Category Archive : देहरादून

कानून-व्यवस्था, सड़क सुधार पर मुख्यमंत्री धामी ने उच्च स्तरीय बैठक में दिए कड़े निर्देश

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 मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को सचिवालय में उच्च स्तरीय बैठक कर राज्य की कानून-व्यवस्था, सड़कों की स्थिति, सेवा पखवाड़ा एवं अन्य जनहित से जुड़े विषयों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए कहा कि जनता को सुगम, सुरक्षित एवं पारदर्शी व्यवस्था उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए। सभी संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी निगरानी, राज्य सीमाओं पर सघन चेकिंग और पुलिस की रात्रिकालीन गश्त को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए।

बरसात के बाद सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के लिए विशेष अभियान चलाने और इसके लिए निविदा प्रक्रिया समय पर पूर्ण करने के भी निर्देश दिए गए।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस 17 सितम्बर से 2 अक्टूबर गांधी जयंती तक प्रदेशभर में सेवा पखवाड़ा आयोजित किया जाएगा। इस अवधि में सभी जनपदों में सेवा, जनजागरूकता और जनहित से जुड़े कार्यक्रम होंगे। प्रत्येक जिले के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर समयबद्ध रूप से लागू करने के निर्देश भी दिए गए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वे स्वयं सड़क मार्ग से विभिन्न जिलों का भ्रमण कर व्यवस्थाओं का प्रत्यक्ष जायजा लेंगे।

रेत मिश्रित नमक की शिकायत पर उन्होंने तत्काल जांच कराने के निर्देश दिए और कहा कि दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

 

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महिला अपराधों पर कांग्रेस में उबाल, महिला कांग्रेस ने गोबर गोमूत्र से किया भाजपा मुख्यालय का शुद्धिकरण

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प्रदेश में महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध की रिपोर्ट सार्वजनिक होने पर प्रदेश महिला कांग्रेस ने भाजपा कार्यालय कूच किया। प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला के साथ कांग्रेसी बलवीर रोड स्थित भाजपा कार्यालय का घेराव करने पहुंचे।पुलिस ने बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। कांग्रेसियों ने इस दौरान जमकर नारेबाजी की। महिला कांग्रेस कार्यकर्ता वहीं पर धरने पर बैठ गईं। कांग्रेस ने प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों की बात कहते हुए भाजपा पर हमला बोला। इस दौरान पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत भी प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने भी भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। हंगामे के दौरान पुलिस ने महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला सहित पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत और अन्य कांग्रेसियों को गिरफ्तार कर लिया। जिनको बाद में रिहा किया गया।

कांग्रेस अध्यक्ष ज्योति रौतेला के नेतृत्व में महिला कांग्रेस ने बलबीर रोड स्थित भाजपा कार्यालय का घेराव किया और गौमूत्र व गोबर से भाजपा कार्यालय का शुद्धिकरण किया।इस दौरान सड़कों पर घण्टों हंगामा होता रहा और कॉंग्रेस नेताओं ने जमकर नारेबाजी की। कॉंग्रेस अध्यक्ष ज्योति रौतेला और प्रदेश की महिला कॉंग्रेस ब्रिगेड ने पुलिस की किलेबन्दी को तोड़ते हुए बैरिकेडिंग पर चढ़कर घण्टों प्रदर्शन किया।

मीडिया से बात करते हुए अध्यक्ष ज्योति रौतेला ने कहा कि “आज भाजपा कार्यालय का गौमूत्र और गोबर से शुद्धिकरण करना हमारी मजबूरी थी। जब NARI 2025 रिपोर्ट देहरादून को देश के सबसे असुरक्षित शहरों में गिनाती है और NCRB के आँकड़े बताते हैं कि उत्तराखंड में महिलाओं पर अत्याचार हर साल बढ़ रहे हैं, तो सवाल उठाना ही होगा।

दिन में 70% महिलाएँ खुद को सुरक्षित मानती हैं लेकिन रात में यह भरोसा केवल 44% रह जाता है। 50% महिलाएँ सार्वजनिक परिवहन में उत्पीड़न झेल चुकी हैं और केवल 25% को ही पुलिस पर भरोसा है। 2022 में 4,337 मामले दर्ज हुए, जिनमें 867 बलात्कार और 637 बच्चों के खिलाफ यौन अपराध थे। क्या यह बेटियों के लिए सुरक्षित माहौल है? भाजपा सरकार आँकड़े छिपाकर पीठ थपथपा रही है, जबकि महिलाएँ त्रस्त हैं। हमारा यह प्रतीकात्मक शुद्धिकरण भाजपा सरकार और प्रशासन को जगाने का प्रयास है।”

