धराली आपदा का कारण बादल या कोई कृत्रिम झील फटना नहीं था बल्कि लगातार बारिश और तेज गति से आए मलबे के कारण तबाही मची थी। 4600 मीटर की ऊंचाई से धराली में एक सेकेंड में आठ मीटर की रफ्तार से मलबा पहुंचा था। यहां पर आसपास के क्षेत्र की तुलना में सबसे अधिक तेजी से मलबा आया था।
उत्तरकाशी में धराली आपदा के बाद हर्षिल घाटी में बनी कृत्रिम झील बड़ी तबाही मचा सकती है. दरअसल यमुना नदी में स्यानाचट्टी के पास बनी कृत्रिम झील ने विकराल रूप ले लिया है. यह झील वॉटर बम’ बनती जा रही है. क्या होटल और क्या घर, सब पानी में डूब गए हैं. चार मंजिला कालिंदी होटल की तीन मंजिलें पानी में डूब गई है. पास में बनी पुलिस चौकी का एक मंजिल भी पानी में डूब गया है. पहले यमुनोत्री जाने वाले श्रद्धालु भी यहां बने पुल से होकर गुजरते थे. लेकिन कत्रिम झील की वजह से पुल भी पानी में पूरी तरह से डूब चुका है
हालांकि यमुना में बनी झील का जलस्तर देर रात से एक मीटर घटा है. लेकिन खतरा टला नहीं है. यमुना नदी की मूल धारा में लगातार गढ़ गाड़ बाधा बन रहा है. गढ़ गाड़ में लगातार मलवा और बोल्डर अपना रुख बदल रहा है. स्यानाचट्टी में बड़ी पार्किंग भी पानी में डूब चुकी है.
इतना ही नहीं स्यानाचट्टी सरकारी स्कूल की एक मंजिल पानी में पूरी डूब गई है.सभी सरकारी कागज भी पानी में नष्ट हो गए हैं. कुपड़ा गाड़ के मलवे ने यमुना नदी के मुहाना को ब्लॉक कर दिया है. झील से पानी निकाले जाना बहुत जरूरी है. लेकिन अगर झील टूटी तो यमुना नदी के पानी का वेग बढ़ जाएगा, जिससे तटीय क्षेत्रों में बड़ी तबाही मच सकती है.

कृत्रिम झील से अब तक हुआ कितना नुकसान?
- यमुनोत्री नेशनल हाइवे का मोटर पुल और सड़क जलस्तर से डूबा
- चार मंजिला होटल कालिंदी का दो मंजिल होटल पानी में डूबा
- पुलिस चौकी स्यानाचट्टी का एक मंजिला भवन पानी में डूबा
- GMVN गेस्ट हाउस पानी में डूबा
- स्यानाचट्टी बड़ी पार्किंग के पास पहुंचा यमुना नदी का पानी
- जूनियर हाईस्कूल के मैदान तक पहुंचा झील का पानी
झील को पंक्चर करना बड़ी चुनौती
रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए NDRF-SDRF पहले से मौजूद है. झील को पंक्चर करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है. क्यों कि पानी लगातार बढ़ रहा है. पिछले चौबीस घंटे में पुल पूरा डूब चुका है, जो पहले साफ दिखाई दे रहा था. क्रत्रिम झील में पानी इतना ज्यादा है कि 25 फीट तक होटल इसमें डूब चुका है. पहले 10-15 फीट नीचे नदी बहती थी. झील को पंक्टर करने और आसपास के लोगों के रेस्क्यू के लिए टीम मौके पर मौजूद है. ताकि लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जा सके.

