Category Archive : उत्तराखंड

बनभूलपुरा रेलवे अतिक्रमण मामले में पूर्व में लगी सुप्रीम रोक रहेगी जारी,

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सुप्रीम कोर्ट ने बहुचर्चित बनभूलपुरा रेलवे अतिक्रमण मामले पर सुनवाई के बाद मामले की अगली सुनवाई के लिए दो दिसंबर की तिथि नियत की है। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में लगी रोक को जारी रखा है.जस्टिस सूर्यकांत व जस्टिस जयमाला बागची की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार अबदुल मतीन सिद्धकी ने सुप्रीम कोर्ट में लीव टू अपील दायर कर हाईकोर्ट की खंडपीठ के आदेश को चुनौती दी थी जिसमें हाईकोर्ट ने बलभूलपुरा से अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे। सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ के समक्ष रेलवे, राज्य सरकार और कब्जेदारों की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने अपनी-अपनी दलीलें रखीं।

 

सुनवाई के दौरान रेलवे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ऐश्वर्या भाटी ने पैरवी की जबकि राज्य सरकार की ओर से अभिषेक अत्रे ने पक्ष रखा। रेलवे ने न्यायालय के समक्ष कहा कि रेल सेवाओं के विस्तार एवं निर्माण के लिए 30 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है और इस भूमि पर हुए अतिक्रमण को शीघ्र हटाकर रेलवे को उपलब्ध कराया जाना जरूरी है। रेलवे ने जमीन जल्द खाली कराने के लिए न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग की। वहीं कब्जेदारों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद, प्रशांत भूषण सहित अन्य अधिवक्ता पेश हुए। उन्होंने कहा कि जिस भूमि की मांग रेलवे कर रहा है वह पूर्व लिखित दावे में शामिल नहीं थी और रिटेनिंग वॉल के निर्माण के बाद रेलवे के इंफ्रास्ट्रक्चर को अब कोई खतरा नहीं है। इसके साथ ही कब्जेदारों के अधिवक्ताओं ने बनभूलपुरा के निवासियों को प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत स्थानांतरित करने के प्रस्ताव का विरोध किया और इसे अनुचित बताया। इस पर रेलवे के अधिवक्ताओं ने विरोध दर्ज कराया।

अध्ययन में खुलासा…बादल या झील फटने से नहीं, इस वजह से धराली में मची थी तबाही

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धराली आपदा का कारण बादल या कोई कृत्रिम झील फटना नहीं था बल्कि लगातार बारिश और तेज गति से आए मलबे के कारण तबाही मची थी। 4600 मीटर की ऊंचाई से धराली में एक सेकेंड में आठ मीटर की रफ्तार से मलबा पहुंचा था। यहां पर आसपास के क्षेत्र की तुलना में सबसे अधिक तेजी से मलबा आया था।

इसका उल्लेख नेचुरल हेजर्ड रिसर्च जर्नल में द धराली कैटास्ट्रॉफिक डिजास्टर : ए वॉकअप कॉल फ्राम द खीर गंगा शीर्षक से पेपर में प्रकाशित किया गया। जिसको वाडिया हिमालय भू विज्ञानसंस्थान के वैज्ञानिक संदीप कुमार, तारिक अनवर, मो. शाहवेज, हरितभ राणा, देवांशु गोदियाल ने तैयार किया। वैज्ञानिक संदीप कुमार और तारिक अनवर ने बताया कि धराली क्षेत्र सिस्मिक और एमसीटी जोन है। छोटे भूकंप से पहाड़ अस्थिर होते हैं, इसके अलावा पहाड़ों की संरचना भी दरार वाली है। दिन और रात में तापमान के अंतर से भी चट्टानों पर असर पड़ता है। ग्लेशियर के पीछे जाने के कारण मोरेन (मलबा) रहता है, वह लगातार बारिश के कारण पानी के साथ मिलकर नीचे की तरफ तीखे ढलान होने के कारण तेजी से पहुंचा और काफी नुकसान हुआ। वैज्ञानिकों के अनुसार नदी, गदेरों के आसपास निर्माण नहीं होना चाहिए। इसके अलावा यहां पर लगातार निगरानी और अध्ययन किया जाना चाहिए।