भाजपा मुख्यालय के करीब पुलिस ने सख्त बैरिकेडिंग लगा दी थी लेकिन कॉंग्रेस का जोश हाई नजर आया सुबह तय समय पर कॉंग्रेस के सैकड़ों कार्यकर्ता और दिग्गज नेताओं का जुटना शुरू हो गया था जो धीरे धीरे बड़े रैली के रूप में तब्दील हो गया और पूरा हुजूम बलबीर रोड स्थित भाजपा मुख्यालय की तरफ बढ़ने लगा जिसका नेतृत्व खुद ज्योति रौतेला कर रही थी…

 

इस विरोध प्रदर्शन में शामिल पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत ने कहा कि “भाजपा सरकार महिलाओं के प्रति असंवेदनशील है। आये दिन उत्पीड़न की घटनाओं में भाजपा के मंत्री, विधायक और कार्यकर्ताओं का नाम आता है लेकिन मुख्यमंत्री धाकड़ धामी सिर्फ अपनी पीठ थपथपाने में लगे रहते हैं।”

 

महिला कॉंग्रेस अध्यक्ष ने जारी किया रिपोर्ट कार्ड —

•   NARI 2025 रिपोर्ट के अनुसार देहरादून देश के शीर्ष 10 असुरक्षित शहरों में शामिल है।
•   सुरक्षा स्कोर: 60.6% (राष्ट्रीय औसत 64.6%)
•   दिन में सुरक्षित महसूस करने वाली महिलाएँ: 70%
•   रात में सुरक्षित महसूस करने वाली महिलाएँ: 44%
•   सार्वजनिक परिवहन में उत्पीड़न झेलने वाली महिलाएँ: 50%
•   पुलिस में भरोसा रखने वाली महिलाएँ: केवल 25%
•   NCRB 2022 रिपोर्ट के अनुसार:
•   उत्तराखंड में महिलाओं के खिलाफ अपराध के कुल 4,337 मामले दर्ज हुए।
•   इनमें से 867 बलात्कार और 637 बाल यौन शोषण (POCSO) के मामले शामिल हैं।
•   यह आँकड़ा 2021 से 907 मामले अधिक है।
•   राष्ट्रीय स्तर पर 2020 से 2022 के बीच महिलाओं के खिलाफ अपराध की दर में 12.9% की वृद्धि हुई है (58.8 से बढ़कर 66.4 प्रति लाख महिलाएँ)।

कांग्रेस मुख्यालय पर भाजपाइयों का धावा, कांग्रेसियों ने ललकारा,एक घंटे तक गूंजते रहे नारे

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सोमवार की दोपहर साढ़े तीन बजे उस समय तनावपूर्ण माहौल बन गया जब भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय राजीव भवन पर अचानक धावा बोल दिया। लाठी-डंडों से लैस भाजपाइयों ने कांग्रेस और राहुल गांधी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

इस बीच कांग्रेस मुख्यालय में मौजूद कार्यकर्ता भी भड़क उठे और वरिष्ठ उपाध्यक्ष संगठन सूर्यकांत धस्माना के नेतृत्व में गेट पर पहुंचकर भाजपा कार्यकर्ताओं को खदेड़ दिया। करीब एक घंटे तक क्वालिटी चौक पर दोनों दलों के बीच पुलिस की मौजूदगी में तीखी नारेबाजी और धक्का-मुक्की होती रही।

कांग्रेस की ओर से पहले ही पुलिस महानिदेशक को चेतावनी पत्र भेजकर आशंका जताई गई थी कि भाजपा कार्यकर्ता मुख्यालय पर हमला कर सकते हैं, लेकिन सुरक्षा इंतजामों के बावजूद भाजपाई राजपुर रोड स्थित मुख्यालय तक पहुंच गए। स्थिति बिगडऩे पर सिटी मजिस्ट्रेट और एसपी सिटी ने मौके पर पहुंचकर धस्माना से कार्यकर्ताओं को शांत करने का अनुरोध किया, जिस पर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताते हुए सवाल उठाया कि पूर्व सूचना के बावजूद भाजपा कार्यकर्ता कैसे मुख्यालय तक पहुंच गए। आखिरकार धक्का-मुक्की और गाली-गलौच के बाद भाजपा कार्यकर्ता पीछे हट गए और कांग्रेस कार्यकर्ता  नारों के साथ वापस मुख्यालय लौट आए।

  • कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने लगाए नारे – वोट चोर गद्दी छोड़
  • महिला कार्यकर्ताओं के साथ गाली-गलौच का आरोप
  • कांग्रेस बोली – भाजपा राहुल गांधी की रैली से घबराई
  • पुलिस पर सुरक्षा में चूक का आरोप
  • कांग्रेस कार्यलाय में यह थे मौजूद
    कांग्रेस मुख्यालय पर हुए घटनाक्रम के दौरान वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौजूद रहे। इनमें ताहिर अली, राजेंद्र शाह, दिनेश कौशल, आयुष गुप्ता, रॉबिन त्यागी, अर्जुन पासी, ललित भद्री, गरिमा माहरा दसौनी, डॉ. प्रतिमा सिंह, सुजाता पॉल, सुशीला शर्मा, मोहन काला, पिया थापा, आशा मनोरमा शर्मा, नजमा खान, उदयवीर पुंडीर, धर्मपाल घाघट, करण घाघट, विशाल मौर्य, फारुक, पुनीत चौधरी समेत कई कार्यकर्ता शामिल रहे।

सीएम धामी ने पूरा किया वायदा, अग्निवीर आरक्षण नियमावली जारी

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सीएम धामी ने सेवामुक्त होने वाले अग्निवीरों को विभिन्न विभागों की वर्दीधारी सेवाओं में दस प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण प्रदान कर दिया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने एक और वायदे को पूरा करते हुए, सेवामुक्त होने वाले अग्निवीरों को विभिन्न विभागों की वर्दीधारी सेवाओं में दस प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण प्रदान कर दिया है।

इस संबंध में सोमवार को कार्मिक एवं सर्तकता विभाग की ओर से विधिवित तौर पर उत्तराखंड राज्याधीन सेवाओं में समूह ग के सीधी भर्ती के वर्दीधारी पदों पर सेवायोजन हेतु सेवामुक्त अग्निवीरों को क्षैतिज आरक्षण नियमावली – 2025 जारी कर दी है।


सैन्य बहुल प्रदेश होने के कारण उत्तराखंड सरकार के इस निर्णय को मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है। इसी नियमावली के जरिए अब सेवामुक्त हुए अग्निवीरों को विभिन्न विभागों के वर्दीधारी पदों पर 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण प्रदान किया जाएगा।

इसमें पुलिस आरक्षी (नागरिक/पीएसी), उप निरीक्षक, प्लाटून कमांडर पीएसी, अग्निशामक, अग्निशमन द्वितीय अधिकारी, बंदी रक्षक, उप कारापाल, वन आरक्षी, वन दरोगा, आबकारी सिपाही, प्रवर्तन सिपाही और सचिवालय रक्षक जैसे महत्वपूर्ण वर्दीधारी पद शामिल हैं।

“देश की सेवा कर लौटे पूर्व अग्निवीर प्रदेश का गौरव हैं। उन्हें सम्मान और रोजगार का अवसर देना हमारी जिम्मेदारी है। यह निर्णय सेवामुक्त हुए अग्निवीरों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक ठोस कदम है।

हमारी सरकार पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों को हर तरह से सेवायोजन का प्रयास कर रही है”।
पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड

मुख्यमंत्री बदलने की भ्रामक सूचना पर पुलिस की सख्ती

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देश के कई हिस्सों में मानसून ने कहर बरपाया हुआ है ,जिससे हिमालयी राज्य उत्तराखंड भी अछूता नहीं है ,

पहले उत्तरकाशी के धराली , पौड़ी और फिर चमोली के थराली में जो सैलाब लगातार मुश्किल पैदा कर रहा है वो रुकने का नाम नहीं ले रहा है ,
ऐसे में प्रदेश में कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रदेश के मुख्यमंत्री को बदलने की कई वीडियो / विभिन्न सोशल मीडिया माध्यम के जरिए अपुष्ट आधार पर दिखाई गई हैं , जिसको लेकर उत्तराखंड पुलिस ने कठोर क़दम उठा कर कुछ सोशल मीडिया पेज पर मुकदमा दर्ज कर कार्यवाही प्रारंभ की है .

भ्रम पैदा करने वालों की वजह से प्रभावित होते हैं राहत बचाव कार्य –

पुलिस से बातचीत कर ये जानकारी मिली कि इस तरह की भ्रामक सूचनाओं से आपदा के इस कठिन समय में राहत कार्य करने में रुकावट का सामना करना पड़ता है ..

