अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर राजभवन स्थित लोक भवन में महिला कल्याण उत्कृष्ट सेवा सम्मान एवं ‘मेरी पहचान–2026’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह और महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मचारियों, अधिकारियों और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को सम्मानित किया गया।
उत्तरायणी कौथिक महोत्स में लोक कलाकार सम्मनित
देहरादून- मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी परेड ग्राउंड में सेवा संकल्प फाउंडेशन द्वारा आयोजित चार दिवसीय उत्तरायणी कौथिक महोत्सव के समापन कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित लोक कलाकारों, साहित्यकारों, कला प्रेमियों एवं बड़ी संख्या में मौजूद लोगों का स्वागत किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सेवा संकल्प फाउंडेशन द्वारा आयोजित यह महोत्सव उत्तराखंड की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने का सराहनीय प्रयास है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से लोक संस्कृति को एक सूत्र में पिरोकर नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य हो रहा है।
महोत्सव के सफल आयोजन के लिए उन्होंने सेवा संकल्प फाउंडेशन, संस्थापक गीता धामी तथा आयोजन समिति को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन राज्य की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करते हैं तथा लोक कलाओं, पारंपरिक वेशभूषा, हस्तशिल्प और कारीगरी को समझने का अवसर देते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जागर, बेड़ा, मांगल, खुदेड़, छोपाटी जैसे लोकगीत और छोलिया, पांडव तथा झोड़ा-छपेली जैसे लोकनृत्य उत्तराखंड की सांस्कृतिक आत्मा हैं, जिनका संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने महोत्सव में लगे स्टॉलों के माध्यम से पारंपरिक हस्तशिल्प, जैविक उत्पादों और उत्तराखंडी व्यंजनों के प्रदर्शन की सराहना की।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘वोकल फॉर लोकल’, ‘मेक इन इंडिया’, ‘मेड इन इंडिया’ और ‘स्टार्टअप इंडिया’ जैसी योजनाओं के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कार्य हो रहा है। इसी क्रम में राज्य सरकार ने ‘एक जनपद, दो उत्पाद’ योजना और ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड के जरिए स्थानीय उत्पादों को पहचान दिलाई है।
इसके अलावा स्टेट मिलेट मिशन, फार्म मशीनरी बैंक, एप्पल मिशन, कीवी मिशन, नई पर्यटन नीति, फिल्म नीति, होम स्टे, वेड इन उत्तराखंड और सौर स्वरोजगार योजना से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पलायन निवारण आयोग की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत वृद्धि हुई है।
किसानों की आय बढ़ाने में उत्तराखंड देश में प्रथम स्थान पर रहा है और युवाओं को रोजगार देने में भी राज्य अग्रणी बना है। उन्होंने बताया कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में राज्य को ‘अचीवर्स’ तथा स्टार्टअप रैंकिंग में ‘लीडर्स’ श्रेणी प्राप्त हुई है।
नीति आयोग के सतत विकास लक्ष्य सूचकांक 2023-24 में भी उत्तराखंड ने देश में प्रथम स्थान हासिल किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन क्षेत्र में राज्य को बेस्ट वाइल्डलाइफ और बेस्ट एडवेंचर डेस्टिनेशन के राष्ट्रीय पुरस्कार मिले हैं।
राष्ट्रीय पर्यटन पुरस्कार 2024 में जाखोल, हर्षिल, गुंजी और सूपी गांवों को सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव घोषित किया गया है। वर्ल्ड रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म अवार्ड में भी राज्य को ‘वन टू वॉच’ सम्मान मिला है। मत्स्य विकास में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए वर्ष 2024 में राज्य को सर्वश्रेष्ठ राज्य का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला तथा अंतरराष्ट्रीय विमानन सम्मेलन में ‘बेस्ट स्टेट फॉर प्रोमोशन ऑफ एविएशन इकोसिस्टम’ सम्मान प्राप्त हुआ।