सड़क भी अधूरी, रिश्ते भी अधर में…बनते-बनते बिगड़ जा रही बारकोट गांव में युवाओं की शादी की बात

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चमोली जिले के नारायणबगड़ ब्लॉक के ग्राम पंचायत किमोली का बारकोट तोक राज्य बनने के 25 साल बाद भी सड़क सुविधा से नहीं जुड़ पाया है। सड़क की असुविधा युवाओं के रिश्ते में रुकावट बन रही है। गांव के सात से आठ युवा कुंवारे है। रिश्ते के लिए यदि बात हो भी जाए तो सड़क असुविधा की बात किए कराए पर पानी फेर दे रही है।

 

ऐसे में युवाओं को सड़क और रिश्ते का इंतजार बरकरार है।बारकोट गांव में वर्तमान में 25 परिवार निवास करते है। ग्रामीण पिछले कई वर्षों से लगातार सड़क की मांग करते आ रहे हैं लेकिन ग्रामीणों को सड़क सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में ग्रामीणों को गांव से मुख्य सड़क आगर तक पहुंचने के लिए चार से पांच किमी की पैदल खड़ी चढ़ाई पार करनी पड़ती हैं।

Road inconvenience is becoming a hindrance in youth relationship Karnaprayag Barkot Village Chamoli News

जिला पंचायत सदस्य सुरेंद्र सिंह कनेरी ने कहा कि सड़क के मामले को जिले के सर्वाेच्च सदन में भी उठाया गया है। ग्रामीण पंचम सिंह भंडारी बताते हैं कि उनके बेटे के लिए कई रिश्ते ढूंढ़ लिए हैं लेकिन लड़की पक्ष को सड़क न होने का पता लगने पर वे शादी से इन्कार कर रहे हैं। ऐसे में सड़क के साथ-साथ बेटे की शादी का इंतजार भी करना पड़ रहा है।

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गुड़गांव में नौकरी करने वाले 26 वर्षीय युवक अनिल सिंह के अनुसार पिछले दो साल से लगातार परिवार वाले रिश्ते देख रहे हैं। थराली, नौटी आदि जगह रिश्ता देखने भी गए थे। लड़की पक्ष के लोग पूछते है कि गांव से कितनी दूर है सड़क, जब उनको गांव तक सड़क न होने का पता लगता है। तो वे रिश्ता करने से मुकर जाते हैं।

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27 वर्षीय राकेश सिंह दिल्ली में जॉब करते हैं। वह बताते हैं कि गौचर, कर्णप्रयाग, गैरसैंण कई जगह लड़की देखने गया हूं लेकिन हर बार सड़क न होने की वजह से रिश्ता नहीं हो पाता है। पिछले दो साल से परिवार वाले कई रिश्ते ढूंढ़ते थक गए हैं। पता नहीं कब सड़क बनेगी और कब रिश्ता होगा।

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बारकोट गांव की सड़क को पीजीएजीएसवाई के चौथे चरण के लिए भेजा गया है। जिसकी स्वीकृति प्राप्त हो गई है। सड़क के लिए डीपीआर बनने के बाद आगे की कार्यवाही शुरू की जाएगी। जल्द ही अन्य सड़कों के लिए भी तेजी से काम हो रहा है। -भूपाल राम टम्टा, विधायक थराली।