आमजनमानस में भ्रम की स्थिति न बने इसलिए इस तरह की कार्यवाही अमल में लाई गई है .

उत्तराखंड के चार जिले भारी बारिश की चपेट में –

गौरतलब है कि इस मानसूनी दौर में बागेश्वर, चमोली , रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ जनपद काफी हद तक प्रभावित हैं जहां तमाम सरकारी एजेंसी के साथ ही SDRF और NDRF निरंतर आपदा बचाव राहत कार्य में जुटी हैं ,
झूठी ख़बर फैलाने से न केवल व्यवधान उत्पन्न होता है बल्कि सरकारी कामकाज पर भी असमंजस की स्थिति उत्पन्न होने की वजह से प्रशासनिक कार्य भी प्रभावित होता है .

उत्तराखंड पुलिस की आमजनता से अपील, अफवाहों पर न दें ध्यान –

इसी के मद्देनजर , उत्तराखंड पुलिस के डीजीपी दीपम सेठ की तरफ से भी ये अपील जारी की गई है कि भ्रामक सूचनाओं और अफवाहों पर ध्यान न दें ,

प्रदेश के सभी जिलों की एजेंसीज को भी निर्देश दिए गए हैं कि अफवाह फैलाने वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर नजर रखें ..

भारी बारिश से उत्तराखंड के साथ ही हिमाचल में भी मुश्किल हालात –

यहां ये भी महत्वपूर्ण है कि हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड , इस समय दोनों भी हिमालयी राज्य भीषण आपदा से गुजर रहे हैं ,

आपदा प्रभावितों की हर संभव मदद के लिए न केवल सरकार, बल्कि विपक्ष भी आपदा की इस कठिन घड़ी में पीड़ितों तक पहुंच कर राहत देने की भरपूर कोशिश में है ..

नाराजगी की अटकलों पर पूर्व CM त्रिवेंद्र रावत ने किया खारिज, सरकार में नेतृत्व में बदलाव की चर्चा को भी बताया हवा-हवाई

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सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के सुर नरम

बोले, नीति और नीलामी से खनन पट्टे दिए जा रहे, इसमें कोई बुराई नहीं

पूर्व मंत्री हरक सिंह बताएं कि जो पैसा दिया, क्या है उसका स्रोत

अधिकारियों को दी नसीहत, जनता के प्रति बनें जवाबदेह

 

देहरादून। दिल्ली में भाजपा के प्रदेश प्रभारी दुष्यंत कुमार से हुई मुलाकात के बाद देहरादून लौटने पर हरिद्वार सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के सुर नरम दिख रहे हैं। माना जा रहा है कि पार्टी हाईकमान ने त्रिवेंद्र समेत अन्य नेताओं को पार्टी लाइन पर चलने की ताकीद की है।डिफेंस कालोनी स्थित आवास पर पत्रकारों से बातचीत में त्रिवेंद्र ने उन अटकलों पर विराम लगाया, जिसमें दिल्ली में सांसदों के साथ हुई पार्टी संगठन की बैठक से तुरंत चले जाने को उनकी नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा था। उन्होंने कहा कि नाराजगी जैसी कोई बात नहीं थी। उन्हें कहीं जाना था, इसलिए तुरंत ही बैठक से चले गए थे।

 

उन्होंने राज्य सरकार में नेतृत्व में बदलाव की चर्चा को भी हवा-हवाई करार दिया और कहा कि धामी सरकार पूरे पांच साल चलेगी। बार-बार मुख्यमंत्री बदलना या इसकी चर्चा करना गलत है। उन्होंने विपक्ष कांग्रेस को भी आड़े हाथ लिया।

 

सांसद व पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात सामान्य प्रक्रिया है। इसमें हर जगह छेद ढूंढते रहें, यह ठीक नहीं है। खनन से जुड़े प्रश्न पर उन्होंने कहा कि सरकार नीति के तहत नीलामी के जरिये खनन पट्टे दे रही है तो इसमें बुराई क्या है। एक अन्य प्रश्न पर उन्होंने कहा कि गैरसैंण को भाजपा ने ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाया। यह स्थायी राजधानी कब बनेगी, इसका जवाब सरकार बेहतर दे सकती है।

 

पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत के आरोपों पर उन्होंने कहा कि वह उनका पूरा इतिहास जानते हैं। पांच-छह दिन से हरक सिंह काफी जोश में हैं। हो सकता है ये उनकी आंतरिक राजनीति का हिस्सा हो या कुछ और कारण हैं अथवा वह स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पूर्व में भाजपा ने संगठन चलाने के लिए पूरी पारदर्शिता के साथ चेक से चंदा लिया। हरक सिंह ने चंदे को लेकर बढ़ा चढ़ाकर बोला, लेकिन जो पैसा लिया गया वह चेक से आया। अब हरक बताएं कि इस पैसे का स्रोत क्या है।

विपक्ष कांग्रेस को आड़े हाथ लेते हुए उन्होंने कहा कि विधानसभा के मानसून सत्र में कांग्रेस ने सदन में जो व्यवहार किया, वह उचित नहीं है। उनकी जानकारी में आया है कि कार्यमंत्रणा समिति में पहले दिन आपदा का विषय विपक्ष की ओर से लाने पर सहमति बनी थी, लेकिन वह कानून व्यवस्था का मुद्दा लेकर आया। सरकार इस पर जवाब देती, लेकिन यह सब नियमों के तहत लाया जाना चाहिए था।पूर्व सीएम तीरथ सिंह रावत के भांजे के प्रकरण पर उन्होंने कहा कि पुलिस का जो काम है, उसे करना चाहिए। यह गंभीर प्रकरण है। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि इस मामले में लापरवाह अधिकारियों को आड़े हाथ लेने की जरूरत है। उन्होंने नौकरशाही को भी नसीहत दी। उन्होंने कहा कि नीतियों व निर्णयों का क्रियान्वयन शासन की जिम्मेदारी है। इसके लिए अधिकारियों को ठीक से काम करना चाहिए। जनता के प्रति उनकी जवाबदेही होनी चाहिए।

रेबीज संक्रमित युवक की निजी अस्पताल में हुई मौत, कुत्ते के काटने के छह माह बाद दिखे थे लक्षण

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रेबीज संक्रमित मरीज की सोमवार सुबह करीब सात बजे मौत हो गई। युवक को एम्स में भी राहत नहीं मिली थी। लिहाजा उसके परिजन उसे एक निजी अस्पताल ले गए थे। वहां पर उसने दम तोड़ दिया। दून अस्पताल में रविवार को रेबीज के गंभीर लक्षण दिखने वाले युवक को लाया गया था। करीब तीन घंटे तक उसे दून अस्पताल में उपचार दिया गया था। बाद में हालत बिगड़ने पर उसे एम्स ऋषिकेश रेफर कर दिया गया था।

अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर रविंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि व्यक्ति को पानी और उजाले से डर लगने के साथ ही उसके मुंह से लगातार लार गिर रही थी। उसके अंदर तीव्र आक्रामकता के लक्षण भी दिख रहे थे। मृतक की मां शशि शर्मा ने बताया कि उसे दून अस्पताल से एम्स ऋषिकेश लेकर गई थीं जहां पर उसको प्राथमिक उपचार दिया गया था। स्थिति में सुधार नहीं होने पर उसे दूसरे अस्पताल में लेकर गईं, जहां पर सुबह उसकी मौत हो गई।

 

कुत्ते के काटने के छह माह बाद दिखे रेबीज के गंभीर लक्षण, युवक एम्स रेफर

दून अस्पताल में रविवार को रेबीज के गंभीर लक्षण दिखने वाले एक 30 वर्षीय युवक को भर्ती किया गया। करीब चार घंटे बाद हालत बिगड़ने पर उसे एम्स ऋषिकेश रेफर कर दिया गया। युवक को पानी और उजाले से डर लगने के साथ ही उसके मुंह से लगातार लार गिर रही थी। साथ ही तीव्र आक्रामकता के लक्षण भी दिख रहे थे।

चिकित्सकों समेत वहां मौजूद सभी लोग हैरान हो गए। काफी देर तक चिकित्सक समझ ही नहीं पाए कि युवक को क्या परेशानी है। परिजनों ने जब छह महीने पूर्व युवक को कुत्ते के काटने की बात बताई तो चिकित्सकों को रेबीज होने का संदेह हुआ।

एंटी रेबीज वैक्सीन नहीं लगवाई गई
इसके बाद क्लीनिकल जांच की तो यह बात काफी हद तक पुख्ता भी हो गई। चिकित्सक के अनुसार युवक देहरादून का ही रहने वाला है। परिजनों ने यह बात भी बताई कि युवक को कुत्ते के काटने के बाद एंटी रेबीज वैक्सीन नहीं लगवाई गई।

