Category Archive : राजनीति

Uttrakahand : भाजपा संगठन में बड़े बदलाव की आहट, चुनाव के दौरान विवादित चेहरे फ्रंट में नहीं चाहती पार्टी

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प्रदेश भाजपा संगठन में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर नए कार्यकारी अध्यक्ष की ताजपोशी के बाद अब राज्य स्तर पर परिवर्तन की आहट तेज हो गई है। माना जा रहा है कि पार्टी ऐसे चेहरों से परहेज करेगी, जिन्हें लेकर आमजन में धारणा ठीक नहीं है।

 

संगठन चाहेगा कि चुनाव के दौरान विवादित चेहरे फ्रंट में न दिखें। इनके बजाए बेदाग, साफ-सुथरी छवि और लोकप्रिय चेहरों को संगठन आगे बढ़ाएगा। उत्तराखंड में नौ साल से सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी लगातार तीसरी जीत का ताना-बाना बुनने में जुट गई है। सभी सात मोर्चों के अध्यक्ष के साथ ही उनकी टीमें घोषित करने के बाद संगठन खुद को किसी भी मोर्चे पर कमजोर नहीं दिखाना चाहता।

ऐसे चेहरों को संगठन अब बदलने की कवायद में लग गया है, जो नेता हाल फिलहाल या पहले विवादों में रहे हैं। राष्ट्रीय नेतृत्व नहीं चाहता कि चुनाव के दौरान विवादित चेहरे फ्रंट पर दिखें। इसी कड़ी में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। इस फेरबदल में राष्ट्रीय नेतृत्व की भांति राज्य में भी युवाओं को तवज्जो दी जाएगी।

हाल फिलहाल में संगठन ने जो भी नए बदलाव लागू किए हैं, उनमें युवाओं को प्रमुखता दी है। ऐसे में एकबार फिर दूसरी पांत के नेताओं को आगे बढ़ाकर संगठन जहां युवाओं और नव मतदाताओं को जोड़ने पर फोकस करेगा, वहीं भविष्य की एक लाइन भी तैयार होगी।

बीएलए नियुक्ति में भाजपा-कांग्रेस ने शुरू की कसरत, सभी दलों ने अब तक तैनात किए हैं 8700

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प्रदेश में हर बूथ पर एक बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) नियुक्त करने के मामले में मुख्य राजनीतिक दलों भाजपा-कांग्रेस ने कसरत तो शुरू की है लेकिन अभी और उत्साह दिखाने की दरकार है। अब तक 11,700 बूथों के सापेक्ष केवल 8700 बीएलए बन पाए हैं।प्रदेश में जल्द ही चुनाव आयोग का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) शुरू हो सकता है। इससे पहले आयोग ने सभी राजनीतिक दलों को बीएलए-1 और बीएलए-2 की तैनाती को कहा था। हर विधानसभा में एक बीएलए के हिसाब से सभी राजनीतिक दलों ने अपने बीएलए-1 तो नियुक्त कर दिए थे लेकिन हर मतदान केंद्र के एक बीएलए की नियुक्ति प्रक्रिया में कामकाज थोड़ा ढीला है।

 

राजनीतिक दलों से लगातार पूरे बीएलए तैनात करने की अपील की जा रही
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक, हर राजनीतिक दल को 11,700 बूथों के हिसाब से 11,700 बीएलए-2 तैनात करने हैं। इसके सापेक्ष भाजपा ने अब तक 5300 और कांग्रेस ने 3200 बीएलए-2 नियुक्त किए हैं। 200 बीएलए बाकी चार पंजीकृत राजनीतिक दलों ने तैनात किए हैं। कुल छह पंजीकृत दलों के हिसाब से कुल बीएलए-2 की संख्या 70,200 होनी चाहिए, जिसके सापेक्ष कुल 8,700 बीएलए ही नियुक्त किए जा सके हैं।

 

सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने कहा कि भविष्य में होने वाले एसआईआर में ये बीएलए अहम भूमिका निभा सकेंगे। अपने पोलिंग स्टेशन के मतदाताओं का एसआईआर में शामिल होना सुनिश्चित कर सकेंगे। कहा कि जो बीएलए अभी नियुक्त हो जाएंगे, उनके नाम बाद में बदले भी जा सकते हैं। राजनीतिक दलों से लगातार पूरे बीएलए तैनात करने की अपील की जा रही है।

हमने 5300 बीएलए तैनात कर दिए हैं। बाकी का चिह्निकरण पूरा होने के बाद बीएलए फॉर्म भरा जा रहा है। जल्द ही हम सभी 11,700 मतदान केंद्रों के लिए अपने बीएलए की तैनाती कर देंगे। -कुंदन सिंह परिहार, प्रदेश महामंत्री, भाजपा

