसी क्रम में प्रत्येक आरओ मुख्यालय में सुरक्षा की तैयारियां भी पूरी कर ली गई हैं। सी-विजिल एप पर 3,066 शिकायत-
संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया, लगभग 94 हजार भवनों से पोस्टर बैनर हटाए गए हैं। सी-विजिल एप के माध्यम से आदर्श आचार संहिता से जुड़े करीब 3,066 मामले निस्तारित किए जा चुके हैं, जिनमें से 2800 मामले सही पाए गए हैं। निर्धारित समय सीमा के अंतर्गत निस्तारित कर दिए गए। इसके साथ ही लगभग 10,900 शस्त्र जमा कराए जा चुके हैं। यह कार्रवाई लगातार जारी है।
अब चुनाव नतीजों तक कोई भी नया मतदाता नहीं बनेगा। अगर आप आगामी लोकसभा चुनाव के लिए अपना वोट बनवाना चाह रहे हैं, तो ये मुराद पूरी नहीं हो पाएगी। नामांकन की अंतिम तिथि से 10 दिन पहले तक जिन्होंने वोट बनवाने या मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए आवेदन किया होगा और वह निर्वाचन कार्यालय के सॉफ्टवेयर में आ गया होगा, केवल वही लोकसभा चुनाव में मतदान कर सकेंगे।
दरअसल, नियमानुसार नामांकन की अंतिम तिथि से 10 दिन पहले तक मतदाता बनने का अवसर दिया जाता है। चूंकि, राज्य में 27 को नामांकन की अंतिम तिथि है, इसलिए 17 मार्च तक ही ये मौका था। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक, अब जो भी नया मतदाता बनने के लिए आवेदन करेंगे, उनकी प्रक्रिया सॉफ्टवेयर में आगे नहीं बढ़ पाएगी।
7 जून को आचार संहिता खत्म होने के बाद ही उनका वोट बन सकेगा। हां, 17 से पहले जिनके आवेदन प्रोसेस में आ चुके हैं, उनका वोट बनेगा और वह इस लोकसभा चुनाव में मतदान भी कर सकेंगे।
दिव्यांग, 85 से अधिक आयु के मतदाताओं को फार्म 12-डी-
प्रदेश के 79,965 दिव्यांग और 85 वर्ष से अधिक आयु के 65,177 मतदाताओं को उनके बीएलओ घर पर ही फार्म 12-डी मुहैया करा रहे हैं। आप भी अपने बीएलओ से संपर्क कर सकते हैं। इस फार्म को भरकर बीएलओ को ही देना है। इसके बाद चुनाव आयोग की टीम आपके घर पर ही मतदान की सुविधा देगी। पांच अप्रैल को घर से वोट करने वाले मतदाताओं की संख्या स्पष्ट हो जाएगी।
लोकसभा चुनाव से ठीक पहले उत्तराखंड कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। पौड़ी लोकसभा सीट से प्रबल दावेदार माने जा रहे कांग्रेस सीट के दिग्गज नेता मनीष खंडूरी ने कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया।
मनीष खंडूरी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए ये बात शेयर की सोशल मीडिया पर जारी पोस्ट में उन्होंने बताया कि मैं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से तत्काल प्रभाव से त्यागपत्र दे रहा हूं। मेरा यह निर्णय बिना किसी व्यक्तिगत हित अथवा अपेक्षा से लिया गया है।
कांग्रेस के गढ़वाल लोकसभा प्रत्याशी मनीष खंडूरी का जन्म पूर्व मुख्यमंत्री व गढ़वाल सांसद मेजर जनरल बीसी खंडूड़ी के घर 16 अक्टूबर 1968 को हुआ। शिक्षा में बचपन से ही अव्वल मनीष ने नेताजी सुभाष चंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से बीए की परीक्षा उत्तीर्ण की है।