उन्होंने कहा कि सरकार लोक कलाकारों के संरक्षण के लिए लगातार कार्य कर रही है। कोरोना काल में लगभग 3200 कलाकारों को आर्थिक सहायता दी गई तथा 60 वर्ष से अधिक आयु के लोक कलाकारों को पेंशन दी जा रही है। गुरु-शिष्य परंपरा के तहत प्रशिक्षण कार्यशालाएं भी आयोजित की जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार लोक साहित्य के प्रकाशन, आर्ट गैलरी स्थापना तथा स्थानीय भाषाओं और बोलियों के संरक्षण पर विशेष ध्यान दे रही है।
सेवा संकल्प फाउंडेशन की फाउंडर ट्रस्टी गीता धामी ने कहा कि चार दिवसीय महोत्सव के माध्यम से उत्तराखंड की लोक संस्कृति, पारंपरिक उत्पाद और जीवनशैली को एक मंच पर प्रस्तुत किया गया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन पूरे राज्य की सांस्कृतिक झलक प्रस्तुत करता है और युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का प्रयास है।
उन्होंने स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की अपील करते हुए कहा कि इससे राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और आत्मनिर्भर उत्तराखंड का लक्ष्य पूरा होगा।
कार्यक्रम में पूर्व राज्यपाल एवं पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड अध्यक्ष प्रसून जोशी, राज्यसभा सांसद कल्पना सैनी, विधायक खजान दास, दुर्गेश्वर लाल, अनिल नौटियाल, भोपाल राम टम्टा, सुरेश गढ़िया सहित अनेक जनप्रतिनिधि और गणमान्य लोग मौजूद रहे।
उत्तराखंड कैबिनेट की बैठक आज संपन्न हुई। इस दौरान बैठक में 11 प्रस्ताव पर मुहर लगी। वहीं, उपनल कर्मचारियों को समान कार्य के लिए समान वेतन का मामला मंत्रिमंडल उपसमिति को सौंपा गया है।
नर्सिंग एकता मंच के नेतृत्व में सैकड़ों बेराजगार मुख्यमंत्री आवास कूच करने पहुंचे। प्रदर्शन कर रहे बेराजगारों को समर्थन देने कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत भी पहुंचे। कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत ने कहा कि आप प्रदर्शन कर रहे थे उस दिन भी आपको गिरफ्तार किया गया। आप अपनी उम्मीद अपनी मांग को लेकर जिस तरह संघर्ष कर रहे है। लोकतंत्र में जब-जब संघर्ष होता है और एकता होती है उसका नतीजा हमेशा सकारात्मक होता है।
सरकार के उपनल कर्मचारियों को समान काम के लिए समान वेतन दिए जाने के फैसले से पहले चरण में 5500 कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा। प्रदेश के उपनल कर्मचारी नियमित करने एवं समान काम के लिए समान वेतन दिए जाने की मांग कर रहे थे।
लंबित मांगों के लिए कर्मचारी पिछले 16 दिन से हड़ताल पर थे, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर कर्मचारियों को समान काम के लिए समान वेतन दिए जाने का आदेश जारी हुआ। सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी के मुताबिक पहले चरण में प्रदेश के करीब 5500 उपनल कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा। हालांकि इसके बाद सभी कर्मचारियों को चरणबद्ध तरीके से समान काम के लिए समान वेतन का लाभ दिया जाना है।
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों से हो रहे पलायन के बीच प्रवासियों के गांव व घर वापसी करने में सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। रिवर्स पलायन करने वालों में 25 से 35 आयु वर्ग के 43 प्रतिशत युवा प्रवासी वापस अपने गांव लौटे हैं।
अब कृषि, पशुपालन, पर्यटन, स्वरोजगार अपनाकर गांव की मिट्टी में जड़ें जमा रहे हैं। पलायन निवारण आयोग की रिवर्स पलायन की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार गांव से पलायन करने वाले कुल 6282 प्रवासी अपने गांव लौटे हैं। इसमें सबसे अधिक 43% 25 से 35 आयु वर्ग के प्रवासी है।