 

बीएलए तैनाती की प्रक्रिया चल रही है। हमने 3200 से ज्यादा नियुक्त किए हैं लेकिन फॉर्म भरने की प्रक्रिया के कारण डाटा अपडेट नहीं है। मैंने संबंधित जिम्मेदारों को इस संबंध में तेजी से कार्रवाई को कहा है। -गणेश गोदियाल, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस

मुख्यमंत्री ने अंकिता भंडारी हत्या की सीबीआई जांच की संस्तुति की

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वर्गीय अंकिता भंडारी के माता–पिता की अनुरोध व उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए अंकिता भंडारी प्रकरण की CBI जांच कराए जाने की संस्तुति प्रदान की है ।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य शुरू से अंत तक निष्पक्ष, पारदर्शी और संवेदनशील तरीके से न्याय सुनिश्चित करना रहा है और आगे भी रहेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वर्गीय बहन अंकिता भंडारी के साथ हुई इस अत्यंत दुखद एवं हृदयविदारक घटना की जानकारी मिलते ही राज्य सरकार ने बिना किसी विलंब के पूर्ण संवेदनशीलता और निष्पक्षता के साथ कार्रवाई की। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल एक महिला आईपीएस अधिकारी के नेतृत्व में विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रकरण से जुड़े सभी अभियुक्तों को शीघ्र गिरफ्तार किया गया तथा राज्य सरकार की ओर से प्रभावी एवं सशक्त पैरवी सुनिश्चित की गई, जिसका परिणाम यह रहा कि विवेचना और ट्रायल के दौरान किसी भी अभियुक्त को जमानत नहीं मिल सकी। SIT द्वारा गहन विवेचना के पश्चात अभियुक्तों के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल की गई और निचली अदालत द्वारा सुनवाई पूर्ण होने पर अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह पूरे प्रकरण में इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि राज्य सरकार ने आरंभ से लेकर अंत तक निष्पक्षता, पारदर्शिता और दृढ़ता के साथ न्याय सुनिश्चित किया है। साथ ही, हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही कुछ ऑडियो क्लिप्स के संबंध में भी अलग–अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं, जिन पर जांच की प्रक्रिया निरंतर जारी है।

मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि सरकार की मंशा पूरी तरह स्पष्ट है और किसी भी तथ्य या साक्ष्य की अनदेखी नहीं की जाएगी। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि अंकिता केवल एक पीड़िता नहीं थी, बल्कि वह हमारी भी बहन और बेटी थी।

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि हाल ही में उन्होंने स्वयं स्वर्गीय अंकिता भंडारी के माता–पिता से मुलाकात की, जिसमें बातचीत के दौरान उन्होंने मामले की CBI जांच कराए जाने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वर्गीय अंकिता के माता–पिता के इस अनुरोध और उनकी भावनाओं का पूर्ण सम्मान करते हुए राज्य सरकार ने इस प्रकरण की CBI से जांच कराने का निर्णय लिया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पुनः दोहराया कि राज्य सरकार पहले भी न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध रही है और आगे भी पूरी दृढ़ता एवं संवेदनशीलता के साथ स्वर्गीय बहन अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए संकल्पबद्ध रहेगी।

उर्मिला सनावर के मामलों की जांच के लिए एसआईटी गठित,जनता आगे आये- उर्मिला

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उर्मिला सनावर के खिलाफ जनपद के विभिन्न थानों में दर्ज मुकदमों की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने एसआईटी गठन का निर्णय लिया है।
एसएसपी के आदेश पर सभी मामलों की जांच के लिए विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया गया है।

उधर, उर्मिला सनावर ने वीडियो बयान जारी कर कहा कि वपुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए छापे मार रही है। जबकि वो सबूत दे चुकी है। उर्मिला ने प्रदेश की जनता से अंकिता को न्याय दिलवाने के लिए आगे आने को कहा है।इस बीच, पुलिस प्रशासन का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य जांच प्रक्रिया को प्रभावी बनाते हुए किसी भी प्रकार के संदेह या पक्षपात की संभावना को समाप्त करना है। एसएसपी ने स्पष्ट किया है कि सभी मामलों की गहन जांच साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी और कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, ताकि मामलों का जल्द एवं न्यायसंगत निस्तारण हो सके।

 

एसपी सिटी को सौंपी गई एसआईटी की कमान

गठित एसआईटी की जिम्मेदारी पुलिस अधीक्षक नगर (एसपी सिटी) अभय कुमार सिंह को सौंपी गई है। टीम को निर्देश दिए हैं कि उर्मिला सनावर से जुड़े सभी प्रकरणों की बारीकी से जांच की जाए और प्रत्येक बिंदु पर निष्पक्ष आकलन के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाए। एसएसपी ने यह भी कहा है कि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