विश्‍व विजेता क्रिकेटर स्नेह राणा ने सीएम धामी से की मुलाकात

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुख्यमंत्री आवास में महिला क्रिकेट विश्व कप विजेता टीम की सदस्य एवं उत्तराखंड की गौरव क्रिकेटर स्नेह राणा ने भेंट की। इस अवसर पर विशेष प्रमुख सचिव खेल अमित सिन्हा भी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री धामी ने स्नेह राणा को भारतीय महिला क्रिकेट टीम की शानदार जीत पर बधाई दी। कहा कि यह उपलब्धि पूरे देश और उत्तराखंड के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि स्नेह राणा ने अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन और संघर्षशीलता से देश और प्रदेश का नाम विश्व पटल पर रोशन किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्नेह राणा जैसी खिलाड़ी उत्तराखंड की बेटियों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को हरसंभव सहयोग और प्रोत्साहन देने के लिए प्रतिबद्ध है। खेल नीति के माध्यम से खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, नौकरी और आर्थिक सहायता जैसी सभी सुविधाएं दी जा रही हैं। स्नेह राणा ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार की ओर से खिलाड़ियों को जो सहयोग मिल रहा है, उससे राज्य में खेलों का वातावरण और अधिक सशक्त हुआ है। उन्होंने कहा कि वह भविष्य में भी देश और प्रदेश का नाम रोशन करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहेंगी।

उत्तराखंड में लागू होगी देवभूमि परिवार योजना, उपनल सहित इन 12 प्रस्तावों पर लगी मुहर

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उत्तराखंड में देवभूमि परिवार योजना लागू होगी। देवभूमि परिवार योजना के तहत उत्तराखंड में रह रहे परिवारों की आईडी बनेगी। प्रदेश कैबिनेट की हुई बैठक में आज यह फैसला लिया गया। इसके अलावा 12 प्रस्तावों पर मुहर लगी।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में  कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। बैठक में 12 प्रस्तावों को मंजूरी मिली है। उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम कर्मचारियों के नियमितीकरण और वेतन के मामले में मंत्रिमंडल की उप समिति गठित होगी, जो दो महीने के भीतर देगी अपनी रिपोट सौंपेगी।

 

उपनल से विदेशों में भी मिलेगी नौकरी
निर्णय लिया गया कि उपनल के माध्यम से अब विदेशों में भी नौकरी मिलेगी। वहीं आपदा में मृतक आश्रितों को चार लाख के स्थान पर पांच लाख मिलेंगे। वही पक्का मकान ध्वस्त होने पर पांच लाख दिए जाएंगे।दैनिक, संविदा और तदर्थ कर्मचारियों के मामले में मंत्रिमंडल की उप समिति गठित होगी, जो इनके नियमितीकरण को लेकर कट ऑफ डेट तय करेगी। प्रदेश में देवभूमि परिवार योजना लागू होगी। देवभूमि परिवार योजना के तहत उत्तराखंड में रह रहे परिवारों की आईडी बनेगी।

2027 चुनाव- कांग्रेस की टीम से भाजपा में हलचल,गणेश-हरक-प्रीतम की त्रिवेणी ने बढ़ाया राजनीतिक तापमान

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काफी सोच विचार के बाद कांग्रेस ने  भाजपा के आकाश में  अपने फाइटर  उतार दिए। बीते तीन साल से आधी अधूरी धामी सरकार पर कांग्रेस के नए लेकिन अनुभवी फाइटर बमबारी के लिए पूरी तरह तैयार है। टीम कांग्रेस की तैयार हुई और भाजपा चुनौती कई गुना बढ़ गयी।

मंगलवार की देर रात कांग्रेस आलाकमान ने लोकसभा चुनाव में हार के बावजूद भाजपा की छांछ छोल (परेशान व बेचैन कर देना) चुके गणेश गोदियाल को एक बार फिर संगठन की बागडोर सौंपी है।

मौजूदा अध्यक्ष करण माहरा को हटाते हुए गोदियाल को आगे लाकर कांग्रेस ने अपने इरादे जता दिए। हालांकि, 2022 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद इसी आलाकमान ने गोदियाल को संगठन अध्यक्ष पद से हटा दिए थे । लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में गोदियाल ने जबर्दस्त ढंग से चुनाव लड़ते हुए भाजपा को अतिरिक्त मेहनत के लिए मजबूर कर दिया था।

गोदियाल के कड़े चुनावी सँघर्ष को  कांग्रेस आलाकमान ने भी सराहा था। बहरहाल, 11 नवंबर को कांग्रेस ने गणेश गोदियाल, प्रीतम सिंह रावत व हरक सिंह रावत को चुनाव की बागडोर देकर भाजपा के रणनीतिकारों को भी नये सिरे से सोचने पर मजबूर कर दिया।