रेबीज का नहीं है कोई उपचार 
डॉ. आरएस बिष्ट के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति रेबीज की चपेट में आ जाए तो उसका कोई उपचार नहीं है। ऐसे में लोगों का जागरूक होना बेहद जरूरी है। अगर किसी को गली या फिर पालतू कुत्ता काटता है तो उसे जरूरी तौर पर एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाना चाहिए।

दून अस्पताल में हर रोज वैक्सीन लगवाने पहुंच रहे 35 लोग 
दून अस्पताल के आपात चिकित्सा अधिकारी डॉ. अमित अरुण ने बताया कि अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाने हर रोज करीब 35 लोग पहुंच रहे हैं। इनमें से 10 से 12 लोग गंभीर घायल होते हैं जिनको एंटी रेबीज के साथ ही सीरम भी लगाना पड़ता है। इन दिनों कुत्ते काटने के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिली है।

27 करोड़ के चंदे में उत्तराखण्ड बीजेपी ने अपनाई पारदर्शिता,हरक सिंह पर भरोसा नहीं किया जा सकता-त्रिवेंद्र

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हरिद्वार से सांसद और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने हरक के ताजातरीन आरोपों का जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि संक्रमणकाल से गुजर रहे हरक सिंह की बातों पर भरोसा नहीं किया जाना चाहिए।

कांग्रेस नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए त्रिवेंद्र ने कहा कि हरक सिंह रावत पर भरोसा नहीं किया जा सकता। वह कब, क्या बोलेंगे, यह उन्हें खुद भी नहीं पता होता। इस समय वे अपने जीवन के संक्रमण काल से गुजर रहे हैं, इसलिए अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं।

कहा है कि मौजूदा हालात में प्रदेश में सुधार की सख्त जरूरत है। उन्होंने साफ कहा कि किसी भी सूरत में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की छवि को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। पार्टी की छवि खराब करने वालों को बार-बार चेताना संगठन का फर्ज है।

पत्रकारों से बातचीत में त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि पुलिस के कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कई मामलों में 8-8 महीने से प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है, वहीं कुछ मामलों में 2-2 महीने से रिपोर्ट लंबित है।
उन्होंने इसे बेहद चिंताजनक और अफसोसजनक स्थिति बताया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जनता ने भाजपा पर भरोसा जताते हुए 47 विधायक और पांच सांसद जीताकर दिए हैं। ऐसे में पार्टी का दायित्व है कि हर हाल में जनता के विश्वास को बनाए रखा जाए।

गौरतलब है कि जुलाई के महीने में पूर्व सीएम ने डीजीपी को पत्र लिख 50 करोड़ की धोखाधड़ी के मामले में कार्रवाई के लिए लिखा था। लेकिन कोई कार्रवाई नही हुई (देखें पत्र)।

इधर, पूर्व सीएम ने कांग्रेस नेता हरक के भाजपा को 30 करोड़ रुपये चंदा मिलने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी को 27 करोड़ रुपये का चंदा मिला था, जो पूरी तरह पारदर्शिता के साथ चेक द्वारा प्राप्त हुआ है। इसका एक-एक हिसाब मौजूद है।

उन्होंने कहा कि देश की हर राजनीतिक पार्टी को चंदा मिलता है और इसमें कोई गलत बात नहीं है। लेकिन यह जरूरी है कि मदद पारदर्शी तरीके से मिले।
भाजपा ने यही किया है। त्रिवेंद्र ने कटाक्ष करते हुए कहा कि हरक सिंह कभी-कभी सच बोल देते हैं, लेकिन अक्सर अगले ही दिन अपने ही बयान से पलट जाते हैं। खनन के मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में खनन होना जरूरी है, लेकिन यह केवल कानून और मर्यादा के दायरे में होना चाहिए।
अगर नदियों से नियंत्रित खनन नहीं होगा तो खेत-खलिहान कट जाएंगे और राजस्व की भी हानि होगी। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे तालाब से पानी लेना जरूरी है, लेकिन मशीन लगाकर पूरा तालाब खाली कर देना गलत है। उसी तरह खनन नियंत्रित और नियमों के तहत होना चाहिए।
गैरसैंण में संपन्न मानसून सत्र के दौरान विपक्ष के रवैये पर भी उन्होंने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विरोध करना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन यह मर्यादित और नियमों के दायरे में होना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस विधायकों के सदन में अमर्यादित आचरण की आलोचना करते हुए कहा कि अध्यक्ष के आसन के सामने बिस्तर लगाकर सोना लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत है।