वहीं पानी को निकालने की कोशिश की जा रही है. लेकिन यहां पर एक और फ्लड आया है.हालांकि उसने अपना रास्ता बदल लिया है. राहत की बात यह है कि रास्ता दूसरी तरफ गया है. कोशिश यही है कि पानी को किसी तरह से झील से निकाला जा सके.स्यानाचट्टी में आक्रोशित लोगों ने झील उतरकर प्रशाशन के विरुद्ध नारेबाजी की।
हालांकि प्रशासन ने एहतियातन स्थानीय लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया है। शुक्रवार को जिलाधिकारी प्रशांत आर्य और क्षेत्रीय विधायक संजय डोभाल ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।
Uttarkashi DM-प्रशांत आर्य
उत्तरकाशी के हर्षिल में बनी झील को आखिरकार शनिवार को सफलतापूर्वक पंचर कर दिया गया। झील से पानी की निकासी के लिए उत्तराखंड जल विद्युत निगम, सिंचाई विभाग, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। विभागीय टीमों ने नदी के समानांतर एक नहर तैयार कर झील के पानी को चैनलाइज किया। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद विभिन्न विभागों के 30 से अधिक कर्मचारियों ने शनिवार को युद्ध स्तर पर काम करते हुए झील से पानी की निकासी सुनिश्चित की।
पांच अगस्त की आपदा से धराली और हर्षिल में भागीरथी नदी का प्रवाह प्रभावित हो गया था। धराली में भागीरथी नदी का प्रवाह मुखबा गांव के ठीक नीचे हो रहा है, वहीं, हर्षिल में नदी के मुहाने पर बड़े-बड़े पेड़, बोल्डर और मिट्टी-गाद फंसने से यहां झील बनने लगी थी और इसका दायरा 1200 मीटर तक पहुंच गया था और झील की गहराई 15 फिट तक मापी गई थी। लगातार हो रही बारिश के बीच पानी की बहुत कम निकासी से बढ़ते जल स्तर पर यहां गंगोत्री हाईवे भी भी झील में समा गया था। झील के बढ़ते खतरे के बीच यूजेवीएनएल और सिंचाई विभाग के 30 इंजीनियरों की टीम के साथ ही सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन पिछले तीन दिन से झील को पंचर करने में जुटे थे। आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि शनिवार सुबह यहां भागीरथी को चैनेलाइज कर नदी के समान्तर पानी के प्रवाह शुरू करने के साथ ही मुहाने पर फंसे पेड़ों को हटाने के बाद पानी की निकासी बढ़ने से झील का जल स्तर घटने लगा। यहां विशेषज्ञ लगातार झील पर नजर बने हुए हैं।
पांच अगस्त को खीर गंगा के रौद्र रूप ने धराली और हर्षिल घाटी में सिर्फ घरों और संपत्तियों को ही नुकसान नहीं पहुंचाया बल्कि लोगों के मन पर भी गहरा असर डाला है। लापता अपनों की चिंता और तबाही के खौफ से कई लोग घबराहट, बेचैनी और नींद न आने जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
इस मानसिक पीड़ा को समझने के लिए स्टेट मेंटल हेल्थ अस्पताल सेलाकुई देहरादून के मनोचिकित्सक डॉ. रोहित गोदवाल और उनकी टीम ने धराली का दौरा किया। पहले दिन की जांच में करीब 150 लोगों में से 10 लोग गंभीर मानसिक समस्याओं से ग्रस्त मिले। डॉ. रोहित ने बताया कि ये लोग ज्यादातर वे हैं जिन्होंने अपनी आंखों से तबाही का मंजर देखा और जिनके परिजन अब भी लापता हैं।
डॉ. रोहित गोदवाल का कहना है कि यह पीटीएसडी (पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर) की स्थिति है। इस स्थिति में व्यक्ति को बार-बार घटना याद आती है। दिल की धड़कन तेज हो जाती है और वह छोटी-सी आहट से भी घबरा जाता है। दूसरे दिन के परीक्षण में भी 70 में से 10 लोग चिड़चिड़ापन और घबराहट से ग्रस्त पाए गए। सबसे अधिक प्रभावित बुजुर्ग और युवा थे। महिलाएं और बच्चों की संख्या बेहद कम है।
आठ दिन तक की काउंसलिंग
उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों गंगोत्री, धराली, गंगनानी, डबरानी, भटवाड़ी और हीना में शिविर लगाए हैं। डॉ. गोदवाल ने आठ दिन तक धराली और हर्षिल अस्पताल में लोगों की काउंसलिंग की। उन्होंने लोगों को सलाह दी है कि वे खुद को अकेला न रखें, घटना के बारे में बार-बार चर्चा करने से बचें और परिवार के साथ समय बिताकर माहौल को सकारात्मक बनाएं। यदि कोई मानसिक समस्या से जूझ रहा है तो वह हेल्पलाइन नंबर 144166 पर कॉल करके 24 घंटे काउंसलिंग और मार्गदर्शन ले सकता है।
कम्युनिटी हेल्थ सेंटर सहसपुर देहरादून के सीएमएस डॉ. मोहन डोगरा ने बताया कि कई लोगों ने थकान और कमजोरी की शिकायत की लेकिन दवा लेने और आराम करने के बाद अब उनकी हालत सामान्य है। वहीं धराली आपदा के नोडल अधिकारी डॉ. सीपी त्रिपाठी ने कहा कि आपदा के माहौल में गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों को जितना हो सके खुशनुमा माहौल में रखना चाहिए।
विगत 5 अगस्त की आपदा के बाद से धराली व आसपास के क्षेत्रों में खोज, बचाव और राहत कार्यों में जुटी टीमें राष्ट्रीय पर्व स्वतंत्रता दिवस पर भी अपने कर्तव्य से नहीं डिगी।एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस, आपदा प्रबंधन विभाग और विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों के कार्यकर्ताओं ने राहत कार्यों के बीच ही स्वतंत्रता दिवस का पर्व शालीनता और सादगी के साथ मनाया।आईजी अरुण मोहन जोशी ने ध्वजारोहण किया।
धराली में सोमेश्वर देवता मंदिर परिसर में सुबह निर्धारित समय पर सभी ने एकत्र होकर ध्वजारोहण किया, राष्ट्रगान गाया और बलिदानी को नमन किया। इसके बाद बिना समय गंवाए सभी दल दोबारा खोज-बचाव और राहत कार्यों में जुट गए। धराली में खोज बचाओ टीमों के अलावा ग्रामीण भी शामिल हुए।
धराली के साथ-साथ हर्षिल में भी भारतीय सेना और आईटीबीपी के जवानों ने स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित किया। जवानों ने तिरंगा फहराकर देश की सेवा और आपदा प्रभावित लोगों की मदद के संकल्प को दोहराया। ध्वजारोहण के तुरंत बाद वे भी प्रभावित इलाकों में राहत और खोज-बचाव कार्यों में सक्रिय हो गए।
धराली हर्षिल आपदा के एक हफ्ते बाद प्रदेश सरकार ने 68 लापता लोगों की सूची जारी की है। लापता लोगों में 24 नेपाल के निवासी हैं। उत्तरकाशी के आपदा परिचालन केंद्र की ओर से जारी सूची में नेपाल के 24 लोग लापता हैं। उत्तराखण्ड, बिहार,उत्तर प्रदेश ,हरियाणा ,राजस्थान के 44 लोग आपदा के बाद से गायब है।


इनमें 9 सेना के जवान, धराली व आसपास के 13 स्थानीय लोग, टिहरी का 1, बिहार के 13, उत्तर प्रदेश के 6 व्यक्ति और 24 नेपाली मजदूर शामिल हैं। नेपाली मजदूरों में से 5 से संपर्क हो चुका है, शेष की तलाश जारी है। गौरतलब है कि 5 अगस्त की आपदा के बाद दो शव मिले थे। एक हफ्ते से जारी कवायद के बाद भी धराली व हर्षिल क्षेत्र में मलबे में दबे लोगों को नहीं निकाला जा सका है। इतने दिन बीत जाने के बाद किसी चमत्कार से ही किसी के जीवित मिलने की संभावना है।
गढ़वाल आयुक्त ने बताया कि युद्धस्तर पर चलाए गए रेस्क्यू अभियान में अब तक 1,278 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। सभी बाहरी व जरूरतमंद स्थानीय लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया गया है। मलवे में दबे लोगों की खोज के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और भूवैज्ञानिकों की टीमें लगातार काम कर रही हैं।
इस बीच, लापता लोगों के परिजन आपदाग्रस्त इलाके में डेरा डाले हुए हैं। धराली के मलबे में दबे लोगों की खोज के लिए बचाव दल डॉग्स व उपकरणों की मदद से तलाश में जुटे हैं । लेकिन सात दिन बाद भी कोई सफलता नहीं मिली है।
धराली आपदा में जिंदगी की तलाश जारी है। आपदा को एक हफ्ता हो गया है। वहीं, मौसम की चुनौती के बीच आज रेस्क्यू के लिए सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ व जिला प्रशासन ड्रोन और अन्य अत्याधुनिक उपकरणों की मदद से मलबे में दबे लोगों की तलाश में जुटी हैं.