चार थानों में दर्ज हैं कुल चार मुकदमे

जानकारी के अनुसार उर्मिला सनावर के खिलाफ कोतवाली ज्वालापुर, कोतवाली रानीपुर, थाना बहादराबाद और थाना झबरेड़ा में कुल चार मुकदमे दर्ज हैं। अब इन सभी मामलों की जांच एक ही विशेष जांच टीम द्वारा की जाएगी। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि एकीकृत जांच से मामलों में पारदर्शिता बनी रहेगी और जांच की दिशा स्पष्ट रहेगी, जिससे भ्रम या विरोधाभास की स्थिति उत्पन्न नहीं होगी।

एसआईटी में शामिल अधिकारी
गठित विशेष जांच टीम में कुल सात सदस्य शामिल किए गए हैं। टीम में निरीक्षक शांति कुमार गंगवार (प्रभारी कोतवाली रानीपुर), निरीक्षक कुंदन सिंह राणा (प्रभारी कोतवाली ज्वालापुर), उप निरीक्षक अंकुर शर्मा (प्रभारी थाना बहादराबाद), उप निरीक्षक रविन्द्र सिंह (थाना झबरेड़ा), अपर उप निरीक्षक रणजीत सिंह बिष्ट (कार्यालय पुलिस अधीक्षक नगर), कांस्टेबल विनय (कार्यालय पुलिस अधीक्षक नगर) और कांस्टेबल वसीम (सीआईयू हरिद्वार) शामिल हैं।

 

कई स्थानों पर प्रदर्शन

वीआईपी के मुद्दे पर प्रदेश के हल्द्वानी में ज्योति अधिकारी के समर्थन में विरोध-प्रदर्शन जारी है।
देहरादून में महिला कांग्रेस ने स्पीकर के आवास का घेराव कर आंदोलन को धार दी।

प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी सीबीआई जॉच व वीआईपी के खुलासे को लेकर भाजपा के विरोध में आंदोलन जोर पकड़ता जा रहा है।

प्रदेश भाजपा संगठन के लचर व आत्मघाती बयानों से स्थिति और भी बिगड़ गयी है। प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के जातिगत बयान का आम जनता ने भारी विरोध कर दिया है।

अंकिता मर्डर केस में पहली बार बोले दो भाजपा नेता,  कहा, सीबीआई जांच जरूरी,

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र्मिला-सुरेश-आरती के अंदरूनी विवाद से जनित कथित वीआईपी विवाद में पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत और पूर्व विधायक विजया बड़थ्वाल ने भी चुप्पी तोड़ दी है।इन दोनों भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के बयान के बाद इस मुद्दे पर पार्टी के मतभेद भी सामने आ गए हैं। उधर, वीआईपी कांड को लेकर भाजपा हाईकमान में भी गम्भीर हलचल देखी जा रही है। निकट भविष्य में प्रदेश संगठन में बड़े बदलाव की उम्मीद भी बनने लगी है।

 

क्या कहा पूर्व सीएम त्रिवेंद्र ने

विजया बड़थ्वाल के बाद पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पत्रकारों से बातचीत में मामले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि यह महिलाओं से जुड़ा हुआ विषय है, जो समाज के 50 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करती हैं। त्रिवेंद्र रावत ने कहा कि यह मामला इस समय न्यायालय के विचाराधीन है । इसलिए सरकार कोई निर्णय नहीं ले सकती ।साथ ही यह भी जोड़ा कि इसकी गहराई से जांच की आवश्यकता है। पूर्व सीएम ने कहा कि इस तरह के गलत काम करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाना चाहिए। चाहे वह उनका अपना बच्चा हो या भाई, कानून सभी के लिए समान होना चाहिए और दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं समाज की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं और समाज पर धब्बा लगाने का काम करती हैं। त्रिवेंद्र सिंह रावत ने यह भी कहा कि जब यह घटना हुई थी, तब उन्हें व्यक्तिगत रूप से भी गहरा दुख और तकलीफ हुई.

 

इधऱ, यमकेश्वर से पूर्व विधायक विजया बड़थ्वाल ने तो तीखा लिखित बयान जारी कर कांग्रेस की तर्ज पर सीबीआई जांच की मांग कर डाली। यही नहीं, उन्होंने यह भी कह दिया कि न्याय होना ही पर्याप्त नहीं है। न्याय दिखना भी चाहिए।
उन्होंने कहा कि हम किसी भी पार्टी के हो सकते हैं, परंतु हमारी बेटियों की प्रतिष्ठा, सम्मान और अस्मिता की रक्षा हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। महादेव की इस पवित्र भूमि पर यदि हमारी बेटियाँ सुरक्षित नहीं हैं, तो इस राज्य को संभालने का क्या अर्थ बचता है?