उत्तराखंड में गढ़वाल लोकसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी मनीष खंडूरी को इंजीनियरिंग और मीडिया के क्षेत्र में महारत हासिल है। चुनाव से ठीक पहले पार्टी से इस्तीफा देने के अब कई राजनीतिक मायने सामने आ रहे हैं।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा 10 मार्च के बाद उत्तराखंड का राजनीतिक दौरा कर सकते हैं। उनके नौ या 10 मार्च तक आने की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन उनकी राजनीतिक व्यस्तता के चलते समय तय नहीं हो पाया है।
माना जा रहा कि केंद्रीय चुनाव समिति 10 मार्च तक लोस चुनाव के प्रत्याशियों के चयन की प्रक्रिया में व्यस्त रहेगी, इसलिए नड्डा प्रत्याशियों की सूची फाइनल करने के बाद उत्तराखंड आएंगे। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी चाहती है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष लोस चुनाव की आचार संहिता लागू होने से पहले एक दौरा कर लें।
प्रदेश में पार्टी ने नड्डा के तीन कार्यक्रम तय किए हैं। पहला कार्यक्रम हल्द्वानी में होना है, जहां बूथ स्तर तक के पदाधिकारियों का सम्मेलन होगा। इसके बाद दूसरा कार्यक्रम हरिद्वार में होगा, जहां चुनाव प्रबंधन समिति की बैठक रखी गई है। तीसरा कार्यक्रम देहरादून में प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन के तौर पर होगा।
10 मार्च तक उम्मीदवार घोषित होने की संभावना-
पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, भाजपा हरिद्वार और गढ़वाल लोस सीट पर 10 मार्च तक उम्मीदवार घोषित कर सकती है। इस बीच केंद्रीय नेतृत्व ने प्रदेश नेतृत्व से फीड बैक लिया है। साथ ही एक एजेंसी भी दावेदारों का दमखम टटोल रही है।
गढ़वाल और हरिद्वार लोकसभा सीट पर अभी पेच फंसा-
गढ़वाल और हरिद्वार लोकसभा सीट पर अभी पेच फंसा है। इन दोनों सीटों पर उम्मीदवार बदले जा सकते हैं। केंद्रीय नेतृत्व ने टिहरी लोस सीट पर राजशाही परिवार पर भरोसा जताते हुए माला राज्य लक्ष्मी शाह पर फिर से भरोसा जताया है। हालांकि, प्रत्याशियों की घोषणा से पहले तक माला राज्य लक्ष्मी शाह के टिकट को लेकर तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं।
इस सीट पर कई दावेदारों के नाम भी सामने आ रहे थे, लेकिन अंततः माला राज्य लक्ष्मी को पार्टी ने लगातार तीसरे चुनाव अपना उम्मीदवार बनाया है। अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ लोकसभा सीट पर पार्टी ने अजय टम्टा पर फिर से विश्वास जताया है। इस सीट को लेकर अटकलों का बाजार खासा गर्म था
आगामी लोकसभा चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन के बीच अब समाजवादी पार्टी उत्तराखंड की टीम को हरिद्वार सीट पर टिकट का इंतजार है। इस सीट पर लोकसभा चुनाव में पार्टी का प्रत्याशी एक बार जीत दर्ज कर चुका है। वहीं, एक बार विधानसभा चुनाव में भी प्रत्याशी ने यहां जीत दर्ज की थी। आलाकमान ने अभी 10 मार्च तक का समय दिया है।
वोटों के गणित के हिसाब से समाजवादी पार्टी अपने लिए हरिद्वार सीट को मुफीद मानती है। 1996 के विधानसभा चुनाव में पार्टी प्रत्याशी अमरीश कुमार और 2004 लोकसभा चुनाव में उनके प्रत्याशी राजेंद्र कुमार के चुनाव जीतने के बाद से हर चुनाव में सपा इस सीट पर अपनी जीत की जुगत भिड़ाती आई है। इस बार भी राज्य के सपा नेताओं की निगाहें इस सीट पर हैं, जिसकी तैयारी भी अंदरखाने चल रही है।
हरिद्वार सीट पर ही दावा पेश किया-
