Category Archive : राजनीति

भारत के पासपोर्ट की ताकत बढ़ी या घटी ? पढ़िए ये पूरी रिपोर्ट.

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पूरी भाजपा देश को हर समय ये बताने में लगी है कि मोदी जी के आने से देश के पासपोर्ट की ताकत कितनी बढ़ गयी है लेकिन असल सच्चाई कुछ और है। हेनले पासपोर्ट इंडेक्स की इस साल की रिपोर्ट में ये बात उजागर हुई है. हेनले पासपोर्ट इंडेक्स दुनिया के सभी पासपोर्ट की मूल आधिकारिक रैंकिंग है जिससे किसी भी देश के पासपोर्ट की ताकत का पता चलता है।


2024 में हेनले पासपोर्ट इंडेक्स में दुनिया भर के कुल 6 देशों ने टॉप पर जगह बनाई है दुनिया के सबसे शक्तिशाली पासपोर्ट वाले देशों में यूरोपीय संघ के चार सदस्य देश फ्रांस, जर्मनी, इटली और स्पेन शामिल हैं जबकि एशियाई देशों में से इस लिस्ट में  हमेशा से टॉप पर रहे दो एशियाई देश इस बार भी टॉप पायदान पर अपनी जगह बनाए हुए हैं और ये देश हैं जापान और सिंगापुर यानी इन 6 देशों के पासपोर्ट सबसे ताकतवर है. यह पासपोर्ट अपने नागरिकों को दुनिया के 227 देशों  में से 194 में बिना वीजा के एंट्री की सुविधा मुहैया कराते हैं

अब आप यही सोच रहे होंगे कि फिर भारत इस लिस्ट में कहां है तो आपको ये जानकर हैरानी होगी कि भारत इस लिस्ट में 80  नंबर पर खड़ा है,,, जी हाँ 80 नंबर पर और देश में डंका पीटा जा रहा है कि भारत के पासपोर्ट की ताकत बहुत बढ़ गयी है हेनले पासपोर्ट इंडेक्स पर टॉप 10 में यूरोपीय देशों को जगह मिली है दक्षिण कोरिया फिनलैंड और स्वीडन इस लिस्ट में दूसरे स्थान पर हैं। ये तीनों देश 193 देशों के लिए वीजा-मुक्त यात्रा का दावा करते हैं तीसरे स्थान पर ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, आयरलैंड और नीदरलैंड हैं। ये देश 192 देशों के लिए वीजा-मुक्त यात्रा का दावा करते हैं।

2024 हेनले पासपोर्ट इंडेक्स में भारत 80वें स्थान पर है भारत के पासपोर्ट के साथ थाईलैंड, इंडोनेशिया, मॉरीशस, श्रीलंका और मालदीव जैसे जगहों की यात्रा की जा सकती है हालांकि मालदीव के साथ भी आजकल भारत के रिश्ते कुछ ठीक नहीं है दूसरी तरफ भारत के पड़ोसी देशों की बात करें तो जहां 85 जगहों में वीजा-फ्री एंट्री के लिए चीन को 62वें स्थान पर रखा गया है


अब जरा साल कुछ साल पहले की रैंकिंग पर भी नजर डालते हैं साल 2006 में भारत की रैंकिंग आज से काफी अच्छी थी साल 2006 में भी भारत का पासपोर्ट 71 वें स्थान पर था जबकि साल 2014 में जब तक मनमोहन सरकार का कार्यकाल खत्म हुआ था,,उस समय भी भारत के पासपोर्ट की रैंकिंग 76 वें  स्थान पर थी जबकि मोदी सरकार के एक साल सत्ता में पुरे होने के बाद 2015 में भारत के पासपोर्ट की रैंक गिरकर 88 नंबर पर पहुंच गया था गजब तो साल 2021 में हुआ जब नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल में भारत के पासपोर्ट की कीमत गिरकर 90 नंबर पर पहुंच गया और आज वर्तमान में भारत का पासपोर्ट 80 नंबर पर आता है

 हेनले पासपोर्ट इंडेक्स ने बीजेपी के उन नेताओं को आईना दिखाया है जो कहते नहीं थकते कि मोदी जी की सरकार में भारत के पासपोर्ट की ताकत बहुत तेजी से बढ़ी है और पासपोर्ट की इज्जत बढ़ गयी है जबकि हेनले पासपोर्ट इंडेक्स साफ़ दिखा रहा है कि बजाय आज के पूर्व की मनमोहन सरकार में भारत का पासपोर्ट ज्यादा मजबूत था

क्यों एक 100 साल की बुजुर्ग महिला कड़ाके की ठंड में 15 दिनों से दे रही है धरना, जानिए क्या है इसकी वजह.