हम अपनी बेटियों की सुरक्षा के लिए किसी भी समझौते को स्वीकार नहीं कर सकते। यह सिर्फ एक मामला नहीं, बल्कि हमारी सामाजिक ज़िम्मेदारियों और नैतिक मूल्यों का प्रश्न है। गौरतलब है कि जिस वनन्तरा रिसॉर्ट में अंकिता  नौकरी करती थी। वह यमकेश्वर विधानसभा में आता है। और यहां से मौजूदा भाजपा विधायक रेनू बिष्ट और उमरेला कि पूर्व जिला पंचायत सदस्य आरती गौड़ पर वनन्तरा रिसॉर्ट में बुलडोजर चलाने का आरोप सुर्खियों में है। इस बीच, सालों से मौन साधे रही पूर्व विधायक विजया बड़थ्वाल के झकझोरने वाले बयान के बाद भाजपा की चिंता की लकीरें बढ़ गयी है।

विजया बड़थ्वाल व त्रिवेंद्र के बयान के बाद भाजपा के अंदर राजनीतिक हलचल तेज हो गयी है। प्रदेश भाजपाध्यक्ष महेंद्र भट्ट उर्मिला सनावर पर दिए गए बयान के बाद स्वंय घिर गए है।

 

उर्मिला मेरी पत्नी नहीं

इस मुद्दे पर भाजपा से निष्कासित सुरेश राठौर ने एक बार फिर प्रेस कांफ्रेंस कर उर्मिला सनावर की नीयत पर सवाल उठाए। कहा कि वो मेरे परिवार को बर्बाद कर रही है। चारित्रिक हनन कर रही है। मैंने फैक्ट्री बेच उर्मिला को 50 लाख रुपए दिए । वह ब्लैकमेल कर रही है। मुझे पति भी कहती है और कालनेमि भी।
राठौर यह कहने से भी नहीं चूके कि उन्होंने भाजपा को खून पसीने से सींचा।
राठौर ने कहा कि उर्मिला मेरी पत्नी नहीं है। सोशल मीडिया में कहने के बजाय उर्मिला को फैमिली कोर्ट जाना चाहिए।

उर्मिला -सुरेश

इस मामले में उक्रांद, महिला मंच, मूल निवास भू कानून समिति समेत अन्य संगठनों ने भी मोर्चा खोल दिया है। हरिद्वार जिले में ही भाजपा से जुड़े मोर्चा के नेता अंकित बहुखंडी के नेतृत्व में वीआईपी का पुतला दहन भी किया गया। बहुखंडी ने कहा कि अंकिता हत्याकांड के दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। इससे पूर्व,मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस प्रदेशव्यापी प्रदर्शन के तहत पुतला दहन कर चुकी है। सोशल मीडिया में कई आम लोग भी बयान जारी कर सुरेश-उर्मिला-आरती के ऑडियो की जांच की मांग कर रहे हैं।

 

वीडियो-ऑडियो विस्फोट से खुलने लगे हैं अंकिता मर्डर फ़ाइल के नाज़ुक पन्ने,पूर्व भाजपा विधायक के ऑडियो से बड़ा भाजपा नेता कठघरे में !

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अंकिता भंडारी हत्याकांड के बाद वीआईपी को लेकर जारी चर्चाओं ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है।
इस बीच, भाजपा से निष्कासित पूर्व विधायक सुरेश राठौर व उर्मिला सनावर की एक ऑडियो क्लिप ने भी तहलका मचा दिया है।

इस ऑडियो क्लिप में कथित तौर पर सुरेश राठौर और उर्मिला के बीच बातचीत में एक बड़े भाजपा नेता और महिला का नाम भी सामने आया है। इसमें राठौर कह रहे हैं कि उक्त भाजपा नेता में हरिद्वार की डाम कोठी में महिला को बुलाया था।

उर्मिला ने पूछा कि क्या वो महिला भाजपा नेता से मिलने गयी थी। इस पर पूर्व विधायक ने कहा कि वो गयी या नहीं। उसे पता नहीं। लेकिन उक्त महिला ने मुझे (राठौर)बताया था कि भाजपा नेता के वीडियो व ऑडियो क्लिप उसके पास हैं।