त्रिवेंद्र ने दो टूक कहा कि यदि भविष्य में कांग्रेस सत्ता में आती है और भाजपा ऐसा व्यवहार करती है तो कांग्रेस को भी यह स्वीकार नहीं होगा। उन्होंने कहा कि जनता ने अपने विश्वास से प्रतिनिधियों को विधानसभा भेजा है। यदि विधायक अपना दायित्व नहीं निभाते हैं तो जनता समय आने पर हिसाब करना भी जानती है।

…मां धारी देवी की भी कसम खायी थी हरक ने

उल्लेखनीय है कि हरक सिंह रावत बीते कुछ दिन से भाजपा सरकार पर हमला कर रहे हैं। हाल ही में हरक सिंह ने एक और कसम खा डाली। हरक में कहा कि वे तभी माला पहनेंगे जब भाजपा की ‘अंत्येष्टि’ कर देंगे। हरक की।यह कसम में चर्चा का विषय बनी हुई है।
गौरतलब है कि 2012 में विजय बहुगुणा के सीएम बनने से खफा हरक सिंह ने मां धारी देवी की कसम खाकर कहा था कि कैबिनेट मंत्री नहीं बनेंगे। लेकिन कुछ महीने बाद विजय बहुगुणा कैबिनेट में मंत्री पद की शपथ ले ली थी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की चिकित्सकों को बड़ी सौगात, चिकित्सकों को मिलेगा एसडी एसीपी (SD ACP) का लाभ

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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के चिकित्सकों को बड़ी राहत और सौगात दी है। प्रांतीय चिकित्सा सेवा संवर्ग के चिकित्साधिकारियों को अब एसडी एसीपी (SD ACP) का लाभ प्रदान किया जाएगा। इस संबंध में स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने आदेश जारी कर दिए हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ हमारे डॉक्टर हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर पहाड़ की कठिन परिस्थितियों में भी चिकित्सक पूरी निष्ठा से कार्य कर रहे हैं। उनके हितों का ध्यान रखना हमारी प्राथमिकता है। एसीपी का लाभ मिलने से चिकित्सकों को न केवल आर्थिक मजबूती मिलेगी बल्कि सेवा के प्रति और अधिक समर्पण की भावना भी बढ़ेगी। सरकार हमेशा अपने डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के साथ खड़ी है।

 

स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि सरकार के आदेशानुसार प्रांतीय चिकित्सा सेवा संवर्ग के चिकित्साधिकारियों को एसीपी का लाभ शासनादेश संख्या 654 (दिनांक 14.07.2016) तथा शासनादेश संख्या 154 (दिनांक 04.02.2019) में निहित प्रावधानों के तहत प्रदान किया जाएगा। स्क्रीनिंग कमेटी की संस्तुति के आधार पर इस लाभ की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। कुल 196 पदों का विवरण इस प्रकार है। लेवल 11 में 70 पद स्वीकृत हैं जिनका ग्रेड पे ₹5400 है। लेवल 12 में 56 पद हैं जिनका ग्रेड पे ₹6600 निर्धारित है। लेवल 13 में दो श्रेणियाँ हैं, जिनमें 27 पद ₹7600 ग्रेड पे तथा 43 पद ₹8700 ग्रेड पे वाले हैं। इस प्रकार कुल मिलाकर सभी स्तरों को मिलाकर 196 पद बनते हैं।

इस फैसले से बड़ी संख्या में चिकित्साधिकारियों को लाभ मिलेगा और स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सशक्त बनाने में मदद मिलेगी।

जन मुद्दों पर सजग रहने के बजाय विपक्ष का सदन मे सोना दुखद: भट्ट

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भाजपा ने कांग्रेस पर स्वार्थपरक राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जन मुद्दों पर सजग रहने के बजाय विपक्ष सदन मे सो गया और उसकी निंद्रा नही टूटी। विपक्ष का सड़क से सदन के भीतर जन मुद्दों पर लड़ने की बात भी शिगूफा ही साबित हुआ। प्रदेशाध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद  महेंद्र भट्ट ने निशाना साधा कि आपदा के जख्मों पर मरहम लगाने के बजाय विपक्षी नेताओं ने अपने ऊपर लगे मुकद्दमों को लेकर हंगामा किया। वहीं सत्र समाप्ति को उचित बताते हुए कहा, सदन सिर्फ हंगामा करने, नींद लेने और राजनीति के लिए ही नही चलाया नहीं जा सकता है।

 