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उत्तराखंड में विकास किस तेजी के साथ हो रहा है कि प्रदेश बनने के इतने साल बाद भी लोगों को बुनियादी सुविधाओं के लिए आंदोलन करना पड़ता है सरकार के लिए शर्म की बात तो तब हो जाती है जब  बुनियादी जरूरत के लिए 100 साल की बुजुर्ग महिला को धरने पर बैठना पड़े।

एक तरफ सरकार 2024 की चुनाव की तैयारी में लगी हुई है तो वहीं दूसरी तरफ आजादी के 73 वर्षों बाद भी 100 वर्ष की बुजुर्ग महिला सड़क मार्ग की लड़ाई लड़ रही है।सड़क न होने के कारण ग्रामीणों को परेशानी हो रही है और अब ये ग्रामीण चुनाव बहिष्कार का ऐलान कर पिछले 15 दिनों से धरने पर है. आजादी के 73 साल बाद भी दूरस्थ सीमावर्ती गांव सड़क मार्ग से अछूते हैं ग्रामीण 25 से 50 किलोमीटर प्रतिदिन पैदल चलने के लिए मजबूर हैं आलम यह है कि लगभग 10 साल पहले स्वीकृत हो चुका सड़क मार्ग अब तक बनकर तैयार नहीं हो सका है।

सड़क मार्ग की मांग को लेकर जोशीमठ के  सेंजी डुमक के ग्रामीण लगभग पिछले 15 दिनों से आंदोलन कर रहे है इन लोगों ने चुनाव बहिष्कार की भी चेतावनी दी है आंदोलनकारियों में 100 साल की बुजुर्ग महिला बच्ची देवी भी शामिल हैं, जो लगातार 15 दिनों से कड़कड़ाती सर्दी के बीच इस उम्मीद में धरने पर बैठी हैं कि उनकी गुहार शासन स्तर तक पहुंचेगी और उनके जीते जी गांव सड़क मार्ग से जुड़ सकेगा लेकिन सरकार शायद 2024 चुनाव की तैयारी में इतना व्यस्त है कि उसको इन ग्रामीणों की सुध लेने का भी समय नहीं है।

ग्रामीणों और अपने बड़े बुजुर्गों की परेशानी को देख विद्यालय में पढ़ने वाले छोटे-छोटे बच्चों को भी तरस आ गया लेकिन सरकार को नहीं छोटे स्कूली बच्चों  ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी है इसमें बच्चों ने लिखा है कि उनके गांव को सड़क मार्ग से जोड़ा जाए गांव में सड़क न होने के कारण उन्हें प्रतिदिन 25 से 50 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता है विद्यालय बहुत दूर है और बर्फबारी और बरसात के दिनों में यहां पहुंचना कठिन होता है।

 इस आंदोलन में 100 साल की बच्ची देवी ही नहीं बल्कि 5 और 7 साल के  कई छोटे बच्चे भी शामिल हैं सिर्फ 100 साल की महिला ही नहीं इस आंदोलन में  90 साल के बुजुर्ग  भी कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं जिस उम्र में पीठ पर स्कूल  बैग  और हाथों में कलम थामना था उस उम्र में नैनिहाल हाथ में माइक और पीठ पर इस आंदोलन को ढो रहे हैं और हमारी सरकार सिर्फ नारों में ही विकास समझ रही है। एक ओर देश के सीमांत गांवों को विकसित करने के लिए केंद्र सरकार ने वाइब्रेंट विलेज योजना चला रही है जिसमें   उत्तराखंड के तीन जिलों के 51 गांवों को भी शामिल किया है लेकिन ये गांव आज भी भगवान भरोसे चल रहे हैं।

Bharat Jodo Nyay Yatra: मणिपुर सरकार ने नहीं दी भारत जोड़ो न्याय यात्रा की अनुमति, कांग्रेस ने बताया दुर्भाग्यपूर्ण.

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मणिपुर कांग्रेस के अध्यक्ष मेघचंद्र ने पार्टी नेताओं के साथ बुधवार सुबह मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह से उनके कार्यालय में मुलाकात की। बाद में उन्हें सूचित किया कि कानून एवं व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए सरकार इस ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ को अनुमति नहीं दे सकती है।

मणिपुर सरकार ने 14 जनवरी को इंफाल पूर्वी जिले के हट्टा कांगजेइबुंग में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ शुरू करने के लिए जमीनी अनुमति जारी करने से इनकार कर दिया है। कांग्रेस ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है, जिसके बाद से राजनीति तेज हो गई है। कांग्रेस ने राज्य सरकार पर इसको लेकर राजनीतिक करने का आरोप भी लगाया है। गौरतलब है कि मणिपुर कांग्रेस के अध्यक्ष और कांग्रेस विधायक के मेघचंद्र ने पार्टी नेताओं के साथ बुधवार सुबह मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह से उनके कार्यालय में मुलाकात की। बाद में उन्हें सूचित किया कि कानून एवं व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए सरकार इस यात्रा को अनुमति नहीं दे सकती है।

मणिपुर कांग्रेस के अध्यक्ष मेघचंद्र ने कहा कि भारत जोड़ो न्याय यात्रा के आयोजन स्थल को बदल दिया है। अब थौबल जिले के कोंगजोम में एक निजी स्थान में इसका आयोजन किया जाएगा। बता दें कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भारत जोड़ो न्याय यात्रा कोहरी झंडी दिखाएंगे। यात्रा 14 राज्यों और 85 जिलों को कवर करने के बाद 20 मार्च को इसका समापन होगा। उल्लेखनीय है कि मंगलवार को मणिपुर के मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने कहा था कि सरकार विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों से रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार इस पर निर्णय लेगी। 