एक मिनट 31 सेकेंड के इस ऑडियो में भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर कहते हैं कि उक्त महिला ने ही वनन्तरा रिसॉर्ट में बुलडोजर चलवाया था। इस रिसॉर्ट इन अंकिता हत्याकांड हुआ था। साफ है कि उक्त महिला ने कथित भाजपा नेता के इशारे पर ही सबूत मिटाने के लिए वनन्तरा रिसॉर्ट में बुलडोजर चलवाया होगा।

इस ऑडियो क्लिप के वॉयरल होने से सुरेश राठौर, गट्टू और एक अन्य महिला के अन्तर्सम्बन्धों के भी राज खुल रहे हैं। यह भी साफ हो रहा है कि ‘गट्टू’ से नजदीकी सम्बंध रखने वाली उक्त महिला वनन्तरा रिसॉर्ट से जुड़े क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय रही है। और इस महिला के भाजपा के पूर्व विधायक राठौर से भी नजदीकी सम्बंध रहे हैं।

ऑडियो में राठौर यह भी खुलासा करते हैं कि उक्त महिला के तो अन्य छह सात लोगों से भी सम्बंध हैं। और एक बच्चा भी है।

बहरहाल, भाजपा के बड़े नेता से जुड़े ऑडियो-वीडियो के खेल ने राजनीति में खलबली मचा दी है।
हालांकि, कोटद्वार कोर्ट इसी साल अंकिता मर्डर केस के आरोपी पुलकित आर्य व अन्य दो को सजा सुना चुकी है। तीनों ही जेल में है। लेकिन जांच में वीआईपी के नाम का कोई खुलासा नहीं होने के बाद अब कई महीने बाद कहीं “गट्टू ” और कहीं सीधे नाम का उल्लेख भाजपा के लिए चिंता का सबब बन गया है।

इधऱ, राठौर की दूसरी पत्नी उर्मिला ताजातरीन वीडियो में साफ कह रही है कि अंकिता ने गट्टू के पास जाने से मना कर दिया था। इसलिए उसकी हत्या कर दी गयी।

इसके अलावा वॉयरल ऑडियो से यह भी साफ हो रहा है कि राठौर ने बेहतर रिश्ते के समय उर्मिला सनावर को यह गुप्त बातें बता दी थी। और अब रिश्ते खराब होने पर उर्मिला अपने वॉयरल वीडियो में अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े अनसुलझे तथ्य सामने रख रही है।

अंकिता हत्याकांड को लेकर एक बार फिर सोशल मीडिया में बहस छिड़ गयी है। लोगों का कहना है कि कोर्ट और जांच एजेंसी को वीडियो और ऑडियो क्लिप की जांच कर राठौर, उर्मिला और उक्त महिला से भी पूछताछ करनी चाहिए।

अगर ऐसा हुआ तो लम्बे समय से वीआईपी के चेहरे पर पड़े नकाब के बेनकाब होने की पूरी उम्मीद है।

बहरहाल, इन नये खुलासे के बाद एक बार फिर कोर्ट के  स्वंय संज्ञान लेने और पुलिस की नयी जांच को लेकर भी बहस शुरू हो गयी है। अगर परिजनों की मांग पर या किसी ब्यक्ति की ओर से दायर याचिका पर कोर्ट या पुलिस संज्ञान लेती है तो वीआईपी की अनसुलझी गुत्थी से पर्दा उठने की संभावना जताई जा रही है,,,हलांकि dsruncut इन किसी भी आरोपों की सत्यता की पुष्टि नहीं करता, ये सब जांच का विषय है,,,,बरहाल इस पुरे मामले में भाजपा की तरफ से चुप्पी है,,,बरहाल अंकिता का vip कौन इस मुद्दे ने एक बार फिर चर्चा पकड़ ली है,,,

 

अंकिता भंडारी हत्याकांड- वायरल वीडियो के बाद कांग्रेस का हमला

उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और प्रवक्ता धीरेंद्र प्रताप ने कहा है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को इस बात का खुलासा करना चाहिए की अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े मामले में जिस गटू का जिक्र एक महिला के वायरल हुए वीडियो में किया है वह गट्टू कौन है??

धीरेंद्र प्रताप ने कहा है कि इस महिला के वायरल हुए वीडियो में यह बात भी सामने आई है कि हरिद्वार के पूर्व विधायक सुरेश राठौर का इस गट्टू से कोई संबंध है ।

धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड ने पूरे उत्तराखंड की जनता को झकझोर कर रखा हुआ है । ऐसी स्थिति में इस गट्टू नाम का अचानक सतह पर आना चिंता का विषय है । मुख्यमंत्री को चाहिए कि इस गट्टू का जल्दी पता लगाए और विधायक सुरेश राठौर की गतिविधियों के बारे में भी बताएं कि वह आखिर क्यों इस महिला के निशाने पर बने हुए हैं।