Ganesh Godiyal (@UKGaneshGodiyal) / Posts / X

बीते कुछ समय से राजनीतिक जिम्मेदारी से मुक्त चल रहे हरक सिंह रावत को चुनाव प्रबंधन कमेटी का अध्यक्ष बनाकर चुनावी माहौल बनाने की कोशिश की है। 2022 में चुनाव नहीं लड़ने वाले हरक सिंह इन दिनों सीबीआई व ईडी का सामना भी कर रहे हैं।

बावजूद इसके हरक सिंह भाजपा पर कड़े प्रहार करने से नहीं चूक रहे हैं।  चुनावी माहौल बनाने में हरक सिंह की विशिष्ट शैली पार्टी के बहुत काम आएगी। हालांकि, अब केंद्रीय जांच एजेंसी हरक सिंह पर ज्यादा कड़ा शिकंजा कस सकती है।

कांग्रेस आलाकमान ने चकराता से पार्टी विधायक प्रीतम सिंह को 2027 के लिए चुनाव प्रचार कमेटी का अध्यक्ष बनाया है। प्रीतम सिंह का विधानसभा के अंदर और बाहर आक्रामक प्रदर्शन रहता है। बीते दिनों प्रीतम सिंह ने देहरादून की जिला पंचायत अध्यक्ष सीट जीतकर भाजपा को करारी हार दी थी।

कांग्रेस ने गढ़वाल से गोदियाल, हरक व प्रीतम का चयन कर चुनावी जंग का ऐलान कर दिया है। साथ ही संगठन के जिलों में भी अध्यक्षों की नियुक्ति कर मुकम्मल टीम मैदान में उतार दी है।

जमीन पर भाजपा से भिड़ने की जिम्मेदारी गढ़वाल के कंधों पर है तो विधानसभा में मोर्चा संभालने का अहम कार्य नेता विपक्ष यशपाल आर्य और उपनेता भुवन कापड़ी सम्भाल रहे हैं।

कांग्रेस की नई टीम के गठन में पूर्व सीएम हरीश रावत के बीते दिनों खेले गए ब्राह्मण कार्ड की भी अहम भूमिका मानी जा रही है। जिलाध्यक्षों में भी इसकी झलक मिल रही है। हालांकि, करण माहरा के करीबी हरक सिंह को चुनाव प्रबन्धन की जिम्मेदारी देते हुए पार्टी के अंदर संतुलन बनाने की भी कोशिश की गई है। अब हरक की नई भूमिका को हरीश रावत कैम्प किस हिसाब से लेता है, यह देखना भी दिलचस्प रहेगा।

कांग्रेस हाईकमान ने सक्रिय हरदा को सीधे तौर पर कोई चुनावी जिम्मेदारी तो नहीं दी है लेकिन नयी टीम में उनके पसन्दीदा गोदियाल और प्रीतम सिंह को भारी भरकम जिम्मेदारी अवश्य दी।

कांग्रेस की नई टीम का ऐलान होते ही पार्टी के अंदर करंट दौड़ता दिखाई दे रहा है। उधर, टूटी फूटी कैबिनेट लिए सीएम धामी और भाजपा आलाकमान को कांग्रेस के इन नए फाइटर्स के हमलों को नाकाम करने के लिए भगीरथ प्रयास करने होंगे । चुनावी जंग रोचक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। आने वाले कल में राजनीतिक उठापटक का दौर चलने की पूरी उम्मीद है।

 

इसी माह भाजपा मोर्चाें के जिला अध्यक्षों की हो जाएगी तैनाती, पदाधिकारियों की भी हो सकती है घोषणा

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इसी महीने भारतीय जनता पार्टी के मोर्चाें के जिला अध्यक्षों को चुनने की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। इसके अलावा मोर्चें के प्रदेश पदाधिकारी के नामों की भी घोषणा हो सकती है। भाजपा के भाजयुमो, महिला, अल्पसंख्यक समेत छह मोर्चे हैं। मोर्चे के प्रदेश अध्यक्षों की घोषणा हो चुकी है पर उनकी टीम बननी बाकी है।