हमें यात्रा केवल मणि्पुर से शुरू करनी है- वेणुगोपाल 

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि हमें जानकारी मिली है कि मणिपुर सरकार ने इंफाल के पैलेस ग्राउंड में यात्रा आयोजित करने के हमारे अनुरोध को अस्वीकार कर दिया है। जब हम पूर्व से पश्चिम तक यात्रा शुरू कर रहे हैं, तो हम मणिपुर को कैसे छोड़ सकते हैं। फिर हम देश के लोगों को क्या संदेश दे रहे हैं। हमें यात्रा केवल मणिपुर से शुरू करने की आवश्यकता है। अब हम मणिपुर में किसी अन्य स्थान से यात्रा शुरू करने जा रहे हैं।  

भारत-मालदीव में विवाद जारी, नई दिल्ली ने राजदूत को किया तलब, जानिए कहां से शुरू हुआ विवाद.

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India-Maldives Relations: भारत-मालदीव के बीच राजनयिक विवाद सोमवार (8 जनवरी) को भी जारी रहा. इस बीच मालदीव के राजदूत को भारत ने तलब किया. वहीं सोशल मीडिया पर इस समय लक्षद्वीप बनाम मालदीव की एक जंग छिड़ी हुई है। पीएम नरेंद्र मोदी की लक्षद्वीप की यात्रा के बाद ये बहस शुरू हुई है। पीएम की इस यात्रा से अटकलें लगाई कि मालदीव के पेंच कसने के लिए भारत अपने द्वीपों में पर्यटन को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा है। पीएम मोदी के दौरे के बाद से लक्षद्वीप गूगल सर्च इंजन पर सबसे ज्यादा सर्च किया जाने वाला कीवर्ड रहा है। शुक्रवार को, 50,000 से अधिक लोगों ने केंद्र शासित प्रदेश को गूगल पर देखा, इसकी वजह ये पीएम की पोस्ट भी रही, जिसमें उन्होंने इस जगह की आश्चर्यजनक सुंदरता और वहां के लोगों की गर्मजोशी के बारे में लिखा।
 
नरेंद्र मोदी के लक्षद्वीप दौरे के बाद सोशल मीडिया पर आग भड़काने का काम मालदीव की सत्ताधारी पार्टी के नेताओं के ट्वीट ने किया। इन ट्वीट में नरेंद्र मोदी का मजाक उड़ाया गया तो भारतीयों को गंदा कहते हुए नस्लीय टिप्पणियां की गईं। इसमें जाहिर रमीज और मरियम शिउना खासतौर से अपने कमेंट के चलचते सोशल मीडिया पर भारतीयों के निशाने पर आए। इसी का नतीजा था कि सोशल मीडिया पर रविवार को बायकॉट मालदीव ट्रेंड करने लगा।
1. भारतीय विदेश मंत्रालय ने मालदीव के राजदूत को सोमवार को तलब किया. मालशा शरीफ, मरियम शिउना और अब्दुल्ला महज़ूम माजिद की पीएम मोदी के खिलाफ की गई टिप्पणी को लेकर कड़ी चिंता व्यक्त की. तीनों मंत्रियों को निलंबित किया जा चुका है.

2.  मालदीव की सरकार ने भारतीय उच्चायुक्त मुनु मुहावर को कहा कि उसके निलंबित किये जा चुके तीन उप मंत्रियों की पीएम मोदी के खिलाफ दिए गए अपमानजनक बयान सरकार के रुख को प्रदर्शित नहीं करते. द सन ऑनलाइन’ की रिपोर्ट के मुताबिक मालदीव के एक शीर्ष सरकारी अधिकारी ने कहा कि बैठक में नसीर ने पड़ोसियों के लिए मालदीव का सतत समर्थन दोहराया. भारतीय उच्चायोग ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर बताया कि विदेश मंत्रालय में डॉ अली नसीर मोहम्मद के साथ द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा करने के लिए भारतीय उच्चायुक्त की बैठक पहले से तय थी.

3. पीएम मोदी पर मालदीव के मंत्रियों की टिप्पणी पर लक्षद्वीप के लोकसभा सांसद मोहम्मद फैजल ने कहा कि कुछ भी बोलने से पहले दो बार सोचें. फैजल ने पीटीआई से बात करते हुए कहा, ‘‘माननीय प्रधानमंत्री की लक्षद्वीप के पर्यटन को लेकर की गई टिप्पणी पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला था. मालदीव के उप मंत्रियों की गई टिप्पणी अवांछित और बेतुकी थीं. ’’

4.  मालशा शरीफ, मरियम शिउना और अब्दुल्ला महज़ूम माजिद ने पीएम मोदी के लक्षद्वीप की फोटो शेयर करने को लेकर टिप्पणी की थी. तीनों ने कहा था कि पीएम मोदी ऐसा लक्षद्वीप को मालदीव के वैकल्पिक पर्यटन स्थल के रूप में पेश करने की एक कोशिश करने के लिए कर रहे हैं.