इस बीच यूपी में सपा और कांग्रेस का गठबंधन हो गया है। ऐसे में मुश्किल ये है कि कांग्रेस के हाथों से उत्तराखंड की पांचों लोकसभा सीटों में से कोई सपा के हाथ आएगी या नहीं, इस पर पार्टी आलाकमान को निर्णय लेना है। सपा के प्रदेश अध्यक्ष शंभूनाथ पोखरियाल का कहना है कि आलाकमान ने अभी 10 मार्च तक इंतजार करने को कहा है।
इसके बाद तय होगा कि उनका प्रत्याशी उत्तराखंड के चुनावी मैदान में दम दिखाएगा या नहीं। पार्टी के राष्ट्रीय सचिव डॉ. सत्यनारायण सचान का कहना है कि अभी आलाकमान को इस पर निर्णय लेना है। बताया, राज्य की ओर से हरिद्वार सीट पर ही दावा पेश किया गया है।
सीट न मिली तो कांग्रेस को समर्थन-
यूपी के गठबंधन के हिसाब से देखें तो अगर सपा को उत्तराखंड में कोई सीट नहीं मिली तो पार्टी पांचों सीटों पर कांग्रेस को समर्थन दे सकती है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को इस पर निर्णय लेना है।
उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में मार्च के महीने में जनवरी जैसा मौसम हो रहा है। इसका असर मैदानी इलाकों में भी देखने को मिल रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र ने आज और कल (शनिवार और रविवार को) प्रदेशभर में मौसम बदलने की संभावना जताई है। पर्वतीय जिलों में भारी बर्फबारी की चेतावनी जारी कर दी है।
केंद्र की ओर से जारी पूर्वानुमान के अनुसार उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिले 3200 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में भारी बर्फबारी का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। जबकि, इन जिलों के साथ देहरादून, हरिद्वार, टिहरी और नैनीताल जिले के कुछ इलाकों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है।
इसके अलावा 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं भी चलने के आसार हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बीते कुछ वर्षों से जलवायु परिवर्तन और मौसम के बदलते चक्र के चलते मार्च में भी मौसम बदलने लगा है। इसका मुख्य कारण पश्चिमी विक्षोभ का सक्रिय होना है जिसकी वजह से बर्फबारी और बारिश की संभावनाएं बन रही हैं। 4 मार्च के बाद प्रदेश में मौसम साफ होने लगेगा।
तापमान पर नहीं पड़ रहा कोई खास असर-
पर्वतीय इलाकों में भले ही बर्फबारी-बारिश हो रही है लेकिन तापमान पर इसका कोई खास असर देखने को नहीं मिल रहा है। इसलिए ठंड से लोगों को राहत मिल रही है। बृहस्पतिवार के आंकड़ों की बात करें तो दून का अधिकतम तापमान 25.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से दो डिग्री अधिक है। मुक्तेश्वर का अधिकतम तापमान तो पांच डिग्री बढ़ोतरी के साथ 19.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। सिर्फ नई टिहरी का अधिकतम तापमान सामान्य से चार डिग्री की गिरावट के साथ 14.4 डिग्री रहा।
यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल (यूसीसी`) को मंजूरी के बाद से दून कलेक्ट्रेट में सब रजिस्ट्रार कार्यालय का नजारा बदला हुआ है। जमीन की रजिस्ट्री कराने वालों की भीड़ के साथ ही नवविवाहित जोड़े सब रजिस्ट्रार कार्यालय में बड़ी संख्या में पहुंचने पहुंचने लगे हैं। यूसीसी बिल विधानसभा में पास होने के बाद से ही विवाह पंजीकरण के आंकड़ों में 30 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया है।