घोड़े खच्चरों से पहुंचाई जा रही खाद्य सामग्री
ग्रामीणों के लिए घोड़े खच्चरों के माध्यम से राशन सामग्री पहुंचाई जा रही है। वहीं आपदा प्रभावित ग्रामीणों के लिए समेश्वर देवता मंदिर में सामूहिक भोजन बनाया जा रहा है।

मलबे के बीच लापता लोगों की तलाश शुरू
बैंक ऑफ बड़ौदा ने सीएम राहत कोष में दी एक करोड़ की राशि
आज प्रभावितों को राहत राशि वितरित की जाएगी- गंगोत्री विधायक
43 लोग लापता- गढ़वाल कमिश्नर
धराली आपदा में ध्वस्त कल्प केदार देवता के मंदिर का पुनर्निर्माण होगा
हर्षिल में बनी झील से पानी निकासी का काम मैनुअल करने की तैयारी
उत्तरकाशी को हर्षिल से जोड़ने वाला पुल बना
खोज और बचाव अभियान का दूसरा चरण शुरू
मुख्यमंत्री धामी ने धराली रेस्क्यू ऑपरेशन के बारे में बताते हुए कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता लोगों को सुरक्षित स्थानों में पहुंचाने की थी। खराब मौसम के बावजूद अब तक 1000 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू किया जा चुका है। जिसमें स्थानीय लोगों के साथ देश भर से आए तीर्थ यात्री भी शामिल हैं। घायलों को जिला अस्पताल, एम्स में भर्ती किया गया है। सभी को अच्छा इलाज मिले इसकी व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया हर्षिल व धराली क्षेत्र में पर्याप्त मात्रा में दवाइयां, दूध, राशन, कपड़े पहुंचाए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया हर्षिल क्षेत्र में बिजली आपूर्ति के लिए उरेडा का पावर हाउस चालू किया गया है। यूपीसीएल द्वारा बिजली तारों की मरम्मत की जा रही है। मोबाइल कनेक्टीविटी को सुधार लिया गया है साथ ही 125 KV के दो जनरेटर सेट भी आपदा क्षेत्र में पहुंच गए हैं। हर्षिल क्षेत्र में सड़क कनेक्टिविट को ठीक किया जा रहा है। गंगनानी में बेली ब्रिज का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। भूस्खलन की चपेट में आई सड़कों को भी जल्द ठीक कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया मंगलवार तक हर्षिल तक सड़क मार्ग को पूरी तरह ठीक करने की संभावन है। जिसके बाद अन्य कामों को भी तेजी से पूरा किया जा सकेगा।
6 माह देंगे मुफ्त राशन
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के स्तर से प्रभावित परिवारों को हर संभव मदद की जा रही है। उन्होंने बताया प्रभावित परिवारों को अगले 6 महीने का राशन राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध करवाया जाएगा।
5 लाख की अर्थिक मदद
आपदा से जिन लोगों के मकान पूर्णतः क्षतिग्रस्त या नष्ट हुए हैं, उनके पुनर्वास/विस्थापन हेतु ₹ 5.00 लाख की तत्काल सहायता राशि जारी की जाएगी। उन्होंने बताया ग्राम वासियों के पुनर्वास के लिए सचिव, राजस्व की अध्यक्षता में एक तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। जो प्रभावित हुए लोगो के पुनर्वास, विस्थापन एवं हानि का आंकलन करेगी। उन्होंने कहा आपदा से सेब के बगीचों को हुए नुकसान का भी आकलन किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि धराली के साथ ही प्रदेश के अन्य स्थानों में भी आपदा से तबाही हुई है। उन्होंने कहा पौड़ी के सैंजी और बांकुड़ा गांव में भी जिन लोगों के घर क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें भी राज्य सरकार के स्तर से ₹ 5 लाख तक भी सहायता राशि दी जाएगी। राज्य में जहां भी आपदा से हानि हुई है, उन्हें सरकार द्वारा हर संभव मदद दी जाएगी।मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य सरकार को हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। उनके ही नेतृत्व में केंद्र सरकार का भरपूर सहयोग मिल रहा है।
आपदा के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार तीन दिन से मोर्चे पर डटे हैं।ग्राउंड जीरो से रेस्क्यू ऑपरेशन की निगरानी, राहत दलों को दिशा-निर्देश और प्रभावित परिवारों को भरोसा देने के साथ उन्होंने विकास कार्यों की रफ्तार भी बरकरार रखी है। इसी क्रम में उन्होंने आज उत्तरकाशी से ही राज्य मंत्रिमंडल की बैठक की अध्यक्षता कर प्रदेश हित में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये।