इसके अलावा भाजपा के संगठनात्मक 19 जिले हैं, यहां पर भी मोर्चे के जिला अध्यक्ष बनने बाकी हैं। सूत्रों के अनुसार पार्टी का फोकस बिहार चुनाव में था। राज्य संगठन के बड़े नेता भी चुनाव में जिम्मेदारी निभा रहे थे। बिहार का चुनाव जल्द संपन्न होने वाला है। ऐसे में बड़े पदाधिकारी जल्द वापस आने वाले हैं। इसके बाद से मोर्चे में प्रदेश पदाधिकारियों के नामों पर विचार-विमर्श के बाद नामों की घोषणा हो सकती है।

इसके अलावा मोर्चे के जिला अध्यक्षों को चुनने की प्रक्रिया होगी। इसके बाद जिला इकाईयों के टीम भी अस्तित्व में आ सकती है। इस संबंध में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामंत्री तरुण बंसल कहते हैं कि मोर्चो के जिला अध्यक्ष चुनने और मोर्चाें के प्रदेश पदाधिकारियों बनाए जाने को लेकर जल्द प्रक्रिया को पूरा कर लिया जाएगा।

प्रदेश में हड़ताल पर गए 22 हजार उपनल कर्मचारी

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लंबित मांगों पर अमल न होने से नाराज प्रदेश के उपनल कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। कर्मचारियों ने परेड ग्राउंड में धरना दिया। वहीं, कर्मचारियों की शासन में हुई वार्ता भी बेनतीजा रही। कर्मचारियों का कहना है, जब तक मांगों पर अमल नहीं होगा आंदोलन जारी रहेगा।

उपनल कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के प्रदेश संयोजक विनोद गोदियाल ने कहा, प्रदेश में कर्मचारी हितों की अनदेखी की जा रही है। हाईकोर्ट के वर्ष 2018 के आदेश के बाद भी कर्मचारियों को न तो नियमित किया गया न ही उन्हें समान कार्य के लिए समान वेतन दिया जा रहा है। उपनल के माध्यम से विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मचारियों की सेवाएं भी प्रभावित की गईं। इससे नाराज कर्मचारियों ने आवश्यक सेवाएं भी ठप कर दी। महासंघ के महामंत्री विनय प्रसाद के मुताबिक कर्मचारियों को गृह सचिव शैलेश बगौली ने वार्ता के लिए बुलाया था। वार्ता के दौरान आश्वासन दिया गया कि कर्मचारियों को समान काम के लिए समान वेतन का जल्द आदेश जारी किया जाएगा।

वहीं, कर्मचारियों के नियमितीकरण के मामले में भी शीघ्र कार्रवाई होगी, लेकिन कर्मचारियों का स्पष्ट कहना है कि बिना लिखित आश्वासन व आदेश के कर्मचारी आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे। परेड ग्राउंड में धरना देने वालों में महासंघ के प्रदेश संयोजक हरीश कोठारी, कार्यकारी अध्यक्ष महेश भट्ट, संगठन मंत्री भूपेश नेगी, महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष मीना रौठाण आदि शामिल रहे।

Uttarakhand 22,000 UPNL employees went on strike in state essential services were also disrupted

देर रात भी परेड ग्राउंड में धरने पर रहे कर्मचारी
प्रदेशभर से देहरादून पहुंचे उपनल कर्मचारी देर रात भी परेड ग्राउंड में धरने पर रहे। कर्मचारियों का कहना है कि शासन ने आज भी वार्ता के लिए बुलाया है।

राज्य के 25 साल – विकास की रफ्तार या व्यवस्था की विकृति

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लेखक-  स्वतंत्र पत्रकार हरीश खखरियाल की कलम से….. 