उत्तराखंड में देवभूमि परिवार योजना लागू होगी। देवभूमि परिवार योजना के तहत उत्तराखंड में रह रहे परिवारों की आईडी बनेगी। प्रदेश कैबिनेट की हुई बैठक में आज यह फैसला लिया गया। इसके अलावा 12 प्रस्तावों पर मुहर लगी।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। बैठक में 12 प्रस्तावों को मंजूरी मिली है। उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम कर्मचारियों के नियमितीकरण और वेतन के मामले में मंत्रिमंडल की उप समिति गठित होगी, जो दो महीने के भीतर देगी अपनी रिपोट सौंपेगी।
उपनल से विदेशों में भी मिलेगी नौकरी
निर्णय लिया गया कि उपनल के माध्यम से अब विदेशों में भी नौकरी मिलेगी। वहीं आपदा में मृतक आश्रितों को चार लाख के स्थान पर पांच लाख मिलेंगे। वही पक्का मकान ध्वस्त होने पर पांच लाख दिए जाएंगे।दैनिक, संविदा और तदर्थ कर्मचारियों के मामले में मंत्रिमंडल की उप समिति गठित होगी, जो इनके नियमितीकरण को लेकर कट ऑफ डेट तय करेगी। प्रदेश में देवभूमि परिवार योजना लागू होगी। देवभूमि परिवार योजना के तहत उत्तराखंड में रह रहे परिवारों की आईडी बनेगी।
लंबित मांगों पर अमल न होने से नाराज प्रदेश के उपनल कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। कर्मचारियों ने परेड ग्राउंड में धरना दिया। वहीं, कर्मचारियों की शासन में हुई वार्ता भी बेनतीजा रही। कर्मचारियों का कहना है, जब तक मांगों पर अमल नहीं होगा आंदोलन जारी रहेगा।
उपनल कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के प्रदेश संयोजक विनोद गोदियाल ने कहा, प्रदेश में कर्मचारी हितों की अनदेखी की जा रही है। हाईकोर्ट के वर्ष 2018 के आदेश के बाद भी कर्मचारियों को न तो नियमित किया गया न ही उन्हें समान कार्य के लिए समान वेतन दिया जा रहा है। उपनल के माध्यम से विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मचारियों की सेवाएं भी प्रभावित की गईं। इससे नाराज कर्मचारियों ने आवश्यक सेवाएं भी ठप कर दी। महासंघ के महामंत्री विनय प्रसाद के मुताबिक कर्मचारियों को गृह सचिव शैलेश बगौली ने वार्ता के लिए बुलाया था। वार्ता के दौरान आश्वासन दिया गया कि कर्मचारियों को समान काम के लिए समान वेतन का जल्द आदेश जारी किया जाएगा।
वहीं, कर्मचारियों के नियमितीकरण के मामले में भी शीघ्र कार्रवाई होगी, लेकिन कर्मचारियों का स्पष्ट कहना है कि बिना लिखित आश्वासन व आदेश के कर्मचारी आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे। परेड ग्राउंड में धरना देने वालों में महासंघ के प्रदेश संयोजक हरीश कोठारी, कार्यकारी अध्यक्ष महेश भट्ट, संगठन मंत्री भूपेश नेगी, महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष मीना रौठाण आदि शामिल रहे।

देर रात भी परेड ग्राउंड में धरने पर रहे कर्मचारी
प्रदेशभर से देहरादून पहुंचे उपनल कर्मचारी देर रात भी परेड ग्राउंड में धरने पर रहे। कर्मचारियों का कहना है कि शासन ने आज भी वार्ता के लिए बुलाया है।
“9 नवम्बर 2000…जब उत्तराखंड ने अलग राज्य बनने का सपना देखा था,तो उस सपने में शामिल था – विकास, पारदर्शिता, रोजगार और ईमानदारी। आज, जब राज्य अपनी रजत जयंती मना रहा है,सवाल उठता है —इन 25 सालों में उत्तराखंड ने क्या पाया, और क्या खो दिया ?”
“राज्य आंदोलन के दौरान नारा था —‘अपना राज, अपने लोग, अपनी पहचान।उम्मीद थी कि शासन गावों तक पहुंचेगा और भ्रष्टाचार से मुक्त व्यवस्था बनेगी, लेकिन दो दशक बाद हकीकत कुछ और ही बयान कर रही है।बेरोज़गारी, पलायन और भ्रष्टाचार की जडें अब हर विभाग में फैल चुकी हैं।


पेपर लीक और बेरोज़गारों की हताशा
पेपर लीक कांड ने युवाओं के भरोसे को तोड़ दिया है। जिस युवा शक्ति को राज्य की रीड बनना था,,वही आज आज सडकों पर है,अपने हक़ और मेहनत की कीमत मांगते हुए हर कुछ महीनों में भर्ती परीक्षाओं की जााँच, रद्दीकरण,और आंदोलनों की आवाज बनकर सुनाई देती है।

कभी शांत प्रदेश कहा जाने वाला उत्तराखंड अब अपराध की खबरों से भी अछूता नहीं रहा। हत्या, लूट और दुष्कर्म जैसी वारदातें अब यहां की सुर्ख़ियों में शामिल हैं,सवाल उठता है — क्या हम वाकई उस उत्तराखंड में हैं,जिसका सपना 2000 में देखा गया था?”