हर साल दो लाख से अधिक भारतीय छोड़ रहे हैं नागरिकता

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18 लाख से अधिक भारतीय नागरिकों ने वर्ष 2011 से 2023 तक 13 वर्षों में अपनी भारतीय नागरिकता छोड़कर अन्य देशों की नागरिकता प्राप्त की हैं। वर्ष 2022 तथा 2023 में तो यह दर प्रतिवर्ष दो लाख नागरिकों से भी अधिक हैं। यह खुलासा सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन (एडवोकेट) को विदेश मंत्रालय के जन सूचना अधिकारी द्वारा उपलब्ध करायी गयी सूचना से हुआ हैं।

काशीपुर निवासी सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन (एडवोकेट) ने विदेश मंत्रालय के जन सूचना अधिकारी से भारत की नागरिकता छोड़कर विदेशों की नागरिकता प्राप्त करने वालांे की संख्या की सूचना चाही थी। इसके उत्तर में विदेश मंत्रालय के जन सूचना अधिकारी/अवर सचिव तरूण कुमार ने अपने पत्रांक 551 से उत्तर उपलब्ध कराया है। जन सूचना अधिकारी ने राज्यसभा में कपिल सिब्बल तथा डा0 जोहन बिट्स के प्रश्नों के उत्तर में जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होने को लिखित करते हुये उसका इंटरनेट लिंक उपलब्ध कराया है।

नदीम द्वारा उक्त लिंक से सांसदों के प्रश्नों के उत्तर डाउनलोड करने पर वर्ष 2011 से 2023 तक भारत की नागरिकता छोड़ने वाले भारतीयों की संख्या प्रकाश में आयी है।

नदीम को उपलब्ध सूचना के अनुसार वर्ष 2022 में पिछले 13 वर्षों में सर्वाधिक 2,25,620 भारतीय नागरिकों ने अपनी भारतीय नागरिकता स्वेच्छा से छोड़ी है। दूसरे स्थान पर वर्ष 2023 में 2,16,219 भारतीय नागरिकों ने अपनी नागरिकता छोड़ी हैं। पिछले 13 वर्षों में सबसे कम नागरिकता छोड़ने वाले भारतीय नागरिकों की संख्या 85256 वर्ष 2020 में रही हैं।
वर्ष 2011 में 1,22,819, वर्ष 2012 में 120,923, वर्ष 2013 में 1,31,405, वर्ष 2014 में 1,29,328, वर्ष 2015 में 1,31,489, वर्ष 2016 में 1,41,603, वर्ष 2017 में 1,33049, वर्ष 2018 में 134561, वर्ष 2019 में 1,44017, वर्ष 2020 में 85256, वर्ष 2021 में 163370, वर्ष 2022 में 225620, वर्ष 2023 में 2,16,219 भारतीय नागरिकों ने स्वेच्छा से अपनी भारतीय नागरिकता त्याग दी है।

विदेश मंत्रालय द्वारा उपलब्ध करायी गयी सूचना के अनुसार भारतीय नागरिकता छोड़कर विश्व के 135 देशों की नागरिकता इन व्यक्तियों द्वारा प्राप्त की गयी है। जिन देशों की नागरिकता भारतीय नागरिकता छोड़कर भारतीयों द्वारा प्राप्त की गयी है उनमें जहां पड़ोसी देश, बांग्लादेश, म्यांमार, नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका शामिल है, वहीं विकसित माने जाने वाले देश यू के, यू.एस.एस. रूस, चीन, इटली, फ्रांस, जर्मनी व जापान तथा आर्थिक सम्पन्न वाले देशों में इराक, इरान, इटली, तुर्की, यमन, जम्बिया, कज़ाकश्तान, केनिया, मलेशिया, मालद्वीव, ओमान, कतर, सऊदी अरब, साउथ अफ्रीका, सुडान देश भी शामिल है।

 

SIR: 22 साल में दोगुने हुए मतदाता… छंटनी के लिए प्री एसआईआर, यहां बढ़े सबसे ज्यादा मतदाता; देखें आंकड़े.