“9 नवम्बर  2000…जब उत्तराखंड ने अलग राज्य बनने का सपना देखा था,तो उस सपने में शामिल  था – विकास, पारदर्शिता, रोजगार और ईमानदारी। आज, जब राज्य अपनी रजत जयंती मना रहा है,सवाल  उठता है —इन 25 सालों में उत्तराखंड ने क्या पाया, और क्या खो दिया ?”
सपना और सच्चाई का अंतर

“राज्य आंदोलन के दौरान नारा था —‘अपना राज, अपने लोग, अपनी पहचान।उम्मीद थी कि  शासन गावों तक पहुंचेगा और भ्रष्टाचार से मुक्त व्यवस्था  बनेगी, लेकिन  दो दशक बाद हकीकत कुछ  और ही बयान कर रही है।बेरोज़गारी, पलायन और भ्रष्टाचार की जडें अब हर विभाग में फैल चुकी हैं।
Claim Thousands of unemployed will be seen on the streets today, walking march up to 7 km | “बेरोजगार युवा बोले - GO बेरोजगारी GO”: सड़क पर उतरे सैकड़ों बेरोजगार, 7 Km

Uttarakhand News: 22 वर्ष के उत्तराखंड में पलायन ऐसा विषय, जिसका अभी तक नहीं हो पाया है समाधान - uttarakhand foundation day migration problem not solved in 22 years at uttarakhand

बढ़ता भ्रष्टाचार – सिस्टम में सडांध
 
राज्य गठन के साथ उम्मीद थी कि ‘छोटा राज्य, पारदर्शी शासन’ का सपना साकार होगा,मगर 25 साल बाद भ्रष्टाचार की जडें इतनी गहरी हैं कि  अब न्यायालयों को बार-बार दखल देना पड रहा है।​
Uttarakhand High Court Recruitment 2025 (eCourts.gov.in) New Notification
 
 विभागीय भ्रष्टाचार हो या भर्तियों  में धांधली —हाईकोर्ट  तक को कई बार CBI जााँच के आदेश देने पडे। बागवानी विभाग को किसानों  की आत्मा कहा जाता है,वहां तक भ्र्ष्टाचार की गंध पहुंच चुकी है,किसानों  के लिए  बनी योजनाएं , सब्सिडी  और ग्रांट्स फाइलों में अटककर अफसरशाही की भेंट चढ़ गईं।हालात इतने बिगड़े कि हाईकोर्ट को खुद  बागवानी  विभाग के भ्रष्टाचार की जााँच CBI से कराने के आदेश देने पडे।
CBI to question bank officials under scanner in 8.5 lakh mule accounts case - The Economic Times
और यह कहानी सिर्फ  एक विभाग की नहीं —सडक निर्माण  से लेकर खनन, शिक्षा और भर्ती परीक्षाओं तक,हर जगह ‘सिस्टम सवालों  के घेरे में है।

पेपर लीक और बेरोज़गारों की हताशा

पेपर लीक कांड ने युवाओं के भरोसे को तोड़ दिया  है। जिस युवा शक्ति को राज्य की रीड बनना था,,वही  आज  आज सडकों पर है,अपने हक़ और मेहनत की कीमत मांगते  हुए हर कुछ  महीनों में भर्ती  परीक्षाओं की जााँच, रद्दीकरण,और आंदोलनों की आवाज बनकर  सुनाई  देती है।
उत्तराखंड बेरोजगार संघ ने 10 फरवरी को उत्तराखंड बंद का आह्वान किया है – दिप्रिंट – एएनआईफ़ीड
पलायन रुकने के बजाय और बढ़ा है —आज पहाडों से हर रोज़ सैकडों युवा  रोज़गार की तलाश में मैदान की ओर उतर रहे हैं।​
अपराध और असुरक्षा – बदलता उत्तराखंड

कभी शांत प्रदेश कहा जाने वाला  उत्तराखंड अब अपराध की खबरों से भी अछूता नहीं रहा। हत्या, लूट और दुष्कर्म जैसी वारदातें अब यहां की सुर्ख़ियों में शामिल हैं,सवाल  उठता है — क्या हम वाकई  उस उत्तराखंड में हैं,जिसका  सपना 2000 में देखा गया था?”
 