रेस्क्यू और राहत कार्य में तेजी के निर्देश
मुख्यमंत्री ने DG ITBP, DG NDRF और DGP उत्तराखंड पुलिस के साथ उच्च स्तरीय बैठक में राहत व बचाव कार्यों की समीक्षा की।
उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों तक शीघ्र पहुंच, फंसे लोगों का त्वरित रेस्क्यू, दुर्गम इलाकों में पर्याप्त टीम तैनाती, हेली लिफ्टिंग तेज करने और आवश्यक संसाधनों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। संचार, बिजली और सड़क संपर्क बहाली तथा राहत सामग्री की निर्बाध आपूर्ति पर भी विशेष जोर दिया।
लोगों में भरोसा, राहत दलों का बढ़ा मनोबल
धराली और आसपास के क्षेत्रों में लगातार मौजूद रहकर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार संकट की घड़ी में हर नागरिक के साथ है। कमिश्नर विनय शंकर पाण्डे का कहना है कि सीएम सर का सक्रिय और संवेदनशील रुख न केवल प्रभावित परिवारों के लिये संबल साबित हुआ है बल्कि राहत कार्य में जुटे जवानों का मनोबल भी बढ़ा है।
भारी प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे सीमांत उत्तरकाशी में अब राजनीतिक आपदा ने भी पैर पसार लिए हैं। इस राजनीतिक आपदा की भनक लगते ही भाजपा के दो विधायक, पूर्व विधायक व जिला संगठन एक मंच पर खड़े हो गए हैं।इन सभी नेताओं ने सीएम व भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट को कड़ा पत्र लिख कर निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष दीपक बिजल्वाण को भाजपा में शामिल करने की कोशिश का प्रखर विरोध किया है।
विरोध पत्र भाजपा जिलाध्यक्ष नागेंद्र चौहान ने लिखा है। यह पत्र ऐसे समय पर आया जब सीएम धामी स्वंय बीते तीन दिन से उत्तरकाशी जिले में ही मौजूद हैं।

गौरतलब है कि प्रदेश के 12 जिपं अध्यक्ष व 89 ब्लाक प्रमुख का चुनाव 14 अगस्त को होना है। और उत्तरकाशी के निवर्तमान जिपं अध्यक्ष दीपक बिजल्वाण जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीते हैं। और इस समय अध्यक्ष पद के प्रबल दावेदार हैं।
अपने कार्यकाल में कई वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर दीपक बिजल्वाण के मसले हाईकोर्ट की भी सुर्खियां बने हैं। उनके ही भाजपा में शामिल होने की चर्चाएं तेज हैं। बिजल्वाण 2022 कस विधानसभा चुनाव यमुनोत्री से लड़कर हार चुके हैं। इसके बाद दीपक बिजल्वाण कांग्रेस में सक्रिय नहीं दिखे। निकाय व पंचायत चुनाव में अपने हिसाब से राजनीति करते रहे।
इधऱ, अंदरखाने पक रही खिचड़ी की महक बाहर आने के बाद उत्तरकाशी भाजपा के नेता एकजुट हो गए हैं।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र भट्ट और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को भेजे गए एक ज्ञापन में आरोप लगाया है कि दीपक बिजल्वाण जनपद ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में व्यापक भ्रष्टाचार के मामलों में कुख्यात हैं।
ज्ञापन में कहा गया है कि यदि उन्हें पार्टी में शामिल किया गया तो आम जनमानस और पार्टी कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश फैल जाएगा और संगठन की छवि धूमिल होगी।
विरोधियों ने दावा किया है कि पंचायत चुनाव में निर्वाचित सदस्यों ने पार्टी के जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख पद के प्रत्याशियों को समर्थन इस शर्त पर दिया था कि दीपक बिजल्वाण के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच कराई जाएगी।
ज्ञापन में सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का हवाला देते हुए मांग की गई है कि उनके खिलाफ कठोर दण्डात्मक कार्रवाई की जाए और पार्टी संगठन में ऐसे व्यक्तियों को कोई स्थान न दिया जाए।
पत्र में दुर्गेश्वर लाल विधायक पुरोला, नागेन्द्र चौहान,
सुरेश चौहान विधायक गंगोत्री, रमेश चौहान पूर्व जिलाध्यक्ष, सतीन्द्र सिंह राणा ,राम सुन्दर नौटियाल , मनवीर चौहान, जगत सिंह चौहान, प्रताप पंवार,स्वराज विद्वान (वाष्ट्रीय मैत्री
केदार सिंह रावत पूर्व विधायक व विजयपाल सजवाण सजवाण पूर्व विधायक का नाम शामिल हैं।
दीपक बिजल्वाण को लेकर भाजपा की राजनीति गरमाने से पार्टी संगठन के सामने नयी चुनौती खड़ी हो गयी