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पिछले 22 साल में मतदाताओं की संख्या देहरादून जिले में आठ लाख से लगभग 16 लाख हो गई है। इसमें सबसे ज्यादा मतदाता नगर निगम देहरादून में बढ़े हैं। इन बढ़े मतदाताओं की कुंडली खंगालने की तैयारी शुरू हो गई है।

फिलहाल बीएलओ ने प्री एसआईआर शुरू कर दिया है। 2003 की मतदाता सूची को इसका आधार बनाया जा रहा है। इसी महीने के अंत तक प्री एसआईआर पूरा करना है ताकि मुख्य एसआईआर के आदेश आएं और उस काम को पूरी गुणवत्ता और समयसीमा में पूरा किया जा सके।

विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) देश के 12 राज्यों में चल रहा है और जल्द ही उत्तराखंड में भी शुरू होने वाला है। इसी कड़ी में प्रशासन ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं।

रोजाना 30 मतदाताओं का मिलान-
बीएलओ प्री एसआईआर के तहत घर-घर जाकर रोजाना 30 मतदाताओं का मिलान कर रहे हैं। मुख्य एसआईआर में राजनीतिक दलों के एजेंटों को भरोसे में लेने के साथ ही उनकी मदद ली जाएगी ताकि एसआईआर निष्पक्ष हो और किसी प्रकार के आरोप न लगें।
वर्तमान मतदाता सूची के साथ होगा मिलान-
सुपरवाइजर से लेकर बीएलओ कार्य में जुट गए हैं। बीएलओ की ओर से 2003 और 2005 की मतदाता सूची के बीच नामों में अंतर को खोजा जाएगा और उसके कारण की समीक्षा की जाएगी। वर्तमान मतदाता सूची के साथ मिलान भी किया जाएगा।
दून में बढ़े सबसे ज्यादा मतदाता-
जिले में सबसे ज्यादा विस्तार देहरादून नगर निगम का हुआ। 2003 में यहां मात्र 45 वार्ड थे। अनुमानित मतदाताओं की संख्या उस समय करीब दो-ढाई लाख रही। उसके बाद शहर का तेजी से विकास हुआ। 45 वार्ड से आज नगर निगम 100 वार्ड तक पहुंच गया।
पूरे जिले में आज करीब 15.56 लाख के करीब मतदाता हैं। इनमें पुरुष मतदाता 8.9 लाख और महिला मतदाता 7.47 लाख के करीब हैं। अकेले देहरादून शहर में मतदाताओं की संख्या 7.71 लाख से ज्यादा है।
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2018 नगर निगम के चुनाव के बाद से ही कुल मतदाताओं में देहरादून शहर में 22 प्रतिशत से ज्यादा वृद्धि हुई। ऐसे में 2003 के सापेक्ष मतदाताओं की संख्या यहां तीन गुना से ज्यादा बढ़ी।

देहरादून में प्री एसआईआर चल रहा है। अभी मुख्य एसआईआर शुरू नहीं हुआ और न ही इसकी तिथि आई है। प्री एसआईआर के तहत प्रति बीएलओ को रोजाना 30 मतदाताओं के घर जाना है। दिसंबर के अंत तक इसके पूरा होने की उम्मीद है। – अभिनव शाह, सीडीओ

कांग्रेस नेताओं की दरक चुके कुनबे को बढ़ाओ मिशन में जुटी उत्तराखण्ड कांग्रेस

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भाजपा व कांग्रेस ने 2027 के विधानसभा चुनाव की बिसात बिछानी शुरू कर दी है। मेल मुलाकातों का दौर जारी है।
इधऱ, हाशिए पर खड़े क्षेत्रीय दल उत्तराखण्ड क्रांति दल ने फील्ड मार्शल दिवाकर भट्ट के निधन के बाद श्रद्धांजलि यात्रा निकाल दी है।
इसके साथ ही पेपर लीक कांड में सीबीआई की बेरोजगार संघ के पूर्व अध्यक्ष बॉबी पंवार से नौ घण्टे की पूछताछ की कहानी भी आम जनता और सत्ता के गलियारों में सरगर्म है। कुल मिलाकर उत्तराखण्ड के विपक्षी दलों ने चुनावी कदम बढ़ाने शुरू कर दिए हैं।

हाल ही में कांग्रेस के दो बड़े नेता हरक सिंह व प्रीतम सिंह की पूर्व भाजपा विधायक राजकुमार ठुकराल व निर्दलीय विधायक संजय डोभाल से मुलाकात विशेष चर्चा में है।  ठुकराल उधमसिंहनगर और डोभाल सीमांत उत्तरकाशी जिले से ताल्लुक रखते हैं।

 राजकुमार ठुकराल और हरक सिंह

2022 में अपने कुछ चर्चित बयानों की वजह से राजकुमार ठुकराल भाजपा से निकाले भी गए। नगर निकाय चुनाव के समय ठुकराल की भाजपा में वापसी तो हुई लेकिन मुफीद स्थान नहीं मिला।

इस पीड़ा के साथ राजकुमार ठुकराल और हरक सिंह की मेल मुलाकात भविष्य में उलटफेर कर सकती है। दून में हरक सिंह के आवास पर हुई इस भेंट के बाद ठुकराल उत्साहित भी बताए जा रहे हैं। इस मुलाकात में हरक सिंह ने ठुकराल की हाथ की लकीरें भी बाँची। और कुछ व्यवहारिक हिदायतें भी दी।