विकास की रफ्तार – उप्लभ्धियाँ भी कम नहीं
इन सबके बीच, उत्तराखंड ने विकास की राह पर भी कई कदम बढ़ाए हैं। चारधाम यात्रा के तलए ऑल वेदर रोड प्रोजेक्ट,हवाई सेवाओं का विस्तार,और शिक्षा स्वास्थ्य के नए संस्थान — ये उप्लभ्धियाँ राज्य की प्रगति की तस्वीर दिखाती हैं। पर्यटन , योग, और जैविक खेती के क्षेत्र में भी उत्तराखंड ने नई पहचान बनाई है। आज राज्य का GDP 3 लाख करोड के करीब पहुंच रहा है,और प्रति व्यक्ति आय में भी बढ़ोतरी हुई है।लेकिन सवाल वही —क्या विकास का लाभ हर पहाडी गावं तक पहुंचा ?जनता का सवाल – जवाबदेहि कहां है?
जब हर कुछ सालों में एक नया घोटाला सामने आता है,जब हर भर्ती पर संदेह हो,जब युवाओं की आाँखों में विश्वास की जगह निराशा हो —तब रजत जयंती के जश्न पर ताली बजाना मुश्किल हो जाता है। सवाल है — क्या ये 25 साल जनता के लिए बदलाव लाए या सिर्फ कुर्सियों के लिए ?
निष्कर्ष – उम्मीद अब भी बाकी है
उत्तराखंड की कहानी संघर्ष से शुरू हुई थी,और उम्मीदों पर अटकी हुई है।ये राज्य युवाओं की मेहनत और पहाडों की ईमानदारी से बना है।अगर राराजनीतिक इइच्छाशक्ति ईमानदार हो,तो अगला अध्याय भरोसे और पारदर्शिता का लिखा जा सकता है। राज्य का सवाल अब भी वही है —‘क्या खोया, क्या पाया?’ जवाब आने वाले सालों में तय करेगा कि पहाड़ों का सपना अधूरा रहेगा या पूरा होगा।”
“25 साल बाद भी सवाल वही — भ्रष्टाचार बनाम विकास | उत्तराखंड @ 25”
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज नई दिल्ली में PHD चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के 120वें वार्षिक सत्र में सम्मिलित हुए,मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में उपस्थित उद्यमियों व विभिन्न औद्योगिक संस्थानों के प्रतिनिधिगणों का स्वागत करते हुए कहा कि PHD चैम्बर ने बीते 120 वर्षों में देश की आर्थिक प्रगति, औद्योगिक विकास और उद्यमशीलता की भावना को सशक्त करने में जो भूमिका निभाई है वो अतुलनीय है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हम इस महत्वपूर्ण सत्र में “भारत की एक विश्वसनीय वैश्विक साझेदार के रूप में उभरती भूमिका” और उसमें उत्तराखंड राज्य के योगदान जैसे विषय पर सार्थक विचार-विमर्श के लिए एकत्रित हुए हैं। हम सभी जानते हैं कि किसी भी देश की आर्थिक प्रगति में उद्योगों की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उद्योग न केवल रोजगार के अवसर उत्पन्न करते हैं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग के जीवन स्तर को सुधारने में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।कहा कि जब देश के उद्योगपति, उद्यमी और नीति-निर्माता एक साथ राष्ट्र उत्थान पर चिंतन और मंथन के लिए जुटते हैं, तो उसका प्रभाव केवल उद्योग जगत तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग के कल्याण और राष्ट्र के समग्र विकास का मार्ग भी प्रशस्त करता है। यह कॉन्क्लेव केवल उद्योग जगत का सम्मेलन भर नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक शक्ति, सांस्कृतिक चेतना और वैश्विक नेतृत्व की नई संभावनाओं के द्वार खोलने वाला एक सशक्त मंच है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में “रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म” की नीति ने भारत को एक नई दिशा प्रदान की है। आज भारत में न केवल निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हुआ है, बल्कि इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय जैसे क्षेत्रों में भी व्यापक परिवर्तन आया है| आदरणीय मोदी जी देश के पहले प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया और इस संकल्प को साकार करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य भी किया जा रहा है।