सब रजिस्ट्रार कार्यालयों में विवाह पंजीकरण के लिए बेहतर व्यवस्था कर पृथक डेस्क बनवाई जा रही है। फरवरी में उत्तराखंड विधानसभा में समान नागरिक संहिता बिल को मंजूरी दी गई। विवाह, तलाक और उत्तराधिकार को लेकर समान नागरिक संहिता वाले इस विधेयक में सभी वर्ग के लोगों के लिए एक समान प्रावधान किया जा रहा है। इस बिल के कानून बनते ही उत्तराखंड में रहने वाले सभी लोगों के लिए विवाह पंजीकरण अनिवार्य होगा।26 मार्च 2010 के बाद हुए विवाहों का पंजीकरण अनिवार्य होगा।
6 महीने के भीतर सभी को करना होगा पंजीकरण-
यूसीसी लागू होने के बाद छह महीने के भीतर ऐसे सभी जोड़ों को पंजीकरण कराना होगा, जिनकी शादी 26 मार्च 2010 के बाद हुई है। वहीं 2010 से पूर्व हुए विवाह में भी दंपती चाहे तो अपना पंजीकरण करा सकेंगे। यूसीसी का बिल अभी बेशक कानून नहीं बना हो, लेकिन इसके प्रावधानों को देखते हुए लोगों में पहले से जागरूकता आ गई है। धार्मिक रीति-रिवाज से शादी के बाद जोड़े विवाह पंजीकृत कराने के लिए खुद पहुंच रहे हैं।
एक महीने में ही बढ़ गए 130 जोड़े-
देहरादून कलेक्ट्रेट में सब रजिस्ट्रार-2, सब रजिस्ट्रार-3, सब रजिस्ट्रार-4 के कार्यालय में विवाहों का पंजीकरण होता है। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार यूसीसी बिल पास होने से पहले प्रत्येक महीने 446 जोड़े अपने विवाह पंजीकृत कराने के लिए सब रजिस्ट्रार के यहां पहुंचते थे। यूसीसी बिल पास होने के बाद फरवरी में ही यह आंकड़ा 576 पर पहुंच चुका है, जो कि गत वर्ष की तुलना में करीब 30 फीसदी अधिक है।
एक तस्वीर ये भी-
वैशाली की शादी आदित्य के साथ विधिवित धार्मिक रीति-रिवाज से हो चुकी है। लेकिन समान नागरिक संहिता बिल में विवाह पंजीकरण की अनिवार्यता के चलते वह विवाह का पंजीकरण कराना चाह रहे हैं। सब रजिस्ट्रार कार्यालय में यह लोग विवाह पंजीकरण की औपचारिकताओं की जानकारी करने पहुंचे।
दूसरी तस्वीर-
रीना और प्रकाश के विवाह को पांच साल हो चुके हैं। लेकिन यूनिफॉर्म सिविल कोड में मार्च 2010 के बाद हुए सभी विवाहों के पंजीकरण को अनिवार्य किया गया है, इसलिए यह दंपती भी विवाह पंजीकरण कराने पहुंचा। सभी औपचारिकताओं के बारे में इन्हें कार्यालय स्टाफ ने बताया। यूसीसी कानून बनने के बाद होने वाली भीड़ की संभावना के चलते यह पहले ही अपना पंजीकरण कराने के लिए पहुंचे।
तलाक का नहीं है रजिस्ट्रेशन, ले रहे जानकारी-
यूसीसी में लागू होने के बाद तलाक आदेशों का भी रजिस्ट्रेशन कराना होगा। लेकिन अभी तलाक के रजिस्ट्रेशन के लिए कोई नहीं पहुंच रहा है। इसके बारे में जानकारी अवश्य लोग कर रहे हैं।
विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बढ़ती संख्या को देखते हुए व्यवस्था बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। आवेदकों को किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं हो, इसके लिए सभी सब रजिस्ट्रार को व्यवस्था बनाने के लिए कहा है। विवाह पंजीकरण के लिए अलग डेस्क बनाई जाएगी, ताकि आवेदक आसानी से कम समय में पंजीकरण करा सकें।-सोनिका, डीएम, देहरादून