इस बीच, कांग्रेस नेता प्रीतम सिंह ने निर्दलीय विधायक संजय डोभाल के साथ मुलाकात का एक चित्र सोशल मीडिया में वॉयरल किया है। डोभाल 2017 में कांग्रेस के टिकट पर  विधानसभा का चुनाव हार गए थे।लेकिन 2022 में टिकट नहीं मिलने पर यमुनोत्री विधानसभा से निर्दलीय लड़कर चुनाव जीत गए।

प्रीतम सिंह पुराने कांग्रेसी संजय डोभाल को वापस कांग्रेस में लाने की जुगत में है। इस मुलाकात को कांग्रेस का कुनबा बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। उम्मीद है कि डोभाल 2027 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस के टिकट पर लड़ें। कुछ समय पूर्व हुए आंदोलनों में डोभाल विशेष तौर पर सक्रिय नजर आए थे। और पुलिस-प्रशासन से उनकी रस्साकसी का वीडियो भी वॉयरल हुआ था।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल समेत अन्य रणनीतिकार कुछ पुराने नेताओं से लगातार सम्पर्क साध रहे हैं। चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत की पूर्व नौकरशाह एस एस पांगती व पीसी थपलियाल से हुई मुलाकात भी सरगर्म है।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस के रणनीतिकार भाजपा  व कुछ अन्य नेताओं को जोड़ने की मुहिम चलाए हुए है। भाजपा में कौन-कौन नेता व अहम कार्यकर्ता कोपभवन में बैठे हैं, इसकी सूची बनाई जा रही है।

आने वाले दिनों में विभिन्न दलों में तोड़फोड़ की फिल्में भी सामने आने लगेंगी। तेजी से बदल रहे राजनीतिक घटनाक्रम के तहत भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने एक बार फिर धामी कैबिनेट विस्तार का भोंपू बजा दिया है। भाजपा के कई विधायक सम्भावित कैबिनेट विस्तार पर पैनी नजर रखे हुए है।

प्रीतम सिंह व निर्दलीय विधायक संजय डोभाल

गौरतलब है कि 2014, 2016,2017,2022 व 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा कई कांग्रेसियों को अपने पाले में खींचकर कांग्रेस को भारी राजनीतिक नुकसान पहुंचा चुकी है।फिलहाल, कांग्रेस के नेता छिन्न भिन्न व बचे खुचे कुनबे को बचाने और बढ़ाने की कवायद में जुटे हुए हैं। प्रदेश की राजनीति रोमांचकारी फिसलन भरी पहाड़ी ढलान में फिसलती दिख रही है।

कांग्रेस का ‘संविधान बचाओ लोकतंत्र बचाओ’ कार्यक्रम, पार्टी के दिग्गज नेता हुए शामिल

50 Minutes Read -

उत्तराखंड  कांग्रेस की ओर से आज देहरादून में ‘संविधान बचाओ लोकतंत्र बचाओ’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पार्टी के दिग्गज नेता शामिल हुए।पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत ने कहा कि यदि भारत में संविधान नहीं होता तो आज देश की हालत पाकिस्तान और बांग्लादेश की तरह होती। संविधान को बचाने के लिए पार्टी के हर कार्यकर्ता को मजबूती से आगे आना होगा। कार्यक्रम में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष  गणेश गोदियाल, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा, अनुसूचित जाति विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम मौजूद हैं।

 

प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष संगठन सूर्यकांत धस्माना ने तीन दिसंबर को पार्टी के अनुसूचित जाति विभाग की ओर से आयोजित होने वाले संविधान बचाओ लोकतंत्र बचाओ कार्यक्रम में कई राष्ट्रीय नेता भी शामिल होंगे।
धस्माना ने कहा, प्रदेश कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष मदन लाल के नेतृत्व में होने वाले कार्यक्रम में सीडब्ल्यूसी सदस्य गुरदीप सिंह सप्पल, कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के राष्ट्रीय प्रभारी के राजू, राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम, विभाग के प्रदेश प्रभारी सुखविंदर सिंह कोटली, पार्टी के प्रदेश सह प्रभारी सुरेंद्र शर्मा, पीसीसी अध्यक्ष गणेश गोदियाल, सीडब्ल्यूसी सदस्य करन माहरा, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह, चुनाव प्रबंधन समिति अध्यक्ष डॉ. हरक सिंह रावत शामिल होंगे। उन्होंने कहा, कार्यक्रम के बाद पार्टी प्रदेशव्यापी जनजागरण अभियान चला कर भाजपा की साजिशों का पर्दाफाश करेगी।