5. भारत से विवाद के बीच मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू चीन की राजकीय यात्रा पर गए हैं. यहां मुइज्जू राष्ट्रपति शी चिनफिंग से द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा करेंगे. मोहम्मद मुइज्जू को चीन का करीबी माना जाता है.

6. कांग्रेस ने कहा कि मालदीव और चीन के रिश्ते भारत के लिए चिंता की बात है. कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा, ” मालदीव हमेशा भारत को चीन के ऊपर तरजीह देता रहा है. अब, लेकिन मालदीव को चीन को प्राथमिकता दे रहा है.”

7. विवाद के बीच ईज़माईट्रिप ने मालदीव के लिए सभी फ्लाइट बुकिंग पर रोक लगा दी है.  ईज़माईट्रिप के सीईओ निशांत पिट्टी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, “लक्षद्वीप का पानी और बीच (समुद्र तट) मालद्वीव/सेशल्स जैसे ही अच्छे हैं. हम ईज़माईट्रिप पर इस बेहद खूबसूरत पर्यटन स्थल को बढ़ावा देने के लिए खास पेशकश लेकर आएंगे जहां हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हाल में गए थे.”

8. टूर ऑपरेटरों के संगठन इंडियन एसोसिएशन ऑफ टूर ऑपरेटर्स (आईएटीओ) ने कहा कि मालदीव की यात्रा के लिए कोई नई पूछताछ की नहीं जा रही. आईएटीओ के अध्यक्ष राजीव मेहरा ने कहा, ”भारतीय पर्यटकों की ओर से मालदीव के लिए कोई नई पूछताछ नहीं आ रही है.”

9. मालदीव की यात्रा करने वालों में पूरी दुनिया में भारत के लोग सबसे ज्यादा है. मालदीव के पर्यटन मंत्रालय के मुताबिक, 2023 में 2.03 लाख से अधिक भारतीयों ने मालदीव की यात्रा की.

10. पीएम मोदी लक्षद्वीप कई परियोजनाओं का उद्घाटन करने के लिए हाल ही में गए थे. इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर फोटो शेयर कर बताया था कि उन्होंने यात्रा के दौरान स्नॉर्कलिंग का लुत्फ उठाया.  उन्होंने लिखा, ‘‘जो लोग रोमांचकारी अनुभव लेना चाहते हैं, लक्षद्वीप उनकी लिस्ट में जरूर होना चाहिए.’’

BJP: विधानसभा के बाद अब लोकसभा चुनावों की तैयारी में है भाजपा, देशभर में महिलाओं को जोड़ने का अभियान तेज.

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आगामी लोकसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने महिलाओं को जोड़ने का अभियान तेज कर दिया है। भाजपा महिला मोर्चा ने मंगलवार को इस मुद्दे को लेकर मुख्यालय में एक बैठक की। इसमें भाजपा महामंत्री तरुण चुग, केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर और राष्ट्रीय सचिव विजया राहतकर शामिल हुए।

नए सदस्यों को जोड़ने का काम-
गौरतलब है, हाल के विधानसभा चुनावों में पार्टी को महिलाओं का अच्छा-खासा समर्थन मिला था। खासतौर पर मध्य प्रदेश में महिलाओं ने जिस तरह से बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया, उसके नतीजे भी देखने को मिले। यही वजह है कि अब पार्टी लोकसभा चुनाव में देश भर में महिलाओं को जोड़ने के अभियान पर विस्तारपूर्वक रणनीति बनानी शुरू कर दी है। भाजपा महिला मोर्चा को देशभर में सेल्फ हेल्प ग्रुप के साथ संपर्क करने और अलग-अलग योजनाओं के जरिए नए सदस्यों को जोड़ने का काम दिया गया है।

पीएम भी होंगे शामिल-

 
बैठक में महिलाओं के स्व-सहायता समूहों को सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं और कार्यक्रमों से अवगत कराने की रणनीति बनाई जा रही है। इसके बाद भाजपा महिला मोर्चा के एक बड़े कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल होंगे। 


छह जनवरी को हुई बैठक- 
इससे पहले, पार्टी सूत्रों ने शनिवार को बताया था कि छह जनवरी को भाजपा ने अपने सभी पार्टी मोर्चों की बैठक की थी और हाल में किए गए कार्यों की समीक्षा की। भाजपा महासचिव बीएल संतोष की अध्यक्षता में बैठक हुई थी। इस दौरान, वरिष्ठ नेतृत्व ने यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि जनता तक पहुंचने का प्रयास किया जाएं। बैठक में सभी भाजपा मोर्चा के अध्यक्ष, मोर्चा प्रभारी, वरिष्ठ पदाधिकारी आदि उपस्थित थे। 

संगठन को पहले से अधिक मजबूत बनाने पर चर्चा- 
सूत्रों ने बताया था कि संगठन को पहले से अधिक मजबूत बनाने पर चर्चा की गई। इसके अलावा बैठक में सभी मोर्चों के राष्ट्रीय अध्यक्षों को निर्देश दिया गया था कि वे ज्यादा से ज्यादा सम्मेलन करें और अपनी जाति के लोगों से ज्यादा से ज्यादा संपर्क बनाएं। वहीं, गांवों का दौरा करने, सम्मेलन आयोजित करने, लाभार्थियों से संपर्क करने, सामुदायिक बैठकें आयोजित करने आदि पर चर्चा की गई थी।

Bilkis Bano: बिलकिस बानो मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों की सजा माफी पर लगाई रोक, राहुल गांधी बोले- न्याय की जीत.