विकास की रफ्तार – उप्लभ्धियाँ भी कम नहीं 

इन सबके बीच, उत्तराखंड ने विकास की राह पर भी कई कदम बढ़ाए हैं। चारधाम यात्रा के तलए ऑल वेदर  रोड प्रोजेक्ट,हवाई सेवाओं  का विस्तार,और शिक्षा स्वास्थ्य  के नए संस्थान — ये उप्लभ्धियाँ राज्य की प्रगति की तस्वीर दिखाती  हैं। पर्यटन , योग, और जैविक खेती के क्षेत्र में भी उत्तराखंड ने नई पहचान बनाई है। आज राज्य का GDP 3 लाख करोड के करीब पहुंच  रहा है,और प्रति व्यक्ति  आय में भी बढ़ोतरी हुई है।लेकिन सवाल वही  —क्या विकास का लाभ हर पहाडी गावं तक पहुंचा ?जनता का सवाल – जवाबदेहि कहां है?

जब हर कुछ  सालों में एक नया घोटाला सामने आता है,जब हर भर्ती  पर संदेह हो,जब युवाओं  की आाँखों में विश्वास की जगह निराशा  हो —तब रजत जयंती के जश्न पर ताली बजाना मुश्किल  हो जाता है। सवाल है  — क्या ये 25 साल जनता के लिए बदलाव  लाए या सिर्फ कुर्सियों के लिए ?

निष्कर्ष  – उम्मीद अब भी बाकी है

उत्तराखंड की कहानी संघर्ष से शुरू हुई थी,और उम्मीदों पर अटकी हुई है।ये राज्य युवाओं  की मेहनत और पहाडों की ईमानदारी से बना है।अगर राराजनीतिक इइच्छाशक्ति  ईमानदार हो,तो अगला अध्याय भरोसे और पारदर्शिता  का लिखा  जा सकता है। राज्य का सवाल अब भी वही  है —‘क्या खोया, क्या पाया?’ जवाब आने वाले सालों में तय करेगा कि पहाड़ों का सपना अधूरा रहेगा या पूरा होगा।”
“25 साल बाद भी सवाल वही  — भ्रष्टाचार बनाम विकास | उत्तराखंड @ 25”
 
ये लेखक के अपने स्वतंत्र विचार हैं… 

चौखुटिया स्वास्थ्य आंदोलन- कांग्रेस ने पुलिस दमन का किया विरोध. नेता विपक्ष आर्य और विधायक मदन बिष्ट पहुंचे धरना स्थल.

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विकासखण्ड चौखुटिया से स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के विरोध में देहरादून पहुंचे आंदोलनकारियों के साथ पुलिस द्वारा किए गए दमन को हम कड़ा नकारते हैं।

धरना स्थल पर पहुंचे नेता विपक्ष यशपाल आर्य व विधायक मदन बिष्ट ने कहा कि यह कार्रवाई न केवल अत्यंत निंदनीय है, बल्कि लोकतान्त्रिक मूल्यों के सीधा अपमान भी है।

स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधा माँगना कोई अपराध नहीं हो सकता। आंदोलनकारियों को रोकने, डराने और दबाने का प्रयास लोकतंत्र की आत्मा पर चोट है। जनता की आवाज़ को घेराबंदी कर दबाना सरकार के असंवेदनशील और अहंकारी रवैये को दर्शाता है — जो किसी भी नागरिक जगत के लिए स्वीकार्य नहीं।

आज आवश्यकता पुलिस बल की नहीं, योजनाओं, संसाधनों और संवेदनशीलता की है। स्वास्थ्य सुविधाएँ सभी नागरिकों का मूल अधिकार हैं, और इस अधिकार के समर्थन में जनता अकेली नहीं है — हम उनकी आवाज़ सदन से सड़क तक मजबूती से उठाते रहेंगे।

यह सरकार जितना दबाएगी, जनता की आवाज़ उतनी ही ऊँची और सशक्त होकर उठेगी। जनहित के मुद्दों पर समझौता नहीं होगा — यह लड़ाई जनता के हक़ की है और पूरी ताकत से जारी रहेगी।

जनता की आवाज़ को रोका नहीं जा सकता, जनता के अधिकारों को दबाया नहीं जा सकता।