‘वोकल फॉर लोकल’, ‘मेक इन इंडिया’, ‘स्किल इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज ‘स्टार्टअप इंडिया’, ‘वोकल फॉर लोकल’, ‘मेक इन इंडिया’, ‘स्किल इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ जैसी पहलों के माध्यम से देश आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है। यही नहीं, आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम खड़ा करने वाला देश बन चुका है। आज हमारे स्टार्टअप्स ग्लोबल इनोवेशन में अपनी पहचान बना रहे हैं, डिजिटल इंडिया ने आम नागरिक तक तकनीक को पहुँचाया है और आत्मनिर्भर भारत अभियान ने देश को उत्पादन और विनिर्माण का हब बनाने का मार्ग प्रशस्त किया है। आज विश्व के बड़े बड़े देश ये देखकर अचंभित हैं कि भारत में सब्जी की एक छोटी सी दुकान लगाने वाली महिला भी UPI के के माध्यम से मोबाइल से पेमेंट का लेनदेन कर रही है।आज देश के 55 करोड़ से अधिक लोग बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ चुके हैं।चाहे कृषि उत्पादन हो, रक्षा का क्षेत्र हो, चिकित्सा, ऊर्जा, या विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी हो या फिर अंतरिक्ष अनुसंधान का क्षेत्र हो, भारत प्रत्येक क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनकर विकास और समृद्धि के नए-नए आयाम स्थापित कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और आने वाले समय में तीसरे स्थान पर पहुँचने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है। जो देश पहले भारत को केवल एक बड़े उपभोक्ता बाजार के रूप में देखा करते थे, आज वही देश भारत की प्रौद्योगिकी और नवाचार की क्षमता को चुनौती के रूप में देखने लगे हैं |क्योंकि भारत अब केवल सामान आयात करने वाला देश नहीं रहा, बल्कि निर्यात, विनिर्माण और तकनीकी विकास में विश्व का अग्रणी साझेदार बन रहा है। हमारी बढ़ती शक्ति से घबराकर कुछ देश हमारे बढ़ते कदमों को रोकने के असफल प्रयास भी कर रहे हैं। परन्तु भारत के उद्योग जगत के संकल्प, सामर्थ्य और नवाचार ने ये सिद्ध कर दिया है कि कोई भी शक्ति हमारे विकास के मार्ग में बाधा नहीं बन सकती। भारत के दो दिवसीय दौरे पर आए ब्रिटेन के प्रधानमंत्री श्री कीर स्टार्मर ने भी इस तथ्य को स्वीकार किया है कि “भारत 2028 तक विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभरेगा और आज के दौर में भारत वैश्विक निवेश के लिए सबसे भरोसेमंद और सुरक्षित गंतव्य बन चुका है।
उत्तराखंड में ₹3.56 लाख करोड़ के निवेश समझौते, 1 लाख करोड़ के प्रस्तावों पर काम शुरू
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्रधानमंत्री जी जहाँ एक ओर ‘स्वदेशी अपनाओ’ के मंत्र के साथ आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को सशक्त बना रहे हैं। वहीं नेक्स्ट जनरेशन जीएसटी सुधारों के माध्यम से नागरिकों को राहत प्रदान करने के साथ-साथ हमारे स्थानीय उद्योगों और व्यापारियों को भी एक नई ऊर्जा प्रदान कर रहे हैं। प्रधानमंत्री जी के दूरदर्शी नेतृत्व में हमारी सरकार भी उत्तराखंड में औद्योगिक विकास की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। हमारी सरकार ने राज्य में निवेश को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2023 में ग्लोबल इनवेस्टर्स समिट का आयोजन किया। हमारे लिए अत्यंत गर्व का विषय है कि हमें इस समिट के अंतर्गत प्राप्त हुए 3.56 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश समझौतों में से लगभग 1 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने में सफलता मिली है। हमने राज्य में निवेशक केंद्रित नीतियों, बुनियादी ढांचे, कुशल जनशक्ति और सुशासन के द्वारा स्वस्थ निवेश वातावरण की उपलब्धता सुनिश्चित की है। पहले राज्य में मैनुफ़ैक्चरिंग युनिट लगाने के लिए अलग-अलग विभागों से विभिन्न प्रकार की स्वीकृतियां लेनी पड़ती थी जिसमें बहुत समय लगता था। इस समस्या के समाधान के लिए हमने जहां एक ओर उद्योगों की लाइसेंसिंग प्रोसेस को आसान बनाते हुए सिंगल विंडो सिस्टम की व्यवस्था में सुधार किया,वहीं औद्योगिक नीति, लॉजिस्टिक नीति, स्टार्टअप नीति और MSME नीति सहित 30 से अधिक नीतियां लाकर राज्य में उद्योगों को बेहतर माहौल उपलब्ध कराने का प्रयास भी किया।