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गुजरात सरकार द्वारा बिलकिस बानो मामले में 11 दोषियों की सजा में छूट देने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया हैं। मामले में एक गवाह ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि बानो को वास्तव में आज न्याय मिला है। मैं इस मामले में गवाहों में से एक हूं। इन 11 दोषियों को महाराष्ट्र की एक अदालत ने सजा सुनाई थी। गुजरात सरकार का उन्हें रिहा करने का फैसला गलत था, इसलिए हमने इसे अदालत में चुनौती दी थी। फैसले के बाद दाहोद जिले के देवगढ़ बारिया में बिलकिस बानो के रिश्तेदारों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद खुशी जाहिर करते हुए जमकर आतिशबाजी की हैं।

वास्तव में आज मिला पूर्ण न्याय-अब्दुल रजाक-
देवगढ़ बारिया शहर के रहने वाले मामले के गवाहों में से एक अब्दुल रजाक मंसूरी ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि मुझे खुशी है कि सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार के फैसले को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने दोषियों को आत्मसमर्पण करने के लिए कहा हैं। मुझे लगता है कि आज हमें न्याय मिला हैं। गौरतलब है कि गोधरा में 2002 में हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान बिलकिस बानो 21 साल की थीं औ पांच माह की गर्भवती भी थी। उस दौरान आरोपियों द्वारा उनके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया था। इस दौरान आरोपियों ने उनकी तीन साल की बेटी और परिवार के सात लोगों की हत्या कर दी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने पलटा गुजरात सरकार का फैसला-दरअसल, गुजरात सरकार ने 11 दोषियों को सजा में छूट देकर 15 अगस्त 2022 को रिहा कर दिया था। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने सजा में दी गई छूट को सोमवार को रद्द कर दिया और दोषियों को दो सप्ताह के भीतर जेल अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया। न्यायालय ने कहा कि गुजरात सरकार को छूट का आदेश पारित करने का अधिकार नहीं था।

राहुल गांधी बोले- फैसले ने बताया कौन देता है अपराधियों को पनाह-

इसी बीच, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने एक बार फिर दिखा दिया कि अपराधियों को पनाह कौन देता हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखते हुए राहुल गांधी ने कहा कि बिलकिस बानो का अथक संघर्ष अहंकारी भाजपा सरकार के खिलाफ न्याय की जीत का प्रतीक है। चुनावी लाभ के लिए न्याय की हत्या करने की प्रवृत्ति लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरनाक हैं।

Old Pension: पुरानी पेंशन की बहाली को लेकर केंद्र और राज्य के कर्मचारियों ने देशभर में शुरू की रिले हंगर स्ट्राइक.

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केंद्र एवं राज्य सरकारों के कर्मचारी संगठन, पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की तैयारी कर रहे हैं। इससे पहले सरकार को चेताने के लिए देशभर के सरकारी कर्मचारियों ने आठ जनवरी से 11 जनवरी तक ‘रिले हंगर स्ट्राइक’ शुरू की है। ओपीएस के लिए गठित नेशनल ज्वाइंट काउंसिल ऑफ एक्शन (एनजेसीए) के संयोजक शिव गोपाल मिश्रा सहित कई एसोसिएशनों के पदाधिकारियों ने सोमवार को दिल्ली के जंतर मंतर पर रिले हंगर स्ट्राइक में हिस्सा लिया। एआईपीईएफ और कन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एंप्लाइज एंड वर्कर्स सहित विभिन्न फेडरेशन और एसोसिएशन इस हंगर स्ट्राइक में भाग ले रही हैं।

इन विभागों में हुआ था स्ट्राइक बैलेट-

सरकारी कर्मचारी, पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर विभिन्न चरणों में आंदोलन कर रहे हैं। इसी के तहत रामलीला मैदान में रैली और धरने प्रदर्शन हुए हैं। कर्मचारियों ने सरकार को चेताया है कि इस मुद्दे पर देश में अनिश्चितकालीन हड़ताल हो सकती है। इस हड़ताल के लिए देश के दो बड़े कर्मचारी संगठन, रेलवे और रक्षा (सिविल) ने अपनी सहमति दी है। स्ट्राइक बैलेट में रेलवे के 11 लाख कर्मियों में से 96 फीसदी कर्मचारी ओपीएस लागू न करने की स्थिति में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए तैयार हैं। इसके अलावा रक्षा विभाग (सिविल) के चार लाख कर्मियों में से 97 फीसदी कर्मी, हड़ताल के पक्ष में है। कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों का कहना है कि जनवरी में हड़ताल की तिथि की घोषणा की जाएगी। इससे पहले देशभर के सरकार कर्मचारी, ‘रिले हंगर स्ट्राइक’ पर बैठेंगे। यह स्ट्राइक सरकार को चेताने के लिए है।