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने  गैरसैण सत्र में विपक्षी विधायकों द्वारा सदन में की गई तोड़फोड़ और अराजकता की कड़े शब्दों में निंदा की है। भट्ट ने कहा कि आज प्रदेश धराली, पौड़ी आदि अनेकों स्थानों पर आपदा के दंश का सामना कर रहा है। मुख्यमंत्री  पुष्कर धामी के नेतृत्व में शासन प्रशासन जनता के सहयोग से राहत बचाव कार्यों के संचालन और प्रभावितों को मदद पहुंचाने में लगा है। ऐसे में सहयोग के हाथ बढ़ाने के बजाय कांग्रेस पार्टी लगातार नकारात्मक राजनीति कर रही है। उनके नेताओं द्वारा लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन और राहत राशि को लेकर अफवाह फैलाई गई।

 

उन्होंने कहा कि जनभावनाओं का सम्मान करते हुए सरकार द्वारा पहले से ही गैरसैण में मानसून सत्र आहूत किया हुआ था। बेहतर होता कि सत्र के आगाज में त्रासदी से जान गंवाने और किसी भी तरह का नुकसान उठाने वालों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए, विस्तृत चर्चा होती। पक्ष विपक्ष बैठकर आपदा में राहत बचाव कार्यों और भविष्य की योजनाओं को लेकर एक सर्वव्यापी और सर्वसमावेशी मापदंड और नीति तैयार करने पर विचार करते। लेकिन बेहद दुखद और शर्मनाक है कि विपक्षी विधायकों ने असंवेदनशील, गैरजिम्मेदाराना रुख अपनाते हुए सदन की मर्यादाओं को तार तार कर दिया। उसपर बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि ये सब उन्होंने किया व्यक्तिगत लाभ और दलगत राजनीति की पूर्ति हेतु।

 

हैरानी है कि आपदा, विकास, जनहित या अपने क्षेत्र का कोई भी मुद्दा उन्हें सदन में उठाने के लिए महत्वपूर्ण नहीं लगा। वह नैनीताल में उनके वरिष्ठ विधायकों और नेताओं द्वारा फैलाई गई अराजकता पर हुई कानूनी कार्रवाई को लेकर अधिक उग्र हुए, सदन को बंधक बनाकर, अपनी अलोकतांत्रिक मांग मनवाने के उनके ऐसे कृत्य को जनता ने एक बार पुनः देखा है।

उन्होंने सरकार द्वारा संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करते हुए, सदन द्वारा तय कार्यवाही एजेंडे को पूर्ण करने पर खुशी जताई। विपक्ष के तमाम अवरोधों के वावजूद सत्र में अनुपूरक बजट समेत अन्य विधेयकों की मंजूरी के लिए उन्होंने प्रदेशवासियों की तरफ से सीएम धामी का आभार व्यक्त किया। साथ ही सत्र को लेकर विपक्ष की मंशा पर सवाल खड़े करते हुए कहा, सिर्फ हंगामा करने और राजनीति के लिए ही सदन नहीं चलाया जा सकता है। विधानसभा कार्यमंत्रणा समिति द्वारा जो भी सदन का बिजनेस निर्धारित किया गया था उसे पूरा किया गया। ऐसे में सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करना ही एकमात्र उचित विकल्प था। उन्होंने सीधे आरोप लगाया कि विपक्ष का मकसद  जनता के मुद्दों को सदन में उठाने से रोकना था। वे नहीं चाहते थे कि धर्मांतरण कानून को अधिक कठोर करने पर चर्चा हो, अवैध मदरसों पर कार्रवाई के विधेयक पर चर्चा न हो और आपदा पीड़ितों और बचाव राहत पर बात न हो।

 

वहीं सदन की कार्रवाई को लेकर विपक्ष पर व्यंग कसते हुए कहा, कांग्रेस के पास जनहित को लेकर कोई सवाल नहीं थे, इसलिए उनके विधायक सदन में नींद पूरी करते रहे, भट्ट ने  आरोप लगाया कि विपक्ष के नेता यशपाल आर्या तक अपने केस हटाने और अपने निजी फायदे के लिए अपनी भूमिका का दुरुपयोग करते नजर आए। एक कड़वा सच सामने आया है कि कांग्रेस नेता सपनों की दुनिया में बाहर खोए और सदन में सोए रहते हैं। कांग्रेसी विधायकों ने सदन में इस मर्तबा विपक्षी राजनीति का विकृत रूप पेश किया है। दिनभर सदन में हंगामा और तोड़फोड़ और रात में उसी सदन में खर्राटे भरना, लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए बेहद शर्मनाक है।