इसके साथ ही, विनिर्माण क्षेत्र में बड़े उद्यमों को प्रोत्साहित करने के लिए हमारी सरकार ने राज्य में मेगा इंडस्ट्रियल पॉलिसी भी लागू की है। इसके अलावा जहां हम स्टार्टअप को इनक्यूबेशन सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 60 करोड़ रुपए की लागत से विश्वस्तरीय यू-हब की स्थापना कर रहे हैं, वहीं, उन्हें आसानी से फंड उपलब्ध कराने हेतु 200 करोड़ रुपए के वेंचर फंड की स्थापना भी की गई है। यही नहीं, राज्य में निवेश प्रोत्साहन के लिये यूके-स्पाईस नाम से निवेश प्रोत्साहन एजेंसी स्थापित कर निवेशकों को समर्पित “निवेश मित्र” की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है
उत्तराखंड में काशीपुर, सितारगंज, पंतनगर और रुद्रपुर में नए औद्योगिक पार्क और टाउनशिप विकसित
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने जहां एक ओर काशीपुर में अरोमा पार्क, सितारगंज में प्लास्टिक पार्क, काशीपुर में इलैक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग क्लस्टर, पंतनगर में मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक पार्क की स्थापना की है, वहीं, MSME क्षेत्र के उद्यमियों को प्लग एंड प्ले मॉडल पर उद्यम स्थापना हेतु SIDCUL द्वारा रुद्रपुर, सेलाकुई और हरिद्वार में कम लागत वाली फ्लैटेड फैक्ट्रियाँ भी तैयार की जा रही हैं। इतना ही नहीं, हम किच्छा फार्म में हजार एकड़ से अधिक भूमि पर एक स्मार्ट इंडस्ट्रियल टाउनशिप विकसित करने की दिशा में भी कार्य कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, हम औद्योगिक क्षेत्र में कार्य करने वाले लोगों को सुविधाजनक आवास सुलभ कराने हेतु “रेंट बेस्ड एकोमोडेशन” सुविधा भी विकसित कर रहे हैं।आज हमारी पहल “हाउस ऑफ हिमालयाज ब्रांड” राज्य के सभी आर्गेनिक उत्पादों को एक अम्ब्रेला के नीचे लाने में कारगर सिद्ध हो रही है।इसके अंतर्गत, राज्य के विभिन्न उत्पादों की जीआई टैगिंग कर विश्व स्तरीय पहचान दिलाने का कार्य किया जा रहा है। राज्य की महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा बनाए गए उत्पाद वैश्विक पहचान बना रहे हैं | हमारी सरकार राज्य में मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सीमम गवर्नेंस की अवधारणा को मूर्त रूप देने का प्रयास कर रही है। हमनें मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के माध्यम से राज्य में 10 हजार से अधिक नए उद्यमियों को लाभान्वित किया गया है। आज हम प्रदेश में 260 से अधिक व्यावसायिक सेवाओं को पूर्णतः ऑनलाइन उपलब्ध करा रहे हैं। इससे उद्यमियों को विभिन्न विभागों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं रह गई है और व्यवस्था में पारदर्शिता तथा गति दोनों सुनिश्चित हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे इन सभी प्रयासों का परिणाम है कि आज ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में उत्तराखंड को एचीवर्स तथा स्टार्टअप रैंकिंग में लीडर्स की श्रेणी प्राप्त हुई है। हमारी सख्ती और पारदर्शिता का सीधा लाभ हमारे उद्यमियों को मिल रहा है और उन्हें योजनाओं की स्वीकृति, जमीन आवंटन, औद्योगिक लाइसेंस या अन्य व्यावसायिक गतिविधियों में अब अनावश्यक बाधा का सामना नहीं करना पड़ता। हम उत्तराखंड को देश के अग्रणी “इन्वेस्टमेंट फ्रेंडली स्टेट” के रूप में स्थापित कर देश का अग्रणी राज्य बनाने के अपने “विकल्प रहित संकल्प” को पूर्ण करने हेतु निरंतर कार्य कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून में 28 से 30 नवंबर 2025 तक आपदा प्रबंधन पर विश्व शिखर सम्मेलन (WSDM) आयोजित होने वाला है, जिसमें वैश्विक नेता और विशेषज्ञ जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर चर्चा करेंगे। इस पहले WSDM प्री-समिट का उद्देश्य आपदाओं से निपटने के लिए नवाचार और सहयोग को बढ़ावा देना है।