जल्द शुरू हो सकती है अनिश्चितकालीन हड़ताल-

एनजेसीए के पदाधिकारियों का कहना है, सरकारी कार्यालयों और प्रतिष्ठानों में बहुत जल्द अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू हो सकती है। इस हड़ताल की स्थिति में रेल थम जाएंगी और रक्षा क्षेत्र के उद्योगों में कामकाज बंद हो जाएगा। इसके चलते केंद्र में ही नहीं, बल्कि विभिन्न राज्यों में भी सरकारी कामकाज प्रभावित होगा। केंद्र और राज्य सरकार के विभागों, संगठनों एवं प्रतिष्ठानों के सामने आठ जनवरी से 11 जनवरी तक हो रही ‘रिले हंगर स्ट्राइक’, अनिश्चितकालीन हड़ताल का ही पहला चरण है। विभिन्न कर्मचारी संगठन, भूखे रह कर सरकार से ‘पुरानी पेंशन बहाली’ की मांग करेंगे। रिले हंगर स्ट्राइक में एक निर्धारित अवधि के बाद कर्मियों की दूसरी टोली, भूख हड़ताल स्थल पर पहुंचेगी। कर्मचारी संगठनों की एक ही मांग है, गारंटीकृत पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली। केंद्र सरकार ने इस बाबत एक कमेटी का गठन किया है। हालांकि उसमें ओपीएस का कहीं भी जिक्र नहीं है। कमेटी, केवल एनपीएस में सुधार को लेकर अपनी रिपोर्ट देगी। पिछले संसद सत्र में लोकसभा सदस्य नव कुमार सरनीया, दीपक बैज और कृपाल बालाजी तुमाने द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया था कि ओपीएस बहाली को लेकर केंद्र सरकार के विचाराधीन कोई प्रस्ताव नहीं है।

गारंटी कृत पुरानी पेंशन योजना बहाल करनी होगी-

शिव गोपाल मिश्रा के मुताबिक, ओपीएस पर केंद्र और सरकार के कर्मचारी लगातार अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। कर्मचारी संगठनों ने रामलीला मैदान में रैलियां की हैं। सरकार के समक्ष कई प्लेटफॉर्म के माध्यम से ओपीएस की मांग उठाई गई है। हमने सरकार को स्पष्ट तौर पर बता दिया है कि कर्मचारियों को ओपीएस के अलावा कुछ भी मंजूर नहीं है। सरकार को एनपीएस खत्म करना होगा और गारंटीकृत पुरानी पेंशन योजना बहाल करनी पड़ेगी। ओपीएस एक गैर राजनीतिक मुद्दा है। केंद्र या राज्यों में सरकार चाहे जिस भी दल की हो, हमारा आंदोलन जारी रहेगा। रेलवे के 11 लाख कर्मियों में से 96 फीसदी कर्मचारी ओपीएस लागू न करने की स्थिति में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए तैयार हैं। ज्वाइंट फोरम में केंद्रीय संगठनों के अलावा राज्यों के भी 36 संगठन भी शामिल हैं।

चुनाव में बड़े उलटफेर का दावा-

ओपीएस के लिए गठित नेशनल ज्वाइंट काउंसिल ऑफ एक्शन (एनजेसीए) की संचालन समिति के राष्ट्रीय संयोजक एवं स्टाफ साइड की राष्ट्रीय परिषद ‘जेसीएम’ के सचिव शिवगोपाल मिश्रा के मुताबिक, लोकसभा चुनाव से पहले पुरानी पेंशन लागू नहीं होती है, तो भाजपा को उसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। कर्मियों, पेंशनरों और उनके रिश्तेदारों को मिलाकर यह संख्या दस करोड़ के पार चली जाती है। चुनाव में बड़ा उलटफेर करने के लिए यह संख्या निर्णायक है।

पीएफआरडीए में संशोधन के बिना ओपीएस संभव नहीं-

कन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स के महासचिव एसबी यादव ने कहा, केंद्र सरकार को पुरानी पेंशन योजना लागू करनी होगी। एनपीएस का पैसा, ‘पेंशन फंड एंड रेगुलेटरी अथारिटी’ (पीएफआरडीए) के पास जमा है। नई पेंशन योजना ‘एनपीएस’ के अंतर्गत केंद्रीय मद में जमा यह पैसा राज्यों को नहीं दिया जा सकता। वह पैसा केवल उन कर्मचारियों के पास जाएगा, जो इसका योगदान कर रहे हैं। ओपीएस लागू करने से पहले पीएफआरडीए में संशोधन करना पड़ेगा। कन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स ने सरकार के समक्ष बड़े स्तर पर यह मांग उठाई है। इस बाबत नवंबर में रामलीला मैदान में कन्फेडरेशन ने एक विशाल रैली भी आयोजित की थी।

18 साल बाद रिटायर हुए कर्मी को मिली इतनी पेंशन-

शिव गोपाल मिश्रा का कहना है कि एनपीएस में कर्मियों जो पेंशन मिल रही है, उतनी तो बुढ़ापा पेंशन ही है। एनपीएस स्कीम में शामिल कर्मी, 18 साल बाद रिटायर हो रहे हैं, उन्हें क्या मिला है। एक कर्मी को एनपीएस में 2417 रुपये मासिक पेंशन मिली है, दूसरे को 2506 रुपये और तीसरे कर्मी को 4900 रुपये प्रतिमाह की पेंशन मिली है। अगर यही कर्मचारी पुरानी पेंशन व्यवस्था के दायरे में होते तो उन्हें प्रतिमाह क्रमश: 15250 रुपये, 17150 रुपये और 28450 रुपये मिलते। एनपीएस में कर्मियों द्वारा हर माह अपने वेतन का दस फीसदी शेयर डालने के बाद भी उन्हें रिटायरमेंट पर मामूली सी पेंशन मिलती है।

Arvind Kejriwal: दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल की गिरफ्तारी की आशंका, क्या अयोध्या के जश्न में बनेगा ऐसा संयोग.