उत्तराखंड प्रदेश के भाग्य निर्माण की जिम्मेदारी सबसे अधिक इस प्रदेश की सरकार की होती है सरकार की नीति ही प्रदेश का भविष्य तय करती है लेकिन जब इस पहाडी प्रदेश की दो मूलभूत सुविधाएं ही यहां से गायब दिखाई दें तो फिर किस विकास की आशा हम रख सकते हैं. प्रदेश के पर्वतीय जिलों में स्थायी शिक्षकों के 10,946 पद खाली हैं। इसमें 6,632 पद माध्यमिक और 4,314 बेसिक शिक्षा के हैं। पारदर्शी तबादलों के लिए तबादला एक्ट बनने के बाद भी शिक्षकों के पहाड़ न चढ़ने और राज्य लोक सेवा एवं अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से भर्ती में देरी इसकी वजह बताई जा रही है।
विधानसभा में प्रश्नकाल में विधायक संजय डोभाल के प्रदेश के पर्वतीय जिलों में शिक्षकों की कमी के सवाल पर शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने बताया, पर्वतीय जिलों में प्रवक्ताओं के 4,253 और सहायक अध्यापक एलटी के 2,379 पद खाली हैं। इन खाली पदों के विपरीत प्रवक्ता पद पर 2,594 और सहायक अध्यापक एलटी के पद पर 1,123 अतिथि शिक्षक कार्यरत हैं।
45 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापक ही नहीं-
बेसिक शिक्षा में 516 प्राथमिक विद्यालयों और 45 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापक नहीं हैं। प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक के 3,253 और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक के 500 पद खाली हैं। शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने कहा, जिलों में शिक्षकों की समय-समय पर सेवानिवृत्ति, पदोन्नति, तबादले आदि से शिक्षकों के खाली पदों की संख्या बदलती रहती है।
कहा, सभी खाली पदों पर शिक्षकों की उपलब्धता की आदर्श स्थिति कभी संभव नहीं है। खाली पदों को स्थानांतरण, समायोजन, पदोन्नति और सीधी भर्ती आदि के माध्यम से भरे जाने का यथासंभव लगातार प्रयास किया जाता रहा, ताकि छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित न हो।
सीआरपी, बीआरपी भर्ती में एससी को मिलेगा 19 प्रतिशत आरक्षण-
विधानसभा में विधायक ममता राकेश की ओर से पूछे गए प्रश्न के जवाब में शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने कहा, सीआरपी, बीआरपी के पदों पर आउटसोर्स के माध्यम से तैनाती की जाएगी। अनुसूचित जाति के लिए 19, अनुसूचित जनजाति के लिए चार और अन्य पिछड़ा वर्ग में 14 प्रतिशत के आरक्षण की व्यवस्था है। मंत्री ने यह भी बताया कि इन पदों को भरने के लिए आउटसोर्सिंग एजेंसी का चयन कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग के शासनादेश के अनुसार किया जाएगा।
डायटों के लिए अलग से होगी शिक्षकों की भर्ती-
प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की कमी की एक वजह राज्य के जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों में विद्यालयों से शिक्षकों को तैनात किया जाना है। शिक्षा मंत्री ने अमर उजाला से बातचीत में बताया, प्रदेश में जो डायट हैं, उनका अलग कैडर व नियमावली नहीं है। सरकार इसके लिए अलग कैडर व नियमावली बनाने जा रही है। वर्तमान में विद्यालयों से डायटों में शिक्षकों की तैनाती की जा रही, जिससे स्कूल खाली हो रहे हैं। इनके लिए कैडर व नियमावली बनने से इनमें अलग से नए शिक्षकों की भर्ती की जाएगी, जबकि इनमें तैनात शिक्षक मूल तैनाती पर जाएंगे।