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एक तरफ तो राम मंदिर को लेकर लोगों के बीच उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है तो वहीं दूसरी ओर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी को लेकर लगातार संशय बढ़ता जा रहा है दिल्ली की नई शराब नीति के कथित घोटाले में दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी को लेकर संशय बढ़ता जा रहा है। भाजपा से जुड़े नेताओं और जांच एजेंसी के सूत्रों की मानें, तो अयोध्या में राम के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान केजरीवाल की गिरफ्तारी संभव है।

वजह, उस वक्त दिल्ली सहित देश के दूसरे क्षेत्रों में राम मंदिर को लेकर उत्साह का माहौल रहेगा। खासतौर पर उत्तर भारत में भाजपा, इस कार्यक्रम को सियासत में फायदे के तौर पर देख रही है। यही वजह है कि भाजपा ने प्राण प्रतिष्ठा समारोह को देश विदेश तक पहुंचा दिया है। इसी दौरान दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल गिरफ्तार किए जा सकते हैं।

ED ने दिल्ली सीएम केजरीवाल को अब तक भेजे 3 समन- 

सूत्रों का कहना है कि राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान केजरीवाल की गिरफ्तारी संभव है। अभी तक केजरीवाल को ईडी ने तीन समन भेजे हैं। केजरीवाल, किसी भी समन पर जांच एजेंसी के समक्ष प्रस्तुत नहीं हुए हैं। अब ऐसी संभावना जताई जा रही है कि जांच एजेंसी, किसी भी वक्त केजरीवाल को गिरफ्तार कर सकती है। अगर अब केजरीवाल की गिरफ्तारी होती है, तो आम आदमी पार्टी, इसका बड़ा पॉलिटिकल माइलेज ले सकती है। खासतौर पर, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब व उत्तर प्रदेश में आप का बड़ा विरोध प्रदर्शन देखने को मिल सकता है। इससे राम मंदिर का प्राण प्रतिष्ठा समारोह प्रभावित हो सकता है। राजनीतिक प्रदर्शन से रोड जाम जैसी स्थिति के पैदा होने के आसार हैं। ट्रेनों की आवाजाही पर भी असर पड़ सकता है। दूसरी तरफ भाजपा, देश एवं विदेश से लोगों को अयोध्या लाने की तैयारी कर रही है। ऐसे में केजरीवाल की गिरफ्तारी 22 जनवरी के आसपास संभव है।

गुरुवार को दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा, देश में खुलेआम गुंडागर्दी चल रही है। किसी को भी पकड़कर जेल डाल दो। बतौर केजरीवाल, मेरी सबसे बड़ी ताकत ईमानदारी है। ये झूठे केस लगाकर मेरी ईमानदारी पर चोट करना चाहते हैं। मेरे वकील ने बताया कि ये सभी समन गैरकानूनी हैं, ये गैरकानूनी क्यों हैं, इनका जवाब मैंने ईडी को दिया है। अगर ये सही समन भेजते हैं, तो मैं जांच में सहयोग करूंगा। पहले भी सीबीआई जांच में सहयोग दिया है। भाजपा का मकसद सही जांच करना नहीं है। इसके पीछे मुझे, लोकसभा चुनाव में प्रचार करने से रोकना है। अरविंद केजरीवाल लोकसभा चुनाव के मद्देनजर 6, 7 व 8 जनवरी को गुजरात दौरे पर रहेंगे। वे आप कार्यकर्ता सम्मलेन और जनसभा को संबोधित करेंगे। जेल में बंद आप विधायक चैतर बसावा से भी केजरीवाल से मिलने का कार्यक्रम है।

क्या कहा अरविंद केजरीवाल ने ? 
केजरीवाल ने कहा, ईडी के समन गैरकानूनी हैं। जो भी नेता भाजपा में शामिल नहीं होता, उसे ये लोग ‘भाजपा’ जेल में भेज देते हैं। मनीष सिसोदिया और संजय सिंह को भी इन्होंने इसलिए जेल में डाला है। अगर वे  भाजपा से हाथ मिला लेते, तो जेल से बाहर होते। जो भी व्यक्ति इनसे हाथ मिला लेता है, वह ईमानदार हो जाता है। देश में बहुत खतरनाक खेल चल रहा है। मेरे खून का हर कतरा देश के लिए है। अरविंद केजरीवाल ने कहा, आप लोग दो साल से शराब घोटाले का नाम सुन रहे हैं। जांच एजेंसियों को इस घोटाले में एक भी पैसा नहीं मिला है। वजह, ऐसा कोई घोटाला

Rajasthan Cabinet: राजस्थान में मंत्रिमंडल का विस्तार, किरोड़ी लाल मीणा और राज्यवर्धन राठौड़ समेत 22 विधायक बने मंत्री.

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एक लंबे इंतजार के बाद सीएम भजनलाल शर्मा के कैबिनेट का विस्तार हो गया है। इस मंत्रिमंडल में 22 भाजपा विधायकों ने राजस्थान सरकार के मंत्री के रूप में शपथ ली। 15 दिसंबर को भजनलाल शर्मा ने बतौर मुख्यमंत्री और दीया कुमारी और प्रेमचंद बैरवा ने बतौर उपमुख्यमंत्री शपथ ग्रहण की थी। उसके बाद से ही राजस्थान में मंत्रिमंडल विस्तार का इंतजार किया जा रहा था। 
 

राजस्थान में सीएम भजनलाल शर्मा के मंत्रिमंडल का विस्तार हो गया है। मंत्रिमंडल में पहली बार और दूसरी बार चुने गए विधायकों को शामिल किया गया है।

 

22 विधायकों ने ली शपथ-

शनिवार को यहां राजभवन में एक समारोह के दौरान 22 भाजपा विधायकों ने राजस्थान सरकार के मंत्री के रूप में शपथ ली। इस दौरान 12 ने कैबिनेट मंत्री, पांच ने राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और पांच ने राज्य मंत्री के रूप में शपथ ली। समारोह के दौरान राज्यपाल कलराज मिश्र ने विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई।

किरोड़ी लाल मीणा समेत 12 मंत्रियों ने ली शपथ- 

राजस्थान मंत्रिमंडल में किरोड़ी लाल मीणा, मदन दिलावर, राज्यवर्धन सिंह राठौड़, गजेंद्र सिंह खींवसर, बाबूलाल खराड़ी, जोगाराम पटेल, सुरेश सिंह रावत, अविनाश गहलोत, जोराराम कुमावत, हेमंत मीना, कन्हैया लाल चौधरी और सुमित गोदारा को कैबिनेट का हिस्सा बनाया गया है। वहीं, श्रीकरणपुर से बीजेपी प्रत्याशी रहे सुरेंद्रपाल टीटी विधायक बनने से पहले मंत्री बनाए गए हैं।

इन विधायकों ने ली शपथ-

सिरोही विधानसभा सीट से जीत दर्ज करने वाले ओटाराम देवासी ने राज्यमंत्री के रूप में शपथ ली। इनके साथ, मंजू बाघमार, विजय सिंह चौधरी, केके विश्नोई और जवाहर सिंह बेढम ने राज्यमंत्री के तौर पर ली शपथ।

संजय शर्मा, गौतम कुमार, झाबर सिंह खर्रा, सुरेंद्र पाल सिंह और हीरालाल नागर ने राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में शपथ ली।

Priyanka ED Case: आखिर ED की चार्जशीट में प्रियंका गांधी का नाम क्यों, पढ़ें मनी लॉन्ड्रिंग को लेकर क्या है पूरा मामला.

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Priyanka Gandhi ED Case- कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी बड़ी मुसीबत में फंसती दिख रहीं है। दरअसल, ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में प्रियंका गांधी का नाम पहली बार चार्जशीट में दाखिल किया है। हालांकि, प्रियंका को आरोपी नहीं बनाया गया है। उनका नाम आरोपी से जुड़े होने के तौर पर शामिल किया गया है।

जिससे जमीन खरीदी, उसी को बेच दी-

ईडी की चार्जशीट के अनुसार, ये मामला जमीन खरीदने और बेचने से जुड़ा है। मामले में भगोड़े हथियार डीलर संजय भंडारी के सहयोगी सीसी थम्पी ने हरियाणा के फरीदाबाद में रियल एस्टेट एजेंट एचएल पाहवा से 2005 से 2008 तक कई बार जमीनें खरीदीं।उसके बाद प्रियंका और रॉबर्ट वाड्रा ने 2006 में पाहवा से अमीरपुर गांव में 5 एकड़ (40 कनाल) कृषि जमीन खरीदी और उसी को पाहवा को फरवरी 2010 में बेच दिया। आरोप है कि ये सब पैसे को इधर-उधर और मनी लॉन्ड्रिंग करने के लिए किया गया।

ये भी लगे आरोप-

आरोप यह भी लगे हैं कि इस दौरान एचएल पाहवा को भूमि अधिग्रहण के लिए पैसे भी मिलते रहे। ये भी आरोप है कि रॉबर्ट ने पाहवा को पूरे पैसे भी नहीं दिए। 

ईडी का कहना है कि थम्पी के रिश्ते काफी लंबे समय से वाड्रा से है और दोनों कई काम मिलकर करते हैं।

 

सीसी थम्पी पर संजय भंडारी का साथ देने का आरोप-

सीसी थम्पी पर हथियार डीलर संजय भंडारी का साथ देने और ब्रिटेन में कालाधन छिपाने में मदद करने का आरोप है।